Ma ek jail ma jeller tha or mera kam bas itna he tha jo koi bhi naya kedi waha ata pehley

urdu fun 023,785 words

Full Transcript

मैं जेलर था। मैं कैदी औरतों से जस्मानी ताल्लुक कायम करता था। जब भी कोई नई मुजरिम आती तो मैं उसको अपनी हवस का निशाना लाजमी बनाता। एक दफा एक कवारी लड़की चोरी के इल्जाम में आई थी। मैं हमबिस्तरी तो कर चुका था लेकिन उसके जिस्म से यह तुम क्या कर रहे हो? मुझे छोड़ दो। खुदा के लिए मेरे साथ ऐसा मत करो। वह लड़की रोते हुए इल्तजाए करती। खुद को मुझसे छुड़वाने की कोशिश कर रही थी। मगर मैंने उसकी नाजुक कलाइयों को सख्ती से जकड़ कर एक कपड़े से बांध दिया। वह बुरी तरह मचलने लगी। मैंने धक्का देकर उसे मेज पर गिरा दिया तो वह कमर मेज पर लगने से करा कर रह गई। अभी वह अपनी तकलीफ को बर्दाश्त कर रही थी कि मैंने उसको दीवानों की तरह खींचते हुए अपने करीब कर लिया। लड़की के मुंह से दबीदबी चीखें बरामद हुई। मगर मैंने बरव उसके मुंह पर सख्ती से हाथ जमा लिया। उसकी आंखें फटने वाली हो गई थी। इसके नरमोनाजक चेहरे पर मेरे सख्त खुरदरे हाथ इतनी सख्ती से जमे हुए थे कि लड़की चेहरे को हरकत देने से कासर हो गई। उसकी आंखों में इल्तजा और रहम की भीख साफ नजर आ रही थी। मगर मैं तो उसका हसीन सरापा देखकर पागल हुआ चुका था। मेरे हवास सलामत नहीं थे कि मैं उसकी आंखों में लिखी फरियाद पढ़ता। मैंने उसका दुपट्टा खींचकर एक तरफ फेंक दिया। मगर मुसलसल पैर मारकर खुद को छुड़वाने की कोशिश में उस लड़की के पांव से जूती भी उतर चुकी थी। वह लड़की बेहद खूबसूरत थी। उसका नाजुक सरापा किसी भी मर्द का ईमान डबकमगा सकता था। फिर उसके हुस्न में कम उमरी का गुलाबीपन उसे मजीद खूबसूरत बना रहा था। मैं जितना उस लड़की के करीब हो रहा था। मेरे होश उड़ रहे थे। उसके लमस में मुझे एक अजीब सा सुकून महसूस हो रहा था। लड़की को दबोचकर अपने काबू में करते हुए मैं उसे अपनी तस्कीन का निशाना बनाने लगा। जबकि मेरे बारी हाथ में दबे उसके मुंह में दबीदबी चीखें बरामद हो रही थी। तकलीफ और गम के मारे लड़की का पूरा वजूद बुरी तरह कांपने लगा। वो पसीनेपसीने हो रही थी और मैं उसके हसीन रूप को देखना अपने होश गवा रहा था। उस कदर खूबसूरत के साथ तुम्हें चाहिए था कि तुम कोई जुर्म ही ना करती। तुम जैसी लड़कियां तो ज़हद आबद का ईमान डगमगा देती हैं। फिर मैं तो ऐसा शरीफ मर्द भी नहीं हूं। मैंने लड़की की मुसलसल मजाहमत पर इत्मीनान से उसे जताया तो वह गमजदा सी होने लगी। उसका पूरा वजूद रोने की वजह से हिचकोले ले रहा था। जितना मैं उस लड़की को अपनी तस्कीन का निशाना बना रहा था, उतना ही वह लड़की कमजोर पड़ी जा रही थी। उसकी मजामत खत्म होने लगी। उसके चीखने चलाने और खुद को छुड़वाने की हिम्मत भी खत्म हो रही थी। आंसू उसके पलकों पर जमने लगे। वह बेबस मेरे सामने पड़ी थी और मैं उसे किसी खिलौने की तरह इस्तेमाल कर रहा था। वह मेरी ताकत के सामने तो एक बेजान सी गुड़िया लग रही थी। उसके