धरती को हम अक्सर सिंपल तरीके से देखते हैं। [संगीत] पहाड़, समुंदर, रेगिस्तान, जंगल। लेकिन अगर हम ध्यान से देखें तो इसी धरती पर कुछ ऐसी जगह भी हैं जो प्रकृति के आम नियमों को तोड़ती हुई सी लगती है। दोस्तों, कहीं एक ऐसी जगह है जहां हर वक्त जमीन के ऊपर नीली आग जलती [संगीत] रहती है। हां, बिल्कुल सही सुना आपने। ब्लू फायर। और कहीं एक ऐसा बीच है जो एक पहाड़ के नीचे छुपा हुआ है। कहीं पत्थर इस तरह सीधे खड़े हैं जैसे किसी ने उन्हें तराशा हो और कहीं पूरी जमीन एक आईने की तरह आसमान को रिफ्लेक्ट करती है। इसे आप धरती का सबसे बड़ा आईना भी कह सकते हैं। [संगीत] यह सब कहानियां नहीं है। यह कल्पना नहीं है। यह सब इसी ग्रह पर मौजूद है। दोस्तों आज हम देखेंगे दुनिया के 10 सबसे रहस्यमय और अजीब जगहें, जिसे देखने के बाद आप यकीन नहीं करेंगे कि यह सच में मौजूद है। दोस्तों वीडियो शुरू करने से पहले अगर आपने अभी तक हमारे इस चैनल को सब्सक्राइब नहीं किया है तो जरूर सब्सक्राइब कर लें क्योंकि आपके एक सब्सक्राइब से हमें बहुत मोटिवेशन मिलता है और हम आपके लिए ऐसी और वीडियोस बनाते रहेंगे। तो चलिए वीडियो शुरू करते हैं। नंबर वन कावाह ईजन ब्लू फायर। [संगीत] इंडोनेशिया के ईस्ट जावा के पहाड़ों के बीच स्थित कावा ईजन पहली नजर में एक सामान्य वोल्केनो लग सकता है। लेकिन रात के समय यह जगह अपना बिल्कुल अलग रूप दिखाती है। अंधेरा गहरा होता है। हवा में सल्फर की तेज गंध महसूस [संगीत] होती है और फिर क्रेटर के अंदर से नीली आग जलती हुई नजर आती है। इस वोल्केनो का क्रेटर लगभग 1 कि.मी. चौड़ा है। इसके अंदर एक गहरी एसिडिक [संगीत] लेक मौजूद है जिसका रंग ट्रकवाइज ब्लू दिखता है। यह रंग सुंदरता का प्रतीक नहीं बल्कि इंटेंस [संगीत] केमिकल रिएक्शन का नतीजा है। इस लेख का पीएच लेवल एक से भी नीचे रिकॉर्ड किया गया है जो इसे दुनिया की सबसे [संगीत] एसिडिक नेचुरल लेकक्स में शामिल करता है। यह पानी इतना कोरोसिव है कि सीधा स्पर्श नुकसान पहुंचा [संगीत] सकता है। कावा हजन की सबसे अजीब बात है इसका ब्लू फायर। यह ब्लू लावा नहीं है। वोल्केनो के अंदर से सल्फर रिच गैसेस बहुत [संगीत] हाई टेंपरेचर पर निकलती है। जब यह गैसेस हवा के कांटेक्ट में आती है, तो सल्फर इग्नाइट हो जाता है और इलेक्ट्रिक ब्लू फ्लेम्स पैदा करता है। रात के अंधेरे में यह फ्लेम्स 4 से [संगीत] 5 मीटर तक उछलती हुई दिखती है। जैसे जमीन के अंदर कोई नीली रोशनी जल रही हो। दिन की रोशनी में यह लगभग गायब सी हो जाती है। क्रेटर के आसपास टॉक्सिक गैसेस जैसे सल्फर डायोनॉक्साइड [संगीत] रिलीज होते रहते हैं। हवा की दिशा बदलने पर यह गैसेस कुछ ही पल में पूरे एरिया को ढक सकती है। इसी जगह पर लोकल माइनर्स रोज डिसेंड करते हैं और जम चुके सल्फर को तोड़कर भारी टोकरियों में भरकर ऊपर लाते हैं। जहरीली हवा और कठिन चढ़ाई के बावजूद यह काम सालों से चलता आ रहा है। कावा ईजन एक ऐसी जगह है जहां प्रकृति की सुंदरता और खतरा एक साथ मौजूद [संगीत] है। नीली आग