Gunah | گناہ | गुनाह | नमाज़ कुबूल तो सब कुबूल कैसे ? | Maulana Wasi Hasan Khan | Lucknow Majlis

GRAFH AGENCY LUCKNOW7,796 words

Full Transcript

ला हौला वला कुवता इल्ला बिल्लाह अल अली अजम अज बिल्ला मिन शैतान रजी बिस्मिल्लाह रहमान रहीम अल्हम्दुलिल्लाह रब्बिल आलमीन बार खला अजमान बाल अंबिया वल मुरसलीन व सलातो वसलाम हियत ल इकराम अलल बशीर मुनीर सदना नबीना व शफीना इंशा अल्लाह अल कासम मोहम्मद अल्लाहु सलेले वाला अले बते महरे जलाल का व जमाल लाला अल मुनना अजमान अम्मा बाद काला मौलाना अली मस अले सलाम इनला अमरा बलान मक बहा सला सन उखरा अमरा सलाते व जका फ मन सल्ला वलम य ज के लमक बल सलातो सवात पर मोहम्मद [संगीत] आप हजरात से गुजारिश है एक बार सूर हमद और सूर तौहीद की तिलावत फरमा के मरहूम मुसैक इब्ने शमशाद हुसैन नकवी और आफाक फातिमा मरहमा बिनते सैयद अली अख्तर रिजवी मरहूम की रूह को ाल फरमा दीजिए बिस्मिल्लाह रमा अल्हम्दुलिल्लाह रब्बिल आलमीन ब सवात पर [प्रशंसा] मोहम्मद एक कोशिश यह कीजिए कि वही दरवाजे पर दे दिया कीजिए त बार बार तशरीफ लाइगा तो डिस्टर्ब होगा वही दे दीजिएगा हा सलात यह हदीस मुबारक जिसकी तिलावत की गई है हमारे और आपके आठवे इमाम इमाम र सलाम देखिए इस्लाम में वाज बात तो बहुत से हैं लेकिन मोस्ट इंपॉर्टेंट जो वाजिब है उसका नाम है नमाज नमाज से बड़ा कोई वाजिब नहीं है इसलिए के इस वाजिब देखिए बहुत से गुनाह है गुनाह की असल में दो किस्में है एक है गुनाह कबीरा और एक है गुना है सगीरा गुनाह कबीरा की जो डेफिनेशन बयान की है बुजुर्गों ने हमारे हर वो गुनाह जिसकी सजा कुरान में या हदीस में जहन्नम बताई गई उसको कहते हैं गुनाह कबीरा और एक पूरी लिस्ट है जो अहले बैत अलम सलाम ने गिनवाला रिवायत में मुख्तलिफ जो है वो गुनाह बयान किए गए हैं 3032 तक पहुंचता है उसको कहते हैं गुनाह कबीरा गुनाह कबीरा की तारीफ क्या हुई जो है वो डॉक्टर साहब हर वो गुनाह जिसकी सजा कहां ले जाए जहन्नम में क्या ऐसा गुनाह कि जो जहन्नम में जाने का सबब बने उस गुनाह को अंजाम देने के बाद इंसान मोमिन रह सकता है पहला सवाल यह है ऐसा गुनाह कि जो सबब बने हमारे जहन्नम में जाने का क्या उस गुनाह के इरत काब के बाद आमीन आदमी मोमिन रह सकता मसलन लिफाफे में साफ सा मसलन जिना गुना कबीरा है तो क्या मोमिन जिना कर सकता है पहला सवाल य या मसलन चोरी गुनाह कबीरा है क्या मोमिन चोरी कर सकता है कि चोर भी हो और मोमिन भी हो यह मुमकिन है हा यह चीज ऐसी है कभी कभी य होता है कि समाज किसी चीज को अहम समझता है दन उसके बर खिलाफ है सवात दर मैं आपको समझाता हूं धीरे धीरे मिसाल के तौर के ऊपर जना भी गुनाह कबीरा चोरी भी झूठ बोलना भी गुनाह कबीरा है हम यहां आ गए ट्रेन से मसलन ये जानने कल कैसे आए मैंने क्या बताऊं हरब में वहां से निकल पड़ा टिकट भी नहीं लिया आज तो ऐसा टीटी को बेवकूफ बनाया हमने समझ और ये मर गए ऐसा हो गया यूं हो गया परस घर छूट गया फला हो गया कि वो ऐसा साहब रो रो के उससे बयान किया कि रप रक्षे का भी ले लिया टीटी से बजा तो कोई नहीं कहेगा कि तुमने गुनाह किया है तुम मजलिस पढ़ने के काबिल नहीं हो हर आदमी अरे क्या दिमाग है मौलाना आपका भी यही ना है जबक यह झूठ क्या है गुना है कबीरा है अगर यही मौलाना चोरी करते पकड़े जाए तो बजाय झूठ तब हर ट पर चला जाएगा यह आदमी मेंबर बैठने के लायक नहीं है फला का मोबाइल चुराते हुए पकड़े गए वो भी गुनाह कबीरा था यह भी गुना कबीरा अच्छा इसमें भी हल्का होगा मामला माज अल्ला अस्त फरला मिसाल जो है वह अगर वह जुर्म करते हुए पकड़े गए जिना का खुदा नख स्ता अब बताइए कोई मेंबर बैठने देगा हमको नहीं ना सवाल यह है कि तीन गुना है रिवायत में देखेंगे तो तीनों गुना है कबीरा है और तीनों जो है जहन्नम में जाने का बोलिए सबब है लेकिन तीनों आपस में जब देखे जाएंगे तो सब एक जैसे तो नहीं है ना ठीक है गुनाह कबीरा है कोई भी आप करेंगे जान बट तीनों आपस तो अब इसमें कबीरा में कौन कबीरा है वाह वा बड़े में कौन बड़ा है तो अब उसको जब ला तो हमारा समाज क्या कहता है जना ज्यादा बड़ा है है ना दूसरे नंबर पर चोरी आ जाएगी झूठ को तो समझदारी समझा जाता है वो शायद गुनाह में हमारे यहां शामिल ही नहीं है सलवा गौर कर लेकिन शरीयत इसके उल्टा जा रही है एक शख्स आया रसूलल्लाह के पास कहता है या रसूल अल्लाह अल मोमन यनी मोमिन जिना कर सकता है यह रसूलल्लाह से पूछा जा रहा है पैगंबर ने फरमाया कयक जालिक मे भी मुमकिन है शहवत गालिब आ गई अकल फेल हो गई एक लमहे के लिए सही जो वो आदमी को लज्जत का एहसास हुआ कर लिया उसने तो मोम गुनाहगार है पकड़ा जाएगा 100 कोड़ा पड़ेगा बगैर तौबा के मर जाएगा जहन्नम में जाएगा बट मोमिन है सजा काट के जहन्नम से वापस आ सकता है या रसूल अल्लाह अमन मोमिन चोरी कर सकता है हजरत ने फरमाया क मेरे कहने मल चोरी कर ले मोम गुना तो आही है क्या मोमिन चोरी कर सकता है मतलब यह कि ईमान बचेगा पैगंबर ने फरमाया कलिक में भी चोरी कर लिया पकड़ा गया हाथ काटा जाएगा नहीं पकड़ा गया बगैर तबा के मर गया जहन्नम में चला जाएगा अपना जो है व ईमान बचा हुआ है 100 200 300 साल जितना जहन्नम में जलना है धुल धुला करके