एक रात की गहरी खामोशी में एक अजीब सी आवाज गूंजी। छीन यह आवाज ऐसी थी जैसे चांदी की घंटी बज रही हो और एक गरीब किसान की जिंदगी इस रात से बदल गई। दजला नदी के किनारे एक छोटा सा गांव था। [संगीत] उसका नाम था नखील। यहां एक किसान रहता था जिसका नाम हसान था। हसान का दिल बिल्कुल साफ था। लेकिन किस्मत ने उसे कभी आराम नहीं दिया था। उसके पास बस जमीन का एक छोटा सा टुकड़ा था। वह गेहूं और जो उगाता था। हसान की बीवी आमना बहुत मेहनती थी। उनके दो बच्चे थे। बेटा इमरान 12 साल का था और बेटी फातिमा 9 साल की थी। एक जुम्मे की सुबह हसान खेत से वापस आ रहा था। रास्ता बिल्कुल सुनसान था। अचानक उसने एक आवाज सुनी। छिन। हसान रुक गया। आवाज झाड़ियों की तरफ से आ रही थी। वो आहिस्ता-आहिस्ता उस तरफ बढ़ा। झाड़ियों के पीछे एक घोड़ा खड़ा था। बिल्कुल सफेद जैसे दूध में चांदनी मिला दी हो और उसके गर्दन में चांदी की एक घंटी लटक रही थी। घोड़े की आंखें बड़ी गहरी थी और समझदार थी। बिल्कुल ऐसे जैसे किसी इंसान की आंखें हो। हसान ने चारों तरफ देखा। कोई नहीं था। शाम होने लगी थी तो उसने फैसला किया कि घोड़े को घर ले जाएं। घर पहुंचकर आमना हैरान रह गई और बच्चे वो तो खुशी से उछल रहे थे। अब्बू क्या हम इसे रख सकते हैं? इमरान ने पूछा नहीं बेटा यह किसी का है कल हम इसके मालिक को ढूंढेंगे। रात को हसान को नींद नहीं आई। अचानक घंटी बजी। वो बाहर गया। घोड़ा अस्तबल के बाहर खड़ा था और जंगल की तरफ देख रहा था। तू चाहता है मैं तेरे साथ चलूं। घोड़े ने आहिस्ता से सर हिलाया। हसान सवार हुआ। घोड़ा जंगल की तरफ चल पड़ा। आधे घंटे बाद एक पुराने कुएं के पास आकर रुका। नीचे से आवाज आई। कोई है? मदद करो। हसान ने झांक कर देखा। एक आदमी फंसा हुआ था। उसने फौरन रस्सी ढूंढी और उसे बाहर निकाला। उसने बताया, "मेरा नाम खालिद है। तीन दिन से फंसा हुआ हूं। तुमने मेरी जान बचा ली।" हसान उसे अपने घर ले आया। सुबह खालिद ने बताया कि वह एक ताजिर है और वह इनाम देना चाहता है। मुझे कुछ नहीं चाहिए। हसान ने कहा, "यह तो मेरा फर्ज था।" खालिद चला गया। अगले हफ्ते एक अजीब बात हुई। हसान की सूखती हुई फसल अचानक हरीभरी हो गई। एक ताजिन ने बहुत अच्छी कीमत दी। इतना फायदा पहले कभी नहीं हुआ था। कुछ दिन बाद रात को घंटी फिर बजी। घोड़ा फिर खड़ा था। इस बार वह शहर की तरफ गया। एक मकान के सामने आकर रुका। हसान ने दरवाजे पर दस्तक दी। एक बूढ़ी औरत ने दरवाजा खोला। रोते हुए बोली कि उसका [संगीत] पोता बीमार है और दवा के लिए पैसे नहीं है। हसान ने अपनी सारी कमाई दे दी। वापस आकर देखा तो संदूक में [संगीत] रखी बचत भी गायब थी। आमना परेशान हो गई। सारे पैसे दे आए। अब क्या होगा? अल्लाह पर भरोसा रखो। हसान ने कहा। लेकिन अंदर से उसे डर लग रहा था। नेकी की और सब कुछ छीन गया। यह मोहज इत्तेफाक था। इस रात वो उस तबल में गया। तू कौन है? उसने घोड़े से पूछा। तुम मुझे क्यों ले जाते हो? और हर बार कुछ ना कुछ क्यों छीन जाता है? घोड़े की आंखों में एक उदासी थी। उसने अपना सर हसान के कंधे पर रख दिया। मैं नहीं जानता तू क्या है। हसान ने कहा, लेकिन तुझ पर भरोसा करता हूं। अगर अल्लाह ने तुझे भेजा है तो जरूर कोई वजह होगी। अगले हफ्ते खामोशी रही। हसान ने फिर से मेहनत शुरू की। लेकिन इस बार फसल अच्छी नहीं हुई। बारिश बहुत कम हुई। आमना ने कहा, खाने को बस इतना बचा है। आगे बहुत मुश्किल होगी। अल्लाह करीम है। हसान ने जवाब दिया। लेकिन दिल में शक पैदा होने लगा। क्या गलती थी? सारे पैसे देकर एक रात फिर घंटी बजी। छिन छिन आमना जाग गई। मत जाओ। पिछली बार सब कुछ चला गया था। हसान ने अपनी बीवी को देखा। सोते हुए बच्चों को देखा। उसका दिल बट गया। एक तरफ फर्ज था तो दूसरी तरफ अपने घर वाले। घंटी और जोर से बजने लगे। मुझे जाना होगा। हसान ने कहा शायद कोई मुसीबत है। आमना की आंखों में आंसू आ गए। हमारा क्या होगा? अल्लाह पर भरोसा रखो। हसान ने कहा, वह बाहर गया और घोड़े पर सवार हो गया। घोड़ा इतनी तेजी से पहाड़ों की तरफ भागा। 