अस्सलाम वालेकुम, दोस्तों, इबरत और नसीहत से भरी कहानियों के लिए सुनहरी कैसे चैनल को सब्सक्राइब करें और वीडियो को लाइक करना मत भूलें। 12वीं सदी की बात है। खुरासान की पहाड़ी वादियों में जहां बर्फ से ढके पहाड़ [संगीत] और सरसबज मैदान फैले हुए थे। एक छोटे से गांव में कासिम और उसका छोटा भाई उमर रहते थे। उनकी जिंदगी बहुत सादा थी। मगर किस्मत ने उनके लिए [संगीत] ऐसा इम्तिहान लिख रखा था जिसने पूरी वादी को हिला कर रख देना था। यह कहानी है ऐसे ईमान की जो पहाड़ों से भी ज्यादा मजबूत था और ऐसे भरोसे की जो तूफानों में भी नहीं डगमगाया। 20 साल का कासिम 10 साल के उम्र का इकलौता सहारा था। उनके वालिद 3 बरस पहले बीमारी से चल बसे थे और मां भी [संगीत] गम सह ना सकी। उनके पीछे चली गई। अब दोनों भाई ही एक दूसरे की दुनिया थे। कासिम एक [संगीत] माहिर बई था। उसके बनाए दरवाजे और संदूक आसपास के इलाकों में मशहूर थे। उमर मदरसे में कुरान हिफ्स कर रहा था और अपनी समझदारी और लगन की वजह से उस्ताद का चहेता बन चुका था। दोनों भाइयों का प्यार देखकर लोग हैरान रह जाते। कमाई भले ही कम थी लेकिन उनकी हंसी और मोहब्बत उस छोटे से घर को जन्नत बना देती थी। कासिम भाई आज मैंने 10 आयतें याद की। उमर हर शाम खुशी से अपनी कामयाबी सुनाता। कासिम मुस्कुराते हुए उसके बाल सहलाता और कहता मेरे चांद [संगीत] तुम तो एक दिन बहुत बड़े आलिम बनोगे। उनकी झोपड़ी में दौलत नहीं थी। मगर मोहब्बत का खजाना भरपूर था। हर रात कासिम उमर को उनके [संगीत] वालिद की सुनाई हुई कहानियां सुनाता। जिनमें अल्लाह पर यकीन और सब्र के किस्से होते। एक शाम जब सूरज ढलने लगा, दूर से घोड़ों की [संगीत] टापों की आवाजें सुनाई देने लगी। गांव के चौकीदार ने पहाड़ी से देखकर चीख कर कहा, बदो कबीले का हमला है। [संगीत] सब लोग छुप जाओ। पल भर में गांव में अफरातफरी मच गई। माएं बच्चों को पकड़ कर घरों की तरफ भागी। मर्द [संगीत] लाठियां और कुल्हाड़ियां संभालने लगे और बूढ़े हाथ उठाकर अल्लाह से फरियाद करने लगे। उस वक्त कासिम पहाड़ी पर लकड़ी काट रहा था। शोर सुनते ही वह गांव की तरफ दौड़ा। उसका दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। उमर उमर तुम कहां हो? वह गली-गली पुकारता हुआ भाग रहा था। जब वह मदरसे पहुंचा तो वहां सिर्फ टूटे तख्ते और बिखरी हुई किताबें थी। उस्ताद जी जख्मी हालत में जमीन पर पड़े थे। उस्ताद जी उमर कहां है? कासिम की आवाज कांप रही थी। उस्ताद की आंखों [संगीत] में आंसू भर आए। उन्होंने कमजोर आवाज में कहा, बेटा वो लोग बच्चों को उठाकर ले गए। मैंने बहुत कोशिश की लेकिन यह सुनते ही कासिम की दुनिया जैसे थम सी गई। उसकी आंखों [संगीत] के आगे अंधेरा छा गया। वह भागता हुआ घर पहुंचा। इस उम्मीद में कि शायद उमर वहां मिल जाए। मगर घर खाली पड़ा था। उमर का [संगीत] तख्ता जिस पर वह कुरान की आयतें लिखा करता था। फर्श पर गिरा हुआ था। कासिम ने उसे उठाकर सीने से लगा लिया। उसकी आंखों से आंसू बहने लगे। मैं तुम्हें ढूंढ कर रहूंगा। उमर [संगीत] उसने दिल ही दिल में कहा। चाहे मुझे दुनिया का कोना कोना क्यों ना छानना पड़े। बाहर पूरे गांव में मातम पसरा हुआ था और कई घरों से चीखो पुकार की आवाजें उठ रही थी। अगली सुबह कासिम [संगीत] गांव के बुजुर्गों के पास गया और बोला मैं उमर को ढूंढने जा रहा हूं। बुजुर्गों ने उसे समझाने की कोशिश की। बेटा वह बदो रेगिस्तान में रहते हैं। वहां जाना मौत को दावत देने जैसा है। ना जाने कितने कबीले हैं। तुम कैसे पता करोगे कि उम्र किसके पास है। कासिम की आंखों में आंसू थे। मगर उसके दिल ने [संगीत] फैसला कर लिया था। मैं जानता हूं यह रास्ता खतरनाक है। कासिम ने भारी आवाज में कहा। लेकिन मेरा भाई मेरी अमानत [संगीत] है। अल्लाह मेरी मदद जरूर करेंगे। उसने अपने घोड़े पर थोड़ा सा सामान [संगीत] रखा। पानी की मशकें बांधी और वालिद की तलवार अपने साथ ली। शहर की तारीकी [संगीत] में जब पूरा गांव गहरी नींद में था, वह अकेला