महादेव को निगलने वाला असुरः गणेश जी के मस्तक का सबसे बड़ा रहस्य!😱 Gajasur Story #facts

Priyansh Shukla490 words

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महादेव का एक ऐसा परम भक्त जिसने स्वयं महादेव को ही अपने पेट में निगल लिया। और क्या आप जानते हैं कि आगे चलकर इसी असुर का मस्तक भगवान गणेश के धर से जोड़ा गया था। आइए जानते हैं रोंगटे खरे [संगीत] कर देने वाली यह कहानी। यह अद्भुत कथा शिव पुराण की है जो प्राचीन काल में घटी थी। यह खूंखार राक्षस गजासुर था जो असुर राज महिषासुर का पुत्र था। जब माता दुर्गा ने महिषासुर का वध कर दिया तो अपने पिता की मौत का बदला लेने के लिए गजासुर ने हिमालय की बर्फीली चोटियों पर बिना कुछ खाए पिए महादेव की घोर तपस्या शुरू कर दी। सदियों की तपस्या से प्रसन्न होकर भोलेनाथ प्रकट हुए। [संगीत] लेकिन इस चतुर असुर ने अमृता नहीं मांगी। उसने महादेव से कहा हे प्रभु आप हमेशा के लिए मेरे पेट में समाहित हो जाइए। महादेव तो ठहरे भोलेनाथ। [संगीत] उन्होंने तथास्तु कहा और उसके पेट के अंदर चले गए। महादेव के जाते ही पूरे संसार में अंधकार छा गया। माता पार्वती अत्यंत दुखी और व्याकुल रहने लगी। तब उन्होंने सृष्टि के पालनहार भगवान श्री हरि विष्णु से मदद मांगी। प्रभु ने एक अत्यंत सुंदर और अलौकिक लीला रची। उन्होंने महादेव के परम भक्त नंदी को एक [संगीत] बेहद आकर्षक नृत्य करने वाले बैल के रूप में सजाया और स्वयं एक ग्वाले का रूप धारण कर गजासुर के राज्य पहुंच गए। गजासुर के दरबार में पहुंचकर उस [संगीत] ग्वाले ने अपनी बांसुरी से ऐसी दिव्य और मधुर धुन छेरी कि पूरा राज्य मंत्रमुग्ध हो गया। उस अलौकिक संगीत पर [संगीत] अपने आराध्य शिव के वियोग में तड़प रहे नंदी ने ऐसा अद्भुत और भक्तिमय नृत्य किया कि गजासुर अपनी सुधबुद्धि खो बैठा। अहंकार और अत्यधिक प्रसन्नता में आकर उसने कहा, मांगो ग्वाले तुम्हें क्या वरदान चाहिए? ग्वाले ने तुरंत मुस्कुराते हुए कहा, "अगर देना ही है तो अपने उदर से महादेव को बाहर निकालो।" यह सुनते ही गजासुर के होश उड़ गए। वह समझ गया कि यह कोई साधारण ग्वाला नहीं बल्कि साक्षात श्री हरि विष्णु है। अपना अंत निश्चित जानकर भी उसने [संगीत] अपने वचन की लाज रखी और अपना पेट चीर कर महादेव को बाहर निकाल [संगीत] दिया। अपने प्राण त्यागते हुए गजासुर की इस अनन्य भक्ति और वचनबद्धता को देखकर महादेव अत्यंत प्रसन्न हुए। गजासुर ने मरते हुए कहा प्रभु आपके निवास से मेरा शरीर अत्यंत पवित्र हो गया है। कृपया मेरे शरीर के चर्म को वस्त्र के रूप में धारण कर लें और मेरे मस्तक को प्रथम पूज्य होने का वरदान दें। भगवान ने उसे यह दोनों वरदान दे दिए [संगीत] और यही वह रहस्य है। युगों बाद जब महादेव ने क्रोध में अपने ही पुत्र श्री गणेश का सिरधर से अलग किया था तो शिव जी के गणों ने उत्तर दिशा के जंगलों से [संगीत] इसी गजासुर का सुरक्षित मस्तक लाकर भगवान गणेश के धर से जोड़ा था। भक्तों के अधीन [संगीत] रहने वाले उन परम दयालु भोलेनाथ के लिए कमेंट में हर हर महादेव जरूर लिखें।

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