[संगीत] स्थान बैतालपुर गांव बुंदेलखंड का बीहड़ इलाका समय अमावस की मध्य रात्रि अमावस की रात का सन्नाटा ऐसा था जैसे हवा ने भी सांस लेना बंद कर दिया हो मैतालपुर गांव गांव जो दिन में धूल और धूप से झुलसा रहता था। रात होते ही किसी प्रेत लोक जैसा वीरान हो जाता था। रामेश्वर के हाथ कांप रहे थे। उसकी हथेली पर पसीने की बूंदों के साथ एक छोटी सी लाल पोटली चिपकी हुई थी। रामेश्वर कोई तांत्रिक नहीं था। ना ही उसे इन बातों पर विश्वास था। वो सिर्फ एक पिता था। एक छ साल के मरणासन्न बच्चे मुन्ना का पिता डॉक्टरों ने जवाब दे दिया था और गांव के ओझा ने आखिरी रास्ता बताया था। ओझा की आवाज उसके कानों में गूंज रही थी। गांव के दक्षिण वाले तराहे पर जहां पुराना बरगद है। ठीक 12:00 बजे इस पोटली को गाड़ आना। पीछे मुड़कर मत देखना। यह एक साधारण सा टोटका था। गांव देहात में अक्सर लोग नजर उतारने या छोटी-मोटी बला डालने के लिए ऐसा करते थे। लेकिन रामेश्वर को यह नहीं पता था कि जिस जमीन [संगीत] पर वो यह टोटका करने जा रहा था वो जमीन सोई नहीं थी बल्कि जागने का इंतजार कर रही थी। बरगद का पेड़ अंधेरे में किसी दैत्याकार राक्षस जैसा खड़ा था। उसकी जटाएं ऐसे लटक रही थी जैसे किसी डायन के खुले बाल। रामेश्वर ने कुदाल चलाई। मिट्टी सूखी और पथरीली थी। आवाज सन्नाटे को चीरती हुई दूर तक गई। रामेश्वर का दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। उसने गड्ढा खोदा और उसमें वो लाल पोटली डाल दी जिसमें मुन्ना के नाखून, बाल, थोड़ा सिंदूर और एक अजीब सा काला पत्थर था जो ओझा ने दिया था। जैसे ही उसने मिट्टी डाली, हवा का एक सर्द झोंका उसके चेहरे से टकराया। यह हवा ठंडी नहीं थी बल्कि इसमें सड़ी हुई मांस की गंध थी। रामेश्वर ने जल्दी से पैर पटके और घर की तरफ भाग गया। नियम था पीछे मुड़कर नहीं देखना। लेकिन इंसानी फितरत भय के आगे कमजोर होती है। जब उसे अपने पीछे भारी कदमों की आवाज सुनाई दी। जैसे कोई बहुत भारी चीज गिरी मिट्टी पर चल रही हो तो उसकी गर्दन अपने आप घूम गई। वहां कोई भी नहीं था। सिर्फ बरगद का पेड़ हवा में झूल रहा था। लेकिन उस पेड़ के नीचे जहां उसने टोटका गाड़ा था, वहां की मिट्टी उबल रही थी। जैसे जमीन के नीचे से कोई ऊपर आने की कोशिश कर रहा हो। रामेश्वर चीख नहीं पाया। वो जान बचाकर भागा। वो यह नहीं जानता था कि उसने अनजाने में एक रक्षासूत्र तोड़ दिया है। वहां कोई मामूली आत्मा नहीं बल्कि एक ब्रह्म पिशाच कैद था जिसे 50 साल पहले एक महान अघोरी ने कैद किया था। रामेश्वर के छोटे से टोटके ने उस कील को ढीला कर दिया था। अगली सुबह सूरज तो निकला लेकिन बैतालपुर में रोशनी नहीं हुई। एक अजीब सा धुंधलापन छाया रहा। मुन्ना की हालत में सुधार होने के बजाय उसका शरीर नीला पड़ने लगा। दोपहर होते-होते गांव के कुत्तों ने अजीब तरह से रोना शुरू कर दिया। वे आसमान की ओर मुंह करके नहीं बल्कि रामेश्वर के घर की दहलीज की ओर मुंह करके रो रहे थे। तभी गांव के प्रवेश द्वार पर एक आकृति दिखाई दी। वो कोई साधारण साधु नहीं था। उसका शरीर चिता की ताजी भस्म से सना हुआ था। गले में इंसानी हड्डियों की माला थी। उसके बाल जटाजट थे और आंखें। उसकी आंखें अंगारों जैसी लाल थी। उसके एक हाथ में त्रिशूल और दूसरे में खोपड़ी थी। यह अघोरी काल पात्र थे। श्मशान के राजा और तंत्र विद्या के महाज्ञाता। वे सीधे रामेश्वर के घर की ओर बढ़े। अघोरी ने रामेश्वर के घर के बाहर आकर अपनी