निकल पड़ा। दिल में खौफ था मगर मोहब्बत और यकीन उससे कहीं ज्यादा ताकतवर थे। क्या अल्लाह वाकई उसकी मदद करेंगे? सूरज आग के गोले की तरह तप रहा था। कासिम [संगीत] तीन दिनों से रेगिस्तान में भटक रहा था। दिल में बस उमर की तस्वीर [संगीत] थी और जबान पर हर पल अल्लाह का नाम। अचानक दूर उफुक पर उड़ती हुई गर्द नजर आई। उसने सोचा शायद कोई काफिला हो और घोड़े को उसी सिम मोड़ दिया। मगर जैसे-जैसे वह करीब पहुंचा, उसका दिल तेजी से धड़कने लगा। यह बदो सवार थे। वही लोग जिन्होंने [संगीत] उसके गांव पर हमला किया था। दोस्तों, आगे बढ़ने से पहले जरा सोचिए। क्या आप भी अल्लाह पर ऐसा भरोसा रखते हैं कि वह मुश्किल वक्त में हमें कभी अकेला नहीं छोड़ता? अगर हां, तो कमेंट में अल्हम्दुलिल्लाह जरूर लिखिए। अब आगे सुनिए कि कासिम का सफर कैसे और ज्यादा मुश्किल होता चला गया। कासिम फौरन पास की एक पहाड़ी के पीछे छुप गया। बदो सवारों की आवाजें अब साफ-साफ सुनाई दे रही थी। अनवर अगर वो 50 बच्चे बाजार में बेच दिए जाए तो हम सब मालामाल हो जाएंगे। एक आदमी हंसते [संगीत] हुए बोला कासिम की सांस जैसे थम सी गई। बच्चे क्या उम्र भी इन्हीं के साथ है? उसका हाथ अनायास ही तलवार की मूठ पर चला गया। मगर अगले ही पल उसे एहसास हुआ। वह अकेला 10 सवारों का मुकाबला कैसे करता। मैं इनका पीछा [संगीत] करूंगा। कासिम ने दिल ही दिल में फैसला किया। मगर यह बिल्कुल आसान नहीं था। बदो सवारों के घोड़े तेज और ताजा थे। जबकि कासिम का घोड़ा थक चुका था। शाम होते-होते उनके कदमों के निशान भी मिट गए। कासिम ने दूर-दूर तक नजर दौड़ाई। चारों तरफ सिर्फ रेत के ऊंचे टीले थे और ना खत्म होने वाला रेगिस्तान। ऊपर से उसका पानी भी खत्म होने को था। रात का तीसरा पहर था। आसमान पर सितारे चमक रहे थे। कासिम थका हारा एक बड़े पत्थर के पास बैठ गया। उसकी आंखें बोझिल होने लगी। तभी दूर कहीं हल्की सी रोशनी नजर आई। क्या वहां [संगीत] कोई आबादी है? उसके दिल में उम्मीद की एक छोटी सी किरण जागी। लेकिन उसी लम्हे आसमान में बादल गरजे और तेज हवा चलने लगी। देखते ही देखते [संगीत] रेगिस्तान में भयानक तूफान शुरू हो गया। रेत की आंधी इतनी तेज [संगीत] थी कि कासिम को सांस लेना मुश्किल हो गया। उसका घोड़ा घबरा कर [संगीत] इधर-उधर दौड़ने लगा। उमर मैं तुम्हें ढूंढ नहीं पाऊंगा। कासिम चीख उठा। मगर उसकी आवाज तेज हवा में कहीं गुम हो गई। आखिरकार उसकी ताकत जवाब दे गई और वह बेहोश होकर जमीन पर गिर पड़ा। उसकी आखिरी दुआ यही थी। या अल्लाह मेरे भाई की हिफाजत करना। मैं पूरी तरह तेरे सहारे हूं। उठो जवान उठो। एक गहरी आवाज ने उसे होश में लाया। कासिम ने धीरे से आंखें खोली तो देखा एक बूढ़ा आदमी उसके सराहने खड़ा है। मैं कहां हूं? कासिम ने कमजोर आवाज में पूछा। बूढ़े ने कहा मेरे खेमे में तुम्हें तूफान के बीच बेहोश पाया था। अगर मेरा ऊंट वहां ना रुकता तो शायद तुम बचते नहीं। यह कहते हुए उसने पानी का प्याला कासिम के होठों से लगा दिया। उस बूढ़े का नाम यहिया था। वह एक तन्हा चरवाहा था जो अपने ऊंटों [संगीत] के साथ रेगिस्तान में भटकता रहता था। तुम यहां रेगिस्तान में क्या कर रहे हो? यहिया [संगीत] ने पूछा। यह जगह तो मौत का घर है। कासिम ने उसे पूरी कहानी [संगीत] सुना दी। उमर का अगवा हो जाना। बदो सवारों का पीछा करना और अपना अिग इरादा। यहिया की आंखें भर आई। वह बोला मैं तुम्हारी मदद करूंगा। जवान बदो कबीलों के ठिकाने मुझे मालूम है। यहिया ने बताया कि [संगीत] सबसे बड़ा बदो कबीला बनी सख्र तीन दिन की मसाफत पर डेरा डाले हुए है। वहां पहुंचना आसान नहीं होगा। उसने आगाह किया। उनका सरदार हारिस बहुत जालिम है। और उसके पास सैकड़ों जंगजू हैं। कासिम के सामने [संगीत] एक सख्त फैसला था। या तो अकेले हारिस के कबीले में जाना या पहले यहिया के साथ दूसरे कबीलों में उमर की तलाश करना। आखिरकार कासिम ने गहरी सांस ली और कहा मेरे पास वक्त नहीं है। मैं सीधे हारिस के कबीले में जाऊंगा। अगर उमर