मैं एक 14 साला लड़की को ट्यूशन देता था। वह बहुत खूबसूरत लड़की थी। एक दिन उसके वालिद रात तक ना आ सके। वह बहुत डरी हुई थी और मेरे कंबल में घुस गई। उसे इतना करीब आकर मैंने उससे कहा कि देखो मैं भी जो करूंगा डरना नहीं। मैं आहिस्ता-आहिस्ता उसके अंदर हाथ फेरना शुरू ही किया था कि उसने ही अपने दोनों मेरा नाम रूहान है। यह बात उस वक्त की है जब मैं कॉलेज में पढ़ता था। मैं पढ़ाई में काफी होशियार था। मेरे घर के हालात इतने अच्छे नहीं थे। मेरे घर में बस मेरी मां ही थी। मेरे पापा बचपन में ही फौत हो गए थे। मेरी मां ने लोगों के कपड़े सिलाई करके मुझे पाला और पढ़ाया लिखाया। हमारा गुजर बसर बस हो रहा था। मैं एमए कर रहा था। लेकिन मुझे भी काफी एहसास होता था कि मैं अपनी मां की मदद करूं। इसलिए एक दिन मैंने फैसला किया कि मैं ट्यूशन पढ़ाया करूंगा। मैंने यह बात सर से शेयर की तो सर को बहुत अच्छा लगा। उन्होंने मुझे बहुत सपोर्ट किया था। जिसकी वजह से मैं ट्यूशन पढ़ाने लगा था। मैं 2:00 बजे फारग हो जाता था और फिर 4:00 बजे ही सबके घर जाकर उनको एक-ए घंटा ट्यूशन पढ़ाता था। मेरी मां भी बहुत खुश हो गई थी क्योंकि मैं इस वजह से काफी अच्छा कमा लेता था। दिन गुजरने लगे थे। एक दिन मेरे सर ने मुझसे कहा बेटा मेरी एक ही बेटी है जो 11वीं क्लास में पढ़ती है। अगर तुम इससे पढ़ा दोगे तो मैं तुम्हारा एहसान मानूंगा। मैं भी हैरान हुआ था क्योंकि वह तो खुद एक टीचर थे। वह भी अपनी बेटी को खुद पढ़ा सकते थे। लेकिन उन्होंने कहा मेरी बेटी बहुत शरारती है। मुझसे नहीं पढ़ती। अगर तुम मेरी बेटी को पढ़ा दोगे तो मैं तुम्हें काफी अच्छे पैसे दिया करूंगा। उनकी बात सुनकर मैं भी खुश हो गया था क्योंकि मैं जानता था कि सर काफी अमीर है। वह प्रोफेसर थे और अपना एक ऑनलाइन बिजनेस भी करते थे। जिसकी वजह से वह मुझे काफी अच्छी फीस दे सकते थे। इसलिए मैं ट्यूशन पढ़ाने के लिए राजी हो गया था। मैंने कहा ठीक है सर दो-तीन दिन में मैं आपके घर आ जाऊंगा। लेकिन सर ने उसी रोज कहा बेटा तुम आज ही से आ जाना। जैसे ही मेरी छुट्टी हुई मैं सर के साथ उनके घर चला गया। उन्होंने मुझे बिठाया और कहा मैं भी अपनी बेटी को भेजता हूं। मैंने तीन-4 मिनट इंतजार किया। कुछ देर बाद उनकी बेटी जैसे ही कमरे में आई उसे देखकर मैं हैरान हो गया था क्योंकि वह बहुत ही खूबसूरत थी। मुझे अपनी आंखों पर यकीन नहीं आ रहा था कि जो मेरे सामने बैठी हुई थी वह कोई लड़की है या कोई अप्सरा वो मेरे सामने आकर बैठ गई। इससे पहले मैं लड़कियों से बात नहीं करता था क्योंकि मैं थोड़ा शर्मीला टाइप का लड़का था। मेरी मां ने मेरी परवरिश बहुत अच्छी की थी। मेरी कोई बहन नहीं थी। मैं अकेला ही था। इसी वजह से मैं काफी एतराम से उस लड़की से बात कर रहा था। कुछ देर मैं