Noor e Muhammad ﷺ K Sath Aur Kitny Noor? | Dawat e Zul Ashira Ka Waqia | Allama Talib Hussain Johri

Ali Salar Tv3,462 words

Full Transcript

बिस्मिल्लाहिर्रहमानहीम। भाई बहुत बहुत तवज्जो रखना। बहुत तवज्जो रखना। इसलिए कि ये वो नाजुक मरले फिक्र है जहां अपने सुनने वालों को रोकना चाह रहा हूं। या मां जाओ देखो एक आयत सूर हदीस से 57वा सूर। दूसरी आयत सूर तहरीम से 66वां सूर। ये हवाले इसलिए दिए कि तर्जुमा जाके देखना। यामा ला नबिया वज़ना आम कयामत के दिन अल्लाह अपने नबी को रुसवा नहीं होने देगा क्या शान है सुभान अल्लाह सुनना भाई सुनना सुनना कयामत के दिन अल्लाह अपने नबी को रुसवा नहीं होने देगा यामा ला नबिया वज़ना आन अल्लाह कयामत के दिन अपने नबी को रुसवा नहीं होने देगा और उसे भी रुसवा नहीं होने देगा जो नबी के साथी ईमान [प्रशंसा] भाई फिर सुन फिर सुनना यामा ला नबिया वज़ना आमनु माहु आमनु माहु जो नबी के साथ ईमान लाया भाई मैं नबी पर ईमान लाया तुम नबी पर ईमान लाए सराम नबी पर ईमान लाए मुतहरात नबी पर ईमान लाई। मुल्ला नबी पर ईमान लाया। मैंने चाहा कि अपने नौजवान दोस्तों को जरा सा कुरान से मानूस कर दूं। दो आयतें हदिया कर रहा हूं। हवाले दे चुका। पहली आयत उस सिलसिले की। अब बहुत आराम से सुनना। यमा ला नबिया वज़ना कयामत का दिन अल्लाह बड़ी इज्जत देगा अपने नबी को। और उसे भी इज्जत देगा जो नबी के साथ ईमान लाया। नहीं है आयत में कि नबी पर ईमान लाया। नहीं साथ ईमान लाया। भई ये कौन है? ये कौन है जो साथ ईमान लाया? अब हदीस पढ़ के बताऊं ये कौन है? एक दिन मेरा नबी मस्जिद में बैठा हुआ था। ठीक है ना? और शम रिसालत के परवाने उसके दोस्त उस पर ईमान लाने वाले वाह। सुभान अल्लाह मेरे मेरे मेरे नबी पर ईमान लाने वाले मेरे नबी को घेरे हुए बैठे थे एक मर्तबा मेरे नबी ने सर बुलंद किया और कहा मेरे साथियों सुनो कुंत नबीन व आदम बैन माए वती मैं उस वक्त भी नबी था बहुत मशहूर रिवायत है मैं उस वक्त भी नबी था कि अभी आदम का पुतला नहीं बना था और मैं नबी था सुन लिया एक मर्तबा एक मर्तबा सुन लिया फरमाया कु नबी व आदमती मैं उस वक्त भी नबी था कि अभी तुम्हारा बाप आदम पैदा नहीं हुआ था सुन लिया फरमाया कु नबी व आदमती मैं उस वक्त भी नबी था कि अभी तुम्हारा बाप आदम पैदा नहीं हुआ था अब जब तीन चार मर्तबा एक ही बात कही जाएगी तो एक से दूसरे को देखा लेकिन अल्हम्दुलिल्लाह के किसी ने ज़हन रसूल पर इल्जाम नहीं लगाया। बार-बार फरमा रहे हैं कु नबी व आदमती कु नबी व आदमन राबी कहता है के पैगंबर फरमाते जा रहे हैं इतने में मस्जिद के दरवाजे से अली दाखिल हुए और ये कहते हुए दाखिल हुए या रसूल अल्लाह व कुल व आदम बच्चे [प्रशंसा] [संगीत] अब समझ समझ में आया