2 घंटे बाद एक गार के पास आकर रुका। अंदर से कराने की आवाजें आ रही थी। हसान अंदर गया। एक लड़की पड़ी थी। उसके पांव में गहरा जख्म था। मेरा नाम सफिया है। लड़की ने कहा, डाकुओं से भाग रही थी। पहाड़ से गिर गई। हसान ने उसे घोड़े पर बिठाया और घर ले गया। आमना ने उसके जख्मों पर मरहम लगाया। कुछ ही दिनों बाद सफिया ठीक होने लगी और घर के कामों में मदद करने लगी। लेकिन एक हफ्ते बाद फिर मुसीबत आ गई। हसान के खेत में आग लग गई। सारी फसल जलकर राख हो गई। सुबह जब हसान ने राख का ढेर देखा तो उसके घुटने कमजोर होने लगे। पूरी साल की मेहनत खाक हो गई थी। आमना रोने लगी। अब क्या करेंगे हम? अल्लाह की मर्जी है। सबर करेंगे। हसान ने कहा। लेकिन पहली बार हसान को शक हुआ। नेकी की मदद की और बदले में सब कुछ छीन गया। क्या यह सही था? क्या यह घोड़ा उसके लिए कोई लानत है? हसान उस रात अस्तबल में गया। घोड़ा खामोश खड़ा था। तूने मुझसे सब कुछ छीन लिया। हसान ने गुस्से से कहा, "मेरे पैसे, मेरी फसल, अब मेरे पास कुछ नहीं बचा। आखिर क्यों? घोड़े की आंखों में आंसू थे। बिल्कुल असली आंसू। हसान हैरान रह गया। एक जानवर रो रहा था। घोड़े ने अपना सर झुका लिया। जैसे शर्म से या शायद दुख से। हसान का गुस्सा थोड़ा हो रहा था। वह पास गया और घोड़े की गर्दन पर हाथ रखा। तू कौन है? उसने आहिस्ता से पूछा। घोड़े ने कोई जवाब नहीं दिया। बस अपना सर हसान के कंधे पर रख दिया। अगले दिन सफिया बाहर बैठी रो रही थी। क्या हुआ बेटी? हसान ने पूछा। मुझे माफ कर दें। सफिया ने कहा, "आपने मेरी जान बचाई और मैं मैं तो आपके लिए मुसीबत बन गई। फसल भी मेरी वजह से चली गई। नहीं नहीं यह तुम्हारी गलती नहीं है। लेकिन मैं बोझ हूं ना। मेरे पास देने को कुछ नहीं। हसान ने प्यार से कहा देखो बेटी अल्लाह ने तुम्हें हमारे पास भेजा है। हम तुम्हारी देखभाल करेंगे। फिक्र मत करो। वो दिन बहुत मुश्किल से गुजरा। [संगीत] घर में खाने को बहुत कम था। घर में जो कुछ बचा था उसी से आमना ने थोड़ा सा खाना बनाया। सबने मिल बांट कर खाया। शाम को हसान बाहर बैठा था। दिल में बहुत सार था। सवाल थे। पूरी जिंदगी ईमानदारी से गुजारी, नेकी की, लोगों की मदद की। फिर क्यों इतनी मुसीबतें आ रही हैं? उसी वक्त घंटी फिर बजी। छिन छिन घोड़ा फिर सामने खड़ा था। फिर से हसान ने पूछा, क्या मुझसे और भी कुछ छीना जाएगा? लेकिन फिर उसने दिल में फैसला किया। चाहे जो भी हो, वह अपने रास्ते से नहीं हटेगा। वह घोड़े पर सवार हुआ। इस पर घोड़ा शहर से भी आगे गया। रेगिस्तान की तरफ। सुबह होने से पहले एक छोटे से गांव में पहुंचे। वहां कुएं के पास बहुत से लोग जमा थे। सब बहुत परेशान लग रहे थे। क्या हुआ भाई? हसान ने पूछा। हमारे गांव का कुआं सूख गया है। एक आदमी ने बताया। दूसरा कुआं बहुत दूर है। बच्चे प्यासे हैं। बहुत मुश्किल हो गई। हसान ने चारों तरफ देखा। औरतें रो रही थी। बच्चे कमजोर और बेहाल थे। मैं मदद करूंगा। हसान ने कहा। उसने अपना घोड़ा एक आदमी को दिया। उसे शहर में बेच दो। जो पैसे मिले उनसे पानी का इंतजाम कर लेना। लोग हैरान हो गए। इतना खूबसूरत घोड़ा दे रहे हो। तुम लोगों को जरूरत है ले लो। लेकिन जब उस आदमी ने लगाम पकड़ी घोड़े ने जोर से हिलहलाया। वो