उसे पढ़ाता रहा। उसके बाद मैंने उससे कहा आज के लिए इतना ही काफी है। यह कहकर मैं घर चला गया। लेकिन मेरा दिमाग अभी भी इसी लड़की के बारे में सोच रहा था। उस लड़की का नाम तानिया था। तानिया बहुत ही खूबसूरत थी। तानिया मुझे काफी सीरियस तबीयत की लग रही थी। दिखने से नहीं लग रहा था कि वह शरारती भी हो सकती है। पर अगले दिन मैं हैरान हो गया क्योंकि मैं बगैर बताए उसके घर चला गया था। जब मैंने तानिया को घर की छोटी ड्रेस में देखा तो मैंने जल्दी से अपनी आंखें झुका ली। वह अपने दोस्तों के साथ खेल रही थी। मैंने उसे बस एक ही नजर देखा था। लेकिन उसने जैसे ही मुझे देखा, जल्दी से अंदर चली गई। कुछ ही देर बाद वह मेरे पास पढ़ने के लिए आई। अब उसने थोड़ी लंबी टीशर्ट डाल रखी थी। इससे पहले उसने बहुत ही छोटा ड्रेस पहन रखा था। उसने कहा कल मेरा टेस्ट है। मैंने उसे टेस्ट की तैयारी करवाई और उसे वर्न किया कि तुमने इस टेस्ट में बहुत अच्छे नंबर लाने हैं क्योंकि मैंने तुम्हें बहुत अच्छी तैयारी कराई है। मेरी बात पर उसने कहा सर मुझे फिजिक्स बहुत मुश्किल लगती है। अच्छे नंबर तो नहीं ला सकती लेकिन पास हो जाऊंगी। उसकी बात पर मैं हैरान हो गया था। मगर इससे पहले कि वो रो दे। मैंने उससे कहा चलो ठीक है। लेकिन अगर तुम फेल हो गई तो फिर वह कहने लगी फिर सरा मुझे जो भी सजा दे मुझे मंजूर है। उसकी बात पर मैं शरारती अंदाज में मुस्कुराने लगा था। मैंने कहा ठीक है अगर तुम फेल हुई तो मैं तुम्हें सजा दूंगा। अब मैं उसका इंतजार करने लगा कि कब वह टेस्ट में फेल हो और मैं उसे कोई सजा दे सकूं। ना जाने क्यों मुझे तानिया को तंग करने में बहुत मजा आने लगा था। फिर अगले दिन अल्लाह ने मेरी सुन ली और वह टेस्ट में फेल हो गई थी। मेरा दिल खुशी से उछल गया था। लेकिन मैंने बनावटी गुस्सा अपने चेहरे पर सजाया और तानिया से कहने लगा यह तुमने क्या कर दिया? मैंने तुम्हें इतनी अच्छी तैयारी करवाई थी लेकिन तुम टेस्ट में फेल हो गई हो। वो कहने लगी सर मुझे जो भी सजा दे मुझे मंजूर है पर मैं क्या करती मुझे पढ़ाया वह सब कुछ भूल गया था मुझे फिजिक्स बहुत मुश्किल लगती है वो बहुत मासूमियत से मुझसे कह रही थी मैंने कहा मैंने तुमसे कल क्या कहा था वो कहने लगी आपने यही कहा था कि अगर मैंने टेस्ट अच्छा नहीं दिया और फेल हो गई तो आप मुझे सजा देंगे मैंने उससे कहा ठीक है फिर क्या सजा चाहिए वह कहने लगी अब मुझे जो भी सजा दें मुझे मंसूर है उसकी मासूमियत से मेरा दिल बहकने लगा था मैंने एक नजर उस पर डाली। हम दोनों के अलावा कोई भी मौजूद नहीं था। मेरे साथ इतनी खूबसूरत लड़की मौजूद थी और उसकी खूबसूरती को देखकर मेरा दिल बहकने लगा था। अजीब हालत हो रही थी। मेरे ऊपर शैतान सवार हो गया था। मैंने उससे धीरे से कहा तो फिर ठीक है। मेरे