नमस्कार जय हिंद आप सभी प्यारे साथियों का स्वागत है परीक्षा वीर के ऑनलाइन मंच पर। जी हां शिक्षा के क्षेत्र में उभरता हमारा परीक्षा वीर का जो मंच है वह आपके लिए लगातार मैराथन क्लास लेकर आ रहा है यूपी डीएलडी फोर्थ सेमेस्टर विद्यार्थियों के लिए। आज सुबह 8:30 बजे मेरी है। यानी मैं आपको एसएसटी पढ़ाऊंगा। कल आपको इसी समय जो है क्लास है वो देखने को मिलेगी मैथ की और हमारी क्लास जो है वो आपको दोपहर 1:30 बजे देखने को मिलेगी। तो यह लास्ट टाइम है परीक्षा का। आप सभी क्लासेस जो है वो देखना ना भूलें। सभी क्लासेस ईमानदारी के साथ डिसिप्लिन के साथ जो है वो आपको देखनी है और परीक्षा की खोपड़ी में जो है वो छेद करना है मेरे भाई यहां पर सामाजिक अध्ययन की एसएसटी की महा मैराथन क्लास है और यह जो क्लासेस है हम किस तरीके से आपको कराएंगे सुनना ध्यान से इसके अंदर हम जैसे आज की जो क्लास रहेगी उसमें इतिहास को उठाया है इतिहास के जितने भी महत्वपूर्ण प्रश्न थे वह सब हम कवर करेंगे जितने भी महत्वपूर्ण प्रश्न थे वह सब कवर करेंगे करेंगे। जिन विद्यार्थियों को लगता है इतिहास से डर या जिनको लगता है इतिहास में क्या होगा? कहानी के माध्यम से ऐसी कहानी आपके दिमाग में सेट करूंगा मेरे भाई आपको परीक्षा में वहीं वहीं बातें जो है वो याद आएंगी। चलिए पहला प्रश्न आपके सामने स्क्रीन पर आ चुका है। 1857 की क्रांति के क्या कारण थे? देखो 1857 का जो विद्रोह हुआ था उसके पीछे अनेक कारण जो है वह उभर कर आते हैं। है ना? आपको मैं एक छोटी सी बात बताऊं। 1757 में एक युद्ध होता है और इस युद्ध का नाम था प्लासी का युद्ध। कौन सा युद्ध होता है? प्लासी का युद्ध और फिर इसके 100 साल बाद होती है 1857 की क्रांति। 100 साल बाद हुई थी 1800 क्रांति। 57 की तो 1857 की क्रांति यह जो हुई थी प्लासी के युद्ध से लेकर इस क्रांति तक अंग्रेजों ने ऐसीऐसी नीतियां लाई ऐसा ऐसा जो है वह साम्राज्य का विस्तार किया जिससे हमारे वाले लोगों को हमारे ही घर में रहने में दिक्कत होने लगी। तो इसके कारण यहां पर आपको बहुत से ऐसे कारण देखने को मिलेंगे। हमारे नाक में दम आ गया मेरे भाई। उसके करके हमने एक बड़ा जो है वो भारत का स्वतंत्रता संग्राम खड़ा कर दिया। इसके अंदर अनेक कारण आते हैं। इसमें सबसे पहले जो है वो हम पढ़ेंगे राजनीतिक कारण। राजनीतिक जो कारण है वह आपको देखने को मिलते हैं। इसके अलावा मेरे भाई आपको मैं समझाऊं तो आपको यहां पर आर्थिक कारण भी देखने को मिल सकते हैं। आर्थिक कारण भी देखिए लिखने का तरीका है मेरे भाई इसको आर्थिक कारण। आर्थिक के बाद यानी यहां पर आपको सामाजिक कारण भी देखने को मिलेगा। सामाजिक कारण के साथ-साथ अगर मैं बात बताऊं तो मेरे भाई आपको धार्मिक कारण भी देखने को मिलेगा। कौन सा कारण मिलेगा? धार्मिक। और अंतिम और महत्वपूर्ण जो कारण है वह है सैनिक कारण। या इसे हम बोल सकते हैं तात्कालिक कारण। यह सैनिक कारण भी एक बहुत इंपॉर्टेंट है। तात्कालिक कारण भी इंपॉर्टेंट है। चलिए सबसे पहले मेरे भाई हम यह बात समझते हैं कि राजनीतिक कारण जो वो क्या था? तो इसके अंदर एक वायसराय जिसका नाम था लॉर्ड डलहौजी। डलहौजी। इस डलहौजी ने क्या राजनीति के अंदर काम किए? तो पहली बात डलहौजी ने कु प्रशासन का आरोप लगा के अवध को हड़पा था। पहली बात यह याद रखनी है इसकी क्या काम किया कुप्रशासन यानी कु का मतलब होता है बुरा बुरा प्रशासन का आरोप लगा के कि अवध एक अच्छा शासन नहीं कर रहा है अच्छा प्रशासन नहीं चला रहा है उस पर कुप्रशासन का आरोप लगा के उसको हड़प लिया तो कुप्रशासन का आरोप जो है वो किस पे लगाया गया था आरोप जो है वो अवध पर लगाया गया अवध यूपी में है। 1857 के विद्रोह में सबसे ज्यादा सेनापति यूपी से थे। यूपी में भी कहां से? अवध से। चलिए पहला काम इसने किया यह दूसरा काम इसने पता है क्या किया इसने गोद निषेध प्रथा शुरू की कौन सी प्रथा शुरू की गोद निषेध कि कोई भी जो रानी है वो गोद लेकर आगे जो है वह संतान या अपना जो वंश है वो नहीं चला सकती जैसे पहले क्या होता था कि जो राजा होते थे ना वो युद्ध में मारे जाते थे तो वो रानी अकेली बची है पीछे तो रानी क्या करती थी अगर संतान ना होती तो किसी का बेटा गोद लेकर अपने वंश को चला देती थी कि मतलब राजा तो मर गया है अब आगे आगे यह वंश चलना भी जरूरी है। तो अंग्रेज यह जो लॉर्ड डलहौजी है इसने कहा कि अब कोई भी जो है वह संतान गोद नहीं लेगा। अच्छा एक जगह ऐसा हुआ था जिसका नाम था सतारा तो गोद निषेध के तहत उसको हड़प लिया था। गोद निषेध के तहत हड़प जो नीति अपनाई या हड़पने वाली जो रियासत थी हड़पने वाली प्रथम जो रियासत थी उसका नाम था सतारा। हड़पने वाली जो प्रथम रियासत है उसका नाम क्या हो जाएगा? सतारा। सितारा मेरे भाई कहां है? महाराष्ट्र में देखने को मिलता है। तो पहली बात इसने कुप्रशासन कु का मतलब होता है बुरा। बुरा प्रशासन का आरोप लगा के क्या है? अवध को हड़प लिया। दूसरी इसने शुरू की गोद निषेध प्रथा कि कोई भी आगे जो है संतान गोद लेकर अपना वंश जो नहीं चलाएगा। गोद निषेध के तहत हड़पे जाने वाली पहली रियासत कौन सी है? सतारा। सतारा कहां है? महाराष्ट्र में। और इसी के तहत इसमें एक अंग्रेज आता है जिसका नाम था लॉर्ड विलेजली। लॉर्ड वलेजली ने जो है शुरू की सहायक संधियां यानी अपने जो राजा थे उनके साथ जो है इन्होंने क्या मिला लिए? हाथ मिला लिए। क्या मिला लिए मेरे भाई? हाथ मिला लिए। हाथ मिला लिए। अब ये जब जैसे ही हाथ मिले तो जनता कहती एक तो हमारे कुछ ऊपर जो बहुत संकट था ऊपर से ये जो राजा लोग थे जिसकी हमें उम्मीद थी वह जाकर भी अंग्रेजों से हाथ मिला लिए हैं। अब क्या करें भाई? क्या करें हम? तो यह थे सारे राजनीतिक कारण। आर्थिक का मतलब होता है मेरे भाई पैसों की बात। आर्थिक कारण में आप जो है वह पढ़ते होते हो। किसकी बात? पैसों की बात जो यहां पर पढ़ते होते हो। पैसों की बात अध्ययन करते हैं। अब देखो हुआ क्या था? ईस्ट इंडिया कंपनी की मैं बात बताता हूं। इसकी स्थापना 1600 में होती है। ईस्ट इंडिया इंडिया कंपनी जो उसका उद्देश्य पता क्या था? ईस्ट इंडिया कंपनी का उद्देश्य यह था कि हम ज्यादा से ज्यादा जो है वो लगान वसूलेंगे भारत में। लगान का मतलब क्या होता है मेरे भाई? टैक्स। टैक्स जो है वो क्या है? अधिक कर देंगे। पहली बात इसका यह उद्देश्य था। दूसरा जो परंपरागत कुटीर उद्योग है, परंपरागत जो छोटे-मोटे उद्योग थे, इंडिया के जो लोग थे, उन्होंने घरों में जो छोटे-मोटे उद्योग कर रहे थे, उन उद्योगों को क्या कर दिया? अंग्रेजों ने नष्ट कर दिया। जिससे हमारा जीवन चलता था, जिससे हमारा परिवार चलता था। है ना? जीविका का जो साधन था। उन परंपरागत छोटे उद्योगों को जो है अंग्रेजों ने क्या कर दिया? खत्म कर दिया। तो कई तो यह कहते हैं कि क्रांति जो है उसके पीछे आर्थिक कारण थे कि अंग्रेजों ने इस प्रकार से शोषण किया कि लगान एक तो अधिक लेने लगे ऊपर से काम धंधा नहीं है। अरे भाई कमाए तो चलो लगान भर दें। अब काम धंधा ही नहीं है तो लगान कहां से भरेंगे? लगान जो है वो कहां से भरेंगे? तो इसको लेकर जो है यह माने जाते हैं क्या? आर्थिक कारण। बहुत सिंपल है। उसके बाद आएगा सामाजिक। अब चलो यह इतना हो गया। फिर भी हमने कंट्रोल किया। ऐसे कहते हैं कि इन्होंने अब हमारे समाज पर भी उंगली उठाना शुरू कर दिया। हमारे समाज में जो प्रथाएं चलती थी उनको भी रोकना शुरू कर दिया। जैसे आपको मैं उदाहरण के लिए बताता हूं। 1829 में भारत में किस पर रोक लगाई गई? सती प्रथा पर। सती प्रथा पर जो है वो क्या लगाई? रोक लगाई। रोक लगाई। एक अंग्रेज था जिसका नाम था लॉर्ड सॉरी विलियम वेंटिंग। विलियम वेंटिंग ने जो है सती प्रथा पर क्या लगाई? रोक। तो यह प्रश्न बन सकता है। सती प्रथा पर रोक कब लगी? 1829 में। 1829 में सती प्रथा पे रोक लगी। देखो अब यह हमारे जो प्रथाएं हैं जो संस्कृति है उनको भी नष्ट करने लगे। जैसे हमारी जो प्रथाएं हैं उनको भी क्या है ठेस पहुंचाने लगे। इसलिए हमने जो है वो क्या की थी? 1857 की क्रांति। तो एक कारण यह भी माना जाता है। एक बार फिर देखो राजनीतिक में दो बातें याद करना। कुप्रशासन का आरोप लगा के यानी प्रशासन शासन की बातें आएंगी। वो राजनीतिक में कुप्रशासन का आरोप लगा के किसको हड़पा? मेरे भाई अवध को बोध निषेध के तहत हड़पने वाली पहली रियासत सतारा। सतारा सतारा आर्थिक में ईस्ट इंडिया कंपनी का उद्देश्य था कि लगान और टैक्स जो वो अधिक लेंगे परंपरागत उद्योगों को क्या कर दिया नष्ट सामाजिक की बात करेंगे तो 1829 में सती प्रथा पर क्या लगा दी रोक धार्मिक कारण की यदि मेरे भाई हम बात करें तो भाई साहब 20 साल बाद एक एक्ट आया करता था अंग्रेजों के यहां से जिसे बोलते हैं चार्टर एक्ट ये चार्टर एक्ट जो है था 1813 का कौन सा चार्टर एक्ट था 1800 इससे पहले 1893 में आया था। 1813 चार्टर एक्ट में अंग्रेजों ने क्या किया? जो ईसाई मिशनरी थे ना ईसाई मिशनरियों को भारत में धर्म प्रचार करने की छूट दी। ईसाई मिशनरियों को भारत में को भारत में किसकी छूट दी गई? धर्म प्रचार की। धर्म प्रचार की क्या दी मेरे भाई? छूट। ईसाई मिशनरियों को भारत में धर्म प्रचार की क्या दी गई? छूट दी गई। यह एक्ट तो कौन सा था? 1813 का जो है वह चार्टर एक्ट था। चार्टर एक्ट जो है वह था। धार्मिक कारण में यह बातें याद रखनी है। यानी ईसाई जो लोग थे ना उनको कहा कि आप भारत में अपने धर्म का प्रचार कर सकते हो और भारतीयों को इस ईसाई जो है वो बनाना शुरू कर दो। तब एक कारण यह माना जाता है। सैनिक कारण के अंदर अगर माने तो अंग्रेज और हमारे अंदर जो बहुत ज्यादा भेदभाव जो है वो हुआ करता था। पहले जो है अनुपात चला करता था 5 एक का। यानी यह जो हो गए अंग्रेज और यह हो गए इंडियन। अब सुनना ध्यान से। एक जैसे हमें पहली बात तो हवलदार से ऊंची पोस्ट जो वो नहीं देते थे और उनका जो छोटा सा छोटा सेनापति होता है ना वो अपना हवलदार उसको क्या मारता था? सैल्यूट मारता था। तब क्या किया? तब यह किया। अच्छा फिर कोई मान लो युद्ध वगैरह में जाना है तो हमारे वाले तो पांच जाएंगे और अंग्रेजों का कितना जाएगा? एक। यानी मरने की बारी आई तो पांच हमारे मरेंगे और एक अंग्रेजों का मरेगा। अच्छा उसके बाद उसके बाद यह कि एक अंग्रेज को जितनी तनख्वाह मिलती थी हमारे भारतीयों को पांच लोगों को इतनी तनख्वाह जो मिलती थी जैसे मान लो एक अंग्रेज को ₹100 मिल रहे हैं तो यहां भारतीयों में 2020 मिला करते थे तनख्वाह में भी पांच एक का अनुपात चलता था लेकिन हम फिर भी सबर की घूंट पीते रहे पीते रहे लेकिन मेरे भाई जो लास्ट आप कारण देखोगे ना उसको देखकर हैरान हो जाओगे कि इन्होंने ऐसा जो किया हमारे साथ गुरु जी अगर हम होते यहां पर उड़ा देते इनको तो उस समय उन लोगों ने इनको उड़ा उड़ा दिया था। चाहे आज हमें गुस्सा लेकिन हमारी क्रांति असफल रही थी। इसके पीछे बहुत से कारण थे। ठीक है? देखो यहां पर है बैरकपुर छावनी। बंगाल के अंदर पश्चिम बंगाल में कौन सी छावनी है? बैरकपुर छावनी। यहां बैरकपुर छावनी की घटना है। बैरकपुर छावणी घटना है। यहां पर यूपी यूपी का एक गांव है बलिया। और बलिया गांव का एक व्यक्ति जिसका नाम है मंगल पांडे। भाई साहब पूरी की पूरी कहानी जो है मैं आपको दिमाग में सेट करवा दूंगा। उत्तर करोगे ना मजा आ जाएगा आपको। जैसे क्लास में पढ़ते हैं ना वैसे चीजें क्लियर हो जाएंगी आपके। मंगल पांडे की यदि बात करते हैं। सुनना मेरे भाई