वहां नहीं मिला तो बाकी कबीलों में ढूंढता फिरूंगा। यहिया के चेहरे पर फिक्र की लकीरें और गहरी हो गई। बेटे वहां जाना तो मौत को दावत [संगीत] देने जैसा है। कासिम ने धीरे से पूछा क्या कोई और रास्ता है? यहिया कुछ देर खामोश [संगीत] रहा। फिर बोला हां एक रास्ता है लेकिन इसके लिए तुम्हें अपनी जान दांव पर लगानी होगी। यहिया का मंसूबा बेहद खतरनाक था। कासिम को बनी सख्र कबीले के अंदर गुलाम बनकर जाना था। यहिया ने धीरे-धीरे समझाया मैं तुम्हें एक [संगीत] ताज़िर के हाथ बेच दूंगा जो हारिस के कबीले में गुलाम फरोख्त करता है। इस तरह तुम अंदर पहुंच जाओगे। कासिम का दिल बैठने लगा। मगर उमर की याद ने [संगीत] उसे हिम्मत दी। उसने गहरी सांस ली और कहा मैं तैयार हूं चाहे कुछ [संगीत] भी हो जाए। अगली सुबह दोनों चल पड़े। नजरें दूर उफुक पर जमी थी और दिल में दुआएं थी। तीन दिन की सख्त और थकाने वाली यात्रा के बाद वे एक छोटे से काफिले तक पहुंचे। जहां यहिया का जानने वाला ताजिर अब्दुल्लाह मौजूद था। अब्दुल्लाह ने कासिम को ऊपर से नीचे तक देखा और पूछा क्या तुम समझते हो यह आसान होगा? फिर बोला हारिस के खेमों में सैकड़ों गुलाम है। तुम उमर को आखिर ढूंढोगे कैसे? कासिम ने बिना झिझक जवाब दिया। मेरा दिल मुझे रास्ता दिखाएगा। [संगीत] अब्दुल्लाह हल्का सा मुस्कुराया। तुम्हारा ईमान काबिले तारीफ है। लेकिन रेगिस्तान में सिर्फ ईमान काफी नहीं होता। दोस्तों जरा सोचिए। अगर आप कासिम की जगह होते तो क्या करते? क्या आप भी इतना बड़ा खतरा मोल लेते? कमेंट सेक्शन में जरूर बताइए। अब आगे सुनिए कि कासिम ने आगे क्या किया। अगले दिन कासिम को रस्सियों से बांधा गया और एक कतार में खड़ा कर दिया गया। जहां उसके जैसे [संगीत] कई और गुलाम थे। उसके हाथों में जंजीरें थी। चेहरे पर मिट्टी जमी थी और आंखों में गहरा गम उतर आया था। अब्दुल्लाह ने उसे आखिरी हिदायत दी। जब तक उमर नहीं मिलता [संगीत] चुप रहना। गुलामों का सरदार सईद है। अगर उससे दोस्ती हो जाए तो शायद वह मदद कर दे। कासिम ने सर झुकाकर हामी भरी और दिल ही दिल में [संगीत] अल्लाह से दुआ मांगी। बनी सक्र का खमागाह एक विशाल मैदान में फैला हुआ था। सैकड़ों खमे अनगिनत ऊंट और घोड़े और हर तरफ हथियारबंद आदमी। यह सब देखकर [संगीत] कासिम के दिल में डर समा गया। उसने सोचा मैं यहां उमर को कैसे ढूंढूंगा। उसका सिर चकराने लगा। गुलामों को कभी पानी लाने, कभी जानवरों को चारा देने और कभी खेमे साफ करने के काम में लगा दिया जाता। कासिम हर काम करते हुए चारों तरफ गौर से देखता रहता। बस उमर की एक झलक पाने की उम्मीद में तीन दिन गुजर गए। लेकिन उमर [संगीत] का कोई निशान नहीं मिला। कासिम का दिल बेचैन होने लगा। वह खुद से सवाल करता क्या उमर यहां नहीं है? क्या मैं गलत जगह आ गया हूं? रात के सन्नाटे में जब सब सो रहे थे कासिम ने चुपचाप नमाज अदा की और अल्लाह के सामने फूट-फूट कर रो पड़ा। या अल्लाह मेरे भाई तक मेरा [संगीत] रास्ता बना दे। मैं तेरे भरोसे आया हूं। मुझे नामुराद मत करना। [संगीत] उसके आंसुओं से कंबल भीग गया। चौथे दिन कासिम को बच्चों के खेमे में पानी ले जाने का हुक्म मिला। उसका दिल जोर-जोर से धड़कने लगा। जैसे ही वह खेमे के अंदर दाखिल हुआ, उसने देखा कि 20 के करीब बच्चे जमीन पर चटाइयों पर बैठे हैं। कासिम की नजर एक-एक चेहरे पर ठहरती चली गई। मगर उमर [संगीत] कहीं नजर नहीं आया। नाउदी के मारे उसके हाथ से पानी का बर्तन छूट कर गिर पड़ा। उसी पल खेमे का निगरान सैद गुस्से में आगे बढ़ाया। यह क्या कर रहे हो बेवकूफ? सईद ने चीखते हुए कहा और जोर से थप्पड़ मार दिया। कासिम [संगीत] जमीन पर गिर पड़ा। उसकी आंखों से आंसू बहने लगे। दर्द से नहीं बल्कि टूटी हुई उम्मीद से। सैद ने उसे घूर कर देखा। फिर आवाज कुछ धीमी करके पूछा। तुम किसी को ढूंढ रहे हो? है ना? कासिम [संगीत] का दिल जोर से ढक कर रह गया। क्या उसे सच बता देना चाहिए? क्या सईद उसकी मदद करेगा या उसे मौत के मुंह में धकेल