हे दोस्तों, अजय की आंखें टीवी पर चिपकी हुई थी। टीवी पर आ रहा था ब्रेकिंग न्यूज़। एंकर चिल्ला-चिल्ला के बोल रहा था कि वर्ल्ड वॉर 3 स्टार्ट हो चुका है। मिसाइल्स लॉन्च हो चुकी थी। बम्ब्स गिर रहे थे। मार्केट क्रैश हो रहे थे। स्क्रीन पर एक्सप्लोजन दिखाए जा रहे थे। सिटीज जल रही थी। लोग भाग रहे थे। लेकिन जिस बात ने अजय को सबसे ज्यादा टेंशन में डाल दिया था वो था स्टॉक मार्केट का क्रैश। बात यह थी कि अजय का स्टॉक पोर्टफोलियो पूरा रेड हो चुका था। हर दिन उसको लाखों में लॉसेस हो रहे थे। 2 लाख, 4 लाख, 10 लाख। उसके पिछले 10 साल की सेविंग्स की आंखों के सामने पिघलती जा रही थी। जैसे धूप में बर्फ पिघलता है वैसे ही। मार्केट में अफरातफरी मची हुई थी। लोगों का बैंक्स पे से विश्वास उठता जा रहा था। इसीलिए लोग बैंक जाकर अपने पैसे निकाल रहे थे। बट गेस व्हाट? कई घंटे लंबे लाइन लगाने के बाद भी लोगों को उनके ही पैसे निकालने नहीं दिए जा रहे थे। अजय भी घंटों लाइन में खड़ा था लेकिन उसे 10,000 से ज्यादा पैसे नहीं निकालने दिए गए। उसके खुद के पैसे दूसरी तरफ उसका रेंट ड्यू था। किसी तो महान इन्फ्लुएंसरर से उसने सीख लिया था कि हमें कभी भी अपना खुद का घर नहीं लेना चाहिए। इसलिए वह रेंट पर था। उसकी कंपनी में भी फाइनेंसियल इश्यूज चल रहे थे। इसलिए सैलरी भी होल्ड पर थी। रेंट का पैसा देना था। राशन खत्म हो गया था और लोग ऑनलाइन पैसे नहीं ले रहे थे। इन शॉर्ट अजय की हालत बहुत खराब थी। वो सोच रहा था कि कैसे वो अपने घर वालों को खाना भी खिला पाएगा। कुछ टाइम तो चीजें चल जाएगी। बट अगर यह चीज लंबे टाइम तक होती है तो क्या होगा और यही सारी चीजों के बारे में जब वो सोच रहा था तब उसे उसकी एक खास दोस्त की एक लाइन याद आई। एक लाइन जो उसे हमेशा बोलता था उसके बचपन का दोस्त साहिल वो लाइन क्या थी यह बताने से पहले मैं आपको बताना चाहूंगा आज का वीडियो आपके लिए बहुत ज्यादाेंट होने वाला है। स्पेसिफिकली अगर आप उन छह एसेट्स के बारे में जानना चाहते हो जो किसी भी फाइनेंसियल क्राइसिस को ओवरकम कर लेता है। ऐसे एसेट्स जो कैश और कई बार स्टॉक्स से भी बेटर है जो आपको बुरे टाइम में भी पैसे कमा के देगा। इनमें से कई सारे एसेट्स मेरे पास खुद भी है। इसलिए मैं जानता हूं कि इन एसेट्स की वैल्यू कितनी है और आने वाले टाइम में इन एसेट्स की वैल्यू और बहुत ज्यादा होने वाली है। इसलिए अगर आप भी आने वाले टाइम में अपनी वेल्थ बढ़ाना चाहते हो या मेंटेन रखना चाहते हो तो इस वीडियो को एंड तक जरूर देखना। बिकॉज़ जब भी क्राइसिस आता है तो लोगों को लगता है कि इसमें लोग गरीब होते हैं। बट सच तो यह है कि फाइनेंसियल क्राइसिस में वेल्थ ट्रांसफर होती है। कुछ लोगों से हटके कुछ और लोगों के पास जाती है। और यह वही लोग हैं जिनके पास ये छह एसेट्स होते हैं। और ऑब्वियसली यह चीज मैं आपको एक बहुत ही इंटरेस्टिंग स्टोरी के थ्रू बताने वाला हूं एक बुक की समरी देते हुए। सो नाउ लेट्स स्टार्ट। अजय और साहिल एक ही गांव