Oil, Blood & Nukes - UNTOLD HISTORY Of Iran vs. USA | Chavda On TRS

Ranveer Allahbadia15,310 words

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जय हिंद दोस्तों, हिस्ट्री स्पेशल है यह। बहुत सारे जिओपॉलिटिकल अपडेट्स आपको स्पीड के साथ मिलेंगे आज के एपिसोड के थ्रू। बट सर ने और मैंने बहुत ज्यादा हिस्ट्री की पढ़ाई करी है आज के एपिसोड के लिए ताकि इट कैन बी एन एन एवरग्रीन एपिसोड ताकि आपको बहुत कुछ सीखने को मिले। और इस पूरे ईरान वर्सेस यूएसए कॉन्फ्लिक्ट को आप और गहराई से समझें। यही होता है पॉइंट ऑफ स्टडिंग हिस्ट्री कि आपकी कि अ करंट अफेयर्स की नॉलेज और ज्यादा रिच हो जाए और ज्यादा स्टिमुलेटिंग हो जाए। अभिजीत चावड़ा का स्वागत है सर। बहुत धन्यवाद। थैंक यू सो मच। ओके झट से शुरुआत करते हैं। दो बहुत जरूरी सवाल है भारतीय पर्सपेक्टिव से। पहला सवाल ये है कि अगर न्यूक्लियर बम फटी कहीं तो गल्फ में तो फिर इंडिया में क्या होगा? रेडिएशन लीक हो सकती है? बिल्कुल हो सकती है। बिल्कुल। देखिए तेहरान से मुंबई की दूरी लगभग 2800 कि.मी. के आसपास होगी। ठीक है? और जब मैं छोटा था जब मैं एक लड़का था तब चर्नोबिल में एक्सप्लोजन हुआ था न्यूक्लियर रिएक्टर का और मैं रहता था स्विट्जरलैंड में वो लगभग 2200 कि.मी. है चर्नोबिल से और वहां पर उसका फॉल आउट हुआ था। ओके? चर्नोबिल न्यूक्लियर एक्सप्लोजन का। तो डेफिनेटली अगर ईरान में कहीं पे एक्सप्लोजन होता है या फिर गल्फ में होता है तो भारत इतना दूर नहीं है और एक्सप्लोजन तो पूरा उसके जो न्यूक्लियर फॉल आउट है वो सब एटमॉस्फेयर में जाता है और हवा के करंट्स के कारण यहां वहां फैलता है सो डेफिनेटली इंडिया कैन बी इंपैक्टेड बाय दिस मतलब आप एक फिजिसिस्ट भी हो न्यूक्लियर फॉल आउट मतलब क्या फॉल आउट क्या होता है न्यूक्लियर फॉल आउट मतलब जब न्यूक्लियर बम फटता है तो उसमें से बहुत सारे रेडियोएक्टिव पार्टिकल्स बाहर जाते हैं इंटू द एटमॉस्फियर एसेंशुअली वेपराइज हो के आते हैं और फिर और फिर जब थोड़ा ठंडा होता है वो तो कंडेंस होता है। तो हवा में बहुत छोटे-छोटे छोटे-छोटे रेडियोएक्टिव पार्टिकल्स आपको मिलेंगे। मिलियंस बिलियंस ऑफ देम और ये सब इनविज़िबल क्लाउड्स की तरह हवा में एटमॉस्फियर में अलग-अलग जगह जाएंगे विथ द एयर सर्कुलेशन। तो अगर आपके ऊपर उसको वो वो गिरा तो आपको कैंसर हो सकता है। सो दैट्स अ वेरी डायरेक्ट इफेक्ट ऑफ दिस। हम अ तो भारतीय पर्सपेक्टिव से यह समझाइए कि वहां जो कॉन्फ्लिक्ट हो रहा है हमारे देश की इकॉनमी कैसे अफेक्ट होती है? रुपी कैसे अफेक्ट होता है? जी देखिए हमारी हमारा देश बहुत बड़ा है। हम जानते हैं सब। ओके और हम बहुत सारा तेल और गैस कंज्यूम करते हैं। ओके? हमारी इकॉनमी इसको कंज्यूम करती है। हमारे जो मोटर व्हीकल्स है, हमारे जो विमान है, हमारे जो डीजल क्या बोलते हैं? ट्रेंस है, हमारे पास लाखों करोड़ों ही है। और इन सबको ये तेल चाहिए। राइट? डीजल चाहिए या फिर पेट्रोल चाहिए। इस हमारा जो लगभग 40% तेल जो हमारे देश में इंपोर्ट होता है वो स्ट्रेट ऑफ हॉर्मोस से होकर से गुजर कर आता है जो बिल्कुल बाजू में ही है हमारे लिए। ठीक है? अभी स्टेट ऑफ हॉर्मोस इंपैक्टेड है। वहां से कुछ-कछ तेल के टैंकर्स आ रहे हैं विन जिनको ईरान परमिशन दे रहा है। और हमारे पास जो टैंकर्स आ रहे हैं उनको ईरान परमिशन दे रहा है। सो तो मतलब हमारा सिचुएशन ठीक-ठाक है। हमारे पास कुछ कुछ दिनों के ऑयल रिजर्व्स भी है स्ट्रेटेजिक ऑय रिजर्व्स और अगर सिचुएशन ऐसा हुआ कि हॉर्मोनस बंद हो गया। ओके हमारे लिए तो हम रूस से भी तेल मंगा सकते हैं। लेकिन प्रॉब्लम यह अभी है कि कि यूक्रेन रूस के ऊपर आक्रमण कर रहा है। उनके जो ऑयल रिफाइनरीज और ऑयल एक्सपोर्टिंग हब्स जो है उसके ऊपर आक्रमण कर रहा है और काफी सारा नष्ट नष्ट कर दिया है। तो रूस का कैपेबिलिटी टू टू टू डिलीवर ऑयल टू इंडिया वो काफी अफेक्ट हो रहा है इस समय। ठीक है? और दूसरी बात है गैस लिक्विफाइड नेचुरल गैस या एलपीजी लिक्विफाइड पेट्रोलिंग गैस हमारा बहुत सारा वो भी गैस भी स्टेट ऑफ हॉर्मोस के थ्रू आता है कतर से आता है बहुत सारा और ये भी अभी इंपैक्टेड है और बिकॉज़ लड़ाई हो रही है तो उनके जो गैस प्लांट्स हैं उसको भी ईरान ने अटैक किया है। तो डेफिनेटली बिकॉज़ ऑफ़ दीज़ थिंग्स हमारे ऊपर इसका बहुत बड़ा इंपैक्ट हो सकता है। मैं जानता हूं कि इंडिया में कई सारे रेस्टोरेंट्स अभी बंद हो बंद हो रहे हैं। बिकॉज़ उनके पास वह गैस कुकिंग गैस नहीं है। और हमारे जितने भी हाउसहोल्ड्स हैं, ओके? ऑर्डिनरी जो हाउसहोल्ड्स हैं वो भी कुकिंग गैस का इस्तेमाल करते हैं। या फिर या तो सिलेंडर में या फिर डायरेक्टली पाइप्ड। तो अगर ऑयल का जो हमारा इंपोर्ट है वो सिग्निफिकेंटली इंपैक्ट होता है। तो कुकिंग गैस की कमी पड़ जाएगी। व्हिच विल बी वेरी ब्रूटल फॉर इंडिया। तो ये सब ये सब कंस्ट्रेंट्स है हमारे हमारे ऊपर इस समय जिससे हमारी गवर्नमेंट को जूझना पड़ेगा और इससे रूपी के ऊपर भी असर हो सकता हो सकता है बिकॉज़ अगर हमारी इकॉनमी डाउन हो गई तो रूपी रूपी के ऊपर उसका डायरेक्ट इंपैक्ट होता है। सो डेफिनेटली इंडिया इज़ इन काइंड ऑफ़ डेंजर राइट नाउ। लॉकडाउन तो नहीं होगा लेकिन पोटेंशियली अह अह फ्यूल रैशनिंग हो सकता है या फिर गैस रैशनिंग भी हो सकता है। हम्म ऐसा हुआ है इन द पास्ट। हम्म अ इंडिया एक डिप्लोमेटिक स्टैंड्स ले रहा है इस पूरे कॉन्फ्लिक्ट में। हम दोनों साइड के पक्ष में हैं। अ पता है ये एक प्रो मोदी स्टेटमेंट नहीं है। बट ये जो मोदी जी ने ट्रैवल करा पिछले 10 सालों में अलग-अलग देशों को विजिट करा। डिप्लोमेटिक रिलेशंस बढ़ाए। अब उनका नतीजा हमें दिख रहा है यहां कि एवरीवन इज इंडियास फ्रेंड सर्टा एम आई राइट रोंग? जी हां, यू आर राइट। इंडिया ने मल्टी अलाइनमेंट का पॉलिसी पिछले 10 12 साल में बनाया है। हम सभी के मित्र हैं। हमारा कोई दुश्मन नहीं है। अनलेस यू वांट टू बी आवर एनिमी तो हम कुछ नहीं कर सकते। लेकिन हम सबसे मित्रता करना चाहते हैं। हम पाकिस्तान से दूर रहेंगे। हम उनसे बात करने की जरूरत नहीं है। लेकिन बाकी सारे देशों से हम अच्छे रिलेशंस बनाकर बनाने की कोशिश कर रहे हैं। बनाने के प्रयत्न किया है और बहुत सक्सेसफुली किया है। जो गल्फ नेशंस हैं सारे के सारे उनके साथ हमारे अच्छे रिलेशंस मतलब इतने अच्छे रिलेशंस नहीं थे पहले। अभी बहुत अच्छे रिलेशंस है वि यूएई वि सऊदी अरेबिया वि ओमान इवन वि कतर एटसेटरा तो इवन वि ईरान ईरान के साथ भी हमारे काफी रोबस्ट रिलेशंस हैं। तो हम सबके मित्र हैं और और इजराइल के बात है। हमारा इजराइल के साथ काफी काफी स्ट्रांग स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप है। तो हम सबके मित्र हैं। हम किसी के दुश्मन नहीं है। हम यूएस से भी अच्छा रिलेशनशिप चाहते हैं। हम इजराइल से भी चाहते हैं और ईरान से भी चाहते हैं। तो इस समय सिचुएशन यह है कि इंडिया इज़ द ओनली नेशन जो सब सभी के साथ अह अच्छे रिलेशंस रिलेशंस आज भी कर सकता है। सो इट्स इट्स अ वैरी गुड पॉलिसी टू हैव। ओके। अह अभी हिस्ट्री में घुस जाते हैं। हम्। अह आई थिंक हर कोई ना आयाटोला खोमेनी के बारे में जानता है। एटलीस्ट नाम तो सुना होगा बट वो एक 1970 के फिनोमिना है। उनसे भी पहले ये ईरान यूएसए की स्टोरी शुरू हुई थी 1950 में। और जिस तरह से अंग्रेज इंडिया पर रूल करते थे। अंग्रेज कुछ हद तक ईरान पर भी रूल करते थे। सेम पीरियड में। हम अक्सर अंग्रेजों को ही भारतीय पर्सेक्टिव से देखते हैं। बट अंग्रेज एशिया में बहुत सारे देशों को रूल करते थे। जहां भी इंग्लिश बोली जाती है, यू कैन अस्यूम कि अंग्रेजों का कुछ तो एलिमेंट था वहां। अ ईरान की हिस्ट्री जब मैं पढ़ रहा था इस पूरे स्टडिंग फज़ में तो मेरे को पता चला कि वो देश आज भी डिवाइडेड है। अ कुछ-कुछ लोग रूलिंग गवर्नमेंट को सपोर्ट करते हैं। कुछ-कुछ लोग अगेंस्ट हैं और हिस्टोरिकली भी यही सिनेरियो रहा है ईरान के लोगों का। बट आई डू बिलीव कि अमेरिका एक नैरेटिव पुट आउट करता है ईरान के बारे में कि नहीं एक्सट्रीमिस्ट देश है ये हो रहा है वो हो रहा है। अ दिसंबर 2025 में एक पब्लिक रिबेलियन भी हुआ था अ मोर्चा हुआ था अबाउट द करंट रूलर्स बट इट वाज़ मोर रिलेटेड टू इनफ्लेशन इन ईरान। अ ये इनफ्लेशन एग्जैक्टली हुई क्यों? या तो एक 2025 के पर्सपेक्टिव से समझाइए या तो एक हिस्टोरिकल पर्सपेक्टिव से समझाइए क्योंकि अगर इतनी बड़ी ऑयल फील्ड है व्हाई शुड द कंट्री बी इन अ डिफिकल्ट इकोनॉमिक प्लेस? जी बिल्कुल। देखिए ईरान की इकॉनमी जो है उसके ऊपर बहुत सारे सेंशंस लगा के बैठा है यूएस कई सालों से। दुनिया भर के सेंशंस डाले हैं उसके ऊपर। इससे क्या होता है कि ईरान कैन नॉट ट्रेड विद अदर कंट्रीज यूजिंग द नॉर्मल मैकेनिज्म्स। नॉर्मल मैकेनिज्म्स क्या है? यूएस डॉलर है और Swift सिस्टम है। राइट? तो अगर आपके पास Swift का एक्सेस नहीं है तो आप किसी को करेंसी आई मीन यू नो मनी भेज नहीं सकते हो। आप रिसीव भी नहीं कर सकते हो। तो ये एक चीज़ है और दूसरी दुनिया भर के सेंशन अगर किसी देश के ऊपर डालोगे आप तो उनकी इकॉनमी बर्बाद हो जाएगी। तो ईरान की इकॉनमी बहुत ही बुरी स्थिति में है और इसके कारण लोग बहुत दुखी है। राइट? अगर आपके पास एक देश है और आपकी एक सरकार है और आपकी इकॉनमी बहुत ही बुरी दुर्दशा में है तो जो कॉमन आदमी है वो क्या जानेगा कि सेंशंस क्या होता है वो तो बोलेगा कि भाई आपके हमारी सरकार कुछ काम नहीं कर रही है। राइट? तो काफी फ्रस्ट्रेशन इससे होता है। तो वेनेसुला में भी यही हुआ कि वेनेसुला के पास भी बहुत सारा तेल है। वो भी एक्सपोर्ट करते थे दुनिया भर को। लेकिन यूएस ने वेनेसुला के ऊपर दुनिया भर के सेंशंस डाल दिए। तो वेनेसुला की इकॉनमी नष्ट हो गई। इनफ्लेशन हाइपर इनफ्लेशन तो नहीं हुआ लेकिन बहुत इनफ्लेशन हो गया और यू नो नॉर्मल गुड्स की बहुत कमी होने लगी एंड सो ऑन। तो सेम प्रॉब्लम विद ईरान आल्सो उनको मेडिकल सप्लाई नहीं मिलते। उनको दुनिया भर की चीजें नहीं मिलती है जो हम वी टेक फॉर ग्रांटेड। तो इसलिए ईरान की इकॉनमी इतनी बुरी दुर्दशा में है। और ईरान के पास बहुत सारा तेल है। वन ऑफ द बिगेस्ट ऑयल प्रोड्यूसिंग नेशंस। लेकिन यूएस ने बहुत सारे नेशंस को ऐसा बोला है, फोर्स किया है कि आप ईरान से तेल नहीं खरीद सकते। फॉर एग्जांपल 2010 के आसपास तक 2015-16 तक हम इंडिया ईरान से बहुत सारा तेल खरीदते थे। फिर यूएस ने दबाव दबाव डाला इंडिया के ऊपर तो हमने छोड़ दिया। ठीक है हम नहीं लेंगे इनसे। सो ईरान के ईरान का जो वो रेवेन्यू था वो बंद हो गया। तो इस प्रकार से बहुत सारे अलग-अलग देश हैं जो अब ईरान से तेल नहीं खरीद रहे हैं बहुत सालों से। इसलिए ईरान इज फोर्स टू सेल टू ओनली टू थ्री नेशंस। एक तो चाइना है और रूस के पास तो जरूरत नहीं है ऑयल की। राइट? बिकॉज़ दे आर प्रोड्यूसिंग नेशन। तो इसलिए ईरान की ये दुर्दशा हुई है बिकॉज़ ऑफ़ ऑल दीज़ एक्सटर्नल कंस्ट्रेंट्स इंपोज्ड बाय द यूनाइटेड स्टेट्स। ओके। एक सवाल मैं ऑब्जेक्टिवली पूछना चाहूंगा। क्या अमेरिका इतना ज्यादा शक्तिशाली है कि अगर वो चाहे तो एक पूरे देश को बर्बाद कर सकता है सेंशंस के थ्रू, टेररिफ्स के थ्रू? दे आर दैट पावरफुल। दे आर देयर पावरफुल कारण कि वो पूरी दुनिया की