Jang e Khandaq.!! || Maulana Ali Hussain Madni || All Related Islamic

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27 दिन मुसलसल इमाम शमसुद्दीन जहबी ने तारीख उल इस्लाम में लिखा है कि मुसलसल 27 दिन गुजर गए और अब वो खंदक है जो साढ़े गज चौड़ी साढ़े गज गहरी और साढ़े मील लंबी खंदक तो 10000 का लश्कर है 10 ऊंट दिन में इस्तेमाल कर रहे है 10 ऊंट रात में जिबाह किए जाते हैं उनमें पज मुर्दी फैल रही है क्या करें इधर ये खौफ जदा है और उस तरफ से वो कि क्या करें बिलखिरिया 100 हज के लश्कर में से सात बड़े जरनल और शुजा तरीन अफराद इन्होंने खंदक उबू की मैं बताऊं जंगे खंदक में मुसलमानों का कितना हिस्सा शामिल है सबसे पहले सबसे आगे आगे आम्र बिन अब्द वद और दूसरे नंबर पे जो शुजात में इसका हम पल्ला था कवी उल जुस्सा तवील कामत पुर हैबत जिसे देखकर लोग कांपना शुरू कर देते थे इसका बेटा हासिल बिन आम्र बिन अब्दु बाद तीसरे नंबर पे हबरा इब्ने अबी वाहब चौथे नंबर पे इकमा बिन अबू जहल पांचवे नंबर पर जरर बिन खता फहरी और छठे नंबर पर नोफल बिन अब्दुल्लाह और सातव नंबर पर मंबा बिन उस्मान 27 दिन गुजरने के बाद यह सात अफराद खंदक उ करके आए और सबसे आगे आमर बने अब्दु वाद और इसने आकर पैगंबर के खमे के बाहर ललकारना शुरू किया यहां तक कि ऐसा सुकू और सन्नाटा तारी हुआ जैसे गोया जुबाने गुंग हो चुकी यहां तक इसने इतनी बड़ी गुस्ताखी की कि अपने नेजे से अपनी मर्ब के खेमे की चादर को चीर दिया और नेजे से कपड़ा ऊपर उठाकर मोहम्मद अगर कोई और नहीं आता आप खुद आ जाओ जब मुझे कत्ल करके जहन्नुम भेज दो या खुद जन्नत में चले जाओ मेरे हाथों मार के जब इतनी बड़ी गुस्ताखी देखी तमी मर्तबा ने फरमाया महाल कल कौन है जो इस कुत्ते का मुंह बंद करे कौन उठा जब खत्म मर्तबा ने फरमाया मल कल कौन उठा सिवाय अली के फरमाया अना या रसूल अल्लाह तो पैगंबर भेज दे अली को इसलिए कि दुश्मन इंतजार कर रहा है ललकार रहा है तो जब अली खड़े हुए तो भेजे क नहीं अली आप बैठे दोबारा पूछा महा कल फिर अली खड़े हुए फिर फरमाया बैठ जाइए फिर तीसरी मर्तबा पूछा बताओ कौन है जो इस कुत्ते का मुंह बंद करे तीसरी मर्तबा भी कौन उठा सिर्फ अली ये पैगंबर बारबार क्यों पूछ रहे हैं जब पहली अली निकाह में जाने के लिए तैयार तो भेज दे तो खत्म मर्तबा जानते थे कि मो खयानत करेगा कि जैसे ही पैगंबर ने बोला अली खड़े हो गए वरना अली खड़े ना होते तो फला चला जाता फला चला जाता फला चला जाता ना जंगे अजाब और जंगे खंदक की फतह का सेहरा सिर्फ अली के सर सजर है अब जो अली उठे अम इने अब्दु के मुकाबले में बस इशारा कर रहा हूं लमहे में से दो नीम किया और इसके बाद इसका बेटा हस बिन आम बिन अब्द जो 1000 अफराद के साथ लड़ने की सलाहियत रखता है ये आगे बढ़ा और इसे भी लम्हों में हर्फ गलत की तरह से मिटा दिया और फिर इसी को बचाने के लिए आगे बढ़ रहा था नोफल बिन अब्दुल्लाह मौला मुत ने इस पर तलवार चलाई और उसी सूरत से उसकी तरफ नेजा फेंका या बाज रिवायत में तीर चलाया वो वही गिर के मर गया और बाकी भागे और भागने वालों में से मंबा बिन उस्मान ये भागते हुए खंदक में जागे रहा तीन कत्ल हुए अली के हाथ से चौथा खंदक में गिर गया मंबा बिन उस्मान ये गिरा खंदक में और नोफल बिन अब्दुल्लाह जब गिरा तो जो साढ़े मील यानी तकरीबन साढ़े किलोमीटर लंबी खंदक थी 55 गज चौड़ी 55 गज गहरी पैगंबर ने इस पर आठ चौकियां कायम कर रखी थी हर चौकी पर आठ मुहाजिर आठ अंसार खड़े थे जैसे ही ये गिरा तो मुसलमानों ने ऊपर से पत्थर मारने शुरू किए बास तीर चला रहे हैं नोफल ने कहा