पास आओ। मैं तुम्हें सजा देना चाहता हूं। तानिया बहुत मासूम थी। वह मेरी बात मान गई और मेरे पास आकर बैठ गई थी। मैंने उससे पूछा, "तुम कितने साल के हो?" वह कहने लगी, मैं तो 18 साल की हूं। वह 18 साल की थी और मैं 24 साल का था। मैंने उससे कहा मैं तुम्हें कोई भी सजा दूंगा तो क्या तुम अपने घर वालों को वो सजा बता दोगी? वो कहने लगी नहीं सर मैं आपकी सजा नहीं बताऊंगी। अगर ऐसा किया तो पापा मुझ पर गुस्सा होंगे क्योंकि मैं आपकी पढ़ाने के बावजूद अपनी पढ़ाई पर ध्यान नहीं दिया। इसलिए मैं सजा किसी को भी नहीं बताऊंगी। मैं खामोश हो गया था। इसके गुलाबी हंठों को देखकर मेरा दिल चाहा कि उसे बाहों में भरकर प्यार कर लूं। लेकिन मेरा दिल यह कहने से इंकार कर रहा था। कहीं ना कहीं मेरी मां की दी हुई अच्छी परवरिश ने मुझे रोक लिया था। इसलिए मैंने फैसला कर लिया और उससे कहा कि नहीं मैं आज तुम्हें सजा नहीं दूंगा। लेकिन अगर आइंदा तुमने किसी भी टेस्ट में इस तरह की कोई भी गलती की और फेल हो गई तो मैं तुम्हें जरूर सजा दूंगा। चलो आज माफ कर देता हूं। तो वो खुश हो गई थी और मैं वापस उसे पढ़ाने लगा था। एक दिन मैं कॉलेज में ही था जब सर मेरे पास सर कहने लगी बेटा मुझे तुमसे कोई बात करनी है। मैंने सर से कहा सर मैं क्लास ले लेता हूं। उसके बाद आराम से आपके पास आ जाऊंगा। आपने मुझे जो भी कहना हो मुझसे कह दीजिएगा। इस तरह मैं क्लास के बाद सर के पास गया तो सर बिजी थे। कुछ देर बाद ही मैं अंदर गया। सर कहने लगे बेटा बैठो मैंने तुमसे तानिया के बारे में बात करनी है। यह सुनकर मैं चौंक गया कि अचानक उन्हें क्या बात करनी है। लेकिन सर कहने लगे बेटा मैं चाहता हूं कि तानिया तुम्हारे घर चली जाए। उनकी यह बात सुनकर मैं हैरान हो गया कि आखिर वह ऐसा क्यों चाहते हैं। सर कहने लगे बेटा मैं तुम पर भरोसा करता हूं। तुम बहुत अच्छे लड़के हो। इसलिए चाहता हूं कि मेरी बेटी तुम्हारे पास ही रहे क्योंकि मुझे किसी काम के लिए बाहर जाना है। लेकिन शहर में मेरा कोई नहीं है जिसके पास छोड़कर जाऊं और वैसे भी इसके टेस्ट हो रहे हैं। मैंने यही सोचा कि तुम इसे पढ़ाते भी हो इसलिए तुम्हारे घर तुम्हारी मां इसका ख्याल रख लेगी। मैंने सर की बात सुनी तो मैं हैरत में डूब गया कि मैं क्या फैसला करूं। लेकिन मैंने सर को कहा सर कोई बात नहीं। मैं आपकी बेटी को अपने घर पर ही पढ़ा दूंगा। लेकिन अंदर से मेरा दिल कहीं ज्यादा परेशान हो रहा था क्योंकि मैंने बहुत मुश्किल फैसला लिया था कि ऐसा कैसे हो सकता है कि मैं तानिया को अपने ही घर में देखकर कैसे संभाल सकता हूं। इतनी खूबसूरत लड़की मेरे पास मेरे साथ रहने वाली थी। लेकिन फिर मैंने मां का सोचा कि वह तो घर पर ही मौजूद होगी। मैं उसे अपनी मां के पास रुला दिया करूंगा। यही सोचकर