कि वो साथ ईमान लाने वाला कौन है? समझ गए ना? वो साथ ईमान लाने वाला कौन है? समझ में आ गया? यमा ला नबिया वज़नानु कयामत के दिन अल्लाह अपने नबी को बड़ी इज्जत देगा। और वो जो नबी के साथ ईमान लाया है। उसे भी बड़ी इज्जत देगा। अब सुनोगे जुमला आगे का। अल्लाह ने क्या कहा? नूर यनादी व बेमान वो नबी के साथ ईमान लाने वाला जब मैदान हशर में आएगा तो उसका नूर उसके आगे भी चल रहा होगा उसके दाहिने भी चल रहा होगा उसके बाएं भी चल रहा होगा [संगीत] समझ रहे हो ना नाम नहीं लूंगा साथ ईमान लाने वाले का अब नाम नहीं लूंगा तवज्जो रहे यानी कमाल हो गया कि वो नबी के साथ है जो ईमान लाया है वो तो नूर वाला है खुद नबी नूर दूर वाला नहीं है। भाई समझ रहे हो बात को? बात को समझ रहे हो ना? अच्छा भाई तो ये एक आयत तुम्हारी खिदमत में हदिया कर दे। इसे ज़हन में रखना। और अब दूसरी आयत सुनो। योमा ये भी आयत योमा से शुरू हो रही है। लेकिन फिर उस आयत को ज़हन में जरा ताज़ा कर लो। यामा ला नबिया वज़ना कयामत के दिन अल्लाह बड़ी इज़्ज़त देगा यमा कयामत के दिन ठीक है ना अब दूसरी आयत सुनो योमा यकूलुल मुनाफिकून व मुनाफिकात उस दिन कयामत के दिन मुनाफिक मर्द बोलेंगे मुनाफिक औरतें बोलेंगी कमाल हो गया मर्दों का अलग तस्करा है औरतों का अलग तस्करा है वाह वाह वाह वाह जेब से तुमने यह रिवायत नहीं निकाली। हदीस हदीस नहीं है कुरान है। कुरान है। अच्छा भाई आप रुको रुको इस मुकाम पर। थोड़ी सी जरा बात तो हो जाए ना। कौन बोलेगा भाई कयामत के दिन? मुनाफिक मर्द मुनाफिक औरतें मर्दों को अलग बयान किया। मुनाफिक मर्दों को अलग बयान किया। मुनाफिक औरतों को अलग बयान किया। बिस्मिल्लाहिर्रहमा रहीम। कुल या काफिरून। ऐ काफिरों हबीब कह दो कि ऐ काफिरों वाह वाह वाह ऐ कुफ्र करने वालों करने वालियों का तस्करा नहीं वाह वाह वाह वाह वाह वाह सुभान सुभान अल्लाह सुभान अल्लाह सुभान क्या ख्याल है भाई के इससे सिफत काफिरून मुराद है काफिरात मुराद नहीं है भाई काफिरून में काफिरात खुद शामिल है ठीक है ना अच्छा अब या अयू अलजीना आम आनु ऐ ईमान लाने वालों हमने तुम पर रोज़े को वाजिब किया। ऐ ईमान लाने वालों नमाज़ पढ़ो। ऐ अब आयतें नहीं पढ़ रहा हूं मैं। ऐ ईमान लाने वालों हज करो। अब ऐ ईमान लाने वालों जकात दो। अब ये आयत भाई एक दो सुनते ही जाओ। यानाकुम सलाम कमाना। ऐ ईमान लाने वालों ऐ ईमान लाने वालों हमने तुम पे रोज़ को वाजिब किया। ईमान लाने वालियों पे वाजिब नहीं किया। आ सुभान अल्लाह भाई ईमान लाने वालों पे वाजिब नहीं किया अब ये मेरा एतराज है एतराज है ठीक है ना याना सला ऐ ईमान लाने वालों नमाज़ पढ़ो क्या ईमान लाने वाली बच गई सवाल है कहने लगे नहीं भाई बची नहीं भाई हुआ क्या कहा ईमान लाने वालों