इकोनॉमिक सिस्टम को कंट्रोल करते हैं। दुनिया भर की इकोनमिक सिस्टम को के के दो तीन बेसिस है। एक तो ग्लोबल रिजर्व करेंसी है यूएस डॉलर। पेट्रोल डॉलर अगर आपको कुछ तेल का खरीद खरीदी करनी खरीदी करनी है या फिर सेल करना है तो नन नॉर्मली इट इज़ डन इन यूएस डॉलर्स। ओके? दूसरा है Swift सिस्टम। अगर आपको इंटर नेशनल इंटरनेशनल ट्रांजैक्शंस करने हैं बड़े-बड़े क्वांटिटीज के तो यू हैव टू गो थ्रू द Swift सिस्टम। अगर आपको इंडिया से आपके पर्सनल अकाउंट से किसी और देश में भेजना है तो आपको Swift कोड लगता है। राइट? सो यू नो द Swift कोड। अगर आपके देश में Swift बंद है तो यू कांट सेंड इट और यू कांट रिसीव इट। तो दैट्स हाउ यू कैन डिस्ट्रॉय अ नेशन। कंप्लीटली आप डिस्ट्रॉय कर सकते हो किसी नेशन को। अगर आप यूएस हो और आपके हर कोई अलायस है। आप अपने सारे अलायस को बोलिए कि भई आप इनके साथ ट्रेड मत कीजिए। तो वो आपकी मानेंगे। तो ये कंट्री पूरा आइसोलेट हो गया और उससे उनकी इकॉनमी बर्बाद हो जाएगी। सो यूएस कैन एक्चुअली डिस्ट्रॉय नेशंस इकॉनमी। हम ओके हम हिस्ट्री में भी घुसेंगे। उससे पहले आपसे ये पूछना चाहूंगा कि इस पूरे कॉन्फ्लिक्ट की वजह से फाइनेंशियली बेनिफिट कौन कर रहा है? क्योंकि रिपोर्ट्स आई है कि यूक्रेन भी ड्रोंस बना रहे हैं जो मेरे ख्याल से यूएसए खरीद रहा है। अ सो दे आर डेफिनेटली फाइनेंसियली बेनिफिटिंग। आई एम श्योर ऑन सम लेवल रशिया इस बेनिफिटिंग फ्रॉम दिस कॉन्फ्लिक्ट आल्सो। ये समझाइए क्योंकि मेरे ख्याल से पूरी दुनिया इस युद्ध में शामिल है। बिल्कुल डायरेक्टली या इनडायरेक्टली हम सब इसमें अनफॉर्चूनेटली इनवॉल्वड है। तो कौन-कौन इस युद्ध से बेनिफिट इससे बेनिफिट कर रहा है? देखिए इजराइल तो बेनिफिट नहीं कर रहा है। इजराइल तो डिस्ट्र डिस्ट्रॉय हो रहा है। बहुत बम ले रहा है ईरान। ईरान भी पूरा नष्ट हो रहा है। गल्फ नेशंस भी सारे बहुत ही बहुत बुरी तरह से हिट हुए हैं। लेकिन दूर के नेशंस को नेशंस को अगर हम देखेंगे ईरान ने स्टेट ऑफ़ होमोस को बंद किया है। शायद हुतीज़ अ स्ट्रेट ऑफ़ बाबल महाद्वीप को भी बंद कर दे। इट्स अ पॉसिबिलिटी तो उससे जो तेल जाता है दुनिया भर यू नो ईस्ट वेस्ट वो बंद हो जाएगा। तो उससे रशिया कैन बेनिफिट। क्योंकि रशिया इज़ अ मेजर ऑयल प्रोड्यूसिंग एक्सपोर्टिंग नेशन और वह इस इस शॉर्टफॉल को फुलफिल कर सकते हैं। तो भारत को भारत में अगर लेट्स से हॉर्मो से तेल नहीं आता है वी कैन प्लेस ऑर्डर्स विद रशिया और रशिया भेजेगा हमें और 30-40 दिन लगेंगे लेकिन मिलेगा हमें। ठीक है? सो रशिया कैन बेनिफिट। लेकिन यूक्रेन ने रशिया के तीनचार ऑयल एक्सपोर्टिंग हब्स और पोर्ट्स को डिस्ट्रॉय किया है विद ड्रोन अटैक्स। जिसके कारण रशिया का ऑयल आउटपुट 40% से कम हो गया है। तो अगर 100 था पहले अभी अभी 60 के आसपास है। राइट? सो रशिया बेनिफिट कर रहा था लेकिन यूक्रेन इज़ एनश्यर्ड दैट नाउ दे विल नॉट बेनिफिट दैट मच। ओके? दूसरा यूक्रेन है। यूक्रेन तो पूरा बर्बाद नेशन है। आज उनकी बहुत बुरी दुर्दशा है। लेकिन पिछले चार साल से वो रशिया से युद्ध कर रहे हैं। तो उन्होंने ड्रोन वॉरफेयर में बहुत ही एडवांसमेंट्स किए हैं। दे नो हाउ टू फाइट विथ ड्रोन। दे नो हाउ टू डिस्ट्रॉय ड्रोंस मतलब ऑफेंसिव एंड काउंटर ऑफेंसिव टैक्टिक्स टेक्निक्स टेक्नोलॉजी सब उन्होंने बना के रखी है एंड नाउ दे आर बिगिनिंग टू शेयर देम विथ द यूएस मुझे पता नहीं कि यूक्रेन को उससे कुछ पैसा मिलेगा या नहीं क्योंकि यूक्रेन इज लिविंग ऑन अमेरिकन डोनेशंस एंड यूरोपियन डोनेशंस लेकिन यह अह डेफिनेटली टेक्नोलॉजी और नो हाउ शेयर करेंगे विथ द यूएस सो यूएस बेनिफिट्स फ्रॉम दिस अगर होरमोल बंद हो गया ओके बाबल मंदिर बंद हो किया और रशिया का भी सप्लाई बंद कम हो गया तो यूएस बेनिफिट्स क्योंकि यूएस इज़ द वर्ल्ड्स लार्जेस्ट ऑइल प्रोड्यूसिंग नेशन और वह फिर अपना तेल बेचेंगे पूरी दुनिया को राउंड एंड राउंड राउंड अबाउट वेस्ट से शायद केप ऑफ गुड होप से भेजे व्हाटएवर सो वी कैन देन बाय फ्रॉम यूएस लेकिन यूएस को उससे काफी पैसा बनेगा सो यूएस बेनिफिट्स फ्रॉम दैट चाइना का क्या सिचुएशन है डस चाइना बेनिफिट देखिए चाइना चाइना जो ऑयल इंपोर्ट करता है लगभग 20 15 से 20% ईरान से आता अगर यह बंद हो अभी बंद नहीं है लेकिन थोड़ा धीरे हुआ है। अगर बंद हो गया देन इट विल हिट चाइना बैडली बिकॉज़ चाइना नीड्स अ लॉट ऑफ़ ऑयल। जापान को भी ऑयल चाहिए। लेकिन चाइना एक ऐसा नेशन है व्हिच इज़ सराउंडेड बाय द यूएस। यूएस के मोर देन 200 बेसिस है जो चाइना को सराउंड करते हैं फ्रॉम वेरियस डायरेक्शंस। बेसिकली साउथ और ईस्ट साइड राइट द आइलैंड चेन्स। अभी यूएस ने अपने जो वेपन्स है टॉमहॉक मिसाइल्स से थड एयर डिफेंस सिस्टम से यू नो एरिया डिफेंस सिस्टम्स इंटरसेप्टर मिसाइल्स बहुत सारे ये जो स्टॉक पाइल्स है वो खत्म कर दिए यूएस ने फाइटिंग अगेंस्ट ईरान इससे चाइना को डेफिनेटली एडवांटेज हो सकता है क्योंकि अगर कल लेट्स से चाइना डिसाइड करता है शी जिनपिंग ने ऑर्डर दिया लेट्स से हाइपोथेटिकली कल कि जाइए ताइवान पे आक्रमण कीजिए तो यूएस के पास जो जो मनिशंस है वो कम कम है। कुछ तो सिस्टम्स उन्होंने साउथ कोरिया से निकाल के पोर्शन गल्फ में भेजे हैं। सो द यूएस एबिलिटी टू अ काउंटर काउंटर बैलेंस चाइना वो थोड़ा कम हो रहा है अभी। राइट? सो चाइना इज़ बेनिफिटिंग इन दैट मैनर लेकिन नॉट फ्रॉम द ऑइल पर्सपेक्टिव। सो इयू के ऊपर भी काफी बुरा असर हुआ है ऑइल का। हमारे ऊपर भी हुआ है। सो मोस्टली आई थिंक यूएस बेनिफिट्स फ्रॉम दिस इन द लॉन्ग रन एंड चाइना बेनिफिट्स टू सम एक्सट बिकॉज़ ऑफ़ द यूएस स्टॉक पाइल डिप्लशंस। मतलब इस यू से यूएस चाइना कुछ हद तक यूक्रेन बेनिफिट कर रहा है। थोड़ा बहुत रशिया भी थोड़ा बहुत थोड़ा बहुत या ओके अभी जो ये कॉन्फ्लिक्ट हो रहा है मैं ये जानता हूं ये थोड़ा एक मिलिट्री पर्सपेक्टिव है कि अगर करेंटली वॉरफेयर हो रहा है दुनिया में कहीं भी तो दुनिया भर के मिलिट्रीज ना उस वॉरफेयर को स्टडी करते हैं कि व्हाट इज द मोस्ट मॉडर्न फॉर्म ऑफ़ वॉरफेयर हैपनिंग। यूक्रेन रशिया के बीच वो एसिमेट्रिक वॉरफेयर चल रहा था। करेंटली ईरान और यूएसए के बीच भी एसिमेट्रिक वारफेयर चल रहा है। एसिमेट्रिक वॉरफेयर लूजली स्पीकिंग इज कि आप बेसिकली कम पैसे खर्च करके युद्ध को लंबा खींच रहे हो। व्हाट इज़ एसिमिट्रिक वारफेयर सर? एसिमिट्रिक वॉरफेयर इज़ इन इज़ ऑफ़ डिफरेंट टाइप्स। एक एक सिचुएशन ये है कि एक बहुत ही शक्तिशाली नेशन है। व्हिच इज़ फाइटिंग अ वेरी वीक नेशन। लेकिन वीक नेशन बिकॉज़ ऑफ़ इनोवेशन इन गरिला टैक्टिक्स एंड ऑल दैट इट्स एबल टू फाइट फॉर अ लॉन्ग टाइम द पावरफुल नेशन फॉर एग्जांपल वियतनाम में ऐसा हुआ था। यूएस बहुत ही शक्तिशाली नेशन है बट वियतनाम इवेंचुअली डिफिटेड द यूएस थ्रू एसीमेट्रिक वारफेयर। दूसरा एग्जांपल है जब यूएसएसआर ने इन्वेशन किया था अफगानिस्तान के ऊपर। तब यूएस ने थ्रू पाकिस्तान बहुत सारा सप्लाई किया अफगानिस्तान को। उन्होंने पूरे ये मुजाहदीन खड़े किए एंड थ्रू एसिमेट्रिक वॉरफेयर दे वर एबल टू आउटलास्ट द यूएसएसआर एंड इवेंचुअली फोर्स यूएसएसआर टू टू विथड्रॉ तो ये एसिमेट्रिक वॉरफेयर का दूसरा एग्जांपल है। तीसरा एग्जांपल है कि एक एक नेशन है जिसका एक ही स्ट्रेटजी है व्हिच इज टू यूज़ ब्रूट फोर्स आओ पूरे नेशन को फ्लैटन कर दो एंड देन वॉक इन अगर यूएस का जो यूएस ने इराक में किया एक्सक्ट्ली 2003 में ओके या तो यूएस का एक ही स्ट्रेटजी है वॉक इन जस्ट ब्रूटल एज द होल नेशन फ्लैटन इट तो ये उसके उसका आप सामना कैसे करोगे तो उसका सामना ईरान ऐसे कर रहा है कि इट इज़ यूजिंग उनके उन्होंने दे हैव डन देर होमवर्क उन्होंने बहुत बड़े स्टॉक कॉक पाइल्स बना के रखे हैं ऑफ डिफरेंट काइंड्स ऑफ़ ड्रोन शाहिद ड्रोन एसेट्रा लाखों ड्रोन हो गए उनके पास एंड मे बी मोर देन 10,000 बैलेस्टिक मिसाइल्स मे बी मोर देन 10000 मे बी 20 300000 और इससे वो क्या कर रहे हैं कि उन्होंने सबसे पहले तो जो इंटरसेप्टर मिसाइल्स होते हैं यूएस के और इजराइल के उनको ऑलमोस्ट एग्जॉस्ट कर दिया है। लेट्स से यूएस के पास 10,000 इंटरसेप्टर्स थे। इजराइल के पास 10,000 10,000 थे। तो इन्होंने चीप ड्रोंस भेज-भेज के उन सारे इंटरसेप्टर्स को ऑलमोस्ट खत्म कर दिया है। दूसरा उन्होंने क्या किया है थ्रू अ वेरी प्रिसाइज बैललेस्टिक मिसाइल एंड ड्रोन स्ट्र्राइक्स उन्होंने रेडार्स को नष्ट किया है और अमेरिकन एवक्स एयरक्राफ्ट जो होते हैं जो हवा में रेडार लेके जाते हैं उनको डिस्ट्रॉय किया है और उनका उनका जो स्टॉक पाइल ऑफ़ ड्रोंस एंड बैललेस्टिक मिसाइल्स वो खत्म नहीं हो रहा खत्म ही नहीं हो रहे हैं। उन्होंने सबसे पहले जो पुराने बैलेस्टिक मिसाइल्स थे जो पुराने टेक्नोलॉजी वाले थे उनको यूज़ किया टु एग्जॉस्ट ऑल दी इंटरसेप्टर मिसाइल्स। और अब वो नए बैलेस्टिक मिसाइल्स का प्रयोग कर रहे हैं। तो वो कैसा बैलेस्टिक मिसाइल है कि आता है इट एंड रीएंटर्स द एमॉस्फियर और फिर वो 50-60 सबमिशंस को डिप्लॉय करता है। मतलब एक मिसाइल फट के बहुत सारी मिसाइल्स निकलती है। बहुत सारे बम्ब निकलते हैं। हम्म। तो अगर आप इंटरसेप्ट करना चाहोगे तो आप 50-60 में से किसको इंटरसेप्ट करोगे? यू कांट इंटरसेप्ट इट। तो तो ईरान ये सब स्ट्रेटजी यूज कर रहा है व्हिच आर वेरी एसिट्रिक स्ट्रेटजी यूएस के पास ओवरवेल्मिंग फोर्स था लेकिन ईरान ने बिकॉज़ ऑफ़ द स्ट्रेटजीज़ दे है व एसेंशियली चेकमेट इन द यूएस और यूएस के पास गल्फ रीजन में कई सारे मिलिट्री बेसिस है। एक तो बहरेन में है फिफ्थ फ्लीट हेड क्वटर्स व्हिच इज़ वन ऑफ़ द बिगेस्ट नेवल फैसिलिटीज़ इन द इन द वर्ल्ड। उसको ईरान ने मोस्ट लाइकली ऑलमोस्ट डिस्ट्रॉय कर दिया होगा या फिर बहुत बुरी तरह से डिग्रेड किया होगा। इट इज एसेंशियली अनयूजेबल। और दूसरे जो भी अलग-अलग यूएस बेस है इस रीजन में मोस्टली आर डिस्ट्रयड और वेरी बैडली डिग्रेडेड ऑलमोस्ट अनयूजेबल। यूएस के पास दो एयरक्राफ्ट कैरियर्स थे इस रीजन में। ईरान ने उनको भगा दिया वापिस। यूएस हैज़ टेकन देम अवे फ्रॉम द रीजन। और अब जॉर्ज डब्लू बुश या जो भी एयरक्राफ्ट कैरियर वो तीसरा अभी आ रहा है इस रीजन में। बट आई एम नॉट श्योर कितनी क्या भूमिका प्ले कर सकता है वो। सो ईरान ने अच्छे से होमवर्क किया है। वो जानता है कि उनके पास एयरफोर्स इतना अच्छा कैपेबल नहीं है। उनके पास नेवी इतना कैपेबल नहीं है। लेकिन दे हैव कंप्लीटली टर्न द ट्राइड ऑफ द वॉर यूजिंग एसिमेट्रिक वॉरफेयर यूजिंग ड्रोनस एंड बैललेस्टिक मिसाइल्स। तो ये उनका बहुत ही वेल यू कैन से आउटस्टैंडिंग डिस्प्ले हुआ है। या हम थर्सडे को रिकॉर्ड कर रहे हैं। कल रात ही मेरे ख्याल से वो Amazon डेटा सेंटर डिस्ट्रॉय हुआ था ईरान की वजह से। सो दे आर बॉम्बिंग नाउ दीज़ बिज़नेसेस अमेरिकन बिज़नेसेस इन द गल्फ। अ पार्ट अवे मैट्रिक वॉरफेयर कि वी विल कॉज यू इकोनमिक डैमेज। एक्चुअली ये रिटालिएटरी वॉरफेयर है। ईरान ने देखिए मैं इसमें न्यूट्रल हूं। मैं मेरा कोई इधर भी साथ नहीं मेरा आई डोंट सपोर्ट दिस और दैट और आई ओनली सपोर्ट इंडिया। ठीक है? लेकिन एज अ न्यूट्रल ऑब्जर्वर मैं क्या ऑब्जर्व कर रहा हूं कि ईरान ने बहुत रिस्पांसिबबली रिटालिएटरी वॉरफेयर किया है कि आप अगर हमें मारोगे हम आपको मारेंगे। जी अगर आप हमारे डिसलिनेशन प्लांट को तोड़ोगे तो हम आपके डिसलिनेशन प्लांट को तोड़ोगे तोड़ेंगे। अगर आप तेहरान के पास जो ऑयल के पास जो ऑयल रिजर्व है ऑयल डिपो है उसको आप तोड़ोगे तो वी विल टारगेट योर ऑयल फैसिलिटीज। अगर आप हमारा गैस प्लांट तोड़ोगे तो हम हमारा हम आपके गैस प्लांट्स को तोड़ेंगे। राइट? अगर आप तेहरान को बम करोगे हम तेलावी और हाइफा को बॉम्ब करेंगे। तो इस प्रकार का एस्केलेशन उन्होंने एज अ रिस्पांस हमेशा किया है। दे हैव नॉट स्टार्टेड एनीथिंग। यूएस ने उनका एक स्कूल तो स्कूल उड़ा दिया। 