$400 To $200 Million: Richard Dennis Ki "Turtle Trading" Story (Hindi)

Mindset Over Trading3,412 words

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क्या आपने कभी सोचा है कि दुनिया के सबसे बड़े ट्रेडर्स के पास कोई सुपर पावर होती है या फिर ट्रेडिंग एक ऐसी स्किल है जो किसी को भी सिखाई जा सकती है। बिल्कुल एक साइकिल चलाने या खाना बनाने [संगीत] की तरह। दिसंबर 1983 शिकागो के एक बंद कमरे में दो दोस्तों के बीच एक ऐसी बहस हुई जिसने आगे चलकर ट्रेडिंग इतिहास का सबसे बड़ा एक्सपेरिमेंट जन्म दिया। एक तरफ थे प्रिंस ऑफ द पिट रिचर्ड डेनिस जिन्होंने सिर्फ $400 से $200 मिलियन बनाए थे। उनका मानना था कि ट्रेडिंग एक सिस्टम है जिसे कोई भी सीख सकता है। दूसरी तरफ थे उनके पार्टनर विलियम [संगीत] एक्ट जिनका मानना था कि ट्रेडिंग एक इनेट टैलेंट है जो खून में होता है। इस बहस को खत्म करने के लिए रिचर्ड डेनिस ने एक बेट लगाई सिर्फ $1 की। उन्होंने [संगीत] कहा मैं रास्ते से चलते किसी भी आम इंसान को उठाऊंगा उसे अपने रूल सिखाऊंगा और वह मिलियनेियर बनकर दिखाएगा। अगली सुबह वॉलस्ट्रीट जर्नल में एक एडवर्टाइजमेंट छपा और जो उसके बाद हुआ उसने 1000 से ज्यादा लोगों की जिंदगी [संगीत] बदल दी। आज की इस वीडियो में हम उस सीक्रेट एक्सपेरिमेंट की गहराई में उतरेंगे। तैयार हो जाइए क्योंकि यह कहानी है टर्टल ट्रेडर्स [संगीत] की। द ऑडिशन चुनिंग द टर्टल्स। रिचर्ड डेनिस ने इस एक्सपेरिमेंट का नाम द टर्टल्स रखा। क्यों? क्योंकि वह हाल ही में सिंगापुर के एक टर्टल फार्म से लौटे थे। उन्होंने देखा कि कैसे वहां कछुओं को लाइन से पाला जा रहा था। उन्होंने कहा हम ट्रेडर्स को भी ऐसे ही फार्म करेंगे। लेकिन सवाल यह था [संगीत] कि वो आम लोग कौन होंगे? 1000 से ज्यादा एप्लीकेशनेशंस आई। रिचर्ड डेनिस ने एक साइकोलॉजिकल टेस्ट बनाया। याद रखिए उन्हें कोई फाइनेंस डिग्री वाला बंदा नहीं चाहिए था। उन्हें ऐसे लोग चाहिए थे जो लॉजिक और प्रोबेबिलिटी को समझते होंगे। फर्स्ट ज्यादातर ट्रेडर्स के लिए पैसा कमाने से ज्यादा सही होना जरूरी होता है। क्या आप सहमत हैं? सही जवाब था नो। ट्रेडिंग में राइट होना जरूरी नहीं प्रॉफिटेबल होना जरूरी है। सेकंड, [संगीत] क्या एक बड़ा लॉस होने के बाद आपको अपनी स्ट्रेटजी बदल देनी चाहिए? सही जवाब था नो। रिचर्ड ने सिर्फ 14 लोगों को चुना। इनमें कौन-कौन [संगीत] था? एक एक्टर। एक प्रोफेशनल ब्लैक जैक प्लेयर, एक डंजन्स एंड ड्रैग्स का गेम डिजाइनर, एक बार सिक्योरिटी गार्ड और एक महिला लिस शेवल जो आगे चलकर एक लेजेंड बनी। इन लोगों को उन्होंने एक कॉन्फ्रेंस रूम में बुलाया और सिर्फ दो हफ्ते की ट्रेनिंग दी। इन 14 लोगों को रिचर्ड डेनिस ने अपना खुद का पैसा दिया। 