पीछे हट गया। किसी और के साथ जाने को बिल्कुल तैयार नहीं था। हसान समझ गया। यह घोड़ा उसे छोड़ना नहीं चाहता। फिर उसने अपनी जेब से एक छोटा सा थैला निकाला। उसमें सोने के चंद सिक्के थे। यह उसके बाप की आखिरी निशानी थी। हमेशा से बड़ी मुसीबत के लिए बचा कर रखे थे। यह लो उसने सिक्के दे दिए। उनसे पानी का इंतजाम कर लेना। गांव वालों ने ढेर सारी दुआएं की। हसान वापस चल पड़ा। रास्ते में सोचता रहा अब तो वाकई कुछ नहीं बचा। आखिरी बचत भी चली गई। घर पहुंचा तो देखा आमना दरवाजे पर खड़ी रो रही थी। साथ इमरान और फातिमा भी थे। क्या हुआ? क्यों रो रहे हो? हमारा घर। आमना ने रोकर कहा, जमींदार आया था। कह रहा था अगर किराया ना दिया तो घर से निकाल देंगे और हमारे पास तो पैसे भी नहीं है। हसान को लगा जैसे जमीन पांव तले से खिसक रही है। अब तो कोई पैसा नहीं था। सब दे आया हूं। मैं जमींदार से बात करता हूं। लेकिन जिम्मेदार तो बड़ा सख्त है। मुझे कहानियों से कोई तलब नहीं। या किराया दो या घर छोड़ दो। बस एक महीने का वक्त दे दो। तीन दिन सिर्फ तीन दिन वरना निकाल दूंगा। हसान टूट गया। घर आकर आमना को सब बताया। आमना ने गुस्से से देखा, मैंने कहा था ना मत जाओ। तुमने नहीं सुना। अब देखो क्या हो गया। यह पहली [संगीत] बार था कि आमना ने इतनी जोर से बात की। उसके अल्फाज़ तीर की तरह लगे। बच्चे डर कर कोने में छुप गए। सुफिया भी खामोश खड़ी थी। इस रात घर में बहुत तनाव था। आमना ने बात नहीं की। हसान बाहर अस्तबल में जाकर बैठ गया। क्या मैं गलत कर रहा हूं? उसने खुद से पूछा। क्या नेकी करना गलत है? तीन दिन गुजर गए। जमींदार अपने आदमियों के साथ आ गया। वक्त हो गया है या पैसे दो या घर खाली करो। हसान के पास कुछ नहीं था। उसने अपने घर वालों को देखा। आमना रो रही थी। बच्चे डरे हुए थे। बाहर निकलो अभी। आदमियों ने उन्हें बाहर निकाल दिया। थोड़ा सा सामान लेकर बाहर आ गए। आमना ने अपने घर को आखिरी बार देखा। जहां शादी के बाद सारी जिंदगी गुजारी थी। वो एक पल में चला गया। वो जोर-जोर से रोने लगी। फातिमा भी रो रही थी। अम्मी अब हम कहां जाएंगे? हसान के पास कोई जवाब नहीं था। वो सब लोगों के बाहर एक पुराने दरख्त के नीचे बैठ [संगीत] गया। बेघर और बेसहारा शाम होने को आई। ठंड बढ़ने लगे। बच्चे कांप रहे थे। खामदे ने उन्हें चादर में लपेट लिया। सफिया पास आई। हसान भाई यह सब मेरी वजह से हुआ है। नहीं सफिया तुम्हारी गलती नहीं है। यह मेरे फैसलों का नतीजा है। रात हो गई। आसमान पर तारे निकल आए। हसान का खानदान दरख्त के नीचे बैठा रहा। आमना ने पूछा हसान मुझे समझ नहीं आता क्या हम इतने बुरे हैं कि अल्लाह ने [संगीत] इतनी बड़ी सजा दे दी। नहीं यह सजा नहीं है। मुझे भी नहीं पता यह क्या है? उसी वक्त घंटी फिर बजी। छुन छुन छुन। सफेद घोड़ा अंधेरे से निकल कर सामने आ गया। आमना ने देखा तो उसका सब जवाब दे गया। तुमने हमारी जिंदगी बर्बाद कर दी। जाओ यहां से। हम तुम्हें नहीं चाहते। लेकिन घोड़ा वहीं खड़ा रहा। घंटी बजती रही। हसान उठा और घोड़े के पास गया। तुम फिर मुझे बुला रहे हो। अब मेरे पास क्या बचा है तुम्हें देने को? घर गया। पैसे गए। बीवी नाराज है। और क्या चाहते हो? घोड़े ने एक सिम की तरफ देखा। हसान समझ गया। फिर कोई मुसीबत है। नहीं। आमना ने कहा, इस बार नहीं जाओगे। अगर गए तो मैं बच्चों को लेकर चली जाऊंगी। मैं अब और बर्दाश्त नहीं कर सकती। हसान ने अपनी बीवी को देखा। फिर बच्चों को देखा। यह सबसे मुश्किल लम्हा था। एक तरफ अपने घर वाले दूसरी तरफ कोई अनजान जो मदद मांग रहा है। हसान ने गहरी सांस ली। मुझे जाना होगा। आमना की आंखों से आंसू