170 लिटिल गर्ल्स डाइड इन दैट। ईरान हैज़ नॉट रिसोंडेड टू दैट विथ अ सिमिलर काइंड ऑफ़ स्ट्राइक। तो ईरान रिसोंड कर रहा है, रिटालिएट कर रहा है। ईरान प्रोवोक नहीं कर रहा है या फिर एस्केलेट नहीं कर रहा है। तो सिचुएशन ये है। ईरान इज़ बीइंग वैरी रिसोंसिबल एक्चुअली। ट्रंप ने एक स्टेटमेंट दी आज सुबह ही कि वी विल सेंड यू बैक टू स्टोन एज। मतलब क्या कह रहे हैं आप? ट्रंप ने जो स्पीच दिया आज सुबह इट वाज़ एम्ड एट द अमेरिकन ऑडियंस। ओके। ओके। ट्रंप सी इट्स सी फॉरेन पॉलिसी इज ऑल अबाउट डोमेस्टिक पॉलिटिक्स एक्चुअली एट द एंड ऑफ़ द डे अगर आप फॉरेन पॉलिसी अच्छे से कर रहे हो तो आपको अच्छे और वोट मिलेंगे। आपका पार्टी और स्ट्रांग होगा। अगर आप बहुत ही बुरा प्रदर्शन कर रहे हो इन फॉरेन पॉलिसी देन यू विल लूज़ वोट्स। अभी नवंबर में उनका मिड टर्म इलेक्शन आ रहा है। अगर ट्रंप इस युद्ध में जीत नहीं सकते। अगर जीत हासिल नहीं कर सकते। देन द रिपब्लिकन पार्टी विल बी वाइप्ड आउट इन द मिड टर्म्स। तो ट्रंप एसेंशियली मोराल अप अपलिफ्ट करने की कोशिश कर रहे हैं अपने वोटर्स का। तो यू यूज़ रोबस्ट लैंग्वेज फॉर दैट। हम आपको स्टोन एज में वापस भेज देंगे एंड सो ऑन। और ट्रंप कह रहा है कि हम और तीन चार सप्ताह तक ये युद्ध करेंगे। एंड बाय द टाइम वी विल कंप्लीटली फिनिश ऑफ ईरान। उसने ये स्टेटमेंट दिया है। सो आई थिंक इट इज़ मोर होपफुल देन नॉट। अह उनके पास डेफिनेटली कैपेबिलिटी है टू बॉम्ब ईरान टू द स्टोन एज। लेकिन ईरान के पास कैपेबिलिटी है टू कीप फाइटिंग बैक। बिकॉज़ उन्होंने अच्छे से होमवर्क किया। उन्होंने बहुत ही डीप अंडरग्राउंड टनल्स बनाए हैं। सिटीज बनाए हैं। मिलिट्री सिटीज अंडरग्राउंड लाइक 500 मीटर्स अंडरग्राउंड और वो अपने मिसाइल्स और ड्रोन चलाते रहेंगे। इवन इफ द कंट्री इज डिस्ट्रॉयड। तो ट्रंप इज होपिंग कि भाई नेक्स्ट थ्री फोर वीक्स में ये ईरान हार जाए। लेकिन इट लुक्स अनलाइकली। सर अभी ईरान हिस्ट्री के बारे में थोड़ा बात करते हैं। श्योर। अ बहुत जरूरी है भारतीयों के लिए। हम अक्सर ना ग्लोबल हिस्ट्री कम समझते हैं। आई थिंक ये बदलाव आ रहा है। वी आर लर्निंग अबाउट ग्लोबल हिस्ट्री मोर। अ 1950 ईरान के लिए एक बहुत क्रूशियल समय था। इनफैक्ट उनके हिस्ट्री टेक्स्ट बुक्स में अ 1953 की बहुत बातें की जाती है और उनके हर सिटीजन को 1953 के बारे में बताया जाता है। बचपन में ही और बचपन में ही एक एंटी अमेरिका सेंटीमेंट फॉर्म होता है। तो जो हम आज कह रहे हैं कि इन्होंने बहुत ज्यादा तैयारी करी है। इतने सारे बैलिस्टिक मिसाइल्स हैं, ड्रोंस हैं। आई फील कि ईरान वास रेडिंग अप फॉर वॉर फॉर अ वेरी लॉन्ग टाइम और उन्हें पता था कि ये होगा। बिल्कुल बिल्कुल ना और उन्हें पता था कि अमेरिका ही ये करेगा। हम अ तो 1953 में मोहम्मद मोसाद एक बहुत बढ़िया लीडर थे ईरान के लिए। बहुत कुछ करा था। अ ही वाज़ एक्चुअली हेल्पिंग द कंट्री ग्रो। उससे पहले जो अंग्रेज वहां राज कर रहे थे उन्होंने बहुत नाइंसाफी करी ईरानियन पपुलेशन के साथ हमारे साथ भी नाइंसाफी करी वो हम सबको पता है वो हमारा इंडिपेंडेंट स्ट्रगल था दे लूटेड वेल्थ वहां से दे लूटेड ऑयल व्हिच इज वेल्थ व्हिच इज वेल्थ यस ब्रिटिश पेट्रोलियम इज व्हाट सर ब्रिटिश पेट्रोलियम एंग्लो पोर्शन ऑयल कंपनी वो उसका ओरिजिनल नाम है यस क्योंकि दुनिया की पहली ऑयल फील्ड वहीं मिली थी और ब्रिटिश िशर्स ने एक्सट्रैक्ट करा एंड आई बिलीव मोहम्मद मुसादे नेशनलाइज्ड ऑयल नेशनलाइज्ड मतलब नेशनलाइज मतलब अगर कोई फॉरेन कंपनी आपके देश में ऑपरेट करती है एंड इट इज़ मेजर मेजॉरिटी फॉरेन ओनड तो गवर्नमेंट ऐसा कर सकती है कि इट विल बाय इट आउट कंप्लीटली यूजिंग द पब्लिक मनी। तो मतलब वो चोरी नहीं कर रहे हैं। दे आर सिंपली टेकिंग ओवर द कंपनी एंड गिविंग द फॉरेन इन्वेस्टर्स व्हाटएवर दे आर सपोज्ड टू गेट एस पर द करंट रेट्स। हम उसको वो कहते हैं नेशनलाइजेशन। तो कई देशों में ऐसा होता है नेशनलाइजेशन। इंडिया में भी ऐसे आई थिंक 70ज में ऐसा कुछ हुआ था। राइट? तो ईरानियन गवर्नमेंट ने उस कंपनी को नेशनलाइज कर दिया। उसका मतलब ये है कि फ्रॉम दैट डे ऑनवर्ड्स दे विल टेक ऑल ऑफ दी वैल्यू दैट कम्स फ्रॉम सेलिंग ऑयल। उसके पहले क्या हो रहा था कि ये जो कंपनी थी वो वो ब्रिटिश ओन थी और वो ईरानियन गवर्नमेंट को आई थिंक 16% रॉयल्टीज दे रहे थे। बाकी सब वो पैसा खा रहे हम तो अगर एक लाख का ऑयल बेचा उन्होंने एक्सट्रैक्ट किया और बेचा दुनिया को तो सिर्फ 16% मिलेगा ईरान को बाकी 84% मिलेगा इंग्लैंड को ब्रिटेन ब्रिटेन को तो ये ऑब्वियसली बहुत ही लॉसाइडेड और अनफेयर चीज थी और मोहम्मद मोसादे ने उसको एंड किया जब वो प्रधानमंत्री बने ईरान के मजलिस के 1951 में 51 में यस हम ओके एंड मेरे ख्याल से जब अंग्रेज वहां राज कर रहे थे। फेटो से राज कर रहे थे। राज नहीं कर रहे थे। उन्होंने वहां पे एक पपेट रूलर बनाके रखा था। कौन? अ रजा शाह। मतलब वहां का किंग। वहां का शाह किंग। यस। उसको उन्होंने 1915 या 1920 के आसपास 1925 में उसको इंस्टॉल किया था एस द पपेट किंग ऑफ ईरान। तो ये रजा शाह कौन था? ही वास सिंपली अ सोल्जर। ही वास सिंपली अ मिलिट्री ऑफिसर। जो जो कजर डायनेस्टी जी डायनेस्टी थी जो ईरान की पहले भी डायनेस्टी के पहले वाली डायनेस्टी थी उसमें रजा शाह वाज़ अ मिलिट्री ऑफिसर और फिर क्या हुआ था कि 1901 में ईरान में ऑयल डिस्कवर हुआ था और फिर जो कजर डायनेस्टी का जो रूलर था उसने लाइसेंस दिया था या फिर या लाइसेंस दिया था कॉन्ट्रैक्ट दिया था एक ब्रिटिश ऑयल कंपनी को कि आप हमारे पास तो टेक्नोलॉजी है नहीं तो आप आइए आप इसको एक्सप्लइट कीजिए और हमें कुछ रॉयल्टी दीजिए। अब बाकी आप सब प्रॉफिट लीजिए। तो तो इन्होंने 84% अपने लिए रखा और ईरान को 16% दिया। फिर फर्स्ट वर्ल्ड वॉर हुआ और फिर र जो जो कचर डायनेस्टी का जो रूलर था वो इतना कोऑपरेट नहीं कर रहा था विद इंग्लिश। तो इसलिए ब्रिटेन ने एक कू किया और रजा शाह को एस द शाह इंस्टॉल किया। उसमें कोई रॉयल ब्लड नहीं था। कोई एरिस्टोक्र्रेटिक ब्लड ब्लड नहीं था। लेकिन बिकॉज़ ही वास यूज़फुल टू द ब्रिटिश दे पुट हिम एस द पपेट लीडर द पपेट रूलर द पपेट किंग ऑफ ईरान तो ब्रिटिश रूल डायरेक्टली नहीं था ब्रिटिश रूल इनडायरेक्टली था राइट और फिर उसने जो भी पॉलिसीज की इट वाज़ ऑल इन फेवर ऑफ़ द ब्रिटिश अंटिल डिड नॉट वर्क और फिर 1940 में रजा शाह ने जर्मनी का सपोर्ट किया एट द सेकंड वर्ल्ड वॉर तो इसलिए ब्रिटेन ने और यूएस ने फिर से कुक किया और रजा शाह को हटाया और उसके बेटे को मोहम्मद रजा शाह को एस द सेकंड शाह इंस्टॉल किया जिसको हम कहते हैं मोहम्मद रजा पहलवी। सो ही वास द सन ऑफ द फर्स्ट शाह एंड ही वाज़ वेरी मच अलाइन वि द ब्रिटिश इंटरेस्ट्स। और फिर तब से ये शुरू होता है एंड ऑब्वियसली द परश नेशन वाज़ लूजिंग ऑइल इट्स ऑल इट्स ऑयल वेल्थ। और फिर सिस्टम क्या था कि एट द टॉप आपको है यू हैव द किंग द शाह। उसके नीचे आएगी मजलिस व्हिच इज़ द ईरानियन पार्लियामेंट। ओके? और ईरानियन पार्लियामेंट में प्राइम मिनिस्टर होगा। तो 1951 में ईरानियन पार्लियामेंट ने मोहम्मद मुसादे को एस द प्राइम मिनिस्टर अपॉइंट किया और उसने इमीडिएटली ये प्रोसेस शुरू कर दिया टू टू नेशनलाइज द ईरानियन ऑयल जो एंग्लो पर्शियन ऑयल कंपनी और इससे अलार्म बेल्स चले गए यू नो द अलार्म बेल स्टार्टेड ड्रिंकिंग इन इन लंदन एंड इन वाशिंगटन तो तो क्या हुआ कि लंदन और वाशिंगटन और सीआईए ये सब मिलके उन्होंने एक बहुत अच्छी क्या बोलते हैं एक बहुत अच्छा षड्यंत्र षड्यंत्र रचा टू आउटस्ट मोहम्मद बोसदे तो उन्होंने क्या किया सबसे पहले कि उन्होंने प्रोपगेंडा वॉर शुरू किया उन्होंने कई सारे न्यूज़पेपर वालों को खरीद लिया ओके ब्राइब देके कि आप इसके खिलाफ बहुत बड़ा-बड़ा प्रोपगेंड प्रोपेगेंडा कीजिए। सो, दे दे गॉट क्लेरिक्स टू स्पीक अगेंस्ट मोहम्मद अह अह अगेंस्ट मोहम्मद मोसोदे। उसके बाद उन्होंने क्या किया कि उन्होंने अह पेड प्रोटेस्ट शुरू किए। ओके। और ये सब कंफर्म्ड चीजें हैं। ऑफकोर्स ऑफकोर्स। यह मैं कल रिसर्च कर रहा था इसी चैप्टर पे। ओके। ओके? व्हाट केम आउट इज दिस? मोहम्मद मोसादे नेशनलाइज्ड ऑइल इन ईरान बिफोर दिस ब्रिटिश वर एक्सट्रैक्टिंग ऑइल। हम्म सीआईए ऑफिसर कर्मित रूजवेल्ट जूनियर ऑकस्ट्रेटेड स्ट्रीट मॉब्स एंड स्प्रेड प्रोपेगेंडा। एक्साक्ट्ली, एक्साक्ट्ली। थिओडो रूसवेल्ट के बेटे थे मेरे ख्याल से। सेम फॅमिली, याह। सेम मतलब, हां, उनके थे, याह। कौन है थियोडो रूसल्ट? प्रेसिडेंट ऑफ़ द यूएस। टेडी अ फाइनली, मोहम्मद मोसादे वाज़ अरेस्टेड एंड रिमूव्ड फ्रॉम पावर। 63 में। ओके। अ शाह वाज़ रीइस्टेटेड एस द रूलर। तो उन्होंने क्या किया कि उन्होंने नया प्राइम मिनिस्टर अपॉइंट किया हु वाज़ अ मिलिट्री ऑफिसर और फिर उस प्राइम मिनिस्टर ने रूल्स चेंज किए मजलिस में नया नया लॉज़ एक नया बिल्स लाए जिससे द शाह बिकम्स ऑल पावरफुल एंड द मजलिस बिकम्स वे लेस पावरफुल तो इससे द यूके एंड द यूएस दे एसेंशली एस्टैब्लिश्ड अ प्रॉपर डिक्टेटरशिप इन ईरान और शाह वाज़ नो लगर जस्ट अ टिटुलर फिगर ही वाज़ द एक्चुअल ऑटोक्रेटिक रूलर ऑफ़ ईरान और मजलिस के पावर्स बहुत कम हो गए पार्लियामेंट के एक की इनपुट है यहां इन द ईयर 2000 सेक्रेटरी ऑफ़ स्टेट मैडलीन ऑल ब्राइट फॉर्मली एकनॉलेज द क ओके मतलब पब्लिकली कहा कि हां अमेरिका ने ये करा है ऑपरेशन एजक्स था उसका नाम हां इन 2013 सीआईए ऑफिशियली एडमिटेड इट्स रोल हम बट डैमेज हो गई ऑफकोर्स मतलब 1953 में हुआ वो 2013 में अनाउंस किया 60 इयर्स लेटर ये भी कुछ इसके पीछे स्ट्रेटजी रहेगी हां बिकॉज़ नाउ इट्स टू लेट टू टू चेंज एनीथिंग ना सो यू कैन सो यू कैन एडमिट दैट। तो जब यह शाह रीस्टेट हुए थे मोहम्मद मोसादे को निकालने के बाद 40% ऑफ़ ऑयल रेवेन्यू वाज़ गिवन टू ब्रिटिश पेट्रोलियम, 40% टू अमेरिकन कंपनीज़ एंड रिमेनिंग टू फ्रेंच एंड डच फर्म्स। सो नथिंग फॉर ईरान। यस। तो 1953 के बारे में हर ईरानी सिविलियन को सिखाया जाता है। ये उनके हिस्ट्री का एक मेन एलिमेंट है। अ व्हिच इज व्हाई दिस अमेरिका वर्सेस ईरान राइवलरी हैज़ बीन गोइंग ऑन नाउ फॉर 70 इयर्स। 