देखने में सुपर नेचुरल लग सकती है लेकिन उसके पीछे एक क्लियर केमिकल प्रोसेस छुपा है। फिर भी [संगीत] जब रात के अंधेरे में क्रेटर के अंदर से नीली लौ उठती है तो यह दृश्य धरती पर किसी और दुनिया का एहसास करा देता है। नंबर टू हिडन बीच प्लाया डेल अमोर। मेक्सिको के पैसिफिक ओशन में मरियटा आइलैंड्स के पास स्थित है हिडन बीच। [संगीत] प्लाया डेलामोर दूर से देखने पर यह एक सामान्य पथरीला आइलैंड लगता है। लेकिन इसके अंदर छुपा है एक ऐसा दृश्य जो पहली नजर में समझ से परे लगता है। आइलैंड के बीच में एक बड़ा गोलाकार गड्ढा है। ऊपर से खुला आसमान दिखता है। नीचे सफेद रेत और बीच में शांत पानी। जैसे किसी ने आइलैंड [संगीत] का बीच का हिस्सा निकाल दिया हो और उसकी जगह एक गुप्त बीच बना दी हो। इस बीच तक सीधा जमीन से नहीं पहुंचा जा सकता। यहां तक पहुंचने के लिए एक पानी से भरी सुरंग से तैर कर गुजरना पड़ता है। जब कोई इस अंधेरी [संगीत] सुरंग से निकल कर अंदर आता है तो अचानक एक रोशन बंद सा लैगून सामने खुल जाता है। इसी वजह से इसे हिडन बीच या प्लाया डेल अमोर कहा जाता है। इसका निर्माण प्राकृतिक लग सकता है। लेकिन इसके पीछे [संगीत] मानव इतिहास भी जुड़ा हुआ है। 20वीं सदी के शुरुआती दौरों में यह आइलैंड मिलिट्री टेस्टिंग के [संगीत] लिए इस्तेमाल किया गया था। बॉम्ब टेस्टिंग के दौरान आइलैंड के कुछ हिस्सों में बड़े गड्ढे [संगीत] बने। समय के साथ इरोजन और समुद्री लहरों ने इन गड्ढों को नेचुरल शेप दे दिया। धीरे-धीरे यह जगह एक एनक्लोोज्ड [संगीत] बीच में बदल गई। आज यह एक प्रोटेक्टेड इकोलॉजिकल जोन का हिस्सा है। [संगीत] यहां की एंट्री लिमिटेड होती है ताकि नेचुरल बैलेंस बना रहे। ऊपर से खुला आसमान, चारों तरफ ऊंची पथरीली दीवारें और बीच में शांत पानी। यह सब मिलकर एक ऐसा माहौल बनाते हैं जो नेचुरल होते [संगीत] हुए भी सीक्रेट जैसा महसूस होता है। नंबर थ्री जॉइंट्स कॉजवे। नॉर्दर्न आयरलैंड के समुद्री किनारे पर स्थित जॉइंट्स [संगीत] कॉजवे पहली नजर में एक अजीब सा दृश्य पैदा करता है। समुद्र के पास हजारों पत्थर के खंभे खड़े हैं [संगीत] और सब लगभग एक जैसे शेप में। दूर से देखने पर यह ऐसा लगता है जैसे किसी ने जानबूझकर परफेक्ट डिजाइन बनाकर इन्हें यहां [संगीत] रख दिया हो। यहां करीब 400 बेसाल्ट कॉलम्स मौजूद हैं। इनमें से ज्यादातर कॉलम्स हेक्सागन शेप के हैं। यानी छह कोने वाले। कुछ चार या पांच कोने वाले भी मिलते हैं। लेकिन हेक्सागोनल पैटर्न सबसे ज्यादा कॉमन है। इनकी ऊंचाई अलग-अलग है। लेकिन कई कॉलम्स 10 से 12 मीटर तक ऊपर उठते हुए देखे गए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि प्रकृति [संगीत] इतना परफेक्ट जियोमेट्रिक पैटर्न कैसे बना सकती है? इसका जवाब लगभग 60 मिलियन साल पुरानी वोल्केनिक [संगीत] एक्टिविटी में छुपा है। जब यहां से लावा बाहर निकला तो वह जमीन पर फैल गया। धीरे-धीरे जब यह लावा ठंडा होने लगा तो उसमें कॉन्ट्रक्शन हुआ यानी वॉल्यूम कम होने लगा। कूलिंग