वापस आ जाएगा इसलिए कि ईमान बाकी है तीसरे नंबर पर पूछता है अलमय या रसूल अल्लाह मोमिन झूठ बोल सकता है पैगंबर ने फरमाया ला मोमिन झूठ नहीं बोल सकता तो देखि किताब में नहीं लिखा है लेकिन कभी कभी आदमी का बता देता है कि बात समझ में नहीं आई हो सकता है जी इस तरह कुछ किया हो अब रसूलल्लाह ने उसको जवाब दिया मोमिन जिना कर सकता है मुमकिन है मोमिन चोरी कर सकता है मुमकिन है मोमिन झूठ बोल सकता है हजरत ने फरमाया ना अब हजरत ने उसका ताज्जुब देख कर के फरमाया क्या कुरान नहीं पढ़ा तुमने यह हदीस की बात नहीं अब कुरान बता रहा है कि इनमा अलान झूठ वही लोग बोलते हैं जो मोमिन नहीं होते कुरान कह रहा है समझ में आया आपके यानी झूठ वो भी गुनाह कबीरा है ये भी गुनाह कबीरा है वो गुनाह कबीरा जहन्नम में जाने का सबब है मगर ईमान बचा हुआ है यह गुनाह कबीरा वो है कि अगर ये हु तो जहन्नम में भी जाएंगे ईमान भी जाएगा ईमान जाने का नुकसान क्या है मोमिन सजा काट के पलट सकता है काफिर जहन्नम में जाएगा तो हमेशा रहेगा सवा मैं आपको धीरे धीरे ला रहा और देखि य इस्लाम का अब वही झूठ जो इतना अहम है कि मोमिन सब कर सकता है झूठ वही दीन कहता है कि कभी-कभी झूठ सच के मुकाबले में कहीं ज्यादा बेहतर है अब ये देखिए घूम गई बात वही दीन कहता है कि भैया वो फ सच जिससे समाज में फित फैल जाए उससे कहीं बेहतर वो झूठ है जिससे दो लोगों में इस्लाह हो जाए सलात किस्सा सुना है आपको सुन मजेदार हम लोग यही पढ़ते थे मदरसा नाजम में तो शश में गुलिस्ता पढ़ाई जाती थी शेख सादी की तो वो हिकायत हैं कहानियां है गुलिस्ता में उससे बड़ा फायदा है बच्चे शौक में कहानी के रट भी लेते हैं और जबान भी सीख तो उसमें शेख सादी ने एक दास्तान लिखी बहुत मजेदार एक बादशाह ने एक चोर के मुजरिम चोर के मुजरिम को कत्ल का हुक्म दे दिया तो अच्छा अब तो मरना है ही है बकौल किसी शायर के अरबी का कहता इन ता सान जब इंसान मायूस हो जाता है तो जबान लांबी हो जाती है क म जैसे बिल्ली जब देखती है कि अब नहीं बचेंगे तो कुत्ते पर झपट पड़ती है व आखरी तो उसने दे मरना तो है है उसने जो मुह में आया गाली पक्कड़ बादशाह को देना शुरू किया बादशाह ने कहा क्या कह रहा है क्या बादशाह बहरा था बोलिए क्या बादशाह ने नहीं सुना इसी का नाम समझदारी है कहीं कहीं बहरे बन जाओ दुनिया के लिए भी मुफीद है आखिरत के लिए भी मुफीद है सवा खूब सुना बादशाह ने कभी-कभी अवॉइड करना बड़ी तो बादशाह ने क्या कह रहा है तो कहते हैं कि यकी वजरा नेक महजर एक वजीर था जो दिल का बड़ा अच्छा था उसने कहा सरकार की जिंदगी की दुआएं मांग रहा है बिल्कुल सरासर झूठ के नहीं है और जबक बादशाह भी सुन रहा है गाली बक रहा है मुझे क्या कह रहा है सरकार की जिंदगी की दुआएं मांग रहा है तो हर जगह आपस में कुछ ना कुछ चपकाल तो रहती है एक दूसरे वजीर के जो इनके अगेंस्ट में थे है ना ऊपर से चाहे जितना अच्छा हो टीचरों में भी सारे स्टाफ एक दूसरे से एकदम वो नहीं होते हा सलात बरमा ऊपर से ठीक रहता है सब तो कहते यरा नेक महजर एक शरीफ वजीर था उसने जो है वो कह दिया कि साहब की जिंदगी की दुआएं मांग रहा है दूसरा जजूर वजीर जिससे उसकी अब उसको तो मौका मिल गया यही दबा लो इनको समझ बहुत प्रिंसिपल साहब से नजदीक है ये यहीं इनकी हैसियत दिखला दो हम जैसे वजीर के लिए मुनासिब नहीं है कि बादशाह सलाम के सामने सच के अलावा और कुछ कहा जाए यह हर सरकार को गालियां बक रहा था और हमारे वजीर मोहतरम सरासर झूठ बोल रहे हैं बादशाह समझदार था व बहरा थोड़ी था उसने कहा सुनिए वजीर साहब जो झूठ इन्होंने बोला है उससे इसकी जिंदगी बच जाएगी जो सच आप बोल रहे हैं उससे इसकी जिंदगी जा सकती है उसके बाद शेख सादी ने शेर लिखा का दुरू मस्लत आमज बे जराती फित अंगेज मस्लत वाला झूठ कहीं बेहतर है उस सच से जो समाज में फित बरपा करते सलात पर मोहम्मद तो मैं ये आपको क्यों सुना रहा हूं ताकि कहीं बहस हो तो समझा सकिए कि भैया हर जगह सच बोला नहीं जाता आप हदीस कुरान मत सुनाइए सच बोलो सच बोलो सच बोलो बेशक सच से बढ़कर कुछ नहीं है मोमिन सब कर सकता है बोलिए झूठ नहीं बोल सकता है लेकिन इतने उसके बावजूद अगर समाज में सुलह करवानी है मसाल हत करवानी है तो वही झूठ बेहतर है सच के मुकाबले में तो ये तो दरमियान में बात आ गई तो बात हमारी ये चली थी कि वाजिब इसी तरीके से जैसे गुनाह है ना इस ये झूठ सबसे खतरनाक वैसे ही बात तो वाजिब तो बहुत से हज भी वाजिब है अल्लाह ने उती किया है जकात भी वाजिब है रोजा भी वाजिब है लेकिन अजब वाज बात इन वाजिब में देखा जाए तो सबसे बड़ा वाजिब कौन है देख हर चीज में छूट है रोजा वाजिब है कुरान कहता फन कान मनक मरी सफर मया अगर बीमार हो सफर में हो छोड़ो बाद में रख लेना सीधे-सीधे कुरान में है हज वाजिब है मगर इस्तता नहीं है तो वजू खत्म हो जाएगा कोई बात नहीं है खम्स वाजिब है एक ही रुपया देगा कोई बात नहीं 20 पैसे ले आओ लेकिन नमाज ऐसा वाजिब है कि जो किसी कीमत पर हमको छोड़ने का हक बोलिए नहीं है हत्ता कुछ नहीं तो आ के बोलिए इशारों से पढ़िए बैठे बैठे पढ़िए लेटे लेटे पढ़िए आप कुछ छोड़ सकते हैं नमाज हो गया ना अब आइए सवात धीरे धीरे एक दो हदीस और सुना