Separation of Powers Administrative Law | LLB BALLB Judiciary UGC NET | LAW91

LAW912,267 words

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हेलो गाइज़, मेरा नाम है कनिष्क। आप देख रहे हैं L 91. इस वीडियो में हम बात करने वाले हैं सेपरेशन ऑफ़ पावर के बारे में। सेपरेशन का मतलब होता है सेपरेट करना। पावर्स का मतलब तो पता ही है आपको। जो पावर्स दी गई है ना गवर्नमेंट को उनको सेपरेट करने को बोलते हैं सेपरेशन ऑफ़ पावर। ठीक है? यह इंपॉर्टेंट टॉपिक है आपका एडमिनिस्ट्रेटिव लॉ का। तो, इसको जल्दी शुरू करके छोटी सी वीडियो में खत्म करते हैं। नोट्स एंड पीपीटी चाहिए, तो यहां पे लिंक आ जाएगी। डाउनलोड कर लेना। ठीक है? जो ये डॉक्ट्राइन है ना सेपरेशन ऑफ पावर का इसका मतलब होता है कि जो पावर ऑफ गवर्नमेंट है ना वो डिवाइड की गई है तीन सेपरेट ब्रांचेस में। कौन-कौन सी ब्रांचेज है? लेजिसलेटिव, एग्जीक्यूटिव और जुडिशरी। लेजिसलेटिव लॉज़ बनाती है। एग्जीक्यूटिव लॉ को इंप्लीमेंट करती है। जुडिशरी उनको इंटरप्रेट करती है और जस्टिस को इंश्योर करती है। ठीक है? ईच ब्रांचेज है ना वो ऑपरेट करती है इंडिपेंडेंटली टू अवॉइड कंसंट्रेशन ऑफ़ पावर। कंसंट्रेशन ऑफ़ पावर का मतलब होता है जब सारी पावर कंट्रोल की जाती है एक पर्सन के द्वारा या फिर एक ग्रुप के द्वारा। इंस्टेड ऑफ़ बीइंग शेयर्ड इसको बोलते हैं कंसंट्रेशन ऑफ पावर। ठीक है? और मिसयूज़। ठीक है? यह तीन ब्रांचेज़ है लेजिस्लेचर, एग्जीक्यूटिव और जुडिशरी। ठीक है? ये सेपरेशन हेल्प करता है प्रिवेंटिंग आर्बिट्रेरी गवर्नेंस। आर्बिट्रेरी गवर्नेंस क्या होता है? जब गवर्नमेंट डिसीजन बनाती है बेस्ड ऑन इट्स विल और पर्सनल चॉइस। ठीक है? विदाउट फॉलोइंग रूल्स और फेयरनेस। ठीक है? उसको बोलते हैं आर्बिट्रेरी गवर्नेंस। ठीक है? और एनश्योर करती है अकाउंटेबिलिटी, ट्रांसपेरेंसी और फेयरनेस इन एडमिनिस्ट्रेशन। ठीक है? ओरिजिन जो डॉक्ट्राइन है सेपरेशन ऑफ़ पावर का यह कहां से आया था? जो आईडिया था ना ये सेपरेशन ऑफ़ पावर का यह पहले दिया गया था मॉनटेस्क्यो के द्वारा जो कि एक फ्रेंच थिंकर थे। यार इनको ना थोड़ा हाईलाइट मैंने इसलिए किया हुआ है इनको याद कर लेना। ठीक है? अगर आप कोई इंपॉर्टेंट एग्जाम दे रहे हो तो। ठीक है? उसने एक्सप्लेन किया था ये अपनी किताब में जिसका नाम था द स्पिरिट ऑफ लॉज़। ठीक है? कौन से साल में? 1748 में। उन्होंने कहा था कि जो गवर्नमेंट है ना वो शुड बी डिवाइडेड इंटू डिफरेंट पार्ट्स। मतलब कि जो गवर्नमेंट है वो डिफरेंट पार्ट्स में डिवाइड होनी चाहिए ताकि किसी को भी बहुत सारी पावर ना मिले। यह हेल्प करता है स्टॉप अनफेयर रूल्स एंड प्रोटेक्ट पीपल फ्रीडम। यह लोगों की फ्रीडम को प्रोटेक्ट करता है और अनफेयर रूलिंग को रोकता है। सेपरेशन ऑफ़ पावरेंट क्यों है? यह प्रिवेंट करता है कंसंट्रेशन ऑफ़ पावर। ठीक है? इन वन पर्सन