के लड़के थे। दोनों सेम स्कूल गए थे। बचपन में खूब साथ में ही खेलते थे और साथ में ही बड़े-बड़े सपने देखते थे। अजय जो था वो थोड़ा लाउड था। कॉन्फिडेंट था। सबसे ज्यादा लोगों को वही स्मार्ट दिख के आता था। टीनएजर के टाइम से ही उसने कई सारे फाइनेंसियल वर्ड्स सीखना स्टार्ट कर दिए थे। कंपाउंडिंग, इक्विटी, मार्केट एफिशिएंसी। और यह सारी चीजें सीखने के बाद उसने साहिल को भी कन्विंस कर लिया था कि अगर हमें अमीर बनना है तो गांव छोड़ के शहर जाना पड़ेगा। शहर में ही लोग अमीर बनते हैं। नाउ साहिल जो था ना वो क्वाइट था। वो ज्यादा बोलता नहीं था। लोगों को ऑब्जर्व ज्यादा करता था। आराम से बात करता था और उसके अंदर एक आदत थी सीखने की। वो किताबें पढ़ता था और बड़े लोगों से सीखता था। उसे उसकी गांव की लाइफ बहुत पसंद थी। लेकिन फिर जब अजय ने डिसाइड किया कि हमें अमीर बनना है तो गांव छोड़कर शहर जाना पड़ेगा तो उसने उसकी बात मानी और वो दोनों गांव छोड़ के शहर चले गए। एक साल वहां पर दोनों ने हाथ पैर मारे। अजय जो था वो स्टॉक मार्केट और ये सारी चीजों में बहुत घुसता जा रहा था। लेकिन साहिल को यह सारी पेपर वाली जिंदगी पसंद नहीं आ रही थी। साहिल कई बार अजय को बोलता था कि अमीर बनने का सिर्फ यह एक रास्ता नहीं है। हम गांव में भी बहुत सी चीजें कर सकते हैं। तब अजय उसका मजाक उड़ाता और बोलता गांव से कभी तूने किसी को बिलियनर बनते हुए देखा है? और ऐसे ही वो उसका बहुत मजाक उड़ाता था। अजय जॉब करने लगा था और उन पैसों से स्टॉक्स में इन्वेस्ट करता था। जबकि साहिल को उसके गांव की ही जिंदगी बहुत अच्छी लगती थी। इसीलिए एक दिन बहस-बहस में इन दोनों का बहुत बुरा झगड़ा भी हो गया। जिस पे साहिल ने उसे वो लाइन बोली थी कि देखना बुरे वक्त में तुझे गांव ही याद आएगा। तब अजय उसके ऊपर हंसा था और बोला तू पागल है। तुझे बहुत जल्दी शहर की याद आएगी और तू यहीं पे आएगा अमीर बनने के लिए देखना। और ऐसी झगड़ा झगड़ी में साहिल वहां से फिर चले गया गांव। बस फिर उसके बाद क्या था? साल पे साल बीतते गए। अजय स्टॉक मार्केट में और ज्यादा घुसने लग गया। उसने बहुत सारे पैसे स्टॉक मार्केट में डालना चालू कर दिए। इनफैक्ट वह इतना ज्यादा स्टॉक मार्केट से ऑब्सेस्ड हो चुका था। उसने खुद का घर भी नहीं खरीदा। अपने गांव का घर भी बेच दिया। उसने अपने सारे पैसे स्टॉक मार्केट में लगा दिए। और वो ऐसा इसलिए नहीं कर रहा था क्योंकि वो बेवकूफ है। वो इसलिए कर रहा था क्योंकि उसे स्टॉक मार्केट में रिटर्न्स भी दिख रहे थे। धीरे-धीरे उसका पोर्टफोलियो ग्रो होता जा रहा था। पेपर पे वो बहुत अमीर बन चुका था। और कई बार जब वो फोन पर बात करता था तो वह साहिल को ताने भी मारा करता था कि तू कितना अमीर हो गया यह बता। अभी भी वही गांव में स्ट्रगल कर रहा है। आजा यहां पे अच्छा लगेगा। बट साहिल हमेशा उसे मना कर देता और बस ऐसे ही देखते ही देखते आ गया यह बड़ा वाला क्राइसिस जब दुनिया में बड़ी जंग छिड़ गई और उस टाइम पर मार्केट पूरी