मैंने सर को हां कर दी थी। फिर सर मुझे अपने साथ अपने घर ले गए। सर ने शायद तानिया को फोन करके तैयार रहने के लिए कह दिया था। उसके साथ एक छोटा सा बैग भी था। तानिया काफी उदास थी। सर उसे समझाने लगी। बेटा देखो अपने टीचर को तंग नहीं करना है। अब यह आपको पढ़ाएंगे और इनकी मां तुम्हारा ख्याल रखेगी। मैं इन पर भरोसा कर रहा हूं। तुम शरारती हो। मुझे डर है कि कहीं तुम रोहान को तंग ना करो। और वह तुम्हें डांट ना दे। तुम इसे तंग मत करना। और वह जैसा पढ़ाए वैसे ही पढ़ना। वही करना जो तुम्हारे सर कहें। तानिया कहने लगी ठीक है पापा। पापा मैं सर को शिकायत का मौका कभी नहीं दूंगी और सर को तंग भी नहीं करूंगी। इस तरह मैं तानियों को अपने घर लेकर चला गया था। कोई गाड़ी तो थी नहीं। मैं मोटरसाइकिल पर था इसलिए तानियों को अपने पीछे बिठाया और उसका बैग सामने रख दिया था। वो काफी आराम से बैठ गई थी। उसने एक अंधा हाथ मेरे कंधे पर रख दिया था। मेरा दिल धड़कने लगा था। मैं जितना चाहता कि उस लड़की को खुद से दूर रखूं। मेरा दिल उसकी तरफ खींचने लगा था। लेकिन मैंने खुद पर काबू पाया और उसे अपने घर लेकर गया था। मां ने उसे देखा तो बेहद हैरान हो गई थी। मैंने मां को सारी बात बता दी थी। मां कहने लगी इधर आओ बेटा मुझे तुमसे कोई बात करनी है। मैं मां के रूम में गया तो मां कहने लगी बेटा तुमने यह क्या कर दिया? तुम जानते हो ना कि तुम्हारी कजिन की शादी है। मुझे वहां भी जाना है। वो शादी दूसरे शहर में है। मैं तीन-चार दिन बाद ही आऊंगी। और अब तुम इसको लेकर आ गई। अब यह अकेली कैसे रहेगी? मां की बात सुनकर मेरे दिमाग में आया कि मैं तो भूल ही गया था कि इन्हें एक शादी पर जाना था। अब मैं क्या करता? मुझे काफी अजीब लग रहा था। लेकिन मैंने खुद को समझाया। मां से कहने लगा अब इस मसले का हल क्या निकालेंगे? अब ऐसा तो नहीं कर सकते कि तानिया को वापस भेज दूं। क्योंकि तानिया के पापा चले गए हैं। अब अगर मैं सर को इंकार किया तो अब उन्हें अच्छा भी नहीं लगेगा। इसलिए ऐसा करते हैं कि आप शहर चली जाएं। मैं तानिया को संभाल लूंगा। वह बहुत अच्छी बच्ची है। मुझे कोई दिक्कत नहीं होगी। मां कहने लगी नहीं नहीं ऐसा नहीं कर सकते। मोहल्ले के लोग बातें बनाएंगे। मुझे गुस्सा आ गया। मैंने कहा मां आप मोहल्ले वालों की बातों पर कभी यकीन करने लगी। आपको पता है ना कि मेरी नियत क्या है? क्या आपको अपनी बेटे पर भरोसा नहीं है। आप आराम से शादी में जाएं। सब कुछ मुझ पर छोड़ दें। अपने बेटे पर छोड़ दें। आपकी परवरिश पर कभी दाग नहीं आने दूंगा। मेरी मां को मुझ पर पूरा यकीन था और वह मुझ पर भरोसा करते हुए शादी पर चली गई। अब इस घर में मैं था और मेरे साथ तानिया भी थी। वो मुझसे पूछने लगी। सर आपकी मां कहां गई है? मैंने कहा इन्हें बाहर कुछ काम था। रात तक आ जाएगी। मैंने उसे कुछ भी नहीं बताया और यही कहा कि मां काम से गई है। वह जल्द ही वापस आ जाएगी। मैं तानिया को पढ़ाने लगा था। मैंने उसे फिजिक समझाई थी लेकिन उसे समझ नहीं आती थी। वह कहने लगी सर स्कूल की कल छुट्टी है। मुझे स्कूल नहीं जाना है इसलिए बाकी का आप कल पढ़ा देना। मुझे भी याद आया कि कल तो छुट्टी है और मुझे भी स्कूल नहीं जाना। क्योंकि हमारे कॉलेज में एक्सपो डे होने वाला था इसलिए मैंने छुट्टी ही करनी थी। अब मैं हैरान हो गया। मैंने तानिया से कहा ऐसा करते हैं कि तुम सो जाओ क्योंकि वैसे भी कल छुट्टी है तो मैं तुम्हें बाकी सारा कल पढ़ा दूंगा। तानिया कहने लगी ठीक है सर मैंने उसे रूम का रास्ता दिखाया तो वो वहां से चली गई लेकिन फिर अचानक उसे मेरी मां का ख्याल आया। वो कहने लगी सर आपकी मां अभी तक नहीं आई है। वह कहां है? मैंने उसे बहाना बनाया और कह दिया कि मां रात को आ जाएगी। वह जल्दी ही आ जाएगी। उसे मेरी बात पर यकीन हो गया था लेकिन अंदर से मैं भी परेशान हो गया था क्योंकि अब मुझे लगने लगा था कि मुझे ऐसा नहीं करना चाहिए था। मुझे उसे झूठ नहीं बोलना चाहिए था। लेकिन मैं मजबूर था। मैं नहीं चाहता था कि तानिया को पता चले कि इस घर में हम दोनों अकेले हैं और उसके दिल में मेरे लिए बदगुमानी पैदा हो जाए। वह अपने रूम में जाकर लेट गई तो मैं भी अपने रूम में आ गया था। मैं गहरी नींद में था कि तभी मुझे ऐसा लगा जैसे अचानक रात को मेरे रूम का दरवाजा खुल गया हो। मुझे ऐसा महसूस हुआ जैसे कोई मेरे बिस्तर पर आकर लेट गया हो। यह देखकर तो मेरे होश उड़ गए थे। अचानक मुझे तानिया का ख्याल आया। मैंने जल्दी से अपने रूम में मौजूदा हल्की लाइट ऑन कर दी। लेकिन जैसे ही मेरी नजर तानिया पर गई, मैं हैरान रह गया था। मेरे बिस्तर पर तानिया लेटी हुई थी। मैंने कहा तानिया यह क्या हरकत है? तुम यहां पर क्या करने आई हो? अपने कमरे में जाओ। वो कहने लगी सर बुरा मत मानना लेकिन मुझे अंधेरे में अकेले घर में सोने की आदत नहीं है। मैं कभी अकेली नहीं सोई। जब भी सोती हूं पापा के रूम में ही सोती हूं। और अगर मैं गलत नहीं हूं तो मैं यह भी जानती हूं कि इस घर में मेरे और आपके अलावा कोई भी मौजूद नहीं है। लेकिन मैं क्या करूं? मुझे अकेले घर में डर लगता है। मैं अकेले नहीं सो सकती इसलिए मैं आपके पास आ गई हूं। मैंने उसकी बात सुनी तो उसके पागलपन पर मेरा जी चाहा कि अपना सर दीवार पर मार लूं। यह एक ऐसी लड़की है जो मेरे साथ रहने में शर्म महसूस नहीं कर रही। मैंने उससे कहा तान्या तुम इतनी छोटी भी नहीं हो। तुम तो जानती हो ना कि हम दोनों एक रूम में नहीं रह सकते। क्या अब यह भी मुझे तुम्हें समझाना पड़ेगा। वो कहने लगी मैं जानती हूं लेकिन मैं क्या करूं मैं मजबूर हूं। मैं कभी अकेली