काफी पुराने जमाने की बात है जब बादशाहों की हुकूमत हुआ करती थी और लोग सादा जिंदगी गुजारा करते थे। एक छोटे से गांव में एक गरीब लकड़हारा रहता था जिसका नाम रहमान था। वो हर रोज सुबह सवेरे जंगल जाता, लकड़ियां काटता और फिर उन्हें बाजार में बेचकर अपने घर वालों का गुजारा करता था। रहमान की बीवी का नाम ज़ैनब था और उनके दो छोटे बच्चे भी थे। घर की हालत ज्यादा अच्छी नहीं थी। अक्सर ऐसा होता कि खाने के लिए भी बहुत कम चीजें होती थी। लेकिन इसके बावजूद रहमान कभी शिकायत नहीं करता था। वो हमेशा कहता था कि जो कुछ अल्लाह देता है उसी में बरकत होती है। ज़ैनब भी सब्र करने वाली औरत थी। वो हर हाल में अल्लाह पर भरोसा रखती थी। एक दिन हस्बे मामूल रहमान जंगल में लकड़ियां काटने गया। उसने देखा कि आसमान पर घने बादल छा रहे हैं। उसे लगा कि शायद बारिश होने वाली है। इसलिए वह जल्दी-जल्दी लकड़ियां काटने लगा ताकि बारिश आने से पहले घर वापस पहुंच जाए। लेकिन अचानक मूसलाधार बारिश शुरू हो गई। रहमान फौरन एक बड़े दरख्त के नीचे जाकर खड़ा हो गया। मगर बारिश इतनी तेज थी कि उसकी कटी हुई सारी लकड़ियां भीग गई। रहमान एक लम्हे के लिए परेशान हो गया। उसने सोचा कि अब यह गीली लकड़ियां कौन खरीदेगा। मगर फिर उसने खुद को तसल्ली दी और दिल में कहा, "यह सब अल्लाह की मर्जी से हो रहा है। शायद इसमें भी कोई भलाई छुपी हो। कुछ देर बाद बारिश रुक गई। रहमान ने अपनी लकड़ियां उठाई और बाजार की तरफ चल पड़ा। रास्ते भर वो सोचता रहा कि शायद आज लकड़ियां ना बिके और घर वाले भी उसका इंतजार कर रहे होंगे। जब वह बाजार पहुंचा तो उसने अपनी लकड़ियां जमीन पर रख दी। लोग आते, लकड़ियां देखते और मुंह बनाकर आगे बढ़ जाते। कोई कहता यह तो सारी गीली है। कोई कहता यह तो जलेंगी भी नहीं। यह सुनकर रहमान का दिल उदास हो गया। आहिस्ता-आहिस्ता दोपहर हो गई मगर उसकी एक भी लकड़ी नहीं बिकी। रहमान खामोश बैठा। दिल ही दिल में अल्लाह से दुआ कर रहा था। वो कह रहा था या अल्लाह तू बेहतर जानता है कि मेरे हक में क्या बेहतर है। शाम होने लगी तो उसने सोचा कि अब घर वापस लौट जाना चाहिए। वो अपनी लकड़ियां समेटने लगा कि अचानक एक बूढ़ा शख्स उसके पास आया। उसका लिबास निहायत उम्दा था और वो किसी अमीर आदमी की तरह लग रहा था। बूढ़े ने पूछा, "यह लकड़ियां गीली क्यों है? रहमान ने सच-सच सारी बात बता दी कि बारिश की वजह से लकड़ियां भीग गई हैं। यह सुनकर बूढ़ा आदमी खुश हो गया और बोला, "यह तो बहुत अच्छी बात है। मैं एक हकीम हूं और बाज़ खास दवाएं गीली लकड़ियों से ही तैयार होती हैं। यह कहकर उस हकीम ने रहमान की सारी लकड़ियां खरीद ली और कीमत भी दुगनी दे दी। रहमान की खुशी की इंतहा ना रही। उसे समझ आ गया कि जो चीज उसे नुकसान लग रही