में ईमान लाने वालियां शामिल है ठीक मान लिया ईमान ईमान लाने वालों में ईमान लाने वालियां शामिल है। अच्छा भाई मान लिया हमने तो मोमिनून में मोमिनात शामिल हैं। काफिरून में काफिरात शामिल है। तो क्या मुनाफिकून में मुनाफिकात शामिल नहीं है? कुछ मोहतरम खवातीन [प्रशंसा] [संगीत] मोहम्मद के साथ ईमान लाने वाला रसूल के साथ ईमान लाने वाला बड़ी शान के साथ अपने नूर के झुरमुठ में ठीक है ना नूर यसामान वो जब ईमान लाने वाला आएगा तो नूर के हके में होगा वो आ रहा है बड़ी शान के ठीक मैदान हशर में और मुनाफिक मर्द और मुनाफिक औरतें खड़ी हुई है यमा याकूल मुनाफिकून व मुनाफिकात मुनाफिक मर्द बोलेंगे मुनाफिक औरतें बोलेंगी किससे बोलेंगी भाई लज़ना आमु उस ईमान लाने वाले से उन भाई रुको आ भाई ये जो सिचुएशन बन रही है आयत से वो सिचुएशन तुम तक पहुंच रही है मुनाफिक मर्द मुनाफिक औरतें खड़ी हुई है और वो नबी के साथ ईमान लाने वाला बड़ी शान के साथ मैदान हजर में आया ये दोनों चीखे औरतें भी चीखी मर्द भी चीखे उन अरे भाई रुको वो रुक गया कहा भाई बात क्या है कहा नब नूर तुम्हारे नूर से थोड़ा सा हम भी ले रहे हैं ना कौम भाई ईमान लाने वाला आया मुनाफिक मर्दों ने देखा मुनाफिक औरतों ने देखा और दोनों ने बकब पुकार के कहा भाई रुकना। रुकना वो रुका। कहा क्या बात है? कहा नकबे तो नूरकुम। तुम्हारे नूर से थोड़ा सा हम भी ले रहे हैं। जानते हो क्या जवाब दिया? उस ईमान लाने वाले ने कयामत का मंजर है जो कुरान ने नकल किया। कहने लगा ये तुम हमसे नूर क्या मांग रहे हो? नूरा जाओ वापस दुनिया में जाओ और जिन्हें अपना पीर बना के आए थे उनसे नूर लेके आओ। [प्रशंसा] आगे चलो मेरे साथ अल्लाह नूर समा अल्लाह आसमान और जमीन का नूर है अल्लाह नूर वमारी मलता व ईमान व् नूरा हमने कुरान को नूर बनाया हमने ईमान को नूर बनाया अल्लाह नूर कुरान नूर ईमान नूर नूर वन हमने मोहम्मद को नूर बनाया। अल्लाह नूर, कुरान नूर, ईमान नूर, मोहम्मद नूर। तो अब अगर मोहम्मद को क्यों नूर बनाया? क्यों नूर बनाया? इस जगह कुरान है नूर मुकम्मल। कुरान देखो आप ये समझते चलो कि मोहम्मद रसूल को नूर क्यों बनाया? भाई कुरान है नूर। कुरान नूर है। वो अगर किसी मिट्टी के पुतले पे उतर आए तो परख्त उड़ जाए। वाह वाह वाह नूर को नूर ही बर्दाश्त कर सकता है। वाह वाह भैया सुनो अब मुझे इजाजत दो कि जरा सा ऑफ द रिकॉर्ड भी तुमसे बात कर लूं। ठीक है ना? ऑफ द रिकॉर्ड देखो कुरान नूर है। अगर मिट्टी के पुतले पे उतरा आए तो उसके परख से उड़ जाए। ये मैंने खिताबत का जुमला नहीं कहा। फलमा तज्ला रब जब अल्लाह ने तौर पर हल्की सी छोटू डाली जाहु धक्का उसके परख से उड़ गए मूसा सका और मूसा बेहोश हो के गिर गए ये ऑफ द रिकॉर्ड है। लेकिन