नहीं सोई हूं। मैं बहुत देर से अकेले रूम में सोने की कोशिश कर रही थी लेकिन मुझे बहुत ज्यादा डर लग रहा था। बहुत मजबूरी में मैं आपके कमरे में आई हूं। मैंने सोचा चुपचाप आपके पांव की तरफ जाकर सो जाऊंगी। लेकिन अकेले कमरे में नहीं सोऊंगी। यह कहकर वह रोना शुरू हो चुकी थी। उसकी आवाज मुझे अंदर तक बेचैन कर रही थी। मैंने जल्दी से कहा, अच्छा चुप हो जाओ। मैं कोई हल निकाल लेता हूं। लेकिन मुझे कोई हल नजर नहीं आ रहा था। इसलिए मैंने फैसला किया कि यह कंबल निकालकर उसकी जगह अपने बेड के पास साइड पर बना दिया और उससे कहा तुम यहां पर सो जाओ। मैं बेड पर सो जाता हूं। वो कहने लगी जी मुझे बेड पर ही नींद आती है। मुझे नीचे नींद नहीं आती। मजबूरन मैंने उसे अपनी जगह दे दी और वह बेड पर सो गई और मैं नीचे जमीन पर कंबल बिछाकर सो गया था। मैं अंदर ही अंदर खुद को कोस रहा था। मेरे दिमाग में यह बात आई कि क्यों नहीं बताया कि मां शहर से बाहर जा रही है। वह घर पर नहीं होगी। तो मैं कभी भी तानिया को अपने पास ना बुलाता। लेकिन अब तानिया मजे से मीठी नींद सो रही थी। जबकि मुझे जमीन पर नींद नहीं आ रही थी। ऊपर से तानिया के सोने का ढंग मुझे और भी डिस्टर्ब कर रहा था। एक तो वो बहुत ही फुल टायर्ड सूट में थी। ऊपर से कंबल भी नहीं ओढ़ रही थी। पूरा कंबल उतार कर फेंक दिया था और बेड पर फैल कर सोई हुई थी। बार-बार मेरी नजर उस पर उठ रही थी और मेरे दिल की धड़कनें भी बेकाबू हो रही थी। मैंने जैसे तैसे खुद पर काबू किया था। लेकिन मैंने सोच लिया था कि अब आगे मुझे क्या करना है। अगले दिन मुझे काफी गुस्सा आ रहा था। तानिया जल्दी उठ गई थी। उसने लाइट ऑन कर दी। मैंने उसे गुस्से से कहा यह क्या हरकत है। मैंने फैसला कर लिया था कि मैं अब उसे डांट कर ही रहूंगा और उसे इतना डांटूंगा कि उसे पता चल जाएगा इसने क्या किया है। मैंने उसे काफी डांटा था। उसे एक टॉपिक बार-बार याद कराता था और जब उसे नहीं हो रहा था तो गुस्से में मैंने उसे थप्पड़ भी मार दिया था। वो अपना गाल पकड़े हैरत से मुझे देख रही थी। मैंने यह थप्पड़ जानबूझकर मारा था ताकि वह रात को मेरे करीब दोबारा ना आए। मैं नहीं चाहता था कि जिस बात में उभर कर मैं कोई गलत कदम उठा लूं। तानिया भी समझ गई थी। बड़ी-बड़ी आंखों में आंसू भरकर कहने लगी, ठीक है मैं अब आपको तंग नहीं करूंगी। मैं वापस अपने घर चली जाती हूं। लेकिन मैं भी मजबूर था। मैं उसे वापस नहीं भेज सकता था। चार दिन इसी तरह गुजर गए थे। मुझे बहुत बुरा लग रहा था। लेकिन उसके बाद दानिया ने अपने पापा को बता दिया। लेकिन सर ने मुझे कुछ भी नहीं कहा था। वो तो उल्टा शर्मिंदा था और कहने लगी मैं माफी मांगता हूं। मैं जानता था कि मेरी बेटी शरारती है। वो कोई ऐसी हरकत जरूर कर देगी। मैंने सर से कहा कोई बात