1 मिलियन से 2 मिलियन हर एक को। सोचिए एक आम इंसान जिसे ट्रेडिंग का टी नहीं पता था, उसके हाथ में करोड़ों रुपए दे दिए गए। द माइंडसेट वर्सेस द मार्केट। रिचर्ड डेनिस का सबसे पहला सबक ट्रेडिंग रूल्स पर नहीं बल्कि साइकोलॉजी पर था। उन्होंने कहा मैं तुम्हें अपने रूल्स अखबार में छाप कर दे सकता हूं। फिर भी तुम उन्हें फॉलो नहीं कर पाओगे। [संगीत] क्यों? क्योंकि इंसानी दिमाग डर और लालच फियर और ग्रीड के लिए बना है। रिचर्ड ने उन्हें समझाया कि मार्केट में दो चीजें होती हैं। प्राइस और नथिंग एल्स। उन्होंने उन्हें ट्रेंड फॉलोइंग का कांसेप्ट समझाया। टर्टल ट्रेडर्स का काम यह नहीं था कि वह प्रिडिक्ट करें कि मार्केट कहां जाएगा। उनका काम सिर्फ यह था कि जब मार्केट एक तरफ निकल जाए तो उस ट्रेंड की सवारी करें। द रियलिटी ऑफ टर्टल्स। इन 14 लोगों को शुरुआत में काफी डर लगा। सोचिए आप एक ब्लैक जैक प्लेयर हैं और आपके पास $1 मिलियन है। आप एक ट्रेड लेते हैं और वह तुरंत $00 के लॉस में चला जाता है। आपका दिमाग कहेगा क्लोज कर दो पैसा बचाओ। लेकिन रिचर्ड डेनिस वहां खड़े थे और उन्होंने कहा रूल्स फॉलो करो। अगर सिस्टम कह रहा है होल्ड करो तो होल्ड करो। लॉस ट्रेडिंग का बिजनेस एक्सपेंस है कोई नाकामी नहीं। यही वो पॉइंट था जहां टर्टल्स की असली परीक्षा शुरू हुई। उन्हें डॉनशियन चैनल्स सिखाए गए। उन्हें बताया गया कि 20 डे हाई पर बाय करना है और 10 डे लो पर एग्जिट। सुनने में बहुत सिंपल लगता है। है ना? लेकिन जब रियल मनी लाइन पर हो तो सिंपलीसिटी सबसे मुश्किल [संगीत] काम बन जाती है। एक्सपेरिमेंट शुरू हो चुका था। 14 आम लोग अब टर्टल ट्रेडर्स बन चुके थे। शिकागो के ट्रेडिंग पिट्स में उन्हें भेजा गया। शुरुआती कुछ महीनों में रिजल्ट्स शॉकिंग थे। कुछ टर्टल्स ने इतना पैसा बनाया कि रिचर्ड डेलिस भी दंग रह गए। [संगीत] लेकिन कुछ टर्टल्स के हाथ कांप रहे थे। क्या रूल्स वाकई काम कर रहे थे या विलियम एककार सही था कि टैलेंट सिखाया नहीं [संगीत] जा सकता। टर्टल्स को जो सिस्टम सिखाया गया वो एक ट्रेंड फॉलोइंग सिस्टम था। इसका मतलब यह नहीं था कि वह प्रेडिक्ट करें कि मार्केट कहां जाएगा। इसका मतलब यह था कि जब मार्केट मूव करना शुरू करे तो वो उस मूव का हिस्सा बन जाए। आज हम उन चार पिलर्स की बात करेंगे जिन पर टर्टल्स का