DELED 4TH SEMESTER मैराथन class /DELED 4TH SEMESTER SCIENCE /DELED FOURTH SEMESTER SCIENCE CLASS

Pariksha Veer14,783 words

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हेलो गाइज़, आप सभी साथियों का स्वागत है आपके अपने YouTube चैनल परीक्षा पर। सभी मेरे प्यारे-प्यारे साथियों को गुड मॉर्निंग। जल्दी से आप सभी जुड़ जाइए क्योंकि मैं लेकर आ चुका हूं आप सभी के लिए साइंस की एक बड़ी ही जबरदस्त महामैराथन क्लास। ठीक है? और जैसा कि आपको पता है कि हम सभी धीरे-धीरे एक-एक सब्जेक्ट्स की मैराथन कर रहे हैं। और आज हम सभी का पांचवें सब्जेक्ट की मैराथन है। यानी इसके पहले हम लोगों ने चार सब्जेक्ट्स की मैराथन कर ली है। जिसमें इंग्लिश कर लिया है। शांति, शिक्षा एवं सतत विकास कर लिया है। शैक्षिक प्रबंधन एवं प्रशासन कर लिया है। और आरंभिक स्तर पर भाषा के पठन, लेखन एवं गणितीय क्षमता का विकास। यानी यह हमने चार सब्जेक्ट इसके पहले मैराथन के रूप में कर लिया है और इन चारों सब्जेक्ट्स की जो पीडीएफ है फ्री वह भी ऐप पर प्रोवाइड करा दी गई है। तो जिन बच्चों ने अभी तक मेरी उन क्लासेस को नहीं देखा है डिस्क्रिप्शन बॉक्स में लिंक है वहां से जाकर के आप उस क्लासेस को आप अच्छे तरीके से आप देख लीजिएगा। ठीक है? चलिए अब हम स्टार्ट करें। देखो बहुत सारे बच्चे कहते हैं ना कमेंट करते हैं सर ऐप पर पीडीएफ जल्दी नहीं खुलती। बेटा जल्दी नहीं खुलेगी क्योंकि मैराथन की पीडीएफ है तो वो लंबे साइज की होती है यानी कि उसमें एमबी ज्यादा होती है। तो अगर आपके यहां नेटवर्क थोड़ा सा वीक है, नेटवर्क कनेक्शन थोड़ा स्लो है तो थोड़ा टाइम लग सकता है आप में। लेकिन अगर वही आप वाई-फाई है, 5G की सिम है तो आपको जल्दी से जल्दी ओपन हो जाएगा। ठीक है? बाकी अगर आप 4G का सिम लिए हुए हो और आप सोचो कि आप क्लिक करो और तुरंत पीडीएफ ओपन हो जाए तो ऐसा पॉसिबल नहीं है क्योंकि पीडीएफ की साइज बड़ी होती है मैराथन की। ठीक है बच्चा? चलिए स्टार्ट करेंगे आज की क्लास को। बताइए आवाज मेरी आ रही है अच्छे तरीके से आप सभी बच्चों को। हां तो आज हम लोग साइंस की बहुत ही जबरदस्त क्लास यहां पे करने वाले हैं। ठीक है? चलिए अब बढ़ते हैं। आगे बढ़े उससे पहले मैं बता दूं कि अभी आप लोगों के पास में अच्छा खासा समय है। 20 दिन के आसपास समय है। अगर आपकी तैयारी अभी भी आधी-अधूरी है। आपको नोट्स चाहिए। आपको सारे प्रीवियस ईयर पेपर चाहिए। आपको सभी सब्जेक्ट की क्लासेस और उनकी पीडीएफ चाहिए। ठीक है? अगर आप बैच लेते हो अभी समय है। अभी कोई बहुत ज्यादा समय नहीं बीता है। आप सारे सब्जेक्ट्स की क्लासेस नहीं देख सकते तो कम से कम उसकी पीडीएफ देख सकते हैं। नोट्स पढ़ सकते हैं। पीवाईक्यू लगा सकते हैं। तो ये सारा काम करने के लिए आप लोग डीएलएड फोर्थ सेमेस्टर का रुद्राक्ष बैच ले लीजिएगा। मात्र ₹249 में है बैच। डिस्क्रिप्शन बॉक्स में परीक्षा वीर ऐप का लिंक है। आप लोग जाकर के उस ऐप को आप डाउनलोड कर लीजिए और डाउनलोड करने के बाद में अगर आप बैच लेने में आपको कोई दिक्कत आ रही है किसी और से आपको पेमेंट करवाना है तो इस नंबर पर आप WhatsApp पर मैसेज कर दीजिए। ठीक है? मैसेज WhatsApp पर क्या करना है आपको? सिर्फ ऐप से रिलेटेड मैसेज किया करिए और किसी भी चीज के लिए मैसेज वहां पे मत किया करिए। ऐप में कोई दिक्कत है, कोई परेशानी है तो वहां पर मैसेज करो। आपको बैच लेने में दिक्कत है तो वहां पे मैसेज करो। और कोई देखो बहुत सारे बच्चे क्या होते हैं ना कि इस टाइप का वहां पर मैसेज करते हैं जैसे उनका मैसेज शिवम सर सेंड कर रहे हैं। ठीक है? कोई सवाल लेकर के वहां पर भेज रहा है। कोई कुछ भेज रहा है। कोई फॉर्म को रिलेट रिगड चीजें भेज रहा है। तो वहां पे तो मैं देखता नहीं हूं। टीम को उतनी ज्यादा जानकारी है नहीं। टीम को केवल टेक्निकल चीजों की जानकारी है। आपके ऐप से रिलेटेड जानकारी है। ठीक है? चलिए फिलहाल स्टार्ट करेंगे आज की क्लास को। चलिए अगर हम विज्ञान की बात करते हैं तो 25 नंबर का यह पेपर आता है और इसको हम सभी ने अपने परीक्षावीर ऐप पर बहुत ही अच्छे तरीके से और बहुत ही बढ़िया तरीके से हम सभी ने इसको वहां पर पढ़ा है खूब मस्त तरीके से। आज हम लोग इसका रिवीजन करेंगे। आज क्या मतलब आज और कल दो दिन हम लोग रिवीजन करेंगे क्योंकि हम मैराथन को दो पार्ट में बांटते हैं जिससे आप लोग अच्छे तरीके से इन्हें रिवीजन कर पाएं। और जैसा कि मैं मैंने पहले ही आपसे कहा कि इसी अप्रैल में मैं उम्मीद करूंगा कि सारे सब्जेक्ट्स की मैराथन आपकी खत्म हो जाए। ठीक है? चलिए सबसे पहली चीज जो आज हम पढ़ेंगे डार्विनवाद। किसकी बात करें? डार्विनवाद। अच्छा देखो तीन प्रकार की चीजें हमें इसमें पढ़नी है और इन तीनों में से एक सवाल आपके एग्जाम में जरूर आएगा। समझना। एक होता है आपका डार्विनवाद। समझना एक होता है बेटा डार्विनवाद उसके बाद दूसरा होता है लैमार्कवाद ठीक है लैमार्कवाद और तीसरा आपका है उत्परिवर्तनवाद क्या है उत्परिवर्तनवाद उत्परिवर्तनवाद इन तीनों में से एक सवाल आपके एग्जाम में जरूर पूछा जाएगा चाहे आपसे पूछा जाएगा डार्विनवाद डार्विनवाद की अगर हम बात करें तो डार्विनवाद में प्राकृतिक चयन को बताया गया। ठीक है? प्राकृतिक चयन का सिद्धांत बताया गया। इसमें जो है बच्चा प्राकृतिक चयन का सिद्धांत बताया गया या फिर हम कह सकते हैं योग्यतम की उत्तरजीविवता। क्या होता है? योग्यतम की उत्तरजीविवता। तो अगर आपके एग्जाम में एक सवाल आए कि योग्यतम की उत्तरजीविवता या प्राकृतिक चयन का सिद्धांत किसने दिया? तो यह सिद्धांत दिया था किसने? आप सबके डार्विन अच्छा क्या हुआ है वॉइस कट रही है जस्ट वन सेकंड भाई चलिए अब बताइएगा अब बताइए वॉइस ठीक है हां जी अब बताइएगा वॉइस ठीक है कोई दिक्कत नहीं है मतलब चलिए अब बता दीजिएगा क्या वॉइस आपको सही आ रही है कोई दिक्कत तो नहीं है भाई? हां। ठीक है। अब ठीक है। चलिए स्टार्ट करेंगे फिर। तो यहां से देखो एमसीक्यू [हंसी] में दो सवाल आता है कि योग्यतम की उत्तरजीविवता और प्राकृतिक चयन के सिद्धांत किस वाद से संबंधित है? तो वो डार्विनवाद से संबंधित है। वहीं पर अगर हम बात करते हैं लैमार्कवाद की। किसकी बात करते हैं? लैमार्कवाद की। अच्छा ठीक आ रही है ना? कोई दिक्कत तो नहीं है बेटा। वॉइस अभी भी ठीक नहीं है बेटा। चलिए अब बताइएगा। चलिए अब बताइएगा। ठीक है। चलिए आ गया भैया। ठीक है। चलिए स्टार्ट करते हैं। हां ठीक है। चलिए आगे बढ़ेंगे। अब हम चलिए ठीक है। अब अगर लैमार्कवाद की बात करेंगे तो इन्होंने किसकी बात की थी? इन्होंने बात की थी उपार्जित लक्षणों की वंशागति। उपार्जित लक्षणों की वंशागति। किसकी बात की इन्होंने? उपार्जित लक्षणों की वंशागति सब समझाऊंगा। ये प्राकृतिक चयन सिद्धांत क्या है? योग्यतम की उत्तरजीविवता क्या है? उपार्जित लक्षणों की वंशागति क्या है? ये सारी चीजें मैं आपको बताऊंगा। आप इसके लिए परेशान मत होइएगा। ठीक है? अब आइए देखते हैं यहां पे बेटा। सबसे पहले यहां पर जो चीजें दी गई समझना। सबसे पहले यहां पर जो चीजें दी गई ध्यान से समझना। डार्विनवाद आपके एग्जाम में सवाल आएगा कि डार्विनवाद से आप क्या समझते हैं? समझना। तो आपको लिखना है बहुत इंपॉर्टेंट है। मैंने पहले ही बता दिया कि इन तीनों में से एक आएगा आपके एग्जाम में। इंपॉर्टेंट है। डार्विनवाद आपका जो है बेटा इंपॉर्टेंट है। डार्विन के सिद्धांत को प्राकृतिक वर्णवाद के नाम से जाना जाता है। यही चीज तो मैंने अभी आपको बताया। प्राकृतिक वर्णवाद या फिर प्राकृतिक चयन का सिद्धांत। ठीक है? इस सिद्धांत पर कार्य करने वाले दो अंग्रेज वेलेस व डार्विन थे जो स्वतंत्र रूप से इस पर अध्ययन करते हुए लगभग समान निष्कर्ष पर पहुंचे थे। समझना मेरी बात को। चलिए आगे बढ़ेंगे। अभी हम डार्विनवाद के बारे में अच्छे से एक-एक पॉइंट को हम क्लियर करते हुए चलेंगे। अब देखो ये यहां पर देखिए यह सिद्धांत प्राकृतिक चयन के सिद्धांत पर आधारित है। डार्विनवाद के मुताबिक यहां से मोस्ट इंपॉर्टेंट चीज स्टार्ट हुआ क्योंकि आपसे पूछा जाएगा कि डार्विनवाद क्या है? तो अब आपको क्या बताना है कि डार्विन वाद के मुताबिक सभी प्रजातियां वंशानुगत अंतरों के कारण प्राकृतिक चयन के जरिए विकसित होती हैं। इस प्रक्रिया में पर्यावरण के लिए ज्यादा उपयुक्त लक्षण वाले जीव ज्यादा जीवित रहते हैं और प्रजनन करते हैं। समय के साथ इन लक्षणों का जमाव होता है और नई प्रजातियां बन जाती है। अब मैं आपको समझाऊंगा। जी। अब मैं आपको समझाऊंगा। मेरी बात को बहुत ध्यान से। से अब आप सुनिएगा जो मैं आप सभी को बताने चल रहा हूं। भाई देखिएगा होता क्या है मैं आपको बता रहा हूं। समझिए मेरी बात को। जस्ट वन सेकंड चलिए अब ठीक है। चलिए स्टार्ट करें भाई। तो अगर आपसे कहा जाए देखो इन्होंने क्या कहा था? आपने एक कहानी पढ़ी होगी जिराफ वाली। ठीक है? जिराफ वाली और जिराफ वाले पर लैमार्क और डार्विन के विचारों में मतभेद था। अब समझना मेरी बात को। हुआ क्या इसमें? दरअसल इसमें हुआ क्या कि जिराफ वाली जब आपने कहानी सुनी जिसमें ये कहा गया कि जो गिरा जिराफ है उसकी गर्दन लंबी क्यों हुई? यही चीज तो आपने पढ़ा था। ठीक है? जिराफ की जो गर्दन है वो लंबी क्यों हुई? तो जिराफ की गर्दन लंबी क्यों हुई? इस पर लैमार्क और डार्विन दोनों ने अपने-अपने विचार दिए। लैमार्क ने क्या विचार दिया? लैमार्क ने ये कहा कि दरअसल एक बात देखो ये मैं कहानी सुना रहा हूं। बहुत ध्यान से समझना। दोनों के विचार समझ में आ जाएंगे। दरअसल जब ये बात आई सबके दिमाग में कि भाई सारे जानवरों की गर्दन तो छोटी होती है। तो जिराफ की गर्दन लंबी क्यों हुई? तो इस पर लैमार्क और डार्विन दो लोगों ने अपने-अपने विचार दिए। लैमार्क ने यह कहा कि एक बार एक जगह पर सूखा पड़ गया था। लैमार्क ने क्या कहा कि एक बार एक जगह पर सूखा पड़ गया था। और नीचे भूमि पर जो घास थी वो सूख गई थी। ठीक है? क्या हो गई थी? सूख गई थी। तो जो जिराफ थे ये पत्तियां खाने के लिए ये क्या किए? पत्तियां खाने के लिए मतलब अपनी भूख मिटाने के लिए ये पौधों की पत्तियां खाने लगे। और पत्तियों को खाने के लिए ये अपनी गर्दन को पेड़ की तरफ क्या करने लगे? बढ़ाने लगे। तो जब तक तो नीचे की पत्तियां खाई तब तक तो कोई दिक्कत नहीं हुई। लेकिन जब नीचे की पत्तियां सब खत्म हो गई तब इन जिराफ ने अपनी गर्दन को और आगे के दोनों पैर को जैसे भाई अब मान लीजिए मेरे हाथ ना हो। ठीक है? और मैं एकदम से इस पोजीशन में रहूं और मुझे आगे की पत्ती खानी है तो मैं क्या करूंगा? मैं अपनी गर्दन को ऊपर की तरफ खींचूंगा। अपने आगे के हाथ को ऊपर की तरफ खींचूंगा। तो इन्होंने कहा कि सारे जिराफ यही करने लगे कि