और इंस्टीट्यूशन ताकि एक के पास ज्यादा पावर ना हो और उसका मिसयूज़ ना हो। ठीक है? यह एनश्योर करता है फेयरनेस एंड इंपार्शियलिटी। यह प्रोटेक्ट करता है सिटीजन के राइट को फ्रॉम आर्बिट्रेरी गवर्नमेंट एक्शन। आर्बिटरी गवर्नमेंट एक्शन का मतलब आपको पता ही है। मैंने बताया है पीछे पीछे करके देख लो क्या होता है। यह मेंटेन करता है सिस्टम ऑफ चेक एंड बैलेंससेस। जैसे कि कोर्ट कैंसिल कर सकता है लॉ को अगर कोई लॉ बनाया जाता है अगेंस्ट द कॉन्स्टिट्यूशन ऑफ इंडिया। ठीक है? कीपिंग द गवर्नमेंट एक्शन अंडर कंट्रोल। मतलब कि ऐसा करने से गवर्नमेंट के एक्शंस कंट्रोल में रहते हैं। हिस्टोरिकल बैकग्राउंड अगर मैं आपको बताऊं तो आईडिया वाज़ फर्स्ट सीन इन एंसिएंट पॉलिटिकल थॉट जैसे कि एरिस्टोटलल बट मॉडर्न डॉक्ट्राइन जो था वह पॉपुलर किया गया मॉन्टेस्क्यू के द्वारा। उसकी बुक में द स्पिरिट ऑफ लॉज़ 1748 ईयर में मॉन्टेस्क्यू ने आर्ग्यू किया कि जो लिबर्टी है ना वो प्रोटेक्ट तभी हो सकती है जब तीनों पावर सेपरेटेड हो। तीनों पावर कौन-कौन सी आपको याद होना चाहिए। लेजिस्लेचर जो लॉ बनाता है एग्जीक्यूटिव जोन को इंप्लीमेंट करता है जुडिशरी जो इंटरप्रेट करता है और एश्योर करता है जस्टिस को। ठीक है?ेंस इन एडमिनिस्ट्रेटिव लॉ। एडमिनिस्ट्रेटिव लॉ डील करता है विद द फंक्शनिंग ऑफ़ एडमिनिस्ट्रेटिव एजेंसीज़। अगर पावर सेपरेट नहीं होंगी तो एडमिनिस्ट्रेटिव अथॉरिटीज़ उनका मिसयूज़ कर सकती है पावर का। ठीक है? उनकी पोजीशंस का बाय कंबाइनिंग लॉ मेकिंग इंप्लीमेंटेशन और एडजुडगेशन इन वन हैंड मतलब सारी चीज़ एक के पास ही हो जाएगी तो फिर पावर का मिस तो होना ही है। वैसे तो अभी यहां पे जो गवर्नमेंट फिलहाल चल रही है आपको ये सब चीज देखने को मिल ही रही है। बट मैं क्या ही कमेंट करूं भाई सेपरेशन ऑफ़ द पावर एनश्योर करता है कि जो लॉ मेकिंग है ना वह इेड रिप्रेजेंटेटिव के थ्रू होनी चाहिए। ठीक है? एडमिनिस्ट्रेटर्स के थ्रू नहीं होनी चाहिए। इंप्लीमेंटेशन जो है वह होना चाहिए एग्जीक्यूटिव्स के द्वारा अंडर द सुपरविज़न ऑफ़ लॉ। मतलब कि जो एग्जीक्यूटिव है ना वो एनफोर्स करते हैं लॉ को बट फॉलो करना होता है उनको रूल्स। ठीक है? स्टे विद इन द लिमिट सेट बाय द लॉ। ठीक है? उनको जो लिमिट्स है ना जो लॉ ने सेट की हुई है उनके अंदर रह के लॉ का एनफोर्समेंट करना होता है। डिस्प्यूट्स एंड वलेशन अगर हैं तो रिजॉल्व किए जाएंगे जुडिशरी के द्वारा। ठीक है? इंडिपेंडेंट ऑफ पॉलिटिकल इन्फ्लुएंस नहीं होना चाहिए वहां पे। ठीक है? जुडिशरी एक इंडिपेंडेंट बॉडी है। तो जो डिस्प्यूट और वलेशन होंगे वो इंडिपेंडेंटली जुडिशरी सॉल्व करेगी। ठीक है? पॉलिटिकल इन्फ्लुएंस वहां पे नहीं होगा। स्ट्रिक्ट वर्सेस फंक्शनल सेपरेशन। स्ट्रिक्ट सेपरेशन वो होता है जब सारी ब्रांचेस मस्ट बी कंप्लीटली इंडिपेंडेंट। उसका एक एग्जांपल है यूएस कॉन्स्टिट्यूशन। ठीक