श्री रूप गोस्वामी कृत नामाष्टकं की हिन्दी व्याख्या (१३/अगस्त/२०२३) — Hindi Explanation of Nāmāṣṭakam

Hari Parshad Das8,124 words

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आरंभ करना होगा पर मंगलाचरण से पहले मैं धन्यवाद देना चाहूंगा भूपेश प्रभु को और रोहिणी माताजी को और दूर्वा जिनका यह घर है और उन्होंने आज अपने घर के द्वारा हम सभी भक्तों के लिए यहां पर देख करके घर के द्वारा खुला हैं उसके करण आज हम यहां पर बहुत अच्छा कार्यक्रम रख पे हैं और ये घर अभी अभी जो है नया क्या कर रहा है कुछ समय पहले ही किया गया है आप यहां पर सब जगह पेंटिंग्स है और अच्छा डेकोरेशन आप जो सभी लोग यहां पर आए हैं आप सबको भी बहुत-बहुत धन्यवाद पुत्र केवल जीवित रहे तो पिता के द्वारा कमाई हुई संपत्ति पुत्र को केवल जीवित रहने मंत्र से मिल जाति है और कुछ नहीं करना पड़ता है दिन भाव से राहत है और जीवन में जो कुछ अच्छा बड़ा हो उसको भगवान का भगवान की अनुकंपा मां के जीता है केवल केवल इस तरह से जीता है और कुछ नहीं करता मुक्ति प्रदेश है उसको मुक्ति दाएं भाग मिलने वाले हैं आप समझ रहे हैं क्या मिलने वाले मुख्य जीवित रहना है इस तरह से की जो अच्छा बड़ा हो रहा है उसको भगवान की अनुकंपा मानना है और भगवान को अपने हृदय से वाणी से शरीर से प्रणाम करते हैं इस प्रकार जीवित रहती है मुक्ति पोज़ डे था इस प्रकार से जो जीता है उसको मुक्ति रूपी फल डे भाग में मिलता है अभी दाएं भाग आप समझ गए क्या होता है पिता के बाद पुत्र को जो संपत्ति मिलती है उसको क्या कहते हैं इसे आज आपको दाएं भाग यहां पर मिला है की पिता ही पुत्र से जीवित अवस्था तो बहुत-बहुत धन्यवाद आप सभी का आप सभी आज यहां पर उपस्थित हुए और आज हम श्री रूप गोस्वामी के नमस्ते कम पर चर्चा करने से धैर्य जो प्रथम बार यहां पर आए हैं बहुत लोग उन सबका मैं स्वागत करना चाहूंगा विशेष रूप से प्रभु जी आपका क्या शुभ नाम है सबके सत्यवान या सत्यवान स्वागत प्रोग्राम करने से पहले मंगलाचरण करना नितांत आवश्यक तो बिना मंगलाचरण कोई कार्यक्रम शिष्ट जनों ने आरंभ नहीं करना चाहिए इसीलिए सबसे पहले मंगलाचरण से हम आरंभ करते आप जानते ही होंगे तो जो लोग जानते हैं वो मेरे साथ जा सकते हैं ठीक है सलाम सलाम [संगीत] वंदे मातरम [संगीत] प्राचार्य ने विशेष शून्यवादी पक्षत्र रिश्ता प्रेम प्रदाय कृष्णाय कृष्णा चैतन्य है कृष्णा करुणा सिंधु पिता [संगीत] [संगीत] हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा हरे हरे राम हरे राम राम हरे हरे तो श्री रूप गोस्वामी जी यह संप्रदाय के जो भक्ति रस हैं उसके प्रथम आचार्य हुए हैं संप्रदाय गोड़िए वैष्णव संप्रदाय है इसमें भक्ति रस की जो विवेचना हुई भक्ति रस का जो स्वरूप श्री रूप गोस्वामी जी द्वारा प्रस्तुत किया गया वह आज से पहले किसी भी आचार्य के द्वारा भक्ति रस का यह स्वरूप प्रस्तुत नहीं किया गया और इससे पहले भक्ति रस की चर्चा बहुत सारे आचार्य जी ने अपने श्रीमद् भागवत की टीका में थोड़ी चर्चा भक्ति के 5 मुख्य रसों का विवेचन किया उसमें से सर्वप्रथम है शांत रस उसके बाद है उसके बाद है प्रीत भक्ति अब श्री रूप गोस्वामी जी ने इसके अतिरिक्त इसके अलावा भी और ग्रंथ लिखे जिम एक ग्रंथ था प्रत्यय वाली पिछली बार जो रंग प्रभु जी के घर पे प्रवचन हुआ वो पद्यावली के ऊपर हुआ था और पद्यावली ये संकलन है संकलन मतलब इसको इंग्लिश में कहते हैं कलेक्शन या एंथॉलजी कहते हैं संकलन है ये इसमें श्री रूप गोस्वामी जी द्वारा लिखे हुए श्लोक भौतिक कम है श्री रूप गोस्वामी जी से पहले जो बड़े-बड़े भक्ति हो गए हैं उनके द्वारा रचित श्लोक पद्य इत्यादि उसमें सिलेक्ट मतलब उसमें सिलेक्ट करके संकट किया गए उसमें क्लिक किया गए हैं और इस ग्रंथ का नाम है पर्यावरण पिछली बार देखें थे जो आप सभी लोग जो आए थे वहां पर इसके अलावा का मतलब क्या होता है स्तुति को क्या कहते हैं भाग्य के मध्य से उसको क्या कहते हैं माला जहां पुष्पों को सूतरिक्त किया जाता है उसको क्या कहते हैं सत्व हो गए पुष्प और उसकी माला सत्व माला इसमें बहुत सारे गीत बहुत सारे अष्टक श्री रूप गोस्वामी जी द्वारा के अंत में एक अष्टम आता है जिसका नाम है नमाज का यह दोस्तों माला के सारे के सारे आज तक संस्करण हुए हैं एडिशन छापे हैं उसमें सबसे अंत में श्री नमष्टकम जो है प्राय है दिखाई देता है तो मैंने दो संस्करण जो है इसके देखें हैं बंगाली में एक संस्करण हैं बंगाली लिपि में छाप हुआ और एक देवनागरी लिपि में छाप हुआ दोनों में श्री का बलदेव विद्या भूषण जी की बहुत अच्छी बात है वह हमें समझ में नहीं आते आपके हाथ में जो है केवल नमष्टकम आरंभ करने से पहले नमष्टकम का अर्थ क्या है तो नाम संबंधी अष्टम भगवान के नाम से संबंधित अष्टक अष्टक इसको कहते हैं आठ के जोड़े को क्या कहते हैं तो यह आठ का जोड़ा है आठ क्या है आठ पद्य है यानी आठ श्लोक है अब हमने यह सुना है अभिन्नत्वन नाम नेमिन हो की भगवान के नाम में और भगवान में कोई भी भेद नहीं है है तो भगवान का नाम और भगवान एक ही है ऐसा सुना गया है अच्छा एक ही है तो फिर उसको अलग संज्ञा कर दी अगर भगवान का नाम और भगवान एक ही है तो इसको नाम यह अलग संज्ञा क्यों दी गई अष्टक का देना चाहिए पर यहां पर क्या नाम दिया गया है की भगवान के नाम में और भगवान ने भेजा भेद है क्या है इधर है मतलब अवैध तो है ही लेकिन फिर भी है अच्छा भेद कैसे हैं और भेद कैसे हैं इसका विवेचन आज थोड़ा किया जाएगा लेकिन यह बात जान लेना चाहिए की भगवान के नाम में और भगवान में मुख्य रूप से सफेद क्या है मुख्य रूप से सफेद मतलब क्या होता है जो भगवान वो साड़ी शक्तियां