DELED 4TH SEMESTER हिंदी मैराथन /DELED FOURTH SEMESTER HINDI MAIRATHON/DELED HINDI MAIRATHON

Pariksha Veer11,735 words

Full Transcript

हेलो गाइस, आप सभी साथियों का स्वागत है आपके अपने YouTube चैनल परीक्षा पर। सभी मेरे प्यारे-प्यारे साथियों को गुड मॉर्निंग। आप सभी जल्दी से जुड़ जाइए। मैं लेकर आ चुका हूं आप सभी के लिए हिंदी की महामैराथन क्लास। जैसा कि आपको पता है कि हम सभी ने इसके पहले पांच विषयों की महामैराथन क्लास हम सभी ने कर लिया है। ठीक है? जिसमें इंग्लिश हो चुकी है। शांति शिक्षा एवं सतत विकास हो चुका है। आरंभिक स्तर पर भाषा पठन हो चुका है। इसी के साथ-साथ हम सभी ने विज्ञान की भी क्लास कर ली है और भी जो क्लासेस हैं वो हम सभी ने कर लिया है। हमारे पास अब तीन सब्जेक्ट्स की और मैराथन बचती है जिसमें एक हिंदी बचती है। वो आपकी खत्म हो जाएगी। मान लीजिए छठवां सब्जेक्ट चलना चलने लगा है आपका। उसके बाद एक बचेगी एसएसटी की जो कि अजय सर आपको करवाएंगे और एक आपका आठवां सब्जेक्ट है मैथ की। तो मैथ की मैं मैराथन ऐसे नहीं कराऊंगा कि हां बस दो क्लास ले लिया, एक क्लास ले लिया और मैं कह दूं सारा यहीं से फंस जाएगा। तो झूठ होता है। एक क्लास मैथ से कोई किसी का बेड़ा पार नहीं होने वाला होता है। हां, ठीक है। थोड़ा आईडिया लग जाता है कि सवाल कैसे है, कैसे करना है। बस बाकी उससे कोई बहुत ज्यादा फायदा नहीं होता है। तो मैंने ये सोचा है कि हम आपके लिए मैथ की पांच क्लास कराएंगे। कितनी कराएंगे बेटा? मैथ की पांच क्लास कराएंगे। ठीक है? मैथ की पांच क्लास कराएंगे। जिससे आपकी पूरी मैथ बहुत अच्छे से रिवीजन हो जाए आपकी। मतलब आपके एग्जाम से संबंधित जितने सवाल आ सकते हैं, जितने फार्मूले आते हैं वो सभी आपका रिवीजन हो जाए। ठीक है? तो ये मैं आपको बताऊंगा और इसके बाद जब ये हिंदी आपकी खत्म हो जाएगी उसके बाद हम लोग मैथ की ही शुरुआत करेंगे क्लास की। तो फिलहाल आज और कल दो दिन तो आपकी हिंदी ही चलेगी। लेकिन उसके बाद में हम सभी शुरुआत करेंगे मैथ की। बाकी एसएसटी अजय सर कराएंगे। वह मैं नहीं कराऊंगा भाई। सात सब्जेक्ट आप हमसे पढ़ लिए हो। एक सब्जेक्ट आप मैनेज करिएगा। एक सब्जेक्ट आप अजय सर से पढ़िएगा। ठीक है बेटा? बढ़िया पढ़ाते हैं। बहुत अच्छा पढ़ाते हैं। सब बच्चों को समझ में आता है। बस खाली हमारे मुंह पर हमारी तारीफ करने के लिए नहीं गुरुजी आप ही कराओ। नहीं गुरुजी आप ही कराओ। तो एसएसटी हम नहीं करवाएंगे। वो हम अजय सर को देंगे। अजय सर आपकी मैराथन बढ़िया तरीके से करवाएंगे। ठीक है? तो अजय सर आपको एमसीक्यू करा देंगे। अति लघु उत्तरीय करा देंगे। आपको एसएसटी की मैराथन थ्योरी करा देंगे। तो बहुत अच्छा नंबर आपका आ जाएगा। ठीक है? चलिए अब बढ़ेंगे आगे की तरफ। चलिए तो एक-एक करके अब हम चीजों को स्टार्ट करना शुरू करेंगे और बेहतरीन तरीके से हम इसको पढ़ेंगे। देखो जब भी हम बात करते हैं बेटा किस चीज की? 1 सेकंड में रुकिएगा थोड़ा सा। 1 सेकंड थोड़ा सा रुकिएगा बेटा थोड़ा सा। हां मुझे 1 सेकंड का समय दीजिएगा आप लोग। बस हम और बताइए यूपी टेट की भी तैयारी आप लोग स्टार्ट कर चुके हैं बेटा हम जस्ट वन सेकंड हां बिल्कुल ए के पूजा जी बिल्कुल पढ़ाएंगे। देखो टीचर आपने एक चीज तो देख लिया होगा। नोटिस किया होगा एक चीज जितने भी टीचर हम लेकर के आए अपने इस प्लेटफार्म पे किसी में कोई कमी नहीं है। हां ये जरूर होता है। जैसे किसी बच्चे को इंग्लिश नहीं आती तो वो बच्चा कहेगा जैसे यूपीटेट में यूपीटेट में कुछ बच्चे कहे अरे गुरुजी इंग्लिश नहीं समझ में आती। बेटा उसमें टीचर की थोड़ी कमी है। अब आपको अभी भी नाउन की डेफिनेशन नहीं आती तो उसमें टीचर बेचारा क्या कर लेगा भाई? अभी भी आपको साइकोलॉजी की स्पेलिंग नहीं आती तो टीचर क्या कर लेगा बेटा? तो टीचर सारे अच्छे हैं। बस ये है कि थोड़ी सी कमी आपके अंदर भी होगी। तो आपको कुछ करना नहीं होता है। बस एक्स्ट्रा मेहनत आपको करनी होती है। बाकी कोई दिक्कत नहीं होता। ठीक है? चलिए अब हम स्टार्ट करेंगे आज की क्लास को। हिंदी में देखो इस ये जो आपकी हिंदी है ना बेटा इसमें हिंदी से ज्यादा आपको संस्कृत पढ़ना पड़ेगा। ठीक है? अब संस्कृत ज्यादा नहीं पढ़ना। जैसे इसमें सूक्तियां आ जाती हैं। श्लोक आ जाते हैं। ठीक है? कुछ संस्कृत का भी पार्ट होता है। क्योंकि ये आपकी हिंदी नहीं है। एक प्रकार से अनिवार्य संस्कृत है। ठीक है? अनिवार्य संस्कृत है लेकिन डरना नहीं कि अरे गुरुजी का बता दिया अब संस्कृत पढ़ना पड़ेगा थर्ड में तो किसी तरीके से वैसे बचा के आए हैं अब यहां भी आप संस्कृत बता रहे हो नहीं ऐसा नहीं है इसमें 15 से 16 सवाल तो आपके हिंदी के ही आएंगे लेकिन बाकी के जो सवाल होते हैं 10 से 12 जैसे कोई एक सूक्ति लिखो एक सूक्ति याद कर लेना आप लोग बहुत सारे बच्चे याद कर लिए होंगे जो ऐप पे पढ़े हैं जो नहीं पढ़े हैं उनको हम यहां पे लिखवा देंगे तो वो वहां पे याद कर लेंगे ठीक है चलिए सबसे पहले एक परिभाषा आएगी वर्ण किसे कहते हैं तो ध्वनि ध्वनि की सबसे छोटी मानक इकाई को वर्ण कहते हैं। इसकी डेफिनेशन याद रखिएगा। ध्वनि की सबसे छोटी मानक इकाई को वर्ण कहते हैं। उसके बाद आपसे पूछा जाएगा संस्कृत वर्णमाला। अब देखो संस्कृत शब्द तुरंत आ गया। देखो वर्णमाला किसे कहते हैं? वर्णों के व्यवस्थित समूह को वर्णमाला कहते हैं। अगर आपसे पूछा जाए वर्णमाला किसे कहते हैं? तो आप लिख सकते हो वर्णों के व्यवस्थित समूह को वर्णों के व्यवस्थित समूह को वर्णों के व्यवस्थित समूह को वर्णों के व्यवस्थित समूह को वर्णमाला कहते हैं। ठीक है? अब यहां पे बात की जा रही है संस्कृत वर्णमाला की। देखो वर्ण भाषा की प्रथम इकाई है। संस्कृत भाषा में वर्णों का विभाजन मुख्य रूप से दो भागों में किया गया है। स्वर तथा व्यंजन। ठीक है? किस में किया गया है बेटा? स्वर तथा व्यंजन में इसका विभाजन किया गया है। सर इसके बाद एसएसटी मत ठीक है बेटा करवा देंगे। कोई दिक्कत नहीं है। हम नहीं करवाएंगे। अजय सर करवाएंगे। उनसे मैं बात कर लूंगा। हां जी। हम चलिए अब आगे की तरफ बढ़े बेटा। हां जी आइए ठीक है। अब बात करते हैं समझना। वर्ण भाषा की प्रथम इकाई है। संस्कृत भाषा में वर्णों का विभाजन मुख्य रूप से दो भागों में किया गया है। एक है स्वर तथा दूसरा है व्यंजन। संस्कृत वर्णमाला बहुत कुछ हिंदी वर्णमाला के समान होती है। संस्कृत की वर्णमाला में हिंदी वर्णमाला से दो स्वर अधिक होते हैं। कहने का मतलब क्या होता है बेटा? समझना। संस्कृत में इसमें हिंदी में कितने स्वर होते हैं? अगर आपसे पूछा जाए तो हिंदी में स्वर होते हैं 11। हिंदी में स्वर होते हैं 11। ठीक है? और संस्कृत में स्वर कितने होते हैं? संस्कृत में अगर आपसे पूछा जाए स्वर कितने होते हैं? तो संस्कृत में स्वर होते हैं 13। मतलब जो संस्कृत की वर्णमाला है वह बिल्कुल आपके हिंदी वर्णमाला के जैसी ही होती है। बस अंतर यह होता है ना कि हिंदी में 11 स्वर होते हैं और इसमें 13 स्वर होते हैं। आगे अच्छा ये जो दो बढ़ते हैं वो कौन से होते हैं बेटा? जो दो बढ़ जाते हैं ऋ स्वर आपके बढ़ जाते हैं। अगर आपसे कोई पूछे कि हिंदी में 11 स्वर हैं और संस्कृत में 13 स्वर हैं तो कौन से दो स्वर बढ़ जाते हैं? तो ऋ जाते हैं। संस्कृत वर्णमाला महर्षि पाणिनि के 14 माहेश्वर सूत्रों पर आधारित है। तो अगर यह सवाल पूछा जाए कि संस्कृत वर्णमाला किस पर आधारित है? तो आपको पता होगा कि जो संस्कृत वर्णमाला है वो माहेश्वर सूत्र जो 14 थे कौन से 14 माहेश्वर आर ले एवं एच हवरण लड़ यम गणम झप धर दस जब गण दस खप चट चतो कप सस सरहल ये जो 14 माहेश्वर सूत्र हैं उन्हीं माहेश्वर सूत्र से जो है ये संबंधित है। अब बताइए कितने बच्चों को माहेश्वर सूत्र याद है? सेकंड में भी याद सॉरी फर्स्ट में भी याद किया कराया था मैंने आपको। थर्ड में भी मैंने याद कराया था और अगर किसी को अभी भी याद नहीं तो तुम हो गधा आदमी क्योंकि इतने मौके मिलने के बाद भी अगर आप नहीं याद किए तो आज भी हम बढ़ा देंगे तब वो तुम नहीं याद करोगे लेकिन फिर भी चलो हम आपको दिखा देते हैं ये रहे हमारे 14 माहेश्वर सूत्र आयोडा रिडर लेक एवंग एच हवरट लंडम छब धरधस जब गढ़ दस खप चट चौ कप ससर हल देखो ये माहेश्वर सूत्र जो है बेटा ना आपने फर्स्ट में पढ़ा आपने थर्ड में पढ़ा फिर आपने अगर सीटेट का बैच लेकर मुझसे पढ़ा होगा तो वहां पर भी आपने पढ़ा होगा। यूपीटेट में भी पढ़ा होगा। यूपीटेट में माहेश्वर