देगा? कासिम ने हिम्मत जुटाई और बोला, "जी हां, मैं अपने भाई उमर को ढूंढ रहा हूं।" सैद के होठों पर एक अजीब सी मुस्कुराहट आ गई। उसने कहा, मैं तुम्हारी मदद कर सकता हूं, लेकिन इसकी एक कीमत होगी। कासिम की आंखों में उम्मीद की चमक [संगीत] लौट आई। वह फौरन बोला, कुछ भी मैं कुछ भी देने [संगीत] को तैयार हूं। सईद ने कहा, "कल रात तक इंतजार करो। मैं तुम्हें सब बता दूंगा। कासिम के दिल में उम्मीद फिर से जिंदा हो गई। उस रात कासिम की आंखों में नींद नहीं आई। उसके जहन [संगीत] में सवाल ही सवाल घूमते रहे। क्या सईद सच में मदद करेगा? क्या उमर इसी कबीले में कहीं है? सुबह होते ही सईद आया। उसके चेहरे पर परेशानी साफ झलक रही थी। उसने कहा तुम्हारा भाई यहां नहीं है। लेकिन मुझे पता है वह कहां है। कासिम का दिल जोर से धड़क उठा। कहां? उसने कांपती आवाज में पूछा। सईद ने धीरे से जवाब दिया। वह सरदार अली के पास है। खुरासान के सबसे [संगीत] खौफनाक कबीले का सरदार। कासिम का चेहरा पीला पड़ गया। मगर उसके अंदर का अज्म और भी मजबूत हो गया। [संगीत] लेकिन असली इम्तिहान अभी बाकी था। सईद की बात सुनते ही कासिम को ऐसा महसूस हुआ जैसे जमीन [संगीत] उसके पांव तले से खिसक गई हो। सरदार अली उसने [संगीत] हैरानी और डर से भरी आवाज में पूछा। सैद ने आहिस्ता से कहा हां बनी हिलाल कबीले का सरदार जिसे लोग रेगिस्तान का शैतान कहते हैं। उसके खेमे में दाखिल होना मौत को गले लगाने जैसा है। कासिम के दिल में खौफ की लहर दौड़ गई। मगर उसने खुद को संभाला। उसकी आवाज में अजीब सा सुकून था। जब उसने कहा मुझे वहां जाना है। चाहे कुछ भी हो जाए। सैद कुछ देर खामोश रहा। फिर बोला एक मंसूबा है। कल सुबह एक कारवाह बनी हिलाल के खेमों की तरफ जाएगा। मैं तुम्हें उसमें शामिल कर दूंगा। लेकिन वहां पहुंचने के बाद तुम बिल्कुल अकेले होगे। कासिम ने सीधा उसकी आंखों में देखा। तुम मेरी मदद क्यों कर रहे हो? सईद की आंखें भर आई। उसने धीमी आवाज में कहा। मेरा भी एक भाई था। अली ने उसे मार डाला। शायद अल्लाह तुम्हें वह कामयाबी दे दे जो मुझे नसीब नहीं हुई। अगली सुबह कारवाहा चल पड़ा। कासिम [संगीत] को एक ऊंट पर सामान लादने का काम सौंपा गया था। उसके दिल में डर और उम्मीद [संगीत] का अजीब सा मेल था। चलते-चलते सैयद ने उसके करीब आकर धीरे से कहा। याद रखना अली ने 50 बच्चों को खरीदा है। वह उन्हें अपने लश्कर में शामिल कर रहा है। कासिम का दिल जोर से धड़क उठा। उसने बुदबुदाकर कहा, उम्र भी उन्हीं [संगीत] में होगा। सैद ने भारी मन से सिर हिलाया। हां, अगर वह जिंदा है तो तीन दिन के सफर के बाद कारवाह एक गहरी वादी में उतरा जहां बनी हिलाल का [संगीत] विशाल खेमागाह फैला हुआ था। कासिम की आंखें खुली की खुली रह गई। सैकड़ों खेमे, हजारों जंगजू और बीचोंबीच एक कैले जैसा बड़ा खमा जो सबसे अलग और सबसे ऊंचा था। सैद ने उसकी तरफ इशारा किया। वही अली का खेमा है। [संगीत] बच्चे वहीं रखे जाते हैं। कासिम के हाथ कांपने लगे। उसने दिल ही दिल में कहा, या अल्लाह अब क्या करूं? मैं वहां तक कैसे पहुंचूं? कारवाओं के लोग सामान उतारने लगे। कासिम [संगीत] भी उनके साथ काम में लग गया। हर पल दिल में दुआ करता हुआ। तभी एक बूढ़ा आदमी उसके पास आकर रुका। तुम नए लगते हो। उसने कहा, यहां क्या कर रहे हो? कासिम का दिल जोर से धड़क उठा। उसने जल्दी से चेहरे पर बनावटी मुस्कुराहट लाई। जी मैं कारवाओं के साथ आया हूं। [संगीत] बूढ़े ने उसे गौर से देखा। फिर संदेह भरी आवाज में बोला, "तुम झूठ बोल रहे हो। मैं तुम्हारी आंखों में देख सकता हूं। मैं मैं कासिम हकलाने लगा। बूढ़े ने अचानक [संगीत] उसका हाथ पकड़ा और कहा, "मेरे साथ आओ।" कासिम के पास कोई रास्ता नहीं था। उसके दिल में यही ख्याल आया। शायद यही मेरी आखिरी घड़ी है। बूढ़ा उसे एक छोटे से खेमे में ले गया और सख्त लहजे में बोला, अब सच बताओ तुम कौन हो और यहां क्यों आए हो? कासिम ने सारी कहानी सुना दी। उमर का अगवा होना, रेगिस्तान का सफर, गुलाम