तरीके से क्रैश होने लग गया। अजय बहुत ज्यादा परेशान था। तभी उसको साहिल की यह वाली बात याद आई कि बुरे वक्त में गांव ही याद आएगा और सच में उसको याद भी आया। तब उसने भारी दिल से साहिल को फोन किया क्योंकि उसके पास और कोई चॉइस भी नहीं थी। उसने साहिल को बोला कि क्या कुछ टाइम के लिए मैं अपनी फैमिली के साथ तेरे यहां पे आ सकता हूं। अजय को लगा था कि साहिल उसका मजाक उड़ाएगा या फिर उसे नीचा दिखाएगा। बट साहिल ने खुशी-खुशी अजय को घर पे आने के लिए कहा और बोला तेरा ही घर है जितना चाहिए उतना टाइम आकर रह। इसके बाद क्या था? अजय अपनी फैमिली के साथ कुछ टाइम के लिए गांव चला गया और वहां जाके वो एक्सपेक्ट कर रहा था कि अजय की लाइफ बहुत खराब होगी। गांव वाली लाइफ ही होगी। लेकिन जब वो अजय के घर पहुंचा तो वो देख के शॉक्ड था क्योंकि अजय तो एक रईस आदमी की तरह जी रहा था। उसका एक बड़ा सा घर था जो आलीशान बंगले जैसा लग रहा था। उसके खुद के ट्रेक्टर्स थे। खूब सारा अनाज उसके घर में रखा हुआ था और कई लोग उससे आके वहां पर बिजनेस कर रहे थे। साहिल ने उन्हें अच्छे से वेलकम किया। उन्होंने थोड़ा आराम किया और फिर साहिल और अजय हमेशा की तरह बैठ के बात करने लगे। अजय एकदम रोती हुई हालत में साहिल को देख के बोला कि यार मेरे साथ ऐसा कैसे हो गया? 10 साल मैंने इतनी मेहनत करी। इस टाइम पर मैं अपनी करियर के पीक पर होना चाहिए था। बट आज मैं अपने करियर के सबसे बड़े डाउनफॉल पर आ चुका हूं। मेरे साथ ऐसा क्यों हो गया यार? तब साहिल ने कुछ देर कुछ नहीं कहा। उसने उसके कंधे पर हाथ रखा। एक स्माइल करी और बोला, "चल राउंड मार के आते हैं जैसा हम पहले चाहते थे।" उसने उसे अपने साथ गाड़ी में बैठाया और वह ट्रैवल करने लगे। तब साहिल ने उसे बताया कि देख तूने सिर्फ एक छोटी सी गलती यह कर दी कि तूने उन एसेट्स पर फोकस ही नहीं किया जो बुरे वक्त में सबसे ज्यादा काम देते हैं। पिछले कई सालों में मैंने कई सारी किताबें पढ़ी और मुझे समझ में आया कि अमीर बनने के लिए जितना हो सकता है उतना एसेट्स बनाना चाहिए। इसीलिए मैं अलग-अलग एसेट्स बनाने पर फोकस करने लग गया। गांव आने के बाद स्पेशली। इसके बाद साहिल उसे अपने खेत में लेके गया और खेत में जाकर उसने बताना चालू करा कि देख मेरे पास आज ऐसे छह एसेट्स हैं। जिसकी वजह से आज मेरे पास जितने पैसे हैं उतने पहले कभी नहीं स्पेशली क्राइसिस के टाइम पर इन छह एसेट्स ने मुझे इतने रिटर्न दिए हैं जितना रिटर्न मुझे पहले कभी नहीं मिले थे। नाउ यह सुनने के बाद अजय बहुत क्यूरियस हो गया और उसने पूछा कौन से छह एसेट्स? तब उसने सबसे पहला एसेट बताया उंगली दिखाते हुए उसके खेत की तरफ प्रोडक्टिव लैंड। साहिल ने उसे 1923 का एक किस्सा बताया। 