महाराज जी मुझे मरने से बहुत डर लगता है। मुझे पता है। यार मरने के लिए कौन शौक में बैठा है? मरने का शौक किसको है? सबको लगता है कि यार जो आया है सो जाएगा क्या राजा रंग का फकीर। इसमें क्या डरना भाई जो आया है सो जाएगा। क्या राजा रंग फकीर चाहे वो भिखारी हो चाहे साधु हो चाहे राजा हो यहां से तो जाना पड़ेगा। जैसे देखो हमारी दोनों किडनी फेल है। डायलिसिस होता है। कभी भी मृत्यु हो सकती है। लेकिन हम हंस रहे हैं। हमें कोई भय नहीं, कोई दुख नहीं क्योंकि हमने अपने चित्त को भगवान से जोड़ा है। मुझे पता है कि मेरा शरीर छूटेगा। मेरा प्रीतम जो श्यामा श्याम है मैं उनके पास जाऊंगा। जिनके लिए मैं जीवन भर तड़पता रहा। जिनके लिए जीवन भर भजन किया। अब उनके पास मिलने का समय आ रहा है। तो मृत्यु मेरे लिए महोत्सव है। भयावाह नहीं। भयावाह कब होती? जब मेरा परिवार होता और उनमें मेरी प्रबल आसक्ति होती। मकान में बैंक बैलेंस में तब होता कि मरने से सब छूट जाएगा तो भय लगता है। बात समझना तो अगर आप इन सब में भगवत भाव करके नाथ सकल संपदा तुम्हारी मैं सेवक समेत सुत नारी तो मरने का भय चला जाएगा।
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