प्रोसेस के दौरान लावा में क्रैक्स डेवलप हुए। यह क्रैक्स नेचुरली हेक्सागोनल पैटर्न में स्प्लिट होने लगे। क्योंकि ज्योमेट्री [संगीत] के हिसाब से यह शेप कूलिंग स्ट्रेस को इवनली डिस्ट्रीब्यूट करती है। इसी प्रोसेस को कॉलमनर जॉइंटिंग कहा जाता है। समय के साथ इरोजन ने इन कॉलम्स को और एक्सपोज कर दिया। आज यह समुद्र के किनारे एक पत्थर की सीढ़ी जैसी संरचना बना देते हैं। जैसे कोई रास्ता समुद्र के बीच [संगीत] तक जा रहा हो। लेकिन साइंस के अलावा यहां एक पुरानी कहानी भी मशहूर है। लोकल फोक्लोर के मुताबिक यह पत्थर के खंभे एक [संगीत] जॉइंट ने बनाए थे। स्कॉटलैंड तक पहुंचने के लिए। इसी वजह से इस जगह का नाम जॉइंट स्कॉजवे पड़ा। हालांकि यह सिर्फ लोकथा है, लेकिन जब कोई इनपरफेक्टली अलाइंड कॉलम्स पर खड़ा होता है तो कहानी सच लगने लगती है। तेज हवा, टकराती हुई लहरों की आवाज और सीधे खड़े जियोमेट्रिक पत्थर। यह सब मिलकर एक ऐसा माहौल पैदा करते हैं जो नेचुरल होते हुए भी आर्टिफिशियल सा लगता है। जॉइंट्स कॉजवे एक याद दिलाता है कि कभी-कभी प्रकृति खुद सबसे बेहतरीन आर्किटेक्ट होती है। जो चीज इंसान को डिजाइन लगती है, वह असल में मिलियन सालों पुरानी जियोलॉजिकल प्रोसेस का नतीजा होती है। नंबर फोर फ्लाई गीज़र। अमेरिका के निवादा राज्य के एक सूने दूरदराज मैदान में स्थित है फ्लाई गीज़र। पहली नजर में यह जगह किसी साइंस फिक्शन फिल्म का सेट लग सकती है। रेगिस्तान के [संगीत] बीच से अचानक रंग बिरंगी चट्टान जैसी संरचना उभर कर खड़ी है जिसके ऊपर से लगातार गर्म पानी और भाप निकलती [संगीत] रहती है। यह गीजर प्राकृतिक रूप से पूरी तरह नहीं बना था। 1960 के दशक में यहां पानी [संगीत] की खोज के लिए ड्रिलिंग की गई थी। ड्रिल के दौरान जमीन के अंदर मौजूद जियोथर्मल प्रेशर रिलीज हो गया। गर्म पानी सरफेस पर आने लगा और धीरे-धीरे मिनरल्स [संगीत] जमा होते गए। सालों तक कैल्शियम कार्बोनेट और अन्य खनिज पदार्थों की परत जमती रही जिसने इस अजीब [संगीत] तीन माउंट वाली संरचना को जन्म दिया। आज फ्लाई गीजर लगभग 5 से 6 मीटर ऊंचा है। इसके ऊपर से 90 डिग्री सेल्सियस के आसपास का गर्म पानी छोटे-छोटे फाउंटेंस की तरह लगातार उछलता रहता है। लेकिन सबसे ज्यादा हैरान करने वाली बात है इसका रंग। लाल, हरा, नारंगी और पीला रंग इसकी सतह पर दिखाई देते हैं। यह रंग किसी पेंट का नतीजा नहीं बल्कि थर्मोफिलिक एल्गी और माइक्रो ऑर्गेनिज्म्स की वजह से होते हैं। यह जीव गर्म मिनरल रिच पानी में जीवित रहते हैं और अपने रंग से पूरी संरचना को कवर कर देते हैं। दूर से देखने पर यह ऐसा लगता है जैसे धरती का कोई हिस्सा पिघल कर बाहर आ गया हो। गर्म भाप हवा में घुलकर एक धुंध सा माहौल बना देती है। रोशनी के एंगल के हिसाब से इसका रंग और भी इंटेंस नजर आता है। जिससे यह और भी अनरियल लगता है। यह गीज़र प्राइवेट लैंड पर स्थित है। इसलिए यहां कंट्रोलोल्ड एक्सेस दिया [संगीत] जाता है। लेकिन जो लोग इसे देखते हैं उनके लिए यह एक यादगार दृश्य