पत्तियों को खाने के लिए वो अपनी गर्दन को ऊपर की तरफ खींचने लगे और जब वो ऊपर की तरफ खींचने लगे तो क्या हुआ? उनकी गर्दन जो है लंबी हो गई। इसे क्या कहा गया? इसे कहा गया कि भैया जब उनकी गर्दन लंबी हो गई तो भाई जैसे अब गर्दन लंबी हो गई उनकी। तो उनसे जो संताने पैदा हुई उनकी भी गर्दन लंबी हुई। मतलब इनके कहने का मतलब यह था कि अगर इनके कहने का मतलब यह था कि अगर मान लीजिए कि मैं अपना एक हाथ कटा दूं। मान लीजिए शिवम सर अपना एक हाथ कटा दिए तो जब शिवम सर अपना एक हाथ कटा दिए तो मेरा जो लड़का पैदा होगा उसका भी कटा हाथ पैदा होगा। ऐसी तो होगी नहीं बात। तो लैमार्क इसी वजह से फेल हो गए थे। लैमार्क ने ये कहा कि पत्ती खाने के लिए सभी जो जिराफ थे वो अपनी गर्दन को ऊपर की तरफ खींचने लगे और उनकी गर्दन क्या हो गई बेटा? बढ़ गई और फिर जब उनसे संताने पैदा हुई तो उनकी भी गर्दन लंबी ही थी। जिसे इन्होंने कहा उपार्जित लक्षणों की वंशागति। इन्होंने कहा कि भैया अगर जिस भी जिराफ की गर्दन लंबी हो गई तो उसका जो संताने पैदा होंगी उनकी भी गर्दन लंबी होगी। दूसरी चीज फिर आते हैं डार्विन साहब। डार्विन ने कहा नहीं ऐसा कोई बात नहीं है। सूखा पड़ा था हम मान लिए। घास सूख गई हम यह भी मान लिए। ठीक है? उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं था। जब नीचे सूखा पड़ गया सारी घास खत्म हो गई। तब क्या हुआ? जितने भी जिराफ थे वो डिपेंड हो गए। पत्तियों के ऊपर। यहां तक सहमत थे। लैमार्क से यहां तक सहमत थे। लेकिन उन्होंने कहा कि जिराफ की गर्दन ऊपर खींचने की वजह से नहीं लंबी हुई थी। उन्होंने कहा कि जिराफ की गर्दन इसलिए लंबी हुई कि जो छोटे-छोटे जो जिराफ थे जो पत्तियों तक नहीं पहुंच पा रहे थे वो मर गए। वो भूख के मारे मर गए और वो जिराफ बच गए जिनकी गर्दन पहले से लंबी थी। वो बच गए क्योंकि वो खा लिए। क्या कर लिए? वो बच गए क्योंकि वो वहां तक पहुंच सकते थे। वो खा लिए। तो इसीलिए उन्होंने कहा प्राकृतिक चयनवाद का सिद्धांत। उन्होंने यह कहा कि यह जो हमारी प्रकृति है यह कमजोर लोगों को अपने पास नहीं रखती है। ये इनको खत्म कर देती है। इन्होंने कहा डार्विन ने कि जो ये प्रकृति है यह कमजोर लोगों को खत्म कर देती है। और जो इस प्रकृति में जीने का हकदार है वही यहां पर जीता है। तो उन्होंने कहा कि जिराफ पहले बहुत सारे थे उसमें से जो छोटी हाइट वाले जो जिराफ थे वो भूख के मारे मर गए। और जो लंबी गर्दन वाले जो जिराफ थे वो पेड़ों की पत्तियां खाकर जिंदा रह गए। हां अब उनसे जो बच्चे पैदा हुए वो लंबी गर्दन वाले पैदा होना शुरू हो चुके। तो इसी को कहते हैं योग्यतम की उत्तरजीविवता। मतलब देखो भाई डार्विन ने क्या कहा था? योग्यतम की उत्तरजीविवता। यानी कि इस प्रकृति ने यह कहा कि जो योग्य होगा वही जिंदा रहेगा। अब जैसे आप लोग सोचो आप में से लाखों करोड़ों बच्चे तैयारी करते हो शिक्षक भर्ती की। यूपीटेट का फॉर्म भरा जा रहा है। सुपर टेट का फॉर्म आएगा। 2530 लाख बच्चे फॉर्म भरेंगे उसका। वैकेंसी बहुत ज्यादा होगी तो 500 वैकेंसी होगी। तो मान लीजिए सपोज करिए 30 लाख फॉर्म भरा गया। इससे कम नहीं भरा जाएगा। इससे कम भरा ही नहीं जाएगा। याद रखना। मान लीजिए 30 लाख फॉर्म भरा गया या चलो 25 लाख ही फॉर्म भरा गया। वैकेंसी है 500। उसमें से 24 लाख बच्चे ऐसे होंगे जो कितना भी कोशिश कर लें उनका सिलेक्शन नहीं होगा। मतलब नौकरी उन्हें ही मिलेगी जिनके अंदर योग्यता होगा। अगर निष्पक्ष तरीके से पेपर कराया गया तो अब रुपया-वपया देकर पेपर लीक करवा के समझते ही उन्हें और उत्तर प्रदेश में बहुत सारी चीजें होती हैं। तो अगर उस तरीके से कोई पा गया तो नहीं कह सकते। नहीं तो जो योग्य होगा वही नौकरी पाएगा। और यही चीज डार्विन ने कहा अपने प्राकृतिक वर्णवाद के सिद्धांत में, प्राकृतिक चयन के सिद्धांत में कि जो योग्य होगा वही जिंदा रहेगा। तो योग्यतम की उत्तरजीविवता की बात किसने की? डार्विन ने की। ठीक है? चलिए तो बाकी दोनों स्टोरी समझ में आ गया। लैमार्क ने कहा था कि जिराफ की गर्दन इसलिए लंबी हुई क्योंकि वो गर्दन को खींच खींच कर पत्ती काट खा रहे थे। तो जब उनकी गर्दन लंबी हो गई तो उनकी संतानों की भी गर्दन लंबी होने लगी। और डार्विन ने यह कहा कि ऐसा नहीं था। जो छोटे कद के जो जिराफ थे वो भूख के मारे मर गए थे और जो लंबी गर्दन वाले थे वही जिंदा बचे और उन्हीं से जो संताने पैदा हुई उनकी गर्दन लंबी हुई। तो ये दोनों चीजें आपको समझ में आ गई। अब आइए एक-एक पढ़ते हैं। डार्विनवाद क्या है कि देखना समझना। डार्विनवाद के मुताबिक सभी प्रजातियां वंशानुगत अंतरों के कारण प्राकृतिक चयन के जरिए विकसित होती हैं। इस प्रक्रिया में पर्यावरण के लिए ज्यादा उपयुक्त लक्षण वाले जीव ज्यादा जीवित रहते हैं और प्रजनन करते हैं। मतलब जो पर्यावरण के जो अनुरूप होते हैं जो अपने आप को पर्यावरण के अनुसार ढाल लेते हैं वो ज्यादा जीवित रहते हैं और प्रजनन करते हैं। समय के साथ इन लक्षणों का जमाव होता है और नई प्रजातियां बन जाती हैं। मतलब जैसे कि मान लीजिए कोई मान लीजिए कोई जीव है उसके अंदर जैसे मान लो कि शिवम सर हैं। ठीक है? मान लीजिए कि शिवम सर हैं। हमारी संतान के अंदर थोड़ा सा बदलाव हुआ। उसकी संतान के अंदर और थोड़ा सा बदलाव हुआ। फिर उनकी संतान के अंदर थोड़ा सा और बदलाव हुआ। और जब यह बदलाव पीढ़ी दर पीढ़ी कई वर्षों तक होता रहता है तो अंत में ऐसा आता है कि एक नया जीव बन जाता है या हम कह सकते हैं एक नई प्रजाति बन जाती है। तो वही चीज डार्विन ने कहा था कि जब थोड़ा-थोड़ा शरीर में परिवर्तन होता रहता है और कई वर्षों कई सदियों बाद में वहां पर एक नया जीव बन जाता है। ठीक है? जैसे उन्होंने क्या कहा? समझिए। चलिए आगे बढ़े तो ये बात पहले बताओ यहां तक समझ में आ गया। डार्विनवाद का सिद्धांत समझ में आया? डार्विन ने सीधा-सीधा कहा कि सभी प्रजातियां वंशानुगत अंतरों के कारण प्राकृतिक चयन के जरिए विकसित होती हैं। इस प्रक्रिया में पर्यावरण के लिए ज्यादा उपयुक्त लक्षण वाले जीव ज्यादा जीवित रहते हैं और प्रजनन करते हैं। समय के साथ इन लक्षणों का जमाव होता है और नई प्रजातियां बन जाती हैं। आगे अब यह एक सवाल आया। यह सवाल तीनचार बार आपके एग्जाम में पूछा गया कि डार्विन के अनुसार जिराफ का विकास बताइए। डार्विन के अनुसार जिराफ का विकास बताइए। देखिए पहले जिराफों की गर्दन छोटी होती थी। पर्यावरण में बदलाव के कारण पत्तियां कम हो गई। पेड़ों की क्षमता से ज्यादा जिराफ हो गए। लंबी गर्दन वाले जिराफों को फायदा था क्योंकि वे उन पत्तियों तक पहुंच पाते थे जिन तक दूसरे जिराफ नहीं पहुंच पाते थे। लंबी गर्दन वाले जिराफों के जीवित रहने और प्रजनन करने की संभावना ज्यादा। अरे भाई जो जीवित रहेगा वही प्रजनन करेगा ना भाई। मरा हुआ प्रजनन थोड़ी करेगा भाई। तो वही चीज ये था। अब देखो पहले पूरी स्टोरी समझो। देखो इन जिराफों ने अपनी संतानों को लंबी गर्दन वाला गुण दिया। हर पीढ़ी में लंबी गर्दन वाले जिराफों की संख्या बढ़ती गई। आखिरकार सभी जिराफों की गर्दन लंबी हो गई। मतलब डार्विन ने ये कहा कि भाई जिराफों की गर्दन क्यों लंबी हुई? तो इन्होंने कहा कि भाई जब सूखा पड़ा क्या पड़ा जब सूखा पड़ा तो सूखा पड़ने पर क्या हुआ कि नीचे की घास खत्म हो गई और बचे कौन भाई दो प्रकार के वहां पे जिराफ थे एक जो छोटी गर्दन वाले थे एक जो बड़ी गर्दन वाले थे छोटी गर्दन वाले जो जिराफ थे वो भाई ऊपर पेड़ों पर नहीं पेड़ों से पत्ती नहीं खा सकते थे तो वो मर गए जो बच गए भाई वही प्रजनन करेंगे और उन्हीं से संताने पैदा होंगी और जब उनसे संताने पैदा हुई तो उनकी भी गर्दन लंबी हुई और धीरे धीरे-धीरे पीढ़ी दर पीढ़ी इनकी संख्या बढ़ती चली गई और आज के समय पर जो जिराफ है उनकी सभी की गर्दन लंबी है। यही बात डार्विन ने कहा था। अब एक बार बताओ क्या आपको चीजें समझ में आ गई? बोलिए। बोलो भैया इतनी बात समझ में आ गई भाई? आ गया बच्चा समझ में? तो पहले जिराफों की गर्दन छोटी होती थी। पर्यावरण में बदलाव के कारण पत्तियां कम हो गई। पेड़ों की क्षमता से ज्यादा जिराफ हो गए। लंबी गर्दन वाले जिराफों को फायदा था क्योंकि वे उन पत्तियों तक पहुंच पाते थे जिन तक दूसरे जिराफ नहीं पहुंच पाते थे। लंबी गर्दन वाले जिराफों के जीवित रहने और प्रजनन करने की संभावना ज्यादा थी। इन जिराफों ने अपनी संतानों को लंबी गर्दन वाले गुण दिए। हर पीढ़ी में लंबी गर्दन वाले जिराफों की संख्या बढ़ती गई और आखिरकार सभी जिराफों की गर्दन लंबी हो गई। अच्छा एक सवाल मैं पूछूंगा। डार्विन के पुस्तक का नाम कौन बताएगा? डार्विन के पुस्तक का नाम चलो बताओ डार्विन के पुस्तक का नाम क्या था? क्वेश्चन आता है डार्विन के पुस्तक का नाम एमसीक्यू में पूछा गया है एक बार। एक नहीं दो-तीन बार पूछा गया है। जी ठीक है? ओरिजिन ऑफ़ स्पीच क्या हो जाएगा? स्पीच नहीं स्पीशीज। ओरिजिन ऑफ़ स्पीशीज। ये इनकी पुस्तक का नाम है। ठीक है? चलिए अच्छा अब बताइए आप लोग यह लिख ले जाओगे ना कि डार्विन के अनुसार जिराफ का विकास कैसे हुआ? एक बार बताइए जी आ गया भैया डार्विन के अनुसार जिराफ का विकास बता ले जाएंगे आप लोग। ठीक है? उसके बाद अब आते हैं अगला जो हमारे पास है लैमार्कवाद। लैमार्कवाद के बारे में हम आपको बता ही चुके हैं। इन्होंने कहा था कि जिराफों की गर्दन इसलिए लंबी हुई क्योंकि वह बार-बार क्या करते थे? उचक-उचक के अपने आगे के पैर को खींचते थे। गर्दन को खींचते थे। इसलिए उनकी गर्दन बड़ी हो गई। यह लैमार्क ने कहा था। लैमार्कवाद क्या है बेटा? लैमार्कवाद विकास का एक सिद्धांत है। यह सिद्धांत बताता है कि जीवों के जीवन काल में होने वाले शारीरिक बदलाव उनकी संतानों में भी आ सकते हैं। इन्होंने ये कहा कि जो हमारे जैसे मान लो कोई मनुष्य है और उसने अपने जीवन में कोई अपने शरीर के किसी अंग में बदलाव कर लिया। ठीक है? अपने शरीर के अंग में उन्होंने क्या कर लिया? बदलाव कर लिया। तो उनकी संतानों में भी वो बदलाव हो सकता है। यह किसने कहा था? यह कहा था लैमार्क ने। जैसे जब जिराफ ने गर्दन को उठाकर पत्ती खाई और उसकी गर्दन जब लंबी हो गई तो उन्होंने कहा कि उनकी जो संताने होंगी उनकी भी गर्दन लंबी होने लगी। ये लैमार्क ने कहा था। हालांकि इसका खंडन हुआ था। हालांकि लिखना आपको लैमार्कवाद में यही है जो इन्होंने बताया था। लैमार्कवाद विकास का एक सिद्धांत है। यह सिद्धांत बताता है कि जीवों के जीवन काल में होने वाले शारीरिक बदलाव उनकी संतानों में भी आ सकते हैं। इसे लैमार्कियन वंशानुक्रम या नौ लैमार्कवाद के नाम से भी जाना जाता है। लैमार्कवाद फ्रांस के जीव वैज्ञानिक लैमार्क ने दिया था। लैमार्क के मुताबिक वातावरण में बदलाव के कारण जीवों के अंगों का इस्तेमाल ज्यादा या कम हो सकता है। चलिए बताइए लैमार्क को आज समझ में आ गया? हां जी बिल्कुल बताइए सभी बच्चे स्क्रीनशॉट लेते चलेंगे ठीक है पीडीएफ वडीएफ का इंतजार मत किया करो स्क्रीनशॉट लेते हुए चला करो ठीक है पढ़ाई करो हमेशा एक चीज याद रखना सफलता का कोई शॉर्टकट कभी नहीं होता है और जिस दिन आप अपने दिमाग से ये चीज निकाल दोगे उस दिन जो है आप सही से पढ़ना स्टार्ट कर दोगे बेटा ठीक है गुस्सा मुझे कभी-कभी इसीलिए आती है क्योंकि आप पढ़ना नहीं चाहते हो मतलब 6 महीने बच्चे नहीं पढ़ते हैं और जब एग्जाम आ जाता है सर पर तब भी सोचते हैं कि अभी भी हम क्लास नहीं करेंगे। हम पीडीएफ से पढ़ लेंगे। हम नोट से पढ़ लेंगे। फिर बाद में जब एक आध दो सब्जेक्ट में बैक आ जाती है तब रोते हुए घूमते हैं कि स्कूल वाले ₹1000 मांग रहे हैं। स्कूल वाले ₹5000 मांग रहे हैं। तब रोते हुए घूमेंगे। लेकिन जब पढ़ने का समय होगा अरे चलो कम से कम 6 महीना नहीं पढ़े। लेकिन लास्ट के 15 20 दिन 25 दिन तो अच्छे से पढ़ ही सकते हो ना। 