ध्यान से। मंगल पांडे की यदि हम बात करते हैं तो मंगल पांडे का सिलेक्शन हो गया। और मंगल पांडे का सिलेक्शन कहां हुआ? बैरकपुर छावनी में। मंगल पांडे यहां पर रह रहा था और जो है अच्छी तरह से एक्सरसाइज वगैरह जो है वह कर रहा था। जो भी इनको ड्यूटीज के अंदर जो है ट्रेनिंग जो है मिलती थी वह ट्रेनिंग यह कर रहा था। धीरे-धीरे टाइम बीतता गया। टाइम बीतता गया और यहां पर पहले एक जो है बंदूक चलती थी जिसका नाम था ब्राउन बेस। अब ब्राउन बेस में क्या था? कारतूस जो थे वो गत्ते वाले में गत्ते में डले हुए थे। तो बारिश वगैरह हुआ करती थी ना तो ब्राउन बेस जो है बंदूक वो क्या हो जाती थी? इसके जो कारतूस है वो खराब हो जाया करते थे। फिर चलते नहीं थे। चलते नहीं थे। इन्होंने दिसंबर 1856 में इसको बदल दिया। और एक नई बंदूक लेकर आए जिसका नाम था एनफील्ड राइफल। कौन सा क्या नाम था? एनफील्ड राइफल। एनफील्ड राइफल की अगर बात करते हैं मेरे भाई तो इस एनफील्ड राइफल में गाय और सूअर की चर्बी लगी थी। गाय और सूअर की चर्बी के यह कारतूस थे। चर्बी के क्या थे? कारतूस। चर्बी के क्या थे? कारतूस थे। यानी अब चाहे बारिश आए, चाहे कुछ भी हो। अब खराब नहीं होगा। अंदर जो माल डला है, जो सामान डला है, वह खराब नहीं होगा। लेकिन अब कारतूस को क्या था ऐसे मुंह से छीलकर उसको डालना होता था और फिर चलाना होता था। अब अब जैसे ही यहां सुबह ये सारे लोग इकट्ठे हुए और ये आपस में इनमें बात चल गई कि आपको पता है हमारे पास एक नई बंदूक आई है जिसमें कारतूस खराब नहीं होते पानी में भी। मंगल पांडे ने पूछ लिया होगा भाई उसमें ऐसा क्या है? कहा उसमें गाय और सूअर की चर्बी लगी है। तो मंगल पांडे के साथ ही मुस्लिम कोई भाई थे। मंगल पांडे को मंगल पांडे ने उनको भी बात बताई कि भाई ऐसीऐसी कहानी हो गई है। अब गाय से तो हिंदू प्रभावित थे और सूअर से मुस्लिम प्रभावित थे। तो दोनों ही बातों को ले बात को जो लेकर है वो यहां पर क्या होता है? विद्रोह हो जाता है। यहां पर एक व्यक्ति जिसका नाम था रॉबर्ट हुक वो मेन यहां लीडर था। मेन लीडर था और मंगल पांडे को सबसे पहले बोला गया कि यह ले मंगल पांडे चला। मंगल पांडे यहां दो थे। एक एक का नाम था बाघ और एक का नाम था हयुषन। यह दो लोग थे और यहां पर यह बोलते हैं मंगल पांडे को कि चलाओ गोली। तो मंगल पांडे कहता है कि साहब जी यह मैं मुंह में नहीं लूंगा। नहीं यह गोली जो है वो आपको चलानी ही पड़ेगी। और मंगल पांडे को जब ज्यादा परेशान किया तो मंगल पांडे ने वोकार तो सीने और डाले और उन बाघ और हसन को दोनों को क्या यहां उड़ा दिया। जैसे ही मंगल पांडे ने उनको उड़ाया तो यहां पर एक व्यक्ति जिसका नाम है रॉबर्ट हुक। रॉबर्ट हुक ने आदेश दिया मंगल पांडे को कैद कर लिया जाए और मंगल पांडे को यहां पर क्या कर लिया जाता है? कैद और मंगल पांडे को कैद करके जो है वो फांसी दे दी जाती है। याद रखना बहुत इंपॉर्टेंट है। अब महीना कौन सा चल रहा है? 18 अप्रैल सॉरी आठ का अप्रैल का चल रहा है। तो 8 अप्रैल 1857 के अंदर जो है इसे क्या दी गई? फांसी दी गई। मंगल पांडा मंगल पांडे जो है आई एम सॉरी मंगल पांडे जो है वह ऐसा पहला क्रांतिकारी था जिसको फांसी दी गई थी। 1857 के अंदर पहला क्रांतिकारी जिसे फांसी दी गई थी। है ना? क्रांति में प्रथम क्रांतिकारी था जिसको फांसी दी गई थी। प्रथम क्रांतिकारी था यह। क्रांतिकारी था जिसको क्या दी गई थी? फांसी दी गई थी। पहली बात तो याद रखना। प्रथम क्रांतिकारी है जिसे क्या दी गई थी? फांसी। दूसरी बात। दूसरी बात मंगल पांडे की अगर हम बात करें तो मंगल पांडे जो है मंगल पांडे की फांसी के साथ ही फांसी के साथ ही के साथ 1857 का वॉर जो है शुरू हुआ साथ ही 1857 की जो क्रांति है क्रांति है वो क्या हो गई शुरू और यह शुरू जो है वो यहां घटना जो है बैरकपुर से हुई लेकिन क्रांति में जो शुरू होने का पहला जो केंद्र माना गया है पहला जो केंद्र माना गया है वह माना गया मेरठ को मेरठ में क्रांति यानी मेरठ कहां यूपी क्योंकि यह यूपी का था तो यह खबर जो है यूपी में पहुंची कि इस प्रकार से मंगल पांडे को फांसी दे दी गई है। मेरठ को जो क्रांति शुरू होती है वह 10 मई 1857 को हो जाती है। याद रखना तो बैरकपुर छावनी की यह घटना जो है यह सैनिक कारण के अंदर माना जाता है। समझ में आ गया मेरे भाई? बहुत ही बढ़िया लाजवाब। एक बार जितने भी साथी देख रहे हो सेशन को लाइक कर दीजिएगा अगर आपको क्लास अच्छी लग रही है मेरे भाई थोड़ा एक मुझे भी मोटिवेशन मिलेगा और बहुत शानदार तरीके से चीजें याद करवा दूंगा मैं आपको बस अंत तक बने रहिएगा पहले राजनीतिक कारण में याद रखो लॉर्ड डलहौजी ने व्यक्तिगत सिद्धांत से व्यक्तिगत सिद्धांत से कुप्रशासन का आरोप लगाकर अवध को हड़प लिया और गोद निषेध के तहत यानी गोद के मतलब ऐसे याद रखना जैसे कोई सितारा पैदा नहीं हुआ सितारा जो है वो पैदा सितारा बोलते हैं ना अपने बच्चे को कोई स्टार यानी सितारा स्टार वो पैदा हुआ नहीं तो सितारा को इसने क्या हड़प लिया। सतारा कहां है? महाराष्ट्र में। सामाजिक में सती प्रथा पर रोक लगा दी। आर्थिक में पैसों की दृष्टि से हमें क्या कर दिया? तंग। ईस्ट इंडिया कंपनी का उद्देश्य था टैक्स ज्यादा लेंगे और परंपरागत उद्योगों को क्या करेंगे? नष्ट करेंगे। धार्मिक में 1813 का जो चार्टर एक्ट है उसने ईसाई मिशनरियों को भारत में धर्म प्रचार करने की छूट दी। और सैनिक कारण मैंने आपको बता दिया कि मंगल पांडे ने एनफील्ड राइफल का क्या किया? विरोध किया। क्योंकि इसमें गाय और सूअर के कारतूस लगे थे। और मंगल पांडे को जो है रॉबर्ट हुक ने कैद करवा के 8 अप्रैल 1857 को फांसी दी। 1857 की क्रांति में पहला क्रांतिकारी था जिसको फांसी दी गई थी। यानी इसकी फांसी के साथ ही क्रांति शुरू हो जाती है। क्रांति शुरू होने का केंद्र मेरठ माना जाता है। 10 मई 1857 को यहां पर क्रांति जो है वह शुरू हो जाती है। शुरू हो जाती है। ठीक है? ओके। अब मुझे आप साथ-साथ मेरे भाई यह बताते चलेंगे। एक-एक टॉपिक पढ़ेंगे और यस करके जवाब देते चलोगे। हां 29 मार्च को बिल्कुल 29 मार्च की ये घटना है। बैरकपुर छावनी वाली जो घटना है वो 29 मार्च 1857 की है। ठीक? ओके शाबाश। यह प्रश्न अब हम करके देखते हैं। ये 1857 की क्रांति के जो है वो कारण क्या थे? अब देखो करने में कितना आसान होगा यह प्रश्न। आपको परीक्षा में कैसे लिखना है। मैंने तो एक दो एक्स्ट्रा ही कारण लिखाए हैं। अगर आप इतना भी लिखोगे तो भी एग्जामिनर प्रश्न है आपसे। देखो क्या लिखा है मेरे भाई सुनना ध्यान से आराम से सुनना अब ध्यान से धीरे-धीरे पढूंगा इसके कई कारण जो हमारे सामने आते हैं जिसमें पहला राज्यों को हड़पने की नीति लॉर्ड डलहौजी याद आ रहा है ना द्वारा बनाई गई बताओ कौन सा राज्य हड़पा गया था तो आप कहोगे गुरु जी याद है अभी तो आपने पढ़ाया था अवध को सबसे पहले हड़पा इस नीति के अनुसार संतानहीन भारतीय राजाओं पर राज्य का उत्तराधिकारी निषेध तथा गोद निषेध नियम जो है वह लागू करने और उनको राज्य में हड़प लिया। बताओ गोध निषेध के तहत हड़पे जाने वाली पहली रियासत कौन सी थी? चतारा। यानी इसने क्या किया? राज्यों को हड़पना शुरू कर दिया। रियासतों को हड़पना शुरू कर दिया। कौध निषेध की बात आए तो हड़प लिया। कुप्रशासन की बात आए तो हड़प लिया। इस प्रकार के यह काम करने लगा था लॉर्ड डलहौजी। तो पहला कारण यह है राजनीतिक कारण। दूसरा अंग्रेजों ने भारतीय सैनिकों को जो कारतूस दिए थे उनमें गाय और सूअर की चर्बी किसकी गाय और सूअर की चर्बी मिली। इसके कारण हिंदू व मुसलमान सैनिक ने इसका विरोध किया था। यह बात भी हमने पढ़ ली। वेरी सिंपल बात है। आगे 1813 का चार्टर एक्ट था। उसमें ईसाई धर्म का प्रसार अंग्रेजों ने भारतीय सैनिकों को ईसाई बनाने के लिए प्रेरित किया। यानी वह धर्म का प्रचार करने लगे थे। और भारतीयों को क्या बना रहे थे? ईसाई। ईसाई मिशनरी के अंदर जो है ईसाई धर्म में जो है मेरे भाई वो कन्वर्ट कर रहे थे। सर बहुत अच्छे समझ में आ रहा है। अरे वाह भाई वाह बहुत बढ़िया। फिर तो और बेहतर कराएंगे और बेहतर कराने का प्रयास करेंगे। अगला प्रश्न अगले प्रश्न में और बेहतर से जो है वो हम आपको बातें बताएंगे। तो यह देखो यहां पर तीन लिखे हैं मेरे भाई। आप सामाजिक लिख दो। आप ईस्ट इंडिया कंपनी को लिख दो कि उसका उद्देश्य था लगान अधिक। तो मैं कहता हूं एग्जामिनर आपके सामने कहेगा कि भाई साहब सीखा कहां से है? आपने यह वो यही बात आपको कहेगा सीखा कहां से है? इसलिए मैं आपको कह रहा हूं अच्छे से यह कवर कर लेना। ओके सर चलिए अगला प्रश्न देखो मेरे भाई। 1857 ईस्वी की क्रांति की असफलता के जो कारण है वह क्या था? इसमें क्रांति के जो है वह असफल होने के कारण काफी माने जाते हैं। इसमें हम एक तरह से यह कह दें कि नेतृत्व सही ना होना क्रांति का। क्रांति का जो नेतृत्व करता है, नेतृत्व करता एक तो वह कम पढ़ा लिखा और एक सही ढंग से जो है उसे अपने या तो निर्णय बोल दो या जो भी है कि उसकी एज भी ज्यादा हो गई थी। तब करके वह निर्णय सही नहीं ले पा रहा था। दूसरा समय से पहले शुरू हो जाना। सम्य एक बार मैं ना दो ही बताता हूं यहां बाद में क्योंकि ज्यादा इंपॉर्टेंट यह दो है असफलता के कारण सम्य से पूर्व शुरू होना। अब कोई कमेंट करके बताएगा कि क्रांति की तय तिथि क्या थी कि हम इस इस तारीख को जो है वह क्रांति शुरू करेंगे। लेकिन क्रांति जो है पहले ही शुरू हो जाती है 10 मई को। मैं आपको इतना हिंट और देता हूं। मई की लास्ट तारीख है। अब मुझे यह बताओ 29 मई थी। 30 मई थी या 31 मई थी या 28 मई थी? जल्दी से बताना। अच्छा नेतृत्वकर्ता की बात करें तो सुनना ध्यान से। दिल्ली का उस समय जो शासक था उसका नाम था बहादुर शाह जफर। बहादुर शाह जफर द्वितीय। यह जो बहादुर शाह जफर द्वितीय एक तो देखो इसकी उम्र बहुत ज्यादा हो चुकी थी। फिर एक तरह से यह बीमार ही रहने लग गया था। तो इसका एक सेनापति था जिसका नाम था बख्त खान। इसका सेनापति कौन था? वक्त खान तब अब बाहर जैसे यह मान लो दिल्ली का लाल किला है। यहां पर कौन रह रहा है? बहादुर शाह। यहां पर भाई साहब जैसे ही मेरठ में विद्रोह होता है। मेरठ में विद्रोह होते ही जनता पहुंच गई 11 मई को दिल्ली में। 