भगवान के नाम में भी हैं श्रीमद् भागवत में भगवान ने एक बात बोली है शब्द ब्रह्मा परम ब्रह्मा महेश शाश्वती तनु मेरे दो शाश्वत शरीर है भगवान कहते हैं श्रीमद् भागवत पहले शरीर का नाम है शब्द ब्रह्मा क्या नाम है शब्द दूसरे शरीर का नाम है पाव पर ये दोनों शाश्वती तनु ये मेरे शाश्वत शरीर है मतलब इनका कोई आदि नहीं था और इनका कोई अंतर नहीं है इसको शब्द ब्रह्मा कहते हैं भगवान के नाम को अब समझ रहे हैं वेदों को कौन सा ब्रह्मा कहते हैं जो शब्द रूप में प्रकट होता है वो होता है उसको कौन सा ब्रह्मा कहते हैं परिणाम कृष्णा कल्की यह सब उच्चारण करते समय शब्द ब्रह्म में और आपके मां में स्पोर्ट किसका हो रहा है मतलब आकृति किसकी बन रही है और ब्रह्म की आकृति बन रही है ये बात है तो ये दोनों जो शब्द उच्चारण किया गया ये भी भगवान का शरीर है और जो शरीर है भगवान का आकृति है वो भी तो भगवान का शरीर है दोनों भगवान के शाश्वत शरीर कैसे शरीर है किसी का आरंभ नहीं है किसी शरीर का किसी शरीफ का अंत नहीं है की कलयुग में भगवान स्वयं रूप से यद्यपि हमारे सामने प्रकट ना हो क्योंकि भगवान की लीला द्वापर युग में समाप्त हो गई कलयुग में भगवान का कोई अवतार है क्या काली काली ब्रह्म पर ब्रह्मा का कोई होता है कलयुग चेतन मतलब इनका कोई उल्लेख स्पष्ट रूप से शास्त्रों में नहीं है प्रहलाद महाराष्ट्र शासन में कहते हैं छन्नाह कलाओं या ढाबा हुआ त्रयोदा सातवें स्थान में भगवान नरसिंह में देव को कहते हैं छम्मा का लो कलयुग में आप चुपके रहते हो इसलिए आपका एक नाम है ट्री युग क्या नाम है आपका मतलब जो कितने युगों में प्रकट होते हैं चौथ युग में चुप के प्रकट होते हैं इसलिए उसको गी यो में भगवान का स्पष्ट रूप से कोई अवतार दिखाइए दो मुख्य आते हैं एक है श्रीमद् भागवत इत्यादि शास्त्र में ये भी शब्द ब्रह्मा है और दूसरा है उन शास्त्रों में पे जान वाले भगवान के सारे नाम क्योंकि नाम हमें कहां से प्राप्त हुए आज हम बोलते हैं हरे कृष्णा महामंत्र बोलते हैं हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा हरे हरे राम हरे राम राम हरे ये नाम हमें कहां से प्राप्त हुआ का अर्थ है समस्त वैदिक साहित्य जो है उसको कौन सा ब्रह्मा कहते हैं जिसका नाम है नाम इसका नाम ही क्या है भगवान श्री कृष्णा के विविध नाम अब यह शब्द ब्रह्मा जो है यह बहुत ही विशेष इसलिए है क्योंकि इस शब्द ब्रह्म का उच्चारण करने से कलयुग में जीवन का निस्तारण होता है और इसी को योग धर्म आना गया है तो नाम के उच्चारण से कलयुग में जीवन को सर्वोत्कृष्ट श्रेया की प्रताप होती है इसीलिए पूरे शब्द ब्रह्मा में से एक विशेष कोटी का शब्द ब्रह्म निकालकर उसे पर अष्टम लिखा गया है कौन सा अष्टम है वो नमष्टक तो नाम यह शब्द ब्रह्मा है क्योंकि यह वेदों का ही तो है पर ये उसमें भी एक विशेष कोटी में है अब कौन सी विशेष कोटी में है ये श्री रूप गोस्वामी जी भी पहले श्लोक में बताएंगे ये वो बताने से पहले ये तो हमने का दिया की भगवान के नाम में और भगवान में कोई भी नहीं है तो जैसे श्री कृष्णा जो है वो हमेशा श्री वृंदावन में आठ मुख्य गोपियों से परिवार इसमें हर मध्य लिया स्वामी ने बनाया हर पाल जिसको इंग्लिश में हम क्या कहते हैं मी तो इस प्रकार नाम कितने चांदो से गिरा हुआ है वह वसंत मलिक चांद है अब हर चांद को गाना भी तो आना चाहिए है की नहीं तो बस बोल के नहीं होगा आप समझ रहे हैं तो उसको गाने भी आना चाहिए अब गाना जो है ये किसी किताब से नहीं सिख सकते हैं क्योंकि किताबें में धूल नहीं है गाना जो है इसको किसी जीवित परंपरा से वेद परंपरा से सीखना पड़ता है इसलिए तो भगवान होते बेड़ा नाम समूह वे दोस्तों सामवेद यहां पे गीत होता है एक पुस्तक की विद्या नहीं है इसको परंपरा से सीखना पड़ता है तो आज हम इसको जाएंगे आप मेरे पीछे पीछे करेगा प्रथम जो श्लोक है उसका चांद है वसंत मलिक वसंत मलिक यह अल्प प्रयोग से ज्यादा इसका प्रयोग तो स्वामी जी ने इसका प्रयोग किया है यहां पे मैं इसको गांव का मेरे पीछे पीछे [संगीत] इतनी रात जब अभी मुक्त खुला रुपए का समागम हरनाम श्रेया वसंत मलिक चांद में पहले जो है इसको मैं समझाऊंगा देखिए पहले जो दो इसके चरण हैं पहले दो लाइन जो है वह एक ही शब्द है देखिए पहले पूरा जो लाइन आपको देवनागरी में दिखे रहा है पूरा पहले लाइन तो मिथिला श्रुति निखिल कहते हैं समस्त श्रुति किसको कहते हैं समस्त वेदों के मौली मौली किसको कहते हैं शिरोभास को क्या कहते हैं चंद्रमौली नाम सुना है अपने भगवान चंद्र जिसके किस पे है उसको क्या कहते हैं चंद्रमा तो निखिल श्रुति मौली सभी श्रुतियों के शिरोग में रतन माला है क्या है रतन माला श्रुति होती है स्त्री आभूषण के साथ रहती है या बिना आभूषण के रहती है सभी वेद क्या है उन मालाओं के रतन से क्या निकाल रही है प्रकाश प्रकाश निकाल रहा है निरंजन मालूम है जो रखना है उन रतन के ब्यूटी से प्रकाश से नीरज पद पंप जानता जिनके चरण कमल के अंत में चरण कमल चरणों का अंत भाग क्या किसको कहते हैं और वह लाखों का भी एक अंतिम भाग होता है जो अर्थ चंद्राकर दिखाई देता है समझ में इसको कहते हैं तो भगवान का नाम भगवान से भिन्न है या भिन्न है तो भगवान के नाम का भी भगवान के रूप जैसा ही रूप यहां पर बोला गया है तो भगवान के रूप जैसा ही उसका रूप है तो जैसे भगवान के चरण होते हैं वैसे श्री नाम के भी क्या है उन चरणों के अंत में क्या होता है वह किस प्रकार से प्रकाशित हो रहा है जो समस्त श्रूतों के सर पर रखें हुए रखना है उन रतन के जगमगाहट से वो प्रकाशित होता है आप समझ लेंगे इसका मतलब क्या है इसका गन अर्थ भी है श्रुति कहते हैं वेद को क्या