सूत्र का बहुत बहुत इंपॉर्टेंट पार्ट आता है। क्योंकि इसमें यूपीटेट में द्वि प्रश्न प्रत्याहार के पूछे जाते हैं। और अगर आपको माहेश्वर सूत्र नहीं याद है तो प्रत्याहार आप कर नहीं पाओगे। इसीलिए कहते हैं माहेश्वर सूत्र को आप याद कर लो। और मैंने आप सभी से कहा था जिन बच्चों ने फर्स्ट सेमेस्टर से लेकर के फोर्थ सेमेस्टर तक शिवम सर की क्लास को फॉलो किया होगा मैं दावे के साथ कह रहा हूं यूपीटेट में आपको समस्या हो ही नहीं रही होगी चाहे वो मैथ की क्लास हो चाहे वो हिंदी हो चाहे वो मतलब कोई भी हो संस्कृत हो इंग्लिश हो क्योंकि इतना बढ़िया तरीके से हमने पढ़ाया है कि 90% चीज आपके डीएलएड का यूपीटेट में देखने को मिला होगा। थोड़ा सा क्या होता है कि जब हम लोग यूपीटेट पढ़ाते हैं तो थोड़ा सा लेवल और हाई कर देते हैं ताकि अगर पेपर यूपीटेट का थोड़ा टफ भी बन जाए तो भी हमारे बच्चों को कोई दिक्कत परेशानी ना हो। बाकी एक चीज याद रखना एकदम बढ़िया तरीके से पढ़ते चलो। यूपीटेट में तो 125 से कम किसी भी बच्चे का नंबर नहीं आएगा। इस तरीके से हमने पढ़ाया है। बाकी 16 मई के बाद जब हम फ्री होंगे तो यूपीटेट में और एकदम जान एकदम झोंक देंगे आपके लिए। परेशान मत होना आप लोग। ठीक है? चलिए। अच्छा बाकी यह बताइए आप लोग हमको जी एक बार हमको यह बताइए कि क्या आप लोग 3:00 बजे वाली यूपीटेट की क्लास करते हो टॉपर्स हिंट पे चलती है बेटा ठीक है अगर आपको यूपीटेट की क्लास करनी है बेटा तो आप टॉपर्स हिंट को जरूर सब्सक्राइब कर लीजिए डेली 3:00 बजे क्लास टॉपर्स हिंट YouTube चैनल पर चलती है ठीक है डेली 3 पीm पर डेली 3 पीm पर चलती है और आज ईवीएस की संपूर्ण पूर्ण ईवीएस टॉपिक कवर करवाएंगे आपके सम्राट सर आज बहुत इंपॉर्टेंट क्लास होने वाली है। तो देखो भाई यूपीटेट को भी डीएलएड के साथ-साथ पढ़ना है क्योंकि वो भी पेपर लगा ही हुआ है। ठीक है? चलिए चलिए आगे बढ़े। आगे आगे बढ़ेंगे। व्यंजन किसे कहते हैं? बेटा समझना। अच्छा दो चीज आप याद रखिएगा। देखो व्यंजन किसे कहते हैं? देखो ऐसे वर्ण जिनको स्वरों की सहायता से उच्चारित किया जाता है। समझना ऐसे वर्ण जिन्हें स्वरों की सहायता से उच्चारित किया जाता है व्यंजन कहलाते हैं। और व्यंजन के मुख्यता तीन भेद होते हैं। अगर आपसे कोई पूछे व्यंजन कितने प्रकार के होते हैं? तो व्यंजन मुख्यतः तीन प्रकार के होते हैं। स्पर्श व्यंजन, अंतस्थ व्यंजन और उष्म व्यंजन। यह तीन प्रकार के आपके पास में व्यंजन होते हैं। तो व्यंजन किसे कहते हैं? ऐसे वर्ण जिनको स्वरों की सहायता से उच्चारित किया जाता है, व्यंजन कहलाते हैं। और व्यंजन के मुख्यता तीन भेद होते हैं। कौन-कौन से? स्पर्श व्यंजन, अंतस्थ व्यंजन और उष्म व्यंजन। आगे स्पर्श व्यंजन की संख्या कितनी है बेटा? तो स्पर्श व्यंजन 25 होते हैं। क से म तक के वर्ण जिनका उच्चारण जीभ द्वारा मुख के विभिन्न भागों को छूने से होता है। स्पर्श व्यंजन कहलाते हैं। मतलब ऐसे वर्ण जिनको अगर हम बोलते हैं तो हमारी जो जीभ है वो मुंह के विभिन्न भागों को छूती है तो उसे हम स्पर्श व्यंजन कहते हैं। स्पर्श मतलब होता है छूना। टोटल स्पर्श व्यंजन कितने होते हैं बच्चा? 25 स्पर्श व्यंजन होते हैं। उसके बाद दूसरा है अंतस्थ व्यंजन। अंतस्थ व्यंजन की संख्या कितनी है? चार। य, र, ल, व इनका उच्चारण स्वर और व्यंजन के बीच में होता है। तो अगर कोई पूछे कि अंतस्थ व्यंजन क्या है? तो ऐसे व्यंजन जिनका उच्चारण स्वर और व्यंजन के बीच का होता है उन्हें हम अंतस्थ व्यंजन कहते हैं। तीसरा है ऊष्म व्यंजन। ऊष्म व्यंजन की संख्या कितनी है? चार। स सा स सा स सा स सा स सा स सा स सा स सा स सा स सा स सा स सा ह इनके उच्चारण में हवा रगड़ खाकर गर्मी यानी ऊष्मा पैदा करती है। उन्हें हम ऊष्म व्यंजन कहते हैं। तो मेरे हिसाब से ये तीन चीज आपको पहले से ही पता होगा। फर्स्ट सेमेस्टर से ही आप पढ़ते आ रहे हो। जिन्हें भी स्क्रीनशॉट लेना है आप लोग स्क्रीनशॉट लेते हुए चलिएगा। आगे उसके बाद तीन के बाद में कुछ और भी व्यंजन देखो मुख्य रूप से तो तीन ही लिखना है। इसके अलावा दो व्यंजन आपको और पढ़ना है। एक होता है संयुक्त व्यंजन। संयुक्त व्यंजन की संख्या चार होती है। कौन-कौन से होते हैं? क्ष, त्रि, ज्ञ, श्र। ये दो व्यंजनों के मेल से बनते हैं। ठीक है? जो संयुक्त व्यंजन होते हैं, ऐसे व्यंजन जो किन्ही दो व्यंजनों के मेल से बनते हैं। उन्हें हम संयुक्त व्यंजन कहते हैं। और पांचवा है द्विगुण व्यंजन। और इसी द्विगुण व्यंजन को हम लोग उत्क्षिप्त व्यंजन भी कहते हैं। क्या कहते हैं बेटा? उत्क्षिप्त व्यंजन भी कहते हैं। और उत्क्षिप्त व्यंजन की संख्या कितनी है? दो। ड और ढ इन्हें उत्क्षिप्त व्यंजन भी कहा जाता है। चलिए अब मुझे बताइए इतनी बातें समझ में आ गई आपको? चलिए इतनी बात समझ में आ गई। हां देखो कल जो है 11:00 बजे जो क्लास चली थी एसएसटी वाली ना अजय सर की तो वो क्लास ना किसी टेक्निकल समस्या के कारण कट हो गई थी। तो आज जो सर हैं वो उस क्लास को आज आगे कंटिन्यू करेंगे। 11 जो बजे आज आपकी एसएसटी की क्लास फिर चलेगी। ठीक है? तो आज भी 11:00 बजे एसएसटी चलेगी। ताकि बहुत ही जल्द आपको एसएसटी की मैराथन भी अजय सर लेकर के आएंगे और आपको पढ़ाएंगे अच्छे तरीके से। ठीक है बच्चा? चलिए आगे एक होता है अयोगवाह। यह ना स्वर होते हैं और ना ही व्यंजन होते हैं। अगर आपसे कोई पूछे अयोगवाह किसे कहते हैं? तो ऐसे वर्ण जो ना स्वर होते हैं ना व्यंजन होते हैं उन्हें हम अयोगवाह कहते हैं। और अयोगवाह होता है अंगा और अहा। चलिए हैप्पी बर्थडे क्या नाम है भाई रूम अंसारी जी हैप्पी बर्थडे आपको चलिए रंजनी जयसवाल रंजनी नाम है ठीक है रंजनी जयसवाल आप करा दीजिए सब हम ही करवा दें आठों विषय हम ही करवा दें पीट अप ना सही हो जाओगे सात विषय हमने करवाया है एक विषय किसी और से पढ़ने करने में इन लोगों की बुखार आता है और जबकि ऐसा टीचर है जो राजस्थान का सबसे बेहतरीन टीचर माने जाते हैं। अजय सर पता है आपको एसएसटी के ये आपको पता ही नहीं होगा। आप तो ये सोच ही नहीं सकते कि शिवम सर राजस्थान से टीचर कैसे ढूंढ लाए। राजस्थान के मतलब समझ लीजिए उनकी ज्योग्राफी की बुक चलती है राजस्थान में। आप ये समझिए। ठीक है? ज्योग्राफी के तो वह भाई लल्लन टॉप टीचर है वह कि क्या ही बताऊं मैं आपको। बहुत जबरदस्त टीचर हैं वह ज्योग्राफी के। चलिए आगे बढ़े। आओ आगे। अच्छा स्वर किसे कहते हैं? स्वर तो हमने लिखवाया ही नहीं बेटा। स्वर तो आपको पता ही होगा ना भाई। स्वर किसे कहते हैं? अगर कोई पूछे स्वर किसे कहते हैं? स्वर किसी को पता है स्वर किसे कहते हैं? चलिए। चलिए अब ठीक है। चलिए अब ठीक है। एक बार बताइए भाई। अब ठीक है। चलिए एक बार बता दीजिए। ठीक है यार। चलिए ठीक है। आगे बढ़ते हैं। तो चलिए इतनी चीज मैंने आपको बता दिया कि ऐसे वर्ण जिनके उच्चारण स्वतंत्र रूप से किए जाते हैं स्वर कहलाते हैं। और स्वर के तीन भेद होते हैं। बेटा ह्रस्व स्वर, दीर्घ स्वर और प्लुत स्वर। ये तीन प्रकार के स्वर जो है आपके होते हैं। इसके आगे बढ़ेंगे। अब आता है आपके एग्जाम में अनुस्वार और अनुनासिक। बहुत इंपॉर्टेंट पार्ट है। अनुस्वार और अनुनासिक। यहां से सवाल आपके एग्जाम में भर-भर के पूछे जाते हैं बेटा। भर-भर के। मोस्ट इंपॉर्टेंट। अनुस्वार और अनुनासिक। अनुस्वार क्या है? और अनुनासिक क्या है? इनके बारे में। अच्छा अनुस्वार क्या होता है बेटा? समझना। अगर आप किसी भी शिरोरेखा के ऊपर अंक की बिंदी लगा देते हो तो उसे हम अनुस्वार कहते हैं। अगर हम किसी के ऊपर चंद बिंदी लगा देते हैं तो इसे हम अनुनासिक बोलते हैं। क्या बोलते हैं बेटा? अनुनासिक बोलते हैं। तो आपसे यह सवाल बहुत पूछा जाता है कि अनुस्वार कहां कैसे मतलब सर आप कहां से हो? बेटा मैं गोंडा जिले में हूं। ठीक है? गोंडा जिले वाले बच्चे ना हमको बढ़िया जानते हैं। गोंडा जिले वाले लेकिन मिलते नहीं हमको कभी भी। हम इनका इंतजार करते हैं कि गोंडा जिले वाले मिले लेकिन ये मिलते नहीं है। ये कहते हैं हम काहे मिले? गोंडा जिले के तो हैं गुरुजी हैं। चलो ये ये इसलिए नहीं मिलते ना कहीं गुरुजी ऐसा ना हो कि हमसे कुछ सवाल पूछ लें। [हंसी] चलिए आगे बढ़ते हैं। आओ अनुस्वार क्या है? अनुस्वार स्वर के बाद आने वाला व्यंजन है। इसकी ध्वनि नाक से निकलती है। समझना जो अनुस्वार होती है ना बेटा इसमें केवल नाक का प्रयोग होता है। केवल नाक का प्रयोग। अनुस्वार में जो ध्वनि है वो केवल नाक