पूरा एंपायर खड़ा था। व्हाट टू बाय? हाउ मच [संगीत] टू बाय, व्हेन टू एंटर और व्हेन टू एग्जिट। पिलर वन, द एन फैक्टर रिस्क मैनेजमेंट। ज्यादातर ट्रेडर्स फेल होते हैं क्योंकि उन्हें यह नहीं पता होता कि कितना रिस्क लेना है। टर्टल्स ने कभी यह नहीं सोचा कि मैं कितनी शेयर्स खरीदूं। उन्होंने सोचा मैं कितना वोलेटिलिटी रिस्क ले रहा हूं। रिचर्ड डेनिस ने उन्हें एक फार्मूला सिखाया जिसे वो कहते थे एन। एन का मतलब था एटीआर यानी [संगीत] एवरेज ट्रू रेंज। लॉजिक अगर मार्केट बहुत ज्यादा उथल-पुथल यानी वोलेटाइल है तो पोजीशन साइज छोटा रखो। अगर मार्केट शांत है तो पोजीशन साइज बड़ा रखो। द 1% रूल टर्टल्स को सख्त हिदायत थी कि वो किसी भी एक ट्रेड में अपनी टोटल कैपिटल का 1% [संगीत] से ज्यादा रिस्क नहीं लेंगे। यह सुनने में बोरिंग लगता है लेकिन यही वो सीक्रेट था जिसने उन्हें कभी बैंककरप्ट नहीं होने दिया। जब मार्केट उनके खिलाफ जाता तो उनका नुकसान छोटा होता लेकिन जब ट्रेंड मिलता तो वो उसे छोड़ते नहीं थे। पिलर टू एंड थ्री द एंट्री द डॉनकियन ब्रेकआउट। टर्टल्स दो तरह के सिस्टम्स पर काम [संगीत] करते थे। सिस्टम वन शॉर्ट टर्म ट्रेंड। इसमें वह 20 डे ब्रेकआउट पर ट्रेड लेते थे। मतलब अगर प्राइस पिछले 20 दिनों के सबसे हाई लेवल को तोड़ता है तो बाय करो। सिस्टम टू लॉन्ग टर्म ट्रेंड इसमें वो 55 डे ब्रेकआउट का इंतजार करते थे। रियल ट्रेडर इनसाइट यहां एक बहुत बड़ा कैच था। रिचर्ड डेनिस ने उन्हें सिखाया कि अगर पिछला यानी प्रीवियस ब्रेकआउट फेल हुआ था तो अगला ब्रेकआउट लेने की प्रोबेबिलिटी ज्यादा है। लेकिन असली जादू [संगीत] था पिरामिडिंग में। टर्टल्स एक साथ सारा पैसा नहीं लगाते थे। पहले वो एक छोटा हिस्सा खरीदते 1 यूनिट। अगर प्राइस उनके फेवर में हाफ एन यानी एटीआर ऊपर जाता तो वह और खरीदते। वो तब तक पोजीशन बढ़ाते रहते जब तक उनके पास चार यूनिट्स ना हो जाए। इसका मतलब यह था कि वो सिर्फ जीतने वाली ट्रेड्स में अपना पैसा बढ़ा रहे थे। हारे हुए ट्रेड में वह कभी एवरेज नहीं करते थे। क्या आप यह डिसिप्लिन मेंटेन कर सकते हैं? पिलर फोर द एग्जिट [संगीत] द हार्डेस्ट पार्ट। ट्रेडिंग में एंट्री सब ले लेते हैं, लेकिन एग्जिट ही अमीर और गरीब ट्रेडर के बीच का फर्क है। टर्टल्स का एग्जिट रूल बड़ा सिंपल लेकिन फॉलो करने में बहुत दर्दनाक। उन्होंने सिखाया गया था डोंट लेट अ बिग प्रॉफिट टर्न इंटू अ लॉस बट गिव द ट्रेंड रूम टू ब्रीथ। सिस्टम वन के लिए उनका एग्जिट था 10 डे लो। मतलब अगर प्राइस 10 डे के लो