मैं ये समझाना चाह रहा हूं कि कुरान नूर है तो मोहम्मद को नूर क्यों बनाया? वह पूरा नूर नहीं था। मूसा के पास जो रोशनी आई थी ना सूर पे वह पूरा नूर नहीं था। तजल्ला हल्की सी नूर की किरण थी। वाह वाह वाह वाह वाह हल्की सी सुभान अल्लाह सुभान अल्लाह। सुभान अल्लाह। हल्की सी नूर की किरण किरण थे। भाई बहुत तवज्जो रहे। नूर की किरण आई। नूर की किरण आई। मूसा बेहोश हुए। वाह वाह। सहाबी जल गए तो सुरमा हो गया एक अमल तीन र अमल [प्रशंसा] सुभान अल्लाह सुभान अल्लाह एक अमल तीन रेंज अमल मूसा मूसा अल सलातो सलाम फकत बेहोश हुए ठीक और जो साथ थे वो जल गए साथ होने ने जलने से नहीं बचाया वाह वाह! सुभान अल्लाह। साथ होने ने जलने से नहीं बचाया। मूसा बेहोश हुए। साथ ही जल गए। ना नबी साथियों जैसा, ना साथी नबी जैसा। ये ये बात तो ये बात तो वाज़ होती जा रही है ना? तो एक जुमला और सुनते जाओ। मुझे कुछ नहीं मालूम वो नूर क्या था। जिसकी छूट आई थी मूसा पर। मुझे कुछ नहीं मालूम लेकिन इतना चाहता हूं इतना जानता हूं और चाहता हूं कि तुम तक पहुंच जाए ये मैसेज वो जो तजल्ली हुई थी वो जो नूर चमका था मुझे नहीं मालूम उसकी माहियत क्या थी उसकी कैफियत क्या थी वो नूर क्या था जाहिर है कि अल्लाह ने नूर की छूट डाली थी मुझे तो कुछ नहीं मालूम वो नूर था क्या लेकिन एक बात जानता हूं के वो नूर ऐसा था जिसने पत्थर को तोड़ दिया वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह कुछ समझ में आई भाई कोई बात कुछ वादे हुई पत्थर टूटा या नहीं टूटा टूटा जानो धक्का पहाड़ पत्थर ही पत्थर है तोड़ दिया तोड़फोड़ के बराबर कर दिया पत्थर टूट गया तो इतना तो मेरी समझ में आ गया कि वो नूर जो भी हो वो पत्थर को तोड़ने वाला नूर है कौन है मुझे नहीं मालूम बस इतना बतलाओ के काबे की दीवार मिट्टी की [प्रशंसा] [प्रशंसा] थोड़ा थोड़ी सी तजल्ली हुई और दूर के परख्ते उड़ गए। मूसा के साथी जल गए। मूसा बेहोश हो गए। कुरान तो पूरा नूर है। अगर वो मिट्टी के पुतले पे उतर आता। तो अगर कुरान नूर है तो ऐसा दिल चाहिए जो नूर का हो। इसलिए मोहम्मद नूर अब समझ में आया कि मोहम्मद नूर क्यों है? इसलिए कि कुरान को उतरना है मोहम्मद के कल पर। मोहम्मद नूर, अल्लाह नूर। कुरान नूर। ईमान नूर। मेरा नबी नूर। अब जब मेरा नबी इस दुनिया से जाने लगे तो कुरान का वारिस कौन हो? इसलिए मिट्टी का पुतला तो नहीं हो सकता। अब नबी नबी दुनिया से जाने लगे तो इस कुरान का वारिस कौन हो? मिट्टी का पुतला बारिश नहीं हो सकता। तब कहां तलाश करें के मोहम्मद के बाद नूर कौन है? अब एक आयत एक रिवायत वमारी मल किताब व ईमान व नूरा हबीब ईमान नूर है कुरान ने कहा ईमान नूर है और मेरे मोहम्मद ने खंदक में कहा ईमान कुल [प्रशंसा] जाहिर