बनकर यहां तक पहुंचना, सब कुछ। अब वह मौत के लिए भी तैयार था। बूढ़े की आंखों में आंसू आ गए। उसने भर्राई हुई आवाज में पूछा, "तुम यह सब अपने भाई के लिए कर रहे हो?" कासिम ने [संगीत] चुपचाप सिर हिला दिया। बूढ़ा कुछ देर खामोश रहा। फिर बोला, "मेरा नाम यूनुस है। मैं अली का तबीब [संगीत] हूं। बच्चों की देखभाल मेरे जिम्मे है।" कासिम के दिल में [संगीत] उम्मीद की एक हल्की सी किरण जगी। उसने कांपती आवाज में पूछा। [संगीत] क्या? क्या आप उमर को जानते हैं? यूनुस ने गंभीर लहजे में कहा। तुम्हारा भाई जिंदा है लेकिन बहुत कमजोर है। वह बीमार है और अगर जल्द ठीक ना हुआ तो अली उसे मार देगा। यह सुनते ही कासिम के पैरों तले [संगीत] से जैसे जमीन निकल गई। उमर बीमार है और उसे मार देंगे। उसकी आंखों से आंसू बहने लगे। यूनुस ने उसके कंधे पर हाथ रखा। हिम्मत रखो। उसने कहा मैं तुम्हारी मदद करूंगा। लेकिन खतरा बहुत बड़ा है। कासिम की आंखों में एक चमक उभरी। मैं कुछ भी करने को तैयार हूं। मैं आज ही रात उमर को लेकर भाग जाऊंगा। यूनुस ने फौरन सिर हिला दिया। नहीं वो बोला ऐसा करना पागलपन होगा। तुम दोनों मारे जाओगे। गम बेचैनी और नाउदी ने कासिम को चारों तरफ से घेर लिया। उसने चेहरा अपने हाथों में छुपा लिया और फूट-फूट कर रो पड़ा। या अल्लाह मैं क्या करूं? मेरी मदद कर। मुझे रास्ता दिखा। उसके आंसू जमीन पर टपक रहे थे। यूनुस खामोशी से उसे देखता रहा। फिर धीरे से बोला, "तुम्हारा ईमान [संगीत] बहुत मजबूत है। शायद अल्लाह तुम्हारी मदद करे।" कासिम ने सिर उठाया। उसकी आंखों [संगीत] में अब ऐसा यकीन था जो पहले कभी ना था। अल्लाह जरूर मदद करेगा। उसने दृढ़ आवाज में कहा मुझे पूरा भरोसा है और उसी लम्हे जैसे अल्लाह की रहमत का इशारा मिल गया। खेमे के बाहर अचानक शोर मच गया। आवाजें आने [संगीत] लगी। सरदार अली वापस आ गए हैं। यूनुस चौंक पड़ा। यह अचानक कैसे लौट आया? उसे तो दो दिन बाद आना था। कासिम का दिल से हर गया। तभी यूनुस की आंखों में एक अजीब सी चमक आ गई। वह कासिम के करीब झुका और बोला, "अब मेरे पास एक मंसूबा है।" उसने कासिम के कान में कुछ कहा। यह सुनते ही कासिम की आंखें हैरत से फैल गई। क्या यह वाकई मुमकिन है? क्या अल्लाह सच में उसकी मदद कर रहे हैं। यूनुस ने जल्दी से कासिम को अपना लिबास पहनाया और धीमी आवाज में कहा। आज से तुम मेरे शागिर्द हो। मैं सरदार को बताऊंगा कि तुम दवाइयां बनाने में माहिर हो। कासिम घबरा गया। अगर सरदार ने मुझे पहचान लिया तो यूनुस ने उसे तसल्ली दी। अली ने तुम्हें कभी देखा नहीं है। बस मेरे पीछेछे चलना। ज्यादा बोलना नहीं और सर झुका कर रखना। कासिम के [संगीत] दिल की धड़कन तेज हो गई। लेकिन अब उसके पास यही एक रास्ता था। सरदार अली का खमा बहुत विशाल था। अंदर कीमती कालीन बिछे थे। चारों तरफ मशालें जल रही थी। अली [संगीत] एक ऊंचे तख्त पर बैठा था। लंबा भारी जिस्म, घनी मूछें और आंखों में जुल्म की ठंडी चमक। यूनुस ने झुक कर सलाम किया। कासिम भी झुक गया। यह कौन है? अली ने सख्त लहजे में पूछा। यूनुस ने फौरन जवाब दिया। मेरा नया शागिर्द है माहिर तबीब। बच्चों की बीमारी का इलाज जानता है। अली की आंखें सिकुड़ गई। अच्छा हुआ। वह बोला। मेरे पास कुछ बच्चे बीमार हैं। अगर मर गए तो बड़ा नुकसान होगा। कासिम के दिल में एक साथ खौफ भी था और उम्मीद भी। अली ने हुक्म दिया कल सुबह तक इन सबको ठीक होना चाहिए। वरना उसने तलवार की तरफ इशारा किया। यूनुस ने सिर झुका दिया। जी सरदार हम अभी देख लेते हैं। दोनों बाहर निकल आए और कासिम की सांस तेज [संगीत] चल रही थी। यूनुस उसे एक दूसरे खेमे में ले गया। जहां बच्चों को रखा गया था। कासिम की नजर हर चेहरे पर ठहरती चली गई। तभी यूनुस ने धीरे से कहा, वो रहा तुम्हारा भाई। कासिम का दिल जैसे रुक गया। एक कोने में उमड़ पड़ा था। बेहद दुबला [संगीत] कमजोर आंखें बंद। माथे पर पसीने की बूंदे। कासिम दौड़ कर उसके पास बैठ गया। हाथ उसके माथे पर रखा और भरराई हुई आवाज में