15 20 दिन तो पढ़ सकते हो ना। उसमें भी नहीं पढ़ेंगे। गुरुजी नहीं पीडीएफ दे दो। इनको पीडीएफ दे दो। ये घर पे बैठ के पीडीएफ पढ़े। वाली बेटा पढ़ते चलो स्क्रीनशॉट लेते चलो। ठीक है? चलिए अब आते हैं उत्परिवर्तनवाद। उत्परिवर्तनवाद किसने दिया था? ये सवाल एमसीक्यू में बहुत आया है। ठीक है? बहुत ज्यादा एमसीक्यू में ये सवाल आया है। मोस्ट इंपॉर्टेंट है। सर्वप्रथम सन 1901 में हॉलैंड के वनस्पत शास्त्री ह्यूगो डी ब्रिज ने उत्परिवर्तनवाद प्रस्तुत किया। उन्होंने सर्वप्रथम उत्परिवर्तन को इवनिंग प्रिमरोज नामक पौधे में देखा। ठीक है? इवनिंग क्रिम रोज के पौधे से कुछ ऐसे पौधे उत्पन्न हुए जो अपने जनक पौधे से बिल्कुल भिन्न थे। मतलब उत्परिवर्तनवाद में यह कहा गया कि जरूरी नहीं है कि जैसे उनके मम्मी पापा हैं, लड़का भी सेम वैसे ही हो। इन्होंने कहा कि आपकी संतान बिल्कुल आपसे भिन्न हो सकती है। ठीक है? जैसे लैमार्क ने कहा कि भैया वो उचकाउच के अपना जो लंबी गर्दन कर लिया और उनकी संतानों की भी गर्दन लंबी हो गई। डार्विन ने भी कहा कि भाई जो लंबी गर्दन वाला जिंदा रहा उन्हीं से लंबी गर्दन वाला पैदा हुआ। लेकिन उत्परिवर्तनवाद में इन्होंने ये कहा कि कभी-कभी ऐसा होता है कभी-कभी ऐसा होता है कि डायरेक्ट बदलाव हो जाता है। मतलब पौधा या जो उनके क्या बोल सकते हैं? जैसे मम्मी पापा उनके अलग हैं और उनका लड़का बिल्कुल अलग हो जाएगा। मतलब मम्मी पापा गोरे-गोरे दुई हाथ दुई पैर पता लगा उनका लड़का हो गया काला और उनके चार हाथ हो गया या तीन हाथ हो गया तो उन्होंने कहा कि कभी-कभी जो उनके जनक पौधे होते हैं या उनकी जनक जो होते हैं उनसे उनकी संताने पूरी तरीके से भिन्न होती हैं। तो उत्परिवर्तनवाद किसने दिया? ह्यूगो डिब्रज ने दिया। उन्होंने सर्वप्रथम उत्परिवर्तन को इवनिंग प्रिवनोज नामक पौधे में। अगर यह पूछा जाए कि उत्परिवर्तनवाद किस पौधे पर सबसे पहले उत्परिवर्तन के लिए प्रयोग किया था तो याद रखना इवनिंग प्रिमरोज इवनिंग प्रिमरोज के पौधे से कुछ ऐसे पौधे उत्पन्न हुए जो अपने जनक पौधों से बिल्कुल भिन्न थे। बताइए उत्परिवर्तनवाद के सिद्धांत क्या थे? अब इनको थोड़ा देखना इंपॉर्टेंट है। उत्परिवर्तनवाद का सिद्धांत क्या है? नई जीव जातियों की उत्पत्ति छोटीछोटी क्रमिक विभिन्नताओं के पीढ़ी दर पीढ़ी संचय के कारण नहीं होती। वरन एक ही बार में स्पष्ट एवं स्थाई उत्परिवर्तन के कारण होती है। अच्छा डार्विन ने क्या कहा था? डार्विन ने ये कहा था कि थोड़ा-थोड़ा बदलाव होता है। ठीक है? मतलब हमने यही तो कहा था अभी आपको डार्विन के बारे में कि जैसे पहले मेरे संतान में थोड़ी बदलाव होगी। फिर उनकी संतान में थोड़ी बदलाव, फिर थोड़ी बदलाव, फिर थोड़ी बदलाव और हजारों साल के बाद में हो सकता है एक नई प्रजाति बन जाए। लेकिन हगो डी ब्रज ने ये कहा अपने उत्परिवर्तनवाद के सिद्धांत में कि थोड़ा-थोड़ा बदलाव नहीं होता है। अचानक से भी बदलाव हो जाता है कि ठीक है मम्मी पापा ऐसे हैं और उनका लड़का दूसरी प्रजाति का हो गया। समझ रहे हो ना बात को? यही चीज अगर कोई पूछे उत्परिवर्तनवाद का सिद्धांत क्या है? आप तुरंत लिख देना कि नई जीव जातियों की उत्पत्ति छोटी-छोटी क्रमिक विभिन्नताओं के पीढ़ी दर पीढ़ी संचय के कारण नहीं होती वरन एक ही बार में स्पष्ट एवं अस्थाई उत्परिवर्तन के कारण होती है। दूसरा क्या है? उत्परिवर्तन निश्चित नहीं होते। यह लाभदायक, हानिकारक या निरर्थक भी हो सकते हैं। यह किसी अंग विशेष में या अनेक अंगों में एक साथ हो सकते हैं। इनके कारण अंग पूर्ण विकसित या विलुप्त हो सकता है। मतलब इन्होंने यह नहीं कहा उत्परिवर्तनवाद में ये तो कहा कि तुरंत भी बदल सकता है। और इन्होंने कहा कि पूरे शरीर में भी बदलाव हो सकता है या किसी एक अंग में बदलाव हो सकता है। आपका वो अंग अच्छा भी हो सकता है। वो अंग आपका बुरा भी हो सकता है। हो सकता है कि वो अंग ही विलुप्त हो जाए। तो इन्होंने क्या कहा अपने उत्परिवर्तनवाद के सिद्धांत में कि उत्परिवर्तन निश्चित नहीं होते हैं। यह लाभदायक, हानिकारक या निरर्थक भी हो सकते हैं। यह किसी अंग विशेष में या अनेक अंगों में एक साथ भी हो सकता है। इनके कारण अंग पूर्ण विकसित या विलुप्त भी हो सकता है। इन्होंने ये कहा कि भाई जो डार्विन ने कहा कि थोड़ा-थोड़ा बदलाव होता है वो थोड़ा-थोड़ा बदलाव नहीं होता। इन्होंने कहा कि जरूरी नहीं कि जिराफ की गर्दन लंबी ही हो। हो सकता है कि जिराफ की गर्दन लंबी है और उनकी जो शैत संतान हो उसकी गर्दन ही ना हो। ये भी इन्होंने कह दिया कि आप लंबी गर्दन की बात डार्विन जी कर रहे हो। हो सकता है कि जो जिराफ पैदा हो उसकी गर्दन ही ना हो या हो सकता है उसकी गर्दन और बड़ी हो जाए। तो इन्होंने पॉजिटिव और नेगेटिव दोनों चीजों पर इन्होंने बहुत विशेष ध्यान दिया। देखो यही चीज तो इन्होंने कहा कि भैया नई जीव जातियों की उत्पत्ति छोटी-छोटी क्रमिक विभिन्नताओं पीढ़ी दर पीढ़ी संचय के कारण नहीं होती है वरन एक ही बार में स्पष्ट एवं अस्थाई उत्परिवर्तन के कारण होती है। दूसरा क्या कहा कि उत्परिवर्तन निश्चित नहीं होते हैं। यह लाभदायक, हानिकारक या निरर्थक भी हो सकते हैं। यह किसी अंग विशेष में या अनेक अंगों में एक साथ हो सकते हैं। इनके कारण अंग पूर्ण विकसित भी हो सकते हैं और विलुप्त भी हो सकते हैं। तीसरा क्या कहा कि जाति का पहला सदस्य जिसमें उत्परिवर्तन का लक्षण प्रदर्शित होता है उत्परिवर्ती कहलाता है और यह सदस्य शद्र नस्ल का होता है। जैसे मान लीजिए कि ये मान लीजिए कोई एक व्यक्ति है। इनके दुई हाथ हैं। ये मान लीजिए कोई महिला है। ठीक है? ये कोई महिला है। इनके भी दो हाथ है। और इनका जो पहला परिवर्तन हुआ संतान का मान लीजिए कि उसके तीन हाथ हैं। समझना। ठीक है? उसकी मान लीजिए। ठीक है? ये इस प्रकार का है और मतलब और मान लीजिए पैर भी मान लो इसके दो पैर हैं या तीन चार पैर रख लो इनको। चलो चार पैर हो गए। मान लीजिए इनको चार पैर हो गए। तो जो सबसे पहले जो परिवर्तन होगा ये जैसे सबसे पहला जो परिवर्तन हुआ इसे हम उत्परिवर्ती या शुद्ध नस्ल का कहेंगे। मतलब जिस में सबसे पहले परिवर्तन होगा उसे हम शुद्ध नस्ल का कहेंगे। बताइए आ गई बात समझ में? देखो बेटा ये मैं एग्जांपल के लिए बताया हूं और कुछ नहीं। ऐसे पौधे में भी होता है, जानवरों में भी होता है और हर जगह पे हो सकता है। बताइए उत्परिवर्तनवाद का सिद्धांत कितने बच्चों को समझ में आ गया? बोलिए हम बोलिए। कितने बच्चों को समझ में आ गया? हम जी बताइए सर ये इंपॉर्टेंट है क्या सर इतना डिटेल से बेटा सारे इंपॉर्टेंट है मैंने स्टार्टिंग में ही आपको बोल दिया है कि डार्विनवाद लैमार्कवाद और उत्परिवर्तनवाद में से एक आएगा देखो एक चीज तो ध्यान रखना मैं मैराथन में कोई भी प्रश्न लाता हूं तो वो इंपॉर्टेंट ही होता है समझ रहे हो ना एकदम समझ लीजिए कि एकदम जो उसका मेन होता है ना मेन इंग्रेडिएंट वह सारा मैं यहां पे लाता हूं मैराथन में। तो मैराथन में एक भी हेडिंग मेरे द्वारा लाई गई उसको इग्नोर मत करना। याद रखना हां उसको इग्नोर नहीं करना है। ये सारे के सारे इंपॉर्टेंट होते हैं। समझ में आ गई बात? जी चलिए तो पहले बताइए डार्विनवाद, लैमार्क वाद और उत्परिवर्तनवाद ये तीनों आपको समझ में आ गया? ठीक है? आगे बढ़िए। लाइक कर दो। अगर आपको चीजें समझ में आ रही हैं तो प्लीज एक बार लाइक कर दीजिए आप लोग। जी वीडियो को लाइक कर दीजिए, शेयर कर दीजिए। चैनल पे आप अगर नए हैं तो प्लीज आप चैनल को पहले सब्सक्राइब कर दीजिए। बेल आइकन को दबा दीजिए जिससे आपको डेली नोटिफिकेशन आती रहे। 8:30 बजे मेरी क्लास चलती है डेली। आप सभी आइए। ठीक है? अच्छे से आप लोग पढ़िए मस्त तरीके से। जी। आ गया भैया समझ में? चलिए अब आइए आगे बढ़ते हैं। अब हमारे पास अगला टॉपिक है पारिस्थितिकी तंत्र। अब ये पारिस्थितिकी तंत्र किसे कहते हैं? ये एक नंबर का सवाल आपके एग्जाम में आता है। पारिस्थितिकी तंत्र। पारिस्थितिकी तंत्र एक निश्चित क्षेत्र में है। मोस्ट इंपॉर्टेंट है। समझना। पारिस्थितिकी तंत्र एक निश्चित क्षेत्र में उपस्थित सजीव जीवों तथा उन निर्जीव तत्वों का समूह है जिनके साथ वे अंतः क्रिया करते हैं। तो अगर आपसे कहा जाए कि पारिस्थितिकी तंत्र क्या है? तो पारिस्थितिकी तंत्र एक निश्चित क्षेत्र में उपस्थित सभी जीवों तथा उन निर्जीव तत्वों का समूह है जिनके साथ जैसे होता क्या है? पारिस्थितिकी में दो प्रकार की चीजें होती है। जैसे एक हो गया सजीव और एक हो गया निर्जीव। ये दोनों आपस में एक दूसरे के साथ अंतः क्रिया करते। अच्छा एक बात बताओ जैसे हम लोग सजीव हैं। ठीक है? हम लोग सजीव हैं। क्या हम लोगों का निर्जीवों से कोई मतलब नहीं है? सच बताना। है ना मतलब? तो हम लोग पारिस्थितिकी तंत्र का क्या हुए? एक हिस्सा हुए। भाई जैसे ऐसा तो है नहीं कि हमें हर एक खाली सजीव सजीव से ही जरूरत है। भाई ये मेरी पेन निर्जीव है तो क्या इससे मैं संबंध नहीं रखता हूं? बिल्कुल रखता हूं। ये मेरा बोर्ड निर्जीव है। पंखा निर्जीव है। यहां पर जितने भी क्या बोल सकते हैं? पर्दे लगे हुए हैं। मतलब हर एक चीज जो निर्जीव है, कुर्सी है, फर्नीचर है, कंप्यूटर है, लैपटॉप है, सिस्टम है। ये सारी चीजें निर्जीव है। लेकिन हमारी इनसे जरूरत है कि नहीं है? तो सजीव और निर्जीव जिनसे अंतः क्रिया करते हैं, एक साथ अंतः क्रिया करते हैं। उसे ही हम पारिस्थितिकी तंत्र कहते हैं। तो सीधा पूछा जाएगा कि पारिस्थितिकी तंत्र से आप क्या समझते हैं? तो पारिस्थितिकी तंत्र एक निश्चित क्षेत्र में एक निश्चित क्षेत्र में उपस्थित सजीव जीवों तथा उन निर्जीव तत्वों