दूं ताकि यह ना हो कि माज अल्ला हमने नमाज को हल्का कर दिया तो नमाज मोस्ट इंपॉर्टेंट वाज बात इससे बड़ा वाजिब कोई यहां तक के पैगंबर ने फरमाया मन तर सलात मुता फकत कफर जो जान बूझ के नमाज छोड़ दे वह काफिर है या छठे इमाम ने फरमाया गजब का काफ जिना करने वाला काफिर नहीं है तार को सलात बोलिए काफिर है सलात काद फस्ता नमाज की मिसाल खमे के बास की तरह से है खंबे की तरह से अगर वो गिरा लीजिए शामियाना टिकेगा आपका यानी सारे आमाल टिके हुए काहे पर नमाज के ऊपर या बहुत मशहूर है सबको याद है अ सलातो हां चलिए वो भी हदीस है मेराजुल मोमिन अच्छा एक मस्जिद में हमने और लिखा देखा था सलातो मेराजुल मोमिनीन तो उन लोगों से पूछा ल या ये कहां देखा हमने जो पढ़ा वो मोमिन के साथ है तो अगर कहीं देखा हो तो प्लीज हमको उसका वो दे दीजिएगा ताकि हम तलाश कर ले सवात पर मोहम्मद चलिए सलातो मेराज मोमिन या मेराज मोमिनीन मतलब वही है सिंगलर पलर के डिफरेंस को नमाज मोमिन की मेन जो बहुत मशहूर है क्या अ सलातो उद दन अब य से मजलिस स्टार्ट है नमाज दीन का सुत है उसके बाद का जुमला क्या है इन बला मा सेवा नमाज कबूल सब कबूल रुत रुद दमा सेवा नमाज रद सब रद तो इससे क्या मतलब हुआ कुछ समझ में आया सर नमाज कबूल तो सब कबूल य इन कोबल अगर कबूल य अगर कबूल का मतलब क्या हुआ यानी कोई गारंटी नहीं है कि हम मस्जिद में जाकर के नमाज पढ़ रहे हैं और हमारी नमाज कबूल भी हो जाएला इसकी कोई जमानत बल्कि एक रिवायत तो इतनी जबरदस्त है साहब रसूल अल्लाह ने फरमाया कि अल्लाह ने मेरे ऊपर वही नाजिल की फरमाया ए मोहम्मद अपनी उम्मत को समझा लो जिसने भी मेरे बंदों में से किसी बंदे पर जुल्म किया है खबरदार मेरे घरों में से किसी घर में दाखिल ना हो यानी मस्जिद उसके बाद सुनिए इसलिए कि फनी अलान मादा सली जब तक यह मस्जिद में नमाज पढ़ता रहेगा तब तक मैं इस पर लानत करता रहूंगा सवात समझ में आया इतनी अहमियत के बावजूद ऐसे भी नमाज है कि नमाज पढ़ोगे तो लानत पड़ेगी खुदा की तो इसका मतलब यह बात फाइनल हुई के कोई गारंटी नहीं है वसी साहब कि आप मस्जिद गए हैं नमाज पढ़ने तो आपकी नमाज कबूल हो जाए और जब तक नमाज कबूल नहीं होगी आप हज कर लीजिए आप जकात दे दीजिए आप चाहे जो इतनी बड़ी नेकी कर लीजिए मेन जो है वो बोलिए नमाज है नमाज आपकी कबूल नहीं तो अब यहां इतना जब अहम है कि सारे आमा भाई कर्बला गए अभी देखा मैंने 1 हज मांग रहे हैं जो है वो ईरान रा दोनों मिला कर के हज आप गए सा लाख रुप कितना है सर आजकल लाख ख रुपए लगा के आदमी चला गया हज करने बाद में पता चला कबूल ही नहीं हुआ क्यों क इसलिए तुम्हारी नमाज कबूल नहीं थी समझ रहे हैं ना तो अब मसला यह है कि सारे आमाल जो है वो मकू है क्या पर नमाज के ऊपर तब मौलवी साहब होश में आओ अब यह पता लगाओ नमाज कब कबूल होती है ताकि आगे वाला तो हल हो सवात अब यहीं से मैं आपको सुभानल्ला हज कर लिया 10 लाख खर्च कर दिया वो बेकार चला गया वो कर लिया वो बेकार चला गया फला कर वो तो भैया क्यों अग नमाज पहले बता दिया हम क्या करें कि नमाज कबूल हो जाए अब यहीं से वो जगह है कि सिवाय अहले बैत के कोई गाइड नहीं कर सकता आपको चाहे जितना पढ़ लिख लीजिए कोई आपको बता नहीं सकता अब मैंने जो हदीस पढ़ी है वो है सुनिए आठवें इमाम फरमाते हैं अला अल्लाह ने तीन चीजों का हुक्म तीन चीजों के साथ जोड़ के दिया है इस तरह से कि अगर पहली चीज डिस्टर्ब हुई दूसरी बोलिए खुद ब खुद डिस्टर्ब हो जाएंगे पहली रिजेक्ट दूसरी खुद बखुदा भी धीरे धीरे उधर आना हैरा सलाते जका अल्लाह ने नमाज और जकात का हुक्म एक साथ दिया है पढ़िए कुरान अकीम सलात जकात यकी सला जकात और जहां लफ जकात नहीं है वहां मतलब जरूर है मसलन अलिफ लाम मम पहले पारे में आ जाइए ल किताब आगे दल यह कुरान हिदायत करता है किनकी मुत कौन है नंबर एक मुत वो लोग है जो गब पर ईमान रखते हैं अब तो खुश हो जाइए के दुनिया के तक की गारंटी हो या ना हो गायब पर ईमान रखने वाले तो आ [प्रशंसा] [संगीत] ब नंबर एक कौन है मुत जो गब पर दो व सलात नमाज कायम करते हैं आगे जकात नहीं है मीनिंग है सला नमाज कायम करते हैं वरना और जो उनको हमने रोजी दी हैय अजीब रकना हमने दिया है मतलब यह भी कुरान समझाना चाहता है यह मत समझना कि मेहनत हमने की है बेशक तुमने की है मेहनत के काबिल बनाया तो हमीने है सवात पर मोहम्मद जो कुछ भी तुम्हारे चाहे अकल की बुनियाद पर हो या सब हम ने दिया है ना हमने जो रोजी दी है यन उसमें से वह खर्च करते हैं तो इसका क्या मतलब हुआ जहां नमाज है कायम करने की बात वहां अक्सर जगहों पर क्या मिलेगा आपको जकात दो अब जकात क्या चीज है देखिए इस्लाम में दो टैक्स है एक है सेविंग टैक्स और एक है इनकम टैक्स दो टैक्स सरकार तो आपसे एक ही लेती है मगर इतना दबा के ले लेती है कि दूसरे के काबिल बचते ही नहीं है नहीं [संगीत] है हालाकि इस्लाम का दोनों टैक्स मिलाकर सरकार के बराबर नहीं होगा तो दो है एक है क्या सेविंग टैक्स एक है इ कम टैक्स सेविंग टैक्स को हमारे यहां कहते हैं खस खूब खाइए पीजिए खिलाइए पिलाइज में बाट जो बच जाए उसमें भी 80 फीस तुम्हारा 20 पर ले आओ 20 में जो है व 10 इमाम ले लेंगे और 10 सादात गुरबा हर गरीब