है कि दामन व में बहुत ज्यादा गुंजाइश नहीं है आज गुफ्तगू को इसी इसी मरहले पे रोकूंगा लेकिन गुफ्तगू अभी तमाम नहीं हुई सुनना अल्लाह नूर कुरान नूर ईमान नूर मोहम्मद नूर और वो नूर जिसे मोहम्मद ने ईमान कहा अब जब नूर है जब नूर है तो अब जुलशीरा की दावत कोई और नहीं देगा। नूर ने नूर से कहा भाई अब मैं अब मैं कैसे अपने सुनने वालों की खिदमत पे अर्श करूं भाई एक जुमला दरमियान में आ गया तो वो भी सुनते जाओ ये जो अली और फातिमा की शादी है जानते हो आयत क्या आई रिवायत क्या आई थी हुक्म क्या लाए जिब्रील या रसूल अल्लाह जब नूर बिन नूर वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह अब इसे ज़हन में रखना यह हेडलाइंस हैं और कभी अगली तकरीरों में काम आ जाएगी अच्छा भाई तो अब नूर को हुकुम हुआ नूर की तरफ से के अशरा की दावत दे दो कल यही तो हम रुके थे ना सुनो आराम से सुनो ah अब जाहिर है कि बहुत ज्यादा वक्त नहीं लूंगा लेकिन अब कुछ काम की बातें भी सुनते जाओ ये सारी बातें काम की है या कुरान है या हदीस है लेकिन जरा सुनते जाओ अली जाओ अब्दुल अशरा की दावत देके आओ देके आए भाई किस किस बात की दावत दी थी खाने की यही है ना अच्छा आयत क्या थी व अंजिल अरत अकरबीन हबीब लोगों को इस्लाम की दावत दो और दावत किस चीज की दी है तम की वाह वाह वाह वाह दावत इस्लाम तो नहीं दी दावत ताम दी है तो अब ये हुआ क्या कि कहा गया कि इस्लाम की दावत दो लोगों को और रसूल ने खाने की दावत दे दी तो दिल में यह है कि जब यह खा लेंगे तो मैं इन्हें इस्लाम की दावत दूंगा। दिल में है इस्लाम की दावत जबान पे है ताम की दावत तो जिस नबी की नबूवत का पहला ही दिन तक से शुरू हो रुक के सुनना इसलिए कि बहुत ज्यादा उलझाना नहीं चाह रहा हूं मसले को साफ-साफ सुनो अली ने खाने की दावत दी अच्छा जानते हो तारीखों ने क्या लिखा है कि इतना थोड़ा सा खाना था के एक सेहतमंद अरब अकेला पूरा खाना खा सकता था। पहले नबी ने खाया और कहा खाओ 80 आदमी शेर हुए। ये कमाल है। अभी मेरे नबी ने दावत इस्लाम नहीं दी। ठीक है ना? अभी नबूवत का ऐलान नहीं किया। यही तो फर्क है दूसरे अंबिया में। और मेरे नबी में दूसरे अंबिया पहले अपनी नबूवत का ऐलान करते हैं। फिर मोजजा दिखलाते हैं। मेरा मोहम्मद पहले मोजजा दिखलाता है। फिर ऐलान करता है। जा रहा हूं और उसी मरहले पे आज बात रुकेगी। अह जब मैंने जुलाशीरा के वाक्य को देखा तो सबके नाम तो नहीं मिले। मर्दों में से कुछ के नाम मिले। और औरतों में मिला के फकत दो थे उस दावत में। कमाल हो गया। सफिया बिनते अब्दुल मुत्तलिब रसूल की फूफी। फातिमा बिनते मोहम्मद रसूल की बेटी। और बेटियां कहां थी मुझे कुछ नहीं मालूम। सुभान अल्लाह। सुभान अल्लाह। सुभान अल्लाह। वाह