अंदर इतना जोर नहीं था कि वह खुद को मुझसे छुड़वा सकती या मेरा मुकाबला कर सकती। मेरी उम्र 40 से भी ऊपर थी और मैं बहुत मजबूत था। औरतों को तो हमेशा इस्तेमाल करने की आदत बहुत पुरानी थी। मैं जानता था कैसे औरत को ज़ेर करना है। मज़ाहमत करने और मुसलसल एहतेजाद करने वाली औरतों को भी कमजोर करने का तरीका मुझे आता था। अपनी नौकरी का मैंने बहुत नाजायज फायदा उठाया था और हमेशा अपने पास आने वाली औरतों को दिल खोलकर इस्तेमाल करता। मैं इस गुनाह का आदि हो चुका था। अगर कोई औरत एक रात के लिए भी मेरे पास आती तो मैं एक बार जरूर उसे अपनी तस्कीन का जरिया बनाता था। हालांकि मैं शादीशुदा मर्द था और मेरे खूबसूरत बीवी बच्चे थे। मगर जो मजा गैर औरतों से मिलता वह मजा बीवी नहीं दे सकती थी। किसी ने सच कहा गुनाह में बहुत लज्जत होती है। मैं भी इसी लज्जत का तलबगार हो रहा था। और फिर सामने पड़ी खूबसूरत और कंवारी लड़की देखकर मैं अपने आप होशो हवास गवा बैठा था। अगर मुझे इस लड़की के लिए मुश्किल का सामना करना पड़ता तो मैं इसे हासिल करने के लिए वह भी कर बैठता। फिर यहां तो सब कुछ मेरे हाथ में था। वह लड़की मेरी कैद में थी और मैं उसे दिल खोलकर इस्तेमाल कर सकता था। इसके एक छोटे से जुर्म की मैंने उसे इतनी बड़ी सजा दे डाली थी और पूरी रात उसे लड़की को बेबस किए मैं इस्तेमाल कर रहा था। वह लड़की पहले तो कितनी देर वह मजाहमत करती रही और मुझसे इल्तजाएं करती रही। मगर फिर उसने जल्द हार मान ली और जान लिया कि मैं उसे ऐसा छोड़ने वाला नहीं हूं। उस लड़की की आंखों में पहले बेयकीनी उभर रही थी और अब वह बिल्कुल वीरान आंखों से छत को देखती जा रही थी। यह उसकी बदकिस्मती थी कि मुझ जैसे मर्द के पास आई थी। सुबह करीब में मैंने उस लड़की को छोड़ा तो वह बेजान हो चुकी थी। रात के अंधेरे में मैंने उस लड़की को ठीक से नहीं देखा था। मगर दिन की हल्की-हल्की रोशनी फैली तो मैंने उस लड़की का लबास उठाया ताकि उसे डांप कर वहां से बेच सकूं। मगर तब मेरी नजर उस लड़की के वजूद पर पड़ी तो उसका जिस्म देखकर मुझे झटका लगा। काश वह लड़की मेरे सामने ना आती तो मैं ऐसी मुश्किल का शिकार ना होता। मगर तब मेरे पास पछतावे के अलावा कोई चारा नहीं था। उस रोज मैं ड्यूटी पर बैठा। बुरी तरह थकावट का शिकार हो रहा था। अचानक पुलिस वालों का शोरशराबा सुनाई दिया। मुझे पुलिस टीम पर बहुत गुस्सा आया था। इससे पहले कि मैं उन्हें टोकता या डपट कर खामोश रहने का कहता। मेरी नजर पुलिस के घेरे में खड़ी लड़की पर पड़ी। पर मैं चौंक गया। यह लड़की कौन है और किस जुर्म में आई है? मैं हैरतजाजदा सामने खड़ी लड़की को देख रहा था। इसकी उम्र बाम मुश्किल 18-19 बरस के करीब थी और वह खूबसूरत और सहमी हुई लग रही थी। इसके चेहरे से देखकर लगता था इसने जिंदगी में कभी कोई चोटी तक नहीं मारी होगी। इतनी डरी हुई लड़की जेल तक चली आई थी। और पुलिस वाले इसे जलील कर रहे थे। लड़की रो रही थी। मैंने जल्दी से इसके पास जाते हुए इस लड़की का जुर्म पूछा तो पुलिस वालों ने मुझे बताया कि वह लड़की चोरी करते हुए पकड़ी गई और एक बहुत बड़े स्टोर से वह पिछले चंद दिनों से मुसलसल खाने की चीजें चुरा रही थी। स्टोर वाले ने इसकी चोरी का महसूस की तो पुलिस वालों को इतला दे दी और उसे जेल में पहुंचा दिया। मैं सुनकर ठक गया कि लड़की जर्द कमजोर चेहरे को देखकर मुझे अंदाजा हो गया कि उसने वह चोरी अफला से मजबूर होकर की थी। मगर इस वक्त मेरी नजरों में इसके लिए कोई हमदर्दी नहीं थी। बल्कि मेरी पसंदीदा नजर से इस लड़की का जायजा मैं ले रहा था। वह सादा से लबास में थी और सर पर एक छोटा सा दुपट्टा रखा हुआ था। इसके बिखरे उलझे से बाल बार-बार चेहरे पर आ रहे थे। इसका हुलिया बहुत गरीब बनाना था और हालत भी खराब हो रही थी। मगर पहली नजर में ही मुझे इसके शफाफ आंखों की चमक और चेहरे की मासूमियत ने मुतवजा किया था। मैं इस लड़की के सामने गया तो वह सहम कर पीछे हो गई। मैं बहुत मजबूर हो गई थी। इसलिए मैंने चोरी की मगर मैं आइंदा ऐसा नहीं करूंगी। मुझे यहां से जाने दो। मैं जेल में नहीं रुक सकती। लड़की मुझे देखते ही मिन्नत समजत करने लगी और सफाइयां पेश करने लगी। उसे लग रहा था कि मैं कोई नेक शरीफ मर्द हूं जो उसकी मौजूद मजबूरी जानकर उसे जाने दे दूंगा। मगर मैं तो कुछ और ही सोच रहा था। मैं औरतों का शौकीन मर्द था। रंगीन मजाज और हुसन का दीवाना था। मुझे तो इस लड़की का नाजुक सरापा मुतवजा कर रहा था। ऐसी लड़की अगर गलती से भी मेरे सामने आई तो मैं ना जाने। फिर यहां तो इसका जुर्म भी साबित हो चुका था। मैंने कहा थाने के असूल होते हैं। मैं तुम्हें अपनी मर्जी से यूं नहीं भेज सकता। तुम पर एफआईआर कटी गई है। पहले मुझे कुछ तफ्सीतीस करना होगी और फिर तुम्हें जर्माना भी अदा करना होगा। फिर तुम जा सकती हो। मैं उसे गहरी नजरों से देख रहा था। लड़की इस मामले में बहुत लापरवाह लग रही थी। उसे अंदाजा ही नहीं हुआ। मेरी नजरें उसके वजूद पर टिकी हुई थी। मेरे अल्फाज़ पर वह मायूस हो गई। कहने लगी ठीक है मैं तफ्तीश के लिए तैयार हूं। मगर कसम खाकर कहती हूं ऐसा कोई जुर्म नहीं किया जिसमें किसी का नुकसान हो। खानेपीने का बहुत सामान उठाती थी और इतनी तादाद में ही उठाती थी कि चंद पैसों का नुकसान होता। दुकानदार मेरी मदद करने के बजाय तैयार नहीं था। मैंने हर दुकान से उधार मांगा। घर में छोटे बहन भाई भूखे हैं। मुझे हर तरफ से मायूस होकर चोरी करना पड़ी। कहने लगी मुझे नहीं लगता कि कानून मुझे इस मजूरी की भी सजा देगा। मैंने सर हिला दिया। मैं कोई जिम्मेदार इंसान होता तो यकीनन उस लड़की की सजा में नरमी कर सकता था और मैं चाहता तो उसे एक सख्त वार्निंग देकर वहां से भेज भी देता। मगर मैंने लेडीज पुलिस को बुलाया और उससे कहा कि लड़की को जेल में ले जाओ। मगर ख्याल रखना इस पर सख्ती ना की जाए और ना ही इसके साथ कोई बदतमीजी करना। इसका मामला मैं खुद देखूंगा इसका जुर्म इतना बड़ा नहीं है कि तुम इसके साथ कोई सख्त रवैया