नहीं। मैं जानता हूं कि तानिया छोटी बच्ची है। इसे समझ नहीं थी। इसलिए मैंने भी उसे इजाजत दे दी थी। लेकिन अगले दिन सर ने कह दिया अब तानिया तुमसे नहीं पढ़ेगी। इसके लिए कोई लड़की का इंतजाम करूंगा जो उसे पढ़ाया करेगी। और तभी वह डर कर पढ़ेगी। इसलिए अब वो मुझसे नहीं पढ़ती थी। लेकिन मेरा गुजर बरसर तो फिर भी चल रहा था। मैं धीरे-धीरे तानिया को भूल गया था। लेकिन दिल के किसी कोने में वह अभी भी बसी हुई थी। जब मैंने उसे थप्पड़ मारा था और उसकी आंखों में आंसू चमक आए थे। उस पल को याद करता हूं तो दिल में तेजी होती है। मैं नहीं चाहता था कि मेरी वजह से तानिया की आंखों में आंसू आए। लेकिन मुझे तानिया को थप्पड़ मारना जरूरी थे। वरना वह उम्र के जिस हिस्से में थी कभी भी भाग सकती थी। और मैं अभी उस वक्त उम्र के जिस हिस्से में था, हम दोनों की उम्र नाजुक थी। अगर उस वक्त मैं कुछ गलत कर जाता तो जिंदगी भर खुद से नजर नहीं मिला पाता और ना ही अपनी मां के सामने नजर उठाकर बात कर पाता। इसलिए मजबूरन तानिया को सही राह दिखाने के लिए उसे थप्पड़ मारना जरूरी था। 5 साल का वक्त गुजर चुका था। एक दिन मुझे पता चला कि वो यूनिवर्सिटी पहुंच गई है। मैं बहुत हैरान हुआ था क्योंकि उस वक्त मैं भी जॉब कर रहा था। वो मुझसे छ साल ही छोटी थी। एक दिन अचानक मेरी नजर यूनिवर्सिटी के गेट पर तानिया पर पड़ी थी। मैं उसकी खूबसूरती को देखकर हैरान हो गया था। वह छोटी नहीं रही थी बल्कि बड़ी और समझदार बन गई थी। उसे यूनिवर्सिटी की हवा लग गई थी। कुछ लड़के उसके आसपास खड़े थे और उससे बातें कर रहे थे। मैं हैरान हुआ। मैंने एक नजर से देखा। शायद वह भी मुझे पहचान गई थी लेकिन वह मेरे पास नहीं आई। मैं बहुत हैरान हुआ कि ऐसे भी क्या नाराजगी कि वह मेरे पास नहीं आई। कितने दिन इसी तरह गुजरने लगे। मेरा दिल कहीं तड़प रहा था। दिल में दबी हुई तानिया की मोहब्बत कहीं ना कहीं मचलने लगी थी। मैं अब तानिया को ही देखता था। उसके पास चार लड़के होते थे जो उसके दोस्त बन गए थे और मुझे बहुत बुरा लग रहा था। मजबूरन एक दिन मैं तानी के पास चला गया। उससे कहने लगा क्या तुमने मुझे पहचाना? उसने मेरी बात का जवाब नहीं दिया। मैं बहुत गुस्से में आया। उसका हाथ दबोचकर दरख्त की साइड पर ले गया और कहने लगा यह क्या हरकत है? मैंने उससे कहा जब तुम मुझे इस तरह इग्नोर करोगी तो मैं यह सब करने पर मजबूर हो जाऊंगा। इसलिए चुपचाप मेरी बात सुनो। तानिया कहने लगी मैं जानती हूं मैंने तुम्हें बहुत तंग किया था। उसकी बात सुनकर मैं हैरान हो गया था। मैं कहने लगा मैंने तुम्हें पढ़ाया। क्या तुम इसका बदला इस तरह लोगी? मैं तुम्हारी बहुत इज्जत करता था। लेकिन अब तुम मुझसे ऐसी बात करोगी। वो कहने लगी उस वक्त तुम मेरे उस्ताद थे लेकिन अब तुम मेरे कुछ नहीं