1923 जर्मनी में जब एक बहुत बड़ा क्राइसिस आया था वेमर हाइपर इनफ्लेशन का। उस टाइम पे एक बैंकर था बर्लिन का जिसने अपनी 30 साल की सेविंग्स पूरी बैंक में रख दी थी। गवर्नमेंट बॉन्ड, सेविंग अकाउंट और कई सारी जर्मन करेंसी में पैसे थे। बट नवंबर तक उसकी पूरी लाइफ सेविंग की वैल्यू इतनी हो गई थी जितने से एक फैंसी कॉफी भी खरीदी नहीं जा सकती है। अजय को डायरेक्टली इनडायरेक्टली कहीं ना कहीं यह उसकी लाइफ से रिलेटेड लगा। साहिल ने तब उससे बोला बट उसी वक्त उस शहर के 40 मील दूर एक किसान था। उसकी जिंदगी में कुछ चेंज नहीं हुआ। उसके पास पहले भी जो जमीन थी वही जमीन थी। सेम क्रॉप्स उगा रहा था। लेकिन जब करेंसी कोलैप्स हुई तब उसका जो अनाज था उसकी वैल्यू बहुत ज्यादा बढ़ने लग गई। इतनी ज्यादा बढ़ गई कि लोग अपने बड़े-बड़े पियानो, ज्वेलरीज, फैंसी कोट्स और बहुत कुछ देने के लिए तैयार थे। सिर्फ एक गोनी आटा के लिए। सेम कंट्री, सेम क्राइसिस। लेकिन एक बैंकर जो पूरी तरीके से डिस्ट्रॉय हो गया। वहीं दूसरी तरफ एक फार्मर उस कुछ टाइम में बहुत ज्यादा रिच हो गया। डिफरेंस था उनके पास क्या एसेट्स थे। साहिल ने बताया कि यह सिर्फ एक एग्जांपल नहीं है। 2008 में जब जिंबाब्वे में भी सेम चीज हुई थी, तो वहां के फार्मर्स बहुत ज्यादा अमीर हो गए। करेंसी इतनी फास्ट कोलैप्स हुई पेपर पर जिनकी वैल्यू ट्रिलियंस में थी ऐसे नोट ले लेके लोग घूम रहे थे बट कुछ खरीद नहीं पा रहे थे जो शहर के लोग जिनके पैसे सेविंग अकाउंट में थे उनके पैसे यूजलेस हो गए लेकिन जिनके पास जमीन थी खाना था अनाज था भेड़ बकरियां थी वो लोग एक्चुअली ऐसे टाइम पर पावरफुल बने। ऐसे टाइम पे जिन लोगों के पास खाने का कंट्रोल होता है उनके पास पावर होता है। बिकॉज़ लोग पैसा नहीं खा सकते हैं। चाहे कुछ भी हो जाए लोग तीन टाइम खाना जरूर खाना चाहेंगे और इसलिए मैंने कभी अपनी जमीन नहीं बेचीं। तूने मुझे कहा था तब भी नहीं बेची। तू जब अपनी बेच रहा था जमीन तब भी नहीं बेची। अजय को यह बात सुनने के बाद अपनी बेवकूफी पे थोड़ी शर्म सी आई। साहिल ने बताया यही तो रीजन है जिसकी वजह से आज तो देख बड़े-बड़े बिलिनेयर्स लोग भी फार्मलैंड्स खरीद रहे हैं। क्योंकि पहला एसेट जो बुरे वक्त में सबसे ज्यादा काम आता है वो होती है जमीन। लेकिन ऐसी वैसी जमीन नहीं उपजाऊ जमीन जिस पे अनाज उगाया जा सकता है। जिसके अंदर मे बी पानी है। बिल गेट्स ऐसे ही बिलियंस एंड मिलियंस ऑफ डॉलर्स के जमीनें नहीं खरीद रहा। फिर वो उसे अजय को ले चले गया बाजार सोनार की दुकान में। सोनार की दुकान में पहुंचते ही उसने बताया कि दूसरा एसेट जो सबसे ज्यादा काम आता है बुरे वक्त में वो है सोना। गोल्ड इन्वेस्टमेंट नहीं है लेकिन इंश्योरेंस जैसा है। हिस्ट्री में जितनी बार भी करेंसी फेल हुई है लोगों ने अलग-अलग नई करेंसी बना दी। जैसे तुझे पता है पहले एक टाइम था जब इंडिया में कौड़ी चलती थी। खूटी कौड़ी सुना होगा तूने डायलॉग बट वो कौड़ी चेंज हो गई। पैसे आए। पैसे के बाद रुपए बने। ऐसे ही मनी कई बार अपना रूप बदलता रहता है। लेकिन जो चीज आज भी वैल्यू होल्ड करती है और हजार साल पहले भी होल्ड करती थी वो है गोल्ड। उसने एग्जांपल दिया कि फ्रेंच रेवोल्यूशन के टाइम पर गवर्नमेंट ने एक नई पेपर करेंसी ल्च करी एसिगनेट्स नाम