का समूह है जिनके साथ वे अंतः क्रिया करते हैं। बताइए इतना आ गया समझ में? भाई आ गया समझ में पढ़ते चलो भैया एक-एक चीज आपके दिमाग में ऐसा बैठा देंगे ना बेटा कि जिंदगी में नहीं भूलोगे किसी एक निश्चित क्षेत्र में जैसे मान लो मेरा एक गांव है। ठीक है? मेरा एक गांव है। हमारे उस गांव में मान लीजिए मैंने अब मैं पूरे देश की बात नहीं। मैं एक निश्चित क्षेत्र की बात कर रहा हूं। मेरा एक गांव है। उस गांव में सजीव भी हैं, निर्जीव भी हैं। और हम सभी एक दूसरे के साथ अंतः क्रिया करते हैं। तो इसे हम पारिस्थितिकी तंत्र कहते हैं। पारिस्थितिकी तंत्र की संरचना क्या है? देखना। आपसे पूछा जाए कि पारिस्थितिकी तंत्र की संरचना बताओ। तो पारिस्थितिकी तंत्र को मोटे तौर पर दो घटकों में विभाजित किया जाता है। अजैविक घटक और जैविक घटक। पारिस्थितिकी तंत्र की संरचना अजैविक और जैविक घटकों के बीच परस्पर क्रिया के कारण बनती है जो स्थान और समय के साथ बदलती रहती है। चलिए इतना बताइए। अच्छा एक बात हमें आप बताइए सभी बच्चे। बहुत सुंदर-सुंदर बच्चे हो आप लोग। अत ना सुंदर बच्चे तो हम आज तक देखभा नहीं किए हैं। हां जी बिल्कुल बिल्कुल हमें बताइए अजैविक और जैविक घटक कौन-कौन से होते हैं? चलो एक बार बताइए अजैविक घटक में कौन आता है और जैविक घटक में कौन आते हैं? भाई मेरे बताओ। अजैविक घटक में कौन आते हैं और जैविक घटक में कौन आते हैं? देखो मैं आपको बताता हूं बेटा। देखो मैं बताऊंगा क्योंकि मुझे ना आप लोगों को तेज करना है। सरकारी नौकरी तो मिलेगी ही मिलेगी। लेकिन ऐसा रहेगा ना कि आप दुनिया से अलग दिखोगे क्योंकि आपको हम ऐसा तैयार करके आपके विभाग में भेजेंगे ना बेटा कि हर एक छोटी-छोटी चीज आपको पता होगी वहां पर जैविक घटक क्या होता है और अजैविक घटक क्या होता है बेटा समझना जैविक घटक की अगर हम बात करें तो इसमें सजीव आते हैं। कौन आता है बेटा? इसमें सजीव आते हैं। सजीव और जो अजैविक घटक होते हैं ना बेटा इसमें निर्जीव आते हैं। निर्जीव का मतलब क्या होगा बेटा? जैसे सूर्य का प्रकाश हो गया। ठीक है? तापमान हो गया। ठीक है? हवा हो गई। यह सब क्या हो गए बेटा? ये सब अजैविक घटक के अंतर्गत आ गए। क्या हो गए बेटा? अजैविक घटक में आ गए। जल हो गया, मिट्टी हो गया। ये सब हो गया ना? मिट्टी हो गया। ये सब अजैविक घटक में आते हैं। वहीं पर अगर हम जैविक घटक की बात करें तो जैविक घटक में सजीव हो गया। सजीव कौन होता है? ये बताने की जरूरत तो है नहीं बेटा। जीव-जंतु हो गया। ठीक है? पेड़-पौधे हो गए। ये सब किस में आते हैं? जैव घटक जैविक घटक में आते हैं। तो अगर आपसे कोई कहे कि पारिस्थितिकी तंत्र की संरचना बताओ तो आप कहिएगा कि पारिस्थितिकी तंत्र को मोटे तौर पर दो घटकों में विभाजित किया जाता है। अजैविक और जैविक घटक। पारिस्थितिकी तंत्र की संरचना अजैविक और जैविक घटकों के बीच परस्पर क्रिया के कारण बनती है जो स्थान और समय के साथ बदलती रहती है। अब बताइए क्या आपको संरचना समझ में आ गया बच्चा? ओ मेरे भैया लोग बता दो भैया ना गुस्सा हो बताओ संरचना समझ में आ गई सबको मजा नहीं आएगा तो बताना यहां पे भांगड़ा डांस भी किया जाएगा आपके मनोरंजन का पूरा ध्यान यहां पे रखा जाएगा आप सभी के मनोरंजन का यहां पे पूरा ध्यान रखा जाएगा हां जी नाश्ता पानी की भी व्यवस्था किया जाएगा आप सभी के लिए समोसे दही जलेबी रबड़ी जलेबी सबका जो है यहां पे इंतजाम किया जाएगा बताइए चलिए आगे बढ़े अब आते हैं एक बहुत इंपॉर्टेंट चीज पर। खाद्य श्रृंखला। फूड चेन। फूड चेन क्या होता है बेटा? समझना। फूड चेन क्या होता है? आपने देखा होगा कि एक होता है बेटा उत्पादक। क्या होता है? अगर मैं फूड चेन की बात करूं। ये फूड चेन क्या होता है? अब इनको एक ध्यान से समझना। यहां से सवाल खूब सुंदर तरीके से आता है बेटा। खूब सुंदर तरीके। अगर हम फूड चेन की बात करेंगे। हां जी। चलिए बहुत अच्छा सवाल। एग्जाम में सवाल कैसे पूछा जाएगा? खाद्य श्रृंखला से आप क्या समझते हैं? यही सवाल आएगा। खाद्य श्रृंखला से आप क्या समझते हैं? समझिए। हां। वाह भाई वाह। कुछ ज्यादा नहीं तेज हो गए हो आप लोग। हां। ठीक है। देखो होता क्या है भाई मेरे। देखना इसमें होता है एक उत्पादक। देखो हर एक जीव जो है ना एक दूसरे पर डिपेंड है उत्पादक। उसके बाद होता है बेटा प्राथमिक उपभोक्ता। क्या होता है बेटा? उसके बाद होता है प्राथमिक उपभोक्ता। हर एक चीज बताऊंगा। बिल्कुल ऐसे शांति से खाली सुन लो मेरी बात प्रवचन जैसे। दूसरा है बेटा द्वितीयक उपभोक्ता। क्या है? द्वितीयक उपभोक्ता। और इसी के बाद होता है उच्च उपभोक्ता। क्या होता है? उच्च उपभोक्ता। ठीक है? उच्च उपभोक्ता। ठीक है? चलिए ये हो गया। उत्पादक में क्या होता है बेटा? देखो हर एक इंसान एक दूसरे पर डिपेंड है। जैसे उत्पादक में आ गए पेड़-पौधे। क्या आ गया बेटा? पेड़-पौधे। इन पेड़-पौधे को कौन खा रहा है बेटा? शाकाहारी। शाकाहारी कौन होते हैं बेटा? अच्छा अगर आपसे कभी भी कोई पूछे प्राथमिक उपभोक्ता कौन होते हैं बेटा तो शाकाहारी जितने भी शाकाहारी जीव होते हैं उन्हें प्राथमिक उपभोक्ता कहा जाता है। अब जैसे आपके एग्जाम में एक सवाल आएगा कि निम्न में से कौन प्राथमिक उपभोक्ता है? पहला ऑप्शन रहेगा पेड़-पौधे। दूसरा ऑप्शन रहेगा क्या? खरगोश। तीसरा ऑप्शन रहेगा शेर। चौथा ऑप्शन रहेगा बाज। ऐसे सवाल आते हैं कि बताइए निम्न में से कौन प्राथमिक उपभोक्ता है? पहला रहेगा पेड़-पौधे, दूसरा रहेगा खरगोश, तीसरा रहेगा बाघ, चौथा रहेगा बाज। ऐसा आ जाएगा सवाल। तो याद रखना हमेशा जो प्राथमिक उपभोक्ता होते हैं वो हमेशा शाकाहारी होते हैं। यानी जो केवल घास-पस खाते हैं। ठीक है? शाकाहारी में क्या आ जाएगा बेटा? गाय आ जाएगी। ठीक है? शाकाहारी में टिड्डा आ जाएगा। शाकाहारी में हिरण आ जाएगा। शाकाहारी में खरगोश आ जाएगा। ये सारे आपके क्या होते हैं बेटा? आपके प्राथमिक उपभोक्ता होते हैं। द्वितीयक उपभोक्ता में कौन होता है? जो इनको खाता है। द्वितीयक उपभोक्ता में आपके होते हैं बेटा मांसाहारी। कौन होता है बेटा? मांसाहारी होता है। जो मांस खाता है। ठीक है? मांसाहारी होता है। क्या होता है बेटा? मांसाहारी होता है। अब जैसे गाय हो गया तो गाय को शेर खा सकता है। टिड्डे को मेंढक खा सकता है। हिरण को शेर खा सकता है। खरगोश को शेर खा सकता है। या जो भी और भी अन्य मांसाहारी हो गए। तो इसमें मांसाहारी आ जाएगा। जैसे कि मेंढक हो गया, जैसे कि शेर हो गया, चीता हो गया। ठीक है? अच्छा उसके बाद उच्च उपभोक्ता क्या होता है? उच्च उपभोक्ता वो होता है जिसमें मांसाहारी इसमें भी होते हैं। उच्च उपभोक्ता में भी मांसाहारी होते हैं। मतलब बड़ा मांसाहारी। इसमें होते हैं छोटा मांसाहारी। इसमें होते हैं बड़ा मांसाहारी। मतलब जिन्हें और कोई नहीं खा सकता है। जैसे मान के चलो बाज हो गया। अब जैसे बाज हो गया। देखो कई प्रकार की फूड चेन बनती है। अब जैसे कहीं पर उच्च उपभोक्ता में बाघ भी आ जाएगा। कहीं-कहीं पर उच्च उपभोक्ता में बाघ भी आ जाता है। मतलब हर एक तरीके का चयन अलग-अलग बनता है। जैसे मैं आपको कुछ चैन बना के दिखा दे रहा हूं। आप समझना कुछ खाद्य श्रृंखला बना दूंगा। जैसे मान लीजिए मैंने यहां पे पौधा किया। तो पौधा पे कौन आया? टिड्डा आया। इस टिड्डा को कौन खाया? मेंढक खाया। इस मेंढक को कौन खाएगा? सांप खाएगा। और इस सांप को कौन खाएगा? बाज खाएगा। तो एक तो यह बन गया। एक यह बन गया। ऐसे ही यह हमारा पौधा है। इस पौधे को कौन खाया? खरगोश खाया। इस खरगोश को कौन खाया? मान लीजिए कोई भी बाघ या बाज खा गया। तो यहां पर इस वाले चयन में प्राथमिक क्या द्वितीयक उपभोक्ता ही बाज हो गया। इसमें उच्च उपभोक्ता में बाज आ गया। तो ऐसे इनका जो फूड चैन होता है ना बेटा वो बढ़ता चला जाता है। क्या होता है? बढ़ता चला जाता है। जैसे एक बनेगा पौधा। इस पौधा को किसने खाया? हिरण ने खाया। हिरण को कौन खा सकता है? बाघ खा सकता है। कौन खा सकता है? बाघ खा सकता है। अब कोई कहे कि बाघ को बाघ खाएगा। तो ऐसा नहीं। हर एक फूड चेन में उपभोक्ता और उच्च उपभोक्ता दोनों बदलते रहते हैं। वह डिपेंड करेगा कि भैया वह फूड चेन किसका बना है। कीड़े-मकोड़े का बनेगा तो यहां पर आएगा। पौधे का बनेगा तो इस तरीके से बनेगा। तो हर एक तरीके का जो फूड चेन होता है वो अलग-अलग बनता है। हालांकि आपको कंफ्यूज नहीं होना। ये खाली हमने आपको समझाया है। और आपके एग्जाम में जो सवाल आता है वो सवाल ऐसे ही पूछा जाएगा। प्राथमिक देखो प्राथमिक उपभोक्ता में तो शाकाहारी ही होते हैं लेकिन द्वितीयक उपभोक्ता और उच्च उपभोक्ता में मांसाहारी होते हैं। ठीक है? किसी में छोटा मांसाहारी और कहीं पर बड़ा मांसाहारी। ठीक है? आइए अब देखना खाद्य श्रृंखला क्या है बेटा? अब खाद्य श्रृंखला की परिभाषा याद रखना क्योंकि मोस्ट इंपॉर्टेंट है इसकी परिभाषा। परिभाषा पूछी जाती है। पारिस्थितिकी तंत्र में जीव भोजन के लिए दूसरे पर निर्भर होते हैं। जिससे एक श्रृंखला बन जाती है जिसे खाद्य श्रृंखला कहते हैं। देखो हमारे इस प्रकृति में भगवान ने एक सिस्टम के तरीके से सबको भेजा है। जैसे हम लोग कहते जैसे एक कोई मैं मूवी देख रहा था। एक कोई मैं मूवी देख रहा था तो उसमें हीरो जब गए विलन के पास और उन्होंने कहा कि आप जो है गरीबों को क्यों सता रहे हो? उनके झोपड़ी क्यों तोड़ दे रहे हो? अपनी बिल्डिंग क्यों बना रहे हो? तो उसने एक बड़ी गजब की लाइन बोली थी। उसने कहा यह भेदभाव हम नहीं कर रहे हैं। ये भगवान ने हमको करके भेजा है। भगवान ने ये बताया है कि भाई मेरे इस धरती पर वही जिंदा है जिसके अंदर योग्यता है और जो जीना चाहता है। जो डार्विन ने कहा था। सेम चीज वही चीज उन्होंने भी कह दिया। उन्होंने कहा भगवान ने स्वयं कहा है भाई अगर भगवान ये चाहते कि सभी दयावान हो कोई भी जो है किसी को हानि ना पहुंचाए ठीक है तो वो चलिए अब ठीक है कोई बात नहीं कोई बात नहीं कोई बात नहीं अब सही हो जाएगा डोंट वरी हां अब ठीक हो जाएगा परेशान मत होइए हां थोड़ा नेटवर्क इशू है अब ठीक हो जाएगा चलिए अब ठीक है। चलिए अब मैं बताता हूं आपको। तो मैंने क्या कहा? तो उसने एक बहुत अच्छी लाइन बोली। उसने कहा कि अगर भगवान ये चाहते कि भाई सभी दयावान हो। तो फिर वो भाई शेर को भी तो वो शाकाहारी बना के भेज सकते थे। भगवान जी समझना मेरी बात को। शेर को भी तो शाकाहारी बना के भेज सकते थे। सारे जीवों की रक्षा हो जाती। भाई जैसे अभी शेर गया वो किसी हिरण को पकड़ के खाने लगा। कुछ लोग गए शेर को गोली मार दी कि चलो हमने हिरण की जान बचा दिया। अरे भाई आपने हिरण की जान बचाई तो शेर को भी तो मार दिया। अगर शेर हिरण को नहीं खाएगा तो क्या खाएगा भाई? या तो भगवान उसको उस काबिल बनाए होते कि वो भी