को टच कर जाए तो बाहर निकल जाओ। चाहे आपका प्रॉफिट कम हो गया हो। द पेन फैक्टर। कई बार ऐसा होता कि एक टर्टल $1 लाख के प्रॉफिट में होता, मार्केट थोड़ा नीचे आता और उसका प्रॉफिट सिर्फ $500 रह जाता। आम इंसान डर के मारे वहीं निकल जाता। लेकिन टर्टल्स को रूल था जब तक 10 डे लो हिट ना हो तब तक बैठे रहो। इस वजह से उन्होंने मार्केट के ऐसे बड़े मूव्स पकड़े जो महीनों तक चले। उन्होंने 100% 200% और 500% तक के मूव्स कैप्चर किए [संगीत] सिर्फ इस एक एग्जिट रूल की वजह से। द क्रैश टेस्ट रूल्स मिल चुके थे। सिस्टम्स सेट थे लेकिन अब शुरू होने वाला था असली खेल। इन 14 लोगों को रियल मार्केट की आग में झोंका गया। जनवरी 1984 से उनका लाइव ट्रेडिंग सेशन शुरू हुआ। शुरुआत में कुछ टर्टल्स ने इतनी गलतियां की कि रिचर्ड डेनिस ने उन्हें रूम से बाहर निकालने की धमकी भे दी। कुछ लोग रूल्स को सेकंड गेस करने [संगीत] लगे। वो सोचने लगे मुझे लगता है यह मार्केट नीचे जाएगा तो मैं रूल्स फॉलो नहीं करता। लेकिन जिन लोगों ने बिना सवाल किए इन मैथमेटिकल रूल्स को फॉलो किया उनके अकाउंट्स का साइज रॉकेट की तरह ऊपर जाने लगा। पर क्या ये सिस्टम हर मार्केट कंडीशन में काम करेगा? क्या होता है जब मार्केट ट्रेंड ही ना करे और सिर्फ एक रेंज में फंस जाए? द मोमेंट ऑफ ट्रुथ। रूल्स मिल चुके थे। ट्रेनिंग खत्म हो चुकी थी और टर्टल्स को मैदान में उतार दिया गया था। सबका एक ही सवाल था। क्या यह क्लासरूम ट्रेडिंग रियल वर्ल्ड में काम करेगी? विलियम एगार्ट अभी भी शक में थे। उन्हें लगता था कि जब असली पैसा दांव पर लगेगा तो यह आम लोग डर जाएंगे। लेकिन जो रिजल्ट सामने आए उन्होंने वॉल स्ट्रीट के बड़े-बड़े वेटरस के होश उड़ा दिए। रिचर्ड डेनिस ने इन लोगों को सिर्फ $ मिलियन से $ मिलियन दिए थे। 4 साल बाद उनके हाथ में जो प्रॉफिट था वो अनथिंकेबल [संगीत] था। द परफॉर्मेंस डाटा रियल नंबर्स। चलिए बात करते हैं रियल नंबर्स की। 1984 से 1988 के बीच इन टर्टल्स ने मिलकर टोटल $175 मिलियन से ज्यादा का प्रॉफिट बनाया। विजुअल एक टेबल दिखाइए जिसमें रिटर्न्स दिख रहे हो। एवरेज रिटर्न्स। ज्यादातर टर्टल्स ने हर साल 80 से 100% तक के रिटर्न्स निकाले। द बेस्ट परफॉर्मर जेरी [संगीत] बाकर। जेरी एक मामूली अकाउंटेंट था जिसे ट्रेडिंग का कोई एक्सपीरियंस नहीं था। लेकिन उसने रिचर्ड के रूल्स को इतनी शिद्दत से फॉलो किया कि वो आगे चलकर एक मल्टी बिलियन डॉलर हैेज फंड का मालिक बना। द सरप्राइज़ सिर्फ [संगीत] मर्द ही नहीं लिवल ने साबित कर दिया कि