की। शुरू में लोगों को इसके ऊपर ट्रस्ट हुआ। लोगों ने इन नोट्स को यूज़ करना चालू किया। इसके बदले कामकाज और जिंदगी बिताना चालू करी। बट 5 साल में ही उस करेंसी की जो वैल्यू थी वो 99% गिर गई। जिनके पास यह पेपर मनी था उनकी वेल्थ ऑलमोस्ट 5 साल में पूरी साफ हो गई। लेकिन जिन्होंने इन पैसे के बजाय गोल्ड ले लिया था, कन्वर्ट कर लिया था, उनकी वेल्थ पूरी तरीके से वैसे ही थी। और यह सिर्फ फ्रांस की बात ही नहीं है। आज भी तू देखेगा तो हमारे यहां पे भी गोल्ड एक्सप्लोड हो रहा है। मैंने पहले ही सोनार से जब प्राइस कम था, एक पैसा देके अपना गोल्ड संभाल के रखने बोला था। उसने उस सोने वाले से गोल्ड लिया और वहां से जाने लगा। और उसने एक और इंटरेस्टिंग फैक्ट बताया कि तुझे पता है पिछले 30 सालों में सेंट्रल बैंक्स जो हमें पेपर के नोट देते हैं वो खुद गोल्ड पर गोल्ड खरीद रहे हैं। मतलब वो खुद गोल्ड होल्ड कर रहे हैं और हमें होल्ड करने के लिए दे रहे हैं ये नकली पेपर। अजय ने बोला कि हां मैं गोल्ड की वैल्यू तो मैं भी समझता हूं बट मैंने इतना कभी इसमें इन्वेस्ट नहीं किया। साहिल ने बोला एक्सैक्टली। इसके बाद अजय और साहिल चले गए एक बिजनेस ओनर के पास जो अपने अनाज और एसेंशियल आइटम्स अजय से खरीदता था। बातोंबातों में साहिल ने बोला तीसरा एसेट पता है तुझे क्या है? वो है बिजनेस। लेकिन ऐसा वैसा बिजनेस नहीं एसेंशियल चीजों का बिजनेस। साहिल ने बताया 1980 में ब्राजील में हाइपर इनफ्लेशन आया था। प्राइसेस इतनी तेजी से बढ़ रहे थे कि सुपर मार्केट्स में जो सामान था उसके प्राइस टैग जो होते हैं ना वो लोग दिन में कई बार उन प्राइस टैग को चेंज कर रहे थे। मान लो सुबह में अगर ब्रेड ₹100 का मिल रहा था तो शाम तक वही ब्रेड का प्राइस उन्होंने ₹500 कर दिया। रात तक ₹1000 कर दिया। अब इसके अंदर भी जो लोगों के पास सिर्फ पेपर में पैसे थे उन लोगों की हालत खराब हो गई। लेकिन जो कंपनीज के पास ऐसे एसेंशियल गुड्स थे खाना, कुकिंग ऑयल, फ्यूल, मेडिसिन वो लोग रातों-रात अमीर बन गए। जैसे यह बिजनेस ओनर को भी देखो। इनके पास आज इतना अनाज, इतनी सारी चीजें हैं। यह जब चाहिए तब उसका प्राइस जितने डिमांड है उस हिसाब से अपना प्राइस डेली बढ़ा सकते हैं, कम कर सकते हैं। जिस वजह से क्राइसिस का इंपैक्ट इनके ऊपर इतना नहीं पड़ेगा। क्राइसिस में लग्जरी बिज़नेसेस रिस्क में होते हैं। लेकिन ऐसे एसेंशियल बिज़नेसेस बहुत आगे बढ़ते हैं। ये सारी बातें सुनने के बाद अजय साहिल से काफी इंप्रेस हो चुका था कि यार तुझे इतनी नॉलेज कैसे मिली? तू तो गांव में रहता है। फिर भी तुझे इतनी सारी चीजों के बारे में कैसे पता है? तब साहिल ने बताया कि कैसे शहर आने के बाद एक बहुत अच्छी चीज उसके साथ हुई थी। जब वह इंटरनेट पर उसने कुछ वीडियोस देखे कोई एक यूटबर का उसने वीडियो देख लिया था। जहां से उसे किताबों के बारे में पता चला तो उसने वहां से किताबें पढ़ने का शौक उसे आ गया और वो किताबें पढ़ने लग गया हिस्ट्री की, फाइनेंस की और