वाह! सुभान अल्लाह। मैसेज पहुंच गया? वाह वाह। मैसेज पहुंच गया? अब यह मजमा है जिसमें मेरे नबी को बोलना है। मेरे नबी को बोलना है। अब मैं उस मरहले तक आ गया जिस मरहरे के लिए तुम्हें रोका है। रोजाना अबू लहब गुस्ताखियां कर रहा था। अबू तालिब ने डांट के उसे बिठा दिया। कुम डांट के बिठाया। पैगंबर से कहा कौम या सैयदी व मौलाई ऐ मेरे सैयद सरदार ऐ मेरे आका मौला आप उठ के खड़े हो जाए वक्लम उम या सैयदी वो मौलाई ये जुमला अबू तालिब का ज़हन में रखना ऐ मेरे सैयद सरदार और ऐ मेरे आका मौला आप उठ के खड़े हो जाए या सैयदी व मौलाई व तकम बेमा तहबदा और आप इन लोगों के सामने वो बयान करें जो आपके दिल में है जो आपकी मर्जी है अब तीन लफज़ सुनोगे वग रिसालता रब्बिक बलग पहुंचा दें रिसालता रिसालत को रब्बे जो आपके रब की है एहसान तो हो गया अबू तालिब का [प्रशंसा] एहसान तो हो गया मालिक मालिक मुझे माफ़ कर दे तूने अपने हबीब को इतना लाडला बनाया कि बाप को पैदाइश से पहले उठा लिया ताकि बाप का एहसान ना होने पाए। जब पांच बरस के थे मां को उठा लिया मां का एहसान ना होने पाए। लेकिन अबू तालिब का एहसान तो हो गया। वाह वाह वाह उनके उनके कहने से बलग रिसालता रब्बे बलग पहुंचाओ। रिसालत रिसालत कहो। रब्बी जो तुम्हारे रब की है। अब अब तेरा नबी बोलेगा। तो एहसान तो हो गया ना अबू तालिब का। कहा फ़िक्र ना करो। फ़िक्र ना करो। अबू तालिब के एहसान को उतारूंगा। और ऐसे उतारूंगा कि मैं अपने हबीब से कहूंगा। कहूंगा कि अबू तालिब के बेटे की खिलाफत का ऐलान करो। या रसूल बल रब इन [प्रशंसा] उन्हीं लफ्ज़ों में जिन लफज़ों में अबू तालिब ने कहा था बल रिसालत रब्बे उनहीं लफज़ों में गदी की आयत आई है या रसूल बल मा उनका रब्बिक व रिसालता तीनों लफज़ अबू तालिब ने इस्तेमाल किए थे बल रिसालत रब्ब ये तीनों लत गदीर की आयत में आ गए। मालिक ये आयत तो आ गई लेकिन अबू तालिब ने कहा था उम या सैयदी व मौला आई। कहा जब तो सही के मोहम्मद से कहूंगा अबू तालिब ने कहा था मौला आई और तू कह दे मन तो मौला मैसेज तो पहुंच रहा है ना मेरे सुनने वालों तक अच्छा भाई तो अब मेरा नबी उठ के खड़ा हुआ और खड़े होने के बाद मेरे नबी ने खुदबा दिया या माशरा बनी अब्दुल मुतलिब ऐ अब्दुल मुतलिब के खानदान वालों तक तमाम हो रही है। वक्त में गुंजाइश नहीं है। और दो तक लूंगा मसाहब में तवील मसाब नहीं पढूंगा। तुम देख रहे हो मेरा सीधा काम नहीं कर रहा है। लेकिन जहां आ गया हूं वहां रुक के सुनते जाओ। या माशरा बनी अब्दुल मुत्त ऐ अब्दुल मुत्तलिब के गरोह वालों ऐ अब्दुल मुत्तलिब के खानदान वालों सुनो। मैं खुदा वाहिद आदिल की तरफ से तुम्हारे पास रसूल बन के आया हूं। मुझे रसूल मानो। इसमें दुनिया का भी खैर है। आखिरत का