73 इयर्स टू बी स्पेसिफिक। सो इजंट इट इंटरेस्टिंग? आज भी जब यूएस जो कलर रिवोल्यूशन करता है वही पैटर्न आपको दिखेगा। पहले प्रोपेगेंडा शुरू होगा। फिर पेड डेमोंस्ट्रेशन और प्रोटेस्ट कहीं से भी निकल के आएंगे। एंड फिर दे विल ट्राई डू रिजम चेंज थू द मिलिट्री बांग्लादेश में यही हुआ था ओके 2024 में एक्सजेक्टली सेम पैटर्न आपको दिख रहा बट वि मोर सोफेस्टिकेशन राइट दिस इज़ द पॉइंट ऑफ़ स्टडिंग हिस्ट्री एक एक्सरे विज़न मिल जाती है दुनिया पे बट गो ऑन या सो शाह बिकम्स शाह बिकम्स ऑल पावरफुल 1953 में ओके उसके बाद शाह ने एक वाइट रिवोल्यूशन ल्च किया व्हिच वाज़ ऑल अबाउट ट्रांसफॉर्मिंग ईरान मॉडर्नाइजिंग ईरान उसने सेुलर लॉज़ डाले ईरान में उसने आई थिंक उसके पिताजी ने परर्शिया का नाम चेंज किया था टू ईरान जो जो फर्स्ट किंग था ऑफ द पहलवी डायनेस्टी ही वास नॉट अ बिग फैन ऑफ इस्लाम वो ही वांटेड टू रूट परर्शिया इन द ओल्ड यू नो कल्चर ऑफ़ परर्शिया तो उसको उसने ईरान बना दिया एंड सिविलाइजेशनल आइडेंटिटी बनाई उसने ईरान की फिर उसका जो बेटा है उसने 1953 के बाद 1960 के आसपास वाइट रेिवोल्यूशन शुरू किया मॉडर्नाइजिंग ईरान ईरान सेुलराइजिंग ईरान इंफ्रास्ट्रक्चर बनाओ लाइब्रेरीज बनाओ हेल्थ सेंटर्स बनाओ यू नो अर्बनाइज करो ईरान को और फॉर अ वाइल इट वास वै गुड और ईरान वास डूइंग वेरी वेरी वेल बहुत प्रोस्परस था लेकिन जो जो कंजर्वेटिव लोग हैं ईरान में दे वर अगेंस्ट दिस सेुलर रेशन ऑफ़ ईरान और वुमेन को जो चादर पहननी पड़ती थी या फिर बुर्का पहनना पड़ता था उसने वो वो मैंडेटरी नहीं किया था सो दे वर अपसेट विथ दैट और उसने एक सीक्रेट पुलिस बनाई थी सवा खनम की व्हिच वास वेरी ब्रूटल और जो भी उसके खिलाफ उसके विरुद्ध कुछ बोलता था उसको बहुत ही वेरी बैड ट्रीटमेंट मिलता था। राइट? सो इट वाज़ अ रूल ऑफ़ टेरर। ओके? बाय दी बाय द शाह। और फिर 1970 में क्या हुआ कि ईरान की इकॉनमी इतनी अच्छी नहीं रही। इट वाज़ नॉट डूइंग वेल बिकॉज़ ऑफ़ मिसमैनेजमेंट और व्हाटएवर। फिर 1973 में यम कीपुर वॉर हुआ अगेंस्ट इजराइल। ओके? इजराइल वर्सेस अदर अरब अरब नेशंस। मतलब जो आज भी हो रहा है। सेम सिमिलर टू दैट। सिमिलर टू दैट। सो यमकीपुर वॉर वाज़ अ ह्यूज मिलिट्री हज इंटेलिजेंस फेलियर ऑफ़ द ऑफ़ इजराइल। ओके? एंड इजराइल बाल-बाल बाल-बाल बचा उसमें। एंड बिकॉज़ ऑफ़ वेस्टर्न हेल्प। तो वेस्टर्न नेशंस एसेंशियली यूएस, यूके और दूसरे नेशंस ने इजराइल को फुल सपोर्ट किया। फुल सपोर्ट्स आर इसलिए इजरायल बच गया। और उससे अरब नेशंस बहुत दुखी हो गए, बहुत गुस्सा हो गए। और उन्होंने ऑयल एंबगो डाला यूएस के ऊपर और वेस्ट के ऊपर कि हम आपको ऑयल नहीं बेचेंगे। आपको जो करना है कर लो। ओके? सो दैट लेड टू द ऑयल वॉर्स ऑफ़ द 1970 1973 ऑनवर्ड्स बहुत उसका लॉन्ग टर्म इफेक्ट हुआ। जैसे आज आपको शुरुआत दिख रही है ऑइल प्रॉब्लम ऑयल की प्रॉब्लम की। दैट वाज़ द काइंड ऑफ़ थिंग यू हैड इन द 1970। ओके? तब मोहम्मद रजा पहलवी उसने उस ऑयल एमार्गो में पार्टिसिपेट नहीं किया। ही केप्ट सेलिंग ऑइल टू द वेस्ट। लेकिन ही इंसिस्टेड आप हमें हायर प्राइसेस दीजिए। हायर प्राइसेस दीजिए। मतलब ऑइल के प्राइस बहुत बढ़ गए। एंड ही वाज़ वन ऑफ़ द चैंपियंस ऑफ़ हायर प्राइसेस। और आई थिंक 1970 में उसने भी नेशनलाइज़ कर दिया ऑयल ऑयल ईरानियन ऑयल इंडस्ट्री को। राइट? तो जो मोहम्मद मसादाई ने किया था 1951 में वो मोहम्मद रजा पहलामी ने किया अराउंड 1973 के आसपास। उसके एकद साल के अंदर। सो नाउ ही बिकम्स अ प्रॉब्लम फॉर द वेस्ट। ओके? तो वेस्ट ने फिर से पॉसिबबली कुछ तो किया होगा टू स्टार्ट द अनरेस्ट अगेंस्ट मोहम्मद रजा पहलवी। एक छोटा सा पॉज ले लेते हैं। अ अगेन दिस इज व्हाट केम आउट इन माय रिसर्च और मैंने क्लॉड यूज़ करा है रिसर्च के लिए कल। अ बेसिकली एक नैरेटिव दिया जाता है एस्पेशली यंग लोगों को दुनिया भर कि ईरान वाज़ द परफेक्ट वेस्टर्नाइज्ड कंट्री इन द अर्ली 1970। हम डेफिनेटली ईरान बहुत ज्यादा वेस्टर्नाइज्ड था एज़ कंपेयर टू नाउ। बट इट्स नॉट लाइक द होल कंट्री वास डूइंग वेल। एंड यह जो रेवोल्यूशन हुआ जिसकी बात आप करने वाले हो कहा जाता है कि बहुत सारे लोग अलग-अलग डोमेनस ऑफ सोसाइटी से एक्सट्रीमिस्ट भी लेफ्ट लीनिंग लोग भी लेफ्ट विंग लोग भी सब साथ में लड़ रहे थे। हां जी बिल्कुल। और सब ने साथ में रेवोल्यूशन करा। हम उस वजह से वो किंग हटा। हां। तो जो नैरेटिव हम तक पहुंच रहा है ना कि नहीं नहीं वो किंग को हटाया गया ये बहुत ही लेयर्ड चीज है। इट्स नॉट एज सिंपल एज अरे वो ज्यादा लेफ्ट विंग थे इसलिए उन्हें हटाया गया। देयर वाज इनफ्लेशन इन द कंट्री। देयर देयर इज एन एलिमेंट ऑफ द वेस्ट अगेन एट प्लेयर। अ बढ़िए सर। ये लेट 1970 में एक्जेक्टली क्या हो रहा था? ये समझाइए। मैं बस ऑडियंस से ये कहूंगा कि इस पूरे सिचुएशन को ना ऑब्जेक्टिवली देखो। अ ट्राई अंडरस्टैंडिंग व्हाट्स हैपनिंग। सो उस समय ईरान की जो सोसाइटी थी वो काफी कॉम्प्लेक्स सोसाइटी थी। सबसे पहले ईरान का जो पपुलेशन है वो सिर्फ 50% पर्सन है। बाकी बहुत सारे माइनॉरिटीज हैं। लाइक बलोचज़, लाइक दरीज, लाइक द किस, लाइक द अरब्स, लाइक द लुर, लुरिस्तानीज़ एंड सो एंड सो फॉर। तो ओनली 50% आर पर्सन। दूसरी बात ये है कि ईरान में जो रूरल एरियाज है, जो नॉन अर्बन एरियाज है, वहां पे लोग बहुत कंजर्वेटिव उस समय भी थे, आज भी है। ओके? और जो बड़े सिटीज है उसमें जो पापुलेशन है देयर इज़ मोर वेस्टर्नाइज्ड मोर फॉरेन एजुकेटेड एंड सो ऑन। लेकिन ओवरऑल सिचुएशन ये था कि द शाह वाज़ मिसमैनेजिंग द इकॉनमी एंड बहुत ही ऑप्रेसिव था वो। उसने जो सवाक नाम का जो उसका सीक्रेट पुलिस था वो सबको टेरर कर रहा था। एंड एसेंशियली नोबडी वाज़ हैप्पी विथ दिस एंटायर मैटर। जो जो कंजर्वेटिव्स थे वो खुश नहीं थे कि उसने हिजाब वो सब बंद कर दिया। राइट? जो जो लिबरल्स थे दे वर नॉट हैप्पी विथ द स्टेट ऑफ़ द इकॉनमी राइट एंड द रेन ऑफ़ टेरर इन द सिटीज एंड द अदर प्लेसेस जो कम्युनिस्ट थे वो भी खुश नहीं थे। सो नोबडी वास हैप्पी विथ द शांड इवेंचुअली प्रोटेस्ट्स होने लगे धीरे-धीरे और उसने बहुत ब्रूटली प्रोटेस्ट को सप्रेस करने की कोशिश की लेट 1970 में एक 300 लोग का मैसकर भी किया उसने। राइट? तो इवेंचुअली सिचुएशन यह हो गया कि इट वाज़ नो लगर पॉसिबल फॉर हिम टू स्टे इन द कंट्री। और इसलिए वो इजिप्ट चला गया इन 1979 इस समय क्या एक दूसरा पैरेलल सिचुएशन हो रहा है देयर इज़ अ गाय कॉल्ड रूहल्ला खमेनी ओके वो बहुत बड़ा क्लेरिक था शिया क्लेरिक था क्लेरिक क्या होता है क्लेरिक मतलब रिलीजियस लीडर सो रूहल्ला खमेनी वाज़ अगेंस्ट द शाह फ्रॉम द बिगिनिंग और उसने 1960 में कुछ प्रोटेस्ट किए थे अगेंस्ट द शाह जिसके कारण शाह एक्ल्ड हिम आउट आउट ऑफ ईरान तो कुछ समय उसने इराक में बिताया रूहल्ला खमे ने और फिर 1979 में ही वाज़ इन फ्रांस और जो प्रोटेस्ट लेट 70ज में होने लगे दे वर ऑल बिगिनिंग टू हैपन इन द नेम ऑफ़ रूहल्ला खमेनी एवरीवन वास वांटिंग रूहला खमे कि आप वापस आ जाइए ईरान तो जब शाह चला गया भाग के आउट ऑफ ईरान टू फर्स्ट टू इजिप्ट तब रूहल्ला खमेनी केम बैक टू टू ईरान टू द ईरान और फिर एक इंटरिम गवर्नमेंट बनी 1979 में आफ्टर दी ईरानियन रिवोल्यूशन जो कुछ महीने चली उसके बाद प्रॉपर थियोक्रेटिक गवर्नमेंट की एस्टैब्लिशमेंट हुई। मतलब इस्लामिक शरिया लॉ वाला वाला गवर्नमेंट और सिस्टम ये हुआ कि आपकी मजलिस रहेगी ईरान में। पार्लियामेंट रहेगी व्हिच विल बी वोटेड फॉर। ओके? इलेक्शंस होंगे ईरान में। तो पार्लियामेंट में आपका प्राइम मिनिस्टर होगा, प्रेसिडेंट भी होगा। लेकिन अबव द पार्लियामेंट देयर इज़ अ कमेटी ऑफ़ एक्सपर्ट्स एक्सपर्ट्स एल्डरली एक्सपर्ट्स इन शिया जुरिसेंस एंड सो ऑन। ओके? एंड दे विल अपॉइंट अ सुप्रीम लीडर हु हैस टू बी अ ग्रेट स्कॉलर ऑफ इस्लाम शिया इस्लाम एंड ऑल तो सबसे पहले सुप्रीम लीडर बने रूह्ला खमे जिनका ओरिजिन एक्चुअली इंडिया में है थोड़ा बहुत ओके यूपी यूपी आयाला किंतुर किंतुर नाम का एक गांव है वहां पर उनके ग्रैंडफादर रहते थे वो ऑब्वियसली ईरानियन थे लेकिन उनकी उनकी जो पत्नी थी वह इंडियन थी शायद सो रोहल अखमेनी अह जब लिटरेचर लिखते थे गजल लिखते थे तो ही यूज्ड टू यूज़ द एपिथेट अल हिंदी फॉर दैट यू नो सो रोहला खमे का थोड़ा टेंजेंशियल इंडियन कनेक्शन है। सो 1979 1980 के आसपास रोहला खमे बन गए सुप्रीम लीडर ऑफ ईरान और नई गवर्नमेंट की स्थापना हुई। एंड एस सून एस दिस हैपेंस एस सून एस दी ईरानियन रेवोल्यूशन सक्सीड्स जो नई गवर्नमेंट बनी उस उनके जो यंग हॉटहेडेड लोग थे उन्होंने यूएस एंबसी पे कब्जा किया और बहुत सारे उनके जो डिप्लोमेट्स और स्टाफ थे उनको एस हॉस्टेज ले लिया और ये 400 दिन से ज्यादा उन्हें हॉस्टेज रखा 44 डेज 444 डेज जो तभी के अमेरिकन प्रेसिडेंट के लिए एक बहुत एम्बैरेसिंग सिचुएशन बन गई थी और उन्होंने एक्चुअली दो-तीन प्रयत्न भी किए थे टू टू सेंड आर्म फोर्स एंड टू गेट दिस पीपल बैक एंड इट वास दीज़ आर ऑल बिग फेलियर्स। सो बहुत ही एम्बरेसिंग सिचुएशन हो गया था। इवेंचुअली आफ्टर 44 डेज उनको रिलीज़ किया गया। लेकिन उससे क्या हुआ इस इस पूरे एपिसोड से कि दोनों नेशंस में बहुत ही बहुत ही बुरे रिलेशंस हो गए। दे बिकम एसेंशियली आउटराइट एनिमीज़। ओके? तो ईरान कहता है कि यूनाइटेड स्टेट्स इज़ द शैतान ए बुजुर्ग। द ग्रेट शैतान। एंड छोटा शैतान कौन है? इजराइल है। ये तब से 1979 से ईरान बोल रहा है। ठीक है? और फिर यूएस बहुत दुखी हुआ। बहुत बहुत गुस्सा हुआ इस इस पूरे पूरे एपिसोड से। तो यूएस ने सद्दाम हुसैन को ग्रीन लाइट दिया कि आप जाइए और आप ईरान पर आक्रमण कीजिए और ईरान को आप कब्जा कर लीजिए। एंड यू कैन हैव यू कैन बी द किंग ऑफ ईरान और उन्होंने सदाम हुसैन को पैसे दिए, आर्म्स दिए, सब कुछ दिया। राइट? ईरान इराक वॉर। ईरान ईरान इराक वॉर 1980 में शुरू हुआ। एक मिनट। हल्के से पॉज करते हैं यहां। और 2026 में लौट जाते हैं। ओके? जितने भी मिलिट्री पडकास्ट करे हैं, वॉर हिस्ट्री वाले पडकास्ट करे हैं, उन सारे पडकास्ट ये मैंने जाना है कि जितने हिस्टोरिकल वॉारर्स भी हुए हैं हजार 2000 साल पहले इफेक्टिवली या तो लैंड या तो पावर या तो पैसों के लिए होते हैं। हम यहां सेम चीज ही हो रही है। ऑइल इज द मेन कैच फॉर हुवर इज रूलिंग ईरान। यस। एम आई राइट? बिल्कुल। तो 2026 के पर्सपेक्टिव से भी यह युद्ध हो रहा ही क्यों है? व्हाट इज हैपनिंग? व्हाट इज द पैटर्न वी आर सीइंग अगेन एंड अगेन इट्स समथिंग रिलेटेड टू ऑयल? ग्रेट क्वेश्चन। यूएस का ग्रैंड स्ट्रेटजी क्या है? देखिए इस साल के लेट्स लेट्स रिवाइंड बैक टू जनवरी 2026। तीन महीने पहले हम 6 जनवरी 2026 में यूएस ने वेरियस वेला कु किया। वहां पे गए उनके प्रेसिडेंट श्री मधु रोजी को उठाया किडनैप किया और लेके गए। झट से वो कु हुआ हुआ ना? वो या कुछ ऐसे लाइट मतलब इलेक्ट्रिसिटी ऑफ करके सारे सिस्टम्स ऑफ करके झट से गए विद मिनिमल डैमेज वो मैच फिक्सिंग था वेनेजुएला के कुछ गवर्नमेंट के साथ यस सो दे गव अप मदर एंड फिर दे बिकम प्रो यूएस और दे बिकम यूएस पपेट्स तो वेनेजुएला में यूएस ने ये क्यों किया बिकॉज़ वेनेजुला हैज़ वेनेजुएला की धरती के अंदर लगभग विश्व के 20% प्रूवन ऑयल रिजर्व्स हैं। ओके? इतना वो एक्सट्रैक्ट नहीं कर पा रहे बिकॉज़ दे आर पुअर नेशन। उनके पास कैपेबिलिटी नहीं है लेकिन रिजर्व्स है उनके पास वो ऑयल का ग्रेड अलग है। इट इज़ अ वेरी हावर वेरी वेरी वेरी अ हैवी सावर ऑयल जो दुनिया में तीन रिफाइनरीज ही उसको प्रोसेस कर सकती है इंक्लूडिंग वन इन इंडिया। लेकिन यूएस हैज़ नाउ इज़ इन कंट्रोल ऑफ़ 20% ऑफ़ द वर्ल्ड्स ऑय रिजर्व्स। सो दैट इज़ अ प्रॉब्लम फॉर चाइना। बिकॉज़ चाइना वहां से 3% अपना ऑयल