रखो। मैं नहीं चाहता कि यह लड़की को कोई नुकसान पहुंचे। इसे सबसे पहले मैं हासिल करना चाहता था। मेरी ताकीद पर लेडी पुलिस ने सर हिलाया और लड़की को बाजू पकड़ कर उसे जेल ले गई। लड़की ने जाते-जाते भीगी नजरों से मुझे देखा। उसकी आंखों में इल्तजा साफ नजर आ रही थी। मगर मैं अभी इस पर तरस खाकर उसे हाथ से जाने नहीं दे सकता था। दिन भर काम निपटाकर मैं रात को फारग हुआ तो घर जाकर आराम करने के बजाय सीधा इस लड़की के जेल तक पहुंच गया। हालांकि सुबह थाने में कुछ अफसरान ने आना था और इन अफसरान का सामना करने के लिए जरूरी था कि मैं घर जाकर आराम करता और सुबह सवेरे ताजोत दम होकर अपनी ड्यूटी पर चला आता। मगर मैंने वह रात इस लड़की के साथ गुजारने का सोच लिया था। मैं उसकी जेल में पहुंचा तो वह एक देवार के साथ लगकर बैठी रो रही थी। उसके पूरे वजूद पर लज़ा तारी था। लगता था जैसे किसी तकलीफ का शिकार थी। मैंने जेल का दरवाजा खुलवाया और लड़की को देखने लगा। वह भी सर उठाकर मुझे देख रही थी। मुझे देखते ही उसकी आंखों में एक उम्मीद जागी और वह खड़ी होकर मेरी तरफ भागी। क्या मेरी सजा खत्म हो गई। लड़की ने आस से पूछा। मैंने उसे कहा, हां, ऐसा ही समझ लो। तुम मेरे पीछे आओ। मुझे कुछ जरूरी बातचीत करनी है। फिर तुम घर जा सकती हो। मैंने बहाने से उसे एक कमरे में ले गया। यह कमरा खाली था। आमतौर पर मुजरिम से इनका जुर्म अगलवाने के लिए इस्तेमाल किया जाता था। मगर इस वक्त मैं वहां से सबको हटाकर इस लड़की को वहां ले आया था। लड़की अपने अंजाम से बेखबर मेरे पीछे चलती रही और मुझे कसमें खाकर अपने हालात बताने लगी। इसके अल्फाज़ झूठे नहीं थे। वह मुसलसल रो रही थी। यतीम लड़की थी। मगर मुझे इसकी परवाह नहीं थी। मुझे तो इस बात से खुशी हुई थी कि वह कुंवारी और कम उम्र लड़की है। इसका मर्दों से कोई तजुर्बा नहीं था। उसे मुझसे पहले कभी किसी ने हाथ नहीं लगाया था। यकीनन इसके बिखरे हुलिए की वजह से उसे सब एक फकीरानी समझते थे। जेल में अक्सर मुझे खराट या बड़ी उम्र की औरतें मिलती थी। पहली बार मेरे सामने कम उम्र कुंवारी लड़की आई थी। मेरा दिल जोश से धड़क रहा था। इस लड़की को कमरे में ले जाते ही मैंने उसे अपनी हवश का निशाना बनाना था और इस लड़की की चीखों इल्तजाओं पर कान नहीं धरे थे। अब मैं साकत साहब फटी फटी आंखों से इस लड़की को देख रहा था। मैं जल्दी से इस लड़की को लेकर कमरे से बाहर निकला। मेरे पास कोई ऐसी चादर मौजूद नहीं थी जिससे मैं इस लड़की का जिस्म छुपाता। मुझे खौफ था इस लड़की का जिस्म कोई भी देखता तो मेरी खैर ना होती। जबकि मैं खुद भी हैरत और परेशानी का शिकार था कि इस लड़की के साथ ऐसा क्या हुआ था और मुझे पहले यह खबर क्यों नहीं हुई थी। मैं अभी बाहर निकला था कि पुलिस वाला मेरे पास आया। उसने बताया कि अफसरान पहुंचने वाले हैं और वह आते ही थाने का विजिट करेंगे। जेलें साफ की जा चुकी थी। कैदी औरतें भी तमीज और अदब से अपनी-अपनी कोठरी में बैठी हुई थी। जबकि मैं इस