कहा। [संगीत] उमर मेरे भाई उमर की पलकों में हल्की सी हरकत हुई। उसने आंखें खोली। कासिम को देखा और फिर थक कर दोबारा बंद कर ली। यूनुस ने कहा, वह बहुत कमजोर है। तीन दिन से तेज बुखार में है। कासिम की आंखें भर आई। मैं इसे यहां ऐसे नहीं छोड़ सकता। यूनुस ने गंभीर होकर कहा, "मुझे तुम्हारे ईमान पर भरोसा है। लेकिन सरदार ने कल सुबह की मोहलत दी है। वरना कासिम मजबूती से खड़ा हो गया। मैं उमर को लेकर ही जाऊंगा। चाहे कुछ भी हो जाए। यूनुस कुछ पल सोचता रहा। [संगीत] फिर बोला, एक मंसूबा है। आज रात जब सब सो जाएंगे, [संगीत] मैं पहरेदारों को बेहोश करने की दवा दूंगा। तुम उमर को लेकर मेरे ऊंट पर [संगीत] निकल जाना। रेगिस्तान में मेरे कुछ दोस्त हैं। वे तुम्हारी मदद करेंगे। कासिम [संगीत] हैरान रह गया। आप इतना बड़ा खतरा क्यों उठा रहे हैं? यूनुस की आंखों में गहरा गम उतर आया। [संगीत] क्योंकि मैं भी कभी कैदी था। मेरे बेटे को भी अगवा किया गया था लेकिन मैं उसे बचा नहीं सका। अचानक खेमे [संगीत] का पर्दा हटा और सरदार अली अंदर दाखिल हुआ। कासिम का खून [संगीत] जैसे जम गया। इलाज कैसा चल रहा है? अली ने पूछा। यूनुस ने बिना रुके जवाब दिया। बेहतर है सरदार कल तक सब ठीक हो जाएंगे। अली की नजर कासिम पर टिक गई। तुम मुझे जाने [संगीत] पहचाने से लगते हो। क्या हम कहीं मिले हैं? कासिम की सांस अटक गई। हाथ कांपने लगे। ना नहीं सरदार वह बड़ी मुश्किल से बोला मैं पहली बार आपके खेमे में आया हूं। अली ने मुस्कुरा कर उसकी तरफ देखा। एक ऐसी मुस्कुराहट जिसमें रहम का नामोनिशान नहीं था। अच्छा वो बोला मैं कल सुबह आऊंगा। अगर बच्चे ठीक ना हुए तो उसने उंगली गर्दन पर फेर दी। फिर वह मुड़ने लगा। लेकिन अचानक रुक गया। और हां उसने पीछे देखकर कहा आज रात पहरे दो गुने कर दिए गए हैं। खबर है कि दुश्मन कबीले [संगीत] के जासूस आसपास देखे गए हैं। यह कहकर वह चला गया। कासिम और यूनुस एक दूसरे की तरफ देखने लगे। मंसूबा खतरे में पड़ चुका था। रात और गहरी होती गई। कासिम उमर के पास बैठा रहा। कभी उसके माथे पर ठंडे पानी की पट्टियां रखता। कभी दवाइयां पिलाता। भाईजान कुछ तो बोलो। उसने आंसुओं से [संगीत] भीगे चेहरे के साथ कहा, "मैं आ गया हूं तुम्हें लेने।" उमर ने आहिस्ता से आंखें खोली [संगीत] और बहुत कमजोर आवाज में बोला, भाई, आप आ गए। मैंने दुआ की थी। कासिम रो पड़ा। उसने उमर को सीने से लगा लिया। हां, मैं आ गया हूं। हम दोनों वापस जाएंगे। बस मेरी बात मानो। आधी रात के करीब यूनुस आया। उसके चेहरे पर घबराहट साफ थी। मंसूबा खराब हो गया है। उसने कहा, अली को शक हो गया है। उसने मेरा ऊंट रुकवा लिया है और चारों तरफ पहरे बढ़ा दिए हैं। कासिम [संगीत] का चेहरा पीला पड़ गया। अब क्या होगा? यूनुस गहरी सोच में डूब गया। अब सिर्फ एक रास्ता बचा है। उसने धीरे से कहा। मेरे पास बादशाह का एक पुराना खत है। लेकिन उसका इस्तेमाल करना बहुत खतरनाक है। कासिम की आंखों में सवाल उमड़ आए और तकदीर ने एक नया मोड़ लेना शुरू कर दिया। बादशाह का खत कासिम हैरानी से बोला। यूनुस ने आहिस्ता से समझाया। हां, मैं कभी बादशाह का तबीब था। बादशाह ने यह खत मुझे दिया था कि जब भी कोई बड़ी मुश्किल आए, मैं इसे इस्तेमाल कर सकूं। इस पर शाही मोहर है। यह कहते हुए यूनुस ने अपनी चादर [संगीत] के भीतर से एक पुराना सा लिफाफा निकाला। फिर वह पल भर को रुका और बोला, लेकिन अगर अली ने इसे झूठा मान लिया तो हम सबको मार दिया जाएगा। सोचो क्या तुम यह खतरा उठाना चाहते हो? कासिम के [संगीत] सामने एक बेहद सख्त फैसला था। एक तरफ उमर की जिंदगी थी और दूसरी तरफ यूनुस और बाकी बच्चों की सलामती। वह बेचैनी में कमरे के चक्कर लगाता रहा। सोचता रहा फिर एक कोने में बैठकर दुआ करने लगा। या अल्लाह मुझे सही रास्ता दिखा। उसके आंसू जमीन पर टपक रहे थे। कंधे कांप रहे थे। उधर उमर की हालत हर पल बिगड़ती जा रही थी। वक बहुत कम था। अगर आप अब तक हमारी वीडियो देख रहे हैं तो लाइक करना मत भूलिए और आगे