ले रहा था विनिज़ वाला से। अब ईरान को अगर वो लेंगे कब्जा करेंगे एंड दे टेक ओवर ईरान्स ऑयल रिजर्व्स देन चाइना के लिए और भी बड़ा खतरा है। बिकॉज़ देन चाइना विल लूज 20% ऑफ इट्स ऑयल इनपुट्स। राइट? तो यूएस क्या कर रहा है एक्चुअली कि दुनिया में जहांजहां भी ऑयल रिजर्व्स है बड़े-बड़े वहां पे वो कंट्रोल करना चाहते हैं। तो अगर ईरान को भी वो कंट्रोल कर लेंगे देन चाइना विल ओनली हैव टू डिपेंड ऑन रशिया व्हिच विल बी अ वेरी बिग प्रॉब्लम फॉर चाइना आल्सो। क्योंकि रशिया से चाइना को चाइना तक पहुंचाना काफी डिफिकल्ट है। राइट? एंड यू कैन क्रिए क्रिए क्रिए क्रिए क्रिएट मोर प्रॉब्लम्स लॉजिस्टिकली फॉर देम। सो एसेंशियली एंड गेम है चाइना कि चाइना को डिफिट करना है। चाइना को पूरी तरह से एनसर्कल करना है। सो दैट विदाउट फाइटिंग अ वॉर यू कैन मेक देम डू यू कैन मेक देम अग्री टू योर टर्म्स। इकोनमिकली वीकन करना चाहिए। इकोनमिकली देखिए अ नेशन कांट फंक्शन विदाउट एनर्जी। हम एनर्जी इज द इज़ द बेसिस ऑफ़ एवरीथिंग। अगर चाइना के एनर्जी सो चाइना इज़ नॉट सोवरन इन टर्म्स ऑफ़ एनर्जी। उनको ऑइल इंपोर्ट करना पड़ता है। व्हिच इज़ द बिग प्रॉब्लम फॉर चाइना एंड आल्सो इवन मोर फॉर इंडिया। तो अगर आप उस उस वीक उस अकीली झील को कंट्रोल करोगे आप देन यू कैन मेक चाइना डू व्हाटएवर यू वांट। चाइना विल हैव टू यू नो देयर हैव नो चॉइस। हल्के से साइंस में घुसे। जी ऑइल जमीन के नीचे मिलता कैसे है? मिलता कैसे है? मतलब कैसे पता रहता है कि हां यहां ऑइल होगा। हां दैट्स अ ग्रेट क्वेश्चन एक्चुअली। कुछ-कुछ प्रकार के रॉक फॉरमेशंस होते हैं व्हिच आर नोन कि अगर वहां पर उस प्रकार का रॉक फॉर्मेशन हुआ देन देयर इज़ अ हाई लाइकलीहुड ऑफ़ हैविंग ऑयल। ये हमें कैसे पता है? बिकॉज़ यू हैव बीन ड्रिलिंग ऑल ओवर द प्लेस फॉर द लास्ट 100 200 इयर्स और हमें एंपेरिकली मालूम पड़ गया है कि ये पैटर्न है कि कुछ प्रकार के रक्स आपको मिलेंगे तो वहां पे ऑयल होने की ज्यादा पॉसिबिलिटी है। दूसरा ये है कि सो दैट इज वन थिंग। दूसरा अगर आपको लगता है कि यह यहां पे यू नो हाई पॉसिबिलिटी है तो आपको जाके ड्रिल करना पड़ेगा। यू विल हैव टू गो एंड ड्रिल। और कई कई बार ऐसा होगा कि आप ड्रिल करते रहोगे कुछ नहीं मिलेगा आपको। देन यू पुल इट आउट गो ड्रिल समवन एल्स। यू डू दैट ओवर एंड ओवर अगेन इवेंचुअली आपको कुछ मिलेगा। और ये पिछले 200 सालों से चल रहा है। लगभग 150 200 साल तक से चल रहा है। यस। क्योंकि उस जमाने के इंसानों को पता था कि यहां से बहुत पैसे निकलेंगे। उनको उस समय पता नहीं था कि ऑइल का एक्चुअल वैल्यू क्या है। सऊदी अरेबिया में तो ऐसे ऑयल जमीन से निकलता है कई जगह पे। लेकिन लोगों को उस समय पता नहीं था कि ऑइल का वैल्यू क्या है। लेकिन जब इंडस्ट्रियल रिवोल्यूशन हुआ तो सबसे पहले इट हैपेंड ऑन द बेसिस ऑफ़ कोल। कोल जला जलाने से इंडस्ट्रियल रिवोल्यूशन हुआ। उसके कारण यूरोप वाज़ एबल टू प्रोड्यूस ऑल काइंड्स ऑफ़ गुड्स एट ट्रिमेंड स्केल एंड वेरी रैपिडली। तो देन दे सेड कि हमें इससे भी अच्छा सोर्स ऑफ़ एनर्जी चाहिए बेटर देन कूल। एंड देन दे सो ऑयल। देन द यूरोपियंस अंडरस्टुड ऑयल का कीमत एक्चुअल वैल्यू क्या है? ये परर्शियंस को और सऊदी अरब्स को कुछ पता नहीं था। सो द यूरोपियंस केम हियर दिस यहां पे तो बहुत सारा तेल है। सो वी शुड नाउ टेक ओवर दिस रीजन। वी शुड कंट्रोल द रीजन। तो ये ये बात है। कितना ऑयल बचा है अर्थ के क्रस्ट में? ऐसा कहा जाता है कि लगभग 100 साल तक और है ऑयल। लेकिन यू डोंट नो फॉर श्योर। दैट्स अ लॉन्ग इनफ टाइम टू प्लान वेल। बट मे बी 50 साल में आधा हो जाएगा जो मतलब काफी कम हो जाएगा फिर दे यू यू टू ड डीपर परहप्स राइट बट वी आर नॉट श्योर एक्सक्टली ऐसा है कि नहीं आपको लगता है कि कोई चांस है कि भारत के ज्योग्राफी में ऑयल मिल सकता है मुझे लगता है कि चांस है क्यों क्योंकि अंडमान जो रीजन है वो जो पूरा ज़ोन है इट इज़ नोन टू बी रिच इन ऑयल एंड गैस इंडोनेशिया वहां पर ड्रिलिंग करता है दे आर टॉप 10 तो शायद नहीं होंगे वो इंडोनेशिया लेकिन दे आर अ मेजर सप्लायर आई मीन मेजर मेजर प्रोड्यूसर ऑफ़ ऑयल एंड पेट्रोलियम। तो उस रीजन में डेफिनेटली ऑयल के बहुत सारे फील्ड्स हैं। मतलब बे ऑफ़ बंगाल आप कह रहे हो। बे ऑफ़ बंगाल अंडमान निकोबार आइलैंड्स उस उस रीजन में जो हमारे एक्सक्लूसिव इकोनमिक ज़ोन में आते हैं। बट समुंदर के अंदर जाकर ड्रिलिंग करनी होगी। यस। सब सरफेस ड्रिलिंग। आपको समुद्र में जाना पड़ेगा और आपको ऑयल वेल बनानी पड़ेगी व्हिच ड्रिल्स ड्रिल्स अंडर द सरफेस ऑफ द ओशन। ओके। आपको लगता है Reliance सर्च कर रही है ऑयल के लिए वहां? इस समय भारतीय सरकार ने टेंडर्स बनाए हैं। एंड दे आर आस्किंग फॉर वेरियस कंपनीज़ हु आर इंटरेस्टेड टू गो एंड ड्रिल ओवर हियर। तो प्रोसेस शुरू हुआ है। उसको कुछ साल लगेंगे शायद। लेकिन अगर उस जगह में काफी रिच रिसोर्सेज हैं, रिजर्व्स हैं तो शायद होपफुली जल्दी मिल जाए। ओके। हाइपोथेटिकली अगर बहुत बड़ी ऑयल फील्ड मिली तो अ इज इट डेंजरस फॉर इंडिया? क्योंकि संजीव सयाल सर जो बेसिकली कैबिनेट में काम करते हैं। उन्होंने कहा कि ये किसी भी देश के लिए एक डेंजरस सिचुएशन हो सकती है। इट्स नॉट एज सिंपल एज हां ऑयल मिल गया तो आप अमीर बन जाओगे। सो व्हाई इज इट डेंजरस ये हमें समझना है। लेट्स लेट्स से हाइपोथेटिकली अंडमान निकोबार हमारे एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक ज़ोन में बहुत बड़ा रिजर्व है ऑइल का। और लेट से हमें मिल गया है लेकिन हम चुप बैठे हैं। तो ऐसा क्यों चुप बैठे होंगे? मुझे पता नहीं क्या हो रहा है। लेकिन मैं कह रहा हूं हाइपोथेटिकली। हम हम क्योंकि अगर वहां पे बड़ा ऑयल रिजर्व मिलेगा मिला आपको तो सबसे पहले किसकी नजर उस पे पड़ेगी यूएस की। एंड देन दे विल टेक एक्शन। वो उस उस जगह पे कुछ भी बहाना बना के कब्जा करने के प्रयत्न करेंगे और उनकी नेवल फोर्स काफी अच्छी है। तो अगर हमें बहुत बड़ा कोई ऐसा डिस्कवरी होता है ऑयल एंड गैस का तो सबसे पहले हमें क्या क्या काम करना पड़ेगा? हमें अपनी नेवल कैपेबिलिटी बढ़ानी पड़ेगी। सो दैट वी कैन एक्चुअली डिफेंड दैट प्लेस अगेंस्ट एनी अग्रेसर। और हमें वहां पर ए टू ईडी बबल्स बनाने पड़ेंगे विथ लॉट्स ऑफ़ मिसाइल्स एंड ड्रोंस ताकि कोई आया तो उसको हम नष्ट कर कर सके। सो ये बात है इट इज़ डेंजरस फॉर अ नेशन। अनलेस यू आर वेरी वेल प्रिपयर्ड एंड वी हैव अ वेरी रोबस्ट कैपेबिलिटी। इट इज़ डेंजरस टू डिस्कवर ऑयल एंड गैस। क्योंकि यूएस विल कम एंड इनवेट अंडर एनी एनी प्रीक्स्ट। गेटिंग बैक टू द वॉर सर। एज वी स्पीक राइट नाउ मेरे ख्याल से एटलीस्ट व्हाट इज रिपोर्टेड इज 2000 से ज्यादा डेथ्स हुए हैं ऑलरेडी इन दिस कॉन्फ्लिक्ट एंड ऑब्वियसली दिस नंबर इस गोइंग टू गो अप आई एम श्योर ईरान आल्सो इनफ्लिक्टेड अ लॉट ऑफ़ डैमेज ऑन इजराइल यूएसए इन द गल्फ। अ आपके मुताबिक ये भी यूक्रेन रशिया की तरह एक स्ट्रेच्ड युद्ध होगा या झट से खत्म हो जाएगा? इस समय कहना मुश्किल है। ओके? ट्रंप तो कह रहे हैं कि नेक्स्ट थ्री फोर वीक्स में आई विल एंड दिस वॉर। आई विल बम ईरान बैक टू द स्टोन। ऐसा बोल रहे हैं वो। लेकिन क्या उनमें क्षमता है ये करने की? यूएस बहुत शक्तिशाली देश है हम जानते हैं। लेकिन गल्फ रीजन में उनकी क्या कैपेबिलिटीज़ है और कितना वो रिइंफोर्समेंट जा सकते हैं। इट डिपेंड्स ऑन दैट। अह अगर आप अल्टीट्यूड से चाहते हो डिफिट करना ईरान को। इट्स इंपॉसिबल। अगर आपको एक्चुअली वॉर को एंड करना है, यू हैव टू एक्चुअली डू अ रिजीम चेंज। उसके लिए यू हैव टू पुट बोथ्स ऑन द ग्राउंड। और 5000 10,000 सोल्जर्स से कुछ नहीं होगा। यू हैव टू सेंड अ लाख सोल्जर्स, 2 लाख सोल्जर्स। क्योंकि ईरान इज़ वेटिंग फॉर दिस। अ लेकिन, अगर बैक चैनल डिप्लोमेटिक नेगोशिएशंस होते हैं। एंड दे कम टू सम काइंड ऑफ़ एग्रीमेंट, देन द वॉर कैन एंड। ट्रंप क्या कह रहा है कि वो चाहता है कि ईरान का न्यूक्लियर प्रोग्राम 100% खत्म हो जाए। पहला वो पहली शर्त ये दूसरी दूसरी शर्त ओपन द स्ट्रेट ऑफ़ हॉर्मोस एस पर आवर टर्म्स तीसरा डिस्ट्रॉय योर मिसाइल कैपेबिलिटीज फोर्थ डिस्ट्रॉय योर ड्रोन कैपेबिलिटीज़ मतलब एसेंशुअली ट्रंप कह रहा है कि आप निहत्ते बन जाओ देन वी विल अग्री लेकिन अगर ईरान ये सब मानता है निहत्ता बन जाता है देन दे विल जस्ट वॉक इन टेक टेक ओवर हम राइट सो जो टर्म्स ट्रंप मांग रहा है दोज़ आर अनएक्सेप्टेबल टू एनी सोवन नेशन राइट सो इट इज़ नॉट गोइंग टू वर्क आउट दैट वे सो आई डोंट आई डोंट नो कि किस प्रकार का अंडरस्टैंडिंग वो बैक चैनल डिप्लोमेटिक नेगोशिएशन से कर सकते हैं। आई थिंक इट इज़ डिफिकल्ट बहुत डिफिकल्ट है। और अगर कॉम्प्रोमाइज नहीं होता है ऑफ़ सम काइंड व्हिच इज़ लाइक यू नो इक्वल यू नो दोनों साइड कंप्रोमाइज नहीं करेंगे देयर विल बी नो नो एग्रीमेंट। यहां हम हिस्ट्री की बातें कर रहे हैं। कुछ डिप्लोमेटिक बातें हो रही थी ईरान यूएसए के बीच रिलेटेड टू द न्यूक्लियर डील। अ एंड देन यूएसए रिवोक्ड इट स्टर्म्स। यस। 2015 2016 की बात है ये। ये पूरा समझाइए कि क्या हुआ? क्योंकि मेरे ख्याल से ये ईरानियन रिजीम के लिए रीसेंट मेमोरी है। ऑबियसली अफेक्टिंग हाउ दे आर थिंकिंग अबाउट दिस वॉर। जी हां। ये क्या हुआ था एक्सक्ट्ली? तो ईरान का न्यूक्लियर प्रोग्राम है। ओके? वो उनका एंबिशन ये है कि वो एक सिविलियन न्यूक्लियर एनर्जी प्रोग्राम बनाए। रिएक्टर्स बनाए जिससे इलेक्ट्रिसिटी का उत्पादन हो। दैट सॉर्ट ऑफ़ थिंग। और उसके लिए आपको यूरेनियम चाहिए। व्हिच इज़ द फ्यूल दैट यू यूज़ इन रिएक्टर्स। तो यूरेनियम अगर आपको यूज़ करना है तो आपको यूरेनियम रॉ मटेरियल जो ओर होता है उसको लेना होगा। फिर उसको आपको कंसंट्रेट करना पड़ेगा व्हिच इज़ कॉल्ड येलो केक। और फिर उसको आप आप और प्रोसेस करोगे सेंट्रीफ्यूज नाम के मशीनंस में यू विल कन्वर्ट इट इंटू यूरेनियम हेक्सा फ्लोराइड एंड देन यू विल एनरच द यूरेनियम एसेंसली और आपको और कंसंट्रेट और एनरच्ड मिलेगा। और अगर आपने लगभग 60% तक एनरच किया उसको देन यू कैन यूज़ इट वेरी वेल इन रिएक्टर्स। और बहुत वक्त लगता है इसके बहुत समय लगता है और अगर आप उस उस यूरेनियम को 90% प्लस एनरच कर दिया यू कैन यूज़ दैट इन न्यूक्लियर वेपंस। तो यूएस कहता है कि भाई ईरान वांट्स न्यूक्लियर वेपंस। लेकिन सच तो ये है कि जो रीसेंट जो सुप्रीम लीडर थे जिनकी हत्या की यूएस ने श्री अली खाबेन जी उन्होंने फतवा लगाया था अगेंस्ट न्यूक्लियर वेपंस। एंड ही इज़ द सुप्रीम लीडर। तो अगर उन्होंने फतवा दिया अगेंस्ट न्यूक्लियर वेप्स। इट मींस ईरान कैन नेवर प्रोड्यूस न्यूक्लियर वेप्स एस लॉन्ग एज़ ही इज़ अलाइव। तो यूएस और ईरान के बीच में 2010 में नेगोशिएशंस हुए और 2015-16 के आसपास उन्होंने एक एग्रीमेंट किया व्हिच वास कॉल्ड द जेसीपीओए जॉइंट कंप्रहेंसिव प्लान ऑफ़ एक्शन। उसमें क्या हुआ कि ईरान अग्रीड कि भाई हम अपने सारे न्यूक्लियर फैसिलिटीज़ ओपन करेंगे टू इंस्पेक्शन। आईएएईए इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी अह एजेंसी विल कम पीरियडिकली एंड सी दैट वी आर कंप्लाईंग विथ द डील विथ द एग्रीमेंट एंड दैट वी आर नॉट प्रोड्यूसिंग न्यूक्लियर वेपन्स। और उन्होंने