कहते हैं वेद का शिशु भाग वेद का सबसे ऊपरी भाग क्या कहा गया है वेद का सबसे ऊपरी भाग कहते हैं वेदांत वेदों का जो अंत होता है उसको क्या कहते हैं सभी वेदों में वेदांत किसकी तरह है उसे वेदांत रूपी रतन से उपनिषद अप रतन से जो ज्योति निकाल रही है भगवान के यह बातें आप समझ रहे हैं तो यहां पर दो चित्र एक साथ है एक तो ब्रह्मा जी के लोक में जो सुरतिया रहती है वो तो स्त्री रूप में विराजमान है वो स्त्री रूप में विराजमान है तो उन स्त्रियों के सर पर क्या होता है प्रकाश निकलता है उसे प्रकाश से पूजित है भगवान का श्री गिर रहा यह हुआ भगवान का परम ब्रह्मा अभी शब्द ब्रह्मा कैसे पूजित है उसका जो सबसे ऊपरी भाग है वो है मैदान और उसे वेदांत को एक रतन की तरह है उसे रतन में से जो स्थितियां निकाल रही हैं कौन भगवान का नाम परिषद का वाक्य है भगवान श्री कृष्णा के नाम की तो इस तरह से बताया पूर्वक संबोधन करने में प्रयुक्त होता है इस पूर्वक संबोधन करने में सर्वनाम शुरुआत क्योंकि साधारण संबोधन होता है या अरे ये साधारण संबोधन पर आही ये जो संबोधन है ये करुणा पूर्वक संबोधन है कृष्णा नाम मुक्तक कलर उपास्य मानव मुक्त लोगों के जो कल हैं कल किसको कहते हैं संप्रदाय तो जो सभी मुख्य लोग हैं उनका जो यदि एक संप्रदाय बनाए गए उन सभी मुक्त लोगों के संप्रदाय द्वारा उपवास से मानव है श्री कृष्णा नाम तो फिर हरि नाम बोलेगा आप क्या चाहते हो यह सब गुणगान करके आप क्या चाहते हो सभी तरह समझना है चाहे और से मैं तुम्हारा क्या लेट हूं आश्रय लेट हूं परीक्षा का अर्थ होता है सभी दिशाओं से दिशाएं कितनी होती है 10 दिशा होती है ना लेकिन उत्तर पूर्व दक्षिण पश्चिम बोलते हैं उसके बाद ये भी दो दिशाएं थी तो ये कितने दिशा होती है की सारे मुक्त लोक जो है उपासना करते हैं तो इसका प्रमाण देते हुए श्री बलदेव विद्या भूषण जी श्रीमद् भागवत पंकज लोक अवित करते हैं कौन सा श्लोक है जिसके पास मोबाइल फोन में रहेगा वह देख सकता है द्वितीय स्कंद में सेकंड कंटक फर्स्ट चैप्टर प्रथम अध्याय 11 वर्ष लोग मैं गाऊंगा सुनकर मेरे पीछे पीछे गाइएगा एक तन निर्विद्या मानना शैतान [संगीत] सुखदेव गोस्वामी जी परीक्षित महाराज से कहते हैं ऐसे लोगों के लिए इच्छा रखते हैं क्या इच्छा रखते हैं जहां कोई भी भाई नहीं होता ऐसे योगिया के लिए निर्णय कम यह निर्णय कर लिया गया है सबसे अच्छा श्रेया कर क्या है एक मुख्य धर्म है कलयुग का योगदान एक मुख्य युद्ध में और एक धर्म मुख्य योग धर्म क्या है तो कलयुग में दान का बहुत महत्व है पहले के युगों में तपस्या यज्ञ अर्चना की सेवा का महत्व था कलयुग में ये सब आसानी से संभव नहीं है तो कलियुग में दो मुख्य एक मुख्य धर्म में मुख्य धर्म कौन सा है और गोवर्धन कौन सा है धर्म धर्म इसका सब दम निकाल गया अच्छी सब्जी औषधि नहीं देती है गांव में शायद अभी भी थोड़े अच्छे स्वाद वाली सब्जी मिलती होगी पर यहां तो अपेक्षा रखना बेवकूफी होगी काली महिमा [हंसी] जाता है हां नाम जाप कर लेना चाहिए है की नहीं आप नाम जब करते हो करना चाहिए [हंसी] तो यहां पर उसे प्रकार के नाम की बात नहीं की गई यहां पर जी नाम की बात की है स्नेहा साम्यूकना कैसा नाम है स्नेहा संयुक्त नाम मतलब क्या है जिसमें भगवान के प्रति मा भगवान हमारे हैं जो हमारा है उसका नाम बोलने में कैसा बोझ हम समझ रहे हैं आपके घर पे यदि कोई आपका प्रिया बंधु राहत है उसका नाम आप दिन में कई सो बार बोलते हो वो भविष्यवाणी के लेते हो या स्नेहा पूर्वक लेते हो तो वो जो नाम है उसको अपनी इच्छा से स्नेहा पूर्वक लेना चाहिए ठीक है अच्छा आपको ये बोलेगा मेरे मुझे अलग नाम पसंद है भगवान का भगवान का मुख्य नाम होना चाहिए श्री कृष्णा की लीला से संबंधित नाम होना चाहिए आप एक-एक नाम आप बोलिएगा ठीक है आपको कौन सा भगवान का नाम पसंद है आपको कौन सा नाम पसंद है तो लोगों ने अपने मां का सत्य बताएं आपको कौन सा नाम जाप करना चाहिए [हंसी] इसको हरि भक्ति गिलास में कहा गया है अभिरुचि मतलब क्या अभी मतलब सभी प्रकार से जिसमें आपकी रुचि है वो आपका कौन सा नाम होता है अभिजीत नाम होता है आपका अभिरुचि नाम कौन सा है ये पहले निर्धारित कर लीजिए और तट सर्वाधियोजे उसको सभी जगह पे लगा दो जैसे मैं एक बार जब मैं आई व्यू में था लेकिन सभी लोग [संगीत] डी सर्वर स्टेशन उसे सभी जगह पे उसको इस्तेमाल कर लो तो जब भी आपके पास अवकाश हो जब आपका मां सुखी हो उसे समय इस नाम का अनुकीर्तन करते रहे क्या करते रहना है धनु की आपका कोई बंधन तो नहीं है 16 माला तो आपने कर लिया उसके बाद तो आप फ्री है फिर आपका कोई बांदा नहीं है फिर आप कौन सा नाम का कीर्तन कर सकता अभी उचित नाम का चित्र क्वेश्चन नाम का कीर्तन उनकी विशेष नाम का आपको करना चाहिए ठीक है इस तरह से तो ये भावना सिर्फ स्नेहा संयुक्त नाम की बात है वास्तव में जो 16 वाला है उसको भी अभी रुचि से लेना चाहिए पर उसके लिए यदि थोड़ा समय लगेगा फिर भी इस समय हमें प्रयास करना चाहिए की कुछ नाम तो हमें अभी रुचि से लेना ही चाहिए भूषण कहते हैं कथन समझा दूंगा दूसरा शोक रखते भूषण जी ने हमें बताएं की पहले श्लोक में तो हरि नाम आपका आश्चर्य लेट हूं यह बोल दिया गया है तो हरि नाम बोलेगा की भैया जो पाप से गिरा हुआ है उसको मैं आश्चर्य क्यों डन तो उसकी उत्तर में चांद में है कौन से चांद में है [संगीत] [संगीत] तो श्री रूप गोस्वामी कहते हैं क्या लगा देते हैं संस्कृत में नाम है यह भाग है रूप धैर्य से शब्द बनते हैं तीन शब्द बनते हैं और आप समस्त लोगों को आनंद प्रधान करते हो आप सर्वोच्च अक्षरों से बने उनसे यदि आपको अंदर पूर्वक भी मनागुड़ी रितम थोड़ा भी उच्चारण