ट्रेडिंग जेंडर नहीं डिसिप्लिन [संगीत] का खेल है। उन्होंने कंसिस्टेंटली मार्केट को बीट किया और दिखाया कि एक हाउसवाइफ या एक कॉमन वूमन भी टॉप ट्रेडर बन सकती है। रिचर्ड डेनिस ने साबित कर दिया था कि वह जीत चुके हैं। वह $1 की बेट उनकी थी। उन्होंने दिखा दिया कि ट्रेडिंग सिखाई जा सकती है। व्हाई सम फेल्ड द साइकोलॉजिकल गैप? लेकिन रुकिए सब कुछ इतना आसान नहीं था। [संगीत] क्या आपको लगता है कि सारे 14 लोग अमीर बन गए? नहीं। यही इस एक्सपेरिमेंट का सबसे बड़ा लेसन है। कुछ टर्टल्स को एक्सपेरिमेंट के बीच में ही निकाल दिया गया। क्यों? रूल्स तो सबके पास सेम थे। कैपिटल भी सेम थी तो फर्क कहां आया? फर्क आया डिसिप्लिन में। जब मार्केट में ड्रॉडाउन आया। मतलब जब लगातार लॉसेस होने लगे तो कुछ टर्टल्स ने डर के मारे रूल्स तोड़ दिए। उन्होंने [संगीत] एन फैक्टर फॉलो नहीं किया। उन्होंने पोजीशन साइज कम कर दिया या ट्रेड लिया ही नहीं। रिचर्ड डेनिस का ऑब्जरवेशन रिचर्ड ने नोटिस किया कि जब सिस्टम कह रहा था बाय तो कुछ लोग डर रहे थे। जब सिस्टम कह रहा था एग्जिट तो कुछ लोग लालच में बैठे हुए थे। यह साबित करता है कि एक प्रॉफिटेबल सिस्टम होना काफी नहीं है। उस सिस्टम को एग्जीक्यूट करने का जिगरा यानी करेज होना चाहिए। टर्टल्स की सक्सेस के पीछे एक बहुत बड़ा डार्क साइड भी था और वो था वोलेटिलिटी। उनका अकाउंट बैलेंस बिल्कुल किसी रोलर कोस्टर की तरह ऊपर नीचे जाता था। कई बार ऐसा हुआ कि एक टर्टल का अकाउंट 30% या 40% नीचे गिर गया। एक आम ट्रेडर यहीं पर हार मान लेता है। लेकिन टर्टल्स को सिखाया गया था कि बड़े प्रॉफिट के लिए बड़ी उथल-पुथल सहना सीखो। रिचर्ड डेनिस खुद कहते थे कि उनका सिस्टम तब काम करता है जब मार्केट ट्रेंड में हो। लेकिन जब मार्केट साइडवेज यानी एक रेंज में होता तो टर्टल्स को डेथ बाय [संगीत] 1000 कट्स महसूस होता था। छोटे-छोटे लगातार लॉसेस लेकिन वो रुके नहीं। उन्हें पता था कि एक बड़ा ट्रेंड आने वाला है जो सारे पिछले लॉसेस रिकवर कर देगा। द एंड ऑफ एन एरा 1988 में रिचर्ड डेनिस ने इस एक्सपेरिमेंट को ऑफिशियली खत्म कर दिया। उन्होंने अपना पैसा वापस ले लिया और टर्टल्स को उनका हिस्सा देकर विदा किया। एक्सपेरिमेंट कामयाब था। रिचर्ड ने दुनिया को दिखा दिया कि ट्रेडर्स आर मेड नॉट बोर्न। लेकिन असली सवाल अब शुरू होता है। इन टर्टल्स का क्या हुआ जब उनके सर से रिचर्ड डेनिस का साया हट गया? क्या वो अकेले मार्केट में सर्वाइव कर पाए? और सबसे इंपॉर्टेंट सवाल क्या आज के 2026 के एल्गोरिदम ड्रिवन मार्केट में टर्टल्स के रूल्स काम करेंगे? द इंडिपेंडेंस डे। 