होता है। एक ऐसी जगह जहां मानव ड्रिलिंग की एक गलती ने प्रकृति के साथ मिलकर कुछ बिल्कुल अनोखा बना दिया। नंबर फाइव ग्रैंड प्रिज्मैटिक स्प्रिंग। अमेरिका के वायोमिंग राज्य के येलोस्टोन नेशनल पार्क के अंदर स्थित [संगीत] है ग्रैंड प्रिज्मैटिक स्प्रिंग। ऊपर से देखने पर यह ऐसा लगता है जैसे किसी ने जमीन पर एक बड़ा सा रेनबो बना दिया हो। बीच में गहरा नीला रंग, उसके इर्द-गिर्द हरा, पीला, नारंगी और लाल रंग की परतें। सब कुछ इतना परफेक्टली अरेंज्ड कि पहली नजर में यह नेचुरल नहीं लगता। यह अमेरिका का सबसे बड़ा हॉट स्प्रिंग है और दुनिया के सबसे बड़े गर्म पानी के स्रोतों में से एक माना जाता है। इसका व्यास लगभग 110 मीटर के आसपास है और पानी का टेंपरेचर 70 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा तक पहुंच सकता है। बीच का हिस्सा गहरा नीला इसलिए दिखता है क्योंकि वहां पानी सबसे ज्यादा गर्म होता है और रिलेटिवली क्लियर रहता है। लेकिन जैसे-जैसे पानी किनारे की तरफ ठंडा होता है, वहां माइक्रोस्कोपिक [संगीत] ऑर्गेनिज्म्स खासकर थर्मोफिलिक बैक्टीरिया जीवित रहते हैं। यह माइक्रो ऑर्गेनिज्म्स टेंपरेचर के हिसाब से अलग-अलग रंग दिखाते हैं। गर्म जोन में हरा रंग थोड़ा कम टेंपरेचर पर पीला और नारंगी [संगीत] और और ठंडा हिस्सा लाल शेड दिखाता है। इस प्रक्रिया की वजह से पूरा स्प्रिंग एक नेचुरल कलर ग्रेडियंट बना देता है। यह रंग पेंट या मिनरल लेयर की वजह से नहीं बल्कि जीवित माइक्रो ऑर्गेनिज्म्स की एक्टिविटी का रिजल्ट [संगीत] है। हर सीजन में इन रंगों की इंटेंसिटी बदल सकती है क्योंकि टेंपरेचर और सनलाइट का इफेक्ट [संगीत] माइक्रो इन ऑर्गेनिज्म्स की ग्रोथ पर पड़ता है। ग्रैंड प्रिज्मैटिक स्प्रिंग सिर्फ सुंदरता का प्रतीक नहीं बल्कि अर्थ के जियोथर्मल सिस्टम का एक एक्टिव एग्जांपल है। येलो स्टोन खुद एक सुपर वोल्केनो के ऊपर स्थित है जिसके नीचे मैग्मा चेंबर मौजूद है। इसी जियोथर्मल [संगीत] हीट की वजह से यहां इतने सारे हॉट स्प्रिंग्स, गीजर्स और स्टीम वेंट्स मिलते हैं। दूर से जब कोई इस स्प्रिंग को देखता है, तो यह किसी दूसरे ग्रह की तस्वीर जैसा लगता है। एक परफेक्ट सर्कल जिसमें रंग धरती पर नहीं बल्कि आसमान के स्पेक्ट्रम जैसे दिखते हैं। ग्रैंड प्रिज्मैटिक [संगीत] स्प्रिंग हमें याद दिलाता है कि कभी-कभी प्रकृति रंगों का उपयोग सिर्फ सुंदरता के लिए नहीं बल्कि जीवन के [संगीत] लिए करती है। और जब यह रंग एक साथ दिखते हैं तो धरती खुद एक कैनवास [संगीत] बन जाती है। नंबर सिक्स लेंसोस मरनियंसेस। ब्राजील के उत्तरपूर्वी हिस्से में स्थित लेंसोइज़ मरनियंसेस। पहली नजर में एक आम रेगिस्तान जैसा लगता है। दूर तक सिर्फ सफेद रेत के टीले हवा के साथ बदलते हुए पैटर्न और बीच [संगीत] में कोई पेड़ पौधा नहीं। लेकिन यह जगह एक आम डेजर्ट नहीं है। हर साल बरसात के दौरान यहां कुछ ऐसा होता है जो इसे दुनिया की सबसे अनरियल जगहों में शामिल कर देता है। जून से सितंबर के बीच जब यहां तेज