उन किताबों ने ही उसे इतनी नॉलेज दे दी एसेट्स के बारे में। साहिल ने बोला तो यार मुझे भी कुछ किताबें रिकमेंड कर। उसने बोला साइकोलॉजी ऑफ मनी पढ़ी है? अजय ने बोला नहीं। तो बोला पढ़ ले। बट तब अजय ने बोला कि यार मुझे बुक पढ़नी है लेकिन बहुत बोर होता है। तब साहिल ने बोला इसका भी एक सशन है। एक ऐप है समरी बोर्ड जो उसी कंटेंट क्रिएटर ने जिसने मुझे बुक्स पढ़ने के लिए रिकमेंड किया था उसी ने एक प्लेटफार्म बनाया समरी बोर्ड जहां पे अभी अगर तू जाकर देखेगा तो 70 के ऊपर पावरफुल किताबें मिल जाएगी। कई सारी किताबें उसमें फाइनेंस स्टॉक मार्केट से रिलेटेड है। साइकोलॉजी ऑफ़ मनी भी उसके अंदर है। तो इस किताब को वीडियो फॉर्मेट में देख सकता है। जैसे Netflix पे कोई शो देखता है वैसे ही तू एनिमेशन फॉर्मेट में इस किताब की नॉलेज पूरी ले सकता है। मैं खुद भी पर्सनली इसे कई बार यूज़ करता हूं। तू भी यूज कर सकता है। और एक और इंटरेस्टिंग बात यह है कि इसका जो क्रिएटर है अभी स्पेशल ऑफर में वो हर हफ्ते लाइव आके एक कम्युनिटी भी बिल्ड कर रहा है। जहां पे इन किताबों की बातें डिस्कस भी होती है। सिर्फ ₹99 पर मंथ में यह बहुत ही सस्ती सब्सक्रिप्शन है जिसमें बहुत सारा ज्ञान है जिसने मुझे बहुत हेल्प किया और तुझे भी हेल्प करेगा। अगर आपको भी यह सब्सक्रिप्शन चाहिए लिंक इन द डिस्क्रिप्शन है। अभी जाके ले लो। लाइव में मिलेंगे साइकोलॉजी ऑफ़ मनी के बारे में बातें करेंगे। अजय ने बोला जरूर ठीक है यार तू बोल रहा है तो पक्का ले लूंगा। ₹99 क्या होता है। मैं पक्का ले लूंगा इसे। साहिल ने बोला बुरे टाइम में कई बार ऐसी नॉलेज ही काम आती है। चाहे वो फाइनेंशियल हो, हेल्थ की प्रॉब्लम हो, रिलेशनशिप में इश्यूज हो। किताब एक ऐसी नॉलेज और ऐसा ज्ञान देती है जो बुरे वक्त में हमें बहुत काम आता है। अब साहिल अजय को लेके चले गया अपने एक दोस्त के पास जो फॉरेन करेंसी में डील करता था। वहां पहुंचने के बाद साहिल ने बताया कि देख अगर किसी कंट्री की करेंसी कोलैप्स होती है तो फिर हमें क्या करना चाहिए? यूजुअली जो नॉर्मल लोग होते हैं वो लोग अपनी पूरी करेंसी पूरा इनकम सिर्फ एक करेंसी में रखते हैं। बट 1980 में लैटिन अमेरिका में जब ह्यूज डेप्ट क्राइसिस आई थी मेक्सिको, ब्राजील, अर्जेंटीना हर जगह जब करेंसी क्रैश हो रही थी तब मिडिल क्लास लोगों के पास सिर्फ उनकी ही करेंसी थी। इसीलिए उनकी जो पूरी लाइफ सेविंग थी वो खत्म हो गई। लेकिन जो वेल्थी फैमिलीज थी, अमीर लोग थे उन्होंने अपने पैसों को यूएस डॉलर्स में रख लिया था। फॉरेन एसेट्स में रख लिया था। जो स्टेबल थे उस टाइम पे। आज मैं शायद यह चीज रिकमेंड ना करूं। लेकिन हां ऐसी करेंसीज भी अपने पास रखना जो स्टेबल रहेगी वह काफी काम के होंगे। और यही है वो फोर्थ एसेट जो बुरे वक्त में काम आ सकता है। स्टेबल करेंसीज में इन्वेस्ट करना। नाउ यह वाले में टू बी ऑनेस्ट मैंने ज्यादा इन्वेस्ट नहीं किया साहिल ने कहा। बट हां जो पांचवा एसेट है उसमें मैंने काफी