11 मई को जनता कहां पहुंच गई? दिल्ली के अंदर। और इस लाल किले के आगे घेराबंदी कर दी जनता ने। जनता नारे लगा रही है बाहर। बहादुर शाह जफर जिंदाबाद। बहादुर शाह जफर जिंदाबाद। बहादुर शाह कह रहा है कौन है सुबह-सुबह से नारे लगा रहा है। तब वो वक्त कहां गया और देखा कि भाई साहब क्रांति हो चुकी है भारत में और और वह क्रांतिकारी बाहर आए खड़े हैं और वह यह बात कह रहे हैं कि बहादुर शाह आप एक बड़ा जो है हमारा नेतृत्व करो। आप सभी लोगों एक राजा हो और आप नेतृत्व कर सकते हो। अब बहादुर शाह उस वक्त खान को बोलता है कि यार आपको भी पता है कि मैं तो बीमार चल रहा हूं काफी दिनों से। इसके पास इसकी पत्नी खड़ी थी जिन्नत महल। तो जिन्नत महल को जो है वह बोला गया कि भाई अब क्या करें? दिनतम महल ने कहा कि कोई बात नहीं है आप कह दो कि नेतृत्व मैं कर रहा हूं संभाल हम लेंगे मैं और बख्त खान जो है वो संभाल लेंगे इन क्रांतिकारियों को आप बस नेतृत्व करो ऐसे ही बताते हैं फिर दिल्ली के जो शासक है बहादुर शाह ने यहां पर क्या किया दिल्ली के अंदर नेतृत्व किया याद रखना 1857 की क्रांति के समय मुगल बादशाह कौन था अगर प्रश्न आ जाए 1857 की क्रांति के समय मुगल बादशाह जो है मुगल बादशाह जो है वो कौन था तो आप बताओगे बहादुर शाह जफर द्वितीय जो है वह थे क्या थे? मुगल बादशाह थे। अब हुआ क्या? बहादुर शाह द्वितीय को भी दिल्ली से क्या कर लिया गया? कैद। निकलसन और हडसन दो अंग्रेज अधिकारी थे। वह इसको कैद कर कर कहां ले गए? रंगून। और बताते हैं रंगून के अंदर ही रंगून के अंदर ही इनकी क्या हो जाती है? मृत्यु। रंगून में ही बहादुर शाह की क्या होती है? मृत्यु। तो रंगून में ही बताते हैं इसको दफनाया गया था। लेकिन भाई साहब इसकी इच्छा थी। जैसे पहले जो मुगल राजा हुआ करते थे ना वो अपना स्थान बता दिया करते थे कि जैसे मेरी इच्छा यह है मुझे मरने के बाद यहां पर दफनाना जैसे बाबर है। बाबर ने कहा था कि मैं मर जाऊं तो मुझे काबुल में दफना लेकिन बाबर को शुरू में आरामबाग में दफनाया गया था आगरा के अंदर बाद में काबुल लेके जाया गया था। है ना? तो बाबर का मकबरा कहां पर है? बाबर का मकबरा काबुल में है। कहां पर है? काबुल में। ऐसे ही यह जो बहादुर शाह इसकी इच्छा थी कि बख्तियार काकी की दरगाह जो है ना हुमायूं के मकबरे के पास वहां पर मुझे जो है दफनाया जाए। लेकिन इसे कहां ले गए? रंगून। रंगून कहां पर है गुरु जी? रंगून है म्यांमार में। रंगून कहां हो जाएगा? म्यांमार। तो इसको म्यांमार में जो है दफनाया गया था। तब एक लाइन बोली जाती है इसके लिए कि हे जफर तू कितना बदनसीब है। दो गज जमीन ना मिली तुझे दफनाने के लिए। और उसके बाद बताते हैं जब जफर को कैद किया गया था तो जफर ने खाना मांगा था। इनके दोनों बेटे की गर्दन काट के थाली में परोस दी थी अंग्रेजों ने। इस प्रकार से यहां पर यह काम किया था। तो यहां पर यह नेतृत्व सही नहीं कर पा रहा था। यह जो है अभाव देखने को मिल रहा है। ऐसा एक ये केवल यही नहीं इसके अलावा जो और क्रांतिकारी के अलग-अलग स्थल देखने को मिलते हैं मेरे भाई वहां भी नेतृत्व सही ढंग से नहीं हो पा रहा था। इसीलिए आपको जो है यहां पर यह दुविधा देखने को मिली कि हमारी 1857 की ये जो क्रांति थी वो क्या हो गई थी? असफल हो गई थी। असफल हो गई थी। एक समय से पूर्व कमेंट करके बताओ। 31 मई 31 मई। अरे वाह भाई वाह। यानी तय तिथि 31 मई थी और यहां क्रांति हो गई शुरू कब? 10 मई को तो भाई साहब कहने का मतलब एक योजना नहीं बनी। योजनाबद्ध रूप से हमने काम नहीं किया। योजना के हिसाब से जो योजना बनाई थी उसके हिसाब से तो हमने काम ही नहीं किया। तो इसलिए क्रांति तो क्या होनी है? असफल होनी ही है। यह 1857 की असफल माने जाने जाते हैं। यह 1857 की क्रांति के असफल कारण जो माने जाते हैं। 2021 और 2019 में यह प्रश्न परीक्षा में पूछा गया है। चलिए अब इसको लिखेंगे कैसे गुरु जी? तो देखिए देखिए भाई साहब इसको हम कैसे लिखेंगे। बिल्कुल आपको जैसे-जैसे पढ़ोगे पता लगता चलेगा कि यहां कैसे लिखना है। 1857 की क्रांति के असफल होने के कारण निम्नलिखित थे। पहले ये लाइन तो लिखनी ही लिखनी है। उसके बाद नंबर एक लगा के लिखोगे। विद्रोहियों के पास कोई एक केंद्रीय और योग्य नेता नहीं था। नेतृत्व बिखरा हुआ था और नेताओं में सैनिक कुशलता की कमी थी। यानी सैनिक के पास स्किल नहीं थी कि किस तरह से लड़ना है। ना ही ज्यादा पढ़े लिखे थे क्योंकि उस समय शिक्षा कितनी बढ़ी थी भाई इतनी अब भारत का अगर साक्षरता की बात करूं तो आज भी भारत की साक्षरता 73% है 2011 की जनगणना के अनुसार देखें तो से यानी 100 में से 73% लोग ऐसे हैं जो पढ़े लिखे हैं। अच्छा पढ़े लिखे भी वो नहीं है जो इसमें इसमें वो काउंट नहीं होते जो कंप्लीटली पढ़े लिखे होते हैं। नहीं बस अक्सर का ज्ञान होना चाहिए। वो लोग इसके अंदर जो क्या होते हैं? काउंट होते हैं। नंबर एक पे विद्रोहियों के पास कोई एक केंद्रीय और योग्य नेता नहीं था। नेतृत्व जो बिखरा हुआ था और नेताओं में सैनिक कुशलता की कमी थी। विद्रोह पूरे भारत में नहीं फैला। यह मुख्य रूप से उत्तर भारत और मध्य भारत तक ही सीमित रहा था। उत्तर भारत और मध्य भारत तक ही यह विद्रोह जो है वह सीमित रहा था। पूरे भारत में जो है क्रांति नहीं हुई थी। तीन नंबर अंग्रेजों के पास प्रशिक्षित सेना थी। बेहतर हथियार थे और संचार यानी रेलवे टेलीग्राफ की उत उन्नत प्रणाली जो है वो अंग्रेजों के पास थी। हमारे पास ना तो प्रशिक्षित सेना थी ना बेहतर हथियार थे। हथियार भी क्या थे? नहीं थे बेहतर नॉर्मल जो हमारे पास हथियार थे। अब और ज्यादा से ज्यादा हमारे पास जो हथियार थे वह तलवार वगैरह ऐसे ऐसे वाले हथियार थे। अंग्रेजों के पास बंदूक थी। दूर से खड़ा हो के धैरधनी से मारा। वह पास आने नहीं देगा। चाहे तलवार हो चाहे आपके हाथ में कुछ भी हो। तो वह बात है कई भारतीय शासक जमींदार और शिक्षित वर्ग डर के कारण या अपने हितों के कारण विद्रोह में शामिल नहीं हुए। जैसे मान के चलो कुछ भारतीय जो शिक्षित थे वो वैसे नहीं हुए उनको लगा कि अंग्रेज हमें नौकरी से निकाल देंगे। इसके अलावा जो जमींदार थे जमींदार का मतलब क्या होता था? भूमि का टैक्स इकट्ठा किया करता था वो। भूमि का टैक्स इकट्ठा किया करता था। अब ये ऐसे नहीं बोले इनको पता है कि अंग्रेज हमें जो तनख्वाह अच्छी दे रहे हैं। तो भाई साहब मर तो कौन गया जो नीचे वर्ग का निम्न वर्ग का जो लोग थे वह मर गए थे इसके अंदर बल्कि अंग्रेजों का साथ और दिया था इन्होंने तो अंग्रेजों का जो है वो क्या दिया था जमींदार हो गए शिक्षित लोग हो गए इन्होंने अंग्रेजों का जो है वो क्या दिया था साथ दिया था तो यह असफलता अब ऐसे काम होने लग जाएंगे तो भाई साहब क्रांति तो क्या होगी असफल ही होगी क्रांति तो क्या होगी मेरे भाई असफल ही देखने को मिलेगी हां बहुत बढ़िया चलिए शाबाश यह बात जो है वो आप याद रखोगे सभी मेरे साथी ठीक है सर यह प्रश्न हमारा क्लियर हो गया शाबाश अब आपसे प्रश्न पूछा है 1857 ईस्वी की क्रांति में स्वतंत्रता प्राप्त हेतु क्या प्रयास किए गए थे यानी क्रांति को जीतने के लिए यह प्रश्न 2020 और 18 में आया हुआ है 2020 और 18 में यह प्रश्न आया हुआ है इस प्रश्न को मैं आपको सरल भाषा में जो है वो समझाता हूं एक बार इधर देख लो आप हां देखो 1857 की क्रांति के बाद सैयद अहमद बरेलवी ने उत्तर उत्तर पश्चिमी कवायली प्रदेशों में सियाना का स्वतंत्रता आंदोलन का मुख्य केंद्र बना लिया था। यह प्रश्न इंपॉर्टेंट है। याद रखना ऑब्जेक्टिव प्रश्न के अंदर भी यह प्रश्न जो है वो आपको देखने को मिलता है। सिंपल सा प्रश्न है। सुनना ध्यान से। 1857 की क्रांति में स्वतंत्रता प्राप्त हेतु क्या प्रयास किए गए थे? तो क्रांति के बाद क्या नाम है? सैयद अहमद बरेलवी। यह नाम याद रखना। एक बार और बोलो। सर सैयद अहमद बरेलवी। सैयद अहमद बरेलवी ने उत्तर पश्चिमी कवायली कवायली प्रदेशों में सियाना को स्वतंत्रता आंदोलन का मुख्य केंद्र बनाया था। किसको बताया था? सियाना को। चलिए पहली बात दूसरा बिहार के छोटा नागपुर क्षेत्र में छोटा नागपुर क्षेत्र कहां पर है? बिहार। बिहार के छोटा नागपुर क्षेत्र में 1890 के दशक में मुंडाओं का विद्रोह हुआ। जिसका नेतृत्व बिरसा मुंडा ने किया। यह प्रश्न भी बहुत इंपॉर्टेंट है। बहुत ही बहुत ही बहुत ही इंपॉर्टेंट है। बिरसा मुंडा याद कर लेना। बिहार के छोटा नागपुर क्षेत्र में सन 1890 में 1890 के दशक में मुंडों का विद्रोह किसने किया था? बिरसा मुंडा ने। वैकल्पिक प्रश्न भी यह देखने को मिलता है। याद कर लो भाई। बहुत इंपॉर्टेंट है। तीन नंबर बात याद करोगे। महाराष्ट्र में सन 1879 में वासुदेव बलवंत बुड़के ने स्वतंत्रता प्राप्ति के लिए सहशस्त्र आंदोलन किया था। सहशस्त्र विद्रोह किया था। कहां पर? महाराष्ट्र में। तो महाराष्ट्र में किसने किया? एक बार मेरे साथ बोलना नाम। वासुदेव वासुदेव बलवंत। वासुदेव बलवंत बुड़के। वासुदेव बलवंत बुड़के जो नाम है वो याद रखोगे। वासुदेव बलवंत बुड़के जो नाम है वह आप याद कर लोगे भाई। हां हां जिसके लिए मुंडा को फांसी दी गई थी। बिल्कुल इसके बाद मिथिलेश हमारे साथ जुड़ चुके हैं। खामोशी और पायल है। अर्जु अर्जु राव है। वेरी गुड बबलू प्रियंका देवी शबनम। बहुत बढ़िया। सभी साथी जो है लाइव जुड़ जाइए। सर आप बहुत मस्त पढ़ाते हैं। शायद सीधे याद हो जाता है। परीक्षा वीर पी वाई बिल्कुल बिल्कुल भाई साहब धन्यवाद। धन्यवाद आपका बहुत-बहुत आभार। चलिए रिहाना ओके ओके ओके चले आगे। गुड मॉर्निंग भाई। गुड मॉर्निंग नमस्कार। सत श्री अकाल। राम-राम। राधे-राधे। सभी को नमस्कार। यह प्रश्न सिंपल सा है। अपने को समझ में आ गया। सिंपल सी याद रखना यह वाली बात। बिहार के छोटा क्षेत्र छोटा नागपुर क्षेत्र में सन 1890 में मुंडाओं का नेतृत्व बिरसा मुंडा क्या याद रखोगे बिरसा मुंडा बिरसा मुंडा और यहां महाराष्ट्र में वासुदेव बलवंत बुड़के वासुदेव बलवंत बुड़के चार नंबर में याद रखोगे सन 1839 में सतारा में नरसिंह दत्तात्रेय नरसिंह दत्तात्रेय पेतकर ने सैनिकों को संगठित कर संगठित कर बादामी बादामी यानी यानी चालुक्यों की राजधानी होती थी ना बतापी या बादामी ये उसकी बात कर रहा है। चालुक्यों की स्थापना जो की थी वो पुलीकेशन ने की थी। किसने की थी? पुलिकेशन ने। और यहां लिखा है सन 1839 में सतारा सतारा महाराष्ट्र में है। सतारा में नरसिंह दत्तात्रेय पेतक ने सैनिकों को संगठित कर बादामी किले पर अधिकार कर लिया था। लेकिन अंग्रेजों ने यह विद्रोह भी दबा दिया था। अंग्रेजों ने यह विद्रोह भी अपने अंडर में कर लिया था और ज्यादा फड़कने नहीं दिया। नहीं दिया। अरे भाई साहब ब्रह्म समाज की अगर बात करते हैं तो 19वीं शताब्दी को आप याद रखोगे ये याद कर लेना 19वीं शताब्दी का एक भारतीय सामाजिक धार्मिक सुधार आंदोलन था जिसकी स्थापना राजा राममोहन राय ने कीसने की राजा राममोहन राय ने 1828 में 1828 में कहां पर की थी कोलकाता कोलकाता जिसे हम कोलकाता बोलते हैं आज 1828 में कोलकाता में की और इसी के प्रयास से इसी समाज के प्रयास से सती प्रथा पर क्या लगाई गई मेरे भाई? रोक लगाई गई थी। रोक लगाई गई थी। राजा राममोहन राय बहुत बढ़िया। सिंपल सी बात है। तो ब्रह्म समाज की याद रखना। स्थापना राजा राममोहन राय ने 1828 में कोलकाता में की। राजा राममोहन राय ने 1828 में कोलकाता में की। 1 मिनट का टाइम है। जल्दी से ये पढ़ो। जल्दी से पढ़ो। ब्रह्म समाज वाली लाइन। जितना काम कहो ना मेरे भाई उतना हाथों हाथ कर लिया करो। फायदा बहुत मिलेगा आपको। चलिए ब्रह्म समाज की सामाजिक व धार्मिक उपलब्धियों का क्या करना है? वर्णन। बहुत ही अच्छा प्रश्न है। यह प्रश्न 2017 और 18 में पूछा गया है। सामाजिक और धार्मिक जैसे देखो भाई इन्होंने इतना प्रयास किया। इसमें राजा राममोहन राय ने इतना प्रयास किया। जैसे ये सती प्रथा जैसी कुप्रथा थी। सती प्रथा क्या थी? जैसे कोई व्यक्ति कोई आदमी जो है वह मर जाया करता था शादीशुदा उसके बाद उसी चिता में उसकी पत्नी को जिंदा जला दिया जाता था। 