किया तो आपने यह समस्या उग्र टॉप पटलन सारे उग्र पापोन की श्रेणी को नष्ट कर डॉग थोड़ा भी आपका उच्चारण अंदर से भी थोड़ा भी उच्चारण किया हमको मालूम है आप बड़ा माने वालों में से नहीं पतली कहते हैं श्रेणी को सभी तपो के श्रेणी को सभी तप के सीरीज को आप नष्ट रहस्य मालूम है है भगवान [संगीत] सब चीज में हम अंग्रेजी में राष्ट्रभाषा है ये सब शब्दों का प्रयोग हमें करना पर्यायवाची हिंदी के किसमे ढूंढने चाहिए हिंदी में ही ढूंढने में तो हिंदी के पर्यायवाची इंग्लिश में ढूंढने जाएंगे तो फिर ठीक नहीं है अनदर पूर्वक अहोभाग्य पूर्वक भी यदि आपको ग्रहण किया जाए तो भी आप समस्त पापा को नष्ट कर देते हो ये हमें मालूम है बोलते हैं संकेत या परी हास्य आदि नवी अच्छा एक श्लोक है श्रीमद् भागवत में जिसके पास फोन है वो निकाल सकता है [संगीत] संकेत पूर्वक मतलब क्या होता है इसको कहते हैं क्या नाम कहते हैं इसको सांप जैसे अजबीन ने बोला था नारायण पर वो किसको इंगित कर रहा था अपने पुत्र को इंगित कर रहा था भगवान को इंगित कर रहा था क्या वो पर अजामिल की समस्त पाप राशि उसे सांकेतिक नाम से नष्ट हुई की नहीं हुई और समझ ले अंबा किसी संगीत के मध्य से बोल देना समझ में ए रहा है जब भगवान के नाम का ग्रहण किया जाता है तो अश्विन मतलब अनंत पापोन का हरण करने वाला होता है इसको कहते हैं अंदर पूर्वक नाम है कैसा नाम लेना है अच्छा कहां तक के पापोन को नष्ट करता है की उग्रता का नाम प्रियंका नाम पटेल किसको कहते हैं सूक्ष्म शरीर किसको कहते हैं तो एक होता है स्थल शरीर स्थल शरीर जो हमें दृश्य मां हो रहा है आंखों से दिखे रहा है उसको कौन सा शरीर कहते हैं सूर्य शरीर इस सूर्य शरीर से के अलावा एक और शरीर राहत है वो कहां से शरीर होता है सूक्ष्म स्कूल शरीर माता पिता के द्वारा दिया हुआ होता है सूक्ष्म शरीर माता पिता का दिया हुआ है ये हमारी पूर्व वासनाओं से प्रकट होता है अब समझ रहे हो इस शरीर को एफ से शरीर कहते हैं तो सूक्ष्म शरीर में क्या-क्या है पंचकर्म इंद्रियों की वृद्धि पांच ज्ञानेंद्रिय की वृद्धि उसके बाद पांच प्राण और कर मां की वृद्धि ठीक है इनकी जो वृत्ति है यह सब है कर अंतरण के व्यक्ति अंतरण के कर व्यक्ति कौन सी होती है मेरे पीछे है मां मां बुद्धि अहंकार चिंतन ये कर अंतर करण की वृद्धि मैन क्या करता है संकल्प विकल्प क्या करता है संकल्प विकल्प दुनिया में बहुत साड़ी चीज दिखाई दे रही है ये गाड़ी खरीदा वो गाड़ी कर दो भैया संकल्प विकल्प ये कम किसका है बुद्धि बुद्धि मतलब जो निश्चय करती है मैं यही गाड़ी करूंगा लाल रंग समझना तो ये कम किसका होता है ये किसका कम होता है [हंसी] इसका नाम होता है यहां पे सारे संचित कर्म सारे स्टोर हैं सारे यहां पे होते संचित करो संचित करके उसको संचित इसलिए कहते हैं तो सारे संचित कर्म जो है अच्छे से धूल जाते हैं पूरा जो है उसको साफ कर दिया जाता है नमाज से किस हो जाता है यह सिद्धांत परिभाषा है कर प्रकार इस लोक नंबर वापस दूसरा अध्याय 14 वर्ष लोग ठीक है अब अगले श्लोक में हम जाते हैं इसका इसकी पूर्व भूमिका देते हुए कहते हैं क्योंकि केवल पापोन को जलन से हमारा जो है प्रयोजन सिद्ध नहीं होगा मां लीजिए आज आपके सारे पाप चल गए मां लीजिए भगवान करें आपका प्रयोजन सिद्ध हो गया क्या इसको लिंग शरीर कहते हैं उसके अलावा एक तीसरा शरीर होता है जिसको कहते हैं करण देगा क्या कहते हैं करण शरीर होता है ये करण शरीर जो है यह सबसे सूक्ष्मतम शरीर होता है इस ये शरीर केवल अविद्या का बना होता है किसका बना होता है ये विद्या इसमें कर्मकार नियम होते हैं ये किसका बना होता है केवल अविद्या के करण मनुष्य जीव कर्म करता है कर्म के करण उसको डे प्राप्त है समझना के लिए लिंक है अविद्या के करण जीव क्या करता है कर्म के करण उसको क्या प्राप्त होता है तो डे का करण क्या है कर्म का करण क्या है और अविद्या कौन से शरीर में होती है होते हैं और सूक्ष्म शरीर में जो कर्म है उसका नस तो नमाज से हो जाएगा लेकिन करण शरीर अभी भी बना हुआ है और करण शरीर किस चीज का बना हुआ होता है उसका कोई स्वरूप नहीं होता वो किसकी तरह होता है उसका नस होना आवश्यक है तो मामा भाष्य पाप तो नष्ट हो जाएंगे मतलब स्कूल और सूक्ष्म शरीर का तो कम हो जाएगा लेकिन एक शरीर अभी भी बैक जाता है कौन से शरीर बैक जाता है वह करण शरीर किसका बना हुआ है उसका नस होने के लिए प्रेम चाहिए आप समझ सकते हैं भगवान के साथ संबंध विद्या क्वेश्चन बोलते हैं ये नाम आप हाथ से हो जाएगा इससे हो जाएगा और यह अगले साल ये सिद्धांत गलत हो जाएगा अगर हम यह कहे की नमाज से प्रेम प्राप्त हो जाएगा प्रेम प्राप्त करने की दिशा दिखे जाएगी भक्ति में प्रवेश हो जाएगी भक्ति में क्या हो जाएगा प्रवेश हो जाएगा कौन से नाम से प्राप्त होगा वहां पर आप जो है उसके अंदर जो है आप प्रवेश हो जाएगा ठीक है तो अगला जो चांद है शिखरिणी हां अगला चांद क्या है जगन्नाथ अष्टम किस कहते हैं वैसे मैं गाऊंगा मेरे पीछे पीछे आइएगा [संगीत] तब भाग [संगीत] [संगीत] [संगीत] [संगीत] अरे भगवती [संगीत] होना चाहिए की महाराष्ट्र में जो सर ने उपनाम है सबने हैं यह चांद के अध्याय आचार्य जो है मैन जाते हैं इस प्रकार से चांदो के नाम रखें हैं की वह उसे चांद में वो नाम बैठना चाहिए श्री रूप गोस्वामी कहते हैं याद आभासों की जिसका आभास भी किसका आभास नाम का अभज या दाभाशो की जी नाम का आभास भी आभास मतलब क्या कितने प्रकार के होते हैं इसका आभास भी क्या कर देता है उद्यान उद्दीप्त होते होते उद्यान मतलब इस समय उदित हो रहा है पूरा उदित नहीं हुआ है इस समय उदय और है अब समझ रहे हैं इसका अर्थ क्या है