इन्वेस्ट किया। इसके बाद साहिल उस अजय को लेके गया अपने एक रियलस्टेट के दोस्त के पास। और वहां जाते-जाते उसने वापस से जर्मनी वाली बात बताई कि वेमर जर्मनी में जब करेंसी कोलैप्स हुई तो बर्लिन में जो बिल्डिंग्स के प्राइसेस थे वो बिलियंस ऑफ मार्क्स में पहुंच गए थे। हां, नंबर मीनिंगलेस हो गए थे। क्राइसिस बढ़ रही थी, लेकिन वह बिल्डिंग वहीं की वहीं खड़ी थी। लोग वहां थे, रेंट देना पड़ रहा था। जिनके पास बैंक अकाउंट में पैसे थे, वो जीरो हो गए। लेकिन जिन लोगों ने बिल्डिंग्स बना के रखी थी, रियलस्टेट में अपना वेल्थ क्रिएट की थी, उन्हें शॉर्ट टाइम में तो प्रॉब्लम हुई। सही बात है। लेकिन थोड़े ही समय बाद उनकी भी वैल्यू बहुत ज्यादा बढ़ ही गई। बिकॉज़ घर की जरूरत सबको होती है। एक छत सबको चाहिए। इसीलिए इस रियलस्टेट इन्वेस्टर से मैंने भी कई कई सारे रियलस्टेट यहां वहां मैंने लेकर रखे हुए हैं। जिससे कई बार मुझे जमीन भी मिल जाती है और चाहूं तो मैं वहां पर दुकानें भी बना सकता हूं। नाउ ये सारी बातें बोलने के बाद अजय और साहिल वापस अपने घर आ गए। जब घर आए तो अजय ने पूछा यह तो पांचवी हुई। छठा एसेट क्या है? तब साहिल ने बताया छठा एसेट है सबसे पावरफुल एसेट। जिस पे कोई भी इंसान आज से ही काम कर सकता है। उसे आज से ही लेना स्टार्ट कर सकता है। और इस एसेट को समझाने के लिए उसने 1946 हंगरी का एग्जांपल दिया। जब वहां पे हाइपर इनफ्लेशन हुआ था। जहां पर प्राइसेस हर 15 घंटे में डबल हो रहे थे चीजों के तब गवर्नमेंट एंप्लाइजज़ जो थे जिनकी फिक्स सैलरी थी वो लोग तो एकदम कंगाल हो गए। लेकिन उस टाइम पे जो इलेक्ट्रिशंस थे, मैकेनिक्स थे, प्लंबर्स थे, जिनके पास रियल लाइफ की स्किल्स थी, वो अपनी पेमेंट्स को नेगोशिएट करते थे। कई बार खाने के बदले में, कई बार फॉेंसिक के बदले में और अलग-अलग चीजों के बदले में वो लोग काम करके देते थे। बेसिकली सिस्टम जब पूरा टूट गया तब इकॉनमी बार्टर सिस्टम की तरफ आ गई थी और तब इन लोगों ने अच्छे खासे पैसे कमा लिए जिन लोगों के पास हुनर था। स्किल्स एक ऐसी चीज है जिसे इनफ्लेट नहीं किया जा सकता है। कोई फ्रीज नहीं कर सकता है। इसके ऊपर टैक्स लगा के डिस्ट्रॉय नहीं किया जा सकता है। स्किल्स हमारे अंदर होती है और यह एक ऐसी एसेट है जो बचपन से ही हर बच्चे के अंदर होनी चाहिए। हर इंसान के अंदर होनी चाहिए। इसीलिए कई बार मैं भी अलग-अलग स्किल्स सीखता रहता हूं। जैसे अभी एआई का वक्त आया तो मैं एआई से रिलेटेड चीजें सीख रहा हूं। अपने घर के छोटे-मोटे काम और बहुत सी अलग-अलग चीजें मैं करता रहता हूं ताकि कुछ नहीं तो हमारा स्किल ही मुझे काम में आ जाए। ना ये सारी बातें सुनने के बाद अजय जो पहले अपने को बहुत स्मार्ट समझता था उसे रियलाइज हुआ था कि एक्चुअल में साहिल ज्यादा स्मार्ट था और ऐसा नहीं था कि साहिल ने स्टॉक में इन्वेस्ट नहीं किया था। उसने थोड़े बहुत पैसे स्टॉक में भी डाले थे और स्टॉक के पैसे भी आज नहीं तो कल वापस बढ़ जाएंगे। लेकिन अच्छी बात यह