16 श्रृंगार के साथ उसकी चिता पर उसको ऐसे बिठा दिया जाता था। सोच के देखो मेरे भाई क्या दुविधा रही होगी एक जिंदा स्त्री को जो है वो जला देना। अगर ये जो व्यक्ति मर गया जो अपना जीवन जो है वो ले गया तो उसके साथ किसी और व्यक्ति को क्यों मारा जाए? तो वह चीज तो अब अगर हम इन उपलब्धियों की बात करते हैं ब्रह्म समाज की तो सुनना यह पहले तो याद रखना अकेश्वर बाद की ओर अग्रसर है। अकेश्वर यानी एक ही ईश्वर को मानते हैं। नास्तिक नहीं है यह लोग यह एक ईश्वर को मानते हैं। एक ईश्वर को मानते हैं। नास्तिक वह होता है जो किसी को भी नहीं मानता। वो कहता है ईश्वर कोई देखो जैसे मान के चलो यहां पर मैं कहता हूं 1000 ईश्वर है। कोई कहता है कि नहीं ईश्वर एक है। तो यह तो आस्तिक हो गए ना। आस्तिक हो गए। नास्तिक वह होता है जो कहता है कि ईश्वर है ही नहीं जीरो है तो वह नास्तिक होता है। तो धार्मिक उपलब्धियों की बात करें तो अकेेश्वरवाद और मूर्ति पूजा का विरोध इन्होंने जो वो किया था। परम समाज ने परम ईश्वर में विश्वास और मूर्ति पूजा में अनुष्ठानों में बहु द्वेदवाद में यानी बहु देवता नहीं है। एक ही है का खंडन किया है। इनको इसने स्वीकार नहीं किया है। जिससे हिंदू धर्म को एक तार्किक और सार्वभौमिक आधार जो है वह मिला था। सार्वभौमिक आधार जो है वह मिला। वेदों और उपनिषदों पर जोर दिया इन्होंने। इन पर दिया वेदों और उपनिषदों का ज्ञान लो। इनमें इन इसने वेदों और उपनिषदों की शिक्षाओं को आधार बनाया और उनके मूल सिद्धांतों को जन-जन तक यानी जनता तक पहुंचाया जिससे धार्मिक अंधविश्वास को चुनौती मिली। धार्मिक जो अंधविश्वास होता है उसको क्या मिली? चुनौती मिली। यहां पर यह बात याद रखना। तो, यह इनकी जो आपको क्या देखने को मिलती है? उपलब्धियां देखने को मिलती है। सामाजिक उपलब्धियों में अगर हम बात करेंगे यह तो हो गई धार्मिक उपलब्धियां दो बात एक ईश्वर एक को माना है और वेदों और उपनिषदों के ज्ञान को जो वो बढ़ावा दिया है। ठीक है? यह दो बातें फिर सामाजिक उपलब्धियों की अगर बात करेंगे तो भाई साहब मैंने आपको अभी बताया कि सती प्रथा जैसा ये सामाजिक कारण ही था। सामाजिक कारण ही था कि सती प्रथा को जो वो रोकना उस सती प्रथा का उन्मूलन ब्रह्म समाज ने सती प्रथा के खिलाफ जोरदार अभियान चलाए थे। जिसके परिणाम स्वरूप बोलो कब 1829 में सती प्रथा को जो है वो क्या करना पड़ा बंद किसने किया था इस पर जो रोक है वो विलियम वेंटिंग ने लगाई थी विलियम विलियम वेंटिंग विलियम वेंटिंग ने जो है वो क्या लगाई थी रोक लगाई थी विलियम वेंटिंग ने जो है वो क्या लगाई थी रोक लगाई थी महिला सशक्तिकरण का काम किया यानी महिलाओं को आगे बढ़ाओ महिलाओं की शिक्षा उनके अधिकारों और विधवा पुनर्विवाह का समर्थन किया जाए जिससे समाज में लैंगिक समानता को बढ़ावा मिलेगा। लैंगिक समानता का मतलब यहां पर यह है कि चाहे पुरुष हो चाहे महिला हो उन दोनों को समान रूप से जो है वो क्या मिले? बढ़ावा मिले। आज भी आप कई जगह जाओगे तो पढ़ाते तो सब है लड़कियों को लेकिन 12वीं के बाद उन्हें घर बैठा देते हैं और लड़कों को बाहर भेज देते हैं पढ़ने के लिए। ऐसा आपको देखने को मिलता है। और अगर बात करें विधवा पुनर्विवाह जब विधवा पुनर्विवाह की बात आए तब भी हमारे समाज में आज भी बहुत सी जगह ऐसी है जहां पर विधवा पुनर्विवाह स्वीकार नहीं किया जाता है। जिससे समाज में क्या देखने को मिलता है? अलैगिकवाद देखने को मिलता है। तो इस समाज ने इसको बढ़ावा दिया। महिला सशक्तिकरण को कहा कि विधवा पुनर्विवाह भी करो। जो महिला जो है कुंवारी हो गई है कुंवारी मतलब कुंवारी क्या जो महिला विधवा हो गई है विधवा हो गई है तो उसके लिए आगे जो वो क्या किए जाए ऐसे प्रयास किए जाए जिससे उसका जीवन आगे बेहतर सही ढंग से चल सके जिससे समाज में लैंगिक समानता को क्या मिलता है बढ़ावा मिलता है यह सामाजिक उपलब्धियां है ब्रह्म समाज की यह क्या देखने को मिलती है मेरे भाई सामाजिक उपलब्धियां जो है वो देखने को मिलती है अगला प्रश्न ब्रह्म समाज के सिद्धांतों को जो है वह बताना है तो ब्रह्म समाज के यहां पर लिखे ही हुए हैं। मेरे भाई रीड करो इसको। पढ़ो सारे के सारे अच्छी तरीके से पढ़ो। ब्रह्म समाज के सिद्धांतों की अगर बात करते हैं। अकेश्वरवाद अकेश्वरवाद का मतलब क्या है? ईश्वर एक है। ईश्वर क्या है? ईश्वर एक है और उसी में यह लोग जो है वो क्या करते हैं? विश्वास रखते हैं। मूर्ति पूजा का विरोध यानी यह जो लोग हैं धूप धूप दान नहीं करते हैं। मूर्ति पूजा जो है वह नहीं करते हैं। मूर्ति पूजा नहीं करते हैं। इस संप्रदाय के ब्रह्म समाज के लोग मूर्ति पूजा नहीं करते। मानववाद और समानता देखो मानव यानी इंसानियत होनी चाहिए और समानता जो है वो सभी के अंदर होनी चाहिए। आप ना तो किसी को रंग के आधार पर भेदभाव कर सकते हो। रंग जैसे तू काला है, मैं गोरा हूं, मैं गोरा हूं, तू काला है। ऐसे भेदभाव नहीं कर सकते। तुम जेंडर के हिसाब से यानी तू लड़की है, मैं लड़का हूं। ऐसे भेदभाव नहीं कर सकते। इसके अलावा हम बात करें तो हम जो है रंग के आधार पर नहीं कर सकते। लिंग के आधार पर यानी तू लड़का है, मैं लड़की हूं। इसके आधार पर नहीं कर सकते। और इसके अलावा अगर अपने बात करें तो हम धर्म के आधार पर भी किसी के साथ जो है वह भेदभाव नहीं कर सकते हैं। तो यह आपको जो है यहां समानता को बढ़ावा देने पर काम करता है। तर्क और विवेक का महत्व यानी जो निर्णय लोगे वह आप किससे लोगे? तर्क से लोगे। विवेक से लोगे। जैसे मैं उदाहरण के लिए बोल रहा हूं कि मान के चलो मेरे भाई ₹100 में आपको एक पेन मिल रहा है। एक पेन मिल रहा है और एक जगह ₹100 में आपको पेन भी मिल रहा है और इसके साथ-साथ किताब भी मिल रही है और इसके साथ जो है वह आप चाय भी पी लोगे और इसके साथ आप समोसा भी खा लोगे। तो आप इतना विवेकपूर्ण से तो निर्णय लोगे कि यार ₹100 वाला पेन का क्या करूंगा? लिखना तो मुझे हाथ से ही है। तो एक पेन भी मिल जाएगी। पढ़ने के लिए किताब भी मिल जाएगी। मेरा चाय नाश्ता भी हो जाएगा ₹100 में। तो आप किस ऑप्शन को चुनोगे? आप इस ऑप्शन को चुनोगे। इसे बोलते हैं अधिक संतुष्टि। उपभोक्ता संतुलन इसे कहते हैं। इसे उपभोक्ता संतुलन कहते हैं। तो तर्क और विवेक यानी ग्राहक जो होता है ना वो विवेकपूर्ण काम करता है। जैसे यह नीचे वाला भी आपने चुना। सामाजिक सुधार समाज के अंदर जैसे कोई प्रथाएं या बुरी उनको क्या है? बुरी प्रथाओं को जो रोकना है। इस पर यह जो है वह क्या कर रहा है? काम कर रहा है। काम कर रहा है। हां जी सर। बहुत ही बढ़िया। सर हम तो बादाम शेक पीते हैं। अरे वाह भाई वाह। पैसे वाले हो रहे तुम तो सारे हैं। समोसे वाले हो। हां। चलो ब्रह्म समाज के सिद्धांत एक बार पढ़ना। आप एकेश्वरवाद मूर्ति पूजा का विरोध किया है। मानववाद और समानता को बढ़ावा दिया है। तर्क और विवेक का महत्व समझाओ है ना? और सामाजिक सुधार जो है वो किए हैं। प्रार्थना समाज को हम पढ़ते हैं। देखो जैसे-जैसे मैं आपको पढ़ा रहा हूं वैसे-वैसे पढ़ते रहना। आपको साथ में यह भी कवर करवाते जा रहा हूं और प्रश्न भी मैं आपको साथ-साथ में क्या करवाते जा रहा हूं? कवर करवाते जा रहा हूं। प्रार्थना समाज की बात करेंगे तो प्रार्थना समाज की स्थापना 1867 में डॉक्टर आत्माराम पांडुरंग ने की। याद करो किसने की थी? आत्माराम पांडुरंग कब की? 1867 में कहां पर की? मुंबई में या बॉम्बे पहले इसे बोलते थे बॉम्बे। बॉम्बे में स्थापना की। कब? 1867 में बॉम्बे में। 1867 में बॉम्बे में। यह स्थापना किसके द्वारा की जाती है? डॉक्टर आत्माराम पांडुरंग। आत्माराम पांडुरंग के द्वारा बॉम्बे में की गई थी। यह आंदोलन अकेश्वरवादी पूजा और विधवा पुनर्विवाह महिलाओं की शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण सामाजिक सुधारों की वकालत करता है और जातिगत भेदभाव को चुनौती देता था। यह समाज यह ब्रह्म समाज से प्रेरित था। यह जो प्रार्थना समाज है, यह किससे प्रेरित था? ब्रह्म। तो, इसमें भी क्या करेंगे? ईश्वर एक को मानेंगे। महिलाओं को बढ़ावा देंगे। महिलाओं की शिक्षा पे काम करेंगे। विधवा पुनर्विवाह है, उसको क्या देंगे? बढ़ावा। वही बातें हैं जो अभी पढ़ाई है। बस इसमें तीन बातें याद करना। 1867 में आत्माराम पांडुरंग ने बॉम्बे में स्थापना की। बॉम्बे में जो है वो क्या की? स्थापना की। चलिए अगला प्रश्न आर्य समाज। देखो आर्य समाज की बात करेंगे तो आप नाम याद रखोगे स्वामी दयानंद सरस्वती का। स्वामी दयानंद सरस्वती का और इनके द्वारा ही एक नारा दिया गया वेदों की ओर लौटो। यानी वेदों का ज्ञान प्राप्त करो और यह भी इसी आधार पर जो है वो काम कर रहा है। वेदों के ज्ञान को ही बढ़ा रहा है। वेदों की ओर लौटो। यह नारा किसने दिया था? आर्य समाज एक महान समाज स्वामी दयानंद सरस्वती ने क्या की थी? स्थापना की थी। 1875 में जो है स्थापना की। कब की? 1875 में। अकेश्वरवादी वही बात है। हिंदू सुधारवादी आंदोलन है। इसका उद्देश्य वैदिक ज्ञान यानी वेदों के ज्ञान को पुनर्जीवित करना है। इसलिए कह रहे हैं कि वेदों की ज्ञान की ओर लौटो। सामाजिक न्याय को बढ़ावा देना और अंधविश्वास, मूर्ति, पूजा, जातिगत भेदभाव को समाप्त करना। यह वही बातें चलेंगे लगभग इन समाज में। इन समाज में बस तीन बातें बदलती हैं। एक तो संस्थापक कब हुई और कहां हुई? तो स्वामी दयानंद सरस्वती ने स्थापना की थी 1875 में। और स्वामी दयानंद सरस्वती जी द्वारा नारा दिया गया था वेदों की ओर लौटो। क्या नारा दिया गया था? वेदों की ओर लौटो का नारा दिया गया। यह बात याद रख लेना। वेदों की ओर लौटो। बहुत बढ़िया। और जवाहरलाल नेहरू जी ने नारा दिया था आराम हराम है। क्या नारा दिया था? आराम हराम है। आगे आर्य समाज की स्थापना का उद्देश्य बताओ। बार-बार वही वही बातें जो है वो आपको लिखनी है। वही बातें आ रही है जो अभी मैंने बताया घूम फिर के। बस आपको लिखने का तरीका होना चाहिए मेरे भाई। 2025 में यह प्रश्न पूछा गया है। आर्य समाज की स्थापना की अगर बात करें तो वेदों के क्या बोला? उद्देश्य क्या थे? कि वेदों के मूल ज्ञान की तरफ और सिद्धांतों को जन-जन तक पहुंचाया जाए और मूर्ति पूजा कर्मकांडों से क्या रहे? दूर रहे। यह बात हमने पढ़ी। जातिवाद अस्पृश्यता का मतलब होता है छुआछूत। अस्पृश्यता का मतलब होता है छुआछूत। जैसे कई करते हैं ना कि तुम्हें इस मटके से पानी नहीं पीना। तेरा मटका वह है। हम तेरे घर पे खाना नहीं खाएंगे। यह वह यह सारी बातें होती हैं छुआछूत की। उसे बोलते हैं अस्पर्शता। तो जातिवाद, अस्पर्शता, बाल विवाह, सती प्रथा, बहू विवाह। बहु का मतलब होता है अनेक विवाह करना। बहु का मतलब क्या होता है? अनेक विवाह करना। जैसी बुराइयों का विरोध करना। यह सही बात है। अब एक आदमी है। वह पांचप औरतों को रख रहा है। तो भाई साहब वह पांच औरतों को प्रेम कैसे दे पाएगा वह? इसलिए बहु विवाह का विरोध किया। अच्छा पांच औरत एक आदमी नहीं रख सॉरी। एक आदमी पांच औरत रख सकता है। एक आदमी याद रखना पांच औरत रख सकता है और एक औरत जो है पांच आदमी जो है वो नहीं रख सकती। सोच के देखो कितनी बड़ी बात है। एक औरत पांच आदमी तो यह ऐसा समाज था। उसके लिए इन्होंने जो है यह समाज की स्थापना की थी। बहु विवाह जैसी बुराइयों का अंत करना था। विधवा पुनर्विवाह को बढ़ावा देना था। अंतरजातीय विवाह को बढ़ावा देना था। यह काम हुआ यहां पर नंबर दो में। तीन नंबर गुरुकुलों और डीएवी दयानंद एग्लो वैदिक स्कूलों की स्थापना कर वैदिक शिक्षा यानी वेदों की शिक्षा के साथ आधुनिक शिक्षा देना ताकि अज्ञानता दूर हो। आपको हर कोई जो मूर्ख ना बना सके इसलिए यह समाज जो है वह स्थापित किए गए थे। इसलिए मेरे भाई इन समाज की क्या की गई थी? स्थापना की गई थी। यह बात याद रखना। हां। एक बार जितने भी साथी देख रहे हो देखो 1000 से ज्यादा विद्यार्थी देख रहे हैं लेकिन लाइक नहीं किया है तो आप सभी प्यारे साथियों के लाइक आ जाना चाहिए मेरे भाई चलिए यह भी याद हो गया गुरुकुल की स्थापना वाली बात फिर चार नंबर समाज में गरीबी को खत्म करना अज्ञानता को दूर करना अन्याय जो है उसको खत्म करना तथा सभी के कल्याण के लिए कार्य करना इस समाज का क्या है उद्देश्य है उद्देश्य है उद्देश्य है याद रखना बहुत ही अच्छा प्रश्न फिर आपके सामने एक और बनेगा थियोसोफिकल सोसाइटी की यह ऑब्जेक्टिव प्रश्न भी परीक्षा में आता है कि स्थापना किसने की थी? तो याद रखना थियोसोफिकल सोसाइटी थियोसोफिकल सोसाइटी की स्थापना 17 नवंबर 1875 में संयुक्त राज्य अमेरिका यानी यूएसए में यूएसए में एक शहर है न्यूयॉर्क। न्यूयॉर्क तो न्यूयॉर्क में रूसी महिला मैडम हेलेना बेलेवेटकी एवं अमेरिका निवासी कर्नल हेनरी स्टील ने जो है वो इसकी क्या की थी स्थापना की थी थियोसोफिकल सोसाइटी की सिंपल सा याद करने का तरीका बताता हूं न्यूयॉर्क शहर में यहां पर नाम याद रखना मैडम हेलेना का हेलेना याद रखोगे इतना भी लिख दोगे ना तो भी आपको नंबर मिल जाएगा हेलेना व हेनरी स्टील ओकट हेनरी हेनरी स्टील ऑलकोट हेनरी स्टील लिख दोगे तो भी काम चल जाएगा। हेनरी स्टील ऑलकोट नाम पूरा लिखोगे यानी ऑल रंग के कोट पहना करता था। ये ऑलकोट ओलकोट ओलकोट तो हेलेना व हेनरी स्टील ओलकोट हेलेना याद रखोगे और हेनरी स्टील ओलकोट ने जो है वो थियोसोफिकल सोसाइटी की स्थापना की 1875 में। 