सुनिए इस यकीन की कहानी का सबसे मुश्किल मोड़। कासिम उठा। आंखें पोंछी और मजबूत आवाज में यूनुस से कहा, "हम खत इस्तेमाल करेंगे। मैं अल्लाह पर पूरा भरोसा करता हूं। यूनुस ने सर हिलाया। ठीक है। फिर सुबह होने से पहले ही हमें अली के सामने जाना होगा। जब वह गहरी नींद में होगा। दोनों ने [संगीत] उमर को एक कंबल में लपेटा। जरूरी दवाइयां समेटी और अल्लाह का नाम लेकर [संगीत] खेमे से बाहर निकल आए। चारों तरफ पहरेदार गश्त कर रहे थे। हर कदम पर खतरा था। रुको कहां जा रहे हो? एक पहरेदार ने ललकारा। [संगीत] यूनुस आगे बढ़ा और बोला, सरदार के पास। यह बच्चा मर रहा है। बहुत जरूरी [संगीत] है। पहरेदार ने शक भरी नजर से देखा। इतनी रात गए यूनुस ने सख्त आवाज में कहा। क्या तुम चाहते हो कि सरदार का कीमती गुलाम मर जाए? अगर ऐसा हुआ तो सरदार तुम्हें जिंदा नहीं छोड़ेगा। पहरेदार घबरा गया और रास्ते से हट गया। मगर यह तो सिर्फ पहला खतरा था। जब वे सरदार अली के खेमे के बाहर पहुंचे तो वहां चार मुसल्लाह पहरेदार खड़े थे। यूनुस ने उन्हें समझाने की कोशिश की लेकिन वे नहीं माने। सरदार सो रहे हैं। अंदर कोई नहीं जा सकता। कासिम का दिल बैठ गया। उमर उसकी बाहों में बेहोशी की हालत में था। यूनुस के पास अब एक [संगीत] आखिरी चाल बची थी। उसने पूरी ताकत से आवाज लगाई। सरदार सरदार उसकी आवाज इतनी बुलंद थी कि खेमे [संगीत] का पर्दा हटा और अली बाहर निकल आया। आंखें नींद से लाल [संगीत] चेहरा गुस्से से भरा हुआ। यह क्या शोर है? अली दहाड़ा। [संगीत] मैं तुम सबको मार डालूंगा। यूनुस आगे बढ़ा। सरदार हमें आपसे अकेले में बात करनी है। बात बहुत जरूरी है। अली ने शक से देखा। फिर हाथ के इशारे से कहा। अंदर [संगीत] आओ। खेमे में पहुंचते ही अली ने तलवार निकाल ली। बताओ क्या चाहते हो? वरना अभी तुम्हारी गर्दनें उड़ा दूंगा। कासिम की [संगीत] सांस तेज हो गई। उसने उमर को और कस कर थाम लिया। यूनुस ने धीरे से जेब में हाथ डाला और खत निकालने लगा। अचानक बाहर जबरदस्त शोर मच गया। हमला हमला चीखें सुनाई देने लगी। अली ने तलवार उठाई और बाहर की तरफ दौड़ पड़ा। कासिम और यूनुस एक दूसरे को हैरानी से देखने लगे। यह क्या हो रहा है? कासिम ने पूछा। यूनुस ने कहा, "ता लेकिन यही हमारी आखिरी उम्मीद है। हमें अभी भागना होगा। वे बाहर निकले तो पूरा कैंप अफरातफरी में डूबा हुआ था। दूर से सवारों के झुंड आते दिखाई दे रहे थे। यह हारिस के आदमी है। किसी बदो [संगीत] ने चीख कर कहा। कासिम चौंक गया। हारिस, वही जिसके कबीले में मैं गुलाम था। यूनुस की आंखों में चमक आ गई। हां, यही अली का सबसे बड़ा दुश्मन है। अल्लाह ने हमारे लिए रास्ता खोल दिया है। दोनों उमर को उठाए भागने लगे। हर तरफ [संगीत] भगदड़ मची थी। लोग इधर-उधर दौड़ रहे थे। खेमे जल रहे थे। तलवारें चमक रही थी। तभी कासिम की नजर खेमों के पीछे खड़े एक तन्हा घोड़े पर पड़ी। वहां उसने इशारा किया। तीनों उस घोड़े की तरफ दौड़े। [संगीत] कासिम ने उमर को घोड़े पर बिठाया और खुद उसके पीछे चढ़ गया। यूनुस जल्दी करो। उसने पुकारा। यूनुस ने धीरे से सिर हिलाया। नहीं बेटे मैं नहीं आ सकता। मेरा वक्त यहीं खत्म होता है। कासिम चीख पड़ा। नहीं हम आपको नहीं छोड़ सकते। यूनुस हल्की सी मुस्कान के साथ बोला। मेरा काम पूरा हो गया है। अब तुम जाओ। अचानक एक तीर हवा को चीरता हुआ आया और यूनुस के कंधे में धंस गया। वह जमीन पर गिर पड़ा। आखिरी ताकत से उसने कासिम की तरफ देखा और चिल्लाया। भागो। कासिम ने आंसू भरी आंखों से घोड़े को एड़ लगाई। पीछे से आवाजें गूंज रही थी। पकड़ो उन्हें। वो भाग रहे हैं। और सब लोग सांस रोके उस मंजर को देख रहे थे। कासिम ने घोड़े को पूरी [संगीत] ताकत से दौड़ाया। रेगिस्तान की स्याही में गायब होता हुआ। उमर उसकी बाहों में बेहोश पड़ा था और पीछे से तलवारों की चमक और शोर लगातार करीब आता जा रहा था। या अल्लाह हमारी मदद कर। कासिम फूट-फूट कर रो पड़ा। तभी अचानक सामने से घोड़ों की टापों की [संगीत] आवाज