से निकलती है। लेकिन अनुनासिक में नाक और मुख बस यही अंतर होता है। नाक और मुख दोनों से ध्वनि निकलती है। अनुस्वार क्या है? अनुस्वार स्वर के बाद आने वाला व्यंजन है। इसकी ध्वनि नाक से निकलती है। हिंदी भाषा में बिंदु के रूप में अनुस्वार का प्रयोग होता है। अनुस्वार स्वतंत्र वर्ण नहीं है। स्वरों के ऊपर जो बिंदु लगाया जाता है जो बिंदु लगाया जाता है उसे अनुस्वार कहा जाता है। अनुस्वार हमेशा स्वर के ऊपर लगता है ना कि व्यंजन के ऊपर। जैसे अंग, रंग, भंग, जंग, ढंग, अहम, त्वम आदि। यह आपका क्या हो जाएगा? अनुस्वार हो जाएगा। एक बार पढ़ लेना क्योंकि एग्जाम में खूब पूछा जाता है अनुस्वार किसे कहते हैं? अनुनासिक किसे कहते हैं? अनुस्वार और अनुनासिक से आप क्या समझते हैं? यह सब बहुत ज्यादा आपके एग्जाम में पूछा जाता है भाई मेरे। बहुत ज्यादा। मतलब क्या ही बताऊं मैं आपको। हां जी। चलिए इतना समझ में आ गया आपको। चलिए आगे बढ़े तो अनुस्वार समझ में आ गया होगा कि अनुस्वार स्वर के बाद आने वाला व्यंजन है। इसकी ध्वनि नाक से निकलती है। हिंदू हिंदी भाषा में जो बिंदु के रूप में अनुस्वार का प्रयोग हमेशा होता है। अनुस्वार केवल नाक से बोला जाता है और यह जो है हमेशा स्वर के ऊपर लगता है ना कि व्यंजन के ऊपर लगता है। इतनी बात पहले आप बताइए समझ में आ गया भाई कि नहीं समझ में आ गया बताइए। चलिए आ गया भैया समझ में? चलिए बहुत अच्छी बात है। इतना समझ में आ गया। ठीक है। अब बढ़ेंगे आगे की तरफ। अगला हमारे पास है बच्चा अनुनासिक। अब यह अनुनासिक क्या होता है बेटा समझना। अनुनासिक किसे कहते हैं? अनुनासिक स्वरों के उच्चारण में मुंह से अधिक तथा नाक से बहुत कम सा बहुत कम सांस निकलती है। किसी अक्षर स्वर के ऊपर अनुनासिक का प्रयोग चंद्रबिंदु के रूप में होता है। किसके रूप में होता है बेटा? चंद्रबिंदु के रूप में होता है। याद रखिएगा इस चीज को। चंद्रबिंदु के रूप में इसका उपयोग होता है जो कि सिरो रेखा के ऊपर लगता है। दूसरे शब्दों में किसी अक्षर के ऊपर जो अर्ध चंद्र लगाया जाता है उसे अनुनासिक कहते हैं। जैसे आंख, म गांव आदि। समझ में आ गया बेटा अनुनासिक किसे कहते हैं? देखिए तो अनुनासिक क्या होता है? अगर हम कहीं भी चंद बिंदु देखते हैं तो इसे अनुनासिक कहते हैं। और इनका उच्चारण जो होता है वह नाक और मुख दोनों से होता है। बेटा नाक और मुख से इनका उच्चारण होता है। नाक और मुख से उच्चारण होता है। तो अनुनासिक स्वरों के उच्चारण में मुंह से अधिक तथा नाक से बहुत कम सांस निकलती है। किसी अक्षर या स्वर के ऊपर अनुनासिक का प्रयोग चंद्रबिंदु के रूप में होता है जो कि सिरो रेखा के ऊपर लगता है। दूसरे शब्दों में किसी अक्षर के ऊपर जो अर्ध चंद्र लगाया जाता है उसे हम अनुनासिक कहते हैं। अब एक बार बताइए कि अनुनासिक और अनुस्वार क्या ये आपको दोनों समझ में आ गया? अगर इनका अंतर पूछा जाएगा तो क्या आप कर ले जाओगे? अगर आपसे कहा जाता है कि अनुनासिक और अनुस्वार में क्या अंतर है तो क्या मैं यह बात समझूं कि आप लोग कर ले जाओगे भैया बोलो हां जी चलिए इतनी बात बताइए यहां तक आपको समझ में आ गया बच्चा अनुनासिक और अनुस्वार क्या आपको यहां तक चीजें समझ में आ गई किसी को कोई डाउट किसी को कोई परेशानी किसी को कोई समस्या तो नहीं है अगर है तो मुझे बता दीजिए आप लोग बहुत बढ़िया अब हम बढ़ेंगे आगे की तरफ। अब एक पूछा जाता है हलंत। हलंत किसे कहते हैं? यह भी सवाल बहुत बार आया है। परिभाषा आती है हलंत किसे कहते हैं? तो याद रखना हलंत का तात्पर्य है जिसके अंत में हल हो। हल का मतलब होता है बेटा व्यंजन। क्या होता है बेटा? व्यंजन। हल का मतलब होता है व्यंजन। हलंत का तात्पर्य है जिसके अंत में हल हो। अर्थात आधा वर्ण या स्वर रहित वर्ण हो। ठीक है? जैसे मान लीजिए हमको शिवम लिखना है। अच्छा शिवम जो लिखा जाता है इसमें पीछे आधा मा लिखता है। शिवम जो है जैसे मैं अपना नाम लिखता हूं तो मेरा नाम कभी पूरा मां नहीं होता है। पीछे आधा मा होता शिवम। लेकिन अब भाई हम सबसे पीछे आधा अक्षर तो लिख नहीं सकते हैं। तो इसीलिए हम पूरा लिख देते हैं। लेकिन नीचे ये हलंत लगा देते हैं। अब ये अगर कहीं भी आपको ये हलंत लगा मिल जाए तो आप समझ जाना कि ये आधा अक्षर है। क्या है? यह आधा अक्षर है। चलिए आगे बढ़े। तो हलंत का तात्पर्य है जिसके अंत में हल हो अर्थात आधा वर्ण या स्वर रहित वर्ण हो। यानी आधा वर्ण यानी आधा अक्षर हो या स्वर रहित वर्ण का मतलब जिनमें स्वर ना होता हो। भाई जिनमें स्वर नहीं होगा वो आधा ही व्यंजन होगा या आधा ही अक्षर होगा। जिस शब्द के अंत में स्वर रहित व्यंजन हो उसे हलंत शब्द कहते हैं और हलंत शब्द को व्यक्त करने के लिए हल चिन्ह यानी इसका प्रयोग करते हैं। इसका ये हल चिन्ह का प्रयोग किया जाता है। ठीक है? अच्छा विसर्ग किसे कहते हैं? बच्चा समझना। विसर्ग किसे कहते हैं? यह एक प्रकार का स्वर आश्रित वर्ण होता है। मतलब यह स्वर पर आश्रित होता है। अगर स्वर नहीं होगा तो विसर्ग नहीं होगा। याद रखना यह अपने आप में एक उच्चारण का प्रतीक मात्र है। यह सदैव किसी ना किसी स्वर के बाद आता है। बिना स्वर के इसका कोई अस्तित्व नहीं है। इसका उच्चारण करते समय अंत में अहा की ध्वनि आती है। जैसे रामः जैसे श्यामः ठीक है? तो अगर आप इनको बोलोगे तो अहा की ध्वनि मिलती है। तो विसर्ग किसे कहते हैं बच्चा? यह एक प्रकार का स्वर आश्रित वर्ण है। यह अपने आप में एक उच्चारण का प्रतीक मात्र है। यह सदैव किसी ना किसी स्वर के बाद आता है। और इसका उच्चारण करते समय अंत में अहा की ध्वनि आती है। कौन सी ध्वनि आती है बेटा? अहा की ध्वनि आती है। तो याद रखना जैसे रामः श्यामः आदि आपका हो जाएगा। ठीक है बच्चा? चलिए तो पहले बताइए विसर्ग समझ में आ गया आप सभी को? जी। चलिए गुरु जी इस बार तो सारा पेपर खिचड़ी बन जा रहा है। कितना प्रैक्टिस करो। बेटा एक चीज बताएं जो फोर्थ सेमेस्टर के बच्चे हैं ना बेटा आप फोर्थ में पहुंचते-पहुंचते बहुत से बच्चे लापरवाह हो गए हैं। मैं आपको सच्चाई बता रहा हूं। मैं आपको सच्चाई बता रहा हूं कि फोर्थ सेमेस्टर में पहुंचते-पहुंचते बच्चे लापरवाह हो गए। और इन्होंने अपने दिमाग में यह बात बैठा लिया कि अगर मैं छ महीने नहीं पढूंगा लेकिन लास्ट के अगर हम शिवम सर की मैराथन करते हैं, प्रीवियस ईयर करते हैं तो हम पास हो जाएंगे। सब बच्चे यही सोच के बैठे रहे। पूरा मतलब ये समझो मैं मैथ पढ़ा रहा था और मैथ की क्लास में 500 बच्चे भी लाइव नहीं रहते थे। मेरी क्लास में 500 बच्चे तक लाइव नहीं रहते थे। अब सोचो आप तो ये हो गए लापरवाही के शिकार। खूब नहीं पढ़े हैं चार पांच महीना अब एग्जाम आया अब दौड़े हैं इधर हिंदी पढ़ रहे हैं उधर एसएसटी पढ़ रहे हैं उधर जो है शैक्षिक प्रबंधन उधर शांति शिक्षा तो जब इस तरीके से पढ़ रहे हैं तो भाई जाहिर सी बात है दिक्कत होगी उनको हां जी आ गई बात समझ में आपको बस यही दिक्कत है और कोई दिक्कत नहीं बेटा ठीक है और ये अभी नहीं बेटा हमेशा ये होता है अब की बार आप लोग कुछ नया नहीं किए हो फोर्थ सेमेस्टर में हमेशा बच्चे बच्चे लापरवाह का शिकार हो जाते हैं क्योंकि उनको लगता है अपुनीच भगवान है। अपुन नीच भगवान के चक्कर में बेटा दिक्कत होती है और कोई दिक्कत नहीं है। चलिए आगे बढ़ते हैं। अब आते हैं उच्चारण। उच्चारण से सवाल खूब पूछे जाते हैं। ठीक है? अब देखना यहां पे आपके एग्जाम में ना बहुत सवाल उच्चारण से आते हैं। जैसे उच्चारण के भेद आपसे पूछा जाएगा एक सवाल उच्चारण के भेद बताइए। उच्चारण के तीन भेद आप याद रखिएगा। ये सवाल पूछा जाएगा। इंपॉर्टेंट है। पूछा जाएगा। उच्चारण के भेद कितने होते हैं? उच्चारण के तीन भेद याद रखिएगा। स्वर कृत भेद यानी उच्च स्वर से मंद स्वर। काल कृत भेद समय के अनुसार उच्चारण में अंतर आता है। और स्थानाकृत भेद यानी मुख अवयवों की क्रियाशीलता। तो अगर आपसे तीन भेद अगर आपसे पूछा जाए तो स्वर कृत भेद, काल कृत भेद और स्थान कृत भेद ये तीन भेद आपको याद रखना है। पूरा लिखो ना लिखो उससे कोई फर्क नहीं पड़ता। लेकिन अगर आपसे पूछा जाए उच्चारण के भेद बताइए तो उच्चारण के तीन भेद होते हैं। स्वर कृत भेद, काल कृत भेद और स्थान कृत भेद। समझ में आ गई बात कि नहीं समझ में आ गई? जी। चलिए। सर जी नींद आ रही है क्या? अरे किू बिल्कुल आराम से सो बेटा नींद आ रही है देखो इसके लिए पैसे तो खर्च नहीं करने हैं। बस एक चादर उठाओ एकदम ऐसे मुंह तक ले जाओ आराम से सो जाओ। जब दो-तीन चार