इंस्पेक्शंस करवाए एंड दे वर इन इन इन लाइन विथ द एग्रीमेंट। फिर 2017 के आसपास ट्रंप ने कहा कि आई एम नॉट हैप्पी विथ दिस डील और यूएस उस एंड द यूएस देन वॉक्ड आउट ऑफ द डील यूनिलैटरली। उन्होंने डील को वायलेट कर दिया। व्हाट वाज़ यूएस डूइंग फॉर ईरान योर इन एक्सचेंज फॉर ईरान ओपनिंग अप इट्स फैसिलिटीज़ फॉर इंस्पेक्शन। यूएस ने एग्री किया था कि हम आपसे कुछ सेंशंस कम कर देंगे। ओके। ओके सेंशंस रिलीफ की बात थी। मतलब इकोनमिक रिलीफ इकोनमिक रिलीफ सशन जैसे आपकी गर्दन पकड़ के रखी है थोड़ा कम थोड़ा लूज थोड़ा लूज करिए बट आप बस न्यूक्लियर बॉम्ब मत बनाओ हां जो हमने टर्म्स एग्री किए हैं आप उसका पालन कीजिए और हम उसको इंस्पेक्ट कराएंगे बार-बार आई मीन पीरियडिकली सो ईरान वास डूइंग एवरीथिंग एस पर द जेएसीपीओए और उसको पूरा इंस्पेक्शन हो रहा था एंड ईरान वास नॉट प्रोड्यूसिंग एनी वाज़ नॉट इवन ट्राइंग टू डू यू नो न्यूक्लियर वेपन स्टफ ट्रंप वक्स आउट ऑफ द ईरान न्यूक्लियर डील एंड फिर से उसने गर्दन टाइट कर दी और तब तब से आज तक सिचुएशन ये है। यानी कि ईरान को बोला अभी बैक वी आर ब्रिंगिंग सेंश बैक। वी आर ब्रिंग एवरीथिंग बैक। बट कमिंग बैक टू द टॉपिक ये न्यूक्लियर डील में फाइनली क्या हुआ? तो ट्रंप ने बोला बैक टू टेररिफ्स ब्रॉट बैक प्रेशर ऑन ईरान ब्रॉट बैक सेंश ऑन ईरान। फिर ईरान ने अपना न्यूक्लियर प्रोग्राम ऑन किया फिर से। उन्होंने फिर अपने इंस्पेक्शंस जो हो रहे थे वो बंद कर दिए। वी विल नो लगर अलाउ ओवर फैसिलिटीज़ टू बी इंस्पेक्टेड बाय आईईए और उन्होंने फिर अपना एनरचमेंट जो भी चल रहा था वो किया लेकिन फतवा था सुप्रीम लीडर से कि आप न्यूक्लियर बम नहीं बनाएंगे व्हिच मींस दैट ईरान ने 90% प्लस एनरचमेंट नहीं किया होगा ओके एक हल्का सा पर्सेक्टिव देना चाहूंगा मेरे एक ईरानियन दोस्त है दो-तीन है उन सों से जब मैंने पूछा उनके गवर्नमेंट के बारे में दिस इज बिफोर अली खमीनी वास किल्ड ओके उन सों ने कहा कि यार मतलब हर देश की तरह हमारे हमारे देश में भी जनता डिवाइडेड है। कुछ लोग उनके पक्ष में हैं। कुछ लोग उनके अगेंस्ट है। सो इट्स लाइक एनी अदर कंट्री। बट जो नैरेटिव्स हम तक पहुंचते हैं ना कि नहीं बहुत ही ज्यादा एक्सट्रीमिस्ट देश है ये वो दीज़ आर नैरेटिव्स। ये जानना जरूरी है। ऑब्जेक्टिव ट्रुथ जानिए। अगर आपके कोई ईरानी दोस्त है ना उनसे पूछिए कि क्या चल रहा है आपके देश में? या क्या चल रहा था वॉर से पहले। अ नाउ आई डोंट नो आई सिविलियंस सफर द मोस्ट। इनोसेंट पीपल सफर द मोस्ट। यह प्रॉब्लम है तो युद्ध का राइट बहुत ही ह्यूमेनिटेरियन कैटस्ट्रोफ होता है कैटस्ट्रोफी होता है युद्ध में और हम यहां पे वी कैन टॉक अबाउट द थ्योरेटिकली वी हैव नो स्किल इन द गेम वी डोंट फील व्हाट्स हैपनिंग देयर वहां पे क्या हाल होगा वी कांट इमेजिन क्या हाल होगा अभी अभी बम्बार्डमेंट चल रहा होगा शायद ईरान पे या किसी किसी ईरान की किसी सिटी के ऊपर लाइक द होल कंट्री इस शट डाउन प्रीटी मच आई थिंक काफी सारे पावर प्लांट्स पे इन्होंने हिट किया है यूएस ने और इजराइल ने उन्होंने डिसलिनेशन प्लांट एक दो तो उड़ाए हैं उन्होंने न्यूक्लियर फैसिलिटीज में बम्बार्डमेंट किया व्हिच मींस क्या पता कुछ फॉल आउट हुआ होगा हम और बहुत सारे सिटीज में आई मीन वी नो कि स्कूल के ऊपर उन्होंने हिट किया है और पता नहीं यूनिवर्सिटी कोई तो टेक्नोलॉजी की यूनिवर्सिटी है उनकी उसको उड़ा दिया उन्होंने डिस्ट्रॉय कर दिया ताकि दे सो दैट ईरान कैन नो लगरगर प्रोड्यूस हाई क्वालिटी इंजीनियर्स सो दे आर ट्राइंग टू सेंड ईरान बैक टू द स्टोन एज एसेंशियली और कितने सिविलियंस अब तक मरे ईरान में वी हैव नो आईडिया बहुत मरे होंगे अनफॉर्चुनेटली प्लस इनफ्लेशन ऑलरेडी चल रही थी उस देश में हम तो आई एम थिंकिंग कि अगर ये पूरा कॉन्फ्लिक्ट पूरी तरह से खत्म भी हो गया कल ही। फिर भी बहुत ज्यादा डैमेज हुई है। बहुत बहुत इट विल टेक ईरान 100्स ऑफ़ बिलियंस ऑफ़ डॉलर्स और ट्रिलियंस ऑफ़ डॉलर्स टू अनडू द डैमेज। इन डिकेड्स 20 30 साल लगेंगे। जस्ट टू कम बैक टू वेयर इट वास प्री कॉन्फ्लिक्ट। मोस्ट लाइकली। कितना डैमेज हुआ? हो रहा है। स्पीकिंग अबाउट द सेम कांसेप्ट। रिवाइंड करते हैं बैक टू 1980। एक और हिस्ट्री का चैप्टर है जो भारत में हमें सिखाया जाना चाहिए। बट इट्स नॉट स्पोकन अबाउट इनफ। ईरान वर्सेस इराक वॉर। कर्ड्स होते हैं। एक एथनिसिटी ईरान में टाइप ऑफ कम्युनिटी है। ये ईरान इराक वॉर में कर्ड्स पर केमिकल वॉरफेयर यूज किया गया था। केमिकल वॉरफेयर होता क्या है? कुछ-कुछ केमिकल वेपंस के बारे में बताइए। केमिकल वॉरफेयर ये होता है कि आप मोस्टली गैस होता है किसी प्रकार का। तो आपने एक बम डाला जो फटेगा नहीं विद एन एक्सप्लोजन लेकिन वो गैस रिलीज करेगा। फॉर एग्जांपल हैंड ग्रेनेड या फिर रॉकेट या उसमें से गैस निकलेगा और ये गैस जनरली नर्व गैस होता है। नर्व गैस एक कैटेगरी ऑफ़ ऑफ पोइजनंस है जो अलग-अलग प्रकार के आते हैं। बट दे ऑल हैव द सेम इफेक्ट कि आपके नर्वस सिस्टम पे बहुत ही बुरा इफेक्ट होगा उसका। और अगर आप उस उस चीज के पास हो तो आप कुछ ही क्षणों में मर जाओगे। और अगर आप दूर हो तो आप परमानेंटली डिसेबल हो जाओगे। ओके? सो नर्व गैस इज अ वेरी वेरी हॉरेबल वेपन और इट इज़ इट इज़ बैंड अकॉर्डिंग टू इंटरनेशनल लॉ। लेकिन फिर भी कई देश उसको यूज़ करते हैं। तो एलेजली सद्दाम हुसैन के फोर्सेस ने अगेंस्ट द कुर्स इसको यूज़ किया था 1980 में। या सो या नर्व गैस होता है। और फिर सैरन गैस भी होता है। व्हिच इज़ अ काइंड ऑफ़ नर्व गैस। फिर मस्टर्ड गैस होता है। तो अलग-अलग प्रकार के केमिकल वेपन्स होते हैं। जनरली इट इज़ गैसेस। बट यू कैन यूज़ केमिकल वेपन्स इन वाटर आल्सो। अगर आप किसी पॉटर सोर्स के अंदर कुछ पोइजन डाल दोगे, सो दैट इट इज़ आल्सो केमिकल वॉरफेयर बट अ डिफरेंट काइंड ऑफ़ केमिकल वॉरफेयर। तो ईरान इराक वॉर में मोस्टली नर्व गैसेस या फिर दूसरे गैसेस यूज़ हुए थे। इट वाज़ गैस वॉर द गैस दैट वाज़ यूज़्ड। आप 80ज में स्विट्जरलैंड में थे ना? जी हां। आप तक ये ईरान इराक वॉर के डिटेल्स पहुंचते थे? धीरे थोड़ा-थोड़ा थोड़ा। इट वाज़ नॉट अ बिग डील इन यूरोप एट द टाइम। कि कुछ एशिया के दो देश लड़ रहे हैं। हमें क्या पड़ी है? थर्ड वर्ल्ड नेशंस आर फाइटिंग। उस प्रकार का एटीट्यूड था वहां पे। बैक टू द मेन टाइमलाइन हम आया खमेनी के बारे में बात कर रहे हैं। पूरा पर्सपेक्टिव समझाइए ईरान इराक वॉर का और हुआ क्या उस रीजन में इसकी वजह से तो सबसे पहले आयत खबेनी जो रूह खबेनी थे वो बहुत पॉपुलर थे अंटिल 1979 और समथिंग इवन आफ्टर दैट तो सब लोग चाहते थे कि वो वापस आए एंड ही टेक्स ओवर एंड ही सेव्स आवर कंट्री ही ओवर सॉ ईरान इराक वॉर हां तो श्री रोहल्ला खमे जो थे जो फर्स्ट आया द फर्स्ट सुप्रीम सुप्रीम लीडर ही वाज़ इन चार्ज ऑफ़ ईरान जब सद्दाम हुसैन ने आक्रमण किया ईरान के ईरान के ऊपर तो यह 1980 में शुरू हुआ और ईरान इराक की फोर्सेस बहुत जल्दी से इराक ईरान ईरान के अंदर आई 50 कि.मी. बहुत जल्दी आ गए अंदर खुरम शहर नाम का सिटी उन्होंने पकड़ लिया आफ्टर अ लॉट ऑफ़ वॉरफेयर एंड देन दे गॉट बॉक्ड डाउन एंड दे स्ट्रेट बॉक्ड डाउन फॉर एट इयर्स इराक इराक सद्दाम हुसैन के ट्रूप्स मोर देन 5070 कि.मी. जा ही नहीं पाए ईरान के अंदर। बिकॉज़ ईरान का जो अगर आप जग्राफी देखोगे इट इज लाइक अ फोर्ट्रेस दैट इज प्रोटेक्टेड बाय माउंटेन रिंग्स एंड माउंटेन रिंग्स एंड माउंटेन रिंग्स और उसके अंदर अगर आप जाना चाहोगे यू कैन बी टेकन डाउन फ्रॉम सो मेनी डिफरेंट एंगल्स अफगानिस्तान में कभी कोई फॉरेन रूल क्यों नहीं कर पाया बिकॉज़ ऑफ़ द माउंटेनस टेरेन जहां पे आप छुप छिप सकते हो एंड यू कैन डू गरिल्ला वॉरफेयर। सो ईरान इज़ लाइक अफगानिस्तान मल्टीप्लाई बाय थ्री और फोर। हम ऐसा है और उनका पपुलेशन भी बहुत बड़ा है। एंड ईरान वास द डिफेंडर। सद्दाम वास द अग्रेसर और ये युद्ध चला बहुत ही ब्रूटल युद्ध चला। इवेंचुअली उनको टीनएजर्स को भेजना पड़ा था इन द वारफेयर या टीनएजर्स लाइक लेस देन 18 इयर्स ओल्ड दे यूज़्ड टू गो और लगभग क्लोज टू अ मिलियन पीपल डाइड टोटल। ओके? और आज के जो ईरान का जो लीडरशिप है ओके? मेनी ऑफ़ देम वेर यंग बॉयज दे फॉट इन द वॉर एट द टाइम। तो ये बहुत ही ब्रूटल वॉर था। दोनों नेशंस की इकॉनमी को बर्बाद किया इस वॉर ने। एंड ऑब्वियसली दिस वास ऑल इन फेवर द यूएस बिकॉज़ यूएस हैड इंस्टीगेटेड सदाम हुसैन टू गो एंड फाइट ईरान टू टू रूइन ईरान एंड आल्सो यू नो डिस्टबिलाइज इराक एस वेल। क्योंकि आया खोमेनी ऑइल को कंट्रोल कर रहे थे फिर से। बेसिकली ऑयल की बात है। एट द एंड ऑफ़ द डे इट्स ऑल अबाउट ऑइल। ओके। मैं ना कल मस्ती के लिए एंशिएंट पोजीशन हिस्ट्री भी पढ़ रहा था। ओके। साइरस द ग्रेट वगैरह। वही ईरान रीजन की बात हो रही है। हम हजार सालों से ज्यादा उनकी एक वॉरिंग हिस्ट्री रही है। उस रीजन में युद्ध चलते ही जाते हैं। इट्स जस्ट अनदर वॉर फॉर दैट रीजन। मेक्स मी थिंक कि वो लोग बहुत हार्ड लोग हैं। एंड स्पेसिफिकली यह ईरान इराक वॉर की बात की जाए जो आप कह रहे हो कि उसमें जो बॉयज थे आज वो लीडर्स ईरान में मस्ट बी रियली हार्ड मैन टू हैव सीन वॉर एज़ टीनएजर्स बीन अ पार्ट ऑफ इट दे विल बी अ वेरी डिफिकल्ट अपोनेंट फॉर यूएसए। स्मार्ट भी हैं और वॉरियर्स भी हैं। वॉरियर्स भी रह चुके हैं। सो वो सब कुछ समझते हैं। दे अंडरस्टैंड द इंटेलेक्चुअल वर्ल्ड, द एडमिनिस्ट्रेटिव वर्ल्ड। एंड दे अंडरस्टैंड वॉर अह यू नो वॉरफेयर। दे हैव बीन वॉरियर्स हम यू नो इट्स आल्सो सपोज टू बी अ वेरी ब्यूटीफुल कंट्री बहुत एक्चुअली गो एंड विजिट बहुत सुंदर देश है सेम कैन वी सेड फॉर यूएसए यूएसए आल्सो गॉर्जियस कंट्री टू गो बट यूएसए एशिया में नहीं है वेरी फार अवे ज्योग्राफिकली फ्रॉम द वॉर सोचिए अगर ईरान इतना आई मीन में इसमें ये वॉरफेयर नहीं होती एंड वी कुड गो देयर विल बी सो नाइस प्रणीत का एक सवाल था कि सद्दाम हुसैन फिर टारगेट क्यों किए गए ईरान इराक वॉर के बाद सद्दाम हुसैन के बारे में हर किसी ने सुना है। एंड इवन नाउ ही इज़ प्रोजेक्टेड एज़ द वर्स्ट डिक्टेटर अबव मे बी ही वाज़ बट अगर यूएसए ने ही खुद उन्हें भेजा था ईरान के अंदर टू काइंड ऑफ़ वीक इन ईरान देन व्हाट हैपेंड पोस्ट ईरान इराक वॉर सदाम हुसैन वा डिस्पोजेबल एसेट यूएस के लिए ओके थोड़ी देर के लिए उसका उपयोग करो फिर उसको साइड पे हटा दो सो सदाम हुसैन डेफिनेटली डिक्टेटर था बट ही वास अ वेरी गुड एडमिनिस्ट्रेटर आप कुछ भी कहो उसके जब जब तक वो रूलर था इराक इराक वाज़ वेरी वेल गवर्न। इराक इज अ इस्लामिक नेशन। ओके? वहां पर लेकिन फुल सेकुलरिज्म था। वुमेन डिड नॉट हैव टू वेयर बुर्कास। वुमेन कुड वर्क एस जस्ट लाइक मैन। ईरान में इराक में कितने सारे अलग-अलग एथनिसिटीज हैं। जो आज लड़ते हैं। उस समय किसी को लड़ने की अनुमति नहीं थी। सो ईरान इराक वाज़ वेरी वेरी वेल गवर्न बाय सद्दाम हुसैन। और सद्दाम हुसैन जो भी कहो आप ही वाज़ अ नेशनल नेशनलिस्ट ही वाज़ अ पेट्रियट। हम और इसलिए द यूएस हैड अ प्रॉब्लम विथ हिम क्योंकि वो चाहते थे सम पपेट हु विल ओबे ऑल देर ऑर्डर्स इन्होंने सद्दाम हुसैन को इंड्यूस किया टू अटैक ईरान लेकिन सद्दाम हुसैन वाज़ वाज़ विलिंग टू डू