पेड़ पर चढ़कर अमरूद खा लेता। वो भी पेड़ पर चढ़ के आम खा लेता। भाई उसमें शेर की क्या गलती है कि वो हिरण को मार के खा रहा है। वो खरगोश को मार के खा जा रहा है। वो और अन्य जानवरों को मार के खा जा रहा है। इसमें शेर की क्या गलती है? उसने इतना बढ़िया लाइन बोला था और वो लाइन मतलब इतना सटीक मेरे दिमाग में बैठा था। ठीक है? तो मतलब फिर हीरो कहता है कि भाई मेरे इसमें उसके पास कोई और ऑप्शन नहीं है। तो वही चीज है ना उन्होंने सीधा-सीधा कहा भाई मेरे कि अगर भगवान ये चाहते अगर भगवान ये चाहते कि भाई मेरे ये बचा रहे ये जिंदा रहे ये कीड़ा है। ये ये वो है। ठीक है? तो भाई सभी को उस तरीके से भेजते वहां पे। ठीक है? चलिए आगे बढ़ेंगे। तो खाद्य श्रृंखला समझ में आ गई? तो पारिस्थितिकी तंत्र में जीव भोजन के लिए दूसरे पर निर्भर होते हैं जिससे एक श्रृंखला बन जाती है जिसे खाद्य श्रृंखला कहते हैं। अच्छा इसके बाद एक आता है खाद्य जाल। अच्छा खाद्य जाल क्या होता है? अब समझना। देखो खाद्य श्रृंखला और खाद्य जाल में से एक सवाल आपके एग्जाम में बिल्कुल पक्का है। आएगा ही आएगा। चाहे आपसे पूछा जाए खाद्य श्रृंखला किसे कहते हैं और चाहे आपसे पूछा जाए खाद्य जाल किसे समझ कहते हैं? एक सवाल बिल्कुल फिक्स है आपके एग्जाम में आना। सुनिए खाद्य जाल किसे कहते हैं? किसी पारिस्थितिकी तंत्र में कई खाद्य श्रृंखलाओं के एक दूसरे से जुड़े नेटवर्क को खाद्य जाल कहते हैं। मतलब जब हम कई सारी खाद्य श्रृंखलाओं को एक साथ मिला देते हैं तो उसे हम खाद्य जाल कहते हैं। जैसे यहां पर देखो स्क्रीन पर घास को टिड्डा खा रहा है। टिड्डा को छिपकली खा रहा है। छिपकली को बाज खा रहा है। इसी घास को खरगोश खा रहा है। खरगोश को बाज खा रहा है। इसी घास को चूहा खा रहा है। चूहा को भी बाज खा रहा है। ठीक है? मतलब अगर हम कई सारी खाद्य श्रृंखलाओं को मिलाकर एक जाल बनाएं तो उसे हम खाद्य जाल कहते हैं। समझना किसी पारिस्थितिकी तंत्र में कई खाद्य श्रृंखलाओं के एक दूसरे से जुड़े नेटवर्क को खाद्य जाल कहा जाता है। जैसे यहां पर खाद्य श्रृंखला किसे कहते हैं? समझना ध्यान से। खाद्य श्रृंखला किसे कहते हैं? कि पारिस्थितिकी तंत्र में जीव भोजन के लिए एक दूसरे पर निर्भर होते हैं। जिससे एक श्रृंखला बन जाती है जिसे खाद्य श्रृंखला कहते हैं। खाद्य जाल किसे कहते हैं? किसी पारिस्थितिकी तंत्र में किसी पारिस्थितिकी तंत्र में कई खाद्य श्रृंखलाओं के एक दूसरे से जुड़े नेटवर्क को खाद्य जाल कहते हैं। अब बताइए यहां तक चीजें समझ में आ गई आप सभी को? ओ मेरे भैया बता दो बच्चा मेरे क्या आपको खाद्य श्रृंखला और खाद्य जाल इन दोनों में अंतर समझ में आ गया हम बताओ क्या इन दोनों में अंतर समझ में आ गया हम ठीक उसके बाद अब हम लोग आते हैं पारिस्थितिकी पिरामिड पर। बहुत इंपॉर्टेंट टॉपिक है। पारिस्थितिकी पिरामिड क्या होता है? ध्यान से समझना बेटा ध्यान से। ओ मेरे भैया बहुत ध्यान से समझिए। पारिस्थितिकी पिरामिड किसे कहते हैं? इकोलॉजिकल पिरामिड क्या होता है? समझना मेरी बात को। उत्पादक एवं उपभोक्ताओं की संख्या जीव भैया याद रखना। मोस्ट इंपॉर्टेंट है। बहुत पूछा जाता है आपके एग्जाम में ये सवाल। बहुत पूछा जाता है। पारिस्थितिकी पिरामिड एक तो त्रिभुज के जैसा है। दिख रहा है कि नहीं दिख रहा है? त्रिभुज के जैसा है। उत्पादक एवं अच्छा सीधा यही पूछा जाएगा पारिस्थितिकी पिरामिड से आप क्या समझते हो? तो आपको बताना क्या है कि उत्पादक एवं उपभोक्ताओं की संख्या जीव भार व ऊर्जा के बीच पारस्परिक संबंधों की गणना को पिरामिड के रूप में प्रदर्शित करना ही पारिस्थितिकी पिरामिड है। अगर आपसे कहा जाए पारिस्थितिकी पिरामिड कितने प्रकार के होते हैं? तो तीन प्रकार के संख्या के आधार पर, जीव के आधार पर और ऊर्जा के आधार पर। तीन प्रकार के पिरामिड होते हैं। आपसे यह सवाल पूछा गया कि पारिस्थितिकी पिरामिड से आप क्या समझते हो? आप बता देना कि उत्पादक एवं उपभोक्ता। अच्छा उत्पादक कौन है बेटा? घास, पेड़-पौधे, उत्पादक। उपभोक्ता क्या है? उपभोक्ता में शाकाहारी और मांसाहारी दोनों आते हैं। तो उत्पादक एवं उपभोक्ताओं की संख्या जीव भार व ऊर्जा के बीच पारस्परिक संबंधों की गणना को पिरामिड के रूप में प्रदर्शन करना ही पारिस्थितिकी पिरामिड कहलाता है। अब बताओ यहां तक चीजें समझ में आ गई? बोलो यहां तक चीजें समझ में आ गई? उत्पादक एवं उपभोक्ताओं की संख्या जीव भार व ऊर्जा के बीच की पारस्परिक संबंधों की गणना को पिरामिड के रूप में प्रदर्शित करना ही प्राथमिकी पिरामिड है। बताइए समझ में आ गया सर या उल्टा सीधा दोनों तरफ से बन सकता है। बेटा बताएंगे ऊर्जा वाले को छोड़कर अभी सब बताएंगे। अभी तीनों पढ़ाएंगे भी आपको तो समझ में आ जाएगा। हां बिल्कुल आप बिल्कुल परेशान मत होइएगा। अभी हम सब बता देते हैं। ठीक है? हम ठीक है समझना जैसे तीन प्रकार के हमारे पिरामिड होते हैं। अगर आपसे पूछा जाए पिरामिड कितने प्रकार के होते हैं तो पारिस्थिकी पिरामिड तीन प्रकार के होते हैं। एक होता है जीव संख्या के आधार पर जीव भार के आधार पर और ऊर्जा का पिरामिड। इनमें जो ये दोनों होते हैं स्टार्टिंग के दोनों। जीव संख्या का पिरामिड और जीव भार का पिरामिड। यह सीधे और उल्टे दोनों बनते हैं। सीधे और उल्टे उल्टे दोनों बन सकते हैं। दोनों बन सकते हैं। सीधे और उल्टे दोनों बन सकते हैं। अच्छा ये जो ऊर्जा का पिरामिड है ना बेटा, यह केवल सीधा बन सकता है। यह केवल सीधा बन सकता है। यह केवल सीधा बन सकता है। हमने ऐप पर इसे बहुत डिटेल में और बहुत अच्छे से पढ़ाया है हमने। ठीक है? बहुत बढ़िया तरीके से। तो अगर आपसे कहा जाए कि पारिस्थितिकी पिरामिड कितने प्रकार के होते हैं? तो पारिस्थितिकी पिरामिड बच्चा तीन प्रकार के होते हैं। जीव संख्या का पिरामिड, जीव भार का पिरामिड और ऊर्जा का पिरामिड। अच्छा एक बार मैं एक बात पूछना चाहता हूं। एक बार थोड़ा बताइएगा कन्फर्मेशन के लिए थोड़ा सा। कितने बच्चे हैं जिनका सेकंड सेमेस्टर मैथ में बैक लगा हुआ है? एक बार जरा सभी बच्चे बताएंगे कितने बच्चे हैं जिनका सेकंड सेमेस्टर मैथ में बैक लगा हुआ है? हां बिल्कुल। हां, बहुत सारे बच्चों का लगा है। मैं देख पा रहा हूं। ठीक है। सुनिए। आप सभी के लिए इंपॉर्टेंट सूचना है। कल से मेरी मैथ की सेकंड सेमेस्टर की रिवीजन मैथ की जो क्लास है वो शाम को 8:00 बजे मैं बताऊंगा अभी टाइम तो नहीं डिसाइड है। 7:00 बजे ही कर देते हैं। ठीक है? 7:00 बजे से कल से हम आप सभी 7:00 बजे नहीं 8 या 9:00 बजे से कर देते हैं। हम 8 एक सेकंड 8:00 बजे ही कर दें। हां, ठीक है। 8:00 बजे से तो कल से क्या है? कल से हम आप सभी के लिए 8:00 बजे अपनी मैथ की रिवीजन क्लास स्टार्ट कर रहे हैं। सेकंड सेमेस्टर की कल शाम 8:00 बजे से। तो आप सभी कल शाम 8:00 बजे से आप लोग उपस्थित होइएगा। जहां पर हम सभी मैथ की बहुत ही अच्छी रिवीजन क्लास करेंगे। एक ज्यादा नहीं एक 7 से आठ क्लास करेंगे हम लोग और उसी सात से आठ क्लास में पूरी मैथ सेकंड सेमेस्टर की हम लोग खत्म कर देंगे। ठीक है बच्चा? और आपका एक परफेक्ट रिवीजन भी हो जाएगा। ठीक है ना बच्चा? हां। हां 8:00 बजे हम आपको करा देंगे। बेटा फोर्थ सेमेस्टर मैथ की जो बच्चे बात करें आप लोग देखो कुछ भूल जाते हो। सेकंड का पेपर आपसे पहले है। ठीक है? फोर्थ का उनके बाद में है। तो जैसे अप्रैल में ये खत्म हो जाएगा तो हम मई में भी आपकी चारप लगातार मैथ की क्लास कराएंगे। कितनी? जब ये मैराथन खत्म हो जाएंगे तो चार पांच लगातार हम आपकी मैथ की क्लास कराएंगे। डेढ़-डेढ़ दो-द घंटे। तो जब दो-द घंटे कराएंगे तो मेनमेन आपकी भी चीजें हो जाएंगी। ठीक है? तो आप लोग जो सेकंड वाले हैं जिनका बैक लगा है या आपको वैसे भी पढ़ना है क्योंकि आपको पता है कि सेकंड और फोर्थ की भी मैथ में ज्यादा अंतर नहीं है। सेम गुणनखंड सेम गुणा सेम भाग पूछा जाता है। तो आप लोग भी आकर देख सकते हो कल से कल शाम 8:00 बजे से आप सभी को हम मिलेंगे वहां पर। ठीक है? 7:00 से आठ क्लास। बाकी आप लोगों की भी होगी। पहले मैराथन खत्म हो जाए फिर आपकी भी हम करवाएंगे। ऐसा थोड़ी आपको छोड़ेंगे बेटा। शिवम सर का आपसे ऐसा कनेक्शन है कि का बताएं। ठीक है? रात में आप ही लोगों के सपने आने लगे हैं हमको। बेटा हम उठ जाते हैं कि भैया बच्चों पेपर उठो तबीयत अब सोचो जिस तरीके से तबीयत मेरी खराब थी। एक हफ्ता आदमी लेटा ही रहता। लेकिन हम किसी ना किसी तरीके से उठे हैं आपके लिए कि नहीं भाई क्लास छूटनी नहीं है। बीच में ऐसे यार पता नहीं कैसे यार ग्लूकोज चढ़ा दिया। मेरा हाथवा एकदम काला-काला हो गया है। उसको अभी थोड़ा पेपर पढ़ उसको जाएं। पहले हम उठा उठा के पटकेंगे पहले हम। ठीक है? पता नहीं कैसे उन्होंने लगा दिया। देखो हाथ एकदम काला-काला हो गया। देखो जैसे लग रहा है टैटू बनवाए हैं शिवम सर आपके। तो आप ही के लिए एक तो बताओ। नहीं 7:00 बजे नहीं हो पाएगा। 8:00 बजे से करेंगे। ठीक है बेटा। चलिए आगे बढ़ेंगे। अब आते हैं जीव संख्या का पिरामिड। अच्छा आपके एग्जाम में सवाल क्या पूछा जाएगा यहां से कि कौन सा पिरामिड है जो केवल सीधा बन सकता है? ये वाला इंपॉर्टेंट है। कौन सा पिरामिड है जो केवल सीधा बन सकता है? तो ऊर्जा का पिरामिड जो है ये केवल सीधा बन सकता है। ठीक है? ठीक है? आगे बढ़े आगे। अब जैसे जीव संख्या का पिरामिड क्या होता है बेटा? जीव संख्या के पिरामिड सीधे और उल्टे दोनों तरह के पाए जाते हैं। दूसरा है जीव भार का पिरामिड। चलिए भाई अब आपसे पूछा जाएगा जीव भार का पिरामिड जीव भार का पिरामिड क्या है बेटा जिस पिरामिड द्वारा पार पारिस्थितिकी तंत्र के प्राथमिक उत्पादकों तथा विभिन्न श्रेणी के उपभोक्ताओं के भार के संबंध का बोध होता है। उसे जीव भार का पिरामिड कहते हैं। जीव भार का पिरामिड सीधे और उल्टे दोनों तरीके से हो सकते हैं। मतलब ऐसा पिरामिड जिसमें जीव भार के हिसाब से मतलब ऐसा कह दो बेटा देखो देखो अब जैसे कोई पूछे जीव संख्या का पिरामिड क्या है? ऐसा पिरामिड जो जीवों की संख्या के आधार पर बनाया जाता है। देखो यहां पे लिख दो ऐसा पिरामिड ऐसा पिरामिड जो उत्पादक और उपभोक्ता और उपभोक्ताओं की संख्या के आधार पर बनाया जाता है। की संख्या के आधार पर बनाया जाता है। आधार पर बनाया जाता है। बनाया जाता है। जीव संख्या का पिरामिड कहलाता है। जीव संख्या का पिरामिड कहलाता है। याद रखना जीव संख्या का पिरामिड कहलाता है। बस कहलाता है। और याद रखना जो ये जीव संख्या का जो पिरामिड होता है ये सीधा भी बन सकता है और उल्टा भी बन सकता है। केवल एक ही पिरामिड ऐसा है जो केवल सीधा बनता है और वो है ऊर्जा का पिरामिड। ठीक है? याद रखना। भार का पिरामिड क्या है बेटा? जिस पिरामिड द्वारा पारिस्थितिकी तंत्र के प्राथमिक उत्पादकों तथा विभिन्न श्रेणी के उपभोक्ताओं के भार के संबंध का बोध होता है, उसे जीव भार का पिरामिड कहते हैं। जीव भार का पिरामिड सीधा और उल्टा दोनों बन सकता है। इसी के साथ-साथ ऊर्जा का पिरामिड किसे कहते हैं? जो पिरामिड किसी पारिस्थिकी तंत्र के विभिन्न पोषण तत्वों के पोषण तलों के जीवधारी द्वारा जो के विभिन्न पोषण तलों के जीवधारी द्वारा प्रयोग में लाई गई ऊर्जा के संपूर्ण परिमाण का बोध कराता है उसे संचित ऊर्जा का पिरामिड कहते हैं और यह ऊर्जा पिरामिड सीधा सदैव सीधा बनता है। ठीक है? चलिए अरे इन सभी को ना बेटा मैं यहां पर बेसिक चीजें मतलब क्या बोलते हैं मेनम चीजें पढ़ा देता हूं। बाकी ऊर्जा पिरामिड में क्या होता है कि 10% नियम एनर्जी ट्रांसफर का इसमें 10% नियम लगता है। ठीक है? मतलब हर जीव अपने हर जीव अपनी ऊर्जा का अपनी ऊर्जा का 10% ही ट्रांसफर करता है। 