1875 में करो याद जल्दी से। 1875 में। जल्दी से याद करो मेरे भाई। फिर आगे बढ़ते हैं अपने जल्दी से याद करो। बहुत प्यारे-प्यारे प्रश्न लाया हूं मैं आपके लिए। यह प्रश्न जो बहुत इंपॉर्टेंट है। पढ़ लेना। चलिए आगे। उसके बाद मेरे भाई हम अगले प्रश्न की ओर बढ़ जाते हैं। अलीगढ़ आंदोलन बहुत ही अच्छा प्रश्न आया। देखो अलीगढ़ आंदोलन के बारे में पूछा है। तो यह हमारा जो प्यारा सा भारत आपको दिख पा रहा है यहां। यह जो प्यारा सा भारत देखने को मिल रहा है आपको। यहां पर अलीगढ़ जो है कहां देखने को मिलता है आपको? यूपी का एक शहर जो आपको किस नाम से देखने को मिलेगा? अलीगढ़। अलीगढ़ के नाम से जो देखने को मिलेगा। 1857 के विद्रोह में मुसलमानों ने मुसलमानों की सक्रिय भागीदारी के कारण सरकार द्वारा उनके दमन से मुसलमानों की स्थिति छिन-भिन्न होने लगी थी। मुसलमानों की जो स्थिति है वह छिन्न-भिन्न होने लगी थी। ऐसे समय में ही सर सैयद अहमद खान। क्या नाम है? सर सैयद अहमद खान। सर सैयद अहमद खान जो है अहमद खान जो है का पर्दापण हुआ। सर सैयद अहमद खान के नेतृत्व में चलाए गए आंदोलन को ही अलीगढ़ आंदोलन कहते हैं। तो बस इतनी बात याद रखनी है कि अीग अड़ी सॉरी अलीगढ़ आंदोलन जो है वो 1857 में किसने चलाया था? सर सैयद अहमद खान। बोलना मेरे साथ सर सैयद अहमद खान। एक बार और बोलो। सर सैयद अहमद खान। एक बार और बोल दो सर सैयद अहमद खान। चलिए आगे अगला प्रश्न। भावी आंदोलन की बात करें तो यह बिल्कुल सिंपल है मेरे भाई। बिल्कुल सिंपल है। कौन सा आंदोलन है? भाभी। भावी आंदोलन पहले था ना भाभी से एक बात याद आई। एक गांव में मेरे भाई एक कवि हुआ करता था। एक दो मिनट की ये बात है। सुनना ध्यान से। थोड़ा सा आपको लग रहा होगा गुरुजी डेढ़ घंटे के पास पहुंच गए हैं और बोरियत सी महसूस ना हो तो एक चुटकुला सुनाता हूं। हमें स्कूल [गला साफ़ करने की आवाज़] में गुरु जी सुनाया करते थे जब हम बोर होने लग जाते थे। तो गुरु जी यह कहते थे कि भाई एक कवि था और कवि शुरू में छोटा था। अच्छी शिक्षा ली धीरे-धीरे बड़ा हो गया। कवि जब बड़ा हुआ तो उसको आदत हो गई कविताओं को करने की। जैसे मान लो अपने जो काम करते हैं दिन भर वो खाली जगह बैठे होते तो भी उसकी आदत हमें हो ही जाती है कि हम वो काम करते रहते हैं। अब जैसे मान लो मैं पढ़ाने का काम करता हूं तो मैं खाली टाइम में क्या करता हूं ऐसे बैठा-बठा सोचता रहता हूं कि यार क्या करूं क्या करूं ऐसा फिर मैं खाली ऐसे कि इस बात को ऐसे पढ़ाऊंगा तो बेहतर रहेगा तो वो काम भी मैं करता रहता हूं ऐसे तो वो चीज हुई वह चीज हुई हुआ क्या हुआ यह मेरे भाई हुआ यह कि वह एक कवि था और सारा दिन कविताएं करता था अब उस कवि की क्या हो गई शादी अब उसकी तो आदत है वह कविता कविताएं करने की तो वह क्या कर रहा था कविता कर रहा था तो भाई साहब उसकी पत्नी ने कहा इसकी क्या हुआ पड़ा आज नहीं लड़कियों के नाम क्यों ले रहा है क्योंकि वो ऐसे बोल रहा था आरती पूजा संतोष इस प्रकार के लड़कियों के क्या है नाम ले रहा था रूपा अब वो तो देवियों के नाम ले रहा है लेकिन लेकिन उसे लगा कि ये अपनी सहेलियों के नाम बता रहा है। उसकी पत्नी को लगा कि ये अपनी सहेलियों के नाम बता रहा है। देखो कितना अच्छा पति मिला है। पहले दिन ही जो है वह मुझे अपनी सहेलियों के नाम बताने लग गया। तो मैं भी क्यों छुपाऊं? मेरे साथ जो हुआ मैं भी इसको अपने सारी जानकारी दूं। सबके नाम बताऊंगी। तो उस उस महिला ने उसको कहा कि आप इतने अच्छे हो तो मैं आपको एक बात कहना चाहती हूं कि मेरा पहला रमेश था, दूसरा राहुल था, तीसरा सुरेश था, चौथा अभिनव था। ऐसे करते-करते जो है नाम बताए और बोला 13वां कालू था और 14वां धोलू था और 15वां तू है। है ना? तो आज से मेरा तू ही कालू है। वो वो कविताएं करता था बेचारा। आज से तू ही सरिता तू ही यह तू ही वो। और यह कहती कि आज से तू ही मेरा कालू है। तू ही मेरा धोलू है। तू ही रमेश है। तू ही सुरेश है। तो यह गुरुजी हमें जो है बहुत ही जो है बढ़िया लगता था कि ले भाई गुरुजी सुनाइए। अब एक्टिव हो जाया करते थे। फिर हम फिर वापस पढ़ाई की तरफ आया करते थे। चलो देखो बहावी आंदोलन की बात करते हैं। 19वीं सदी का एक प्रमुख इस्लामी सुधारवादी आंदोलन था जिसकी शुरुआत भारत में सर सैयद अहमद बरेलवी ने की थी। तो भावी आंदोलन इसका पूछ रहा था किसने शुरू किया? यह नाम याद रख लेना। सर सर सैयद अहमद बरेलवी सैयद अहमद बरेलवी जिसका उद्देश्य इस्लाम को गैर इस्लामी प्रथाओं से दूर करना था। जैसे सती प्रथा वगैरह हमारे हिंदू धर्म में थी। ऐसे इस्लामी धर्म में भी जो बुरी प्रथाएं थी, गैर इस्लामी प्रथाएं थी, उनको दूर करना तथा प्रथाओं से शुद्ध कर कुरान और सुन्नत के मूल सिद्धांतों पर वापस लौटना। जैसे स्वामी विवेकानंद ने कहा था वेदों की ओर लौटो। यह कहता कुरानों कुराणों के ज्ञान की तरफ जो है वो आप वापस की लौटो। कहां लौटो? कुरानों के ज्ञान की तरफ जो है वो वापस की ओर लौटो। सिंपल सा प्रश्न है। हां, मुस्लिम सुधार आंदोलन की बात करते हैं। तो यह हमने आपको बताया कि 19वीं 19वीं सदी की बात करें तो 19वीं सदी में भारतीय मुसलमानों के बीच भारतीय मुसलमानों के बीच उभरा एक व्यापक आंदोलन था। कब उभरा 19वीं शताब्दी याद रखना। जिसका उद्देश्य धार्मिक प्रथाओं में सुधार करना। पश्चिमी शिक्षा को अपनाना और सामाजिक नैतिक उत्थान करना तथा जिसमें अलीगढ़ आंदोलन था। देवबंद आंदोलन था, अहमदिया आंदोलन था, भावी आंदोलन था। भावी आंदोलन था। अलीगढ़ आंदोलन हो जाएगा। मुस्लिम सुधार आंदोलन के नाम पूछे तो कौन-कौन से हैं? एक तो हो जाएगा अलीगढ़। बोलना मेरे साथ अलीगढ़ दूसरा देवबंद। अलीगढ़, देवबंद, अहमदिया। तीन याद करो। अलीगढ़, देवबंद, अहमदिया। चौथा हो जाएगा बहावी। अलीगढ़ आंदोलन, देवबंद आंदोलन, अहमदिया आंदोलन, बहावी आंदोलन। जल्दी से याद करो भाई मेरे। आगे बढ़ते हैं। हां। सर आज कर दीजिए खत्म। हां हिस्ट्री खत्म हो जाएगी आज। अरे बढ़िया तरीके से कराएंगे। ऐसे रोल नहीं करेंगे। पहले हिस्ट्री फिर पिटी जग्राफी ऐसे कर्म से चलेंगे। सिस्टमेटिक तरीके से चलेंगे। ऐसे खराब नहीं करेंगे सिस्टम को। हां एक क्लास फालतू लग सकती है लेकिन उसका फायदा मिलेगा परीक्षा में आपको। चलो अगला प्रश्न देखो। अहमदी आंदोलन जो मैंने नहीं पढ़ाया वो यहां पर लिखा है। सुनना ध्यान से। 1889 देखो कोई भी नई चीज पहनते हैं तो उसे बोलते हैं 89। तो अहमदिया एक नवासी आंदोलन था। मिर्जा गुलाम अहमद क्या नाम याद रखोगे? मिर्जा गुलाम अहमद ने अहमदी आंदोलन का नेतृत्व किया था। वह पर्दा प्रथा बहु विवाह तलाक के समर्थक थे। उनकी पुस्तक का नाम बरहीन ए अहमदिया था। क्या था? बरहीन ए अहमदिया। बरहीन अहमदिया जो है मिर्जा गुलाम अहमद की पुस्तक थी। 1889 में अहमदी आंदोलन शुरू हुआ। यह कहते थे कि पर्दा प्रथा होनी चाहिए। यह कहते थे एक से ज्यादा विवाह करो। यह कहते थे कि तलाक के समर्थन में है। जैसे आपको पता है इस्लाम में पहले तो था कि तीन बार अगर अपने ऐसे बोल गए ना तलाक तलाक तलाक तो उसके साथ क्या हो जाता था? तलाक हो जाया करता था। तो यह आपको देखने को मिलता था। मिलता था या नहीं मिलता था भाई? मिलता था या नहीं मिलता था? बिल्कुल सर मिलता था। यह बात इंडियन नेशनल कांग्रेस की स्थापना भाई साहब इंडियन नेशनल कांग्रेस भारत में पहली जो पार्टी है वह एक तरह से उभरी थी। इसकी स्थापना इसकी स्थापना याद रखना 28 दिसंबर 28 दिसंबर 1885 में एओ हयूम द्वारा की गई। एओ हयूम द्वारा जो है वो स्थापना की जाती है। किसके द्वारा की जाती है कांग्रेस की स्थापना? ए ओ हयूम द्वारा। इंडियन नेशनल कांग्रेस की स्थापना 28 दिसंबर 1885 में एओ हयूम द्वारा जो है वो की गई। पार्टी 1885 में मुंबई में अपनी पहली बैठक यानी पहला जो पहला जो सम्मेलन होता है वो कहां होता है? मुंबई में। पहली बैठक कहां आयोजित होती है? मुंबई में। जहां पर वमेश चंद्र बनर्जी अध्यक्ष बने थे। बहुतेंट प्रश्न है। कांग्रेस के पहले अध्यक्ष पूछे तो वमेश चंद्र बनर्जी। जबकि कांग्रेस की स्थापना एओ अय्यूम ने की थी। इसमें 72 प्रतिनिधियों ने भाग लिया था। कितने प्रतिनिधियों ने? 72 लोगों के हस्ताक्षर होते हैं। 72 लोग इस बैठक के अंदर पहुंचते हैं। तो 1885 में इसकी अध्यक्षता किसने की थी? वमेश चंद्र बनर्जी ने। वमेश चंद्र बनर्जी ने जो है वो क्या की थी? अध्यक्षता की थी। वेरी सिंपल बात है भाई। वेरी सिंपल बात से कतई बगभंग आंदोलन की बात करें। बगभंग आंदोलन की बात करते हैं। तो देखो क्या था यह आंदोलन? क्या घटना जो है वह यहां देखने को मिलती है? एक यह प्रश्न और करो ध्यान से पढ़ के। फिर आपको मैं एक बात कहूंगा बढ़िया से। हां। और इस प्रश्न के बाद जो है आपको जैसे ही साइड होते हैं 1 मिनट का रेस्ट दिया जाएगा। इसमें मैं भी पानी पी लूंगा और आप भी पानी पी लेना। बगबंग आंदोलन की बात करें तो बगबंग आंदोलन 1905 में 1905 में बंगाल विभाजन हुआ था। तब ब्रिटिश वायसराय लॉर्ड कर्जन द्वारा 1905 में किए गए बंगाल विभाजन के विरोध में शुरू हुआ था। बगबंग आंदोलन जो बंगाल का विभाजन हुआ था ना उससे यह जो है वो भारत से बंगाल का क्या हो गया था? विभाजन हो गया था। तब जो है यह आंदोलन शुरू होता है। तो किस आंदोलन यह शुरू हुआ? उस समय वायसराय कौन थे? यह प्रश्न भी आता है। लॉर्ड कर्जन। लॉर्ड कर्जन कर्जन लास्ट वाले नाम याद रखा करो। इंपॉर्टेंट होते हैं। कर्जन वायसराय थे। 