दिस क्योंकि ही वाज़ आफ्टर पर्सनल ग्लोरी वो चाहता था कि वो राजा ईरान का भी बन जाए। सो देयर वाज़ समथिंग इन इट फॉर हिम। वो सिर्फ किसी के ऑर्डर्स नहीं ले रहा था। ही वाज़ एक्चुअली यू नो ड्रिवन बाय बाय बाय द सॉर्ट ऑफ़ मोटिवेशन। ही वाज़ ड्रिवन बाय ग्रीड एसेंशियली। सो ही वास डूइंग इट हिमसेल्फ बट फॉर द यूएस मतलब इराक चाहता क्या था वो ईरान इराक वॉर से टेरिटरी जमीनरी हां ऑयल और ऑयल क्योंकि इराक और ईरान के बीच का जो पास वाला रीजन है दैट इज द ईरानियन ऑयल प्रोड्यूसिंग रीजन खुजस्तान प्रोविंस एसेट्रा तो सदाम हुसैन चाहता था कि वो भी मेरे हाथ में आ जाए मैं और भी ताकतवर बन जाऊं और भी मैं धनवान बन जाऊं सो दैट वाज़ सद्दाम हुसैन ग्रीड ही वाज़ आफ्टर ही वाज़ मोटिवेटेड बाय ग्रीड वो सो द यूएस न्यू कि उसको किस प्रकार से मैनपुलेट करना है कि भाई आप जाओ और यह सब आपके हाथ आप कब्जे पर कर लो एंड वी विल हेल्प यू विथ दैट। सो ही वाज़ लाइक यस बाद में यूएस ने क्या किया कि यह आदमी बहुत ही यू नो ही इज़ नॉट इजी टू कंट्रोल। तो यूएस ने ये किया कि दे गव सद्दाम हुसन द ग्रीन लाइट कि आप जाकर अब कुवैत पे आक्रमण करो। कुवैत छोटा सा देश है। जाओ अब कब्जा करो एंड वी विल लुक द अदर वे। द मोमेंट सदाम हुसन डज़ दैट। यूएस सेस आपने बहुत बड़ा गलती किया है। वी विल नाउ इनवेड यू। एंड दैट्स हाउ दे डिस्ट्रयड इराक इन 1991 और 12 साल के बाद जो जॉर्ज डब्ल्यू बुश थे जॉर्ज बुश थे सीनियर उनके पुत्र सी जूनियर बुश उन्होंने आकर अपना काम खत्म अपने पिताजी का काम समाप्त किया। जॉर्ज एच डब्ल्यू बुश ने शुरुआत करी डब्ल्यू बुश ने खत्म करी। खत्म किया 2003 में 12 साल बाद। हम सो दैट्स हाउ वो वॉर भी काफी टाइम तक चली थी इराक वॉर। क्योंकि यूएस ने एक्चुअल ग्राउंड इन्वज़ किया था इराक के ऊपर एंड दैट टूक मंथ्स नाउ रिवाइंड टू द टाइमलाइन तो ईरान इराक वॉर अर्ली 90ज तक खत्म हो गई हम 88 में खत्म हो गई 88 में ओके एंड देन इराक यूएसए वॉर स्टार्टेड हां 91 में ओके सो 1990 में सद्दाम हुसैन ने कुवैत पे कब्जा किया और फिर यूएस ने बहुत बड़ा मल्टीीनेशनल फ़ असेंबल किया टू इनवेड इराक और इराक ने अपना होमवर्क नहीं किया था। उनके पास ये ड्रोन मिसाइल्स कुछ थे नहीं। उस समय ड्रोन का टेक्नोलॉजी भी नहीं हुआ कर नहीं हुआ करता था। और उनके पास कुछ स्कड मिसाइल्स थे। सोवियट मिसाइल्स एंड दे ट्राई टू हिट तेलवी एंड सो ऑन फॉर अ वाइल। या ये या ये हुआ था। और उस समय यूएस ने नया सिस्टम बनाया था पेट्रियट मिसाइल का। ओके? व्हिच वाज़ द फर्स्ट टाइम यू हैड अ सिस्टम दैट कैन इंटरसेप्ट मिसाइल्स विथ मिसाइल्स। तो सदाम हुसैन स्कड मिसाइल भेज रहा है तेलवी पे। ओके? आ रहा है। यूएस अपना पेट्रियट मिसाइल छोड़ता है। कभी-कभी इंटरसेप्शन होता है। कभी-कभी मिस हो जाएगा और फिर पेट्रियट मिसाइल ऊपर जाकर वापस वो भी गिरेगा अपॉन द पपुलेशन। सो दैट या दैट्स हाउ वी लर्न यू नो नॉट टू मेक दोज़ मिस्टेक्स। हम मतलब जब इराक पर भी अटैक्स हो रहे थे। उनका भी टैक्टिक सेम था कि भ इजराइल पर बॉम्ब फेंको। हां लेकिन उनके पास लिमिटेड स्कड मिसाइल्स थे। कुछ-कुछ ही थे। मे बी आई डोंट नो क्या नंबर था। 100 200 मैक्सिमम मे बी कम। बेसिकली माय लर्निंग ईयर इस ड्रोन वॉरफेयर की वजह से वॉरफेयर अब ट्रूली एसिमेट्रिक हो चुका है। टोटली टोटली द वॉरफेयर रूल्स ऑफ़ वॉरफेयर हैव चेंज कंप्लीटली। एक छोटा सा टेंजेंट आप कुछ सेंटेंसेस में समझा सकते हो। ये यूक्रेन रशिया वॉर अभी भी चल रही है ना। चल रही है। एंड दे आर स्टिल बॉम्बिंग ईच अदर। बट एसिमेट्रिक वारफेयर चल रहा है। ऑब्वियसली रशिया ओवरवेल्मिंग फोर्स है इकोनॉमिकली मिलिट्री पर्सपेक्टिव से भी। एंड यूक्रेन इज़ जस्ट स्ट्रेचिंग इट आउट। बट यूक्रेन इकॉनमी इज़ डिस्ट्रयड एट दिस पॉइंट। डेमोग्राफी इज़ डिस्ट्रॉयड। डेमोग्राफी इज़ डिस्ट्रॉयड। यस। ऑल द यंग मैन आर डेड। ऑल यंग मैन आर डेड। अब्सोलुटली। कितने बच्चे होंगे? नहीं है। बच्चे हैं अभी। सो वेयर इज दैट वॉर गोइंग? दैट वॉर इज़ राइट नाउ अ वॉर ऑफ़ एट्रीशन। क्या हो रहा है कि रशिया हैज़ डिस द पुतिन हैज़ डिसाइडेड। पुतिन ने यह निर्णय किया है कि इस युद्ध को जितना लंबा खींचना खींच सकूं मैं उतना खींचूंगा। क्यों? क्योंकि अगर यूक्रेन को वेस्ट जो है वेस्टर्न नेशंस वो आर्म्स अमुनेशन और पैसा सप्लाई नहीं करेंगे तो यूक्रेन कैन नॉट फाइट। सो इफ आई मेक यूक्रेन फाइट फॉर इयर्स देन इट इज़ ड्रेनिंग एंड डिप्लीटिंग द वेस्ट। हम सो इसलिए वेस्ट के ऑलरेडी रिसोर्सेज जो है रिजर्व्स जो आर्म्स एमुनेशन के वो ऑलरेडी कम है। बिकॉज़ दे आर सेंडिंग एवरीथिंग टू यूक्रेन। राइट? तो जितना उनके इकोनमी पे और उनके मिलिट्री पे ड्रेन हो सकता है उतना मैं करूंगा। बिकॉज़ आई कैन फाइट दिस वॉर एस लॉन्ग एज आई वांट। तो क्या ट्रंप ईरान के साथ भी सेम चीज करेगा? ट्रंप चाहेगा जितना जल्दी हो सके उतना जीते। बिकॉज़ ही इज द मोर पावरफुल नेशन। जो पावरफुल होता है वो चाहता है कि जल्दी खत्म हो। और जो वीक होता है जिनके पास एसिमेट्रिक टैक्टिक्स होते हैं वो चाहते हैं कि इसको लंबा खींचे। लेकिन अगर आप अभी आप कहोगे कि रशिया इज़ मोर पावरफुल देन यूक्रेन। तो वो क्यों चाहते हैं कि लंबा खींचे? बिकॉज़ यूक्रेन इज़ सपोर्टेड बाय अ मच मोर पावरफुल कोलेशन ऑफ़ नेशंस। सारे वेस्टर्न नेशंस। सो कंपेरेटिवली रशिया इज़ वीकर इकोनॉमिकली एट लीस्ट। हम्म हम्म ओके। वाओ! अह बैक टू ईरान इराक वॉर का द एंड ईरान में क्या हुआ? ईरान इराक वॉर के बाद। जब सद्दाम हुसैन पर अटैक्स किए जा रहे थे। जब सद्दाम हुसैन पे अटैक्स हो रहे थे, उस समय ईरान ने कुछ भी पार्टिसिपेट नहीं किया इसमें। इट स्टेड असाइड। वो दूर से खड़ा रहा और देखा उसने क्या हो रहा है। उसने कहा कि ये मेरी लड़ाई नहीं है। आई विल नॉट फाइट फॉर द यूएस। आई विल नॉट फाइट फॉर फॉर सद्दाम एक दूसरे को मारने दो। उनका ऑलरेडी इकोनमी काफी डेवस्टेड हो गया था। दे वर स्टिल रिकवरिंग फ्रॉम द हॉरिबल एट ईयर वॉर एट नाइन ईयर वॉर अगेंस्ट इराक। सो ईरान ने दे सेट अ सेट ऑफ़ द साइडलाइंस। हम्म ओके। अह इकोनोमिकली नॉट इन अ गुड प्लेस जस्ट डूइंग देयर ओन थिंग मेकिंग देम मनी थ्रू आयल। याह। ओनली ऑयल। फिर 90ज 2000 2010 में यही हुआ। यही चल रहा। यही चला रहा। यस। कि नॉट द स्ट्रांगेस्ट इकोनमिकली बट ऑइल के थ्रू पैसे कमा रहे हैं। बिल्कुल उनके पास एसेंशली एक ही रिसोर्स है। एक ही मेजर रिसोर्स है उनके देश में। हम या सो दैट्स अबाउट इट। या पैरेलली मेरे ख्याल से 90ज 200 में बाकी के गल्फ कंट्रीज यूएई कतर सऊदी अरेबिया उन्होंने बहुत ज्यादा ग्रोथ देखी। बिल्कुल। व्हाई? क्योंकि उनके क्योंकि उनके ऊपर कोई सेंशंस नहीं थे। सो दे दे कुड सेल देर ऑयल टू द होल वर्ल्ड विदाउट रेस्ट्रिकशंस दी नेशंस आर डूइंग व्हाट द यूएस देखिए यूएस नहीं चाहता कि उनका तेल खरीद चोरी करें वो चाहता यूएस क्या चाहता है कि आप अगर तेल बेचोगे तो यू विल ओनली डू ट्रांजैक्शन इन यूएस डॉलर्स ओके इसको कहते हैं पेट्रो डॉलर सिस्टम सो दैट्स हाउ दे वांट टू कंट्रोल द वर्ल्ड इकॉनमी दिस इज़ व्हाट आई वास ट्राइंग टू गेट टू कि ईरान रिजीम की सबसे बड़ी गलती क्या थी व्हाई डीड दे अट्रैक्ट एक्ट दिस एनिमिटी इट्सेंट एस अ जिओपिलिटिकल फैक्टर कमिंग बैक टू सद्दाम हुसैन उसने एक बड़ी गलती की थी ही वास ट्राइंग टू सेल ऑयल इन यूरोस हम गॉट इट ओके इन 1990 व्हाटएवर क्लेरिटी दिस इज द क्लेरिटी आई हैव गॉट फ्रॉम दिस पीस हम ये सबसे बड़ा काइंड ऑफ़ रेड कार्ड है यूएसए के लिए यस राइट कि यार ये कैसे किया आपने हाउ डेयर यू डील इन इन अ करेंसी अदर देन डॉलर्स बिल्कुल राइट अभी ये थोड़ा समझाइए इसका लॉजिक क्या है कि जब कोई देश अ तेल खरीदता है डॉलर्स में नहीं हाउ इज द यूएस गेटिंग अफेक्टेड ग्रेट क्वेश्चन तो जब द्वितीय विश्व युद्ध खत्म हो रहा था 1944 में तब एक कॉन्फ्रेंस हुआ था ब्रिटेन वुड्स कॉन्फ्रेंस जिसमें सारे पावरफुल और अमीर देश साथ में आए बैठे और उन्होंने डिसाइड किया कि आज से टुडे टुडे ऑनवर्ड्स हम यूएस डॉलर को वर्ल्ड का रिजर्व करेंसी बनाएंगे। ओके? और उस उसका मतलब ये है कि जितने भी इंटरनेशनल ट्रांजैक्शंस करने होंगे वी विल डू इन यूएस डॉलर्स। ओके? और उस समय यूएस डॉलर जो था इट वाज़ पैग्ड टू द प्राइस ऑफ़ गोल्ड। मतलब एक यूएस डॉलर वाज़ एक्चुअली प्रॉक्सी फॉर अ सर्टन अमाउंट ऑफ़ गोल्ड। ओके? और यूएस ने ये ये वादा किया था कि हम अपने स्टोरेज में उतना गोल्ड रखेंगे जितना हम यूएस डॉलर सर्कुलेट कर रहे हैं। जी। ओके। अब 1971 में रिचर्ड निक्न ने कहा कि वी आर नॉट डीलिंकिंग द यूएस डॉलर फ्रॉम द गोल्ड फ्रॉम द प्राइस ऑफ़ गोल्ड। ओके? तो उससे क्या हुआ कि यूएस डॉलर बिकम बिकम अ पेपर करेंसी। उसका कोई एक्चुअल वैल्यू नहीं था उसके बाद। सो इसकी टू काउंटर काउंटर एक्ट दिस यूएस ने एक एग्रीमेंट किया विद दी गल्फ नेशंस कि यू विल सेल एंड डू ट्रांजैक्शंस ओनली इन यूएस डॉलर्स एंड वी विल प्रोटेक्ट टेक्निकली ये एक सेंट्रलाइज्ड सिस्टम बन गया कि एक सेंट्रल शहंशाह राइट एपरर एपरर एंड देन यू कैन कंट्रोल द वर्ल्ड्स इकॉनमी सो उन्होंने क्या किया कि गल्फ नेशन को कहा जो मेजर ऑयल प्रोड्यूसिंग नेशन थे दुनिया भर के उनको कहा यू विल ओनली ट्रेड ऑयल इन यूएस डॉलर्स एंड इफ यू डोंट डू इट विल बी कॉन्सक्वेंसेस। तो इससे क्या हुआ कि जो उन्होंने डीलिंग किया था यूएस डॉलर को फ्रॉम द प्राइस ऑफ़ गोल्ड इट वाज़ नाउ लिंक टू द प्राइस ऑफ़ ऑयल। हम ओके? और ऑयल तो सबको चाहिए। व्हिच मींस इट गारंटीस कि पूरी दुनिया यूएस डॉलर ही यूज़ करेगी। सो दैट एनश्यर्ड कि यूएस डॉलर रिमेंस यू नो अ वैल्यूुएबल करेंसी एंड द एंड द मेजर और ओनली रिजर्व करेंसी। और यूएस ने इसको एनफोर्स किया थ्रू मिलिट्री माइट। बिकॉज़ दे हैव मिलिट्री बेसिस अक्रॉस द वर्ल्ड। सो सब डरते हैं उनसे। सो दे विल ऑल डू व्हाट द यूएस सेस। सो इस प्रकार से उन्होंने इंश्योर किया कि पूरे वर्ल्ड का इकॉनमी वो कंट्रोल करेंगे थ्रू देर करेंसी एंड देयर मिलिट्री। हम हम ओके। कट टू 2026 अ नाउ द डिजिटल रेवोल्यूशन इज़ टेकन ओवर द वर्ल्ड। हम ये भी बात कर रहे हैं कि विल अ क्रिप्टो करेंसी रिप्लेस द पावर ऑफ़ अ डॉलर? अ ग्लोबली एक्सेप्टेड क्रिप्टो करेंसी लाइक मे बी बिटकॉइन। हम्म तो द डॉलर इज़ एट थ्रेट नाउ। डॉलर्स इज़ एट थ्रेट नाउ का मतलब समझाइए। इज द डॉलर एट थ्रेट? इट इज इट इज़ एट थ्रेट। इट इज़ अ थ्रेट। डॉलर एट थ्रेट मतलब क्या? मतलब देयर इज अ हाई चांस। अभी एक हाई चांस है कि मेनी नेशंस डॉलर के अलावा दूसरे किसी करेंसी को यूज करेंगे ट्रांजैक्शंस के लिए। कर रहे हैं। कर रहे हैं। फॉर एग्जांपल सऊदी अरेबिया कुछ सालों से चाइना को ऑयल बेच रहा है। इट इज़ टेकिंग चाइनीस यूआ इंस्टेड ऑफ़ यूएस डॉलर्स। ओके? अ रशिया जो भी ऑयल बेचता है वो उसमें यूएस डॉलर का कोई इन्वॉल्वमेंट नहीं होता है। इंडिया और अ ईरान रूपी रियाल ट्रेड कर रहे थे। इंडिया और रशिया रूपी रूबल ट्रेड कर रहे हैं। सो देयर आर दीज़ थिंग्स दैट आर हैपनिंग कि यू नो डॉलर से ज्यादा मेनी नेशंस आर डवर्सिफाइंग लेट्स से अवे फ्रॉम द डॉलर। लेकिन आज भी डॉलर सबसे मेजर करेंसी है। लेकिन अगर देखिए ये सिचुएशन अभी युद्ध चल रहा है गल्फ में। ओके? कि ईरान ईरान के अगेंस्ट वॉर चल रहा है। अगर हाइपोथेटिकली ईरान इज़ नॉट डिफिटेड एंड द अमेरिकनंस हैव टू विथड्रॉ फ्रॉम द रीजन मिलिटरली तो क्या होगा कि ईरान विल बी द डोमिनेंट पावर इन द रीजन। सबसे शक्तिशाली ईरान रहेगा इस रीजन में। ईरान पूरा नष्ट हो गया होगा तो भी उनके पास इतने ड्रोंस और मिसाइल्स हैं कि दे विल स्टिल बी द मोस्ट पावरफुल नेशन इन द रीजन। फिर क्या होगा कि जो गल्फ नेशंस थे यूएई, सऊदी अरेबिया, कुवैत, कतार, बहरेन एसेटरा जिनको यूएस ने प्रॉमिस किया था कि हम आपकी सुरक्ष रक्षा करेंगे वो अब उनके उनके ऊपर जो रक्षा कवच था वो चला जाएगा। देन दे विल टू डू व्हाटएवर ईरान सेस। और ईरान क्या कहेगा? आप चाइनीस युवान यूज़ कीजिए। दैट इज अ मेजर प्रॉब्लम फॉर द यूएस। इसलिए ट्रंप कैन नॉट अफोर्ड टू लूज़ दिस वॉर। हम दैट्स व्हाई दिस वॉर कैन गो ऑन। एंड नीदर कैन ईरान ईरान के लिए तो लाइफ और एक्सिस्टेंशियल एक्सिस्टेंशियल क्राइसिस ही है। लेकिन यूएस के लिए इट्स अबाउट देर एंपायर इट्स अबाउट द यूएस डॉलर का रेलेवेंस इन द वर्ल्ड व्हेन एन अनस्टपेबल फोर्स मीट्स एन इमूवेबल ऑब्जेक्ट काइंड ऑफ़ नेचुअल जिओपिलिटिकल वर्जन ऑफ़ दैट यस घिसापिटा सवाल पूछूं आपसे। नहीं आई एम नमो बोलिए आप। मैं आपको ये सवाल अब 20 बार पूछ चुका हूं। इज दिस वर्ल्ड वॉर थ्री? इट्स नॉट वर्ल्ड वॉर थ्री येट। इट्स नॉट वर्ल्ड वॉर थ्री येट। लेकिन इफ वी आर इफ अगर ये सब केयरफुल नहीं हुए तो वी आर गोइंग इन द डायरेक्शन। क्यों? अभी ये रीजनल वॉर है। इट इज़ देखिए हम इरा हम इंडिया में बात करते हैं। 