बारिश होती है तो [संगीत] रेत के टीलों के बीच पानी जमा होने लगता है। धीरे-धीरे इन नेचुरल गड्ढों में नीले और हरे रंग के लैगून्स बन जाते हैं। सफेद रेत और नीले पानी का कंट्रास्ट इतना शार्प होता है कि ऊपर से देखने पर यह किसी एब्स्ट्रैक्ट पेंटिंग जैसा लगता है। सबसे अजीब बात यह है कि यह टेक्निकली डेजर्ट नहीं माना जाता क्योंकि यहां सालाना रेनफॉल काफी होती है। लेकिन रेत की गहरी परत नीचे पानी को अब्सॉर्ब नहीं होने देती। इसलिए बारिश का पानी सरफेस पर ही जमा होकर सीजनल झीलों का रूप ले लेता है। यह लेगूंस परमानेंट नहीं होते। कुछ महीनों बाद जब गर्मी बढ़ती है तो पानी धीरे-धीरे सूखने लगता है। टीले फिर से खाली नजर आते हैं जैसे पानी कभी [संगीत] था ही नहीं। फिर अगले साल वही साइकिल दोबारा शुरू होती है। साइंटिफिक तौर पर देखा जाए तो यह रीजन अटलांटिक ओशन के करीब है और हवा समुद्र से नमी लेकर आती है। इसी वजह से यहां इतनी रेनफॉल होती है। लेकिन दृश्य इतना अनयूजुअल [संगीत] है कि लोग अक्सर इसे डेजर्ट विद लैगून्स कहते हैं। लेसोस्मरानियनसेस एक ऐसा स्थान [संगीत] है जहां रेगिस्तान और झील एक साथ मौजूद होते हैं। सफेद रेत के टीले जब नीले पानी को घेर लेते हैं तो यह धरती का एक ऐसा रूप दिखाते हैं जो ना पूरी तरह रेगिस्तान है ना पूरी तरह समुद्र। नंबर सेवन दनाकिल डिप्रेशन। अफ्रीका के इथियोपिया देश में स्थित दनाकिल डिप्रेशन को अक्सर धरती के सबसे कठिन और अजीब स्थलों में से एक माना जाता है। यह जगह समुद्र तल से लगभग 100 मीटर नीचे स्थित है जो इसे दुनिया के सबसे निचले स्थलों में शामिल करता है। यहां का तापमान अक्सर 45 डिग्री सेल्सियस से ऊपर रहता है और कई बार सालाना औसत तापमान दुनिया में सबसे अधिक रिकॉर्ड किया गया है। लेकिन सिर्फ गर्मी ही इसे खास नहीं बनाती। इस मैदान [संगीत] में रंग बिरंगे सल्फर फील्ड्स, एसिड पूल्स, नमक की परतें और लगातार एक्टिव वोल्केनिक एक्टिविटी [संगीत] एक साथ मिलते हैं। इस क्षेत्र का एक हिस्सा डलोल के नाम से जाना जाता है। जहां जमीन पर पीले, हरे और नारंगी रंग के पैटर्न दिखते हैं। यह रंग, सल्फर, आयरन और अन्य मिनरल्स की वजह से बनते हैं। नीचे मैग्मा की हीट ग्राउंड वाटर को गर्म करती है। जिससे एसिडिक हॉट स्प्रिंग्स और छोटे गीज़र जैसे फाउंटेंस बनते रहते हैं। [संगीत] यहां के कुछ पानी के कुंड इतने तीखे होते हैं कि उनका पीएच लेवल बहुत लो रिकॉर्ड किया गया है। दनाकिल डिप्रेशन टेक्टोनिक प्लेट्स के अलग होने की जगह पर स्थित है। यहां अफ्रीकन प्लेट धीरे-धीरे स्प्लिट हो रही है। इसी जियोलॉजिकल एक्टिविटी की वजह से यह रीजन इतना अनस्टेबल और जियोथर्मल रूप से एक्टिव है। यहां का लैंडस्केप लगातार बदलता रहता है। कहीं से गैस निकलती है। कहीं जमीन फटकर नए वेंट बना लेती है। इस कठोर एनवायरमेंट के बावजूद यहां अफार ट्राइब के लोग [संगीत] सदियों से नमक का व्यापार करते आए हैं। नमक की बड़ी-बड़ी स्लैब्स काटकर [संगीत] उन्हें ऊंटों के जरिए दूर तक ले जाया जाता