नहीं हर गरीब के लिए अलग बजट है और इसको जहन में रख लीजिए सदार अगर कुछ बनना चाहते आप रसूलल्लाह के बच्चों का ख्याल रखिए रसूलल्लाह आपका ख्याल रखेंगे ये जहन में रख लीजिए अभी रास्ते में मैं एक किताब में पढ़ रहा था ऐसे ही खोल के अजीब रिवायत पैगंबर ने फरमाया अगर कोई मेरी जरीयत के साथ नेकी करता है और वह बदला नहीं दे पाती नबी ने फरमाया मैं तुमको बदला दूंगा समझ रहे हैं तो वो हो गया सेविंग टैक्स में उससे हमसे मतलब नहीं है आधा गरीब सादात का है वो ले गए अपना वो जवाब देंगे आधा इमाम का है नायब इमाम ने ले लिया बात खत्म नायब इमाम भी नहीं है क जिनको उन्होंने इजाजत दी है आपके पास जो है व आगा सिस्तानी के इजाज है मैंने अपना 5000 खुम्स मेरा था मैंने आपको दे दिया अब हिसाब अल्लाह के हम तो वो रसीद लेकर कफन में चले जाएंगे साहब इन्होंने इजाजत दी थी इनको इजाजत देती साहब यह रसीद है हमने दे दिया अब आप जाकर हिसाब दीजिएगा जिन्होंने लिया है उससे हमसे मतलब नहीं है और एक चीज कहिए तो सुना दूं सवात पर मोहम्मद सन 2000 में जब पहली बार कर्बला मोल्ला का शरफ अल्लाह ने बख्शा तो छोटा सा काफिला था सिरात वाले वही पहला साल था उनका बंबई वालों का ले गए तो आ सिस्तानी की बारगाह भी गए लखनऊ के भी कुछ दो एक लोग थे तो उसमें किसी ने कहा कि साहब मस्जिद हमारे महल्ले की बड़ी खराब हो गई है खुम्स का इजाज दे दिए सहमे इमाम का यह इधर-उधर की सुनी नहीं अपने कान की बता रहा हूं डायरेक्ट आगा के आगा ने फरमाया मेरा नजरिया यह है कि खुम्स सिर्फ तालीम पर खर्च होगा सुन मस्जिद इमाम बड़ा बनवाना है मोमिनीन अपनी जेब से बनवाए मगर ये फिर उन्हो मगर यह के जो है व अहले करिया अहले बस्ती फकीर हो और सख्त जरूरत हो तब अगर हमारे व कलाए माली जो है वह कहेंगे तो मैं इजाजत दूंगा तो मैंने उसी वक्त पूछा 24 साल हो गया 2000 की बात तो आ आपके वकला माली कौन है उस वक्त उन्होंने पूरे हिंदुस्तान से तीन नाम लिया था दो का तो इंतकाल ही हो गया आपके यहां से डॉक्टर कलब सादिक साहब आला मका मैंने अपने कान से सुना दो मोहिब नासिर मरहूम हो गए बंबई तीन अहमद अली आदी साहब तो वो ये लोग जाने साहब जिन्होंने लिया जिन्होंने दिया अब आइए इधर दूसरा वाला क्या है इनकम टैक्स उसको कहते हैं क्या जकात जकात वाजिब है कहा हां जो आमदनी का ना सवात पर मोहम्मद जो आम का ना आपके घर में तजल मसाइल है उठाइए पढ़िए नौ चीजों पर जकात वाजिब है जिसमें अक्सर जो है खास करके यूपी वालों में गांव वालों में तो हो जाएगा शहरों में तो किसी के ऊपर शायद ही वाजिब हो नंबर एक गेहूं तो यहां लखनऊ में किसके पास इनी खेती है कि उसको साढ़े क्विंटल गेहूं पैदा होगा कि जकात निकाले जाओ जाओ तो हम लोग भी नहीं बोते देहात वाले भी जो किशमिश व होती नहीं हमारे इलाके में इस तरह से बकिया नौ चीजें जो सोना और चांदी और क्या क्या तो जकात तो साब मैं तो शहर का आदमी मेरे पास एक बालि जमीन नहीं है मकान के अलावा तो जकात का तुम्हारे ऊ पर वाजिब नहीं है तो हमने कहा साहब ना निकाले कहा मत निकालो वाजिब नहीं है मत निकालो हो गई ना लेकिन अब अगला फिकरा सुनिए इमाम ने क्या फ वापस आता हूं इमाम ने क्या फरमाया अल्लाह ने तीन चीजों का हुक्म तीन चीजों के साथ जोड़ के दिया इस तरह के पहली डिस्टर्ब दूसरी खुद बखुदा रिजेक्ट हो जाएगी हमारा सलाते व जकात नमाज और जकात का हुक्म एक साथ दिया अब इमाम फरमाते हैं फन सल्ला वलम यके अगर कोई नमाज तो पढ़े जकात ना निकाले लम तुक बल सलातो उसकी नमाज भी कबूल तो सा हमारे ऊपर जकात वाजिब नहीं है बोलिए ना तो क्या करे मत निकालो हमने कहा सा फर नमाज का क्या होगा इमाम तो कह रहे वो तोय कहा नहीं वाजिब मुस्ताहब जो जकात नहीं देगा उसकी नमाज भी कबूल नहीं है अकल य कहते वाजिब वाली बात तो साहब हमारे पर वाजिब नहीं है तो हम इससे कैसे महरूम क्यों हो गए जवाब जकात की दो किस्में है एक है जकात वाजिब और एक है जकाते मुस्ताहब वाजिब बता दिया गया आप उसमें नहीं आते आपके ऊपर वाजिब नहीं है अल्लाह ने वाजिब नहीं किया वो उसका कम है अपने बंदों की मदद करने को मना तो नहीं किया सलवा अब सुनिए ये हो गई जकात मुस्ताहब तो बाज कहते हैं कि साहब जो भी आमदनी है आपके 2 पर मुस्ताहब है वो एक अलग मैटर है हमारे ऊपर वाजिब नहीं है आरिस भाई बहुत परेशान है आजकल ज 00 मिल जाएंगे हां हां हां लीजिए यह जो 00 दिए हैं यह सदका तो नहीं है ना किस अकाउंट में लिखा जाएगा यह खुम्स तो नहीं है ना वाजिब तो नहीं है जकात ना ये किस अकाउंट में लिखा जाएगा कहा यह जो तुमने किसी बंदे खुदा की मदद कर दी है ना 00 जो कोई नियत नहीं है यह कहां तुम्हारा लिखा जाएगा मुस्ताहब जकात में सलवा फरमा गौर फरमाया आपने अब यहां प भी एक चीज और सुनाऊ याद आ ग हदीस सुनाता हूं तो मुस्त भी जकात इमाम ने क्या फरमाया नमाज और जकात का हुक्म एक साथ है जो नमाज पढ़े जकात ना दे जकात खर्च कहां होगी खुम्स का तो हो गया जिन लोगों ने इजाज लिया है उनको पता है क्या करना है जकात कहां खर्च होगी तो बाज बुजुर्गों का हमारे फरमाना है कि जकात ओनली फॉर नमाज किसके लिए पढ़ी जाती है बोलिए अल्लाह के लिए तो नमाज किसकी जकात किसकी गरीबों की इमाम कहते हैं जकात नहीं