लड़की को लिए खड़ा था। मैंने बौखलाकर इस पुलिस वाले से कहा, एक लेडी पुलिस को भेजो जो इस वक्त ड्यूटी पर नहीं है और लड़की की एफआईआर का इंदराज हटा दो। मैं पसीनेपसीने हो रहा था। मेरी बौखलाहट पर पुलिस वाले भी हैरान हो गया क्योंकि मैं जिंदगी में कभी ऐसे हवास बख्ती का शिकार नहीं हुआ था। एक बाद जेलर था जिससे आज तक कोई गलती नहीं हुई थी। मैं जितनी भी कैदी औरतों को इस्तेमाल करता था, उनकी कब्र कभी किसी अफसरान तक नहीं पहुंची थी। क्योंकि इन औरतों को इस्तेमाल करने के बदले मैं उनकी सजाओं में नरमी करता था। वह औरतें मुझसे नफरत करने के बावजूद मेरे बारे में किसी को बता नहीं पाती थी। पहली बार इस लड़की की वजह से मैं बुरी तरह फंस चुका था। पुलिस वाले ने मेरी मदद की। एक लेडी पुलिस भागते हुए मेरे पास आई। मैंने उससे कहा इस लड़की को इसके हवाले किया और उससे कहा कि इसे राजदारी से किसी अस्पताल में पहुंचा दो और डॉक्टर से कह देना कि एहतियात से इसका इलाज करें। मैं बाद में इसे मिलने आऊंगा। लेडीज़ पुलिस सवालिया नजरों से मुझे देखती रही। मगर जल्दबाजी में उसे कोई तफसील नहीं बता पाया था। इसी लम्हे जब लेडीज पुलिस लड़की को लेकर थाने से निकली। अफसरान पहुंच गए। मेरा हुलिया बहुत खराब हो रहा था। मैंने जल्दी से मुंह धोकर अपने बाल बनाए और दाढ़ी जाड़कर सीधा खड़ा हो गया। मेरी आंखों सुरखी थी और चेहरे पर थकन के आसार नुमाया हो रहे थे। मैं जानता था मेरा ऐसा हुलिया और चेहरा अफसरान को नागवार गुजरेगा क्योंकि सब जानते थे इस वक्त मेरी रात की ड्यूटी भी नहीं थी। इसके बावजूद अगर घर से इस हालत में जेल आता तो उसका असर मेरी नौकरी पर पड़ सकता था। मगर जेल की सफाई और कैदी औरतों को अच्छे हालत में देखने के बाद जब थाने की रिपोर्ट अच्छी मिली तो अफसरान ने मेरे हुलिए की तवज्जा ना दी चाय पानी पीकर वापस जाते हुए बल्कि उन्होंने मुझे नसीहत की कि अपनी सेहत का ख्याल भी रखना चाहिए। मैं शर्मिंदगीगी से सर हला गया। अफसरान के जाते ही मैं थक कर कुर्सी पर गिर गया। नींद से मेरी बुरी हालत हो रही थी। पूरी रात मैं जागता रहा। अब ऐसा हाल था कि जल्द से जल्द किसी जगह सो जाता। मगर तब ही मुझे लड़की का ख्याल आया। मैंने जल्दी से लेडीज पुलिस को कॉल मलाकर उस लड़की के बारे में पूछा तो वह बुखलाई हुई थी। कहने लगी लड़की लड़की की हालत बहुत सीरियस है। मैं मुंतज़िर खड़ी हूं कि अच्छी खबर मिले। अभी डॉक्टर तक तशवीश का इजहार कर रही हूं। इस लड़की के जिंदा बचने की कोई उम्मीद नजर नहीं आ रही। लेडी पुलिस के अल्फाज़ पर मेरे रोंगटे खड़े हो गए। वैसे तो मैं थाने से इस लड़की को सब रिकॉर्ड खत्म करवा चुका था। मगर फिर भी मुझे कोई रक नहीं ले सकता था। कैदी औरतें इस लड़की को देख चुकी थी। थाने का सारा स्टाफ गवाह था कि एक मुजरम लड़की जेल में आई थी। मगर रातोंरात गायब हो गई। बहुत से लोग इस लड़की की जेल में मौजूदगी से वाकिफ थे। इसकी अचानक गुमशुदगी का किसी भी वक्त राज खुल सकता था। इसलिए