बहने लगे। तो जाओ लेकिन याद रखना वापस आओगे तो हम यहां नहीं होंगे। हसान घोड़े पर सवार हुआ। आखिरी बार अपने घर वालों को देखा। इमरान और फातिमा रो रहे थे। आमना ने मुंह फेर लिया। घोड़ा तेजी से भागा। हसान के आंसू उसके गालों पर बह रहे थे। शायद उसने सब कुछ खो दिया था। घोड़ा बहुत दूर ले गया। पहाड़ों के पार जंगलों के बीच से 5 घंटे का लंबा सफर था। आखिरकार एक गार के सामने आकर रुका। अंदर से हल्की सी रोशनी आ रही थी। हसान घोड़े से उतरा और आहिस्ता-आहिस्ता अंदर गया। वहां एक लड़की बैठी थी। 15-16 साल की हो गई। उसकी आंखें बंद थी। कौन है? लड़की ने डर कर पूछा। हसान को एहसास हुआ कि यह लड़की आंधी है। डरो नहीं बेटी। मेरा नाम हसान है। तुम कौन हो? और यहां अकेली क्या कर रही हो? मेरा नाम नूरा है। लड़की ने आहिस्ता से बताया। मेरे अब्बू गुजर गए। सौतेली मां ने मुझे यहां छोड़ दिया। मैं अंधी हूं ना। किसी को मेरी जरूरत नहीं। तीन दिन से यहां हूं। भूखी और प्यासी। हसान का दिल भर आया। नहीं बेटी। अभी तुम्हारा वक्त नहीं आया। मैं तुम्हारी मदद करूंगा। लेकिन फिर उसे एहसास हुआ उसके पास तो खुद कुछ नहीं था। ना पैसे ना घर ना खाना। फिर भी उसने नूरा को सहारा दिया और घोड़े पर बिठाया। मैं तुम्हें अपने साथ ले जाऊंगा। लेकिन आप मुझे कहां ले जाएंगे? नूरा ने पूछा मैं अंधी हूं। किसी को मेरी जरूरत नहीं। तुम इंसान हो बेटी और हर इंसान की कीमत है। वो वापस कंफ चल पड़े। सुबह हो रही थी। जब उस दरख्त के पास पहुंचे जहां घर वालों को छोड़ा था। लेकिन वहां कोई नहीं था। आमना, इमरान, फातिमा सब चले गए थे। हसान वहीं बैठ गया। हसान वहीं बैठ गया। उसका घर गया। पैसे गए और अब घर वाले भी चले गए। वो रोने लगा पहली बार। उसके आंसू बह रहे थे। मैंने सब खो दिया। उसने कहा, "मेरा घर, मेरा माल और अब मेरा खानदान भी। क्या मैं गलत था? क्या नेकी करना इतना महंगा है?" नूरा ने उसका हाथ पकड़ा। नहीं, आप गलत नहीं हैं। आपने मेरी जान बचाई। आप तो फरिश्ते हैं। लेकिन हसान को कोई तसल्ली नहीं मिली। वह अंदर से टूट चुका था। शाम को हसान का पुराना दोस्त तारिक वहां से गुजरा। हसान तुम यहां क्या कर रहे हो भाई? हसान ने सारी कहानी सुनाई। तारिक को बहुत दुख हुआ। मेरे साथ चलो। मेरा घर रह मेरे घर रह सकते हो। नहीं तारिक मैं किसी पर बोझ नहीं बनना चाहता। लेकिन यहां कैसे रहोगे? और यह लड़की नोरा को तुम ले जाओ और उसकी देखभाल करना। लेकिन नोरा ने फौरन मना कर दिया। नहीं आपने मेरी जान बचाई है। मैं आपके साथ रहूंगी। चाहे जो भी हो जाए तारिक चला गया। वो रात हसान और नोरा ने दरख्त के नीचे गुजारी। ठंड बहुत थी और कंबल तक नहीं था। घोड़ा पास आया और हसान के साथ लेट गया। उसके गर्माहट से थोड़ी राहत मिली। उस रात हसान को एक अजीब ख्वाब आया। एक नौजवान शहजादा अंधेरी कैद में बंद था। रो रहा था। मदद मांग रहा था। मुझे बचाओ। शहजादा कह रहा था मैं सैकड़ों साल से कैद हूं। सिर्फ तुम ही मुझे आजाद कर सकते हो। लेकिन कैसे? मैं क्या करूं? रास्ता बहुत मुश्किल था। तुम्हें सब कुछ कुर्बान करना होगा। मैंने तो सब कुछ कुर्बान कर दिया है। हसान ने कहा, "मेरे पास तो अब कुछ भी नहीं बचा। शहजादे ने उसकी तरफ देखा। उसकी आंखें [संगीत] वही थी। गहरी, उदास, बिल्कुल सफेद घोड़े जैसी। अभी एक चीज बाकी है। हसान ने कहा, "क्या? लेकिन उससे पहले कोई जवाब मिले। हसान की आंखें खुल गई। रथ के नीचे रहने लगे। गांव के कुछ अच्छे लोग खाना दे जाते। तारिक भी रोज आता। एक दिन हसान बाजार में मजदूरी कर रहा था। अचानक एक आवाज सुनाई दी। फातिमा की आवाज। उसका दिल तेजी से धड़कने लगा। पलट कर देखा तो