दिन लगातार सो लो। जब एकदम इंतहा हो जाए नींद की। जब नींद कुछ खुद कहे कि बेटा आप पढ़ लो। अब इतना नींद नहीं जरूरी है तब उठो। ठीक है? चलिए अगला। शुद्ध उच्चारण के मुख्य तत्व कौन-कौन से? कई बार यह सवाल एग्जाम में आया है। मोस्टेंट। देखो जितने भी पॉइंट हैं आज की क्लास में सारे इंपॉर्टेंट हैं। बेटा शुद्ध उच्चारण के मुख्य तत्व कौन-कौन से हैं? ध्वनि व्यवस्था, बल, लय, स्वराघात, गति और विराम। ये क्या है बेटा? शुद्ध उच्चारण के मुख्य तत्व हैं। तो अगर आपसे कहा जाए कि शुद्ध उच्चारण के मुख्य तत्व कौन-कौन से हैं? तो ये छह तत्व का नाम आप याद रखिएगा। ध्वनि व्यवस्था बल लय स्वराघात गति विराम हम पूजा कह रही है मैं तो अभी सोकर उठी हूं। वाह पूजा जी आप अगर थोड़ी देर और सो लेती ना तो ठीक रहता। लेकिन एक चीज बताएं यार आप लोग यह भी काम ढंग से नहीं कर पाओगे। अगर अभी आपसे कोई कह दे कि चलो सोने का कंपटीशन चलेगा। देखते हैं कौन सबसे ज्यादा देर तक सो लेता है ना तब आप तब आप नहीं सो पाओगे क्योंकि अभी सोने का कोई काम तो नहीं है। अभी कोई कह दे अभी मान लो आपके एग्जाम में ना एक पेपर आ जाता कि भाई एक पेपर होगा जिसमें जो सबसे ज्यादा सोएगा उसको उतना ज्यादा नंबर मिलेगा ना तब आप सो भी नहीं पाओगे कहोगे अरे गुरुजी हमारे तो नींद ही नहीं होती हैं बताओ चलिए अगला अच्छा संस्कृत अनिवार्य संस्कृत में उच्चारण दोष के कारण क्या है? किस कारण? अच्छा ये चीज ना बेटा फर्स्ट सेमेस्टर से पढ़ते आ रहे हो। चाहे हिंदी में गलत उच्चारण का कारण पूछे, इंग्लिश में पूछे, संस्कृत में पूछे, सब जगह सेम उत्तर लिखा जाता है। ठीक है? जो बच्चे अशुद्ध उच्चारण करते हैं, उनका कारण क्या है? और उनको दूर करने के उपाय क्या है? ये दो चीज तो आप शुरुआत से पढ़ते आ रहे हो। समझिए मेरी बात को। चलिए पहला संस्कृत में उच्चारण दोष के कारण क्या है? नंबर एक संस्कृत ध्वनियों तथा उनके उच्चारण स्थानों का पूर्ण ज्ञान ना होने पर अशुद्धियां होती हैं। मतलब अगर आपसे कहा जाए कि अनिवार्य संस्कृत में उच्चारण दोष के कारण क्या हैं? तो आपको एक बात याद रखना है कि संस्कृत ध्वनियां कहां से किस तरीके से बोली जाती हैं? इनका ज्ञान ना होने पर भी उच्चारण में दोष आता है। दूसरा ध्वनि व्यवस्था लय, तुक, बल, गति, विराम एवं स्वराघात आदि। यहां पे स्वराघात होगा। ठीक है? स्वरा धात आदि उच्चारण तत्वों का पूर्ण ज्ञान ना होने पर भी उच्चारण में अशुद्धता आ जाती है। तीसरा क्षेत्रीय बोली के प्रभाव के कारण भी छात्रों का संस्कृत उच्चारण प्रभावित होता है क्योंकि भाई किसी के जगह पर कोई बोली होती है। किसी के जगह पर कोई बोली होती है और लोग उसको समझ नहीं पाते हैं तो उसमें भी गलती होती है। उच्चारण का समुचित अभ्यास ना करने पर भी उच्चारण में अशुद्धता आ जाती है। तो यह चार कारण हैं और इन चार कारणों के कारण ही उच्चारण में दोष होता है। इन्हें एक बार फिर से पढ़ेंगे। संस्कृत ध्वनियों तथा उनके उच्चारण स्थानों का पूर्ण ज्ञान ना होने पर भी अशुद्धियां होती हैं। ध्वनि व्यवस्था, लय, तुक, बल, गत, विराम एवं स्वराघात आदि उच्चारण तत्वों का पूर्ण ज्ञान ना होने पर भी उच्चारण में अशुद्धता आती है। क्षेत्रीय बोली के प्रभाव के कारण भी अशुद्धता आती है और उच्चारण का समुचित अभ्यास ना करने पर भी उच्चारण में अशुद्धता आती है। अगर कोई बच्चा बार-बार किताब नहीं पढ़ रहा है, बार-बार चीजों को समझ नहीं पा रहा है, तब भी दिक्कत जो है बहुत ज्यादा होती है। बताइए यहां तक बात समझ में आई कि नहीं समझ में आई? एक बार बोलो हां गुरु जी समझ में आ गया फिर हम आगे बढ़ेंगे। बोलो भैया गुरुजी यूपीटेट लेवल वन में ईवीएस की दो क्लास है। किस गुरु का अच्छा? बेटा दोनों अच्छा है पूजा यूबर जी लेकिन जो इस समय सम्राट सर लाइव पढ़ा रहे हैं 10:00 बजे वो क्लास ज्यादा इंपॉर्टेंट है इसलिए क्योंकि वो बिल्कुल लेटेस्ट पैटर्न पे पढ़ाया जा रहा है जो पहले अजय सर ने पढ़ाया है वो भी क्लास अच्छी है कोई दिक्कत नहीं है लेकिन अगर आपको दोनों में एक पढ़ना है तो जो 10:00 बजे सम्राट सर पढ़ा रहे हैं वो क्लास ज्यादा अच्छी है उसको ज्यादा बढ़िया से पढ़िएगा अगला सवाल आएगा उच्चारण संबंधी अशुद्धियों को दूर करने के उपाय बताइए। खूब आते हैं सवाल। उच्चारण संबंधी अशुद्धियों को दूर करने के उपाय कौन-कौन से हैं? ना देखिए, संस्कृत शिक्षक को छात्रों में शुद्ध उच्चारण कौशल विकसित करने के लिए सर्वप्रथम इसके मार्ग की बाधाओं को दूर करने का प्रयास करना चाहिए। मतलब अगर कोई बच्चा है और वो अशुद्ध उच्चारण करता है तो एक टीचर को यह चाहिए कि उस बच्चे के मार्ग में जो बाधाएं हैं उन बाधाओं को पहले हटाओ। जैसे अगर उनके दोस्त लोग खराब उच्चारण करते हैं तो पहले उनकी दोस्ती तोड़ो। ठीक है? पहले उनकी दोस्ती तोड़ो। आ गई बात समझ में? ठीक है? अगर मतलब समझ रहे हो ना? मतलब माहौल का बहुत फर्क पड़ता है। अगर उनके दोस्त हैं चारप और सब दोस्त उनके गलत-गलत उच्चारण करते हैं तो पहले हमको क्या करना है? उनकी दोस्ती को तोड़ना है। बीच में दरार लानी है। ठीक है? दरार। ठीक है? तो ये चीज ध्यान रखना है आपको। इसके पश्चात उच्चारण कौशल विकसित करने वाले उपायों का प्रयोग करना चाहिए कि किस-किस उपाय को लगाने से इनका उच्चारण कौशल अच्छा हो जाएगा। तो पहले तो बाधाओं को दूर करिए और उसके बाद जो उच्चारण जो कौशल हैं उनको विकसित करने वाले जो उपाय हैं उन उपायों का प्रयोग करना चाहिए। संस्कृत उच्चारण दोष से संबंधित समस्याओं का समाधान अनुस्वार एवं अनुनासिक हलंत एवं विसर्ग का उचित प्रयोग करके दूर किया जा सकता है। अगर आप चाहो तो यहां से यहां तक आप केवल लिख दो कोई दिक्कत नहीं है। लेकिन अगर उसके बाद भी लिखना चाहते हो जैसे उच्चारण में अनुस्वार एवं अनुनासिक का प्रयोग कहां-कहां होता है? उच्चारण में हलंत का प्रयोग कहां होता है? उच्चारण में विसर्ग का प्रयोग कहां होता है? यह चीजें आपको लिखनी होंगी। जी ए हमार भैया समझो बच्चा हमार लिख ले जाओगे। अगर आपसे सवाल पूछा जाए कि उच्चारण संबंधी अशुद्धियों को दूर करने के उपाय बताइए तो हे हमार भैया बहनी लोग बताओ ये कर ले जाओगे कि नहीं कर ले जाओगे? बताओ ओ भैया बताओ कर ले जाओगे। दुई नंबर में आएगा। जी दुई नंबर में आएगा। हम ठीक है तो क्या लिखोगे कि संस्कृत शिक्षक को छात्रों में शुद्ध उच्चारण कौशल विकसित करने के लिए सबसे पहले इसके मार्ग की बाधाओं को दूर करने का प्रयास करना चाहिए। इसके पश्चात उच्चारण कौशल विकसित करने वाले उपायों का प्रयोग करना चाहिए। संस्कृत उच्चारण दोष से संबंधित समस्याओं का समाधान अनुस्वार एवं अनुनासिक हलंत एवं विसर्ग का उचित प्रयोग करके सिखाया जा सकता है। आ गई बात समझ में बच्चा कुछ लोग तो बोलते ही नहीं है। हम काहे बोले कि समझ में आया है? आप पढ़ा रहे हो आप अच्छा पढ़ाएंगे तो समझ में आया होगा। अब आते हैं वाचन किसे कहते हैं? भैया वाचन किसे कहते हैं? और पठन किसे कहते हैं ना बेटा? वाचन को ही हम पठन कहते हैं? ये आप लोग फर्स्ट सेमेस्टर से पढ़ते आ रहे हो। वाचन किसे कहते हैं? किसी लिखी हुई सामग्री को पढ़ना और पढ़कर उसका अर्थ निकालना ही वाचन कहलाता है। क्या कहलाता है? संकुचित रूप में लिखे हुए अथवा छपे हुए शब्दों का उच्चारण करना वाचन कहलाता है। वाचन ध्वनियों के प्रतीकों को गति के साथ पढ़कर अर्थ ग्रहण करने की प्रक्रिया वाचन। इतना सब नहीं लिखना है तो अब मैं बताता हूं लिखना। लिखे हुए को पढ़ना। लिखे हुए को पढ़ना। पढ़ना और पढ़कर अर्थ निकालना पढ़कर अर्थ निकालना वाचन या पठन कहलाता है। वाचन या पठन कहलाता है। चलिए लिख ले जाओगे। फर्स्ट सेमेस्टर से यही परिभाषा मैं सिखा रहा हूं आप लोगों को। अगर आपसे कोई कहे कि वाचन किसे कहते हैं? अब चाहे वह संस्कृत में हो, हिंदी में हो, वाचन वाचन ही होता है। तो लिखे हुए को पढ़ना और पढ़कर अर्थ निकालना वाचन या पठन कहलाता है। अब अगला सवाल आएगा कि भैया वाचन के प्रकार क्या है? चलिए आगे बढ़े। हां जी। चलिए अब एक-एक करके हम लोग यहां पर पढ़ रहे हैं। वाचन के प्रकार में एक हो जाएगा मौन वाचन और एक हो जाएगा सस्वर वाचन। मौन वाचन क्या होता है? अगर हम किसी चीज को पढ़ रहे हैं और पढ़कर अपने मुंह से आवाज नहीं निकाल रहे हैं तो उसे हम मौन वाचन कहते हैं। और सस्वर वाचन क्या होता है? कि अगर हम किसी भी चीज को बोल-बोल कर पढ़ रहे हैं तो उसे हम सस्वर वाचन कहते हैं। क्या कहते हैं? सस्वर वाचन कहते हैं। आगे अगला आएगा