10% ही ट्रांसफर करता है। तो अगर आपके एग्जाम में आ जाए कि प्रत्येक जीव अपनी कुल ऊर्जा का कितना प्रतिशत ट्रांसफर करता है? तो 10% कहने का मतलब क्या हो गया कि जैसे मान लीजिए एक घास है वो अपना 10% टिड्डा को देगा। टिड्डा अपना 10% मेंढक को देगा। मेंढक अपना 10% सांप को देगा। सांप अपना 10% बाज को देगा। मतलब जब आप खाद्य श्रृंखला बनाते हो तो हर एक उत्पादक और उपभोक्ता अपना 10% ही ट्रांसफर करता है। इसे 10% ऊर्जा का नियम भी कहते हैं। तो बताइए तीनों पिरामिड समझ में आ गया आपको बच्चा? हां। हां। हां 10% लॉ ऑफ लिंडरमैन कहते हैं। बिल्कुल बिल्कुल हम यह लिंडरमैन का नियम है। लिख सकते हो आप इसे। यह लिंडरमैन का नियम है। लिंडरमैन ने ये कहा था कि प्रत्येक जीव अपने ऊर्जा का 10% ही ट्रांसफर कर पाता है। आगे अब आते हैं अयस्क। अयस्क किसे कहते हैं? ओ रे चलो भाई ओरे ओरे बोलते हैं और बोलते हैं बताओ और क्या हालचाल है बताओ बोलो भैया ओ मेरे भैया हम अरे लिंड मैन कर लो चलो लो मैंने आर आर हटा दिया बेटा। चलो मैंने आर हटा दिया। लिंडमैन हो जाएगा। चलिए आगे बढ़े बेटा। अयस्क किसे कहते हैं? ऐसे खनिज जिसमें धातु का निष्कर्षण अधिक मात्रा में तथा कम लागत में हो अयस्क कहलाते हैं। जैसे अच्छा आपने देखा होगा कि अच्छा खनिज किसे कहते हैं? बेटा खनिज। ऐसे पदार्थ जिन्हें जमीन से खोद-खोद के निकाला जाता है उन्हें हम खनिज पदार्थ कहते हैं। खनिज किसे कहते हैं बच्चा? ऐसे पदार्थ जिन्हें हम जमीन में से खोदखोद कर निकालते हैं उन्हें हम खनिज कहते हैं। क्या कहते हैं बेटा? उन्हें हम खनिज कहते हैं। अब अब देखो जब खनिज प्राप्त हो जाता है तो उसमें से हम बहुत सारे पदार्थ उस खनिजों भाई उस खनिज का सांद्रण होता है ना भाई। फिर जब हम उन खनिजों का सांद्रण करते हैं तो उसमें से पदार्थ निकलता है। सोना, चांदी, हीरा, मोती। तो ऐसे पदार्थ जो खनिजों से आसानी से और कम मात्रा आसानी से और कम लागत में निकाले जाते हैं। उन्हें हम अयस्क कहते हैं। समझना बेटा अयस्क किसे कहते हैं? बच्चा हम देखो ऐसे खनिज जिसमें धातु का निष्कर्षण अधिक मात्रा में तथा कम लागत में हो अयस्क कहलाते हैं। अयस्क में आमतौर पर सोना, चांदी, लोहा या तांबा जैसे धातुएं होती हैं। लेकिन इसमें हीरा या ग्रेफाइट जैसी कुछ अधातुएं भी शामिल होती हैं। तो अगर आपसे कोई कहे अयस्क कौन से होते हैं? तो बता दो कि ऐसे पदार्थ जो किसी भी खनिज के निष्कर्षण में खूब सारी मात्रा में निकलते हैं कम लागत में उन्हें हम अयस्क कहते हैं और अयस्क में सोना, चांदी, लोहा, तांबा, हीरा और ग्रेफाइट भी शामिल होते हैं। जी बताइए। हां बिल्कुल बिल्कुल सभी खनिज अयस्क नहीं होते। हां ये चीज पूजा यादव हम लिखेंगे। आपकी इस बात से शिवम सर सहमत हैं। समझना सभी अयस्क खनिज होते हैं। सभी अयस्क खनिज होते हैं। लेकिन सभी खनिज अयस्क नहीं होते। लेकिन सभी खनिज अयस्क नहीं होते। लेकिन सभी खनिज अयस्क नहीं होते। पहले बताओ मजा आ रहा है ना पढ़ने में? हर एक कांसेप्ट क्लियर हो रहा है ना भाई? देखो इससे परफेक्ट रिवीजन नहीं कराया जा सकता बेटा। रिवीजन इससे परफेक्ट कराया ही नहीं जा सकता है। जिस तरीके से रिवीजन हम आपको बेटा करा रहे हैं ना बेटा इस तरीके का रिवीजन आप देखते हो हर एक चीज टॉपिक वाइज मस्त तरीके से आपको कराया जा रहा है। जबरदस्त तरीके से। ठीक है? अगर आप लोगों की परमिशन हो तो हम पानी पी लें। चलिए आगे बढ़े। ठीक। सर क्यों पढ़ा रहे हैं? जब पेपर लीक हो गया है तो ए ये कौन महामानव आ गया? चलिए अब आते हैं धातु किसे कहते हैं? अब आपसे पूछा जाएगा धातु किसे कहते हैं? अधातु किसे कहते हैं? धातु और अधातु में अंतर क्या होता है? हर एक चीज पूछा जाएगा। ठीक है। आगे बढ़ते हैं। सर पानी चाय नाश्ता भी कर लो। हां। ठीक है। आगे आते हैं। धातु क्या होता है बेटा? अपारदर्शी अच्छा अपारदर्शी एक होता है पारदर्शी पारदर्शी पदार्थ क्या होते हैं कि ऐसा पदार्थ जिनसे हम आरपार देख सकते हैं जैसे शीशा हो गया शीशा ठीक है मतलब शीशा नहीं होता शीशा मतलब शीशा ऐसे आप करो पकड़ो आरपार आप देख सकते हो ठीक है खिड़कीवड़की में शीशा लगा होता है आरपार आप देख सकते हो तो शीशा पारदर्शी होता है जिनके आरपार देखा जा सके अपारदर्शी वो होता है जिनके आरपार नहीं देखा जा सकता जैसे सोना अब तुम एक सोना ले ले लो ऐसे सोना का एक टुकड़ा ले लो और ऐसे देखो क्या आरपार दिखेगा नहीं दिखेगा ठीक है लकड़ी ले लो क्या आरपार दिखेगा नहीं दिखेगा तो जिन पदार्थों के आरपार नहीं देखा जा सकता उन्हें हम क्या बोलते हैं उन्हें हम अपारदर्शी बोलते हैं तो धातु क्या है बेटा अपारदर्शी एवं चमकदार पदार्थों को धातु कहते हैं। यह ऊष्मा तथा विद्युत का सुचालक होता है। अच्छा सुचालक क्या होता है बेटा? सुचालक वो पदार्थ होते हैं जिनसे विद्युत एक छोर से दूसरे छोर पर आसानी से पहुंच सकती है। जैसे लोहा हो गया। अभी कहीं पर तार है एकदम तार एकदम नंगा वाला तार जिसको बोलते हैं ना मतलब खुला तार उस पर आप लोहे की राड रखोगे। आप तुरंत डांस करने लगोगे। आई एम अ डिस्को डांसर। हो जाएगा ना? तो ये चीज है। मतलब क्या होता है? सुचालक का मतलब सु मतलब सुंदर। चालक मतलब चलाने वाला। यानी कि भैया जिससे विद्युत खूब आसानी से चल सकती है। जिनको आप पकड़ो आपको करंट लग जाएगा। ठीक है? तो उसको हम बोलते हैं क्या? सुचालक। अच्छा कुचालक मतलब कहता है कु मतलब खराब। ठीक है? जो मतलब जिनसे ऊर्जा इस पार से उस पार नहीं जा सकती उन्हें कुचालक कहते हैं। जैसे लकड़ी हो गया, प्लास्टिक हो गया। ये सब कुचालक होते हैं। अपारदर्शी एवं चमकदार पदार्थों को धातु कहते हैं। यह ऊष्मा तथा विद्युत का सुचालक होता है। जैसे लोहा, सोना, चांदी, एलुमुनियम आदि। ये सब क्या होते हैं? ये सब विद्युत के सुचालक होते हैं। मतलब जो आपका सोना है इससे भी करंट फैल सकता है। जो चांदी है, एलुमुनियम है, लोहा है। इन सब से जो है क्या होते हैं भैया? करंट फैल सकते हैं। ठीक है बच्चा? आगे बढ़े। ठीक है? अधातु किसे कहते हैं बेटा? नॉन मेटल। अधातु में धातुओं के विपरीत गुण पाए जाते हैं। यह ऊष्मा तथा विद्युत का कुचालक होता है। यानी कि जो धातुएं होती हैं वो तो विद्युत और ऊष्मा की सुचालक होती हैं। लेकिन जो अधातुएं होती हैं ये विद्युत और ऊष्मा की कुचालक होती है। अच्छा अधातुओं में कौन आता है? कार्बन, सल्फर, क्लोरीन। ठीक है? इसी के साथ हीरा। इसी के साथ ग्रेफाइट यह सब क्या होते हैं बेटा? यह सब आपके अधातु होते हैं। क्या होते हैं बेटा? अधातु। आ गया। चलिए एक सवाल बड़ा अच्छा पूछा जाता है। धातु और अधातु में अंतर मोस्टेंट बेटा। मोस्टेंट मोस्टेंट। धातु और अधातु में अंतर। बहुत पूछा जाता है। धातु और अधातु में अंतर। समझना मेरे बेटे। देखो भैया धातु और अधातु में अंतर खूब पूछा जाता है। धातुएं चमकदार होती हैं। अधातुएं सामान्यत चमकदार नहीं होती हैं। लेकिन आयोडीन आयोडीन अधातु है लेकिन चमकदार भी होता। कितना बढ़िया चमकता है। अभी आप नमक को ले जाओ। धूप में रखो। ऐसा चमकेगा कि मोहल्ले के सारे लोग पगला जाएंगे। उनको लगेगा कि आज हीरावरा खोद के लाए हैं महाराज जी इनके यहां से। ठीक है? समझ रहे हो ना बात को? तो अधातुएं सामान्यता चमकदार नहीं होती हैं। आयोडीन को छोड़कर। धातुएं अघात वर्ध तथा तन्य होती हैं। यह अघात वर्ध क्या होता है बेटा? अघात वर्ध का मतलब होता है कि आप अगर धातुओं को ना पीटोगे तो वो टूटेगी नहीं बल्कि पतली चादर में परिवर्तित हो जाएगी। जैसे आप देखते होंगे आप जाते हो क्या? आप लोहा है लोहा। आप लोहा को जाओगे अभी गर्म करो भट्टी पे। आप उस लोहा को चाहे जितना पीटो, चाहे जितने बड़े हथौड़े से पीटो। क्या वो टूटेगा? नहीं टूटेगा। फैल जाएगा, पिचक जाएगा। ऐसे वैसे हो जाएगा लेकिन कभी टूटेगा नहीं। तो आघात वर्धनीयता का मतलब होता है कि अगर हम किसी भी धातु को पीटते हैं तो वो धातु कभी भी टूटती नहीं है। इसे आघात वर्धनीयता कहते हैं। अच्छा तन्यता क्या होता है बेटा? तन्य। तन्य का मतलब होता है कि धातुओं का आप खूब लंबी तार खींच सकते हो। जो धातुएं होती हैं, धातुओं में तन्यता का गुण पाया जाता है। यानी कि आप किसी भी धातु से लंबी तार आप खींच सकते हो। जैसे आप सोना ले लो, चांदी ले लो। देखो आप देखते हो 40 ग्राम या 50 ग्राम की पायल जो होती है मतलब 50 ग्राम की पायल होती है ना। अब 50 ग्राम चांदी कितना होता है? अभी आप इसको जाओगे अगर अभी इसकी 50 ग्राम की अगर आप सिक्का लो ना मतलब क्या लेते हैं? कॉइन या कोई भी चीज है इतना बड़ा मिलेगा 50 ग्राम। लेकिन उसी में आप देखते हो उसी 50 ग्राम का द्विपयल दो पैर का बना देते हैं। खूब बढ़िया से डिजाइन वजाइन लगा के खूब बढ़िया से जो भी चीजें हैं वो दो पायल बढ़िया तैयार कर लेते हैं। क्यों? क्योंकि चांदी एक धातु है और उसको तार के रूप में बनाया जा सकता है और चांदी तो चलो छोड़ो सोने पे आ जाओ सोना अभी आप 10 ग्राम का अगर आप चैन लेते हो ना 10 ग्राम क्या होता है कुछ नहीं होता है आज की डेट में भाई 10 ग्राम में क्या होता है कुछ नहीं होता है ठीक है इतना होता है 10 ग्राम इतना सा लेकिन आप देखते हो पूरा चैनवन बना देते हैं आप चाहो उसको मोटा करा लो पतला करा लो जैसा मन हो वैसा करा लो तो ये तन्यता का गुण पाया जाता है क्योंकि जो धातुएं होती हैं इनकी आप तार खींच सकते हो तो तन्यता का मतलब कोई पूछे तो तन्यता का मतलब मतलब होता है कि हम उसकी पतली-पतली तार खींच सकते हैं खूब सारी लंबी। ठीक है? तो धातुएं चमकदार होती हैं। धातुएं अघात वर्ध तथा तन्य होते हैं। दोनों का मतलब मैंने समझा दिया। लेकिन जो अधातुएं होती हैं ये भंगुर होती हैं। भंगुर का मतलब क्या होता है? कि अगर हम किसी भी अधातु पर हथौड़ा मारेंगे तो वो टूट जाएगा। जैसे कोयला ले लो। कोयला पर आप हथौड़ा