है? दूसरा है फंक्शनल सेपरेशन। यह अलऊ करता है ओवरलैप बट मेंटेन करता है चेक एंड बैलेंससेस। ठीक है? जैसे कि इंडिया में होता है और बहुत सारे कॉमन कंट्रीज में होता है। इंडिया फॉलो करता है फंक्शनल सेपरेशन को। मतलब कि पावर तो यहां पे डिवाइडेड है बट कुछ ओवरलैप फंक्शन अलाउ है फॉर इफेक्टिव गवर्नेंस। ठीक है? यह एक कहने की बात होती है। एज लॉन्ग एज कोर्ट कीप चेक ऑन देम। मतलब कि कोर्ट मेक श्योर करेगा कि गवर्नमेंट फॉलो कर रही है ला। ठीक है? और अपनी पावर का मिसयूज़ तो नहीं कर रही। ठीक है? अगर कुछ भी रोंगली किया जाएगा तो कोर्ट उसको रोक देगी। ठीक है? इन इंडिया कोर्ट एनश्योर सेपरेशन बाय रिव्यूइंग एडमिनिस्ट्रेटिव एक्शनंस को रिव्यू करती है कोर्ट। इंटरप्रेट करती है उन लॉज़ को जो पास किए जाते हैं लेजिस्लेचर के द्वारा। देखती है कि भाई अगेंस्ट कॉन्स्टिट्यूशन तो नहीं है। कुछ भी लॉ तो नहीं बना दिया गया है। ठीक है? प्रोटेक्ट करती है राइट जो गारंटीड है अंडर द कॉन्स्टिट्यूशन ऑफ इंडिया जैसे कि फंडामेंटल राइट्स उनको प्रोटेक्ट करती है आर्टिकल 32 के अंदर आप रिट डाल सकते हो ध्यान रखना ठीक है ब्रांचेस ऑफ गवर्नमेंट लेजिस्लेचर एग्जीक्यूटिव जुडिशरी लेजिस्लेचर लॉ बनाती है पॉलिसीज बनाती है जैसे कि पार्लियामेंट ऑफ इंडिया एग्जीक्यूटिव जो इंप्लीमेंट करते हैं लॉ को और एडमिनिस्ट्रेशन को रन करते हैं जैसे कि प्रेसिडेंट प्राइम मिनिस्टर मिनिस्टर गवर्नमेंट डिपार्टमेंट जुडिशरी जो उन लॉज़ को जो बनाए गए हैं उनको इंटरप्रेट करती है और रिज़ॉल्व करती है डिस्प्यूट्स को एग्जांपल बिल सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया एंड हाई कोर्ट्स। ठीक है? क्रिटिसिज्म ऑफ़ सेपरेशन ऑफ़ पावर। अब देखते हैं क्रिटिक्स क्या कहते हैं? सेपरेशन ऑफ़ पावर के लिए। प्रैक्टिस में इन प्रैक्टिस कंप्लीट सेपरेशन तो पॉसिबल नहीं है। ठीक है? ओवरलैप मे बी नेसेसरी फॉर कोऑर्डिनेशन एंड गवर्नेंस। मतलब कि ओवरलैप नेसेसरी है कोऑर्डिनेशन के लिए। यहां तक का ठीक है। गवर्नेंस के लिए यहां तक का ठीक है। इफेक्टिव गवर्नेंस के लिए जरूरी है। बट अगर आप उसका मिसयूज़ करोगे तो फिर क्या ही फायदा। ठीक है? आप देख रहे हो आजकल क्या चल रहा है। ठीक है? कभी-कभी इमरजेंसीज में टेंपरेरी सस्पेंशन होता है सेपरेशन का। एक्सेसिव इंटरफेरेंस अगर होगा। ठीक है? तो यह स्लो कर देगा एडमिनिस्ट्रेशन को। यह भी बात ठीक है। चेकक्स एंड बैलेंस जुडिशियल रिव्य्यू जुडिशियरी स्ट्राइक डाउन करती है अनकॉनस्टिट्यूशनल लॉ को। जैसे कि केशवानंद भारती केस में हुआ था 1973 में। अगर आपको ये केस नहीं पता है तो मेरे को नहीं पता आप यहां पे क्या कर रहे हो। भाई पहले इस केस के इफेक्ट चेक करो। अगर आप लॉ के स्टूडेंट हो थर्ड फोर्थ सेमेस्टर में हो तो भाई मेरे को नहीं पता आप क्यों हो। ठीक है? द सुप्रीम कोर्ट ने रूल किया था कि पार्लियामेंट कैन नॉट