भी खैर है। है कोई मेरी मदद करने वाला? सुभान अल्लाह। सुभान अल्लाह। सुभान अल्लाह। क्या छोटा खुदबा है। वाह वाह वाह वाह वाह। यह मेरे नबी की नबूवत का पहला दिन है। और तुमने देखा होगा कि जब सदर अपनी सदारत के पहले दिन आता है टीवी के ऊपर तो डेढ़ घंटे की तकरीर करता है। [हंसी] ये मैं हर जमाने के सदर की और रईस जम्हूर की हर इलाके के रईस जम्हूर की बात कर रहा हूं। पॉलिसीज देता है। फिक्र देता है मैं क्यों आया? मुझे काम क्या करने हैं? बहुत लंबी चौड़ी तकरीर होती है। ये आलमीन का सबसे बड़ा रसूल है। ये कायनात का सबसे बड़ा इंसान। कितना छोटा खुदबा। मैं खुदा-ए-वाहिदे आदिल की तरफ से तुम्हारे पास रसूल बन के आया हूं। मुझे रसूल मानो। इसमें खैरे दुनिया भी है। खैरे आखिरत भी है। है कोई मेरी मदद करने वाला? खुदबा खत्म हो गया। खुदबा खत्म हो गया। कितना आसान है ये खुदबा? कितना आसान है। लेकिन इतना आसान नहीं है जितना आसान समझ रहे हो। मैं तीसरी मर्तबा सुनो। खुदाएं वाहिदे आदिल की तरफ से तुम्हारे पास रसूल बनके आया हूं। मुझे रसूल मानो। इसमें खैर दुनिया भी है, खैर-ए-आखिरत भी है। है कोई मेरी मदद करने वाला? मैं खुदा-ए-वाहिद की तरफ से आया तौहीद। जो आदिल है आदिल इसमें आखिरत का भी खैर कयामत। मैं रसूल बन के आया हूं। रिसालत है कोई मदद करने वाला इमामत। [प्रशंसा] बच्चा जिने दावत दी थी के या रसूल अल्लाह मैं तैयार हूं मेरा कद छोटा मेरी उम्र कम मेरी पीढ़ियां कमजोर अल्लाह के रसूल मैं आपकी मदद करूंगा बड़े तफसीली वाक्य हैं और मैं वाकया आज तवानाही महसूस नहीं कर रहा हूं या रसूल अल्लाह मेरा छोटा है अली बोल रहे हैं मेरी उम्र कम है मेरी मेरी पिंडलियां कमजोर है लेकिन अल्लाह के रसूल या रसूल अल्लाह मैं वादा करता हूं मैं आपकी मदद करूंगा भाई पहले ऐलान में अली कहता है या रसूल अल्लाह मैं आपकी मदद करूंगा| अली पहले कलमा तो पढ़ लो| अब समझ आया कि कलमा पढ़ने वाले और हैं, कलमा पढ़वाने वाले और हैं। मैं आपकी मदद करूंगा। कहा करीब आओ बच्चा करीब आया उसको मोड़ दिया और मोड़ने के बाद दोनों हाथ उसके दोनों कंधों पे रखे और कहने लगे या माशरा बरी अब्दुल मुतलिब हाज़ा अली इब्नू तालिब सुनो अब्दुल मुतलब के खानदान वालों सुनो ये अबू तालिब का बेटा अली है हाजा व खलीफती वसी वलीला फिर दुनिया ये है शशिदा का खुलासा भाई तवज्जो रखना मेरे नबी ने कहा इलाहा इल्लल्लाह उधर से बच्चा बोला मोहम्मद रसूल अल्लाह और इधर से मोहम्मद ने कहा अली वली उल्लाह जो अली ने कहा था वो सारी दुनिया के मुसलमान कहते हैं। और जो मोहम्मद ने कहा था वो हमारे अलावा कोई नहीं कोई नहीं कहता। तो फैसला खुद करना के सुन्नत पर अमल किसका है?

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