निकालो ग नमाज कबूल नहीं कुछ समझ में आया खुदा क्या समझाना चाहता है चाहे जितने सजदे कर लो जब तक हमारे गरीब बंदों का ख्याल नहीं करोगे हम अपनी नमाज भी कबूल नहीं करेंगे सलात ये है [संगीत] दन दन हमको ये सिखाना चाहता है कहने लगे अरे मौलाना पढ़ना तो सब आसान है आजकल धंधा हो गया है सलवाद ये भी सुन लीजिए क्या हो गया है बोलिए धंधा हो गया है अच्छा एक रिवायत यह भी कहती है के मसलन आप नहीं करने के लायक है हमारी औकात नहीं है क्या नाम है बेटा आपका मुदस्सिर को हमने फोन किया येय अच्छे लखपति करोड़पति आदमी अल्हम्दुलिल्लाह खुदा करे हे बेटा ठीक है भली साहब इन्होने उठाकर साब कंसर पेशेंट था लाख रप दे दिया तो मेरा थोड़ी कुछ लगा है इनका गया है लेकिन मेरा सवाब इनसे कम वाह वा बोलिए नहीं है तो अब उसमें जब दो चार बार किसी से कह दीजिए ना तो आदमी आप ही के ऊपर शक करने लगता है स ये भी बड़ी दिक्कत है य भी मेरे साथ हुआ है इसलिए कह रहा हूं एक बंदा खुदा के कुछ मामला था तो हमने कहा जी हुजूर और उन्होंने उनके यहां भेज दिया 15 ही दिन के बाद एक दूसरा मैटर आ गया फिर मैंने उसी गलती य हुई कि एक दो महीने का हमको यब करना चाहिए था अा अच्छा हमारे पास तीन चार लोग है उन्हे घुमाते रहते हैं अबकी बार इनसे कहा है अगली बार इनसे कह देंगे उसके बा अग वो 10 दिन के बाद फिर हो गया तो वो उसके लहजे से लगा कि वो मेरे ऊपर मशक क मैं कुछ नहीं कर सकता साब स मोहम्मद अब तो हस रहे लेकिन उस बहुत लगी थी या इसने हमारे ऊपर शक कर लिया क्या तो क्या करें सवाल यह है और सही बात यह है हकीकत यह है यह मार्केट हो गई धंधा हो गया इससे इंकार नहीं कर सकते आप बाद में पता चल कि आप धोखा खा गए इस पर जो है एक दास्तान सुन लीजिए अब समझ में आ जाए करना क्या है अबू हमजा सोमाली का नाम सुना है आपने बहुत क्लोज थे इमाम से पूरी दुआए सहर उनसे है अबू हमजा समाली कहते हैं जुमे का दिन था मैंने घर पे मौला के चौथे इमाम के घर पे उनके सात सुबह की नमाज पढ़ी और हजरत मुसल्ले प बैठे रहे यहां तक कि सूरज निकल आया तो मैं भी साथ साथ रहा इमाम पढ़ते रहे मैं सुन तभी तो इतनी बड़ी बड़ी दुआ नकल की है अबू हमजा समाली ने तो इतने में दरवाजे पर किसी ने दस्तक दे दी हजरत मुसल्ले पर बैठे थे आवाज दी घर वालों को देखो कोई फकीर है दरवाजे पर कुछ दे दो अबू हमजा कहते हैं कि मेरे मुंह से निकल गया मौला अरे ऐसे ही जो आ गया बहुत से मांगने वाले मुस्तक नहीं होते मतलब धंधा बना ये भी इसका मतलब कि ये धंधा आज का नहीं है ये भी पुराना है स पर मोहम्मद क्या करें तो अबू हमजा ने कहा मैंने हजरत से अर्ज किया मौला हर मांगने वाला मुस्तक नहीं होता इमाम का जुमला नोट कर ली चाहे याद ना रह जाए लिख के जेब में रख लीजिए सुबह शाम पढ़ लीजिएगा हमारे इमाम ने फरमाया इना गैरे मुस्तक तो उर्दू में समझ में आ रहा है ना न नानती मुस्ता हम गैरे मुस्तक को भी दे देते हैं क्यों हरन मिनल मुस्तक इस डर में की जांच पड़ताल में कहीं मुस्तक ना छूट जाए स देख आपका पैसा है ना गलत चला गया तो आप तक है हमारा पैसा था हम ने दिया और हमने ल दिया तो हम ही तक है लेकिन अगर एक इस झटके में जरूरत मंद छूट गया तो उसकी आ कहां पहुंचा देगी हमको पता नहीं सवात पर मोहम्मद गौर कर रहेती तो खुलासा कलाम ये बातो बातों में वक्त ही खत्म हो जाता तो कहां पहुंचे हम नमाज मोस्ट इंपॉर्टेंट नमाज कबूल तो नमाज कब कबूल होगी अब समझ में आ गया ना डॉक्टर साहब बताइए नमाज कबूल होगी जब जकात दोगे जकात क्या है सिर्फ गरीबों का हक है इसका मतलब यह हुआ अगर नमाज कबूल करवानी है अगर सारे आमाल कबूल करवाने हैं तो क्या करना होगा पहले नमाज कबूल करवाओ नमाज कबूल करवानी है तो गरीबों का ख्याल करो यह है हमारा दीन और अब जब इस जरा सा आप आगे चलेंगे ना तो खाली गरीब नहीं इंसान नहीं हत्ता जानवर का भी ख्याल कर लो जानवर भी छोड़िए हत्ता दरख्त सवात पर मोहम्मद ये हमारे डॉक्टर साहब रहने वाले हैं जैदपुर के है ना तो जैदपुर में थोड़ी सी जमीने थी इनकी वहां से आ गए शिया कॉलेज में टीचर हो गए तो तब तक इन्होंने कहीं पढ़ लिया कि छठ इमाम फरमाते हैं फ खबरदार अपनी जमीनों की हिफाजत करो बिला वज अहले बैत शुरू से नहीं कह रहे थे आज के हालात देख लीजिए इमाम की हदीस मिला लीजिए क्यों कह रहे थे सवात मोहम्मद उकम अपनी जमीनों की हिफाजत करो तो अब जैसे ही छोड़ के चले जाएंगे तो कब्जा हो जाएगा क्या करें खेती ती कौन करेगा तो दीन कहता सात काम ऐसे हैं कि आदमी मर जाता है उसके कब्र में सवाब पहुंचता रहता है बहुत सी साथ उसमें एक यह है कि जो कोई पेड़ लगा दे जब तक वह दरख्त रहेगा उसके साय से लोग फायदा उठाते रहेंगे परिंदे उसमें पनाह लेते रहेंगे तब तक आपका सवा कमीशन कट के आपकी कब्र में पहुंचता रहेगा तो इन्होंने कहा यार यह तो बहुत बढ़िया काम है एक महीने की तनख ही सही पूरा यहां से वहां तक पेड़ लगवा दिया किसी से कहा भैया जब तक फल वल नहीं आता तुम ही लेना कोई बात नहीं मगर जरा इनको पानी वानी देते रहना उसके साथ कोई प्रॉब्लम हो गई व बेचारा बंबई दिल्ली कहीं चला गया इनको पता नहीं अपना लखनऊ मस्त है जून का महीना आ गया जून के म उनसे पूछिए एग्रीकल्चर वालों से बाज का