1988 में जब रिचर्ड डेनिस ने अपना पैसा वापस लिया और एक्सपेरिमेंट खत्म किया तो एक नया सवाल खड़ा हुआ। क्या यह टर्टल सिर्फ रिचर्ड डेनिस के साए में ही प्रॉफिटेबल थे? बिना अपने मेंटर के क्या वो मार्केट की बड़ी लहरों का सामना कर पाएंगे? बहुत से लोगों ने कहा था कि यह लोग सिर्फ किस्मत वाले थे जो एक बड़े बुल [संगीत] मार्केट यानी अपसाइड ट्रेंड में फंस गए। लेकिन आने वाले 20 सालों ने यह दिखा दिया कि रिचर्ड डेनिस ने उन्हें सिर्फ रूल्स नहीं बल्कि एक ट्रेडिंग डीएनए दिया था। द मल्टी बिलियन डॉलर लेगसी। एक्सपेरिमेंट खत्म होने के बाद कई टर्टल्स ने अपने खुद के हेज फंड्स शुरू किए। जेरी पाकर इन्होंने चेसपी कैपिटल बनाई और एक वक्त पर यह अरबों डॉलर्स मैनेज कर रहे थे। उनका कहना था कि मैंने 20 साल बाद भी वही रूल्स फॉलो किए जो रिचर्ड ने सिखाए थे। द टर्टल नेटवर्क इन लोगों ने दिखाया कि एक सिस्टमैटिक अप्रोच से आप किसी भी एसेट क्लास में पैसा बना सकते हैं। चाहे वो कमोडिटीज हो, करेंसीज यानी फॉरेक्स या स्टॉक्स। लेकिन सब कुछ आसान नहीं था। रिचर्ड डेनिस खुद 1987 के ब्लैक मंडे क्रैश में काफी बड़े लॉसेस झेल चुके थे। उन्होंने ट्रेडिंग से एक लंबा ब्रेक भी लिया। यह एक बहुत बड़ा सबक है। मार्केट कभी भी आपको हंबल कर सकता है। चाहे आप कितने ही बड़े लेजेंड क्यों ना हो। द 2026 टेस्ट डू द रूल स्टिल वर्क? अब बात करते हैं आपके और मेरे काम की। क्या 20 डे और 55 डे ब्रेकआउट [संगीत] की स्ट्रेटजी आज के फॉररेक्स मार्केट में काम करेगी। आज का मार्केट 1983 जैसा नहीं है। आज हमारे पास एल्गोरिदम्स [संगीत] हैं, एआई बॉट्स हैं और हाई फ्रीक्वेंसी ट्रेडिंग है जो मिली सेकंड में प्राइसेस बदल देती हैं। रियल एनालिसिस अगर आप आज सिर्फ 20 डे ब्रेकआउट यूज करेंगे तो आप फेक आउट्स यानी फॉल्स ब्रेकआउट्स का शिकार हो जाएंगे। आज [संगीत] के मार्केट में नॉइज़ ज्यादा है। लेकिन टर्टल्स का जो कोर फिलॉसफी था वो आज भी गोल्ड है। सोना रिस्क मैनेजमेंट एन फैक्टर। आज भी जो ट्रेडर वोलेटिलिटी के हिसाब से पोजीशन साइज एडजस्ट करता है वही सर्वाइव करता है। कटिंग लॉसेस 1% रिस्क रूल आज भी टॉप इंस्टीट्यूशनल ट्रेडर्स का फेवरेट है। ट्रेंड फॉलोइंग मार्केट के डायनामिक्स बदले हैं लेकिन ह्यूमन साइकोलॉजी नहीं बदली। फियर और ग्रीड आज भी ट्रेंड्स बनाते हैं और टर्टल्स का सिस्टम वही कैच करता है। एडप्टिंग द टर्टल सिस्टम फॉर मॉडर्न ट्रेडर्स। अगर आपको आज के दौर