भारी आवाज में ललकारा। रामेश्वर कांपता हुआ बाहर आया। महाराज अघोरी ने अपनी लाल आंखों से रामेश्वर को देखा। तूने वहां टोटका नहीं किया। तूने मेरे गुरु द्वारा बांधे गए पाताल यंत्र को खंडित कर दिया। तू अपने बेटे की बीमारी उतारने गया था लेकिन तूने महामारी को न्योता दे दिया है। रामेश्वर अघोरी के पैरों में गिर पड़ा। मुझे क्षमा कर दे बाबा। मैं अज्ञानी हूं। मेरे बेटे को बचा लीजिए। [हंसी] तेरा बेटा अब तेरा नहीं रहा। रामेश्वर। जिस क्षण तूने वो काला पत्थर वहां गाड़ा, उस ब्रह्म पिशाच ने तेरे बेटे के शरीर को अपना नया घर चुन लिया। वो टोटका एक चाबी थी और तेरा बेटा एक दरवाजा। रात होते-होते स्थिति भयावह हो गई। मुन्ना अब बिस्तर पर लेटा नहीं था बल्कि उसका शरीर अजीबोगरीब तरीके से मुड़ रहा था। उसकी आवाज वो छ साल के बच्चे की आवाज नहीं थी। वो किसी भारी कर्कश और प्राचीन आवाज में कुछ बुदबुदा रहा था। अधोरी काल पात्र ने रामेश्वर से कहा अगर तू अपने बेटे और इस गांव को बचाना चाहता है तो तुझे मेरे साथ शव साधना में बैठना होगा। जो गलती तूने की है उसका प्रायश्चित रक्त मांगता है। किसका रक्त? भय का। आज रात वो पिशाच पूरी तरह से इसके शरीर पर कब्जा करेगा। उससे पहले हमें उसे वापस उसी जगह पर खींचना होगा। घर के अंदर से एक जोर की दहाड़ सुनाई दी। मुन्ना हवा में तैर रहा था। उसकी आंखें पूरी तरह सफेद हो चुकी थी। अघोरी ने अपनी झोली से मुट्ठी भर भस्म निकाली और मंत्र पढ़कर मुन्ना की ओर फेंकी। ओम कालिकाय नमः। जैसे ही भस्म मुन्ना के शरीर से टकराई पिशाच चीखा। इसे इसकी जगह पर ले जाना होगा। जल्दी रामेश्वर ने अपने बेटे के जलते हुए शरीर को उठाया। वो अकल्पनीय रूप से भारी था। जैसे वो किसी बच्चे को नहीं पत्थर की चट्टान को उठा रखा हो। तिराहे पर पहुंचते-पहुंचते आधी रात हो चुकी थी। वहीं बरगद का पेड़ अब और भी विकराल लग रहा था। पेड़ के पत्ते हिल नहीं रहे थे। बावजूद इसके कि आंधी चल रही थी। अधोरी काल पात्र ने रामेश्वर को उसी जगह बैठाया जहां उसने टोटका गाड़ा था। अब जो भी हो जाए अपनी जगह से हिलना मत। अगर तेरा ध्यान टूटा तो यह पिशाच सबसे पहले तेरी आत्मा खाएगा। अघोरी ने अपने कपाल पात्र में मदिरा और अपना खुद का रक्त मिलाया। उसने एक घेरा बनाया। एक सुरक्षा चक्र साधना शुरू हुई। अघोरी ने मंत्र उच्चारण शुरू किया। यह मंत्र सामान्य नहीं थे। ऐ ह कंग चामुंडाय विच्छे शनिष्ए नमः भूतेश्वराय मम वश्यं कुरु कुरु स्वाहा जैसेजैसे मंत्रों की तीव्रता बढ़ी जमीन हिलने लगी रामेश्वर की गोद में लेटा मुन्ना छटपटाने लगा अचानक मुन्ना उठकर बैठ गया उसने रामेश्वर की गर्दन पकड़ ली मुन्ना की पकड़ लोहे लोहे जैसी थी। मुन्ना बोला लेकिन चेहरे पर मुस्कान शैतानी थी। पिताजी मुझे क्यों बांध रहे हो? मुझे आजाद होने दो। रामेश्वर का दम घुटने लगा। उसका पितृ प्रेम उसे कमजोर बना रहा था। बाबा ये मेरा बेटा है। वो तेरा बेटा नहीं है। अघोरी ने गरजते हुए कहा और अपने त्रिशूल को जमीन पर दे मारा। एक अमानवीय चीख गूंजी। मुन्ना के शरीर से काला धुआं निकलने लगा। वो धुआं हवा में इकट्ठा होकर एक आकार लेने लगा। एक विकृत लंबा और काला साया जिसकी आंखें अंगारों जैसी थी वो था ब्रह्म पिशाच उस पिशाच ने अघोरे की तरफ देखा कालपात्र तो फिर आ गया मेरे बंधन को इस मूर्ख ने खोला है। अब ये बलि मेरी है। अघोरी हंसा और वो हंसी मौत से भी ज्यादा ठंडी थी। मैंने तुझे 50 साल पहले भी कैद किया था और आज मैं