अनिवार्य संस्कृत में लेखन क्या होता है? वाचन तो हमने पढ़ लिया। अब आपसे पूछा जाएगा गुरु जी आज बफरिंग। हां यार आज बफरिंग का मतलब पता नहीं क्या दिक्कत है। सारे वाई-फाई चल रहे हैं तब भी बफरिंग हो रही है। नहीं ये अभी तो बफरिंग हुई है। क्या ही बताऊं। एक लोगों का फोन आ गया था ना तो दरअसल मैं मोबाइल हॉटस्पॉट ऑन करवा दिया हूं क्योंकि वाईफाई दोनों चल नहीं रही है तो मोबाइल हॉटस्पॉट हम ऑन किए हैं। अब इसमें पता नहीं किसको मुझसे इतनी मोहब्बत थी कि उन्होंने कॉल कर दिया और जब कॉल कर दिया ना बेटा तो हॉटस्पॉट का कनेक्शन बंद हो जाता है ना ऐसा कुछ होता है सिस्टम पता नहीं इसलिए थोड़ी बफरिंग हुई थी तो अभी जब क्लास खत्म होगी ना तो पहले हम इनसे निपटेंगे चाहे जो है ये जी तो वही सब चीजें होती है बेटा थोड़ा मैनेज करो देखो आप ही लोग तो हमारे दुख दर्द तकलीफ को समझते हो बाकी तो सब मोह माया है हां मतलब गलते समय फोन आएगा देखते हो ना कुछ फोन ऐसे होते हैं ना जैसे जब गाड़ी चलाने लगो बाइक चलाने लगो कार चलाने लगो तब फोन आएगा और कभी-कभी तो कंपनी फोन आ जाता है कि अरे भाई रिचार्ज करवा लो। अरे भैया अगर हमारे पास पैसा होता तो तुमको फोन करना पड़ता कि हम रिचार्ज करवा लें। भाई आज की डेट में कौन बिना रिचार्ज के रहना चाहता है? बताओ जी ये सब चीजें हैं। चलो आओ। लेखन किसे कहते हैं? जब व्यक्ति अपने भावों एवं विचारों को लिखकर अभिव्यक्त करता है तो उसे लेखन कहते हैं। यहां तक लिख लो बेटा। जब व्यक्ति अपने भावों एवं विचारों को लिखकर अभिव्यक्त करता है तो उसे लेखन कहते हैं। लेखन की प्रचलित विधि देवनागरी लिपि है। अनिवार्य संस्कृत में लेखन एवं वाचन साथ-साथ किया जाता है। बोलो। अरे नहीं पता नहीं किसका फोन है यार। अननोन नंबर का। जी आगे बढ़े। ठीक। अच्छा लेखन संबंधी अशुद्धियां कौन-कौन सी होती हैं? बेटा अगर आपसे पूछा जाए कि लेखन संबंधी अशुद्धियां बच्चे कौन-कौन सी चीजें करते हैं? समझना। अब इन सब चीजों को ना बेटा आप लोग बना के लिख सकते हो। पहले सेमेस्टर से पढ़ते आ रहे हो। लेखन संबंधी अशुद्धियां क्या हैं? उच्चारण संबंधी अशुद्धियां, उनके कारण, उनके निवारण के उपाय ये सब तो आप लोग फर्स्ट सेमेस्टर से पढ़ते आ रहे हो। देखो विराम चिन्हों का उचित प्रयोग ना होने पर लेखन में त्रुटि होती है। अगर आप किसी भी चीज को लिख रहे हो और आप विराम चिन्ह का प्रयोग नहीं कर रहे हो तो भाई अशुद्धि हो जाएगी। दूसरा विराम चिन्हों का उचित प्रयोग ना होने पर लेखन में त्रुटि होती है। ठीक है? तो यही चीज तो ऊपर में लिखा। अच्छा ये द्वार लिखा है तो एक बार हटा दो। एक बार हटा दो। द्वार लिखा ना बेटा तो इसको एक बार हटा देना। तीसरा क्या है? वर्णों तथा शब्दों के ऊपर सिरो रेखा ना खींचना लेखन संबंधी अशुद्धता है। अगर आप कोई चीज लिख रहे हो और ऊपर आप लाइन नहीं शिरोरेखा क्या होता है? ये जो ऊपर लाइन लगी है ना लाइन इसे शिरोरेखा बोलते हैं। तो अगर आप किसी भी चीज को लिख रहे हो और ऊपर आप शिरोरेखा का प्रयोग नहीं कर रहे हो तब भी वो गलत माना जाएगा। चौथा कलम को सही ढंग से पकड़ कर ना लिखने पर भी अशुद्धियां होती हैं। और पांचवा लिखते समय उचित मुद्रा में ना बैठने पर भी अशुद्धियां होती हैं। बताओ इतनी बात समझ में आ गया? तो अगर आपसे पूछा जाए कि लेखन संबंधी अशुद्धियां क्या है? तो क्या आप लोग लिख ले जाओगे? ओ हमार बबलू लोग बताओ समझ में आ गया? जी बोलो आ गया समझ में? ठीक। अब आते हैं लेखन संबंधी अशुद्धियों को दूर करने का उपाय। अच्छा अभी हम लोगों ने उच्चारण संबंधी अशुद्धियों को दूर करने का उपाय पढ़ा था। यह है लेखन संबंधी अशुद्धियां दूर करने का उपाय। दोनों आंसर लगभग सेम है। चलो एक बार पढ़ो। मैं पानी पी पानी लेकर आ रहा हूं। पीकर नहीं आ रहा हूं। लेकर आ रहा हूं। चलिए स्टार्ट करें। तो यही जो हम लोगों ने अभी ना उच्चारण संबंधी जो अशुद्धियों के बारे में पढ़ा था उनको दूर करने के उपाय सेम वही है। संस्कृत शिक्षक को छात्रों में लेखन कौशल विकसित करने के लिए सर्वप्रथम इसके मार्ग की बाधाओं को दूर करने का प्रयास करना चाहिए। इसके पश्चात लेखन कौशल विकसित करने वाले उपायों को करना चाहिए। संस्कृत लेखन दोष से संबंधित समस्याओं का समाधान अनुस्वार एवं अनुनासिक हलंत एवं विसर्ग के प्रयोग का ज्ञान प्रदान करके निम्नलिखित प्रकार से दूर करने का प्रयास सेम आंसर है बेटा। कोई अलग आंसर नहीं है बेटा। हां जी सेम आंसर है। चलिए इतनी बात आ गई भैया आपको समझ में। हां बिल्कुल सुल्ताना जी हिंदी में कोई दिक्कत नहीं। हिंदी इतनी बड़ी अब देखो जो फर्स्ट सेमेस्टर में आप हिंदी पढ़ रहे हो लगभग 90% हिंदी हर सेमेस्टर में वही है। बस 10% अलग-अलग हो जाता है बस। ठीक है? ठीक है। इतना आ गया भाई समझ में। ठीक है। चलिए। हां जी। चलिए आगे की तरफ बढ़े। ठीक। अगला क्या है? लेखन अभ्यास के सोपान। सोपान मतलब होता है चरण। बताइए। अभ्यास का मतलब होता है क्या? लेखन अभ्यास के सोपान में तीन सोपान का नाम याद रखिएगा। एक होता है अनुलेख, एक होता है प्रतिलेख और एक होता है श्रुतलेख। ये तीन प्रकार के लेखन संबंधी क्या होते हैं भाई? सोपान होते हैं। जी। चलिए इतनी बात बताइए भाई। लेखन अभ्यास के सोपान कौन है बेटा? अनुलेख, प्रतिलेख और श्रुत लेख। यह तीन प्रकार के यहां पर लेख होते हैं। इनको याद रखिएगा। अगर आपसे लेखन के प्रकार पूछ लिया जाए या आपसे कह दिया जाए लेखन के भेद बताइए। लेखन के भेद बताइए तब भी आप इन्हीं तीनों को लिख दीजिएगा। ये हमारे लेखन के भेद भी हो जाएंगे। अनुलेख, प्रतिलेख, सुरत लेख ये क्या हो जाएंगे बेटा? लेखन के भेद हो जाएंगे। ठीक है? तो लेखन अभ्यास के सोपान में कौन-कौन सा लिखना है? अनुलेख, प्रतिलेख और श्रुतलेख। ठीक है? आगे। अच्छा उपसर्ग अरे यार एक चीज हमने देखा Instagram पे बच्चे वीडियो डाल डाल के बहुत बना रहे हैं अपनी क्लासेस की। क्या बात है? आजकल यार मतलब मैंने देखा ना अब तो बच्चे Instagram पे। भाई यार क्या गजब। थैंक यू सो मच। मतलब इतना बच्चे प्रेम करने लगे हैं अपने चैनल से। हम देख रहे हैं बेटा Instagram पे मतलब इतने बच्चे हैं वो अपनी मैराथन की अपनी क्लासेस की वीडियो बना के भैया इंस्टा पे डाल रहे हैं और अच्छी बना रहे हैं यार हम हम तो नहीं बना पा रहे हैं वो और अच्छी बना बना के डालते हैं भैया गजब गजब भाई गजब वाह भाई कुछ लोग तो कमेंटवा में घर बसाने के चक्कर में हैं। ये इनको पता है ना कि कमेंट वैसे ए भैया ए लड़का लोग समझ जाओ भैया हिया घर बसा है कोई मतलब नहीं है बेटा नौकरी कर लो 111 लाख नगद और Y swift Dzire मिलेगी आपको समझ रहे हो ना बात को हो सकता है मास्टर जी भी मिल जाए आपको यहां बेटा जाल फेंकने से कुछ नहीं होगा फालतू तुम्हारा दिमाग खराब होगा और कुछ नहीं होगा समझ रहे हो ना इन सब से कोई मतलब नहीं बैठ के यहां जाल फेंके जा रहे हैं एकदम से कोई फंस जाए इनको कुछ पता नहीं है मतलब यह बताओ किसी को कमेंट से भी प्यार हो जाता है। ऐसेसे लोग हैं बेटा हद है यार। वाह भाई वाह ये भैया लोग ये ना सुधरिए दुनिया देखो कहां पहुंच गई। ईरान इजराइल का युद्ध हो रहा है। उधर देखो पेट्रोल डीजल गैस मिल नहीं रहा। इनको अपना वही फर्स्ट सेमेस्टर से ए भैया हमारा तुम फर्स्ट से चौथे तक कुछ नहीं कर पाओ तो आगे भी मुश्किलें है भैया। आप अपने आप को पहचानो कि आपकी शक्तियां अभी वहां तक नहीं पहुंची हैं। कुछ भी नहीं। [हंसी] चलिए भाई अब आते हैं उपसर्ग किसे कहते हैं? बहुत इंपॉर्टेंट है। उपसर्ग और प्रत्यय से सवाल आते हैं आपके एग्जाम में। पूछा जाएगा उपसर्ग किसे कहते हैं? बच्चा दी। चलिए आगे बढ़े। ठीक है? ऐसे शब्द या शब्द खंड जो किसी शब्द से पूर्व जुड़कर नए शब्दों की रचना करते हैं उन्हें उपसर्ग कहते हैं। जुड़कर होना चाहिए। जोड़कर नहीं बेटा जुड़कर। जुड़कर। ठीक है? तो अगर कोई पूछे उपसर्ग किसे कहते हैं? तो ऐसे शब्दांश जो किसी शब्द के आगे जुड़कर उसके अर्थ को बदल देते हैं या नए शब्दों की रचना करते हैं उन्हें हम उपसर्ग कहते हैं। जैसे प्रा धन हार प्रहार अभिधन मुख अभिमुख संस्कृत भाषा में 22 उपसर्ग एवं हिंदी में 19 उपसर्ग होते हैं। बताइए हां वही चीज है। बताइए भैया इतना समझ में आ गया सर आप मेरा नाम नहीं लेते मेरी बुआ वाह आगे बढ़ेंगे प्रत्यय आईडी बना है मेरी बुआ से कह रहे हैं हमारा नाम नहीं लेते तुम्हारे मन मोह ही नहीं है चलिए आगे बढ़े यह शब्दांश होते अच्छा प्रत्यय क्या होता है? ऐसे शब्दांश जो किसी शब्द के पीछे लगकर उपसर्ग आगे लगता है और प्रत्यय पीछे लगता है। तो ऐसे शब्दांश जो किसी शब्दों के अंत में जुड़कर उसके अर्थ में परिवर्तन कर देते हैं प्रत्यय कहलाते हैं। जैसे दया धन आलू दयालु। ठीक है? हां। तो ये क्या हो जाएगा भाई मेरे? तो उपसर्ग बेटा आगे लगता है। प्रत्यय जो है पीछे लगता है। इस बात को ध्यान रखिएगा। समझ में आ गई बात कि नहीं समझ में आ गई? इतनी चीजों को आप लोग ध्यान में रखिएगा। ध्यान में रखिएगा। बिल्कुल ध्यानचंद बन जाओ बेटा। ठीक है? इतना तगड़ा ध्यान रख दो। हां जी। चलिए बाकी आप सभी को एक बात मैं बताना चाहूंगा। बहुत सुंदरमुंदर बात मैं बताना चाहूंगा आप लोगों को। 