है। इतनी एक्सट्रीम कंडीशंस के बीच भी [संगीत] मानव जीवन का चलना इस जगह को और भी प्रभावशाली बना देता है। दूर से देखने पर द नाकिल डिप्रेशन किसी और ग्रह का दृश्य लग सकता है। जैसे मार्स की सरफेस, गर्म हवा, रंग-बिरंगी जमीन, और कहीं-कहीं से उठती भांप। यह जगह धरती के अंदर चल रही शक्तियों का एक जीवित प्रमाण है। दनाकिल डिप्रेशन हमें दिखाता है कि अर्थ के कुछ हिस्से अभी भी रॉ और वाइल्ड है। जहां प्रकृति अपने सबसे एक्सट्रीम रूप में मौजूद है। नंबर एट सिंघी डे बेमराहा। अफ्रीका के मेडागास्कर देश के पश्चिमी हिस्से में स्थित है सिंघी डे बेमराहा। दूर से देखने पर यह जगह किसी पत्थर के जंगल जैसी लगती है। लेकिन यह आम जंगल नहीं। यहां पेड़ों की जगह हजारों तेज छुरी जैसी लाइमस्टोन की चोटियां आसमान [संगीत] की तरफ खड़ी है। सिंी शब्द का अर्थ होता है जहां नंगे पैर चलना मुमकिन ना हो। यह नाम बिल्कुल सही बैठता [संगीत] है क्योंकि यहां के पत्थर इतने तेज और नुकीले हैं कि उन पर चलना बहुत मुश्किल है। यह संरचना लाखों साल पुरानी है। जियोलॉजिकल तौर पर यह पूरा क्षेत्र लाइमस्टोन [संगीत] से बना है। करोड़ों साल पहले यह हिस्सा समुद्र के नीचे था। समय के साथ जब पानी हट [संगीत] गया तो लाइमस्टोन एक्सपोज हो गया। बारिश का पानी जो हल्का एसिडिक होता है। धीरे-धीरे [संगीत] लाइमस्टोन को घुलाता रहा। इस प्रोसेस को इरोजन कहते हैं। लाखों सालों तक चलते इस प्रक्रिया ने जमीन को तोड़कर इन पतले तेज कॉलम्स [संगीत] में बदल दिया। आज यह पत्थर 70 मीटर तक ऊंचे देखे जा सकते हैं। इनके बीच [संगीत] गहरी दरारें और छोटी गुफाएं बनी हुई हैं। ऊपर से देखने पर यह पूरा एरिया एक ग्रे टूटे हुए पैटर्न जैसा लगता है। जैसे धरती पर किसी ने कांच के टुकड़े जमा कर दिए हो। इस कठिन लैंडस्केप के बावजूद यहां एक यूनिक इकोसिस्टम भी मौजूद है। इन पत्थरों के बीच छोटे जंगल पॉकेट्स और हिडन वैलीज बने हुए हैं। जहां अलग-अलग प्रजातियों के जानवर और पौधे जीवित हैं। मेडागास्कर खुद अपनी बायोडायवर्सिटी के लिए जाना जाता है। और सिंगी इस बात का एक प्रमाण है। यह जगह विजुअली इतनी अनयूजुअल है कि पहली नजर में आर्टिफिशियल लग सकती है। लेकिन हर तेज छोटी, हर दरार सिर्फ पानी और समय की मिलीजुली शक्ति का परिणाम है। नंबर नाइन माउंट नेम्रुथ। तुर्की के दक्षिणी हिस्से में लगभग 2100 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। माउंट नेमरुत। पहली नजर में यह एक शांत पहाड़ लगता है। लेकिन इसके शिखर पर कुछ ऐसा [संगीत] है जो इसे दुनिया के सबसे रहस्यमय स्थलों में शामिल करता है। यहां विशाल पत्थर की मूर्तियां मौजूद हैं। देवताओं, राजाओं और प्राचीन प्रतीकों की। इन मूर्तियों की ऊंचाई 8 से 9 मीटर तक है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इनमें से अधिकांश मूर्तियों के सिर उनके शरीर से अलग होकर जमीन पर बिखरे पड़े हैं। जैसे किसी ने जानबूझकर [संगीत] इन्हें गिरा दिया हो। यह संरचना पहली सदी ईसा पूर्व के दौरान