में एक मॉडर्न टर्टल बनना है तो आपको उन रूल्स को ट्वीट [संगीत] करना पड़ेगा। पहले के वक्त में 20 डे ब्रेकआउट चलता था। आज आपको हायर टाइम फ्रेम्स डेली और वीकली पर फोकस करना चाहिए ताकि मार्केट नॉइज़ से बच सके। सिर्फ प्राइस को मत देखिए। कोरिलेशन को भी देखिए। टर्टल्स ने सिखाया था कि एक ही डायरेक्शन में सारे ट्रेड्स मत लो। जैसे अगर आपने यूरो यूएसडी बाय किया है तो जीबीपी यूएसडी बाय करके अपना रिस्क मत बढ़ाओ। द वेट फैक्टर टर्टल्स महीनों तक इंतजार करते थे एक सही ट्रेंड का। आज के ट्रेडर्स हर 5 मिनट में ट्रेड लेना चाहते हैं। यही सबसे बड़ी गलती है। मॉडर्न टर्टल वही है जो पेशेंस को अपना वेपन बनाता है। रिचर्ड डेनिस ने बेट तो जीत ली थी लेकिन उन्होंने एक ऐसी चीज पीछे छोड़ी थी जो आज भी ट्रेडर्स को दो हिस्सों में बांट देती है। एक तरफ वो लोग जो होली ग्रेल या किसी मैजिक इंडिकेटर की तलाश में है और दूसरी तरफ वो टर्टल्स जो जानते हैं कि ट्रेडिंग सिर्फ डिसिप्लिन का खेल है। लेकिन कहानी यहां खत्म नहीं होती। टर्टल्स के बीच में ही एक गद्दारी हुई थी। एक ऐसा टर्टल था जिसने रूल्स को पब्लिक कर दिया और क्या हुआ जब यह सीक्रेट रूल्स सबको पता चल गए? क्या सिस्टम ने काम करना बंद कर दिया? द ग्रेट बिट्रेयल। रिचर्ड डेनिस ने एक शर्त रखी थी कि कोई भी टर्टल उनके रूल्स को बाहर लीक नहीं करेगा। लेकिन 1990 के आने तक एक टर्टल ने सब कुछ बदल दिया। कर्टिस फेथ जो सबसे यंग और प्रॉफिटेबल टर्टल था उसने इन सीक्रेट रूल्स को पब्लिक कर दिया। दुनिया भर के ट्रेडर्स में हड़कंप मच गया। लोगों ने सोचा अब जब सबको रूल्स पता हैं तो क्या यह सिस्टम फेल हो जाएगा? क्योंकि ट्रेडिंग में माना जाता है कि जब सब एक ही रास्ता अपनाते हैं तो वो रास्ता बंद हो जाता है। लेकिन यहां एक शॉकिंग चीज हुई। सिस्टम तब भी काम करता रहा। क्यों? क्योंकि लोग रूल्स को जानते तो हैं लेकिन उन्हें फॉलो करने का डिसिप्लिन 99% लोगों में नहीं होता। टर्टल्स की कामयाबी के दो बड़े राज थे। पहला था उनका डिसिप्लिन और दूसरा था उनके पास एक ऐसा प्लेटफार्म होना जो उन्हें फास्ट एग्जीक्यूशन और सही डाटा दे सके। आज के दौर में अगर आपको उनकी तरह प्रोफेशनल ट्रेडिंग करनी है तो आपको एक रिलायबल ब्रोकर की जरूरत है। मैं पर्सनली एक्सM और वेंटेज ब्रोकर यूज करता [संगीत] हूं। क्योंकि यहां आपको लो स्प्रेड्स, फास्ट विथड्रॉल्स और वो सारे टूल्स मिलते हैं जो एक सिस्टमेटिक ट्रेडर को चाहिए होते हैं। अगर आप भी अपने ट्रेडिंग करियर को सीरियस लेकर शुरुआत