थोड़ी दूर आमना, इमरान और फातिमा खड़े थे। आमना वह भागता हुआ गया। आमना ने पलट कर देखा। एक लम्हे के लिए आंखों में नरमी आई। फिर चेहरा सख्त हो गया। तुम यहां क्या कर रहे हो? मैं यहीं रहता हूं। तुम लोग कहां थे? मेरे भाई के घर गए थे। लेकिन अब वापस आ गए हैं। एक छोटा सा मकान किराए पर लिया है। इमरान और फातिमा दौड़े और अब्बू से लिपट गए। अब्बू जान हम आपको बहुत याद करते हैं। हसान ने बच्चों को गले लगा लिया। आंखों से आंसू बह रहे थे। लेकिन आमना ने बच्चों को पीछे खींच लिया। चलो बच्चों हमें जाना है। आमना मुझे माफ कर दो। मुझे घर वापस आने दो। आमना ने उसकी तरफ देखा। हसान मैं तुमसे मोहब्बत करती हूं। लेकिन मैं वह जिंदगी नहीं जी सकती जहां हर रोज डर लगे। तुमने हमेशा दूसरों को हमसे ज्यादा अहमियत दी। मैं बदल गया हूं। अब समझ गया हूं। सच तो बताओ वो घोड़ा कहां है? हसान खामोश हो गया। हसान खामोश हो गया। घोड़ा अभी भी उसी के पास था। देखा आमना ने कहा तुम अभी भी उसी रास्ते पर हो। आमना वो बेजुबान जानवर है। मैं उसे छोड़ नहीं सकता। और हमें हमें तो छोड़ दिया ना। हसान के पास कोई जवाब नहीं था। आमना ने बच्चों को हाथ पकड़। आमना ने बच्चों का हाथ पकड़ा और चल दी। फातिमा और इमरान पीछे मुड़-मुड़ कर देख रहे थे। हसान वहीं खड़ा रहा। बस टूटा हुआ। उसी रात वापस आया तो नूरा ने महसूस कर लिया। क्या बात है? आप परेशान हैं। हसान ने सब कुछ बता दिया। नूरा ने उसका हाथ पकड़ा। आपकी बीवी सही कह रही है। शायद आपको घोड़े को छोड़ देना चाहिए। हसान ने घोड़े की तरफ देखा। वह दूर खड़ा था। उदास और अकेला। लेकिन उसका क्या कसूर है? और हर बार कुछ ना कुछ छीन जाता है। क्या आपने कभी सोचा? आखिर ऐसा क्यों होता है? हसान ने सोचा बहुत बार सोचा लेकिन अभी तक समझ नहीं आया। अगले कुछ दिन बड़ी मुश्किल से गुजरे। हसान मजदूरी करता। [संगीत] थोड़े पैसे कमाता थोड़े पैसे कमाता। नोरा के लिए खाना लाता। खुद कम खाता। एक रात फिर घंटी बजी। छिन छिन। हसान ने देखा घोड़ा फिर सामने खड़ा था। नहीं उसने कहा इस बार नहीं। मैं बहुत कुछ खो चुका हूं। लेकिन घंटी और जोर से बजने लगी। आवाज इतनी तेज हो गई कि कान दुखने लगे। बंद करो। घोड़ा उसके करीब आया। आंखों में इल्तजा थी। बेबसी थी। हसान ने गहरी सांस ली। ठीक है। आखिर बार लेकिन सुन लो। यह आखिरी बार है। वो घोड़े पर सवार हुआ। नोराज आ गई। कहां जा रहे हो? बस थोड़ी देर के लिए जल्दी वापस आ जाऊंगा। घोड़ा इस बार और भी दूर ले गया। शहर [संगीत] से बाहर सेहरा की तरफ पूरी रात चलता रहा। सुबह होने से पहले एक जंगल में पहुंचे। वहां एक डरावना मंजर था। 101 डाकू एक काफिले पर हमला कर रहे थे। औरतें और बच्चे चीख रहे थे। हसान का दिल जोर से धड़का। वो अकेला था और डाकू बहुत थे। लेकिन वह लोग मुसीबत में थे। उसने हिम्मत की और आगे बढ़ा। रुको। डाकुओं का सरदार पलटा। वह खौफनाक चेहरे वाला था। एक और बेवकूफ सरदार ने हंसकर कहा, "उसे भी मार डालो।" दो डाकू हसान की तरफ बढ़े। हसान के पास कोई हथियार नहीं था। वह जानता था शायद आज उसकी जिंदगी खत्म हो जाएगी। लेकिन तभी सफेद घोड़ा आगे आया। उसने अपने पैरों से एक डाकू को मारा। दूसरे को धक्का दे दिया। घंटी इतनी तेज बजने लगी कि डाकू कान पकड़ कर बैठ गए। घोड़े के जिस्म से अजीब [संगीत] रोशनी निकलने लगी। इतनी तेज के डाकू डर गए। यह जादुई जानवर है। यह जादुई जानवर है। भागो। डाकू भाग गए और काफिले के लोग बच गए। काफिले का सरदार हसान के पास आया। तुमने हमारी जाने बचाई। हम शुक्रगुजार हैं। तुम्हें क्या चाहिए? हसान ने इंकार किया। मुझे कुछ नहीं चाहिए। बस अल्लाह की रजा चाहिए। लेकिन