देखिए जैसे सूर्य उदय हो रहा है सूर्य उदा ए उद्यान शब्द में संस्कृत का सत्र प्रत्यय लगाया गया है इसका मतलब इस समय थोड़ी सी उसकी छाता दिखाई क्या कर देता है कव्वाली का जाता है भौतिक संसार जो है भव्वा कहते हैं उसको क्या कहते हैं अंधेरे को और विभव कहते संपादक वैभव इसको कहते हैं संपत्ति को तो इस संसार के अंधकार रूपी संपत्ति को जो उदित होते ही का जाता है आप समझ रहे हैं इसका मतलब नाम की तुलना किस की जा रही है यहां पर क्या होता है अगले लाइन में बोलते हैं दृश्य हम यहां पर जो आध्यात्मिक जगत में जो अंधे हैं वह आंख के अंधे नहीं है वह तत्व के अंदर इसके अंदर है वह तत्व के जो अंधे हैं उनको दृश्य अपनी दिशा दी उनको दृष्टि भी प्रधान करता है जो तत्व से अंधा है वह आपके आवास मंत्र से उसका अंधापन मिट्टी जाता है की भाई क्रिसमस तू भगवान है की नहीं तो इसीलिए ये नाम जस्टर जगती अब ऐसा कौन है वह जान कौन सा व्यक्ति है की उड़ता ऊंचे स्वर में इस जगत में आपका महान नहीं करेगा भगवान नाम तने तरणी कहते हैं सूर्य को किसको कहते हैं तो भगवान नाम को सीधा सीधा किस तुलना कर दिया है भगवान नाम रूपी सूर्य ऐसा कौन सा है व्यक्ति कृति कौन सा सौभाग्यशाली बुद्धिमान व्यक्ति है तो निर्वतम की आपके महिमा जोर-जोर से खाने को यह महिमा प्रभावती कौन होगा जो आपके महिमा नहीं कहना चाहेगा ये काकू प्रश्न मतलब कौन है जो नहीं करना चाहिए मतलब सभी करना चाहिए अब समझ रहे हैं इसको कहते हैं नष्ट हो जाएगा लेकिन हमने शास्त्रों में सुना है की सब कुछ नष्ट हो जान के बाद भी प्रकार का कर्म है जो नष्ट नहीं होता वो कौन सा कर्म कहलाए जाता है तीन मुख्य प्रकार कौन-कौन से हैं बोलूंगा मेरे पीछे पीछे पड़ा हुआ है वह अच्छा बड़ा कर्म जो इतना बड़ा है की अनंत जनों से हमारे पीछे लगा हुआ है उसे कर्म को संचित कर्म के थे कौन सा कर्म कहते हैं इस जन्म में फल नहीं देने वाला है वो कर्म कौन से जनों में फल देगा अगले आने वाले किसी पशु का जन्म मिल गया तो वहां जो अच्छा बड़ा मिलेगा वो सब फल मिलेगा हमको ठीक है अच्छा इस जन्म में जब हम माता की कुक्षी में हमने प्रवेश किया तब से लेकर अंतिम श्वास तक इस जन्म में जो हमको मिलने वाला है और निश्चित मिलने वाला है जिसका आरंभ हो चुका है जो अब जो हो चुका है उसे कर्म को कौन सा कर्म कहते हैं ना अरबड़ा अच्छी तरह से जिसका आरंभ हो चुका है उसे कर को कौन सा करण कहते हैं सबसे पहले क्या मिलता है वो होता है सबसे पहले मिलती है जाति क्या मिलती है उधर ही निर्धारित हो जाता है की तुम्हारी जाति है सबसे पहले क्या मिलती है जाति बदली जाति है उसको क्या कहते हैं जाति है मतलब आपका जो वर्ण है जी वर्ण में आपको उत्पन्न हुआ है ब्राह्मण क्षत्रिय में भी आप उत्पन्न है जाति आपके निर्धारित हो जाते हैं माता की में प्रवेश करते क्या उसको बदला जा सकता है उन कर्मों को कौन सा धर्म कहते हैं भागवत गीता में 15वें अध्याय परमाणु बंदी नहीं कर्मों का बंधन बंसी लोक में लगता है अन्य योनियों में केवल भोग होता है तो अन्य भोग योनिया है मनुष्य यानी करने की ठीक है यह सिद्धांत समझ लेना चाहिए करण कितने प्रकार के होते हैं तीन पहले कौन सा तीसरा कौन सा क्रियामान का फल संचित में जाता है कुछ-कुछ इसी जन्म में मिल सकता है जैसे छात्र पढ़ाई ना करें उसका फल अगले जन्म में मिलेगा [संगीत] भगवान को अर्पण है तो उसका फल नहीं लगेगा इसका उदाहरण आचार्य ने पहले के आचार्य ने दिया है जैसे कोई धनुर्धारी होता है वह जंगल में क्या कर रहा है जाके अपने पीछे से तीर निकलता है और तीर निकाल के और धनुष पर बिठाकर उसको छोड़ देता है और वह फिर जाकर निशाने पे लगता है उसके बाद बैठकर वह नया तीर बनाता है लकड़ी से आप समझ में ए रहा है इस उदाहरण इस दृष्टांत में जो पीछे रखें हुए हैं या फिर चला जाएगा तो यह तीन प्रकार के कर्म इस तरह से बताएं इसमें से संचित तो जल दिया और प्रियामणि करेगा नहीं लेकिन [संगीत] श्री बलदेव विद्या भूषण कहते हैं जो नाम के प्रति एक निशीथ हो जाते हैं क्या हो जाते हैं ठीक है जिनको भगवान नाम में रुचि उत्पन्न हो जाति है नाम उनका प्रारंभ कर्म विनाश कर देता है इसका प्रमाण श्री रूप को स्वामीजी मेरे पीछे पीछे [संगीत] [संगीत] वंदे भारत कार्मिनती मेरा होती वेदांत [प्रशंसा] [संगीत] है पर अपाहिती वह भी नष्ट हो जाता है जोर-जोर से चिल्ला के कौन कहता है यहां प्रतिपादित नाम से धन है प्रारब्ध का पहले लक्षण मैंने बताया था क्या होता है आपकी भक्ति में आने के बाद सबसे पहले सीरियस भक्ति जो दीक्षित होता है उसकी क्या पतली जाति है बाकियों का कुछ कहना नहीं जाति किसी ब्रह्म आदि के पास जाकर पूछो की हमारी जाति बदलोगे भैया बोलेगा यहां मत आओ इस गली में अब गलत गली में ए गए थे और वो नहीं वो भावना पड़ेगा लेकिन भक्ति के मार्ग में भगवान के नाम से क्या बदली जाति है जाति इसका प्रमाण श्रीमद् भागवत है श्रवण कीर्तन इंग्लिश में इंग्लिश पेपर तू से नथिंग ऑफ दिस स्पिरिचुअल एडवांसमेंट ऑफ परसंस पर सी डी सुप्रीम परसों फेस तू फेस एवं एन परसों बोर्न इन एन फैमिली ऑफ डॉग हिटर इम्मीडिएटली बीकमस एलिजिबल तू परफॉर्म वैदिक सैक्रिफाइस आईएफ यू वन स्टार्स डी होली नाम ऑफ डी सुप्रीम पर्सनालिटी ऑफ गॉड और चेस अबाउट हम हेयर्स अबाउट हज पेस्ट टाइम्स ऑफर्स इन ओवनसेंसेस और एवं रिमेंबर हम जी आदरणीय नाम का शरावणन होती है श्रवण करने से कीर्तन करने से या कहो ना जिन भगवान को नमस्कार करने से यार स्वर्ण डी पिक कोई चीज या कभी कभी किसी को उनको स्मरण कर लेने मंत्र से जीव गोस्वामी कहते हैं कोई चीज सब पे लागू होता है फिर क्या कहना है भगवान लेकिन बदली की नहीं जाति तो