तुझे भस्म करूंगा। पिशाच ने हवा में हाथ लहराया और एक अदृश्य शक्ति ने अघोरी [संगीत] को पीछे धकेल दिया। अघोरी गिरा लेकिन तुरंत संभल गया। उसने अपने कपाल से रक्त मिश्रित मदिरा उस साए पर फेंकी। साया जलने लगा लेकिन उसने पलटवार किया। उसने रामेश्वर के दिमाग पर कब्जा करना शुरू कर दिया। रामेश्वर को अब अघोरी अपना दुश्मन दिखने लगा। उसके दिमाग में आवाजें गूंजने लगी। यह अघोरी तेरे बेटे को मार डालेगा। इसे रोक, इसे मार दे। रामेश्वर की आंखों में पागलपन छा गया। उसने पास पड़ा एक बड़ा पत्थर उठाया और अघोरी के सिर की तरफ बढ़ा। रामेश्वर होश में आ। लेकिन रामेश्वर के ऊपर पिशाच का मायाजाल था। ठीक उसी पल जब रामेश्वर पत्थर मारने वाला था। अघोरी ने एक चरम कदम उठाया। उसने गंगाजल सीधे उस काले साए और रामेश्वर के ऊपर छिड़क दिया। यह तंत्र की सबसे खतरनाक क्रियाओं में से एक था। ओम अघोरेभ्यो अथघोरेभ्यो घोर घोर तरभ्य सर्वेभ्यो सर्वेभ्यो नमस्ते अस्तु रुद्र रूपभ्य एक प्रचंड विस्फोट हुआ। सफेद रोशनी से पूरा तराहा नहा गया। धूल और धुएं के छटने में घंटों लग गए। सुबह की पहली किरण जब बरगद के पेड़ पर पड़ी तो वहां का नजारा दिल दहला देने वाला था। बरगद का पेड़ बीच से फट चुका था और काला पड़ गया था। जैसे उस पर आकाश या बिजली गिरी हो। रामेश्वर जमीन पर बेहोश पड़ा था। उसके बगल में मुन्ना था। मुन्ना की सांसे चल रही थी। उसका बुखार उतर चुका था। वो सो रहा था। बिल्कुल शांत लेकिन अघोरी कालपात्र वहां नहीं थे जहां अघोरी बैठे थे वहां सिर्फ उनकी हड्डियों की माला और वो कपाल पड़ा था और कपाल के अंदर ताजी भस्म भरी हुई थी। गांव वालों ने रामेश्वर और मुन्ना को उठाया। सबको लगा कि चमत्कार हो गया। बला टल गई। अघोरी ने अपनी जान देकर बच्चे को बचा लिया। एक महीने बाद रामेश्वर और मुन्ना का जीवन सामान्य हो गया था। मुन्ना अब पूरी तरह स्वस्थ था। वो खेलता था, हंसता था। लेकिन रामेश्वर ने एक बात गौर की थी जो उसे रात को सोने नहीं देती थी। मुन्ना अब कभी-कभी संस्कृत के शब्द बोलता था। जो उसने कभी सीखे ही नहीं थे। एक रात रामेश्वर की नींद खुली। मुन्ना अपने बिस्तर पर नहीं था। रामेश्वर आंगन में गया। उसने देखा मुन्ना अंधेरे कोने में बैठा है। वो एक बिल्ली को पकड़े हुए था। रामेश्वर के पैरों तले जमीन खिसक गई। मुन्ना मुन्ना ने पीछे मुड़कर देखा। उसके चेहरे पर खून लगा था। उसने मुस्कुराते हुए कहा पिताजी बाबा कालपात्र ने पिशाच को तो भस्म कर दिया लेकिन उन्होंने यह नहीं बताया कि उस ऊर्जा को कहीं तो जाना था। मुन्ना की आंखें एक पल के लिए इंसान ही नहीं रही। वे अंगारों जैसी लाल हो गई। बिल्कुल अघोरी काल पात्र जैसी। रामेश्वर समझ गया उस रात तराहे पर सौदा हुआ था। पिशाच को नष्ट करने के लिए अघोरी को एक पात्र चाहिए था। अघोरी मरा नहीं था। उसने मुन्ना के अंदर प्रवेश किया था। एक साधारण टोटके ने पिशाच को तो भगा दिया लेकिन घर में एक महांत्रिक को बसा दिया था। हमें पूरा यकीन है दोस्तों कि आप लोगों को यह कहानी जरूर पसंद आई होगी। अगर आपके साथ भी कुछ ऐसे अनकहे किस्से हो चुके हैं तो प्लीज हमारे साथ शेयर करें। हम जरूर अपने चैनल पर उनको दिखाएंगे। हमारी ईमेल आईडी नीचे डिस्क्रिप्शन बॉक्स में दी गई है। तो प्लीज हमारे वीडियो और चैनल को शेयर एंड सब्सक्राइब करें और बने रहे हमारे साथ ऐसे ही अनकहे किस्से और कहानियां सुनने के लिए।
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