सरदार ने इसरार किया। उसने एक थैली निकाली जिसमें सोने के सिक्के थे। यह लो हसान ने मना करना चाहा। लेकिन सरदार ने थैली उसके हाथ में रख दी और चला गया। थैली में इतने सिक्के थे कि वह महीनों आराम से रह सकता था। हसान का दिल खामोशी से भर गया। शायद वह अपनी जिंदगी फिर से बना सकता था। रास्ते भर सोचता रहा। एक छोटा घर लेगा। आमना और बच्चों को वापस बुलाएगा। लेकिन जब [संगीत] गांव के करीब पहुंचा तो धुआं उठता देखा। दिल डूब गया। तेजी से भागा। गांव में आग लगी थी। कई घर जल रहे थे। लोग चीख रहे थे। हसान ने एक आदमी को पकड़ा। क्या हुआ? डाकू आदमी ने कहा, वही जिन्हें तुमने सुबह भगाया। बदला लेने आए हैं। गांव में आग लगा दी। हसान का दिल बैठ गया। उसकी वजह से गांव को तकलीफ हुई। वह भागकर उस जगह गया जहां नूरा थी। लेकिन वहां नहीं थी। नूरा कहां हो? तभी एक आवाज सुनी। मदद आवाज जलते मकान से आ रही थी। यह वही मकान था जो आमना ने किराए पर लिया था। अंदर से नोरा की आवाजें थी। लेकिन साथ ही फातिमा और इमरान की आवाें भी। हसान का खून जम गया। उसके बच्चे और नोरा जलते मकान में फंसे थे। वो बगैर सोचे अंदर घुस गया। धुआं इतना था कि सांस लेना मुश्किल था। आग की लिपटें चारों तरफ थी। अब्बू जान फातिमा की आवाज आई। हम ऊपर हैं। हसान सीढ़ियां चढ़ने लगा। लकड़ी जल रही थी। हर कदम पर टूटने का खतरा था। ऊपर पहुंचा तो देखा फातिमा इमरान और नूरा एक कोने में थे। आग उनकी तरफ बढ़ रही थी। अब्बू जान हमें बचाइए। हां बेटा मैं तुम्हें बचाऊंगा। उसने पहले फातिमा को उठाया। उसने पहले फातिमा को उठाया। नीचे ले जाकर बाहर छोड़ा। फिर वापस आया और इमरान को ले गया। अब सिर्फ नूरा बची थी। हसान तीसरी बार ऊपर गया। लेकिन जैसे ही नोरा को उठाया सीढ़ियां टूट गई। वो ऊपर फंस गए। वो ऊपर फंस गए। आग करीब आ रही थी। नीचे से फातिमा और इमरान चीखे। अब्बू जान हसान ने खिड़की से बाहर देखा। बहुत ऊंचाई थी। नोरा मैं तुम्हें खिड़की से नीचे उतारता हूं। लेकिन आप मेरी फिक्र मत करो। उसने अपनी चादर फाड़ी, रस्सी बनाई। नोरा को आहिस्ता-आहिस्ता नीचे उतारा। लोगों ने पकड़ लिया। अब हसान अकेला रह गया था। आग ने पूरा कमरा घेर लिया था। कोई रास्ता नहीं था। या अल्लाह उसने कहा अगर आज मेरा वक्त आ गया है तो मैं राजी हूं बस मेरे बच्चों का ख्याल रखना तभी जोर की आवाज आई दीवार टूट गई सफेद घोड़ा अंदर आया घोड़े ने इशारा किया कि सवार हो जाइए हसान घोड़े पर बैठा घोड़ा खिड़की से बाहर कूद गया वो जमीन पर गिरे लेकिन घोड़े ने अपने जिस्म से हसान को बचाया हसान को कुछ नहीं हुआ लेकिन घोड़ा बुरी तरह जख्मी था लोगों ने हसान को संभाला फातिमा और इमरान लिपट गए लेकिन हसान की नजर घोड़े पर थी। वह जमीन पर पड़ा था। सांस ले रहा था। पैर टूट गए थे। हसान घोड़े के पास गया। उसका सर अपनी गोद में रखा। नहीं, तुमने मेरी जान बचाई। मैं तुझे यूं नहीं जाने दे सकता। घोड़े ने उसकी तरफ देखा। आंखों में अब उदासी नहीं थी। सिर्फ सुकून था। तभी एक अजीब बात हुई। घोड़े के जिस्म से रोशनी निकलने लगी। इतनी देर कि सबने आंखें बंद कर ली। जब रोशनी कम हुई तो घोड़ा गायब था। उसकी जगह एक नौजवान शहजादा लेटा हुआ था। शाही कपड़े पहने। लेकिन पुराने और फटे हुए। हसान हैरान हो गया। तुम कौन हो? शहजादे ने मुस्कुराते हुए कहा, "मेरा नाम असलान है। मैं बगदाद का शहजादा था। क्या मतलब? अरसलान ने अपनी कहानी सुनाई। मैं 300 साल पहले जीता था। मगर और खुद गर्स था। सिर्फ अपने बारे में सोचता था। एक दिन एक बूढ़ी दरवेश आई। भूखी प्यासी थी। मैंने तत्कार दिया। अरसलान ने सांस ली। वह असल में परी थी। उसने लानत दे दी। कहा