करना चाहते हैं तो डिस्क्रिप्शन में दिए गए लिंक से अपना अकाउंट आज ही ओपन कर सकते हैं और प्रोफेशनल ट्रेडिंग की शुरुआत कर सकते हैं। द अल्टीमेट लेसन बोर्न और मेड। तो फाइनल सवाल पर आते हैं। क्या रिचर्ड डेनिस ने अपनी $1 की बैट जीत ली? जवाब है हां और नहीं। हां क्योंकि उन्होंने साबित कर दिया कि कोई भी आम इंसान रूल सीखकर मिलेनियर बन सकता है। उन्होंने उन लोगों को बनाया जो पहले सिर्फ ब्लैक जैक खेलते थे या एक्टर थे। लेकिन नहीं क्योंकि सभी 14 लोग सक्सेसफुल [संगीत] नहीं हुए। इसका मतलब है कि सिस्टम सिखाया जा सकता है लेकिन मैच्योरिटी और रिस्क एपिटाइट इंसान को खुद अंदर से लानी पड़ती है। रिचर्ड डेनिस ने कहा था ट्रेडिंग में सबसे मुश्किल काम है अपने दिमाग को मार्केट के साथ [संगीत] अलाइन करना। आज 40 साल बाद भी टर्टल ट्रेडर्स की कहानी हमें यही सिखाती है कि मार्केट में इंटेलिजेंस से ज्यादा कैरेक्टर की कीमत होती है। अगर आप अपने रूल्स पर टिके रह सकते हैं जब सब लोग डर रहे हो तो आप वाकई एक टर्टल हैं। द रोड मैप फॉर यू। [संगीत] अगर आप इस वीडियो को यहां तक देख रहे हैं तो एक बात साफ है। आप उन 95% लोगों में से नहीं हैं जो सिर्फ शॉर्टकट्स ढूंढते हैं। आप सीखना चाहते हैं। टर्टल्स की तरह कामयाब होने के लिए आपको यह [संगीत] तीन चीजें आज से करनी है। अपने लिए एक रूल बेस्ड सिस्टम बनाइए। चाहे वह ब्रेकआउट हो या प्राइस एक्शन। अपना रिस्क पर ट्रेड फिक्स कीजिए। 1% से ज्यादा कभी नहीं। और सबसे जरूरी अपने सिस्टम पर भरोसा रखिए। चाहे लगातार पांच लॉसेस क्यों ना हो जाए। दोस्तों, रिचर्ड डेनिस और टर्टल्स की यह कहानी सिर्फ एक एक्सपेरिमेंट नहीं बल्कि एक सब है हम सबके लिए। अगर आपको लगता है कि इस वीडियो ने आपके ट्रेडिंग नजरिए को थोड़ा भी बदला है, तो लाइक बटन दबाने में कंजूसी मत कीजिए। आपको क्या लगता है? क्या आज के मॉडर्न मार्केट में एक आम इंसान ट्रेडिंग सीखकर कामयाब हो सकता है? अपने विचार नीचे कमेंट में जरूर बताएं। मैं हर [संगीत] एक कमेंट पढ़ता हूं। और अगर आप ट्रेडिंग साइकोलॉजी और प्रोफेशनल माइंडसेट पर ऐसी ही लॉन्ग फॉर्म डीप डाइव वीडियोस और देखना चाहते हैं तो चैनल को सब्सक्राइब कीजिए और इस [संगीत] वीडियो को अपने उस दोस्त के साथ शेयर कीजिए जो ट्रेडिंग को सिर्फ किस्मत का खेल समझता है। बाकी मिलते हैं अगली वीडियो में। तब तक के लिए हैप्पी ट्रेडिंग। स्टे डिसिप्लिन, स्टे पेशेंट [संगीत] एंड रिमेंबर द मार्केट इज ऑलवेज राइट।

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