फतवा यह है एग्रीकल्चर में कि जून में सुबह शाम दो मर्तबा पानी लना चाहिए तो अब वह पेड़ मुरझाने लगे भूल गया नाम आपका बेटा मुदस्सिर इनके पड़ोसी थे एक दिन गुजरे अरे यार लखनऊ में घूम रहे सारे दरख तो मर जाएंगे खत्म तो हमने कहा तो डाल दो पानी इसमें हम क्यों डाल दे कोई मेरा आके बेच के लकड़ियां तो वो ले जाएंगे फल तो वो खाएंगे हमको क्या मिलेगा अब दन आगे आया नहीं ठीक है उनका है तुम डाल दो हमसे क्या मतलब कहा वो नहीं देंगे तुमको यही है ना हम देंगे तुम उस पेड़ की जान बचा लो हम देंगे तुमको रिवायत कहती है अब सुनिए रिवायत कहती है कि अगर कोई किसी दरख्त को पानी पिला दे गोया उसने प्यासे मोमिन को पानी पिलाया सवात गौर कर रहे क्या हुआ यानी जो दन दरख्त को पानी पिलाने को कह रहा है अब आगे सुनिए हां तो बात हमारी कहां से चली थी गुना है कबीरा डेफिनेशन क्या है गुना कबीरा की सर हर वो गुनाह जिसकी सजा जहन्नम हो है ना मिन जुमला उन गुनाहों में से एक गुनाह क्या है जिना जो मैं कहने जा रहा हूं जिना जिना क्या है गुनाह कबीरा कहां जाएगा आदमी जहन्नम में रसूल अल्लाह को मेराज पर क्यों बुलाया गया सर लेन मन आयात कुरान कहता है ताकि इनको हम अपनी निशानियां दिखलाए समझे आप तो वाकई अल्लाह ने दिखलाया खूब खूब दिखलाया एक दो चीजें सुन लीजिए घर जाकर बता दीजिएगा डबल मजलिस हो जाएगी सवात कौसर प भी गए और वहां भी गए जन्नत में भी गए जहन्नम को भी देखा तो दो मिनट में जहन्नम वाला सुन लीजिए जिसको कह रहे घर जाके बता दीजिए कहने लगे जहन्नम में मैंने देखा कुछ लोगों को कि अपने चेहरे को अपने नाखूनों से नोचे डाल रहे हैं मैंने कहा भाई जिब्रील इन्होंने क्या किया है क यह लोग दुनिया में लोगों की गीबत करते थे और आबरू से खेलते थे हां ये सुन लीजिए एक रिवायत कहती है कि अग अगर कोई श घर से निकलता है इस नियत से मन रवा रिवायत री अगर कोई अपने बिरादर मोमिन के लिए ऐसी कोई बयान बयान करे मकसद यह हो कि यह बेइज्जत हो जाए रिवायत कहती है घर के अंदर बैठे होगे अल्लाह निकाल के चौराहे पर तुमको बेइज्जत करेगा तब मरोगे सलवा य मत समझिए बेजत कर दिया फिर कहने लगे कि साहब मैंने देखा कुछ लोगों के मुंह में आग डाली जा रही है और पीछे से निकल रही है ये तो बड़ा अजीब तरह का अजाब है मैं लगा जिब इन्होंने क्या किया जिब्रील ने कहा यह वो लोग हैं जिन्होंने दुनिया में यतीम का माल हड़पा है तवज्जो फरमाया यतीम पर कितने लोग हैं गौर किया कभी सुन लीजिए एक मिनट में इधर मौलाना ने हुसैन काहा लोग रोना शुरू हो जाते हैं कुछ लोग ऐसे भी हैं और कुछ भी है पूरा मसाब शहादत पढ़ लीजिए ऐसे देखते हैं है या नहीं है मिर्जा दबीर ने ऐसे ही लोगों के लिए कहा था सर झुका के बैठ घर मजलिस में रो सकता नहीं यह क्यों होता है ऐसा तुम्हारे सामने इमाम हुसैन को जबा किया जा रहा है और तुम ऐसे देख रहे हो वजह का दिल पत्थर हो गया है तो क्या करें कि दिल नर्म हो जाए य अगर मरज है तो इलाज इलाज कहते अगर किसी को दिल की सख्ती की शिकायत हो उसको चाहिए अपने दस्तरखान पर यतीम को बिठला अल्लाह उसके दिल को नर्म कर देगा सवा मोहद यह दो हो गया तीसरा मैंने देखा कि कुछ औरतों को बालों पर लटकाया गया है यही मैंने घर जाकर सुना दीजिए एक मजलिस और हो जाएगी मैंने कहा इनकी क्या खता है या रसूल अल्लाह यह औरत वह है जो दुनिया में अपने बालों की नुमाइश किया करती थी गौर फरमा लिया आपने यह हो गया जहन्नम वाला हाल अब पंबर जन्नत की तरफ आइए जरा फरमाते हैं राई तो बस मजलिस तमाम हुई फ जनिया मैंने जहन्नम में एक मैंने जन्नत में एक जिना का औरत को देखा बोलिए सर जिना क्या है कहां जाना चाहिए था और रसूलल्लाह ने कहां देखा फिल जिन जिब्रील यह यहां क्या कर रही है जिब्रील ने कहा के या रसूल अल्लाह जिना का इसीलिए पूछ रहे हैं आप कहा और क्या जिब्रील ने कहा कि या रसूल अल्लाह अल्लाह ने इसका गुनाह माफ कर दिया क्या अल्लाह ने इसका गुनाह तो अल्लाह के कोई काम बिला वजह नहीं नहीं होता उसके असबाब है यह बाद में दिमाग में आया व असबाब पर बात अच्छी हो सकती थी मगर जाने दीजिए तो क्यों माफ कर दिया बिला वजह नहीं होता उसकी माफी के असबाब है तो क्यों माफ हुई अब जिब्रील ने बयान किया साहब यह जा रही थी एक दिन एक कुआ था उसके पास ही गर्मी का जमाना एक कुत्ता पड़ा हुआ प्यास की शिद्दत हाप रहा था थी गुनाहगार मगर दिल की नर्म थी दुआ कीजिए अल्लाह दिल का नर्म बना दे सारी इबादत एक तरफ संग दिली एक तरफ दिल की नर्म थी कुत्ते को हाता हुआ देख के बेचैन हो गई गुनाहगार होने के बावजूद इधर भागी उधर दौड़ी ना कहीं रस्सी ना कोई बर्तन कुछ नहीं समझ में आया तो अपना उसने कपड़ा उतार दिया जो भी शल टाइप रहा हो बहरहाल किताब में लिखा हुआ है और वो कुए में जाती थी भिगा देती थी और लाके उस कुत्ते के मुंह में बोलिए क्या हुआ निचोड़ देती थी एक बार दो बार चार बार कुत्ता सेराब हो गया उठा निकल लिया अल्लाह ने कहा कि एक इंसान होकर के यह रहम दिल इतनी है तो मैं तो अरहम राहन हूं एक जानवर पर तरस खाने की बुनियाद पर अल्लाह ने इसको माफ कर दिया सवात गर फरमा रहे बस अच्छा एक बात दूसरी बात कि दुनिया का कोई आदमी गरीबों पर तवज्जो करे या ना करे