आई। कासिम का दिल बैठ गया। आगे से भी दुश्मन। मगर जैसे ही वे करीब आए कासिम की आंखें हैरत से फैल गई। यहिया यहिया। वही [संगीत] बूढ़ा चरवाहा 20 सवारों के साथ आगे बढ़ा। कासिम जल्दी आओ। यह रास्ता पकड़ो। उसने ऊंची आवाज में पुकारा। कासिम हक्का बक्का रह गया। आप यहां कैसे? यहिया मुस्कुराया और बोला, जब तुम गुलाम बनकर गए तो मुझे फिक्र हुई। मैंने तुम्हारा पीछा किया। अपने दोस्तों को इकट्ठा किया और फिर हारिस से मदद मांगी। वह अली का पुराना दुश्मन है। वह हमला करने को राजी हो गया। कासिम ने देखा कि उमर की हालत और बिगड़ रही है। यहिया ने फौरन हालात समझ ली। जल्दी मेरे खेमे में चलो। मेरे पास दवाइयां हैं। सारा काफिला तेजी से दूर निकल गया। पीछे मुड़कर देखने पर बनी हिलाल के खेमों में आग [संगीत] की लपटें उठती दिखाई दे रही थी। दो दिन बाद यहिया के खेमे में उमर ने धीरे से आंखें खोली। भाई उसने कमजोर आवाज में पुकारा। कासिम जो उसके पास ही सोया था। चौंक कर उठा। उमर तुम होश में आ गए। तुम ठीक हो? मैं कहां हूं? उमर ने धीमे से पूछा। कासिम ने उसे सीने से लगा लिया। तुम महफूज हो मेरे साथ। उमर की [संगीत] आंखों से आंसू बह निकले। मुझे यकीन था आप आएंगे। मैं हर रात दुआ करता था। कासिम मुस्कुराया [संगीत] आंसुओं के बीच और अल्लाह ने तुम्हारी दुआ सुन ली। तभी यहिया खेमे में दाखिल हुआ और बोला अल्लाह की मदद हमेशा आती है। बस वकत और तरीका उसकी मर्जी से होता है। एक हफ्ते बाद जब उमर चलने फिरने लगा यहिया खुशखबरी लेकर आया। सुनो सरदार अली मारा गया है और हारिस ने सारे कैदी आजाद कर दिए हैं। कासिम हैरान रह गया। यूनुस क्या वह जिंदा है? यहिया ने सिर हिलाया। हां जख्मी है [संगीत] मगर जिंदा है। उसने बताया कि जब तुम भागे तो अली ने तुम्हारा पीछा किया। लेकिन हारिस के आदमियों से लड़ते हुए मारा गया। कासिम की आंखें भर आई। अल्लाह का शुक्र है। क्या हम अब घर लौट सकते हैं? यहिया ने कहा हां। मैं तुम्हें खुद पहुंचा दूंगा। लेकिन एक और बात है। कासिम ने चौंक कर पूछा। क्या? यहिया बोला। यूनुस का जो खत था जिसे वह दिखाने वाला था वह बादशाह का नहीं बल्कि तुम्हारे वालिद का था। तुम्हारे वालिद और यूनुस पुराने दोस्त थे। इसीलिए वह तुम्हारी मदद कर रहा था। एक महीने [संगीत] बाद कासिम और उमर अपने गांव पहुंचे। उनके साथ यहिया, यूनुस और कई आजाद किए गए बच्चे भी थे। जैसे ही गांव वालों ने उन्हें देखा। खुशी से चीख उठे। कासिम और उमर जिंदा लौट आए। सबसे पहले उस्ताद जी दौड़ते हुए आए। उमर को गले लगा लिया। उनकी आंखों से आंसू बह रहे थे। मैंने हर रोज दुआ की थी कि तुम दोनों सही सलामत वापस आओगे। उस रात पूरा गांव जश्न में डूबा हुआ था। कासिम ने सबको अपनी दास्तान सुनाई। कैसे हर मोड़ पर अल्लाह ने उसकी मदद की। कैसे अजनबी दोस्त बन गए और कैसे मुश्किलें आसानी [संगीत] में बदलती चली गई। गांव के बुजुर्ग ने कहा कासिम तुम्हारा ईमान हम सबके लिए सबक है। तुम्हारे वालिद की दुआएं तुम्हारे साथ थी और अल्लाह की रहमत हमेशा अपने बंदों पर होती है। सालों बाद कासिम और उमर दोनों गांव के मुअज्ज लोग बन गए। उमर एक बड़ा आलिम दीन बना और कासिम ने अपनी कमाई से यतीम बच्चों के लिए एक मदरसा बनवाया। जब भी कोई मुश्किल में होता [संगीत] वह कासिम के पास आता और कासिम हमेशा यही कहता अल्लाह पर यकीन रखो जब हमें लगता है कि कोई रास्ता नहीं बचा तब भी वह हमारे लिए सबसे बेहतर रास्ता बना [संगीत] देता है। दोस्तों इस कहानी से हमें यही सबक मिलता है कि मुश्किलें हमारे ईमान को तोड़ने नहीं बल्कि उसे और मजबूत करने आती हैं। जब भी हम परेशानी में हो अल्लाह पर भरोसा रखें क्योंकि वह हमेशा हमारी मदद करता है। कभी-कभी ऐसे तरीकों [संगीत] से जिनकी हमें उम्मीद भी नहीं होती। अगर आपको यह कहानी पसंद आई हो तो कमेंट जरूर करें और सुनहरी कस्से को सब्सक्राइब करें। अपना और अपने चाहने वालों का ख्याल रखें। अल्लाह हाफिज।
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