11:00 बजे क्लास चलेगी बेटा आज। ठीक है? बाकी देखो सभी ने यूपीटेट का फॉर्म भर दिया हुआ है। जिन्होंने नहीं भरा है भर दो। आज लास्ट डेट है। ठीक है? आज नहीं 26 को है ना? कल लास्ट डेट है। ठीक है? तो आप सभी जाकर के फॉर्म भर देना और तैयारी कहां करनी है? ये बताने की जरूरत तो है ही नहीं है। परीक्षा वीर जहां पे तगड़ी तैयारी चल रही है। ठीक है? ₹299 में पेपर वन का बैच है। अगर आपको दोनों बैच नहीं लेना है। लेवल वन का बैच लेना है तो ₹299 में ले लेना। अगर आपको दोनों बैच लेना है तो ₹419 में आपको दोनों बैच आपको मिल जाएगा। ठीक है? और बढ़िया तरीके से वहां पे क्लासेस है। खूब मस्त तरीके से पढ़ो और बैच लेने में कोई दिक्कत है तो इस नंबर पर WhatsApp पर मैसेज कर दीजिए। आगे अब आते हैं संधि किसे कहते हैं? संधि देखो संधि। संधि का मतलब होता है जुड़ना। दो वर्णों के मेल से उत्पन्न विकार को संधि कहते हैं। बेटा दो वर्णों के मेल से उत्पन्न विकार को संधि कहते हैं। संधि में पहले शब्द के अंतिम वर्ण और दूसरे शब्दों के प्रथम वर्णों का मेल होता है। जैसे विद्या धन आलय, विद्यालय। आपसे संधि की परिभाषा पूछी जाएगी। हालांकि संधि एक बड़ा चैप्टर है। इसको पढ़ने में चारप क्लास लगती है। लेकिन अब मैराथन है तो यहां तो हम सारा नहीं बताएंगे। लेकिन जो बच्चे ऐप पर हैं वो संधि अगर आपको नहीं आती है तो एक बार संधि वाली क्लास देख लीजिएगा क्योंकि संधि आपसे पूछी जाती है। ठीक है? जैसे पूछा जाएगा रमेसा में कौन सी संधि होती है? पूछा जाता है ना रमेसा में कौन सी संधि है? विद्यालय में कौन सी संधि है? और क्या बोलते हैं? सत्यदेव या इन सब चीजों में प्रत्येक में कौन सी संधि है? तो ये सब संधि आपसे पूछे जाते हैं। तो थोड़ा सा संधि को ना बेटा आप लोग थोड़ा अच्छे से पढ़ लेना। बाकी बेसिक चीज मैं संधि की यहां पे बता दे रहा हूं। संधि किसे कहते हैं? दो वर्णों के मेल से उत्पन्न विकार को संधि कहते हैं। संधि में पहले शब्द के अंतिम वर्ण और दूसरे शब्द के प्रथम वर्ण का मेल होता है। आपसे पूछा जाएगा संधि कितने प्रकार की होती है? तो संधि बच्चा तीन प्रकार की होती है। स्वर संधि, व्यंजन संधि और विसर्ग संधि। जी। इतनी बात पहले आप मुझे बताइए। समझ में आ गया आपको? भाई जी बताइए। इतना समझ में आ गया? हम तो संधि तीन प्रकार के स्वर संधि, व्यंजन संधि और विसर्ग संधि। उसके बाद आते हैं अन्य पाठ्य वस्तुएं। ये बड़ा अच्छा टॉपिक था। बहुत मस्त टॉपिक ये है अन्य पाठ्य वस्तुएं। बेटा अन्य पाठ्य वस्तुएं किसे कहते हैं? सर पीडीएफ। विराट जी मैं पीडीएफ डेली दे देता हूं। जो बच्चा बैच लिए है ना क्लास खत्म होने के 10 मिनट के अंदर मैं पीडीएफ दे देता हूं। एक बात बताओ यार सच बताना झूठ मत बोलना एक बात बताओ यार मतलब पीडीएफ देने में हमें दिक्कत नहीं है आप लोग एक बात बताओ आपको यार बैच ले लेना चाहिए था ना 249 मुझे अभी बेटा कोई विराट जी अभी कोई स्माइल कर दे ना तो आप लोग ₹1000 तुरंत खर्च कर दोगे उसके पीछे तुरंत चाय नाश्ता पिज़्ज़ा मोमोज फालतू चीजें करोगे 249 में जहां पे आपको पीडीएफ नोट्स मैराथन पीडीएफ प्रीवियस ईयर पेपर भर-भर के मिल रहे हैं। पूरी क्लासेस आठों सब्जेक्ट्स की मिली। वहां तुम नहीं खर्च करोगे। पिज़्ज़ा, चाउमीन, बर्गर खाना तुरंत निपटा दोगे। पता नहीं चलेगा। तो कहना पढ़ा करो यार थोड़ा सा। मतलब अभी देखो कोई बात नहीं हम फ्री भी दे देते हैं। लेकिन कहने का मतलब ये है 249 का बैच ले लेते तो आपको ये कभी नहीं सोचना पड़ता कि इसकी पीडीएफ कहां मिलेगी? ये कहां मिलेगा? हर एक चीज आपको मिल जाएगा भाई। जी। चलिए आगे बढ़े। अब ये इंपॉर्टेंट है। मोस्ट इंपॉर्टेंट है। आपसे पूछा जाएगा अन्य पाठ्य वस्तुएं क्या होती हैं? अन्य पाठ्य वस्तुएं क्या होती हैं? तो विद्यार्थियों के पठन एवं कौशल विकास के लिए निर्धारित पाठ्य पुस्तकों के अतिरिक्त जो अन्य पठन योग्य वस्तुएं होती हैं उन्हें अन्य पाठ्य वस्तु कहते हैं। अगर आपसे पूछा जाए अन्य पाठ्य वस्तु किसे कहते हैं? ठीक है? आ गया भाई समझ में? हां बेटा जो भी 31 से 40 क्वेश्चन नहीं पढ़े हैं वो सब पढ़ जाएंगे। परेशान मत होइए आप। ठीक है? बस डलवा देंगे। अन्य पाठ्य वस्तुएं क्या होती हैं बच्चा? तो विद्यार्थियों के पठन एवं कौशल विकास के लिए निर्धारित पाठ्य पुस्तकों के अतिरिक्त जो अन्य पठन योग्य वस्तुएं होती हैं उन्हें अन्य पाठ्य वस्तु कहते हैं। जी नहीं थोड़ी बहुत बाकी है साहिलगढ़ जी बिल्कुल बाकी है थोड़ी बहुत बाकी है आगे अन्य पाठ्य वस्तुएं कौन-कौन सी हैं देखो अन्य पाठ्य वस्तुएं क्या होती है देखो हम बच्चों की क्लास में पढ़ने के लिए जो पुस्तकें देते हैं उनके अलावा जो बच्चों को और पढ़ने की चीजें दी जाती हैं या और एक्टिविटी जो होती है उसे हम अन्य पाठ्य वस्तुएं बोलते हैं। ठीक है? जैसे हमारी कॉपी किताब के अलावा और भी अन्य चीज जैसे बाल उपयोगी पत्रिकाएं जिनसे बाल पत्रिकाएं होती हैं। चित्रों का उपयोग रेडियो व दूरदर्शन का प्रयोग समाचार पत्र पत्रिकाएं शैक्षणिक भ्रमण जिन्हें हम टूर कहते हैं। अन्य साहित्य मतलब जो हमारी हिंदी, इंग्लिश, विज्ञान जो किताबें हम स्कूल में पढ़ते हैं, उन किताबों के अतिरिक्त जो भी चीजें बच्चों को दी जाती हैं, उन्हें हम अन्य पाठ्य वस्तुएं कहते हैं। और आपसे पूछा जाएगा अन्य पाठ्य वस्तुएं कौन-कौन सी हैं? तो बाल उपयोगी पत्रिकाएं, चित्रों का उपयोग, रेडियो व दूरदर्शन का प्रयोग, समाचार पत्र पत्रिकाएं, शैक्षणिक भ्रमण, अन्य साहित्य ये सब क्या है बेटा? ये सारी की चीजें अन्य पाठ्य वस्तुएं होती हैं। ठीक है? चलिए एक सवाल ये आया है। अच्छा कितने बच्चे इसका आंसर अपने मन से लिख सकते हैं? छात्रों के लिए समाचार पत्र पठन क्यों आवश्यक है? चलिए कितने बच्चे इसका आंसर अपने मन से लिख सकते हैं? अच्छा कितने बच्चे अगर यह पूछ लिया जाए शैक्षणिक भ्रमण से बच्चों को क्या-क्या लाभ है? कितने बच्चे लिख ले जाएंगे? चित्रों के उपयोग से बच्चों का क्या-क्या लाभ है? मान लीजिए इसी में सवाल आ जाए। बाल उपयोगी पत्रिकाओं से छात्रों को क्या लाभ है? लिख ले जाओगे ना सवाल? अब इसको अलग-अलग पढ़ने की कोई जरूरत है। अब आप बड़े हो गए हो बेटा। आप लोग बड़े हो गए हो। समझ रहे हो ना भाई मेरे? जी तो अगर कहने का मतलब यह है अगर आपसे पूछा जाए बाल उपयोगी पत्रिकाओं के लाभ शैक्षिक भ्रमण के लाभ समाचार पत्र पढ़ना क्यों आवश्यक है तो ये चीजें आप बनाकर आराम से लिख सकते हो समझिए हम ठीक है चलिए आगे बढ़े। ठीक। छात्रों के लिए समाचार पत्र पठन क्यों आवश्यक है? छात्रों के लिए समाचार पत्र पढ़ना ज्ञानवर्धन भाई ज्ञान भी बढ़ेगा। भाषा भी सुधार होगा। समसामयिक मामले यानी करंट अफेयर्स की जानकारी के लिए आवश्यक है। यानी छात्रों के लिए समाचार समाचार पत्र पढ़ना ज्ञानवर्धन यानी उनका ज्ञान बढ़ाएगा। भाषा सुधार होगा और समसामयिक मामलों की जानकारी के लिए आवश्यक है। यह उन्हें देश दुनिया की घटनाओं से जोड़ता है। उनकी शब्दावली बढ़ाता है और कैरियर परीक्षा से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियों से अपडेट रखता है जो सर्वांगीण विकास के लिए बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण है। अब बताओ यहां तक चीजें आ गई समझ में आपको? बताइए समाचार पत्र पढ़ना क्यों आवश्यक है? समझ में आ गया आपको? जी बोलो भैया ओ मेरे बच्चा लोग बताइए छात्रों के लिए समाचार पत्र पठन क्यों आवश्यक है बताइए ठीक है अगला क्या है शैक्षिक भ्रमण किसे कहते हैं अगर मान लीजिए आपसे पूछा जाए शैक्षिक भ्रमण किसे कहते हैं? शैक्षिक भ्रमण छात्रों के समूह द्वारा कक्षा या विद्यालय के नियमित वातावरण से बाहर किसी विशिष्ट स्थान पर की जाने वाली एक योजनाबद्ध यात्रा है। अच्छा आप लोगों ने भी अगर आप डीएलएड कर रहे होंगे तो आपके