उससे हमसे मतलब नहीं है लेकिन जो लोग यह दावा करते हैं हम जैसे कि हम अली वाले हैं उनके से कैसे हो सकता है कि वो किसी गरीब को परेशान देखें और उस पर तवज्जो ना करें इसलिए कि अली की जात सुनाऊ कल 1 रजब है फरसा बस एक सुन लीजिए तमाम सवात पर मोहम्मद आखरी अस्सलाम अलक या अमीर मोमिनीन अस्सलाम अलक या सदल वसी अस्सलाम अलक या अल मजलूम सलाम कायनात के उस पहले मजलूम पर जिसका हक गस किया गया खाने काबा है मक्का एक आदमी काबे का पर्दा पकड़ के गिड़गिड़ा रहा है मौला थे पहुंच गए इत्तेफाक से गए होंगे खैरियत तो क्या बात है उसने मुड़ अरे या अली आप बस हो गया काम अब दुआ करने की जरूरत नहीं है ऐसी तो शख्सियत है जिस पर इतना भरोसा हो या अली आप हा बोलो खैरियत तो कहा साहब 4000 दिरहम की जरूरत थी वही अल्लाह फरियाद कर रहे थे कोई इंतजाम कर दे अल्लाह ने भेज दिया आपको क्या है कहा 1000 चाहिए मकरूज हूं अच्छी बात है ई कर्जा अदा 1000 चाहिए कोई कारोबार शुरू कर लूं यह भी बात माकूल है किसी को आप धंधे से लगा दीजिए तो इससे बढ़िया क्या बात हो सकती है और कहा 1000 चाहिए सोच रहा हूं एक झोपड़ा रख लू कोई रहने का ठिकाना हो जाए चलो भाई वो भी चल जाएगा 1000 और चाहिए क वो काहे के लिए क शादी करूंगा तो भैया मेरे पैसे से शादी कीजिएगा आप बोलिए लेकिन नहीं मौला ने कहा कि तो ठीक है बातें तो तुम्हारी सब जायज है बट यहां मेरे पास नहीं है आना मदीने देखेंगे हो जाएगा अब इसके बाद कौन रुकता है साहब विदन वीक मदीने आ गए साहब भैया कोई अली का घर बता दे कोई अली का घर बता दे कोई अली का घर बता वो इत्तेफाक से इमाम हसन ने सुन लिया उधर ही कहीं थे क्या है कि भैया अली कुछ मजाकिया टाइप का आदमी था वो क ल भैया आपका क्या नाम है तो फरमाने लगे हसन कहा तुम्हारे बाप का क्या नाम है कहा अली चौका क तो अम्मा का फातिमा नाना का रसूलल्लाह नानी खदीजा क भैया खूब हो यार तुम लोग सारी फजीलत अपने ही घर में इकट्ठा कर रखी है वो अपना हज मजाक कर आए इमाम ने रोका अंदर गए इमाम हसन अ सलाम कहने लगे बाबा एक आदमी आया जिसका कहना है कि आपने उससे कुछ पैसों का वादा किया अली के घर में उस दिन कुछ पका नहीं था पोजीशन य आपने पैसों का वादा किया मौला ने कहा हां कंबर देखो कंबर कहां बला कंबर आया जी मौला जाओ मदीने में ऐलान कर दो मैं वो वाला बाग बेच रहा हूं ी पिट गई तब रजिस्ट्री ऑफिस वगैरह तो था नहीं ऐसे ही लोग अपना हाथ से कलम से लिख के दे देते थे तो वो सब आ गए बाग में बोलियां शुरू हुई 12000 लास्ट बोली थी 12000 प छूट गया उसने साहब हजरत ने यह अबा मुबारक बिछा दी उसने 12000 सिक्के गिन दिए इमाम ने अपना बैनामा लिखा मोहर लगाई दे दिया चला गया अब 12000 आ गए बाग उसका हो गया हां यह 1000 शादी का 1000 म का 1000 बिजनेस काज यह बताओ घर से यहां तक आए कैसे हो कले साब किराए का ऊंट लेकर आए बताओ ना 1 स अलग से लोय किराए का भी लेलो अब कितना बचा 8800 50 ना 12000 में 4000 चला गया 8 च 12 7850 बच गए मदीने वालों को पता चल गया पैसा आया पहुंच गए लोग म मौला क्या थे आप या अली या अली या अली या अली और हजरत काली अबा बिची है यह लो यह लो यह लो यह लो अबाबा झाड़ के दोष पर डाली वही का वही घर आए खबर पहुंच चुकी थी सिद्दीक ताहिरा सलाम उल्ला अलहा ने पूछा या अली वो वाला बाग बेच दिया मौला ने कहा अल्लाह इससे देगा बीवी ने कहा मैं यह थोड़ी कह रही हूं कि क्यों बेच दिया आपकी चीज है आप जा मैं यह पूछना चाहती हूं कुछ बचा के लाए हैं मतलब आपको तो पता है कुछ पका नहीं है बच्चे भूखे एक से एक मदद करने वाले दुनिया में है माशाल्लाह खुदा जो है व उनमें इजाफा करे उनके इस कोशिश में लेकिन इतना करने वाला दुनिया में मौला वापस हो गए इमाम हसन साथ है किसी के पास आए दुकान वाला था क्या था सात दिरहम रिवायत कहती है हजरत ने उससे उधार लिया य कुछ घर के लिए ले जाए जैसे ही व सात दिरहम लेकर आगे बढ़े थे कि कुछ खरीदे अब क्या पता उसको एक आदमी आ गया या अली मौला ने देखा इमाम हसन की तरफ तुम क्या कहते हो बेटा कल इस घर का कमाल है इस घर का सम इमाम का जवाब सुनिए ना चलिए मौला यह तो बच्चे हैं ना हजरत ने इमाम हसन ने कहा बाबा हो सकता है हमसे ज्यादा जरूरत मंद दे दीजिए वह जो सात दिरहम लिया था ना वो भी फकीर को दे दिया अब क्या करें अभी थोड़ा सा चले तब तक एक साहब आ गए कहने लगे या अली ऊट खरीदिए मौला ने कहा सुनो ना मेरे पास पैसा है और ना मुझको जरूरत है ले लीजिए भैया नहीं जरूरत है पैसा भी तो नहीं कहा हम कब पैसा मांग रहे हैं आपसे जब होगा तब दे दीजिएगा मा हम यह घर से तय करके चले थे आप ही के हा बेचेंगे अच्छा बोलो कितने का कहा साब 100 दे रहा जल्दी नहीं जब होगा तब दीजिए कटी गला 100 का ले लिया वो चले गए बेच के ना पैसा था ना जरूरत थी मगर दिल तोड़ना नहीं चाहा आगे बढ़े एक साब या अली ऊंट बड़ा जबरदस्त बेच एगा क्या कहा बिल्कुल बेचेंगे कितने का हजरत ने कहा देखो अभी लिया है 100 दिरहम का मतलब शायद उससे कम का तो सवाल ही पैदा नहीं होता अब आप बताइए तो उने दे क साहब 170 दे दे चलेगा लाओ उसने 170 दे दिया ऊंट की महार पकड़ी चला गया तय क्या हुआ था जब हो जाएगा तब दे देंगे इधर गया होगा शायद इधर गया होगा