थी, वही उसके लिए फायदा बन गई। वो खुशी-खुशी घर वापस पहुंचा। दरवाजे पर उसकी बीवी ज़ैनब और बच्चे उसका इंतजार कर रहे थे। जब रहमान ने ज्यादा पैसे दिखाए तो सब हैरान रह गए। उसका छोटा बेटा अली खुश होकर बोला, अब्बू, आज इतने सारे पैसे कहां से आए? रहमान मुस्कुरा कर बोला, बेटा यह सब अल्लाह की रहमत है। अगले दिन जब रहमान दोबारा लकड़ियां काटने के लिए घर से निकला, तो उसके दिल में एक ख्याल आया कि अगर वह खुद ही लकड़ियों को पानी में भिगो दे, तो शायद फिर दुगनी कीमत मिल जाए। लेकिन फौरन ही उसने खुद को रोका और कहा नहीं यह गलत होगा। अल्लाह इंसान को आजमाता है। मुझे धोखा नहीं देना चाहिए। वो जंगल पहुंचा तो उस दिन मौसम बहुत खूबसूरत था। सूरज की रोशनी दरख्तों के बीच से चमक रही थी। रहमान ने अपनी कुल्हाड़ी तेज की और लकड़ियां काटने में मशरूफ हो गया। दोपहर के वक्त वो खाना खाने के लिए एक दरख्त के नीचे बैठ गया। अभी उसने खाना निकाला ही था कि अचानक जंगल में शोर मचने लगा। चंद लोग भागते हुए उसकी तरफ आए। रहमान ने पूछा क्या हुआ? एक आदमी ने हापते हुए कहा, जंगल में डाकू आ गए हैं। वो लोगों को लूट रहे हैं। यह सुनकर रहमान के दिल में खौफ पैदा हो गया क्योंकि उसके पास कल के बचे हुए पैसे भी थे। मगर फिर उसने खुद को तसल्ली दी और सोचा जो कुछ होता है अल्लाह की हिकमत से होता है। उसी वक्त उसने देखा कि एक दरख्त के पीछे कोई शख्स छुपा हुआ था। वो बहुत घबराया हुआ था। जब रहमान ने गौर से देखा तो वह कल वाला हकीम था। हकीम ने बताया कि डाकू उसका सारा सामान लूट कर ले गए हैं जिसमें कीमती दवाएं भी थी और अब वह शहर जाने से डर रहा है। रहमान ने फौरन कहा आप फिक्र ना करें। मैं आपको महफूज़ रास्ते से शहर तक पहुंचा देता हूं। चुनांचे दोनों जंगल के खुफिया रास्तों से सफर करने लगे। रहमान अपनी लकड़ियां वहीं छोड़ आया था। लेकिन उसे इसकी कोई परवाह नहीं थी क्योंकि वह समझता था कि किसी की मदद करना सबसे बड़ी नेकी है। रास्ते में हकीम ने पूछा तुम इतने नेक क्यों हो? तुमने मेरे लिए अपनी लकड़ियां क्यों छोड़ दी? रहमान मुस्कुरा कर बोला, इंसानों की मदद करना अल्लाह को पसंद है। जब कोई दूसरों की मदद करता है, तो अल्लाह उसकी मदद करता है। कल आपने मेरी मदद की थी, आज मैं आपकी कर रहा हूं। यह सुनकर हकीम बहुत मुतासिर हुआ। आखिरकार जब वो शहर पहुंच गए तो हकीम ने कहा मैं तुम्हें कोई इनाम देना चाहता हूं। लेकिन रहमान ने आजजी से कहा मुझे किसी इनाम की जरूरत नहीं। मैंने सिर्फ इंसानियत की खातिर यह काम किया है। मगर हकीम ने इसार किया और अपनी जेब से एक छोटा सा थैला निकालकर रहमान को देते हुए कहा, बूढ़े हकीम ने वो छोटा सा थैला रहमान को देते हुए कहा, "इसके अंदर जादुई बीज हैं। इन्हें अपने घर के