लगते। और जिनको मैं नहीं जानती मैं उनसे ऐसी ही बात करती हूं। मैं बहुत परेशान हो गया था कि उससे कैसे माफी मांगू। फिर एक रोज मैंने उससे माफी मांग ली थी। मैंने उससे कहा कि उस वक्त मेरा तुम पर गुस्सा करना बहुत ज्यादा जरूरी था। अगर मैं तुम पर गुस्सा नहीं करता तो बहुत कुछ गलत हो जाता। तुम और मैं उम्र के उस नाजुक हिस्से में थे। वो उम्र बहुत नाजुक होती है। जरा सी गलती हम दोनों को बर्बाद करके रख देती। इसलिए मजबूरन मुझे तुम पर गुस्सा करना पड़ा था और तुम पर हाथ उठाना पड़ा था। क्योंकि यह कोई झोटी बात नहीं थी कि एक जवान लड़का और लड़की इस तरह अकेले सोए। मैंने कहा मैंने तुम पर इसलिए गुस्सा किया था कि तुम गुस्सा होकर मुझसे अलग सोना शुरू कर दो। मैं एक लड़का था। कब तक अपने आप पर कंट्रोल करता? मैं नहीं चाहता था कि मैं तुम्हारे साथ कुछ गलत करूं। और सच तो यह है कि मैं धीरे-धीरे तुम्हें चाहने लगा था। मुझे तुमसे मोहब्बत हो गई थी। वह मेरी बात सुनकर खामोश रही थी। कुछ भी नहीं बोली थी। लेकिन उसकी आंखों की चमक ने मुझे बता दिया था कि वह मेरी बात सुनकर खुश हुई थी। शायद वह भी मुझसे मोहब्बत करती थी। वह चली गई। लेकिन मैं भी खड़ा नहीं रहा और वापस चल दिया क्योंकि अब मैं जानता था कि शायद उसे गलती का एहसास हो जाएगा। और वो मुझसे माफी मांगेगी। पर दिन इसी तरह गुजरने लगे थे। तानिया आई ही नहीं थी। कुछ दिन इसी तरह गुजर गए। एक रोज किसी ने मुझे आवाज लगाई। जैसे ही मैंने पीछे देखा तो तानिया थी। वो मेरे पास आई और कहने लगी मुझे माफ कर दो। मुझे यह सब कुछ नहीं करना चाहिए था। लेकिन मैं क्या करती? मुझे आज तक किसी ने ऐसी बात नहीं की थी जिस तरह तुम बात करते थे। तुमने मुझे पढ़ाया था। उसका बहुत-बहुत शुक्रिया। लेकिन मैं बहुत नाजुक थी। मेरे पापा ने कभी भी मुझसे इस तरह तेज लहजे में बात नहीं की थी। लेकिन तुमने उस दिन मुझे थप्पड़ मारा था तब से ही मैंने सोच लिया था कि मैं अपने पापा को बता दूंगी कि अब मैं तुमसे नहीं पढूंगी और मैंने सोचा था कि अपने पापा से कहकर कोई दूसरा टीचर रख लूंगी। उसकी बात सुनकर मैं थोड़ा सा मुस्कुराने लगा था। अगले ही दिन मैंने अपनी मां को अपना रिश्ता लेकर तान्या के पापा के पास भेज दिया था। मेरे सर को भी इस रिश्ते पर कोई ऐतराज नहीं था। खुशी-खुशी इस रिश्ते के लिए राजी हो गए। और ठीक 10 दिन बाद आनी मेरी दुल्हन बनकर मेरे कमरे में बैठी हुई थी और मैं उसके सामने बैठ उसे देख रहा था और वह शर्म से अपने आप में सिमटती जा रही थी। मैंने उसका हाथ थाम कर कहा तानिया अब तुम पूरे इख्तियार के साथ मेरे बिस्तर पर मेरे साथ सो सकती हो। यह कहकर मैंने तान्या का हाथ चूम लिया था और वह भी शर्माते हुए मेरे सीने से लग गई
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