जरूरी था कि लड़की का बरव इलाज करा के इसे काबिल किया जाता कि वह वापस जेल में पहुंचकर बकायदा इसके जुर्म की तफ्तीश करता और उसे बाइ्जत बरी करता। सिर्फ इसी सूरत में मेरी जान बक्शी हो सकती थी। अब मुझे अपनी नौकरी के लाले पड़ चुके थे। जबकि लेडी पुलिस ने लड़की के बारे में निहायत अजीबोगरीब सी बात बताई थी जो मेरे दिमाग में अटक चुकी थी। कहने लगी कि डॉक्टर ने बताया है लड़की की एक पसली भी टूटी हुई है और इसे अंदरूनी चोटें आई हुई थी। मैं घबरा गया इस लड़की को इस कदर बुरी तरह किसने मारा था? मैंने इस पर हाथ तक नहीं उठाया था। जब वह लड़की जेल में आई थी तो उसकी रंगत बिल्कुल जर्द हो रही थी। वह बहुत कमजोर लग रही थी और बहुत रो रही थी। मुझे अंदाजा हुआ कि वह तब भी तकलीफ का शिकार थी। मगर अपनी परेशानी में कुछ बता ना पाई। पुलिस वाले मुसलसल उसे धक्के दे रहे थे। किसी को खबर नहीं हुई कि उसकी चादर के अंदर छुपे वजूद पर कैसी कयामत गुजर चुकी थी। मेरी हिदायत पर लेडी पुलिस ने उसे जेल में अदब से लेकर आ गई। मगर जब रात को वहां पहुंचा तब भी मैंने देखा था वो लड़की बाकी सब की तरह सोने की बजाय दीवार से लगी रो रही थी। उसकी हालत पहले ही नासाज थी और यह बात वाजा थी कि वह किसी तकलीफ और परेशानी का शिकार है। मगर मैंने तवज्जो ना दी। मुझे यही लगा कि वह लड़की कैद होकर आने की वजह से घबराई हुई है और खौफजदा हो रही है। मगर वह अपनी जिस्मानी चोटों की वजह से तकलीफ का शिकार थी। वैसे तो मेरा रवैया कभी औरतों के साथ नरम नहीं होता था। मगर इस लड़की की मासूमियत थी कि मैं बेख्तर इसको निहायत नरमी से छूता रहा था। मेरी इसी एतियात और नरमी की वजह से वह लड़की जिंदा तो बच गई मगर मरने के करीब हो गई थी क्योंकि पूरी रात मैं उसे अपनी हवस का निशाना बना रहा था और वह पहले ही किसी हाथों जख्मी होकर मेरे पास आई थी। मैं एक इज्जत भरी मुलाजमत कर रहा था। अब लड़की के मामले में फंसकर अपनी नौकरी नहीं गवाना चाहता था। वरना मैं कहीं का ना रहता और जलालत मेरे खानदान तक पहुंची तो लोग मुझ पर थूथू करते मैं फौरन हस्पताल पहुंच गया। लेडी पुलिस वहां से जा चुकी थी। मैंने डॉक्टर को अच्छी खासी भारी रकम पकड़ा दी और उसे कहा कि इसे हर हालत में मुझे लड़की की जिंदगी चाहिए। डॉक्टर कहने लगे हमारा काम इलाज करना है और हम इसकी पूरी कोशिश कर रहे हैं। मगर लड़की की हालत बहुत नासाज है। पहले इसे बुरी तरह मारा गया। फिर इसे ज्यादती का निशाना भी बनाया गया। इसलिए लड़की के लिए दोबारा जिंदगी की तरफ लौटना मुश्किल हो रहा है। मैं डॉक्टर की बात सुनकर खफा सी नजरें चुराने लगा। मैंने कहा लड़की चोरी के जुर्म में थाने पहुंचाई गई थी। अब मैं इस मामले की तह तक पहुंचना चाहता हूं। इसलिए जरूरी है कि लड़की जिंदा बच जाए। मगर मेरी और डॉक्टर की कोशिश नाकाम हो गई थी। लड़की चंद घंटों में ही सांसे हार गई। मैं अपनी जगह साकत बैठा रह गया था। पूरी रात मैं इस लड़की से सुकून हासिल करता रहा। फजर के बाद रोशनी