चेंज द बेसिक स्ट्रक्चर ऑफ कॉन्स्टिट्यूशन। कॉन्स्टिट्यूशन की जो बेसिक स्ट्रक्चर है पार्लियामेंट उसको चेंज नहीं कर सकता। रूल बना सकता है, लॉज़ बना सकता है। बट वो बेसिक स्ट्रक्चर के अंदर होने चाहिए। ठीक है? कोई भी अनकॉन्स्टिट्यूशनल लॉ होगा वो स्ट्रक डाउन कर दिया जाएगा। इसको बोलते हैं जुडिशियल रिव्यू। हम पढ़ रहे हैं चेकक्स एंड बैलेंससेस। मतलब कि जैसे गवर्नमेंट होती है, तीनों गवर्नमेंट की जो ब्रांचेज़ है, वो कैसे-कैसे चेक करती है। कैसे उनके बीच में बैलेंस होता है। ठीक है? कैसे होता है? जुडिशरी रिव्यू के थ्रू होता है। ठीक है? लेजिस्लेचर लॉ बनाता है। ठीक है? एग्जीक्यूटिव उसको इंप्लीमेंट करता है। जुडिशरी उसको इंटरप्रेट करती है। ठीक है? जुडिशरी देखती है कि यार लॉ आपने बनाया है वह बेसिक स्ट्रक्चर के अंदर है क्या कॉन्स्टिट्यूशन के अगर नहीं है तो स्ट्रक डाउन कर दिया जाता है इंपीचमेंट लेजिस्लेचर रिमूव करती है जजेस को जैसे कि सुप्रीम कोर्ट का जज या फिर हाई कोर्ट का जज रिमूव कर दिया जाएगा थ्रू इंपीचमेंट बाय द पार्लियामेंट अगर गिल्टी प्रूव होता है तो किसके लिए मिस बिहेवियर के लिए और इनकैपेसिटी के लिए जैसे कि जस्टिस वी रामस्वामी केस में होता जहां पे इंपीचमेंट की प्रोसीडिंग इनिशिएट कर दी गई थी अप्रूवल पावर लेजिस्लेचर अप्रूव करती है बजट्स एंड पॉलिसीज जैसे कि पार्लियामेंट मस्ट अप्रूव द गवर्नमेंट बजट और कोई भी मनी स्पेंट नहीं किया जाएगा अनलेस पार्लियामेंट उसको पास नहीं करता है तो ठीक है यह रिक्वायर्ड है अंडर आर्टिकल 112 ऑफ़ द कॉन्स्टिट्यूशन ऑफ इंडिया इमरजेंसी पावर एग्जीक्यूटिव टेंपरेरी कंट्रोल ले सकती है बट अंडर सुपरविज़न ध्यान रखना एग्जांपल जैसे कि 1975 के इमरजेंसी के टाइम पे हुआ था मेरे हिसाब से 21 मंथ्स की आई थिंक इमरजेंसी थी वो ठीक है देख लेना वहां पे क्या हुआ था एग्जीक्यूटिव ने टेंपरेरीली मोर कंट्रोल ले लिया था बट कोर्ट ने रिव्यु किए थे एकशंस को एनश्योर करने के लिए कि वह वायलेट तो नहीं कर रहे फंडामेंटल राइट बिय्ड परमिसिबल लिमिट्स। ठीक है? केस लॉज़ रिलेटेड टू सेपरेशन ऑफ़ पावर केशवानंद भारती वर्सेस स्टेट ऑफ़ केरला 1973। इसमें डिक्लेअ किया गया था सेपरेशन ऑफ़ पावर एंड जुडिशियल रिव्यू पार्ट है बेसिक स्ट्रक्चर ऑफ़ द कॉन्स्टिट्यूशन। ठीक है? इंदिरा गांधी वर्सेस राज नारायण 1975 में कोर्ट ने एफेसाइज़ किया था कि मिसयूज़ ऑफ़ पावर थिटन करेगी डेमोक्रेसी को। एसपी गुप्ता वर्सेस यूनियन ऑफ़ इंडिया 1981 में रिइंफोर्स्ड जुडिशियल इंडिपेंडेंस बाय लिमिटिंग एग्जीक्यूटिव इंटरफेरेंस। मतलब कि जज काम कर सकते हैं फ्रीली। ठीक है? और फेयर डिसीजन बना सकते हैं बिना प्रेशर के। केशवानंद भारती केस और इंदिरा गांधी केस इनको इन डेप्थ पढ़ लेना। मैं बाद में मेरी टू डू लिस्ट में है ये। मैं बाद में वीडियोस बना दूंगा इन पे। अभी बीच में इनको लंबा करूंगा