एक यहूदी हजरत अली के पास आया और कहने लगा, "ए अली, मैं आपसे इल्म का मुकाबला करना चाहता हूं।" हजरत अली ने मुट्ठी बंद की और पूछा, "बताओ मेरे हाथ में क्या है?" यहूदी ने जवाब दिया, "आपके हाथ में एक अंडा है जो मीलों दूर एक पहाड़ी पर मौजूद कबूतरी के घोंसले से लिया गया है।" हजरत अली मुस्कुराए और फरमाया, तुम्हारा जवाब बिल्कुल सही है। ये लो, अब यह अंडा जहां से मैंने उठाया है, वहीं रख कर दिखाओ।" यह सुनकर यहूदी ने शर्मिंदगी से कहा, "ऐ अली, मेरे पास इतनी ताकत नहीं कि मैं यह अंडा वहां रख सकूं।" हजरत अली ने फरमाया, यह पूछना भी बहुत बड़ी बात है। यह इल्म तुम्हें कैसे हासिल हुआ? यहूदी ने जवाब दिया, मैं हमेशा अपने नफ्स के खिलाफ चलता हूं। जो कुछ मेरा नफ्स कहता है, मैं उसके उलट अमल करता हूं। हजरत अली ने फरमाया, अच्छा, तो बताओ इस वक्त तुम्हारा नफ्स क्या कहता है? क्या तुम कलमा पढ़ो या ना पढ़ो? यहूदी ने कहा, "मेरा नफ्स कहता है कि मैं कलमा ना पढूं।" हजरत अली ने मुस्कुरा कर फरमाया, तो फिर अपने उसूल पर कायम रहो और नफ्स के खिलाफ जाकर कलमा पढ़ो। यह सुनकर यहूदी ने कलमा पढ़ा और दायरा इस्लाम में दाखिल हो गया।
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