कि मुझे इतनी जिल्लत और खारी के साथ कत्ल ना करो या तो मुझे बाहर निकालो या तुम सब नीचे आ जाओ अजीब है पढ़े तारीखें कहा सब नीचे आ जाओ लेकिन मुसलमान ना खंदक में उतर रहे हैं ना उसे बाहर आने दे रहे हैं जबक वो कह रहा है कि सब मिलकर मुझसे मुकाबला करो मैं एक हूंगा लेकिन ऐसे जिल्लत से ना मारो अली पैगंबर के खेमे के करीब पहुंच चुके थे जैसे ये शोर सोना पूछा अा क्या हुआ कहा कि नोफल बिन अब्दुल्लाह शोर मचा र है खंदक में गिर गया था और अब मुकाबले के लिए बुला रहे है लेकिन मुसलमानों में जुरत नहीं हो रही है वहीं से पलटे अली और खंदक के किनारे पे खड़े होके पूछा बाहर आना चाहते या मैं अंदर आ [प्रशंसा] जाऊं कहा आप अंदर आ जाइए अली गए ये अली की करामत है ये अली का कम है ये अली की जूद सखा की मंजिल है एक मर्तबा फरमाया नोफल अगर मुझ पर हमला करो और हमला करके खुद को बचा सकते हो तो बचा लो इसने हमला किया हजरत ने इसके बद को रद किया और फिर ऐसा वार किया कि इसे दो नीम कर दिया सात आए चार अली के हाथ से कत्ल हुए तीन भागने में कामयाब हो गए मुसलमानों का हिस्सा बताऊं जंगे खंदक और जंगे एजाम जिसमें सबसे ज्यादा कुफर तैयार होके आए कितना हिस्सा था बताऊं मुसलमानों का किरदार इस जंग में कुल किरदार जोकि खत्म कर रहा हूं समेट रहा हूं जंगे खंदक और जंगे अजाब में मुसलमानों का किरदार इन तीन भागने वालों में से एक हबरा इने अबी वाहब दूसरा इकमा बिन अबू जाल तीसरा जरर बिन खता फहरी वो दो आगे थे जरार पीछे था तो यह भाग रहा था जब यह भाग रहा था तो किसी के जहन में ख्याल आया चलो बहती गंगा में हम भी हाथ धो ले बहती गंगा में हम भी हाथ धो ले अली ने मारा है तीन को चार को मारा एक को मैं भी मार लू ताकि मेरा भी नाम शामिल हो जाए तो भाग रहा है मैं भी पीछे से एक तलवार मारूंगा गिर जाएगा मैं आकर बताऊंगा कि मैंने भी कत्ल किया एक को यह पीछे दौड़ा कत्ल के इरादे से और जरर बिन त्ताब फहरी को सिर्फ खयाल आया ख्याल आया कि अली का शेवा नहीं कि वह भागने वाले का पीछा करे इसलिए जो भागता है से जिंदगी की भीख मांगता है और अली वो करीम इंसान है जो दुश्मन को भी महरूम नहीं रखता अली तो मेरे पीछे नहीं आ सकते कि मेरे पीछे कौन आ रहा है लड़ने के लिए नहीं देखने के लिए घोड़े को मोड़ा और जैसे ही मोड़ा जो पीछे आ रहा था उसने समझा अब तो जंग होगी वही से अपने घोड़े को पलटा और दौड़ते हुए रसूल के खेमे की तरफ रुख किया और जरर बिन खता को कत्ल करने के लिए आया था इसी जर्रार ने आवाज दी कि अब कभी मेरे इस एहसान को फरामोश ना करना कि मैंने तुम्हारी जान को बख्श दिया वरना मैं तुम्हें कत्ल करना मेरी जरा बराबर मुश्किल नहीं था ये जर्रार बिन खता फहरी ने कौन था जो वापस पलट के गया जाकर तारीखी किताबों पढ़ लीजिए बस इतना है कि उसकी हुकूमत के दौरान एक मर्तबा उसे याद दिलाया था याद है फला दिन मैंने तेरी जान माफ कर दी थी यह मुसलमानों का हिस्सा है यह मुसलमानों का किरदार है जंगे खंदक जंगे अजाब वाहिद फते अली तालिब अली है लेकिन कुरान आयत सफ में दो चा 10 20 40 50 अफराद की शुजात को बयान नहीं कर रहा इसके बाद गुज कुरेज गुज बनी नजर जा सलाल गुज हुनैन जिससे मुतालिक कुरान फरमा र नन के दिन मुसलमानों तुम्हें तुम्हारी कसरत पर नाज हो गया जिसका नतीजा यह हुआ कि जब कु फार ने हमला किया तो कुरान फरमाते कि मुसलमान इस तरह से भाग रहे थे कि भागने के लिए रास्ता नहीं मिल रहा था इसका मतलब ये कि हुनैन में आने वाला लश्कर भी इस काबिल नहीं कि वो सब का मिस्दा करार पा सके

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