थी कि साहिल को पता था कि मेरे पास दूसरे एसेट्स हैं जिसकी वजह से मैं अपनी लाइफ आराम से अभी भी जी सकता हूं। साहिल ने उसे एक बहुत प्यारी लाइन बोली। ने बोला कि क्राइसिस जब भी आता है तब कुछ लोग गरीब होते हैं लेकिन कुछ लोग बहुत अमीर होते हैं। वेल्थ खत्म नहीं होती वेल्थ ट्रांसफर होती है। जिनके पास फ्रजाइल एसेट्स हैं वो कंगाल हो जाते हैं। लेकिन जिनके पास रियल एसेट्स हैं वो अमीर बनते हैं। इसके बाद साहिल ने अजय को एक पेपर दिया। वो पेपर जब अजय ने देखा तो वह शॉक हो गया क्योंकि वो जो पेपर्स थे वो उसके गांव के घर के पेपर्स थे। साहिल ने बताया कि जब तूने मुझे बोला था कि मेरी प्रॉपर्टी बेच दे जिसके लिए सिर्फ तुझे 34 लाख मिल रहे थे। तूने फिर भी बोला बेच दे। मुझे पता था कि यह नहीं बेचना चाहिए। इसीलिए मैंने उसे बेचा नहीं और सिर्फ पैसे तुझे ट्रांसफर कर दिए थे क्योंकि मुझे पता था एक दिन बुरे वक्त में तेरी जमीन तुझे बहुत काम आएगी। नाउ यह सुनने के बाद अजय की आंखों से आंसू आ गए। उसने अपने दोस्त को गले से लगाया और थैंक यू बोला और उसने फिर उसको उसके घर की चाबी भी दी जहां पर जाके वो आराम से रह सकता है। जब तक यह क्राइसिस खत्म नहीं होते। उस दिन अजय को रियलाइज हुआ कि एक्चुअल में बुरे वक्त में छह चीजें बहुत काम में आ सकती है। छह एसेट्स। पहला प्रोडक्टिव लैंड, दूसरा गोल्ड, तीसरा एसेंशियल गुड का बिजनेस। फोर्थ फॉरेन करेंसी, पांचवा रियलस्टेट और छठा एसेंशियल स्किल्स। अगर आपको भी अपनी लाइफ में बुरे वक्त में भी अमीर रहना है, ठाट से जिंदगी जीनी है, तो आपको इन छह एसेट्स को बनाने पे आज पे ही फोकस करना चाहिए। इन छह एसेट्स पे मैंने पर्सनली कैसे काम किया? कैसे मैंने अपनी वेल्थ को अच्छे बुरे वक्त में मेंटेन रखा है। अगर इसके बारे में आप जानना चाहते हो तो मैं एक लाइव करने वाला हूं। लाइव हर संडे यूजुअली 8:00 बजे होता है। कभी कबभार आगे पीछे होता है। लेकिन लाइव की डिटेल आपको मिल जाएगी। की नीचे लिंक दी हुई है। आप सिर्फ ₹99 का सब्सक्रिप्शन समरी बोर्ड का ले लीजिए। जिससे आप साइकोलॉजी ऑफ़ मनी बुक की बातें सीख पाओगे। इस किताब की कई सारी बातें मैंने इस वीडियो में भी आपको समझाई है स्टोरी के थ्रू। वो किताब आपको जरूर पढ़नी चाहिए। वो किताब ने मुझे भी बहुत हेल्प किया। रिच डैड पुअर डेड साइकोलॉजी ऑफ़ मनी लिटिल बुक ऑफ कॉमन सेंस इन्वेस्टिंग। ये सारी किताबें आपको समरी बोर्ड में मिल जाएगी। सिर्फ ₹99 सब्सक्रिप्शन में पर मंथ। आप आराम से कई सारी किताबें पढ़ सकते हो। 70 के ऊपर किताबें इसमें है। तो लिंक अभी दी हुई है। जहां से सब्सक्राइब करिए। लाइव में आकर हम देखेंगे कैसे आने वाले टाइम में जो क्राइसिस बहुत ज्यादा चांसेस हैं कि आने वाले टाइम में बहुत से क्राइसिस आएंगे वो टाइम पर आप और मैं कैसे सिक्योर रह सकते हैं हम उसके बारे में डिस्कस करेंगे। तो अभी जाइए सब्सक्राइब करिए मिलते हैं उस लाइव में। टिल देन, बाय।
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