रामापीर जरे समाधि लीी त्यारे क हत के आकाश माथ ब्रह्मा विष्णु ने महेश आवे तो मारी समाधि न खोदता पते मित्र बन के रामापीर समाधि फरी खोद पड़ तो नी पास रहस्य तो आ जा वडियो मा हरभज रामापीर ना मासिया भाई भाई करता बने जने मित्रता नातो वधारे बने एक बजाने मड़े नहीं त्या सुधी चन पड़त नहीं रामापीर रणुजा कोड़ी लने चालता थाय अने हरजी बाजू ना गाम माथ ड़ी लने आवे आम अद वचे बने भाइयो भेगा थाए कबा पानी करे अने सुख दुखनी वातो करे कोई दिवस होय के बने भाई एक बीजा ने मड़े नहीं आलो अदभुत बने वच्चे प्रेम हतो एकवार रामापीर नेम थय के मारे हवे समाधि लेवी जोइए मारू जीवन कार्य मारे समाप्त करव जोइए पमने बख हती के हरभज अने समाधि लेवा देश नहीं आ काम मने नहीं करवा दे ने आ वात जान हरभज ने करवी नती पर हरभज जरे प रामापीर ने मरता रे एवी वातो करता के भाई जो जो हो मारा कोई वात छुपाने रखता नहीं मने दगो आपता नहीं भाई आवी वात हरब जीी वारंवार रामापीर ने करता ले रामापीर नेम थय के मारे समाधि लेवी पर हरब जीने जाण नथी करवी पछ तो पोकरण गढ मा रामापीर ने समाधि लेवी एवी वात जाण करी त्या तो आखा पोकरण गढ मा अने राज महल मा शोकन माहोल सजाई गयो मानसने खावा उतरत नथी चारे बाजू साधु संतो ने बोलाव सगा वाला ने तेव एक मात्र हरभज ने जाण करी नहीं पछ तो आखा पोकरण गना माणस रामापीर ने समाधि जोवा जाय छ रामापीर समाधि खोदा त्या जमना धर्म ना माने बहन डाली बन रामापीर ने कहे के भाई तमारी पहला मारे समाधि लेवानी रे रामापीर कह केनी निशानी श डाली बाई क के समाधि खोदो ने रे माथ आटो ने दोरी निक तो समाधि मारी छ पछ तो समाधि खोदा अने माथ आटो ने दोरी नीक अने मा सपथम डाली बाई समाधि लीी अने बाजू मा बीजी समाधि खोदाई अमा रामापीर समाधि लीी समाधि लेता पहला रामापीर पोना पिता अजमल राजाने कहू के पिताजी आकाश माथ ब्रह्मा विष्णु ने महेश आवे ने तो प मारी समाधि खोदता नहीं अने आ ल अमर कटोरो ने वीर डियो मारी बाजू मा तमारा हाथे मुको अने हं आज थी वचन आप छ के ूरा कुटुंब मा बाप पहला कोई दीक मर नहीं बोली अजमल राजाने वीर गेडियो आप अने एना हाथी एने रामापीर बाजू मा मने समाधि ऊपर माटी अने फूल वार पछ तो बधा राजमहल तरफ पाछा वड़ आखा गाम मा शोकन वातावरण सर्जा छ आ बाजू हरजी एक दिवस रामापीर ने न म्या ले दिवसे तो ते पाछा जता रह पर मन मा एम थय के आज केम मारो भाई मने मड़वा नहीं आव होय विचार करता हता तो पोक गथ एक माणस चालतो चालतो आवे हरब जीी माणस ने पूछ के भाई आज कम रामापीर थी आव्या माणसे क अरे हरजी तमने खबर नथी के रामा पीरे तो समाधि लीी हरजी वात मानता नथी के ना होय एम थोड़ी रामापीर समाधि ले अने मने की विना अने फड़फ घोड़ी तैयार करीने पोकरण तरफ निक पड़ने ज अधे पच तो रामा सामे थ घोड़ी ऊपर बैसी ने आवे छ अने रामापीर बोल्या अरे भाई हरभज तू क्या हतो हाल हाल तारा विना अमल कटोरो मने नहीं मजा आवे पछ तो बे भाइयो कंबा पानी ली पछी हरभज कहे छ के भाई मैं तो अमंगल समाचार साभ मारा भाई त्या तो मारा पग नीचे थ जमीन सरकी गई समाचार साभ के रामापीर समाधि लीी छ पर सारू कर्य भाई तू अहिया ज मने मली गयो नहीं तो मारा देह माथ प्राण नीक जात रामापीर कहे के ना ना भाई तने खोटा समाचार म नहीं तों तारी सामे बैठो छ आम पछ तो अमल ड़ी ने बने भाईयो पो अने पछ बने भायो नोखा थया नोखा थने अधे सुधी पचे त्या हरब जीने एम थाय के लावने के लावने पोकरण ग घरे म आ विचारी ने ते पोकरण गन रतो पकड़े अ रामापीर बीजे रस्ते थ जाए हरभज पोकरण पचने जोय तो राज महल मा शोकन वातावरण सवाल जने पूछ के श थय त्यारे माता मनर देवी जवाब आप के बेटा आपने बने मुने रामदेव चाल गयो एने समाधि लीी आलू साता हरजी खड़खड़ दांत काने हसवा लाग्या अने बोल्या एव ना होय मा रामदेव तो मने रस्ता म अने अ बने भायो कबा पा ली मारा रामापीर समाधि न लीी य अने त कहो के काले रामापीर समाधि लीी तो मने कलाक पहला तो रामापीर भेगा थया छ पछ तो आ साने अजमल राजाने थय के कदाच समाधि मा मुंजो थयो होय अने रामापीर बहर नीक गया होय तो हालो जने जोइए बधा समाधि पासे जाए अने फरी समाधि खोवा लागे ज समाधि ऊपर पावो मारवा जाए तो अंदर अवाज आयो हा ना पाड़ी हती ने तो प समाधि खोवा आव्या की हत ने आकाश माथ ब्रह्मा विष्णु ने महेश आवे ने तो पर मारी समाधि खोदता नहीं पर त ना रही शक मैं तमने आशीर्वाद आप्या ता तुरा कुड़मा बाप पहला कोई दीक मर नहीं प मारू आपे वचन हवे मिथ्या थायम आलू बोने अवाज शांत थई गयो पछ तो बने खूब अफसोस थयो अने हरभज समझी गया तो मने परचो दध छ समाधि ली पछ पर मारो भाई मारी साथे कंबा पीवा आयो जय रामापीर
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