यहां पर चलिए भगवान का नाम अलग-अलग रूप में अलग-अलग लोगों के लिए आवर्त हुआ है मैंने आपको पूछा था ना अभिरुचि नाम कौन सा नाम अपना एक अधूरी चित नाम होना चाहिए आप सबके इस्ट देव हैं की नहीं है अच्छा अपनी गली के इस्ट नाम है कुछ सिस्टम करती थी कृष्णा कृष्णा [संगीत] गोपाल गोविंद एम लेते हुए क्या कहते हैं [संगीत] [संगीत] तो देखो नंदन हो यशोदा नंदन महाराज के पुत्र कमल है वृंदावन के आदिश्वर प्रणतक अरुण है नतमस्तक करने वालों पर प्रांत लोगों पर करुणा करने वाले कृष्णा है कृष्णा यह द्विवचन कृष्णा राम राम कृष्णा प्रनाकरण दोनों में इस प्रकार अनेक स्वरूप वाले हैं नाम से बुलाकर क्या चाहते हो अब मेरे मुझे आपका सिद्धांत समझ में ए गया है तो वही मामा रतिया ऊंचाई पर कम आप में मेरी उच्च बढ़नी रहेगी उत्कृष्ट अति हमेशा बढ़नी रहे नाम है है आदरणीय भगवान प्रणाम मेरी रति मेरा प्रेम बढ़ता रहे यानी आप मेरे अभिरुचि हो जो क्या हो जो आप मेरे शास्त्रों के जोर पे तो अभी मैं कर ही रहा हूं लेकिन केवल शास्त्रों के द्वारा शासन करने से ही मैं ना करूं यानी मैं स्नेहा पूर्वक आपको ग्रहण करो ऐसी बुद्धि मेरे अंदर जल्द से जल्द ए जाए भगवान नाम से की मैं आपको जब ग्रहण करूं ठीक है तो प्रेम पूर्वक मतलब क्या भगवान को अपना संबंधी अपना प्रियतम अपना सब किसी प्रकार किसी एक रस में मां लीजिए मैं आपका स्मरण करूंगा ठीक है प्रस्तावना देते हुए कहते हैं पति के रन को हम तो इस छोटा मस्ती भाई आपकी करुणा आपकी अतिशी गुरुनाथ स्पष्ट है इसीलिए मैं आपका ही शरण लूंगा के नाम तो इस भावना से अगले में बहुत श्रद्धांजलि ठीक है प्राणी सामान्य सेव रास्ते एम वाचकम आईटीआई उड़ती भवतु नाम स्वरूप है नाम स्वरूप उड़ती प्रकाशित होते हैं कौन से दो स्वरूप पहले स्वरूप को क्या कहते हैं दूसरे स्वरूप को क्या कहते हैं वाक्य वाचन भाव जिसको मालूम नहीं है उसको मैं बताता हूं किसी का नाम होता है जो किसी को इंगित करने के लिए बुलाया जाता है उसको क्या कहते हैं वाचन जो नाम होता है क्या कहते हैं और नाम के द्वारा तो जब हम बोलते हैं है कृष्णा तो कृष्णा यह नाम लिया ना यह अक्षर भाई नाम है यह परम ब्रह्म है की शब्द ब्रह्म पर उससे इंगित कौन सा ब्रह्मा होता है तो स्वरूप दो स्वरूप एक का नाम है दूसरे का नाम क्या है परमो को कहते हैं वाचक्र और परम ब्रह्म को क्या कहते हैं समझ में ए गया हां यही तो बात बताएं यानी भगवान से ज्यादा तरुण मैं क्या है भगवान का है यह हम जानते हैं अभेद होने के बावजूद भेदवाद की यहां पर पुष्टि हम जानते हैं की आपके दोस्त स्वरूप है भगवान से अधिक करुणामय कौन सा ब्राह्मण का करण बताइए दूसरा कोई तरह से बोलोगे तेरी भांग ललित स्वरूप वह भी तो अच्छे ही है बच्चा ही है ना तो इमांग लाली थी ये भी तो नाम है बिना नाम के शब्द ब्रह्म के परब्रह्म को इंगित करके बताओ [हंसी] उसने वह यदि क्या करें आशियानेंद्म उपास्य को यदि अपने मुख से अच्छी प्रकार आपकी उपासना करें किसकी उपासना करें तो परम ब्रह्म के प्रति किया हुए अपराध कौन से ब्रह्म के द्वारा क्षमा किया जा सकता है अब कौन मूर्ख होगा जो शब्द ब्रह्म में प्राप्त करेंगे रास्ते पर गाड़ी चलते समय कट गया सामने सामने कुछ नहीं बोलेगा लेकिन बोलेगा ठीक है इस बार वार्निंग देकर छोड़ रहे हैं अगली बार नहीं करना है और भगवान ने बोला भगवान गीता में हम तो आम सर्वे पाप हैं तो सारे का पो से तुमसे बाहर आया है जलने सुन के लिया [हंसी] है लेकिन अब उसने बोला की भाई तुमको दो साल की सजा होगी जय जाना पड़ेगा जैसे ही जय से बाहर आया राष्ट्रपति को दो गली देते हैं लाइव टीवी इस व्यक्ति को क्या कहेंगे हम इसका पता निश्चित है वह तो विपात पशु है दो पैरों वाला पशु है चलो मां लो उसे भगवान के अपराध से भी बचाने वाला एक है कौन है बच्चन वाला अब जो इस्लाम में भी अपराध कर बैठे हो तो इसलिए कौन सा अपराध नहीं करना चाहिए पर नाम के प्रति अपराध होगा तो कैसे बचेंगे तो उसके उत्तर जाना है नष्ट कर देता है कैसे नष्ट हमारे को सबसे बड़ा दुख यह है की हमने आपको में ही अपराध करती है बाकी सब तो कट गया लेकिन अब किस में अपराध बीच लिया वो कैसे कटेगा तो उसका उत्तर यह है की वह नाम की शरण लेने से भी करता है नाम क्या अपराध किसके शरण लेने से करते हैं नाम के शरण लेने से हरि भक्ति विलास में कहा गया है मेरे पीछे पीछे बोलिए जाते हैं नाम आप राधे तू राधे गुरु राधे राधे मतलब क्या है नहीं जो संभव ही नहीं है उसका विधान क्यों किया जाए आप में से कौन लोग जो नींद में भी नाम लेते हो तो यह जो है तो जो हमेशा नाम का संकीर्तन करता है उसके नाम अपराध भी धीरे-धीरे खत्म हो जाते हैं संकीर्तन करता है मतलब अच्छे भक्तों के साथ मिलकर उसका तत्व समझना है तत्व समझना के बाद नाम अपराध को दूर कैसे करना ये भी समझना है और फिर प्रेमपूर्वक नाम कर देता है तू दी ताश्रितल जनर्ती राशि है जो नष्ट कर देता है अपने आश्रित जनों के समस्त दुखों की राशि को रम्य चित घाना सुखस स्वरूप है जो सुख स्वरूप है चीरघर है मतलब किड गान गान कहते हैं जैसे हम कहते हैं गनी वास्तु खान मतलब नाम गोकुल महोत्सव है नाम है गोकुल के महोत्सव है कृष्णा के संपूर्ण शरीर कृष्णा के संपूर्ण शरीर भगवानपुर भगवान के नाम को कृष्णा का कौन सा शरीर बोला गया है संपूर्ण शरीर नमो नमः आपको पुनर्साहपूर्ण क्या है नमस्कार इससे बताया जाता है की रू गोस्वामी जी इंगित कर रहे हैं मैं तो कुछ लोग सोचेंगे अपराधपूर्वक जाप कर जो है वह अपराध पूर्वक जब से करते हैं ऐसा नहीं है उसका अर्थ यह है संकीर्तन मतलब बहुधीरवार या कीर्तन देव संख्या का नाम बहुत सारे लोग मिलकर जब कीर्तन करते हैं उसको क्या