मारो टूट जाएगा। आप लकड़ी ले लो। लकड़ी पर आप खूब तेज से आप मारोगे हथौड़ा। लकड़ी टूट जाएगा। क्या लकड़ी फैलेगी? नहीं फैलेगी टूट जाएगी। धातु जो है वो ऊष्मा एवं विद्युत की सुचालक होती हैं लेकिन अधातुएं कुचालक होती हैं। धातु का गलनांक एवं क्वथनांक दोनों उच्च होता है। लेकिन जो अधातुएं होती हैं इनमें गलनांक एवं क्वथनांक निम्न होते हैं। ठीक है? पहले बताइए। अच्छा ये वाला पॉइंट थोड़ा याद रखिएगा। जो अधातुएं होती हैं ना बेटा यह वाला पॉइंट जो अधातुएं होती हैं वह कुचालक होता है। आपसे एग्जाम में एक सवाल ऐसा पूछा जाता है भाई सारी अधातुएं कुचालक होती हैं जिनमें विद्युत और ऊष्मा आर-पार नहीं जा सकती है। लेकिन एक अधातु ऐसी है जो सुचालक है। क्या नाम है उसका? ग्रेफाइट। ये सवाल एमसीक्यू में कई बार बना है। याद रखना। तो अगर आपसे कोई पूछे कि कौन सी ऐसी अधातु है जो सुचालक है? तो आपका आंसर हो जाएगा ग्रेफाइट। पहले बताओ दोनों में अंतर समझ में आया? धातुएं चमकदार होती हैं। अधातुएं चमकदार नहीं होती हैं। धातुओं में तन्यता और अघात वर्धनीयता का गुण पाया जाता है। जबकि अधातुओं में यह गुण नहीं पाया जाता है। धातुएं में ऊष्मा एवं विद्युत की सुचालक होती हैं। अधातुएं कुचालक होती हैं। धातुओं का गलनांक एवं क्वथनांक उच्च होता है। लेकिन अधातुओं का गलनांक एवं क्वथनांक निम्न होता है। बोलो भैया आ गया समझ में? जी। धातु और अधातु में अंतर लिख ले जाओगे। सर पिग आयरन के बारे में बता दो। सौरभ प्रजापति जी बेटा सब बताएंगे। जो चीज इंपॉर्टेंट बेटा बिल्कुल बताएंगे। पेशेंस रखो। शिवम सर की क्लास में हो। आप लोग बिल्कुल तीन सेमेस्टर विश्वास किया है ना? अच्छा परिणाम आया। चौथे में भी और अच्छा आएगा। परेशान मत होइए। आपके लिए बिल्कुल बेस्ट बेस्ट लाएंगे। पिग आयरन भी आगे स्लाइड में है। परेशान मत होइए। चलिए आगे बढ़े। ठीक है? आगे आएगा अगला चीज। धातु निष्कर्षण तथा धातु कर्म किसे? यह सारी परिभाषाएं याद रखना। पूछी गई है सारी परिभाषाएं। आपसे पूछा जाएगा कि धातु कर्म और धातु निष्कर्षण किसे कहते हैं? समझना। धातु कर्म किसे कहते हैं? और धातु निष्कर्षण किसे कहते हैं? तो अयस्क में पाई जाने वाली अशुद्धियों को अलग करने की क्रिया को धातु निष्कर्षण कहते हैं। क्या कहते हैं बेटा? अयस्कों में पाई जाने वाली अशुद्धियों को अलग करने की क्रिया को धातु निष्कर्षण कहते हैं। और किसी शुद्ध धातु को उसके अयस्क से प्राप्त करने की संपूर्ण विधि को धातु कर्म कहते हैं। मतलब जब हम कोई अयस्क को शुद्ध करते हैं और उसमें जिनजिन विधियों का हम प्रयोग करते हैं उन विधियों को हम धातु कर्म कहते हैं। क्या कहते हैं? धातु कर्म कहते हैं। तो अयस्क में पाई जाने वाली अशुद्धियों को अलग करने की क्रिया को धातु निष्कर्षण कहते हैं। और किसी शुद्ध धातु को उसके अयस्क से प्राप्त करने की संपूर्ण विधि को धातु कर्म कहते हैं। पहले बताइए धातु निष्कर्षण और धातु कर्म समझ में आया कि नहीं आया? नहीं नहीं बेटा आज नहीं एंड होगा। देखो हम किसी भी सब्जेक्ट की दो मैराथन कराएंगे। शांति शिक्षा एवं सतत विकास को छोड़कर बाकी सारे सब्जेक्ट्स की दो-दो मैराथन चलेगी। इसलिए ताकि आप लोग जैसे आधा पार्ट मैं आज करा दूंगा। आप इनको घर पे बैठ के बढ़िया से रिवीजन कर लेना। कल हम लोग एक पार्ट और ले आएंगे। पांचवें सब्जेक्ट की मैराथन चल रही है। तीन सब्जेक्ट और बचा है। अप्रैल में खत्म हो जाएगा। ठीक है? मई भर हम लोग क्या करेंगे? मई भर हम लोग एमसीक्यू या मैथ की क्लासेस इन सबको हम लोग करते रहेंगे। अपना मई में खूब बढ़िया से। क्या दिक्कत है? 14 मई से पेपर है तो आधा महीना हमारे पास मई भी तो है। तो देखो कितने सिस्टमैटिक ढंग से शिवम सर सिलेबस लेकर चले हैं। मैराथन भी हो जाएगी हम। कोशिश करेंगे और भी नई-ई चीजें आपको करा दें। जी अगला अच्छा अब आपके एग्जाम में आएगा धातु कर्म की प्रक्रिया। अच्छा अब ये सवाल पूछा जाएगा कि धातु कर्म की प्रक्रिया क्या होती है? मतलब धातु कर्म का मतलब कि जब हम धातुओं को शुद्ध करते हैं तो हम कौन-कौन सी क्रिया को अपनाते हैं? जैसे जैसे क्या होता है? मान लीजिए मेरे चावल में कंकड़ हैं और मुझे उसे शुद्ध करना है। तो मैं क्या करूंगा भाई? पहले हम उसको क्या करेंगे? पछोरेंगे भाई सूप से पछोरना होता है ना पछोरेंगे पहले हम उसको उसके बाद उसमें से कंकड़ बिनेंगे तो हर एक चीज को शुद्ध करने की एक विधि होती है ऐसे ही आपसे पूछा जाता है कि धातु कर्म की प्रक्रिया क्या है मतलब धातुओं को शुद्ध करने के लिए हम जिनजिन विधियों का इस्तेमाल करते हैं उनमें कौन-कौन सी प्रक्रिया हम इस्तेमाल करते हैं पहला हो जाएगा पिसे अयस्क का सांद्रण दूसरा हो जाएगा निस्तापन निस्तापन का मतलब होता है बेटा गर्म करना किसी भी चीज चीज को क्या करना बेटा? गर्म करना। उसके बाद भजन। भजन का मतलब होता है बेटा भूनना। ठीक है? उसके बाद प्रगलन। प्रगलन का मतलब होता है बेटा गलाना। ठीक है? और उसके बाद धातु का शोधन। तो ये पांच चीजें आपको याद रखना। अगर आपसे पूछा जाता है कि धातु कर्म की प्रक्रिया बताइए। तो धातु कर्म में आपको यह पांच चीजें याद रखना है। पिसे अयस्क का सांद्रण, निस्तापन, भर्जन, प्रगलन और धातु का शोधन। आइए एक-एक करके हम समझते हैं इनको। नंबर एक निस्तापन किसे कहते हैं? यह आपके एक नंबर में कई बार क्वेश्चन पूछा गया है। निस्तापन किसे कहते हैं? ये सारी परिभाषाएं आपको याद रखना है बेटा। अच्छा पहला तो होता है सांद्रण। ये सांद्रण क्या होता है बेटा? सांद्रण। अयस्क के साथ जुड़ी अशुद्धियों को हटाना। अयस्क को साफ करना सांद्रण कहलाता है। अगर कोई आपसे कहे सांद्रण क्या है? तो जैसे कभी हम कोई अयस्क लाए भाई खनिज से अयस्क प्राप्त किया। उस अयस्क में धूल, गर्दा, मिट्टी, कंकड़, पत्थर कुछ भी है उसे हटाना, उसे साफ करना सांद्रण कहलाता है। तो अगर आपके एग्जाम में आ जाए कि सांद्रण किसे कहते हैं? तो आप बता देना कि अयस्क के साथ जुड़ी अशुद्धियों को हटाना, अयस्क को साफ करना सांद्रण कहलाता है। उसके बाद दूसरा आपसे पूछा जाएगा कि भैया निस्तापन किसे कहते हैं? निस्तापन मतलब गर्म करना। इस प्रक्रिया में सांद्रित अयस्क को सांद्रित अयस्क का मतलब क्या है? जो अयस्क हमने साफ किया है। इस प्रक्रिया में सांद्रित अयस्क को इतना गर्म करते हैं कि उसमें से वाष्पशील पदार्थ निकल जाते हैं। परंतु अयस्क को पिघलने नहीं दिया जाता है। मतलब जो हमारे पास साफ की हुई अयस्क है जो हमारे पास सांद्रित अयस्क है उसको हम लोग इतना गर्म करते हैं कि उसमें जो नमी होती है वो नमी उड़ जाती है लेकिन वो गलता नहीं है। मतलब इतना ही गर्म करेंगे कि उसकी नमी तो उड़ जाए लेकिन वो गले ना। तो इसे हम क्या कहते हैं? निस्तापन कहते हैं। याद रखना निस्तापन बहुत बार पूछा गया है। मोस्ट इंपॉर्टेंट है। निस्तापन और भजन इन दोनों में से एक आने की उम्मीद है इस बार। ठीक है? तो निस्तापन किसे कहते हैं? समझ में आ गया आपको? कि भैया सांद्रित अयस्क को इतना गर्म करते हैं कि उसमें जो नमी है वो निकल जाए। लेकिन जो अयस्क है उसे पिघलने नहीं दिया जाएगा। भजन मतलब भूनना। अंतिम रूप से अयस्क को वायु की उपस्थिति में कम ताप पर गर्म करने का प्रक्रम भरजन कहलाता है। भाई भूनना क्या होता है भाई? ज्यादा गर्म कर देंगे पिघल जाएगा। हम भूनना का मतलब रोस्ट करना। जैसे आप कोई घर में मखाना रोस्ट करते हो, मूंगफली दाना रोस्ट करते हो। तो भरजन का मतलब होता है भूनना। रोस्टिंग करना। ठीक है? अंतिम रूप से अयस्क को वायु की उपस्थिति में कम ताप पर गर्म करने का प्रक्रम भरजन कहलाता है। तो पहले बताइए सांद्रण, निस्तापन और भरजन तीनों समझ में आ गया? जी बताइए। चलिए इतना समझ में आ गया बेटा। शबनम कह रही है सर जी प्लीज बताइए जल विद्युत का नहीं बेटा देखो जो जल होता है ना बेटा जो जल होता है मैं आपको बता दूं थोड़ा सा जो जल होता है वो सुचालक भी हो सकता है और कुचालक भी हो सकता है मैं आपको बता दे रहा हूं बेटा देखो जो जल होता है समझना जल मतलब शुद्ध जल की अगर हम बात करें शुद्ध जल शुद्ध जल जिन्हें हम आसुत जल भी कहते हैं बेटा याद रखना इस चीज को जो शुद्ध जल होता है शुद्ध जल बेटा कुचालक होता है क्या होता है कुचालक अगर शुद्ध जल है तो वो कुचालक लेकिन अगर कोई जल अशुद्ध है क्या है? अशुद्ध जल है। यानी इस जल में हमने कुछ मिला दिया, नमक मिला दिया या अशुद्ध जल है, कुछ भी हो गया तो ये आपका सुचालक होता है। अशुद्ध जल सुचालक होता है और शुद्ध जल कुचालक होता है। ठीक है? चलिए आगे बढ़ेंगे। आगे क्या है बेटा यहां पे? प्रगलन। प्रगलन का मतलब होता है गलाना। अयस्क में उचित गालक मिलाकर। गालक का मतलब क्या होता है? गलाने वाला। मतलब भाई किसी चीज को गलाने के लिए हमको कुछ मिलाना पड़ेगा ना। तो अयस्क में उचित गालक मिलाकर मिश्रण को प्रायः वात्याभट्टी में उच्च ताप पर गलाने की क्रिया को प्रगलन कहते हैं। अच्छा धातु का शोधन क्या होता है? अशुद्ध धातु से शुद्ध धातु प्राप्त करने का प्रक्रम धातु शोधन या परिष्करण कहलाता है। तो पहले आप हमको ये बताओ बेटा एक बार जब मैं अभी इसकी पीडीएफ दे दूंगा ना आप लोग तो इसको आराम से आप लोग पढ़ते चलिएगा। ठीक है? सभी बच्चे इसको आराम से पढ़ते चलिएगा हम जी बाकी जो बच्चे बैच नहीं लिए हैं वो स्क्रीनशॉट लेते चलिएगा और इसकी पीडीएफ आप लोग स्वयं से बना लीजिएगा ठीक है बहुत अच्छा रहेगा जी हम आ गया भैया समझ में आपको ठीक आगे बढ़ेंगे अब हमारे पास एक सवाल सवाल आएगा वात्या भट्टी की कार्यविधि। अच्छा देखो हमने आपको एक काम करिएगा आप लोग अभी अभी काम एक करिएगा कि जितनी भी भट्टी मैंने पढ़ाई थी आप लोगों को आपने ऐप पे पढ़ा होगा ना तो वहां पे जो जो भट्टी हमने पढ़ाया है वात्या भट्टी परावर्तनी भट्ठी इन सब भट्टी का चित्र बनाना सीख लेना क्योंकि भ्ठी का चित्र कभी-कभी एग्जाम में आ जाता है। हर साल तो नहीं आता है लेकिन देख लीजिएगा। सर जी फर्स्ट सेमेस्टर एसएसटी की क्लास का टाइम बदल गया। ठीक है मैं अभी बात करता हूं। बदलता बदल गया हो तो सर ने बताया होगा ना भाई। बाकी फर्स्ट वाले बिल्कुल परेशान ना हो बेटा। 