1905 में बंगाल विभाजन के विरोध में शुरू हुआ। जिसका उद्देश्य था फूट डालो और राज करो। फूट डालो और राज करो की नीति के तहत हिंदू मुसलमान एकता को तोड़ना था। हिंदू मुसलमान की जो यह एकता थी शुरू में यह जो भाईचारा था यह क्या था? यह तोड़ना था। लेकिन भारतीय जनता जिसमें रविंद्रनाथ टैगोर, सुरेंद्रनाथ बनर्जी नेता शामिल थे। इन्होंने एकजुट होकर सब देसी को स्वदेशी और बहिष्कारों के साथ विरोध किया। यानी सब देशों को अपनाओ और अंग्रेजों की जो विदेशी चीजें हैं उनका क्या करो? बहिष्कार करो। इस चीज का विरोध किसने किया था? रविंद्रनाथ टैगोर और सुरेंद्रनाथ बनर्जी। जिससे यह आंदोलन सफल हुआ और 1911 के अंदर विभाजन क्या करना पड़ा? रद्द करना पड़ा। दिल्ली दरबार लगा था। वहां पर इस विभाजन को क्या कर दिया था? रद्द। जिससे भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन को एक नई दिशा जो है वो मिली थी। तो बग आंदोलन 1905 में 1905 में बंगाल विभाजन के विरोध में शुरू हुआ था। इनका उद्देश्य सिर्फ एक ही था कि हिंदू और मुसलमानों की एकता को तोड़ा जाए ताकि फिर हम अच्छी तरह से राज कर लें। अच्छी तरह से इनको मुट्ठी में कर लें। लेकिन इसको पूरा हमने होने नहीं दिया। रविंद्र नाथ टैगोर और सुरेंद्र नाथ बनर्जी जैसे नेता थे। इन्होंने एकजुट होकर काम किया। जिससे जिससे 1911 में 1911 में बंगाल विभाजन को क्या करना पड़ा? रद्द करना पड़ा था। इससे भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन को एक क्या मिली थी? नई दिशा जो है मिली। नई दिशा मेरे भाई मिली। नई दिशा जो है मिली। सर आपकी लैंग्वेज बहुत अच्छी है। अरे वाह भाई थैंक यू सो मच। आभार आपका। हां बताइएगा भाई। अपने जो है वो किस क्वेश्चन तक आ गए थे? हम जो है वह बात कर रहे थे पग आंदोलन की। पग आंदोलन की। यह थोड़ा सा बीच में जो नेटवर्क इशू हो गया। बिल्कुल अब क्लास चल चुकी है। सभी साथी लाइक करके बता दीजिएगा। क्लास हमारी जो है वो चल चुकी है भाई। ओके ओके ठीक है। क्लियर है। क्लियर है। ओके ओके ओके मेरे भाई। ओके ओके। चलिए बात करते हैं हम आगे। अगले प्रश्नों की बात करते हैं। अगले प्रश्नों की जो चर्चा है वह करते हैं। हां प्रयागराज में बारिश होने लगी। बारिश हो रही है क्या? सच में हो रही है क्या? ऐसे मौसम ऐसा मौसम है। चलो पग आंदोलन की तरफ हम बढ़ चुके थे और देखो बहुत शानदार सेशन है मेरे भाई यह वाला। आप बस अच्छी तरह से बार-बार रिवाइज करके देख लेना। मैं कोशिश करूंगा कि इतिहास जो है यहां पूरा आपका क्लियर हो जाए। अब आगे अगर हम बात करेंगे बग आंदोलन में कांग्रेस की भूमिका अगर देखते हैं तो 1905 में गोपाल कृष्ण गोखले की अध्यक्षता में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की वार्षिक अधिवेशन में निम्न में से दो प्रस्तावना पारित की गई थी। ठीक है? ठीक है? बगबग आंदोलन में पहला कर्जन की प्रतिक्रियावादी नीतियां एवं बंगाल विभाजन की आलोचना करना। यह प्रस्तावना थी। दूसरी बंगाल में बंगभग विरोधी अभियान तथा स्वदेशी अभियान का समर्थन देना। यानी कहने का मतलब जो सब देसी चीजें हैं उनको अपनाओ। विदेशी चीजों का जो है वह बहिष्कार करो। यह नारे दिए गए और यही प्रस्तावना में जो है वह पारित किया गया था। तो 1905 में गोपाल कृष्ण गोखले की अध्यक्षता में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की जो वार्षिक अधिवेशन हो रहे थे उन अधिवेशन में दो प्रस्तावना रखी गई थी। इसमें नंबर एक पर कर्जन की जो लॉर्ड कर्जन वायसराय थे उस समय उनकी प्रतिक्रियावादी नीतियों एवं बंगाल विभाजन की आलोचना करना कि आपने बंगाल विभाजन गलत किया है 1905 में। दूसरा बंगाल में बगमग विरोधी और अभियान तथा स्वदेशी अभियानों को समर्थन देना। यह जो है इन कांग्रेस का जो वह सहयोग रहा था। गोपाल कृष्ण गोखले जो है वह क्या थे? यहां पर अध्यक्षता निभाते हैं। परीक्षा में प्रश्न क्या आता है आपके सामने और आप कैसे करोगे मेरे भाई सुनो ध्यान से। परीक्षा में प्रश्न आपके सामने पूछा जाता है कि बगबग आंदोलन को समझाते हुए इसमें कांग्रेस की भूमिका पर प्रकाश डालिए। कि कांग्रेस ने किस प्रकार से जो वह सहयोग किया था। क्या किस प्रकार से कांग्रेस की जो भूमिका रही थी? तो इसमें आप ऐसे लिखोगे। इसमें जो है इसमें यह प्रश्न मैं आपको होमवर्क के रूप में दे रहा हूं। घर पर करने के लिए एक है। इसमें आप क्या लिखोगे? देखो पहले तो आप बगबग आंदोलन को समझाओगे यह बात लिखकर कि बग आंदोलन क्या था? कैसे यह जो है आंदोलन हुआ था? थोड़ा बहुत तीन लाइनों के अंदर इसको समझाओगे ना। फूट डालो राज करो। फूट डालो राज करो की नीति आप थोड़ी सी यहां समझा दोगे। उसके बाद आप क्या समझाओगे? उसके बाद समझाते हुए इसको कांग्रेस की भूमिका बतानी है। इसमें कांग्रेस की भूमिका क्या बताओगे? कांग्रेस की भूमिका आप यही बताओगे कि कांग्रेस की भूमिका यही बताओगे कि 1905 में गोपाल कृष्ण गोखले की अध्यक्षता में कांग्रेस का जो अधिवेशन हुआ था वार्षिक उसमें दो प्रस्ताव लाए गए थे। पहले कर्जन ने ये जो बंगाल विभाजी की बंगाल विभाजन जो किया इसकी आलोचना की गई थी। दूसरा बंगाल विभा बंगाल में बगबग विरोधी अभियान में स्वदेशी अभियान में जो है कांग्रेस ने क्या दिया था? समर्थन दिया था। यह बातें आप लिखकर इस प्रश्न को कवर कर लेना। यह आपको मैं होमवर्क के तौर पर दे रहा हूं। उसके बाद असहयोग आंदोलन देखो रोलेक्ट एक्ट द जलियांवाला बाग हत्याकांड होता है। उसके उपरांत महात्मा गांधी जी ने 1920 में एक आंदोलन शुरू किया। असहयोग असहयोग आंदोलन 1920 में शुरू किया था। जबकि यह आंदोलन समाप्त कब होता है? 1922 में यह समाप्त हो गया था। महात्मा गांधी द्वारा ब्रिटिश सरकार के खिलाफ भारत की स्वतंत्रता के लिए चलाया गया यह एक अहिंसक आंदोलन था। गांधी जी ने यह बात बोली थी कि मैं आंदोलन को जो है वो हिंसक नहीं होने दूंगा। चाहे इसके लिए मेरे प्राण भी चले जाए मुझे मजबूर मुझे जो है वो देने पड़ेंगे। लेकिन मैं आंदोलन को जो है वो हिंसक नहीं होने दूंगा। अहिंसा के मार्ग पर ही चलाऊंगा। तब यहां पर एक पुलिस स्टेशन था गोरखपुर के अंदर। गोरखपुर कहां पर है? गोरखपुर यूपी में। गोरखपुर यूपी के अंदर एक पुलिस स्टेशन था। जहां पर इस थाने के अंदर इस पुलिस चौकी के अंदर पुलिस चौकी के अंदर जो है 22 पुलिसकर्मियों को जिंदा जला दिया गया था। 22 पुलिसकर्मियों को जो है वो क्या जला दिया गया था? 22 पुलिसकर्मियों को यहां पर जिंदा जलाया गया। क्या जलाया गया? जिंदा जो है वह जला दिया गया। 22 पुलिसकर्मियों को जो है वो यहां पर जिंदा जला दिया गया था। तब करके मेरे भाई यह आंदोलन जो है वह महात्मा गांधी को 1922 में समाप्त करना पड़ा। क्योंकि इस पुलिस चौकी को 5 फरवरी 5 फरवरी 1922 में चलाया गया था। इस घटना को बोलते हैं चोराचोरी कांड। चौरा चोरी हत्याकांड। चौरा चोरी हत्याकांड जो है वो इसे कहते हैं जो गोरखपुर यूपी में होता है। जो कहां पर हुआ था मेरे भाई? गोरखपुर यूपी में हुआ था। गोरखपुर यूपी के अंदर जो है वो हुआ था। यह बात याद रखना। बीच में कई बार क्लास रुक जाए ना तो 5 मिनट वेट कर लिया करो। 3-4 मिनट बाद क्लास चल जाती है। थोड़ा यह नेटवर्क का जो है वह इशू आ जाता है। ठीक है? तो आप वेट कर लिया करो या पुरानी रिवीजन कर लिया करो। असहयोग आंदोलन के स्वरूप और कारणों पर प्रकाश डालो। तो असहयोग आंदोलन क्यों हुआ था? आपको मैंने बताया था। कारण क्या थे? जलियांवाला बाग हत्याकांड होना एक रोलेट एक्ट लाया जाने वाला यह कारण थे। ठीक है? क्या था? जलियांवाला बाग जलियांवाला बाग जो है वह घटना हुई। इसमें 1500 से ज्यादा जो बेकसूर लोग थे उनको जनरल डायर ने गोलियों से भून दिया था। फिर एक कानून आया था जिसको बोलते हैं काला कानून। भारतीयों ने काला कानून कहा था रोलेक्ट एक्ट। रोलेक्ट एक्ट आया। इसके अंदर क्या था कि जो बिना कोई वकील के, बिना अपील के, बिना दलील के यानी बिना वारंट के जो है हर क्रांतिकारी को यह लोग कैद कर रहे थे और कम से कम यह कैद कर रहे थे 2 वर्ष तक। तो 2 वर्ष तक कैद रखेंगे। इतने आंदोलन क्या पड़ जाएगा शांत ना ही तो वह अपनी पसंद का वकील कर सकता है ना कुछ और है तो ऐसा कानून लेकर आए थे अंग्रेज रोलेक्ट एक्ट 1919 में यह घटना भी 1919 को है यह भी 1919 इसके विरोध में ही शुरू हुआ था असहयोग आंदोलन कौन सा आंदोलन शुरू हुआ था असहयोग आंदोलन असहयोग आंदोलन की बात करें तो स्वरूप और कारणों को आप लिखोगे कैसे आप इसको ऐसे लिखोगे मेरे भाई कि असहयोग आंदोलन 1920 से 22 महात्मा गांधी के नेतृत्व में ब्रिटिश शासन के खिलाफ एक अहिंसा क आंदोलन था। शांतिपूर्वक जन आंदोलन था। इसका मुख्य स्वरूप ब्रिटिश सरकार और उसकी संस्थाओं से पूर्ण असहयोग करना था। क्या करना था? असहयोग। सहयोग नहीं करना था उनका असहयोग। इसमें विदेशी वस्तुओं, स्कूलों का अदालतों और नौकरियों का बहिष्कार करना था। जो विदेशी यहां पर वस्तुएं आती थी। जो विदेशी स्कूल का ज्ञान था। अदालतों और नौकरियों की बात करें उनका हमारे द्वारा इस आंदोलन के तहत बहिष्कार किया गया तथा स्वदेशी अपनाओ खादी पहनों और कर न देने पर जोर दिया गया था इस आंदोलन में ताकि स्वराज प्राप्त हो सभी को अधिकार मिल सके और भारतीय अर्थव्यवस्था व उद्योगों को सशक्त बनाया जा सके सशक्त बनाया जा सके खादी पहनो यहां पर बाल गंगाधर तिलक की मृत्यु हो जाती है। फिर बाल गंगाधर तिलक की मृत्यु के उपरांत यहां पर चंदा इकट्ठा किया गया था। अब सोच के बताओ उस समय कितने रुपए चंदा आ गया होगा। जैसे वो मृत्यु हो गई बाल गंगा धरतिलक की तो वहां लोगों से क्या है पैसे इकट्ठे किए गए थे कि भाई इसकी मृत्यु के उपरांत हम कुछ बढ़िया काम करेंगे। तो आप विश्वास नहीं करोगे ₹1 करोड़ का उस समय चंदा इकट्ठा हो गया था ₹1 करोड़ का और फिर इस ₹1 करोड़ से चरखे लिए। क्या लिए चरखे और फिर खादी को जो बढ़ावा दिया और महात्मा गांधी ने आपने देखा होगा कि पूरा जीवन अपने जो है वह आधे कपड़ों में निकाल दिया। हां बाल गंगाधर तिलक चलिए तो असहयोग आंदोलन के यह स्वरूप थे और यह कारण थे। एक बार इसको पढ़ना। 1 मिनट का टाइम है। जल्दी से आप पढ़ लो मेरे भाई। यह महात्मा गांधी के नेतृत्व में ब्रिटिश शासन के खिलाफ एक हिंसक और शांतिपूर्ण आंदोलन था। महात्मा गांधी शांतिपूर्ण ही आंदोलन करेंगे। जो भी करेंगे इसका मुख्य उद्देश्य था कि विदेशी चीजें उनका बहिष्कार करना है और सब देसी चीजों को अपनाना है ताकि स्वराज प्राप्त हो सके और भारतीय इकोनॉमिक के उद्योग और सशक्त उद्योगों को जो है वो सशक्त बनाया जाए उद्योगों को जो है वह क्या बनाया जाए सशक्त जो है वह बनाया जाए हां एक करोड़ का चंदा बहुत बड़ी बात है उस समय ₹1 करोड़ भी बहुत होते थे ना अब आपको यहां पर यह तीन घटनाओं के बारे में जो है व्याख्या करनी है यहां से आपको एक तो पूछा गया चोराचोरी हत्याकांड के बारे में कौन से कारण में चोरा चोराचोरी कांड के बारे में दूसरा स्वराज पार्टी गठन के बारे में पूछा और तीसरा काकोरी रेलवे स्टेशन पर जो स्टेशन रेल को जो लूटा था एक उस कांड के बारे में जो पूछा गया है। तीनों कांड के बारे में हम व्याख्यात्मक रूप से बात करेंगे कैसे लिखने हैं। सबसे पहले यह हमने पढ़ा भी दिया आपको चोराचोरी कांड की अगर बात करें तो देखो क्या हुआ है एक बार यहां ऐसे भी पढ़ लो कि घटना है 5 फरवरी 1922 की उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले की चोरीचोरा नामक स्थान पर हुई थी यह घटना उस समय महात्मा गांधी के नेतृत्व में असहयोग आंदोलन देश में चल रहा था चल रहा था ना प्रदर्शनकारियों का एक बड़ा समूह पुलिस की दमनकारी नीतियों और बढ़ती महंगाई के विरोध में शांतिपूर्ण यह जुलूस निकाल रहे थे जिसके अंदर इन्हें लगा कि जो पुलिसकर्म है ना वह रोले एक्ट लाया गया था कि यह हमारे जो सहयोगी हैं उनको बिना किसी जो अपराध के कैद करते जा रहे हैं। बिना किसी वारंट के कैद कर रहे हैं। तब इनको गुस्सा आया। पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों पर गोलाबारी करने और लाठी चार्ज करने से भीड़ आक्रोशित हो उठी। क्योंकि यह जो है पुलिस इसको विद्रोह को रोकना चाहती थी और तब यहां जवाबी कार्यवाही में क्या मिला? भीड़ ने पुलिस थाने को घेराव कर लिया। तो पुलिस वालों ने अंदर से क्या लगा लिए? ताले लगा लिए। ताले लगा लिए। तो वहां उधर इन लोगों ने क्या है? क्रांतिकारियों ने वहां आग लगा दी। इसमें बताते हैं 22 पुलिसकर्मी जो है जिंदा जलकर मर गए थे। यह था चोराचोरी हत्याकांड या चोरीचोरा हत्याकांड। ठीक है? यह ऐसे हुआ था। 