कहते हैं संस्कृत का बहुत सारे लोग मतलब ऐसे ही मतलब कनिष्ठ लोग नहीं इसका अर्थ ये है की मा भागवत के संपर्क में आने के बाद उनके मुख से निकाला हुआ प्रेम में संकीर्तन उनका आचरण उनके द्वारा नाम तत्व इत्यादि सुनने के बाद संकेत है इसलिए अब अपने चित में अपने जीव पे नाम की स्पूर्ति की प्रार्थना हमेशा स्वाभाविक रूप से इसका इसकी प्रार्थना करते हैं अंतिम पद्य आर्य चांद में कौन सी छाया है तो एक गाना थोड़ा कठिन होता है और दूसरा यह है आर्य व्यक्ति बहुत मुश्किल से पटिया पत्नी रूप में प्राप्त होता है समझ में ए रहा है आजकल सात श्री हरि हरि तो इसका अर्थ यह है नारद वीणा उज्जीवन है नाम आप नारद मनी के वीणा को उज्जीवन देने वाला चेतन वाले हैं आज हमने जो भक्ति विनोद ठाकुर का गीत गया तो यही तो था नारे जब मनी कुछ गीत की प्रेरणा कहां से इसलिए [संगीत] स्त्री का पति होता है ना जो स्त्री को जीवन देता है तो स्त्री का पति कौन है सुधा उर्मी सुधा कहते हैं अमृत को उर्मी कहते तरंगा बड़ी रहते हैं है नाम आप वो हो की घड़ा बड़ा नहीं पूरा समुद्र जिसमें लहर के बाद लहर के बाद लहर झगड़ा है और जो पहले 10 लोग उसको ले लेंगे [हंसी] कोई झगड़ा करो एक कम करो तमाम अपनी इच्छा से कम उनका अर्थ बताइए [संगीत] भगवान श्री कृष्णा नमस्ते कम के पहले का हमारा नाम के विषय में क्या हमारी रुचि थे नमाज पर कम जन के बाद नाम के विषय में हमारी प्यारी चीज है इसमें आकाश पाताल का भेद है तो इसलिए है क्योंकि श्री रूप गोस्वामी जी ने हमारे लिए सवाल इच्छा है भगवान नाम की महिमा तो इसी प्रकार से नमस्कार [प्रशंसा] [प्रशंसा] की व्यवस्था कर दी जाएगी तो किसी को जल्दी भेजना किसी को यदि कोई प्रश्न है तो अभी पूछ सकते हैं संबंधित प्रश्न पूछने से अच्छा है सिद्धांतों के प्रश्न पूछा जाए क्योंकि व्यक्ति विशेष का संस्था विशेष प्रदर्शन पूछने से अपवाद उठाता है इसलिए व्यक्ति विशेष है संस्था विशेष्य प्रश्न में ना संबंधित हो तो अच्छा है सैद्धांतिक प्रश्न पूछने का प्रयास कीजिए मुक्ति दो प्रकार की होती है तो प्रथम श्लोक में मुक्त का क्या अर्थ है मुक्त का मतलब होता है दो प्रकार जो जीवन मुक्ति को प्राप्त कर चुका है बस प्रारंभ कर्म खत्म होने की प्रतीक्षा कर रहे हैं क्या कहा गया है जीवन नष्ट हो गए हो इसलिए बच्चा कर रखा था की वो अपना भजन तो चाहे विद्य मुक्ति हो या जीवन मुक्ति दोनों प्रकार की मुक्ति के भगवान नाम का महिमा बोल रहे हैं फिर 5 प्राणों के फंक्शन बयान समाज इनके फंक्शन वृत्तीय और कर अंतरण की वृत्तीय वृत्ति मतलब फंक्शन क्या थे मां के फंक्शन संकल्प विकल्प बुद्धि के फंक्शन में से करना हां अहंकार का फंक्शन हम बम की भावना उत्पन्न करना और चित का फंक्शन स्वर्ण करना ये जो सब फंक्शंस है इससे बना हुआ है कौन सा शरीर आपका इन व्रतियों से इन फंक्शन से कर्म को जो उसका स्टोरी है तो ये आप समझ में तो सूक्ष्म शरीर वृत्तियों का बना हुआ है किसका बना हुआ है और फंक्शंस को उसे करके आपने जो अच्छे बुरे कर्म किया हैं वह अच्छे बुरे कर्मों के फल जो है वो संचित बैठे हुए हैं संक्षिप्त में से और इस शरीर बनाया जाता है उसे कर को कौन सा करके देते हैं इस समय आपको बस वह एक मग जो संचित में से लेकर यह जो शरीर बनाया गया उसका अभी भोग मिल रहा है पर वह प्रारब्ध कर्म भी नष्ट हो जाता है नाम में एकमात्र निष्ठा रखना से क्योंकि नाम से प्रारंभ का सबसे पहले निशानी मिलती है सबसे पहले निशानी प्रारंभ की क्या है जाति है जब जाति ही बादल देते हैं तो फिर तो बाकी होगा क्यों होता है बाकी का कहना ही क्या बाकी भी बादल देते हैं तो ये आपके प्रश्न का उत्तर है तो इन 19 की वृत्तियों का जो है सूक्ष्म शरीर कुछ लोग कहते हैं 19 का बना हुआ है थोड़ा डिटेल में देखेंगे तो इन 19 की वृष्टियों का बना हुआ है और इन व्रतियों से जो कर्म किया जाता है वो कर्म जो है वह स्टोर्ड हो जाता है ओरिजिनल रूट कैसे शरीर होता है आपकी जिज्ञासा का समाधान कैसे पता चलेगा की हमारा इंस्टाग्राम क्या है मैं एक क्वेश्चन भागवत का एक श्लोक में बता रहा हूं जो 11वें स्थान में दूसरे अध्याय में 40 वर्ष होते हैं की यह श्रीमद् भागवत कथा एसेंस यह श्लोक है दूसरा अध्याय 40 वर्ष चाहिए एवं वृतहसवा प्रिया नाम कीर्तिदान है भगवान इस प्रकार जिसने व्रत में भगवान के नाम लेने का धीरे-धीरे उसको मालूम पढ़ने लगता है मेरे प्रिया नाम कौन सा है जब किसी को नया-नया साइकिल देते ना छोटे बच्चे को साइकिल के दोनों अब यह 16 माला इसलिए करना है की उसमें अश्वदक नहीं होता है उसमें रुचि नहीं है फिर भी संख्या करनी है इसलिए लिया गया कुछ समय के बाद केवल संख्या के लिए नहीं पर रुचि से 16 माला करना है की नहीं करना है अच्छा उसके बाद उसकी बुद्धि ये भी विकसित होगी नाम भगवान के बहुत सारे हैं उसमें से आवश्यक नहीं की केवल कृष्णा ये नाम ही मेरा अभिरुचि दूसरे का नाम भी हो सकता है तो हर किसी का नाम पसंद किसी को राधा रमन नाम पसंद हो सकता है भगवान के प्रति आकर्षण और फिर उसको भाव और प्रेम की अवस्था कभी कभी हंसना है रोदिति चिल्लाता है गायत्री गट है उन्माद वन रिक्ति और कभी-कभी पागल की तरह नाच है की उन लोग भाइयों संसार से कुछ लेना देना की ये श्रीमद् भागवत का है तो हमें कैसे मालूम पड़ेगा जब हमारी बुद्धि विकसित होगी और हमें समझ में आएगा की भाई एक अभिरुचित नाम भी तो होना चाहिए क्या हम नाम केवल खुद को दंड देने के लिए कुछ प्रॉब्लम है ऐसा तो नहीं खुद को लकड़ी से करने के जैसे हो गया सुबह सुबह आपने देखा है ना रास्ते पे मुंबई में आता है चाबी लेकर आता है देखो वाला [हंसी] तो यही कम हम रोज कर रहे हैं की नहीं [हंसी] उससे