कोमाजीन नामक प्राचीन राज्य के राजा एंटियोक्स प्रथम ने बनवाई थी। उसका उद्देश्य था अपने आप को [संगीत] देवताओं के बराबर स्थापित करना। इसलिए यहां ग्रीक और पर्शियन देवताओं के साथ उसकी खुद की मूर्ति भी स्थापित [संगीत] की गई। यह स्थान असल में एक रॉयल टॉम सेंचुअरी माना जाता है। मूर्तियों के पीछे एक बड़ा सा पत्थर का माउंट बना हुआ है जो छोटे पत्थरों को जमा करके तैयार किया गया है। माना जाता है कि इस माउंट के नीचे राजा का समाधि स्थित हो सकता है। लेकिन आज तक उसका एग्जैक्ट बरियल चेंबर कंफर्म नहीं हुआ। समय, भूकंप और प्राकृतिक गतिविधियों ने इन मूर्तियों [संगीत] को नुकसान पहुंचाया। सिर अलग हो गए और धीरे-धीरे नीचे गिर गए। आज जब सूरज उगता या ढलता है तो इन मूर्तियों के चेहरों पर पड़ती रोशनी एक अलग ही माहौल पैदा करती है। शांत हवा, ऊंचाई का सन्नाटा और जमीन पर पड़े हुए विशाल सिर। यह सब मिलकर इस जगह को और भी मिस्टीरियस बना देते हैं। नंबर 10 साल द ओयूनी। साउथ अमेरिका के बोलीविया देश में स्थित है सालार द उययुनी। दूर तक फैले सफेद मैदान को देखकर पहली नजर में लगता है जैसे यह बर्फ से ढका हो। लेकिन यह बर्फ नहीं यह नमक है। लगभग 10,000 स्क्वायर किलोमीटर में फैला यह दुनिया का सबसे बड़ा साल्ट फ्लैट माना जाता है। हजारों साल पहले यह क्षेत्र एक विशाल प्राचीन झील का हिस्सा था। समय के साथ पानी सूख गया और पीछे [संगीत] रह गया एक मोटा नमक का स्तर। आज इसकी सतह इतनी समतल है कि सेटेलाइट [संगीत] कैलिबेशन के लिए भी इस्तेमाल की जाती है। कुछ जगहों पर नमक की परत कई मीटर तक मोटी है। लेकिन सालार दे उयूनी अपने असली रूप में तब दिखता है जब यहां बारिश होती है। पतली सी पानी की परत पूरे मैदान को कवर कर लेती है और तब यह जगह एक परफेक्ट मिरर में बदल जाती है। आसमान के बादल, सूरज और रात को तारे सब कुछ जमीन पर बिल्कुल वैसे ही दिखाई देते हैं जैसे ऊपर। होराइजन लगभग गायब हो जाता है। जमीन और आसमान एक सा लगने लगते हैं। इस जगह पर चलने का एहसास भी अलग होता है। सूखे मौसम में सफेद हेक्सागोनल नमक के पैटर्न नजर आते हैं जो नेचुरल क्रिस्टल फॉर्मेशन का रिजल्ट होते हैं। बरसात के दौरान वही जगह एक अनंत आईने में बदल जाती है। यहां लिथियम का भी विशाल भंडार मौजूद है जो आज की बैटरी [संगीत] टेक्नोलॉजी के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इसलिए यह स्थल सिर्फ दृश्य रूप से ही नहीं बल्कि आर्थिक रूप [संगीत] से भी महत्वपूर्ण है। सालार्ध उयनी एक ऐसा दृश्य पैदा करता है जो समझ से परे लगता है। जब आदमी उस पतली पानी की परत पर खड़ा होता है और अपना ही प्रतिबिंब आसमान के साथ मिलता हुआ देखता है तो कुछ पल के लिए यह फैसला करना मुश्किल हो जाता है कि जमीन कहां खत्म होती है और आसमान कहां शुरू। यह जगह हमें याद दिलाती है कि कभी-कभी धरती खुद एक आईना बन जाती है और उसमें हम सिर्फ आसमान नहीं बल्कि अपनी छोटी सी मौजूदगी भी देख सकते हैं।
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