में देखा तो मुझे इस लड़की के वजूद पर निहायत अजीब से नील नजर आए। वैसे तो मैं भी रात भर इस लड़की को इस्तेमाल करता रहा। मगर मैंने इसे मारा हरगिज़ नहीं। जबकि इसके वजूद पर चोटों के गहरे निशानात थे। वो लड़की मेरे करीब आने पर ही तकलीफ से चीखने लगती थी। मुझे लगा था कि वह सिर्फ खौफ का शिकार है। मगर उसका वजूद जख्मी था। लड़की को इसके लावाकिन तक पहुंचाया। बात छुपाने की कोशिश की। मगर नौकरी में जहां वफादार साथी हो वहां कुछ दुश्मनी भी दिल में रखे बैठे होते हैं। किसी ने मामला जान लिया और ऊपर तक बात पहुंचा दी और मेरी वर्दी उतर गई कि मैंने ऑन ड्यूटी एक मुजरिम और लड़की को जिस्मानी तशद्दत और ज्यादती का निशाना बनाया है। मैं जलील होकर थाने से निकला था। घरवाले परेशान हुए। बीवी लानतान करने लगी और लड़ झगड़ कर मायके जा बैठी। खानदान वाले अलग तौबा करने लगे। मैं जलील होकर रह गया। सिर्फ इसीलिए क्योंकि अपनी तस्कीन के लिए लड़की की जख्मी हालत महसूस नहीं कर पाया था। अल्लाह की पकड़ थी कि इतनी बड़ी गलती कर बैठा। कुछ अरसा मुंह छिपाए घूमता रहा था। फिर सोचा लड़की की हालत का राज जान लूं। यह सोचकर एक रोज उस लड़की के घर पहुंच गया। एड्रेस तो तब जान लिया था जब लड़की की लाश उसके घर भेजी। उस रोज जाकर मुझे जो हालात पता चले उस पर मुझे शदीद दचका लगा। उस लड़की के घर दो-तीन कम उम्र बच्चे थे और एक बीमार औरत रह रही थी। घर पर कोई मर्द नजर नहीं आया था। खुद को पुलिस वाला जाहिर करके औरत से बहाने से मैंने उसकी बेटी की मौत के बारे में पूछा तो औरत और रोने लगी। बोली अच्छा ही हुआ मेरी बेटी ऐसी जिंदगी से जान छुड़वा गई। वरना उसे रोज तकलीफ झेलना पड़ती थी। मैं इस बात पर ठटक गया। मेरे पूछने पर औरत ने बताया कि बेटी पहले शौहर से थी। मरहूम शौहर की वफात के बाद औरत ने दूसरी शादी की। वह मर्द सौतेली बेटी को तशद्द का निशाना बनाता था। वह जवारी और नशेबाज था। सारा दिन बैठकर पैसा उड़ाता था और वह लड़की बेचारी बहन भाइयों का पेट भरने के लिए घर से निकलकर चोरियां करने लगी थी। तब औरत ने बताया कि उसका शौहर उसकी बेटी को बुरी तरह मारता पीटता था। वह लड़की चोरी नहीं करना चाहती थी। मगर सौतेले बाप ने बुरी तरह मारपीट कर उसे घर से निकाला था ताकि वह चोरी करके लाए और उनके पैट पाले। चोरी करते हुए वह लड़की पकड़ी गई और मुझ तक पहुंच गई। मैं अपने गुनाह पर नादाम सा बैठा हुआ था। मगर अब कोई फायदा नहीं था। औरत ने इल्तजा की। उसके शौहर और उसकी बेटी के कातिल पुलिस वाले को सजा दिलवाएं। मैं सच-सच छुपाए इस घर से निकला। अब पछतावे का शिकार रहने लगा। मुझे यकीन है कितना अरसा इस औरत ने इंतजार किया होगा कि मैं उसकी बेटी के नाहक मौत का बदला लूंगा और मैं खुद को सजा देने की हिम्मत नहीं कर पाया। इसलिए छुप गया। आज तक नमाज़ें पढ़ पढ़कर अल्लाह से दुआ मांगता हूं कि मेरे गुनाह माफ कर दे। ना जाने मुझे माफी मिलेगी या नहीं।

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