4 फरवरी 5 फरवरी दोनों ही डेट आती है कई बार परीक्षाओं के अंदर। ठीक है? इसको आप ज्यादा ऐसे मत ले चलो मेरे भाई। यह हो गया। उसके बाद कांकोरी कांड। काकोरी कांड की अगर बात करते हैं यह क्या था? तो कांकोरी कांड भारत भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की एक महत्वपूर्ण घटना थी जो 9 अगस्त 1925 को हुई। कब होती है? 9 अगस्त 1900 1925 25 में यह घटना होती है। जब हिंदुस्तान रिपब्लिक एसोसिएशन एचआरए के क्रांतिकारियों ने ब्रिटिश सरकार को खजाना लूटने के लिए काकोरी स्टेशन के पास एक ट्रेन को लूटा था। किसको लूटा था? ट्रेन को। इस घटना में राम प्रसाद बिस्मिल्लाह, अशफाक उल्ला खान, राजेंद्र लहाडी और रोशन सिंह जैसे क्रांतिकारी शामिल थे। जिन्हें बाद में फांसी दी गई थी क्योंकि अंग्रेजों ने इनको पकड़ लिया था और बाद में क्या इनको फांसी हुई। इसने पूरे देश में आजादी की लड़ाई की एक नई ऊर्जा जो है वो पैदा कर दी। एक नई ऊर्जा जो है मेरे भाई इन्हने लड़ाई की वो क्या कर दी? पैदा कर दी। समझ में आ गया? कांकोरी कांड एक बार पढ़ लीजिएगा। हमें इंपॉर्टेंट लग रहा है परीक्षा की दृष्टि से। जल्दी से एक बार काकोरी कांड को पढ़ो। जिसने पढ़ लिया यस का जवाब लिख देना भाई। मुझे पता लग जाएगा ताकि किसी ने पढ़ा है। सर स्क्रीनशॉट अरे पीडीएफ मिल जाएगी आपको कितने स्क्रीनशॉट लोगे आप चलो ले लो भाई सर क्लास कब खत्म होगी बस आधे घंटे और चलेगी क्लास खत्म हो जाएगी स्वराज पार्टी भारत के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान 1 जनवरी 1923 को चितंजन चित्रंजन चित्रंजन दास चित्रंजन दास और मोतीलाल नेहरू द्वारा स्थापित की गई थी। तो स्वराज पार्टी का गठन किसके द्वारा किया गया? च चित्रंजन दास और मोतीलाल नेहरू द्वारा। जिसका मुख्य उद्देश्य था ब्रिटिश सरकार की विधानमंडलों में प्रवेश करना। यह प्रश्न इंपॉर्टेंट है। याद रखना। ब्रिटिश सरकार की जो विधानमंडल है उनके अंदर प्रवेश करना। स्वराज पार्टी का उद्देश्य था उनके काम में बाधा डालकर स्वशासन यानी स्वराज प्राप्त करना और यह असहयोग आंदोलन के बाद कांग्रेस के भीतर भी उभरा था। असहयोग आंदोलन के बाद यह जो है यही सेम बातें कांग्रेस के साथ भी कांग्रेस के बीच में भी यह जो है वह उभरी थी। तो यह इसलिए किया गया था मेरे भाई स्वराज पार्टी का गठन। यह लो सिंपल सी है। बस याद रखना स्वराज पार्टी की स्थापना चितरंजन दास और मोतीलाल नेहरू ने की। किस लिए? ताकि ब्रिटिश सरकार के विधानमंडलों में भाग ले सके। नो स्क्रीनशॉट। बहुत ही सिंपल प्रश्न है मेरे भाई। ये सिंपल प्रश्न है एकदम। चलिए साइमन कमीशन क्या था? देखो अंग्रेजों द्वारा साइमन कमीशन से प्रश्न क्या आता है? मैं बताता हूं। अंग्रेजों द्वारा लाया गया था। तीन बातें यहां पर याद रखना। फिर मैं इसको बताता हूं लिखना कैसे है? साइमन कमीशन का जो गठन है वह कब हुआ? दूसरा भारत कब आया? और इसने अपनी रिपोर्ट पेश कब की? 1927 में जो है इसका गठन हुआ। 1928 में भारत आया। 1930 में अपनी रिपोर्ट पेश की। यह तीनों याद करो जल्दी से। 1927 में गठन हुआ, 28 में भारत आया और 30 में रिपोर्ट पेश की। 30 बस बात खत्म। 30 में इसने क्या अपनी रिपोर्ट पेश जो है वह कर दी थी। 30 में अपनी रिपोर्ट पेश की थी। यह बात याद रखना। ठीक है। अब देखो सर साइमन कमीशन का विरोध क्यों हुआ था? इसीलिए हुआ था क्योंकि मेरे भाई इसमें एक भी हिंदू सदस्य नहीं था। अब हमारे यहां पर राज करने आ रहे हैं और हिंदू सदस्य है नहीं। यह क्या बात हुई? हमारी नीतियां बना रहे। हमारा ही व्यक्ति नहीं है इसके अंदर। तो साइमन कमीशन की बात करेंगे। साइमन कमीशन ब्रिटिश सरकार द्वारा 1927 में 1919 के भारत शासन अधिनियम की समीक्षा के लिए गठित सात ब्रिटिश सांसदों का एक समूह था। सात ब्रिटिश सांसद से हिंदू नहीं था। जो भारत में संवैधानिक सुधारों का अध्ययन करने आया था। लेकिन इसमें कोई भी भारतीय सदस्य न होने के कारण इसका साइमन वापस जाओ का विरोध किया। लाला लाजपत राय जी कहते हैं साइमन गो बैक। साइमन गो बैक के नारे दिए और काले झंडे दिखाए। काले झंडे का मतलब होता है विरोध का प्रतीक। काले झंडे दिखाने का मतलब क्या होता है मेरे भाई? कि विरोध कर रहे हैं। विरोध का प्रतीक होता है। साइमन वापस जाओ के नारे दिए। साथ ही भारत में व्यापक विरोध हुआ जिससे कांग्रेस और मुस्लिम लीग सहित सभी दल एकजुट हो गए थे साइमन कमीशन को यहां से भगाने के लिए। इस वाइट मैन या श्वेत कमीशन भी कहा जाता है। वाइट मैन यानी अंग्रेज जो लोग आए थे सफेद थे या इसलिए इसे सफेद कमीशन भी कहते हैं। श्वेत कमीशन के नाम से भी जाना जाता है। याद रख लेना। बहुत बढ़िया। लाजवाब। चलिए मेरे भाई आगे। साइमन कमीशन का बहिष्कार लाहौर में कमीशन के विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई। पुलिस की बर्बरता में लाला लाजपत राय यानी पुलिस ने यहां बताते हैं लाठी लाठियां चला दी थी। तो लाला लाजपत राय जी आगे खड़े होकर नारे दे रहे थे। साइमन गोक साइमन गोबे और पुलिस ने इन्हीं पर क्या बरसा दी? लाठियां। जिससे लाला लाजपत राय की क्या हो जाती है? मृत्यु हो जाती है। मृत्यु हो जाती है। गंभीर रूप से घायल हो गए और बाद में इनकी मृत्यु भी हो गई। जिससे पूरे देश में आक्रोश फैल गया कि अंग्रेज अब हमारे व्यक्तियों को मारने भी लग गए हैं। मारने भी जो है वह लग गए हैं। मारने भी लग गए हैं। जी। तो साइमन गो बैक के नारे किसने दिए थे? लाला लाजपत राय ने और इन्हीं के ऊपर लाठियां बरसाई गई थी। नेहरू रिपोर्ट पर प्रकाश डालिए। चलिए 2025 में यह पूछा गया प्रश्न है। सुनना ध्यान से। नेहरू रिपोर्ट की बात करें तो 1928 में भारत के लिए एक संविधान का मसौदा था। यह क्या था? मसौदा का मतलब होता है इंग्लिश में ड्राफ्ट। यानी एक तरह से बोल सकते हैं कच्चा प्रारूप था। जैसे अपने Instagram या TikTok पर वीडियो बनाते थे तो ऑप्शन आता था ना ड्राफ्ट का कच्चे रूप में आप यहां सेव कर सकते हो। और ड्राफ्ट जिसे मोतीलाल नेहरू की अध्यक्षता वाली संवर्धन सर्वदलीय सम्मेलन ने ब्रिटिश सरकार को जवाब देने के लिए तैयार किया था। नेहरू रिपोर्ट को ब्रिटिश के विरुद्ध लाया गया था। इसमें भारत के लिए भारत के लिए डोमिनियन स्टेटस यानी ब्रिटिश राष्ट्रमंडल के भीतर पूर्ण स्वशासन और संघीय ढांचे की मांग की गई थी कि हमें एक तो स्वशासन दे दो स्वराज दे दो और और यह जो संघीय ढांचा है विधानमंडल वगैरह जिस प्रकार से आप बना रहे हो है ना इसमें भी हमारी भागीदारी होनी चाहिए जिसमें अल्पसंख्यकों के लिए संयुक्त निर्वाचन क्षेत्रों और आरक्षण का प्रस्ताव रखा गया था कि आरक्षण भी होना चाहिए। जो अल्पसंख्यक लोग हैं, पिछड़े वर्ग के लोग हैं, उनके लिए क्या होना चाहिए? आरक्षण भी होना चाहिए। हालांकि यह रिपोर्ट बाद में कुछ नेताओं के विरोध के कारण विवादों में भी घिर गई थी और ब्रिटिश सरकार ने इसे अस्वीकार कर दिया था नेहरू रिपोर्ट को। 1928 की ये जो नेहरू रिपोर्ट थी, इसकी अध्यक्षता इसकी मोतीलाल नेहरू की अध्यक्षता में एक सम्मेलन किया गया था। जिसमें हमारी मांग यह थी भाई कि हमें सब शासन मिले। हमें स्वशासन मिले और संघीय ढांचे की जो हमारी मांग थी। अल्पसंख्यकों को निर्वाचन क्षेत्र और आरक्षण मिले। यह मांग थी। हालांकि इस रिपोर्ट को बाद में कुछ नेताओं के विरोध के कारण इसे असफल यानी अस्वीकार करना पड़ा अंग्रेजों द्वारा। ठीक है? यह हमारे वाले आपस में लड़ के मरने लगे। हमारे वाले जो थे वो आपस में लड़ के मरने लगे। तब अंग्रेजों ने इसको क्या कर दिया? अस्वीकार जो है वो कर गया। सविनय अवज्ञा आंदोलन पर सक्षिप्त टिप्पणी करो। 2020 में बहुत अच्छा प्रश्न पूछा है। कौन सा आंदोलन? सविनय अवज्ञा आंदोलन। अरे मैं आपको यह होमवर्क दे रहा हूं। यह खुद करोगे प्रश्न बहुत इंपॉर्टेंट है 25 के लिए। एक बार मोटे-मोटे तौर पर यह मैं बता देता हूं। आप इसको बिना देखे लिखोगे। 1929 में लाहौर के अधिवेशन की बात है यह। लाहौर में कांग्रेस का जो अधिवेशन हुआ था, कांग्रेस कार्यकरणी को सविनय अवज्ञा आंदोलन शुरू करने का अधिकार दिया गया था। सविनय अवज्ञा आंदोलन के तहत महात्मा गांधी 12 मार्च 1930 को ऐतिहासिक नमक सत्याग्रह की शुरुआत करते हैं। और 24 दिन की लंबी यात्रा के बाद 6 अप्रैल 1930 को दांडी में सांकेतिक रूप से नमक कानून तोड़ा। नमक बनाकर क्या तोड़ा था? कानून। क्योंकि यह जो अंग्रेज लोग थे, वह हम पे नमक पर भी क्या लिया करते थे? टैक्स लिया करते थे। तो यहां पर गांधी जी ने नमक बनाकर कानून तोड़ा 6 अप्रैल 1930 को। यहीं से सवर्ण अवज्ञा आंदोलन की क्या होती है? शुरुआत होती है। यहीं से सवर्ण अवज्ञा आंदोलन की क्या होती है मेरे भाई? शुरुआत होती है। यह बात याद रखोगे। हां। चलिए सविनय अवज्ञा आंदोलन से याद रखना 1929 में लाहौर अधिवेशन में कांग्रेस कार्यकारी को सविनय अवज्ञा आंदोलन शुरू करने का अधिकार दिया गया था। महात्मा गांधी ने 12 मार्च 1930 को एक सत्याग्रह की शुरुआत की थी और 24 दिन की लंबी यात्रा के बाद 6 अप्रैल को नमक बनाकर जो है गांधी जी ने क्या तोड़ा? कानून तोड़ा था। कानून जो है वह तोड़ा था। प्रथम गोलमेज सम्मेलन। अरे भैया गोलमेज सम्मेलन कितने हुए थे? तीन हुए थे। गोलमेज सम्मेलन कितने होता है? कितने होते हैं? तीन। तीन। 1930 में पहला हुआ था गोलमेज सम्मेलन। दूसरा गोलमेज सम्मेलन होता है 1931 में। और मेरे भाई तीसरा गोलमेज सम्मेलन जो है वह होता है 1932 में। यह था तीसरा गोलमेज सम्मेलन। तीसरा तीसरा तीनों गोलमेज सम्मेलन लंदन के अंदर होते हैं। कहां पर हुए थे? लंदन में। सरकार ने 12 नवंबर 1930 को साइमन कमीशन की रिपोर्ट तथा संवैधानिक मुद्दों पर चर्चा करने के लिए निमित्त लंदन में प्रथम गोलमेज सम्मेलन का आयोजन किया था। कि संवैधानिक मुद्दों की हम क्या कर सकते हैं? बात कर सकते हैं। साइमन की रिपोर्ट के ऊपर चर्चा कर सकते हैं। लेकिन ब्रिटिश सरकार एवं भारतीयों के मध्य समान स्तर पर आयोजित की गई यह प्रथम वार्ता थी। यहां कांग्रेस एवं अधिकांश व्यवसायिक संगठनों ने जो है वह बहिष्कार कर दिया था। क्योंकि वही बात है उनकी मांगे जो नहीं मानी गई और फिर वहां इनसे अपमानजन तरीके से जो है यह बात कर रहे थे। इसकी अध्यक्षता ब्रिटिश के प्रधानमंत्री रेमजे मैकडोनाल्ड ने की थी। रेमजे मैकडोनाल्ड मेक डोनाल्ड का नाम याद रखना। पहली जो बैठक है इसकी अध्यक्षता कौन करते हैं? प्रधानमंत्री थे उस समय ब्रिटिश के ब्रिटेन के जिसका नाम था रेमजे मैकडोनाल्ड। रेमजे मैकडोनाल्ड। आर्य समाज की स्थापना का उद्देश्य क्या है? देखो आर्य समाज की स्थापना किसके द्वारा की? यह भी होमवर्क के रूप में ही करोगे आप। मैं आपको मोटे-मोटे तो यह करा दिया है प्रश्न मैंने। स्वामी विवेकानंद जी द्वारा की जाती है। आर्य समाज का जो उद्देश्य है वो क्या है कि वेदों के ज्ञान को जन-जन तक पहुंचाना। वेदों के ज्ञान को जन-जन तक पहुंचाना। और स्वामी विवेकानंद जी ने ही नारा दिया था वेदों की ओर लौटो। वेदों की ओर लौटो का नारा दिया। अब द्वितीय गोलमेज सम्मेलन भी बताया हमने। लंदन में होता है। कब होता है? 