जब तक मैं बेगरज़ नेकी नहीं सीखूंगा जानवरों की शक्ल में भटकता रहूंगा। और जो मेरा मालिक होगा उसे तकलीफें छीननी होंगी और हर नेकी कीमत चुकानी होगी। फिर हसान को समझ आया। हसान को समझ आ गई। तो इसलिए हर बार जब मैंने मदद मांगी अरसलान ने कहा, तुम्हें कुछ खोना पड़ता था। यह लानत का हिस्सा था। मैं रोकना चाहता था लेकिन घंटी अपने आप बजती रहती थी। लेकिन क्यों मुझे? क्योंकि सिर्फ तुमने बगैर लालच के मेरी मदद की। जब पहली बार मिला, जब पहली बार मिला तो तुमने मुझे घर ले गए। खाना दिया, कुछ नहीं मांगा। बस नेकी की और अब लानत [संगीत] टूट गई है। अरसलान की आंखें फिर आई। तुमने आखिरी कुर्बानी दे दी। अपनी जान की परवाह किए बगैर मकान में गए। सब खोया। लेकिन एक नेकी का रास्ता नहीं छोड़ा। तुमने मुझे सिखाया कि असली नेकी क्या होती है। अरसलान की सांसे धीमी होने लगी। क्या अब मैं आजाद हूं और तुम्हारा इनाम मुझे इनाम नहीं चाहिए। लेकिन मिलेगा वो थैली देखो। हसान ने थैली खोली। सोने के सिक्के नहीं थे बल्कि हीरे और जवाहरात थे। यह कैसे? यह तुम्हारे सब्र और नेकी का सिला है। अल्लाह ने तुम्हारी हर कुर्बानी देखी। अरसलान की आंखें बंद होने लगी। एक आखिरी बात नूरा कोई आम लड़की नहीं। वह वही परी है जिसने मुझ पर लान डाली थी। हसान ने हैरानी से नोरा की तरफ देखा। नोरा आहिस्ता से मुस्कुराई। अचानक उसकी आंखें खुल गई। वह अब अंधी नहीं थी। नूर उसके चेहरे से निकलने लगा। मैं अरसलान को छुड़ाने आई थी। नोरा ने कहा सिर्फ सच्चा मोमिन यह कर सकता है। इसलिए तुम्हारी आजमाइश ली। हसान को सब कुछ समझ आने लगा। शुक्रिया हसान। अरसलान ने कहा, अब मैं सुकून से जा सकता हूं। इतना कहकर अरसलान ने आखिरी सांस ली। उसका जिस्म आहिस्ताआहिस्ता गायब होने लगा। रोशनी में बदल गया। चांदी की घंटी जमीन पर पड़ी रह गई। नूरा ने अपनी असली शक्ल जाहिर की। एक खूबसूरत परी थी। कपड़ों से नूर की किरणें निकल रही थी। पीछे सफेद पर थे। गांव के लोग हैरानी से देख रहे थे। फातिमा और इमरान डर से अब्बू से चिपक गए। हसान नूरा ने कहा, तुमने मेरी बहुत बड़ी आजमाइश पास की। तुमने सब कुर्बान किया लेकिन नेकी का रास्ता नहीं छोड़ा। अल्लाह ने तुम्हारी हर दुआ सुनी है। उसने हाथ उठाया। नूरानी रोशनी निकली। गांव के जिले मकान ठीक होने लगे। आग बुझ गई और जख्मी लोग भी ठीक हो गए। लोग अल्लाह का शुक्र अदा करने लगे। तुम्हारी एक आखिरी आजमाइश अभी बाकी है। नूरा ने कहा, "कौन सी?" हसान ने कहा, तुम्हारे पास [संगीत] अब बहुत दौलत है। उसने थैली की तरफ इशारा किया। असली सवाल यह है कि क्या उसने तुम्हारा दिल बदल दिया? अब तुम भी मखरूर बन जाओगे।" हसान ने थैली को देखा और फिर अपने बच्चों को नहीं उसने कहा दौलत तो आती जाती रहती है लेकिन जो मैंने सबक सीखा है वह हमेशा के लिए है। नेकी करना मेरी फितरत बन गया है। नूरा मुस्कुराई बहुत खूब। अब तुम्हें पूरा इनाम मिलेगा। उसने फिर हाथ उठाया और नूर हसन की तरफ आया और उसे छू गया। मैंने तुम्हें खास नेमत दी है। नूरा ने कहा अब जब भी तुम सच्चे दिल से किसी की मदद करोगे अल्लाह तुम्हारी दौलत में बरकत देगा। लेकिन अगर कभी भी मगरूर होकर किसी को धत्कारोगे तो सब कुछ छीन जाएगा। मैं वादा करता हूं ऐसा नहीं होगा। नोरा ने चांदी की घंटी उठाई। यह अब तुम्हारे पास रहेगी। लेकिन अब इसमें कोई लानत नहीं। यह सिर्फ याद है उन तकलीफों की जो तुमने झेली है और उस नेकी की जो तुमने की है। उसने घंटी हसान को दे दी। अब मुझे जाना होगा। लेकिन याद रखो मैं हमेशा नजर रखूंगी। अगर कभी जरूरत पड़ी बस घंटी बजाना। इतना कह के नूरा रोशनी में बदल गई और आसमान में उड़ गई। हसान वहीं खड़ा रहा। घंटी हाथ मिली है। तभी पीछे से आवाज आई। मैं यहां हूं। हसान ने पलट कर देखा तो आमना खड़ी थी। चेहरे पर आंसू थे। आमना आमना आगे बढ़ी। मैंने सारा मंजर देखा कि कैसे तुमने अपनी जान की परवाह किए बगैर बच्चों को बचाया। मुझे माफ करो। मैंने तुम पर शक किया। तुम्हारी नेकी को नहीं समझा। नहीं आमना तुम सही थी। मैं तुम्हारी तकलीफों को नहीं समझ रहा था। आमना ने उसका हाथ पकड़ा। आज मैंने देखा तुम किस मिट्टी के बने हो। अल्लाह ने तुम्हें बड़ा सिला दिया। दोनों एक दूसरे को गले लगा लिए। फातिमा और इमरान भी दौड़ कर आए। मुझे घर वापस ले चलो। आमना ने कहा, जहां तुम हो वही मेरा घर है। पूरा खानदान एक दूसरे से लिपट कर रोने लगा। लेकिन यह खुशी के आंसू थे। गांव के लोगों ने तालियां बजाई। अगले दिन से हसान ने नई जिंदगी शुरू की। उसने जवाहरात बेचे। पहले एक अच्छा घर खरीदा। फिर जमीन खरीदी। लेकिन आधी दौलत गांव के गरीबों में बांट दी। उसने मदरिस्सा बनाया जहां गरीब बच्चे मुफ्त पड़ेंगे। मुसाफिर खाना बनाया जहां राहगीर ठहरा करेंगे। जो बीमार होते हैं उनकी दवा का इंतजाम करना। जो भूखे हैं उनको खाना खिलाना। और नूरा ने सच कहा था जितना देता है उतना ही मिलता है। फसलें हमेशा अच्छी होती हैं। कारोबार फलता फूलता है लेकिन हसान कभी मकरूर नहीं हुआ। हमेशा आजिज और नेक रहा। एक दिन एक बूढ़ा भिखारी आया। नौकर ने भगाना चाहा। चले जाओ। मालिक मशरूफ है। लेकिन हसान ने फौरन रोका। नहीं नहीं अंदर लाओ। वो खुद बूढ़े के पास गया और अंदर ले आया। अपने हाथों से खाना पेश किया। लेकिन मैं तो गरीब भिखारी हूं। लेकिन मैं तो गरीब भिखारी हूं। अमीरी गरीबी सब फानी है। हसान ने कहा असली दौलत नेक दिल है। अल्लाह की नजर में हम सब बराबर हैं। आमना ने यह देखा और मुस्कुराई। अल्लाह ने मुझे तुम जैसा शौहर दिया। यह मेरी सबसे बड़ी दौलत है। साल गुजरते गए। हसान की शोहरत फैलने लगी। दूर-दूर से लोग मिलने आते। मदद मांगते। हसान हर किसी की मदद करता। इमरान ने शादी कर ली लेकिन वालिद का काम जारी रखा। फातिमा ने भी शादी कर ली और अपने शौहर के साथ लोगों की मदद करते हसान बूढ़ा होने लगा। बाल सफेद हो गए। लेकिन आंखों में वही चमक थी। दिल में वही नेकी थी। एक दिन हसान ने अपनी आखिरी सांस ली। शांति से आमना का हाथ पकड़े हुए चल बसा। पूरे गांव में मातम बिछ गया। हजारों लोग जनाजे में शामिल हो गए। हसान को दफनाया जा रहा था। कब्र पर लिखा गया यहां हसान आराम फरमा रहे हैं। एक नेक दिल इंसान जिसने अपनी पूरी जिंदगी दूसरों की खिदमत में गुजार दी। इमरान ने चांदी की घंटी को संभाल कर रखा। उसने अपने बच्चों को वही सबक सिखाया जो वालिद ने उसे सिखाया था और घंटी की कहानी सुनाई। पीढ़ी दर पीढ़ी यह सिलसिला चलता रहा। हसान की औलाद हमेशा नेकी का रास्ता अपनाती रही। और जब भी कोई घंटी बजाता छिन छिन तो उन्हें हसान की याद आती। उसके सब्र की याद आती और उसकी नेकी की मिसाल याद आती। सैकड़ों सालों बाद जब हस सांस की कहानी अफसाना बन गई तब भी लोग उसे याद करते। हजारों में चौपालों पर लोग कहानियां सुनाते। एक नेक दिल इंसान की जिसने जादुई घोड़े से सबक सीखे और उन्हें पूरी जिंदगी दूसरों की खिदमत में गुजार दी और चांदी की घंटी वह आज भी मौजूद थी। [संगीत] इस कहानी का सबक यह है नेकी का रास्ता कभी आसान नहीं होता। कभी-कभी बड़ी कुर्बानियां भी देनी पड़ती हैं। लेकिन अगर हम सब्र रखें, अपने ईमान पर यकीन रखें और नेकी का रास्ता ना छोड़ें तो अल्लाह हमारे साथ होता है। असली दौलत पैसे में नहीं नेक दिल में होती है। हम्म
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