शायद इधर गया होगा देख ले इधर उधर गए तब तक सामने से रसूलल्लाह आ रहे हैं य शायद अल्लाह ने भेजा हो कि जाइए बता तो दीजिए केस क्या है उधर से पैगंबर आ रहे थे क्या भाई क्या बात है बाप बेटे कहां मार ढूंढ रहे हो किसको परेशान हो तो मौला ने पूरा किस्सा सुना दिया पैगंबर ने कहा यार अब नहीं मिलेगा क्यों क वो आदमी थोड़ी था ना बेचने वाला ना खरीदने वाला क तब या अली तुमने जो आज काम किया है ना बाग बेच के गरीबों की मदद की है यह अमल उधार लेकर तुमने दूसरे को दे दिया यह अमल तुम्हारा खुदा को इतना पसंद आया है इतना पसंद आया कि ऊंट बेचने वाले जिब्रील थे खरीदने वाले बोलिए मिकाइल थे यह सिक्के बहिश्त के सिक्के थे परसों उसी अली की विलादत की ता मैं तो अपने गांव में रहूंगा आज मौके से आपके सामने आ गया हूं आप सबको तहे दिल से दिल की गहराई से उस अजीम इमाम की विलादत की मुबारकबाद पेश करता हूं दुआ कीजिए खुदा हम सबको तौफीक अता फरमाए उस इमाम की राह पर चलने की सब चले गए मेरा मौला अकेला है मेरा मौला तन्हा है फन जरा यमी व श माला दाए देखा बाए देखा ना आसरा था कोई शाहे करर्म इसी तरफ जा रहा हूं आपको जो आप मसाब में सुनाना पाच मिनट नास रा था कोई शाहे कर्बला को फकत बहन ने किया था सवार भाई को दुश्मन का सिपाही है दुश्मन का यजीदी फौजी है कहता है मैंने अपनी जिंदगी में इतना बहादुर आदमी नहीं देखा एक भरी दोपहर में भाई भतीजे भांजे असब सब मार दिए गए हो और वो खुद तीन दिन के भूख और प्यास कहता मगर जब आए हैं मैदान में जुलफ निकाली है यही फौज भागती थी और हुसैन अल सलाम से पनाह तलब और जब यह भागते थे ना तो मौला तड़प के कहते थे कहां भाग के जा रहे हो तुमने मेरे अकबर को मारा जजक र कहां भाग के जा रहे हो तुमने मेरे अब्बास को मारा है अल्लाह अल्लाह अल्लाह अल्लाह कहां भाग के जा रहे हो लड़ते लड़ते एक वक्त वह आया कि जब आका से घोड़े पर संभला ना गया घोड़े से जमीन पर आए फ जलमला सदरे शमल मल जिसमें अतहर पर सवार हुआ एक साहब ने लिखा अरबाब म कातिल में इमाम की शहादत से मुतालिक के कमाल कब हजरत को ऐसे जबाह किया गया जैसे जानवर लेकिन मैं कहूंगा भाई लिखा तो आपने मगर पूरी बात नहीं लिखी क्यों मैंने कहा जानवर भी जबा होता है ना तो उसका अपना एक उसूल है अपना एक तरीका है गला सामने से काटा जाता है पिला लिया जाता है खंजर तेज कर लिया जाता है लेकिन हाय मेरा मौला मबल कफा सामने से नहीं पसे गर्दन कुंद खंजर सूखा गला अल्लाह अल्लाह दो तीन जुमले शहीद कर दिया गया अब तो शहीद कर चुके ना अब तो मार चुके ना अब बस करो मगर क्या दुश्मनी थी इन सबों को कोई भी आदमी हो लाख दुश्मनी हो मर जाए या मार दिया जाए बात खत्म हो जाती है ना लेकिन हाय मेरा मौला इस मलून खुदा लानत करे इस इब्ने साद ने शहादत के बाद कहता जो लोग हुसैन के जिस्म पर घोड़े दौड़ाना चाहिए [प्रशंसा] तो अपने घोड़ों को ड़ लगा के आगे आ जा अल्लाह अल्लाह अल्लाह इंशा अल्लाह जाइए जब जाइएगा आपको बताया जाएगा यही वह टीला है यही वह बुलंदी है जहां से बहन भाई की जंग का मंजर देख रही थी वो सब अपनी जगह बस एक चीज आपको सुनाता हूं जिस उनवान पर मजलिस थी आज मौला अहले बैत की बात ही अलग है इनकी बराबरी दुनिया में खुदा की कसम कोई नहीं कर सकता खुदा की कसम कोई नहीं कर सकता इस मलून खुदा लानत करें इब्ने साद ने कहा जो लोग जिस्म पर घोड़े दौड़ाना चाहते हैं वह आगे आ जाए 10 लोग रावी कहता बाद में थोड़े टाइम के बाद मैंने फिर इन दसों के बारे में जब तहकीक की पता चला 10 के दसों हरामजादे थे जैना बस अब पढ़ने वाली चीज बस खाली गौर कर लीजिए और मजलिस तमाम इमाम का जिस्म मुबारक पड़ा हुआ है 101 घोड़े रौद रहे हैं सुनिए आप मैं आपको क्या कहां ले जाना चा खुदा तू जानता है मेरा मतलब यह नहीं कि इनका दिल ज्यादा दुख जाए नहीं मैं बताना चाहता हूं कि तेरा हुसैन क्या था इनका [संगीत] अब आप बताइए अकल से मैं किताब की बात अकल से बताइए इसके बाद हजरत के जिस्म मुबारक पर कितनी तरह के जखम रहे होंगे यह सोचिए कहीं तीर कहीं तलवार यही ना कहीं नजा हर रिवायत यहां तक कहती है कि जिनके पास कुछ नहीं था वो झोलो में पत्थर रख के लाए थे तीर तलवार नजा पत्थर जा बजा घोड़ों की टपे पमाल हुआ ना मगर अब वो जो सुनाना और मजलिस तमाम रिवायत कहती जब हजरत को दफन किया जाने लगा तो पुश्ते इमाम हुसैन पर घट्ट टाइप का था जो किसी चीज का जखम नहीं लग रहा था किसी ने इमाम सज्जाद से पूछा आका इमाम हुसैन के पीठ पर वो ट्टा कैसा था किसी इसका जखम नहीं था इमाम ने फरमाया मेरा बाबा मदीने में रात की तारीख में रोटियों का गट्ठर अपनी बुख प लाद लाद के गरीबों के [प्रशंसा] घर फरियाद है या रसूल अल्लाह वो हुसैन जो इस तरह गरीबों की मदद करता हूं कर्बला के मैदान में प्यास के आलम में फर

Need a transcript for another video?

Get free YouTube transcripts with timestamps, translation, and download options.

Transcript content is sourced from YouTube's auto-generated captions or AI transcription. All video content belongs to the original creators. Terms of Service · DMCA Contact

Gunah | گناہ | गुनाह | नमाज़ कुबूल तो सब कुबूल कैसे ? | Ma...