1931 में होता है। यह सन भी आपको याद है। 7 सितंबर 1931 से 1 दिसंबर 1931 तक चला था। इसमें कांग्रेस के एकमात्र प्रतिनिधि के रूप में गांधी जी ने हिस्सा लिया। तो दूसरे में भाग कौन से लेते हैं? गांधी जी पहले में नहीं गए थे गांधी जी। गांधी जी दूसरे गोलमेज सम्मेलन में भाग लेते हैं। द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में मदद मोहन मालवीय और एनी बेसेंट ने खुद के खर्च पर जो है वह हिस्सा लिया था। यानी अंग्रेज जो लोग हैं वह पैसा दे रहे थे इनको आने के लिए। लेकिन यह बोले नहीं चाहिए। मदन मोहन मालवीय और एनी बेसेंट खुद के खर्च पर जो है इस सम्मेलन के अंदर क्या लेते हैं? भाग लेते हैं। इस सम्मेलन के अंदर जो वह क्या लेते हैं? भाग लेते हैं। यह बात याद रखना। तृतीय गोलमेज सम्मेलन की बात करते हैं। तृतीय गोलमेज सम्मेलन की बात करते हैं तो डॉ. भीमराव अंबेडकर जी मिलेंगे यहां। तृतीय गोलमेज सम्मेलन में 17 से 24 दिसंबर 1932 तक लंदन में आयोजित किया गया था। लेकिन भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने इसका बहिष्कार किया था। जिसके कारण कम भागीदारी रही थी। हालांकि भीमराव अंबेडकर और तेज बहादुर सपू जैसे नेताएं इसके नेता जो लोग थे वह उन्होंने इसमें भाग लिया था। गांधी जी नहीं गए थे तीसरे में। तीसरे आंदोलन में गांधी जी यहां पर नहीं जाते हैं। यह बात आप याद रखोगे। गांधी जी भाग नहीं लेते हैं। भाई साहब तीसरे आंदोलन में पूना पैक्ट क्या था? पूना पैक्ट बहुतेंट है। 2020 में यह प्रश्न पूछा गया है। पूना पैक्ट को लेकर मेरे भाई 2020 में परीक्षा में प्रश्न आया है। तो महात्मा गांधी का और डॉ. भीमराव अंबेडकर का जो नाम है वह आप याद रखोगे। हां पुना फैक्ट क्या था कि सितंबर 1932 में यह समझौता कब होता है? पुना समझौता 1932 में अंबेडकर तथा अन्य हिंदू नेता के प्रयत्न से स्वर्ण हिंदुओं तथा दलितों के मध्य एक समझौता हुआ था। दलितों के मध्य एक समझौता हुआ था। इसे पुनः समझौता के नाम से जाना जाता है। पहले मेरे भाई यहां से इतनी बात पढ़ो। सितंबर 1932 में डॉ. अंबेडकर तथा अन्य हिंदू नेताओं के प्रयत्न से स्वर्ण हिंदुओं तथा दलितों के मध्य एक समझौता किया गया। इसे पुनः समझौता कहते हैं। इस समझौते में सुनो दलित वर्ग के लिए पृथक निर्वाचन मंडल समाप्त कर दिया गया था। यानी दलितों का जो चुनाव है चुनाव में कौन-कौन भाग लेगा चुनाव कैसे होगा वो चीज अलग होती थी। वो चीज यहां पर खत्म की कि ऐसा नहीं होगा। तथा व्यवस्थापिका सभा में हरिजनों के स्थान पर हिंदुओं के अंतर्गत ही सुरक्षित रखे जाएंगे। ठीक है? ठीक है? हरिजन मतलब गांधी जी ने हरिजन दलितों को कहा है। गांधी जी ने जो हरिजन है वो किनको कहा है? दलितों को। है ना? गांधी जी का एक समाचार पत्र भी है हरिजन। तो यहां पर क्या बोली? व्यवसाय व्यवस्थापिका यानी संसद। संसद में दलितों के स्थान पर हिंदुओं के अंतर्गत ही दलितों के स्थान हिंदुओं की तरह ही हिंदुओं के अंतर्गत ही सुरक्षित रखे जाएंगे। जैसे दोनों साथ ही बैठेंगे सभी का काम एक जैसा होगा। नंबर दो काम प्रांतीय विधानमंडलों में दलितों के लिए आरक्षित सीटों की संख्या 47 से बढ़ाकर 147 कर दी। यानी कितनी संख्या बढ़ाई गई? 100 और बढ़ा दी। टोटल कितनी कर दी थी सीटें? 147 147 जो सीटें हैं यहां पर टोटल कर दी गई। कितनी सीटें कर दी गई भाई? 147 सीटें जो है यहां पर कर दी गई। 147 सीटें जो है यहां पर कर दी गई थी। मद्रास में 30 और बंगाल में भी 30 मध्य प्रांत संयुक्त प्रांत में 2020 बिहार और उड़ीसा में 18-1 मुंबई एवं सिंध क्षेत्र में 151 पंजाब में आठ तथा असम में सात दलितों के लिए जो आरक्षित कर दी गई थी सीटें तीन नंबर बात में याद ये रखना देखो मद्रास में 30 बंगाल में भी कितनी सीटों का आरक्षण 30 मध्य प्रांत और संयुक्त प्रांत में 2020 बिहार और उड़ीसा में 18 बिहार और उड़ीसा में 18-18 मुंबई एवं सिंध में 151 पंजाब में आठ तथा असम ने सात स्थानों दलितों के लिए सुरक्षित जो है वो कर दिए थे। सात स्थान जो है वो दलितों के लिए क्या कर दिए थे? सुरक्षित कर दिए गए थे। नंबर चार केंद्रीय विधानमंडल में दलित वर्ग को प्रतिनिधित्व देने के लिए संयुक्त व्यवस्था को मान्यता दी गई थी। संयुक्त व्यवस्था को क्या दी गई थी? मान्यता दी गई थी। यह बात आप जो है वो याद रखोगे। संयुक्त व्यवस्था को जो है वो क्या दी गई थी? मान्यता दी गई थी। केंद्रीय विधानमंडल में दलित वर्ग को प्रतिनिधि देने के लिए संयुक्त व्यवस्था को मान्यता दी गई थी। संयुक्त व्यवस्था को क्या दी गई थी? मान्यता दी गई थी। यह बात आप सभी साथी जो है वो याद कर लेंगे। ठीक है ना? तो यह सीटें की संख्या याद कर लेना। पेज पे लिखकर आप करोगे ना याद 5 मिनट ही नहीं लगेंगे मेरे भाई याद होने में। 5 मिनट भी नहीं लगेंगे। चलिए भारत छोड़ो आंदोलन पर टिप्पणी करो। पहले तो सारे कमेंट करके बताओ भारत छोड़ो आंदोलन कब हुआ था? कमेंट में टिप्पणी करके बताओ भारत छोड़ो आंदोलन जो है कब होता है? अगस्त का महीना है मेरे भाई 1942 में मैं हूं भारत छोड़ो बे हूं 42 भारत छोड़ो आंदोलन 1942 में शुरू होता है गांधी जी के द्वारा। गांधी जी ने कहा कि बहुत टाइम हो गया अंग्रेजों तुम्हें भारत में राज करते हुए। हमने हर प्रकार से आपको झेला है। अब यह भारतीयों को मोटिवेट करते हुए कह रहे हैं डू एंड डाई। या तो करो या मरो। करो या मरो का नारा गांधी जी देते हैं। कौन से आंदोलन में? भारत छोड़ो आंदोलन में। 2022 में प्रश्न आया है। गांधी जी के नेतृत्व में यह आंदोलन शुरू होता है। तो याद रखना भारत छोड़ो आंदोलन 1942 में महात्मा गांधी जी के आहान पर बॉम्बे यानी अबका मुंबई गवालिया टेंट ग्वालिया टैंक मैदान के अंदर गवालिया गोवालिया टैंक मैदान में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सत्र में शुरू हुआ था। इसका मुख्य उद्देश्य था ब्रिटिश शासन को तत्कालीन समाप्त कर दो। बिल्कुल ही। पहले हम इनके आगे हाथ जोड़ रहे हैं कि आप इस मांग को ऐसे करो, वैसे करो, यह करो, वो करो। नहीं अब इन अंग्रेजों को यहां से भारत से बाहर निकालो। भारत को पूर्ण स्वतंत्रता दिलानी है। अब पहले यह कह रहे थे कि कोई बात नहीं स्वराज दे दो। हम भारतीय अंग्रेज तुम रहो कोई बात नहीं है। लेकिन अब गांधी जी ने यहां बहुत बड़ा आंदोलन खड़ा कर दिया। भारत छोड़ो और कहा कि अंग्रेज लोग जो आप हो यहां से बाहर निकलो। यहां से क्या निकलो? बाहर निकलो। तो भारत छोड़ो आंदोलन के महत्व की विवेचना भी आपको करनी है। 2018 में आया। इंपॉर्टेंट है। एक तो यह बात बताई भारत छोड़ो आंदोलन से। अब विवेचना करेंगे तो क्या पढ़ेंगे इसमें? कि भारत छोड़ो आंदोलन का जो महत्व था, वह क्या था? भारत छोड़ो आंदोलन में निम्नलिखित है। इसमें स्वतंत्रता के अंतिम चरण की शुरुआत की और भारत के लिए पूर्ण स्वतंत्रता की मांग को मजबूत किया गया। जिससे अंग्रेजों पर दबाव बढ़ा। अंग्रेजों पर क्या बढ़ा? दबाव। जब पूर्ण स्वतंत्रता की बात की तो अंग्रेज डरने लगे। अंग्रेजों को डर था कि भाई साहब अब यह भारतीय के गुस्सा यहां पर आ गया। अब यह हमें यहां से निकालेंगे। दूसरी बात यह आंदोलन शहरों से लेकर गांवगांव तक फैल गया था। पहले तो बड़े-बड़े प्रांतों में था। अब यह गांव-गांव तक आ गया। ढाणी ढाणी तक आ गया। अब सभी धर्मों और जातियों के लोग ने हिस्सा लिया जिससे बहुत बड़ी राष्ट्रीय एकता और देशभक्ति की भावना जो हो बड़ी। अब अंग्रेज बोले भाई साहब सारे आगे लठ ले लेंगे। ऐसा पीटेंगे पानी में डुबो डुबो के मारेंगे हमें। अच्छा रहेगा अगर हम यहां से भाग जाएं। अच्छा रहेगा अगर हम यहां से भाग जाए। महात्मा गांधी ने इस नारे में भारतीय में दृढ़ निश्चय और बलिदान की भावना जगाई जिससे व्यापक हड़ताल और विरोध प्रदर्शन हुए थे। करो या मरो का नारा दिया था ना। कौन सा नारा दिया था? करो या मरो। यह नारा बहुत बड़ा मोटिवेशन का काम करता है यहां पर। इससे व्यापक हड़ताल और विरोध प्रदर्शन जो होने लगे थे अंग्रेजों के खिलाफ। तो यह था बेहतर इन महात्मा गांधी के असहयोग आंदोलन का। ठीक है। तो भाई साहब, यह थी आज की आपकी क्लास। यह थी आज की आपकी क्लास। कैसी लगी? मुझे बहुत मजा आया मेरे भाई इस क्लास में आपको पढ़ाकर। कितने अच्छे-अच्छे कांसेप्ट क्लियर हुए हैं। सोचो मेरे भाई दो घंटे क्लास थी। आपने कितना कुछ सीखा है। इतना जितने महीने आपने पढ़ा, मुझे यह लगता है कि उससे ज्यादा आपने यहां पर सीखा है। है ना? कुछ नई बातें भी सीखी हैं। कुछ बातों का रिवीजन भी हो गया। कल शिवम सर की क्लास रहेगी अपनी सुबह मेरे भाई 8:30 बजे एक भी साथी नहीं रहोगे जितनी भी परीक्षा भी अब क्लास लेके गया चाहे जीके की लाए एसएसटी की लाए मैथ की लाए जो भी सब्जेक्ट की आपको आपको वह क्लासेस ईमानदारी के साथ देखनी है पूरी की पूरी फिर आप देखना परीक्षा में आपको हमारी बातें ना याद आए तो हमें कह देना यह गूंजती हुई बातें आप परीक्षा हॉल में बैठे होगे ना आपके आसपास चलेंगी और आप उनको पकड़ पकड़ के लिखोगे पकड़ पकड़ के मेरे भाई आप उनको लिख दोगे यूपीटेट 2026 के लिए रक्षक बैच ला एल वन यूपीटेट के लिए लेवल वन के लिए रक्षक बैच हमने शुरू कर दिया है और मेरे भाई इस बैच के अंदर आप फैकल्टी देखोगे अध्यापक देखोगे मजा आ जाएगा यहां पर आपको जो टीचर देखने को मिलेंगे यहां पर जो टीचर एक्सपीरियंस होल्डर पीवाई क्यू का अध्ययन करके जो है अब हम यहां आपको टीच करवाएंगे। यह मात्र और मात्र 299 का बैच भाई साहब अपने इंडिया में आपको इतनी बढ़िया क्वालिटी में इतने ऑफर प्राइस में कोर्स नहीं मिलेगा। अरे ₹300 कितने कमाते हो? एक किताब आती है और हम यहां यूपीटेट के अंदर लाइव क्लास देंगे, वीडियो क्लासेस देंगे, ऑनलाइन टेस्ट देंगे, प्रैक्टिस सेट देंगे और डाउट सेशन भी देंगे। तो अभी जाइएगा परीक्षा वीर ऐप को डाउनलोड कीजिएगा और अपने सपनों को साकार कीजिएगा। अपनी तैयारी को मजबूत कीजिएगा। अधिक जानकारी के लिए आप हमारे नीचे दिए गए WhatsApp नंबर पे WhatsApp मैसेज कर भी आप इस कोर्स को परचेज कर सकते हो। जिसको एप्लीकेशन में समझ नहीं आ रहा है तो WhatsApp पे आप मैसेज कर दीजिएगा। आपको कोर्स मिल जाएगा। मिल जाएगा। अब मेरी बात सुनो। कल आपकी क्लास होगी एक तो सुबह 8:30 बजे। एक तो होगी कल सुबह 8:30 बजे। यहां पर यह जो क्लास होगी यह तो होगी गणित की यानी मैथ की और एक क्लास होगी आपकी 1:30 बजे। एक क्लास जो है वो आपकी होगी 1:30 बजे। 1:30 बजे यह क्लास जो रहेगी वह एसएसटी की जो मैं आज आपकी अभी सुबह ली ना यह कल मैं आपको कराऊंगा 1:30 बजे क्लास। ठीक है? नींद नहीं लेके पूरी धाप के नींद ले लेना। ऐसे नहीं है कि दोपहर में आओ खाना खा के और खाना भी एक दो रोटी भूख से कम ही खानी है कि क्लास के अंदर अंत तक बैठे रहो। हां तो बताओ मेरे भाई आज की क्लास में आज की क्लास में आपको कितना का आनंद आया? कैसी लगी मेरे भाई? आप जरूर बताओ। बहुत अच्छी लगी सर। अरे वाह भाई वाह बस अब इतनी मेहनत की इसका फल मिल गया मेरे भाई सभी साथी चैनल को सब्सक्राइब करेंगे और क्लास को लाइक कर दे जाते-जाते एक मिनट भी नहीं लगेगा आपको कमेंट करने में यह बताने में कि आपको यह क्लास कैसी लगी कोई इंप्रूवमेंट करना हो हमारी टीम के द्वारा या हमारे द्वारा तो आप जरूर कमेंट में सुझाव दिया करें मेरे दोस्तों मिलते हैं अपनी अगली क्लास में तब तक के लिए सभी मेरे प्यारे साथियों को नमस्कार जय हिंद
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