कॉलेज से भी टूर गया होगा। और कॉलेज के टूर में मिलती है आजादी। ठीक है? लड़के लड़कियां बढ़िया तरीके से जाते हैं। सेल्फी व्ल्लफी लेते हैं। ठीक है? कोई बढ़िया वहां पे नाम वाम भी लिख देता है। ऐसे दीवाल वाल पे आप देखे होंगे ना बहुत सारा ऐसे नाम लिखा होगा ऐसे दिल उल बना रहता है बहुत सारी दीवारों पर। ठीक है? इधर लिखा होता है क्या? आलू एक तरफ लिखा रहेगा भकालू। ठीक है? ऐसे लिखा होता है ना बेटा मैं किसी का नाम नहीं लिख सकता बेटा ना। नहीं तो फिर बच्चे तुरंत भड़क जाएंगे। ऐसे लिखा होता है ना कहीं आपने इमारतमारत में देखा होगा कि खंडरवंडर टाइप की चीजें लिखी होती है ना बेटा। तो जो पुराने जमाने के आशिक रहते थे ना जब WhatsApp WhatsApp नहीं चलता था तब वो लोग अपनी शक्तियों का प्रयोग यहां पर करते थे। ठीक है? यहां पर होता था ना भाई मेरे ठीक है। तो शैक्षिक भ्रमण किसे कहते हैं बेटा? तो शैक्षिक भ्रमण मतलब देखा होगा आप लोगों ने टूर पे गए होंगे तब। जी। चलिए आगे बढ़ते हैं। तो शैक्षिक भ्रमण किसे कहते हैं? तो शैक्षिक भ्रमण जिसे हम ट्रिप भी बोलते हैं। छात्रों के समूह द्वारा कक्षा या विद्यालय के नियमित वातावरण से बाहर किसी विशिष्ट स्थान पर की जाने वाली एक योजनाबद्ध यात्रा है। इसका मुख्य उद्देश्य किताबी ज्ञान को व्यावहारिक अनुभव से जोड़ना, विषय की समझ को गहरा करना और मनोरंजक तरीके से सीखना है। अब बताइए इतना समझ में आ गया भैया जी। इतनी बात आपको समझ में आ गया बेटा? हां जी। चलिए आ गया। बताइए शैक्षिक भ्रमण किसे कहते हैं? समझ में आ गया आपको भैया कि शैक्षिक भ्रमण छात्रों के समूह द्वारा कक्षा या विद्यालय के नियमित वातावरण से बाहर किसी विशिष्ट स्थान पर की जाने वाली एक योजनाबद्ध यात्रा है। इसका मुख्य उद्देश्य किताबी ज्ञान को व्यावहारिक अनुभव से जोड़ना है। विषय की समझ को गहरा करना और मनोरंजन तरीके से सीखना होता है। आ गया भाई समझ में? ठीक है? अब आते हैं अगला। अनुच्छेद का उचित शीर्षक चयन करते समय कौन-कौन सी बातों का ध्यान रखना चाहिए? ये सवाल भी दो नंबर में कई बार आपके एग्जाम में पूछा गया है। अच्छा आप देखते हो ना जब कोई पैसेज दिया जाता है आपको और आपसे कहा जाता है कि इसका टाइटल लिखिए या इसका टाइटल क्या होता है? तो उस टाइटल को ढूंढने के लिए या उस टाइटल को लिखने के लिए हमें किन-किन बातों का ध्यान रखना चाहिए? आइए एक-एक करके हम लोग देखते हैं। अनुच्छेद का उचित शीर्षक चयन करते समय निम्न बातों का ध्यान रखना चाहिए। नंबर एक अनुच्छेद के प्रारंभिक और अंतिम भाग में ही शीर्षक निहित होता है। यानी जैसे आपको कोई पैसेज दे दिया जाता है ना आपसे कहा जाता है इसका टाइटल लिखिए। तो हमेशा याद रखिए उसका जो टाइटल होगा या तो वो पहले पैसेज मतलब पहले पैराग्राफ में होगा या तो अंतिम पैराग्राफ में होगा। अनुच्छेद के प्रारंभिक और अंतिम भाग में ही शीर्षक निहित होता है। अनुच्छेद के भावार्थ को भली-भांति समझकर पढ़ना चाहिए। यानी अगर हम कोई पैसेज पढ़ रहे हैं तो उनके अर्थ को भी समझते हुए पढ़ें। उनके भाव को भी समझते हुए पढ़ें। अनुच्छेद के महत्वपूर्ण अंश को रेखांकित कर लेना चाहिए। अगर हम पढ़ रहे हैं और हमें कोई मेनम पॉइंट वहां पर दिखता है तो उसे हाईलाइट कर लेना चाहिए या तो उसको रेखांकित कर लेना चाहिए। शीर्षक संक्षिप्त एवं विषय अनुसार चरण चयनित करना चाहिए। यानी अगर आपका जो शीर्षक होगा ना शीर्षक छोटा चयनित करना चाहिए। ये नहीं बहुत बड़ा शीर्षक हो जाए। उसके बाद पांचवा है अनुच्छेद में विषय खुलकर स्पष्ट हो जाना चाहिए। तो ये पांच चीजों का ध्यान आप लोगों को रखना है। ये क्वेश्चन आपके एग्जाम में पूछा जाता है। अनुच्छेद का उचित शीर्षक चयन करते समय ध्यान देने योग्य बातें। तो अनुच्छेद के प्रारंभिक और अंतिम भाग में ही शीर्षक प्राय निहित होता है। अनुच्छेद के भावार्थ को भली-भांति समझकर पढ़ना चाहिए। अनुच्छेद के महत्वपूर्ण अंश को रेखांकित कर लेना चाहिए। शीर्षक संक्षिप्त एवं विषय अनुसार चयनित करना चाहिए और अनुच्छेद में विषय खुलकर स्पष्ट हो जाना चाहिए। लिख ले जाओगे बेटा आप लोग। ठीक है? आगे अगला सवाल एक पूछा जाता है। उच्च प्राथमिक स्तर की पाठ्य पुस्तकों में शामिल हिंदी साहित्य की विधाएं। अब ये ये वर्ड ना आप लोग बहुत बार सुनोगे विधाएं। विधाएं क्या होती हैं? जब आप हिंदी की कोई किताब पढ़ते हो तो उस हिंदी की किताब में बहुत सारी चीजें दी होती हैं। अच्छा आपसे कहा भी जाता है किनहीं चार विधाओं के नाम लिखो। किन्हीं पांच विधाओं के नाम लिखो। हम यहां पर नौ विधाओं के नाम लिखे हैं। आपको ये नौ याद होना चाहिए क्योंकि ये कोई नया नहीं है। सब आपको पता है। ठीक है? कविता भी एक विधा है। निबंध, कहानी, एकांकी, यात्रा, वृतांत, जीवनी, आत्मकथा, पत्र लेखन, नाटक ये सब क्या होते हैं? हिंदी साहित्य की विधाएं होती हैं। तो अगर आपसे पूछा जाए कि हिंदी साहित्य की विधाएं कौन-कौन सी होती हैं? तो याद रखना कविता निबंध कहानी एकांकी यात्रा वृतांत जीवनी आत्मकथा पत्र लेखन और नाटक ये सब क्या है ये सब विधाएं होती हैं जी अब बताइए इतनी बात आ गई समझ में आपको ओर भैया लोग हां या ना में कुछ तो बोल दो बच्चा ओ मार भैया लोग बताओ पहले बताओ क्लास अच्छी लग रही है आप लोगों को मजा आ रहा है कि नहीं आ रहा बताओ बताओ क्लास अच्छी लग रही है आप लोगों को क्लास क्लास में आनंद आ रहा है। आनंद की अनुभूति आप लोगों को हो रही है कि नहीं हो रही है? बताइए। हां जी। हां जी। बताइए। क्लास में आनंद की अनुभूति हो रही है आप लोगों को? ठीक है। आगे बढ़ेंगे। कांसेप्ट क्लियर हो रहा है ना? ठीक है। देखो यार बहुत सारे लोगों को मैं देखता हूं ना कि वो प्रीवियस ईयर के सवाल ले आते हैं। मैराथन में कराते हैं। लेकिन मैं ऐसा नहीं करवाता हूं। मेरा मन मतलब रहता है ना कि हर एक चैप्टर वाइज थ्योरी कराई जाए। बाकी आप प्रीवियस ईयर में आप लोग क्वेश्चन तो देखते ही देखते हैं और मैराथन में क्वेश्चंस मैं भी लाता हूं लेकिन मैं चैप्टर वाइज लेकर के आता हूं कि हां भाई इस चैप्टर से इतने क्वेश्चन इंपॉर्टेंट है। इस चैप्टर से इतने इंपॉर्टेंट हैं और यही एक यही एक मतलब हम कह भी सकते हैं कि पिछले तीन सेमेस्टर में आपने देखा होगा कि मैराथन से सवाल बाहर नहीं आते हैं। इन्हीं में से आते हैं। क्योंकि जब टॉपिक आपका क्लियर है। मान लीजिए एक आधा प्रश्न बाहर से भी आ जाएगा तब भी आप समेट दोगे कि हां भाई यह चीज पढ़ा है तो इसी वाला आंसर यह हो सकता है। जी ठीक है। आगे बढ़े अच्छा अब आते हैं हम लोग हिंदी काव्य साहित्य का विकास। हिंदी काव्य साहित्य का विकास कितने भागों में बांटा गया है? तो चार भागों में। आदिकाल आदिकाल को हम वीरगाथा काल भी कहते हैं। भक्ति काल को हम पूर्व मध्यकाल कहते हैं। रीतिकाल को उत्तर मध्यकाल कहते हैं और आधुनिक काल। तो अगर आपसे कहा जाए हिंदी काव्य साहित्य का विकास कितने भागों में बांटा गया है? तो चार भागों में। आदिकाल,क्तिकाल, रीतिकाल और आधुनिक काल। ये चार काल हैं। इनको आप सभी लोग अच्छे तरीके से याद रखिएगा। ठीक है? बहुत अच्छे तरीके से आप इनको याद रखिएगा। चलिए हम यहां पर एक सवाल आता है आपके एग्जाम में कि आदिकाल के कवि एवं उनकी रचनाओं के नाम लिखिए। ये थोड़ा सा इंपॉर्टेंट है। जैसे आपसे पूछा जाएगा कि आदिकाल के कवि कौन-कौन से हैं? तो चंद्रबरदाई हो गए, नरपति नाल हो गए, जगनिक, अमीर खुसरो, दलपति विजय ये सब आदिकाल के कवि हैं। कौन है बेटा? ये सारे के सारे आदिकाल के कवि हैं। अब आपसे कोई कहे कि भाई चंदबरदाई की रचना क्या है? पृथ्वीराज रासो। नरपत नाल की रचना क्या है? बीसलदेव रासो। जगनिक की रचना क्या है? परमाल रासो। अमीर खुसरो की रचना है पहेलियां दोहे खाली बारी। और दलपत विजय की है खुमान रासो। तो ये सारे के सारे आप याद रखिए। मतलब जिनके पीछे रासो लिखा है लगभग वो सारे आदिकाल की रचनाएं हैं। पृथ्वीराज रासो हिंदी का पहला महाकाव्य है। याद रखिएगा चंद्रबरदाई ने लिखा था। नरपत नाल ने बीसलदेव रासो लिखा है। जगनिक ने परमाल रासो लिखा है। दलपत विजय ने खुमान रासो लिखा है। और जो अमीर खुसरो हैं इन्होंने पहेलियां दोहे और खाली बारी लिखा है। जी चलिए इतनी बात आप हमको बताइए समझ में आ गया कि नहीं समझ में आ गया? बताइए यहां तक समझ में आ गया हम बोलिए आ गया बच्चा यहां तक समझ में आपको ठीक है आगे बढ़ेंगे अगला है कविता शिक्षण के उद्देश्य क्या होते हैं? बड़ा अच्छा सवाल है। कविता शिक्षण के उद्देश्य क्या