बाहर निकालना है हमें तो भगवान में उत्पन्न करना अतिशी आवश्यक है की भगवान मेरे वह किसी संस्था विशेषता नहीं है वह किसका है तो हमारे इस्ट देव व्यक्तिगत होते हैं इसलिए कभी-कभी कहते हैं इष्टदेव को गुप्त रखना चाहिए जैसे भी आज पूछा मैंने की इष्टदेव को गुप्त इसलिए रहती है तो हमारे व्यक्तिगत नाम ही हमारे सामने चाहिए वो हम निर्धारित करें हम स्वप्न नाम हमारे हैं प्रगति इसमें आध्यात्मिक प्रगति में हमारी स्वाभाविक इच्छा रुचि इस नाम में होगी वो होगा तो भगवान का मुख्य नाम होना चाहिए कैसा नाम होना चाहिए मुख्य नाम मतलब भगवान श्री कृष्णा की लीला संबंध ईश्वर तो वैसे नहीं मुख्य [संगीत] [संगीत] क्योंकि एक होता है रुदिया योग अर्थ मतलब उसका व्याकरण की दृष्टि से क्या अर्थ निकलता है व्याकरण की दृष्टि से निकलता है पर रूढ़ि बैठ गई है की श्याम सुंदर जगह है ना तो जीव गोस्वामी जी कहते न्याय बोलते हैं रुधिर योग्य वृद्धि जो है बलशाली हो जाति है दूसरा उदाहरण देता हूं मोबाइल शब्द का रूढ़ि अर्थ योग अर्थ क्या है जगन्नाथ पुरी के लिए ठीक है आपके जिज्ञासा का समाधान माता जी पुनः आपके पास आपकी कोई जिज्ञासा और प्रारंभ कर्म नाम में निष्ठा होने से मिल जाता है निष्ठापूर्वक नाम लेने से 1 मार्च 19th होने से प्रारंभ कर्म भी नष्ट होता है मतलब ध्यान नहीं राहत खेल मतलब मां लीजिए कुछ भी हो उसका निवारण क्या है लेकिन किस प्रकार जन के पश्चात स्नेहा संयुक्त होकर नाम का संकीर्तन करना है तो हमारे हाथ में है या नहीं है इसका उत्तर यह है की यदि हमारे पास किसी उत्तम भागवत का संघ हो और हम वो संघ लेकर फिर उसके सॉन्ग में रहकर हम ये कर सके नाम तत्व स्पष्ट होना चाहिए नाम किस तरह से लेना ही स्पष्ट बना ठीक है नाम एवं प्रभु नाम एवं प्रभु संस्कृति में अनेक प्रकार के समास होते हैं उसमें से यह एक प्रकार का समास होता है गुरु जो देते हैं उसको मंत्र कहते हैं जो गुरु के मुख से प्राप्त होता है उसको क्या कहते हैं जब हमको प्राप्त होता है गुरु के मुख से तो वह हमारा गुरु के द्वारा प्रदत मंत्र होता है उसको हम कहते हैं ठीक है ये होता है मंत्र मंत्र दीक्षा के ऊपर निर्भर होता है यानी मंत्र जाप करने के लिए आपको क्या प्राप्त हनी चाहिए तो आपको हर नाम के लिए गुरु के पास जाना पड़ेगा तो बात यह है की यू डोंट नीड दीक्षा पर दिस पर्टिकुलर परपज व्हाट यू नीड इसे डूइंग नाम कीर्तन व्हाट यू नीड तू डू इसे यू नीड तू हैव यू नीड तू हर डी नाम वंत आपको सुना पड़ेगा वो नाम किसी महाभागवत के मुख से और फिर आप उसे नाम का जाप कर सकते हैं या कोई नाम लिखूं आपने कहानी सुना होगा उसके अर्थ पे चिंतन करते हो अब ये रुचि कामना दीक्षा में जो मंत्र प्राप्त हुआ उसका तो आपका जाप करना ही है उसके अलावा जो आपके पास समय मिले तो मैं आपको अभी रूचित नाम ले सकते वो नाम दीक्षा का नाम हो तो भी ऐसा कोई है [संगीत] कैसे उच्चारण अपना मुख्य ठीक से कम नहीं कर रहा है या बोलने की शक्ति नहीं है उसे समय क्या कर सकते हैं मरना अवस्था में सिद्धि की चीजों के ऊपर जो शर्तें राखी गई है वह स्मरण के ऊपर है अंत कॉलेज किया है [संगीत] तो वह परीक्षा जो है आपको इसलिए स्मरण दशा प्राप्त करनी है धीरे-धीरे कीर्तन दशा से आपको कौन सी दशा प्राप्त करनी है स्मरण दशा भाग अब हम नाम का जाप करते हैं कीर्तन करते हैं जो भी करते हैं उससे धीरे-धीरे हमारे मां का स्मरण जो है वो ऐसा होना चाहिए की हमको अंत कल में भगवान का क्या ए सके स्मरण स्मरण की पांच अवस्थाएं रहती है स्मरण धरना ध्यान अनुसवर्ती समाधि पहले है बैठे-बैठे कुछ भी स्मरण कर लेना इजीली जो हो जाएगा उसको कहते हैं अनुक्री पांचवा है समाधि केवल भगवान और भगवान के नाम रूप लीला ही रहते हैं मां में और कुछ नहीं राहत है अंत कल छम्मा का क्या मतलब होता है केवल मुझे जनरल स्मरण के स्टार पे होता है या समाधि के स्टार पर होता है तो अंत कल चमन एवं स्मारक मुक्तवा अंतकाल में ऐसा नहीं की किसी मां के कोनी में भगवान का स्मरण कर लिया और बाकी मेरी नई टेस्ला गाड़ी आप समझना चाहिए नहीं चाहिए फिर आप प्रश्न का उद्देश्य क्या है आप उनके परिवार के सदस्य हो की नहीं ठीक है उन्होंने आपको सिलेक्ट कर लिया गुरु के मध्य से आपका चयन हो चुका है अब आपको मुक्त क्यों होता है वो तो आपको बिना मुक्ति के भी प्राप्त हो जाएगा एक साइड इफेक्ट है एक अनुस्वार है क्योंकि आपने प्रश्न पूछा अंतिम कल में यदि हम यह नहीं कर पे होंगे वह दूर की बात है अंतिम कल से पहले प्रेम प्राप्त होना चाहिए अंतिम कल से पहले क्या प्राप्त हो जाना चाहिए एग्जाम से दो दिन पहले हमें सिलेबस का अंतिम चैप्टर हमारा हो जाना चाहिए हमारे सिलेबस का अंतिम चैप्टर क्या है और अगर भगवान की इच्छा होगी अगला जन्म लेने की भी तो भी हमारे पास इस समय क्या प्राप्त हो चुका है हमको भी सर दर्द है जैसे कष्ट हो रहा है क्या हमारा ध्यान और हमारा मां भगवान की तरफ लगे में वो बड़ा है उसे बड़ा से मुक्त हो के हम भजन करें वैसे उसमें आप करके वो विचार ठीक है की दुखों से हम दुखों की हनी हो जाए वही तो मैं बोला था दुखों की हनी हो जाए इसलिए मुक्ति चाहिए वो विचार ठीक है पर उससे ऊंचा एक विचार होता है भागवत सेवा हो इसलिए मुक्ति चाहिए की भागवत सेवा हो इसलिए श्रीमद् भागवत में कहा है सालों के सदेश की शामिल किया शाहरुख के एक तत्व हम आपके होता है दिया मानती बिना मां सेवन अंजना सभी प्रकार के मुक्ति देने पर भी बहुत आराम से स्वीकार नहीं करते वक्त ना बोलते नहीं चाहिए जब तक क्या ना मिले भगवान की अगर हम पहले मुक्ति चाहिए सेवा बाद में देखेंगे

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