16 मई के बाद से ऐसा तांडव होगा फर्स्ट सेमेस्टर में ना कि रूह कांप जाएगी अच्छे-अच्छे लोगों की। [हंसी] ठीक? क्योंकि 16 के बाद मैं फ्री हो जाऊंगा ना, तो मेरी भी क्लासे स्टार्ट हो जाएंगी। चलिए आगे बढ़े। ठीक है। वात्या भट्टी की कार्य विधि समझाइए। अब एक सवाल आएगा कि वात्या भट्टी की कार्य विधि समझाइए। देखिए चलिए आगे देखते हैं बेटा। वात्या भट्टी में भट्टी के ऊपर से लगातार ईंधन और अयस्क डाला जाता है। भट्टी के नीचे से भारी मात्रा में गर्म हवा का विस्फोट होता है। भट्टी के अंदर जलते हुए कोख की कोक मतलब कोयला। भट्टी के अंदर जलते हुए कोख की वजह से भट्टी का तापमान 2200 केल्विन तक बढ़ जाता है। इतने ज्यादा तापमान पर भट्टी के अंदर लोहे से सभी सांदित अशुद्धियां हट जाती हैं। तो अगर आपसे भट्टी की कार्य विधि पूछी जाएगी जी आगे बढ़ते हैं। वात्या भट्टी की कार्यविधि क्या है बेटा? तो क्या लिखना है आपको? कि वात्या भट्टी में भट्ठी के ऊपर से जैसे होता क्या है? भट्टी कैसे बनती है बेटा? ऐसे ऐसे बनेगी ना ऐसे ऐसे मान लीजिए आपकी भट्टी बन गई। ऐसे यहां पर एक पंखा लगता है। यहां पे एक बार फिगर देख लेना बेटा। यहां पे पंखा लगाया जाएगा और यहां से हवा फूंका जाएगा। यहां पे यहां से हवा फूंकी जाएगी। इधर क्या होगा बेटा? इधर समझना। इधर एक चिमनी टाइप की होगा और इधर से ईंधन डाला जाएगा। क्या डाला जाएगा? यह ईंधन डाला जाएगा। सपोज करिए ईंधन डाला जाएगा। यहां पर ईंधन डाला जाएगा। ईंधन ऐसे ऊपर से डाला जाएगा। पंखा नीचे से चलेगा। पंखा नीचे से चलेगा। हवा जाएगी। हवा। ठीक है? हवा जाने का काम यहां से होगा। समझना? यहां से हवा जाने का काम होगा। समझिए। वात्या भट्ठी में भट्ठी के ऊपर से लगातार ईंधन और अयस्क डाला जाता है। भट्टी के नीचे से भारी मात्रा में गर्म हवा का विस्फोट होता है। यहां से पंखा लगा दिया जाता है। भट्टी के अंदर जलते हुए कोख की वजह से भट्टी का तापमान 2200 केल्विन तक बढ़ जाता है। इतने ज्यादा तापमान पर भट्ठी के अंदर लोहे से सभी सांद्र अशुद्धियां हटा दी जाती है। भाई जब इतना टेंपरेचर हो जाएगा तो जाहिर सी बात है उसकी सारी अशुद्धियां हटा दी जाएंगी। ठीक है बच्चा समझिए इस प्रक्रिया के बाद नीचे की तरफ से पिघली हुई धातु और धातु मल निकलता है जबकि ऊपर से धुआ युक्त गैसें निकलती हैं। वात्या भट्टी में प्राप्त होने वाला उत्पाद पिग आयरन या कच्चा लोहा कहलाता है। हालांकि पिग आयरन बहुत ज्यादा इंपॉर्टेंट है। इसको मैं अभी अलग से भी पढ़ाऊंगा। लेकिन अभी के लिए आपको यह पांच पॉइंट याद रखना है। अगर आपसे पूछा पांच क्यों छह पॉइंट है। आपसे पूछा जाए कि वात्या भट्टी की कार्यविधि बताइए या आपसे पूछ ले वात्या भट्टी से आप क्या समझते हैं? तो आपको ये लिखना है कि वात्या भट्टी में भट्ठी के ऊपर से लगातार ईंधन और अयस्क डाला जाता है। भट्ठी के नीचे से भारी मात्रा में गर्म हवा का विस्फोट होता है। भट्टी के अंदर जलते हुए कोयले की वजह से भट्ठी का तापमान 2200 केल्विन तक बढ़ जाता है। इतने ज्यादा तापमान पर भट्ठी के अंदर लोहे से सभी साित अशुद्धियां हट जाती हैं। इस प्रक्रिया के बाद नीचे की तरफ से पिघली हुई धातु और धातु मल निकलता है। जबकि ऊपर से धुआं युक्त गैसें निकलती हैं। वात्या भट्टी में प्राप्त होने वाला उत्पाद पिग आयरन यानी कच्चा लोहा कहलाता है। जी चलिए भाई इतनी बात बताइए सभी बच्चों को। देख लो 1500 बच्चे लाइव हैं और लाइक कितना किया? 1200 ये लाइक तो बिल्कुल नहीं करते। ऐसा लगता है इनकी किडनी मान ली। अरे लाइक कर दो। भगवान ने 20 उंगली दी है। एक उंगली से ऐसे लाइक वाले पर टक से क्लिक कर दो। फिर एक उंगली से शेयर वाले पर क्लिक कर दो। जो भी ग्रुप बना है उस पर भेज दो। लेकिन ये कहेंगे ना गुरुजी पढ़ा रहे हैं। हमसे क्या मतलब है? गुरुजी को रुपया मिल रहा है। हैं गुरुजी को बहुत रुपया मिल रहा है। एकदम अमीर हो गए हैं गुरुजी। हम काहे शेयर करें? इतने खराब हो गए। चुपचाप सभी लोग शेयर कर दिया करो और लाइक कर दिया करो। लाइक करने कह दो तो ऐसे बढ़िया किडनी मांग ले गुरुजी। चलो आगे बढ़ते हैं। भैया बताओ ये कर ले जाओगे। जी वात्या भट्टी की कार्यविधि आप लोग कर ले जाओगे बच्चा मेरे जी बहुत बढ़िया बात बहुत बढ़िया चलिए अब आते हैं परावर्तनी भट्टी अच्छा एक चीज याद रखना वात्या भट्टी और परावर्तनी भट्टी में एक आपके एग्जाम में पूछा जाएगा ऐसा मुझे लग रहा है कि वात्या भट्टी और परावर्तनी भट्टी में से एक प्रश्न आपके एग्जाम में बिल्कुल पूछे जाने की संभावना है। अच्छा परावर्तनी भट्टी क्या है बेटा? समझो ध्यान से। परावर्तनी भट्टी में ईंधन अलग से जलाया जाता है। ठीक है? मतलब वात्या भट्टी में तो ऊपर ईंधन डाल दिया जाता है। परावर्तनी भट्टी की देखो मैं चित्र होगा तो मैं दिखा देता हूं। ये है परावर्तनी भट्टी। ये परावर्तनी भट्टी। इसका चित्र पूछा गया है एक बार बेटा। ठीक है? वात्या भट्टी आप लोग Google कर लेना। जो बच्चे बैच नहीं लिए हैं। बाकी जो बच्चे बैच लिए उनको वहां पर सब कुछ पढ़ाया गया है। वात भट्टी चित्र वगैरह सब कुछ दिखाया गया है। लेकिन ये स्क्रीनशॉट ले लो। परावर्तनी भट्टी का चित्र दो बार आ गया है आपके एग्जाम में। तो बिल्कुल ऐसे बनाना है। सिंपल चित्र है। कोई बहुत ज्यादा वो नहीं है। सिंपल चित्र है। यह हमारा परावर्तनी भट्ठी होती है। परावर्तनी भट्ठी में ईंधन अलग से जलाया जाता है। जिससे अयस्क सीधे आग के संपर्क में नहीं आता है। मतलब इसमें जो ईंधन है वो अलग से जलाया जाएगा और इस भट्टी में जो अयस्क रखा जाएगा वो अयस्क आग के संपर्क में नहीं आता है। यह भट्टी अग्निसह ईंटों से बनी होती है। परावर्तनी भट्ठी का उपयोग निस्तापन तथा भरजन क्रियाओं में करते हैं। इसमें ऑक्सीकरण तथा अपचयन दोनों प्रकार की क्रिया कराई जाती है। तो बताइए परावर्तनी भट्टी लिख ले जाओगे। जी बोलो भैया। बच्चा लोग बताओ इतनी बात समझ में आ गई कि नहीं समझ में आ गई? ओ मेरे भैया लोग ओ मेरे बच्चा लोग बताओ इतनी बात आ गई समझ में भैया ठीक है आगे बढ़े ठीक अच्छा ये एक सवाल आपके एग्जाम में आता है कि पिग आयरन किसे कहते हैं? इसका प्रयोग बताइए। पिग आयरन किसे कहते हैं? इसका प्रयोग बताइए। देखो, वात्याभट्टी। अब ये सवाल बहुत इंपॉर्टेंट है। ये क्वेश्चन कई बार आपके एग्जाम में आ चुका है। तीन चार बार आ चुका है ये क्वेश्चन। पिग आयरन। पिग आयरन का मतलब होता है बेटा कच्चा लोहा। क्या बोलते हैं बेटा? कच्चा लोहा। आपसे पूछा जाएगा पिग आयरन किसे कहते हैं? और इसका प्रयोग बताइए। सेम यही सवाल आता है दो नंबर में। वात्या भट्टी से प्राप्त कच्चा लोहा या ढलवा लोहा पिगा आयरन कहलाता है। इसमें 93% लोहा, 4 से 5% कार्बन तथा शेष सल्फर फास्फोरस सिलिकॉन की अशुद्धियां उपस्थित होती हैं। जिसके कारण इसका गलनांक कम होता है। यह भंगुर होता है और इसका उपयोग पाइप बनाने में, स्टोरेज टंकी बनाने में, नहाने का टब बनाने में, कूड़ा दान बनाने में किया जाता है। ठीक है? तो अगर आपसे पूछा जाए कि पिग आयरन किसे कहते हैं? तो वात्या भट्टी से प्राप्त कच्चा लोहा या ढलवा लोहा पिग आयरन कहलाता है। इसमें 93% लोहा, चार से 5% कार्बन तथा शेष सल्फर, फास्फोरस, सिलिकॉन की अशुद्धियां उपस्थित होती हैं। जिसके कारण इसका गलनांक कम होता है। यह भंगुर होता है। इसका उपयोग पाइप, स्टोरेज टंकी, नहाने के टब, कूड़ादान आदि बनाने में किया जाता है। तो पहले बताइए पिग आयरन आपको समझ में आ गया कि नहीं समझ में आ गया? ओ मेरे भैया बताओ क्या आपको पिग आयरन समझ में आ गया? बोलो आपको समझ में आ गया बेटा पिग आयरन क्या होता है? ठीक है। अब बढ़ेंगे आगे की तरफ। संक्षारण। कोरोजियन किसे कहते हैं? बड़ा इंपॉर्टेंट टॉपिक बेटा। संक्षारण। अच्छा। अब आपसे पूछा जाएगा कि संक्षारण से आप क्या समझते हैं? संक्षारण हम ठीक है। चलिए ठीक है? तो ये आज की लास्ट हेडिंग है। इसके बाद जो इसका पार्ट टू है वो कल आपका आएगा। ठीक है? तो पार्ट टू हम सभी कल पढ़ेंगे। बाकी इसको हम पढ़ लेते हैं। संक्षारण क्या है? संक्षारण एक रासायनिक अभिक्रिया है जिसमें धातुएं वायु में उपस्थित ऑक्सीजन से क्रिया करके ऑक्सीकृत होकर अपने सतह पर एक परत बना देती हैं। जिससे वह धातु धीरे-धीरे नष्ट हो जाती है। इस क्रिया को ही संक्षारण कहते हैं। बेटा क्या कहते हैं? संक्षारण। देखो ये पीडीएफ जो मैराथन की पीडीएफ है ये पेड बच्चों को मिल जाएगी। लेकिन जो हमारे प्यारे-प्यारे साथी हैं जो बैच नहीं ले पाए किसी कारणवश से उनको थोड़ी समस्या हुई बैच लेने में वो सभी स्क्रीनशॉट ले लिया करें और आप लोग खुद से पीडीएफ बना लिया करें। ठीक है? इसलिए मैं कह रहा हूं क्योंकि जब मैं बच्चों को फ्री पीडीएफ देता हूं तो ये बच्चे पढ़ने नहीं आते। केवल पीडीएफ के भरोसे रहते हैं। ठीक है? अब इसीलिए मैंने कहा है कि बाकी प्रीवियस ईयर वगैरह की सबकी मैं पीडीएफ दे दिया करूंगा। लेकिन मैराथन का आप स्क्रीनशॉट ले लिया करो। ठीक है? स्क्रीनशॉट हर स्लाइड का ले लो। ज्यादा नहीं। 40 42 स्लाइड होती है। उसका आप स्क्रीनशॉट ले लिया करो और उनकी अपनी खुद से पीडीएफ आप बना लिया करो। ठीक है बच्चा? चलिए आगे बढ़े। संक्षारण एक ऐसी रासायनिक अभिक्रिया है जिसमें धातुएं वायु में उपस्थित ऑक्सीजन से क्रिया करके ऑक्सीकृत होकर अपने सतह पर एक परत बना देती हैं। जिससे वह धातु धीरे-धीरे नष्ट हो जाती है। और इस क्रिया को संक्षारण कहते हैं। या हम इसी संक्षारण को बेटा जंग लगना भी कह सकते हैं। क्या कह सकते हैं? जंग लगना। आप देखते हैं ना जंग लग जाता है ना लोहे में तो इसी को संक्षारण कहते हैं। तो संक्षारण एक रासायनिक अभिक्रिया जिसमें धातुएं वायु में उपस्थित ऑक्सीजन से क्रिया करके ऑक्सीकृत होकर अपने सतह पर एक परत बना देती हैं जिससे वह धातु धीरे-धीरे नष्ट हो जाती है। और इस क्रिया को ही क्या कहते हैं? ठीक है। बिल्कुल। आ गया भाई समझ में? तो ये रही आज की क्लास। पहले मुझे बताओ क्या आपको इतनी बातें समझ में आ गई? क्या आपको आज की क्लास कैसी लगी? एक बार जरूर बताइए। मस्त लगी क्लास। जबरदस्त लगी क्लास। किसी को कोई दिक्कत परेशानी लाइक कर देना आप लोग। अगर क्लास अच्छी लगी है। नहीं अच्छी लगी है तो बिल्कुल भी लाइक करने की जरूरत नहीं है। कल सुबह 8:30 बजे इसका पार्ट टू करेंगे और कल आपकी जो साइंस है वो बहुत अच्छे से समझ मतलब खो जाएगा। कल हम लोग आवर्त सारणी जो जितने भी रक्त से संबंधित रोग हैं, थैलेसीमिया इन सभी चीजों को कल हम पढ़ेंगे। ठीक है? तो कल की क्लास भी बहुत जबरदस्त होगी और कल आपका ये खत्म हो जाएगा पूरे तरीके से। बाकी देखो पूरा दिन क्या करोगे अब आप लोग कुछ नहीं करना है बेटा ऐप पे जाओ सारे प्रीवियस ईयर पेपर पड़े हैं सारे प्रीवियस ईयर पेपर को खा जाओ कुछ नहीं देखना है किसी की वीडियो YouTube पे मत देखा करो सुबह 8:30 बजे पढ़ो उसके बाद चुपचाप जाओ और जितने प्रीवियस ईयर पेपर हैं सबको खा जाओ इतने बेहतरीन तरीके से आप पढ़ो कि एक भी प्रीवियस ईयर पेपर आपसे बचे ना। समझ रहे हो ना हम क्या बोल रहे हैं? एक भी पीवाईक्यू आपसे नहीं बचना चाहिए। सारा पढ़ लो। बहुत सारी पीवाईक्यू दे दिया है। जो बचा है वो आपको हम प्रोवाइड करा देंगे। परेशान मत होइए आप लोग। ठीक है? चलिए थैंक यू सो मच। जय हिंद जय भारत।

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