है? तो विद्यार्थियों में पद्य के प्रति रुचि व प्रेम उत्पन्न करना। कविता शिक्षण के उद्देश्य अगर आपसे पूछा जाए। अच्छा एक बात बताओ आपने जब इंग्लिश पढ़ा था तो वहां पर क्या था बेटा? पोएट्री के एम आपने एम्स ऑफ पोएट्री आप पढ़ते थे ना वहां पे। वही चीज यहां पर हिंदी में आपको लिखना है। जब हम इंग्लिश में आता है ना कि एम्स ऑफ पोएट्री लिखिए। एम्स ऑफ प्रोज़ लिखिए। तो एम्स ऑफ पोएट्री को यहां हिंदी में लिख देना है। विद्यार्थियों में पद्य के प्रति रुचि व प्रेम उत्पन्न करना। विद्यार्थियों को पूर्ण मनोयोग से कविता पाठ सुनने के योग्य बनाना। लय ताल एवं भाव के अनुसार कविता पाठ करना। विद्यार्थियों में कल्पना बोध शक्ति का विकास करना। विद्यार्थियों को विभिन्न काव्य शैलियों से परिचित कराना। तो कविता शिक्षण के उद्देश्य में आप इतनी चीजें लिख सकते हो कि विद्यार्थियों में पद्य के प्रति रुचि व प्रेम उत्पन्न करना। विद्यार्थियों को पूर्ण मनोयोग से कविता पाठ सुनने के योग्य बनाना। लय ताल एवं भाव के अनुसार कविता पाठ करना। विद्यार्थियों में कल्पना बोध शक्ति का विकास करना और विद्यार्थियों को विभिन्न काव्य शैलियों से परिचित कराना। तो अब मुझे बताइए कि आप लोग कविता शिक्षण के उद्देश्य आप लिख पाओगे कि नहीं लिख पाओगे? जी। बेटा अजय सर से हम बात कर लेंगे बेटा कोई दिक्कत नहीं है हम आगे बढ़े ठीक है आगे बढ़े बेटा ठीक अब हम बढ़ेंगे आगे की तरफ अच्छा निबंध शिक्षण के उद्देश्य क्या हैं अगर आपसे आपसे कहा जाए निबंध शिक्षण के उद्देश्य क्या हैं? देखना निबंध शिक्षण के उद्देश्य क्या है? बच्चा ध्यान से देखिएगा। छात्रों में निबंध लिखने के प्रति अनुराग की भावना जागृत करना। दूसरा है छात्रों को स्पष्ट तथा शुद्धता पूर्वक निबंध लिखने के समर्थ बनाना। तीसरा है छात्रों को सरलता से उठते हुए अधिकाधिक भाषा सौंदर्य की ओर ले जाने का प्रयास करना। और चौथा है छात्रों को कल्पना जगत में सजगता लाने का प्रयास करना सीखना। बताइए इतनी बात समझ में आ गया कि नहीं समझ में आ गया? ठीक है। चलिए इतनी बात समझ में आ गया आप सभी को? जी सवीना परवीन कह रही बेटा मैराथन की सारी पीडीएफ पेड बैच में जा रही है। भाई सारी पीडीएफ बेटा हम फ्री में ही देखो हमने दिया है तीन चार बार सब्जेक्ट का फ्री पीडीएफ ऐसा नहीं हमने नहीं दिया लेकिन एक चीज मैंने नोटिस किया कि जब मैं फ्री पीडीएफ देता हूं तो बच्चे क्लास नहीं देखते हैं। फिर वो खाली पीडीएफ पर उनका ध्यान रहता है और मुझे पता है तुम अगर खाली पीडीएफ पढ़ोगे तो तुम मतलब पेपर अच्छा नहीं कर पाओगे क्योंकि कुछ चीजें ऐसी होती हैं जो पीडीएफ में नहीं होती और मैं बताता हूं उस चीज को तो इसीलिए मैंने किया है कि कम से कम बच्चे क्लास देखेंगे स्क्रीनशॉट लेंगे तो उनका फायदा हो जाएगा और बाकी अगर किसी को पीडीएफ चाहिए तो बेटा बैच ले सकते हो खाली पीडीएफ में ही मिलेंगे वहां पे बहुत कुछ मिलेगा जैसे आप फ्री बैच में हो आप आपको कितने प्रीवियस ईयर पेपर मिले दो या तीन मिले होंगे हर सब्जेक्ट का किसी का तो एक ही मिला होगा लेकिन पेड बैच में आपको हर सब्जेक्ट्स के छह सात-सा 8आ साल के प्रीवियस ईयर पेपर मिल जाएंगे। लेकिन नहीं आप सोच रहे हो कि अब हम काहे बैच लें? हम 249 काहे खर्च करें? अब 15 20 दिन बचा है एग्जाम। अरे 20 दिन बहुत होते हैं एग्जाम में। 20 दिन में तो तबाही मचा दोगे। कुछ तो ऐसे टैलेंटेड बच्चे हैं जो लास्ट के पांच ही दिन पढ़ेंगे। तो बेटा बैच ले लो। पीडीएफ भी मिल जाएगी। सारे पीवाईक्यू मिल जाएंगे, नोट्स मिल जाएंगे, क्लासेस मिल जाएंगी। किसी टॉपिक में डाउट होगा वो टॉपिक क्लियर कर लेना। 249 कुछ नहीं होता है। एक सब्जेक्ट थोड़ा सा गड़बड़ होता है। कॉलेज वाले लूट के खा जाते हैं तुमको। ₹1000 इधर दो, 500 इधर दो, 5000 इधर दो। नौटंकी तो बहुत ज्यादा होती है। और फोर्थ सेमेस्टर वाले आप जितने लोग हो आपको तो बिल्कुल लापरवाही नहीं करनी। फोर्थ सेमेस्टर पास करो। कोई भर्ती आए भर्ती में फॉर्म भरो। आगे बढ़ो। एक सब्जेक्ट में उल्टा सीधा हो जाएगा। कोई भर्ती आएगी तुम बैठे रह जाओगे ऐसे। बस इसीलिए पीडीएफ नहीं दे रहा हूं आपको। सेकंड को तो मैं दे रहा हूं। आपको कह नहीं दे रहा हूं। आपसे कोई दुश्मनी है? नहीं। ऐसा कुछ नहीं है। बस मैं यह चाहता हूं कि आप लापरवाही मत करिए। अभी मैं पीडीएफ देता हूं। बेटा बच्चे यहां देखने ही नहीं आते हैं। उनको पता है कि हम पीडीएफ से तो पढ़ लेंगे। हम का करने टाइम वेस्ट करेंगे। और जो एक्स्ट्रा चीज बताएंगे वो पढ़े नहीं। उसमें पीडीएफ में रहती नहीं है। चलिए अब आते हैं कहानी शिक्षण की उपयोगिता क्या है? निबंध शिक्षण हम लोगों ने पढ़ लिया। अब अगला होता है कहानी शिक्षण की उपयोगिता। हां हां बिल्कुल करेंगे प्रांजलि जी। बिल्कुल मैथ का हम लोग चैप्टर वाइज पढ़ेंगे। चैप्टर वाइज नहीं पढ़ेंगे। पांच क्लास करेंगे और एक-एक दिन में दो-दो तीन-तीन चैप्टर खत्म करेंगे। ठीक है? बिल्कुल। टॉपिक वाइज चैप्टर वाइज करेंगे जिससे कांसेप्ट भी क्लियर होता है। आगे केवल पांच क्लास मैथ की करेंगे। कहानी शिक्षण की उपयोगिता। कहानी शिक्षण से छात्रों के सामान्य ज्ञान में वृद्धि होती है। कहानी तर्क, विवेक, संकल्प एवं कल्पना शक्ति में अभिवृद्धि करती है। कहानी से बालक में क्रमिक रूप से बोलने तथा तार्किक रूप से विचार करने की शक्ति विकसित होती है। और चौथा है बालकों को उपयुक्त शब्दों और मुहावरों का अनायास ज्ञान होता रहता है। जी। चलिए आ गया भैया समझ में यहां पर तो कहानी शिक्षण की उपयोगिता क्या लिखोगे कहानी शिक्षण से छात्रों के सामान्य ज्ञान में वृद्धि होती है। कहानी तर्क विवेक संकल्प एवं कल्पना शक्ति में अभिवृद्धि होती है। कहानी से बालक में क्रमिक रूप से बोलने तथा तार्किक रूप से विचार करने की शक्ति विकसित होती है और बालकों को उपयुक्त शब्दों और मुहावरों का ज्ञान होता रहता है। आगे बढ़ेंगे। कहानी वक्ता एवं श्रोता के मध्य घनिष्ठ संबंध स्थापित करती है। कहानी से बालकों की स्मरण शक्ति का विकास होता है और कहानी कल्पना तथा संवेगों के बीच संतुलन करना सिखाती है। पहले बताओ यहां तक चीजें समझ में आ गई आपको? जी बताइए। इतनी बात आ गई समझ में? अगर आपसे पूछा जाएगा कि कहानी शिक्षण की उपयोगिता बताइए तो क्या आप लोग कहानी शिक्षण की उपयोगिता बता ले जाओगे कि नहीं बता ले जाओगे? एक बार बता दो बस एक बार झूठ ना बोलो। झूठ ना बोलो। एक बार बता ले जाओगे। जी बोलो भैया। ओ मेरे भैया लोग। बताइए समझ में आ गया आप सबको यहां तक चीजें किसी को कोई डाउट किसी को कोई परेशानी किसी को कोई समस्या अगर हो तो मुझे आप बता दीजिए जी तो चलिए आज इतना ही रखते हैं। आज जितनी भी स्लाइड हम लाए थे वो सारी स्लाइड आज कंप्लीट हो गई है। कल इसका हम पार्ट टू करेंगे बेटा। ठीक है? कल संडे को हम लोग इसका पार्ट टू करेंगे। तो एक बार बताओ क्या आपको चीजें समझ में आ गई? जो भी चीज़ पढ़ाएं क्या आपको कोई डाउट परेशानी इसको पूरा रिवीजन कर लीजिएगा बेटा। ठीक है? जो चीज़ समझ में आ गई बहुत अच्छी बात है। जो चीज़ कम समझ में आई है उसको एक बार आप रिवीजन कर लीजिएगा। ठीक है? समझ में आ जाएगी। जो बच्चे बैच ले चुके हैं उनको 5 मिनट के अंदर पीडीएफ इसकी मिल जाएगी। ठीक है? चलिए बाकी बताइए क्लास कैसी लगी आप लोगों को? जी हम बहुत बढ़िया। नहीं मेहनत करते हो आप लोग। बढ़िया रिजल्ट आएगा। उसमें कोई दिक्कत थोड़ी ना है। मस्तमस्त। चलिए सर एसएसटी की मैराथन आप ही करा दीजिए ना। सर की आपकी भाषा बहुत अच्छी है। ये जो इमोशनल ब्लैकमेल शिवम सर को कर रहे हो ना। बहुत पीट अप बहुत चुपचाप पढ़ लिया करो। जी हमारे सामने कहेंगे गुरुजी बहुत बढ़िया पढ़ाते हैं। अजय सर के सामने अरे गुरुजी अजय सर तो आप साक्षात जो है बाबर के आसपास के हो पड़ोसी वड़ोसी लगते हो इतना बढ़िया एसएसटी पढ़ाते हो गधा कहीं के चलिए आ गया इतना समझ में चलिए थैंक यू सो मच थैंक यू मिलते हैं आपको अगली क्लास में जी भाई अच्छा जिनका सेकंड सेमेस्टर मैथ में बैक है आप लोगों का ना भाई 8:00 बजे आज मैथ की क्लास चलेगी सेकंड सेमेस्टर की आप लोग 8:00 बजे जरूर उपस्थित होइएगा अगर आपका सेकंड सेमेस्टर मैथ का बैक है बहुत अच्छी रिवीजन हो रही शाम को 8:00 बजे जरूर जुड़िएगा मैथ की क्लास में। थैंक यू सो मच। जय हिंद। लाइक कर दीजिएगा भाई एक बार। बाकी 11:00 बजे एसएसटी की क्लास चलेगी। 11:00 बजे जुड़िएगा आप लोग।

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