2 एंड हाफ फ्रंट वॉर। ईरान इज़ फाइटिंग अ नाइन फ्रंट वॉर राइट नाउ। ओके? इट्स फाइटिंग अ नाइन फ्रंट वॉर। तो ईरान है ऑन ऑन द वन हैंड। एक सुपर पावर है यूएसए। दूसरा मेजर पावर इजराइल एंड ऑल द गल्फ नेशंस आर अगेंस्ट ईरान। ओके? अभी इसमें रशिया और चाइना का इन्वॉल्वमेंट बहुत ही टेंजेंशियल है। चाइना और रशिया ईरान को सेटेलाइट सर्विसेस दे रहे हैं। जीपीएस तो मिल मिलेगा नहीं ईरान को। सो दे आर यूजिंग चाइनीस बेदू और रशियन ग्लोस ग्लोनास और चाइना के जो स्पाई सैटेलाइट्स हैं वो ईरान को यू नो ऑलमोस्ट रियल टाइम सेटेलाइट इमेजरी का डाटा दे रहे हैं। सो देयर इज़ अ एक्सटेंट ऑफ़ चाइनीस एंड रशियन इन्वॉल्वमेंट। लेकिन स्टेट ऑफ हॉर्मोस को ईरान कंट्रोल करके रखा है। एंड देयर इज़ नथिंग द यूएस कैन टू स्टॉप दिस। अगर ये लंबा चला तो ट्रंप यूरोपियन नेशंस को बोलेगा कि आप आके हेल्प मी टू ओपन द स्टेट ऑफ़ ऑलमोस्ट। मतलब दे विल हैव टू सेंड देयर वॉरशिप्स। फिर क्या होता है कि मोर नेशंस आर गेटिंग इनवॉल्वड। यूरोपी इनवॉल्व हो रहा है। अगर यूरोपियन नेशंस इन्वॉल्व हो गए देन मे बी रशिया एंड चाइना विल गेट इन्वॉल्व्ड। अगर पाकिस्तान को यूएस खींच के लाएगा तो पाकिस्तान में गेट इन्वॉल्व इन दिस देन वी आर टॉकिंग अबाउट वर्ल्ड वॉर थ्री कोई टाइमलाइन है आपके दिमाग में अगर ये सब रियलिटी बनी तो फोर वीक्स फोर वीक्स अगर चार हफ्ते तक और इफ फोर फोर मोर वीक्स स्ट्रेट ऑफ ऑलमोस्ट बंद रहेगा ग्लोबल क्राइसिस अगर हुथस को ईरान ने एक्टिवेट किया एंड दे क्लोज द स्ट्रेट ऑफ़ बाबल बांधते बिटवीन द रेड सी एंड द गल्फ ऑफ आदन तो दो चोक चोक पॉइंट्स बंद बंद हो गए तो कहां से तेल आएगा देन देयर विल बी अ मेजर क्राइसिस एंड देन करेंटली हूस का रोल क्या है ये कॉन्फ्लिक्ट में अभी हुथस इतना इनवॉल्वड नहीं है उन्होंने कुछ मिसाइल्स ल्च किए हैं रिसेंटली लेकिन इतना एक्टिव नहीं है अभी बट दे आर देयर दे आर एन एसेट ऑफ ऑफ ईरान हूस कैसे समझाए लाइक मॉडर्न डे पायरेट पार्ट ऑफ मिलिट्री पर पायरेट लाइक मिलिट्री हां देखिए वेस्टर्न मीडिया उनको उनको क्या कहता है हू रेबल्स उनको ईरान सपोर्ट सपोर्ट करता है एंड दे आर फाइटिंग फॉर देयर एक्सिस्टेंस एंड फॉर देर कंट्री। यमेन के ऊपर बहुत बहुत कैटस्ट्रोफिक अटैक्स हुए ओवर डेकेड्स। ओके? लास्ट ईयर हुतीज़ ने स्टेट ऑफ़ बारबल मंदिर बंद किया था। द लास्ट ईयर नहीं। हां 2025 में राइट? 204-25 के आसपास। यूएस लॉन्च्ड 100्स ऑफ एयर स्ट्राइक्स ऑन द हूज़ इन वन ईयर। ओके? एंड द हूज़ वर नॉट नॉट डिफिटेड। बाद में उन्होंने एग्रीमेंट किया कि वी विल ओपन इट फॉर अमेरिका बट नॉट फॉर इजराइल। तो आज भी इजराइली बिप्स कांट गो थ्रू द स्टेट ऑफ बाबल मंदिर एंड द हुथ हैव द फायर पावर टू डिस्ट्रॉय शिप्स। तो इस समय हुथिस एक्टिवेटेड नहीं है इतने। लेकिन अगर जरूरत पड़ी तो ईरान बोलेगा हूस को कि आप भी इसमें हो जाइए इनवॉल्व। एंड देन दे कैन क्लोज द स्टेट ऑफ़ होमोस। अह द स्टेट ऑफ़ बाबल बांदे। तो दो मेजर चोक पॉइंट्स बंद हो जाएंगे। एंड दैट विल बी अ सीरियस क्राइसिस। क्योंकि अगर हॉर्मोस बंद है और भारत लेट्स से रशिया से ऑइल मंगा रहा है इट कम्स थ्रू बाबल मंदि मे बी भारत को एक्सेप्शन मिले कि भाई भारत के की तरफ जा रहा है तो दे विल अलाउ इट टू गो बट कोई गारंटी नहीं है। यू नो यू डोंट नो व्हाट्स गोना हैपन तो ये है अगर चार सप्ताह और चलेगा ये इट्स गोना बी अ ग्लोबल क्राइसिस ऑइल क्राइसिस ऑयल क्राइसिस ऑयल क्राइसिस विल स्काई रॉकेट और यह पहले कभी हुआ 1973 इट हैड हैपेंड यस ओके आम जनता के लिए जिंदगी कैसे बदलेगी महंगाई शॉर्टेजेस देखिए अगर तेल महंगा होता है तो पेट्रोल डीजल केरोसिन एलपीजी प्लास्टिक प्लास्टिक फर्टिलाइजर्स हम हर चीज महंगी होती है। देखिए वन ऑफ द बायप्रो प्रोडक्ट्स ऑफ ऑइल प्रोडक्शन इज फर्टिलाइज़र्स आल्सो हीलियम हीलियम के बिना सेमीकंडक्टर्स नहीं बनते। अगर हीलियम बंद हो गया तो आपके चिप्स बंद हो जाएंगे। फिर आपके फोन के प्राइस बढ़ जाएंगे। आपके लैपटॉप्स के प्राइस बढ़ जाएंगे। जिस भी चीज में चिप होता है उसका प्राइस बढ़ बढ़ जाएगा। अगर आपका पेट्रोल डीजल महंगा है तो आपके टमाटर आपके आलू के प्राइस बढ़ जाएंगे। डबल हो जाएंगे। ट्रिपल हो जाएंगे। आपके वेजिटेबल्स के प्राइस बढ़ जाएंगे। अगर एलपीजी की कमी हो गई तो गवर्नमेंट रेस्टिंग कर देगी एलपीजी का। अगर आपको लेट्स से साल का 10 सिलेंडर मिल रहा था अभी चार मिलेगा या पांच मिलेगा दैट्स अ डिजास्टर फॉर एवरीबॉडी अगर आपको पाइप्ड एलपीजी मिलता है तो आपको अभी यू नो हाइपोथेटिकली मैं बोल रहा हूं होप इट डजंट हैपन लेकिन अगर आपका पाइप्ड एलपीजी है तो मे बी दिन में 3 घंटे मिलेगा तब उसमें जो करना है कर लो फंडामेंटल लॉजिक ये रहता है युद्ध का कि समवन बिकम्स रिच्योर ओ या समवन बिकम्स रिच्योर इदर थ्रू फोर्स और इनडायरेक्टली थ्रू बिजनेसेस रिलेटेड टू वॉर यस दैट इज स्टिल अमेरिका अमेरिका या सब कुछ छानबीन करके फाइनली अमेरिका देखिए अमेरिका इट इज सिंगिंग ऑन द अदर साइड ऑफ़ द प्लनेट वहां पे उनके घर में कुछ भी प्रॉब्लम नहीं है। नोबडी इज़ लॉन्चिंग मिसाइल्स और ड्रोनस देयर वहां पे कुछ भी प्रॉब्लम नहीं है। ऑल द प्रॉब्लम्स आर हियर इन आवर नेबरहुड। सो यूएस के लिए इट्स अ कंफर्टेबल लाइफ एंड दे विल बेनिफिट लॉन्ग टर्म फ्रॉम दिस वॉर। तो फ्यूचर ऑफ़ दिस कॉन्फ्लिक्ट अनप्रिडिक्टेबल है। अनफॉर्चुनेटली। अनप्रिडिक्टबल है। देयर इज़ नो पॉइंट इन गेसिंग वी डोंट इवन नो व्हाट विल हैपन। बिकॉज़ देखिए अगर सीज फायर होता है ऑन ऑन ईरान टर्म्स देन द डॉलर गोज़ डाउन वो तो यूएस को बिल्कुल ही एक्सेप्टेबल नहीं होगा। राइट? अगर देखिए अगर फर्टिलाइजर का शॉर्टेज होता है। उससे क्या होगा कि फूड के प्राइस बढ़ेंगे नहीं। फूड कम हो जाएगा। फ़ूड प्रोडक्शन कम हो जाएगा। अगर ये 6 महीना, एक साल, 2 साल चला तो कई जगह पे फेमिन हो जाएगा। यह भी पॉसिबिलिटी है। मैं नहीं कह रहा हूं कि 100% होगा लेकिन डेफिनेटली इसके इफेक्ट्स होंगे। सो दिस इज गोइंग टू बी अ ग्लोबल सिस्टमिक शॉक सिस्टमिक कैटस्ट्रोफी द लॉन्गर इट लास्ट्स। चावड़ा सर इलुमनाटी क्या चाह रही है यहां? क्या चाह रही है? इलुमनाटी चाह रही है शायद कि इजराइल का टेरिटरी बढ़े। ओके। टू एंड दिस एपिसोड। एक वो टाइमलाइन में हल कैसे लौटते हैं। यह 1990, 2000, 2010 की बात अगर हम करें ईरान से रिलेटेड, नथिंग वर्थ स्पीकिंग अबाउट? अ नथिंग मेजर हैपेंड। यू नो नो कैटस्ट्रोफीस, नो वॉर्स, सेंशंस, क्रशिंग पॉवर्टी, ह्यूमन सफरिंग। तो क्या 30 साल के लिए बस इसी युद्ध के लिए तैयारी कर रहे थे ऑन सम लेवल। ईरान बिल्कुल कर रहा था तैयारी। रेडी? बिल्कुल बिल्कुल। उन्हें पता था कि ये होगा। एसेंशियली वो 46 इयर्स से 47 इयर्स से ट्राई कर रहे होमवर्क कर रहे थे प्रिपरेशन कर रहे थे उनको पता था कि एक दिन ये युद्ध होना है और 2025 में छोटा 12 दिन का युद्ध हुआ था व्हेन इजराइल अटैक्ड ईरान एंड आयरन डोम वाज़ ब्रीच आयरन डोम वाज़ ब्रच्ड लिटिल बिट एंड देन ट्रंप बॉम्ब नतानंस एंड फरदो विथ हि स्टेल्थ बम्बर्स एंड उसने कहा कि एंड ट्रंप ने डिक्लेअर किया था 2025 में नाउ वी हैव परमानेंटली डिस्ट्रयड ईरान न्यूक्लियर कैपेबिलिटीज़ सो ही वास आइदर लाइंग देन और इज लाइन लाइन नाउ बिकॉज़ इन 25 ट्रंप ने डिक्लेअर किया था दुनिया के सामने कि हमने ईरान के न्यूक्लियर कैपेबिलिटीज़ परमानेंटली डिस्ट्रॉय कर दिया है। इट्स ऑल अबाउट सेविंग द डॉलर हम राइट नाउ यार सो दे वांट टू हैव टू थिंग्स थ्री थिंग्स वन इज़ सर्व इजराइल सेकंड कंट्रोल द ऑयल थर्ड सेव द डॉलर एंड ऑल थ्री कैन बी अचीव्ड थ्रू विनिंग दिस वॉर? यस बट हाउ डू विन द वॉर इज़ अ क्वेश्चन? दिस इज़ व्हाई द न्यू थिंग गेट्स फ्लोटेड? देखो या दैट्स अ ग्रेट क्वेश्चन। अगर यूएस ने या इजराइल ने लेट्स से न्यूक्लियर वेपंस यूज़ किए। हम् लेट्स से वर्स्ट केस हॉरेबल सिनेरियो व्हिच विल नेवर होपफुली नेवर हैपेंस। लेट्स से वर्स्ट केस हॉरेबल सिनेरियो उन्होंने 10 टैक्टिकल न्यूक्लियर वेपंस यूज़ किए ऑन ईरान। उससे क्या ईरान हारेगा? नहीं हारेगा। दे विल कीप फाइंडिंग। क्यों? क्योंकि ईरान ने एक ऐसा स्ट्रेटजी किया है व्हिच डीसेंट्रलाइज़ द होल सिस्टम। देखिए अलग-अलग प्रकार के सिस्टम होते हैं। सम आर सेंट्रलाइज सिस्टम्स व्हिच आर फ्रजाइल। आपने किंग को मार दिया। पूरा सिस्टम क्रमबल होता है विद लाइक अ शटरिंग ग्लास। ईरान ने जो सिस्टम बनाया है उसमें द सुप्रीम लीडर इज़ जस्ट अ मैनिफेस्टेशन ऑफ द पावर। ही इज़ नॉट द पावर। आप उसको मार दोगे सिस्टम विल थ्रो अप न्यू सुप्रीम लीडर। द रियल सिस्टम इज द आईआरजीसी। ईरानियन रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर। और उन्होंने क्या किया है? ईरान में 31 स्टेट्स हैं। 31 प्रोविंसेस हैं। उन्होंने हर प्रोविंस में अपना एक लीडरशिप बनाया है। सो ईच प्रोविंस हैज़ इट्स ओन आर्मी, इट्स ओन कमांड एंड कंट्रोल स्ट्रक्चर, इट्स ओन ऑयल एंड गैस, इट्स ओन ड्रोंस, इट्स ओन मिसाइल्स, इट्स ओन आर्मी। अगर आपने एक सिटी को या एक प्रोविंस को नियुक्त किया, द रेस्ट विल कीप फाइटिंग। इट इज अ फोल्ट टॉलरेंट सिस्टम। आपने चार पांच नोट उड़ा दिए, 10 नोट उड़ा दिए। इट विल स्टिल कीप फाइटिंग। ओके? बट ऑल इन ऑल अनप्रिडिक्टेबल फ्यूचर। वेरी मच सर। ओके। थैंक यू एसी सर। यही था आज का पडकास्ट। एनीथिंग यू वांट साइन ऑफ विद? आई वुड जस्ट लाइक टू साइन ऑफ विद। आई होप दिस एंड्स एस सून एस पॉसिबल। यह जितना लंबा चलेगा उतना पूरी दुनिया के लिए बुरा सिचुएशन होगा। द लॉन्गर इट लास्ट द वर्स्ट इट विल बी फॉर द वर्ल्ड। आई होप इट एंड्स सून। ओके। केसी सर धन्यवाद एंड जय हिंद जय हिंद धन्यवाद हो

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