तो 20 25 30 मिनट की वीडियो बन जाएगी। कोई भी नहीं देखेगा। ठीक है? तो मैं आपको बस यह कहता हूं कि इनको फैक्ट चेक कर लो। Google पे जाओ। इनके बारे में पढ़ो। आपको हिस्ट्री और पॉलिटिक्स के बारे में पता लगेगा इंडिया की कितने हद तक क्या-क्या होता है इंडिया में। ठीक है? कंपैरिजन विद द रूल ऑफ़ लॉ। रूल ऑफ लॉ एनश्योर करता है कि लॉ इज सुप्रीम। ठीक है? सेपरेशन ऑफ पावर ने क्या किया है? गवर्नमेंट की पावर को डिवाइड किया गया है। ठीक है? रूल ऑफ लॉ प्रोटेक्ट करता है राइट्स को और प्रिवेंट करता है आर्बिट्रेरीनेस। ठीक है? यहां पे कंसंट्रेशन ऑफ़ पावर मतलब कि एक आदमी के हाथ में सारी पावर नहीं दी गई है। उसको डिस्ट्रीब्यूट किया गया है। ठीक है? रूल ऑफ लॉ में कोर्ट एश्योर करता है इक्विलिटी एंड फेयरनेस। सेपरेशन ऑफ़ पावर में डिफरेंट ब्रांचेस चेक करती है एक दूसरे को। जैसे हमने यहां पे पढ़ा है। ठीक है? कैसे-कैसे चेक करती है? जुडिशियल रिव्यू होते हैं। ठीक है? अगर जज काम नहीं कर रहा है इनकैपेसिटी और मिस बिहेवियर प्रूव हो जाता है तो इंपीचमेंट प्रोसीडिंग्स स्टार्ट हो जाती है। ठीक है? अप्रूवल पावर्स ठीक है? लेजिस्लेचर अप्रूव करता है। ठीक है? पार्लियामेंट उसको पास करना होता है पार्लियामेंट के द्वारा। ठीक है? इमरजेंसी पावर यहां पे कुछ मेजर कंट्रोल्स ले लेती है एग्जीक्यूटिव इन केस ऑफ़ इमरजेंसी। ठीक है? कंक्लूड अगर मैं इसको करूं तो सेपरेशन ऑफ़ पावर बैकबोन है हेल्दी डेमोक्रेसी की। ठीक है? यह एनश्योर करता है लेजिस्लेचर, एग्जीक्यूटिव और जुडिशरी फंक्शन करे इंडिपेंडेंटली और मेंटेन करे चेकक्स ऑन अनदर। ठीक है? इंडिया फॉलो करता है एक बैलेंस मॉडल जहां पे कोपरेशन एग्ज़िस्ट करता है बट पावर कंट्रोल होती है। ठीक है? यह स्ट्रेंथन करता है रूल ऑफ़ लॉ, प्रोटेक्ट करता है लिबर्टी को और प्रिवेंट करता है ऑथॉरिटेरियनिज्म। ऑथॉरिटेरियनिज्म क्या होता है? वो सिस्टम जहां पे एक पर्सन या एक ग्रुप के पास टोटल पावर होती है और वो अलाउ नहीं करता है फ्रीडम और अपोजिशन को। ठीक है? उसको बोलते हैं ऑथोरिटेरियनिज्म। ठीक है? इन शॉर्ट सेपरेशन ऑफ़ पावर का मतलब होता है डिवाइडिंग फंक्शनंस। ठीक है? डिवाइड कर दिया हमने फंक्शनंस को तीन ब्रांचेज़ में। ठीक है? प्लस इंडिपेंडेंट ब्रांचज़। मतलब कि कोई इंटरफेरेंस नहीं होगा। ठीक है? थोड़ा बहुत चलता है। चेकक्स एंड बैलेंससेस। उसको बोलते हैं सेपरेशन ऑफ पावर। यहां पे आपकी वीडियो कंप्लीट होती है। ये एक यहां पे लाइक का बटन मिल जाएगा। कहीं पे लाइक कर देना वीडियो को। यहां पे एक लिंक आ रही है। पीपीटी डाउनलोड कर लेना। चैनल को सब्सक्राइब कर लेना। इसका देख लेना। क्या करना है?ेंट वीडियो इसको देख लेना। पूरी प्लेलिस्ट यहां पे है। उस पे चेक कर लेना। तब तक के लिए ऑल द वेरी बेस्ट फॉर योर एग्जाम्स। बाय बाय।

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