आसपास कहीं बो देना। मुमकिन है यह तुम्हारी किस्मत बदल दें। रहमान जब घर पहुंचा तो उसके हाथ में बीजों का एक छोटा सा थैला था। लेकिन आज उसके पास कोई कमाई नहीं थी। ज़ैनब ने पूछा आज क्या हुआ? रहमान ने सारा वाकया उसे सुना दिया और कहा कि उस बूढ़े हकीम की मदद करना जरूरी था। ज़ैनब ने मुस्कुरा कर कहा, "आपने बहुत अच्छा किया। अल्लाह हमारा रिज़्क कहीं ना कहीं से भेज ही देगा। रात के वक्त घर में खाने के लिए सिर्फ थोड़ा सा आटा और नमक था। बच्चे भूखे थे मगर फिर भी खामोश थे और कोई शिकायत नहीं कर रहे थे। रहमान ने उन बीजों को देखा और सोचने लगा कि हकीम ने कहा था यह तुम्हारी किस्मत बदल देंगे। फिर उसके दिल में ख्याल आया कि सबसे पहले अल्लाह से दुआ मांगनी चाहिए। फिर मेहनत करनी चाहिए। चुनांचे उसने अल्लाह से दुआ की। अगले दिन उसने घर के पीछे थोड़ी सी जमीन साफ की और वह बीज वहां बो दिए। वो बीज बिल्कुल आम से लग रहे थे। उनमें कोई खास बात नजर नहीं आ रही थी। रहमान ने उन्हें पानी दिया और दुआ की या अल्लाह अगर इनमें कोई भलाई है तो हमें इसमें बरकत अता फरमा। फिर वो कुल्हाड़ी उठाकर जंगल की तरफ निकल गया। आज वो पहले से ज्यादा दूर चला गया ताकि डाकुओं से महफूज़ रह सके। वहां पहुंचकर उसने देखा कि उस जगह बहुत से नए दरख्त थे जिनकी लकड़ियां बहुत अच्छी थी। उसने अल्लाह का शुक्र अदा किया और काम में लग गया। जब दोपहर के वक्त वो वापस घर आया तो उसने देखा कि जहां उसने बीज बोए थे वहां छोटे-छोटे पौधे निकल आए थे। रहमान हैरान रह गया क्योंकि आमतौर पर बीज उगने में कई दिन लग जाते हैं। ज़ैनब ने भी जब यह देखा तो हैरान होकर बोली, "यह तो कमाल हो गया। यह बीज इतनी जल्दी कैसे उग गए? उस दिन रहमान ने अपनी लकड़ियां बाजार में बेचीं क्योंकि लकड़ियां बहुत अच्छी थी इसलिए अच्छी कीमत मिल गई। वापसी पर वो घर के लिए खाने-पीने का सामान भी ले आया। जब वो घर पहुंचा तो देखा कि पौधे पहले से भी बड़े हो चुके थे और उन पर छोटे-छोटे फूल भी लग गए थे। तीसरे दिन जब रहमान ने देखा तो उन पौधों पर सुनहरी रंग के अजीबोगरीब फल लग चुके थे। रहमान ने एक फल तोड़ा। जब उसे खोला तो अंदर से मोती जैसी चमकदार चीज निकली। वो हैरान रह गया। उसे समझ नहीं आ रही थी कि यह क्या चीज है। आखिर उसने फैसला किया कि वो यह फल शहर के बड़े बाजार में ले जाएगा। वहां जो बड़े ताजिर और ज्वारी होते हैं, वह बता देंगे कि यह क्या चीज है। चुनांचे उसने चंद फल तोड़े और एक थैले में डाल लिए। फिर ज़ैनब से कहा, "मैं शहर जा रहा हूं। देखते हैं यह क्या चीज है। रहमान शहर के बड़े बाजार में पहुंचा और एक मशहूर जौहरी को वह फल दिखाए। जहरी ने जैसे ही उन्हें देखा तो उसकी आंखें हैरत से फैल गई। वो बोला यह तो निहायत कीमती हीरे हैं। तुम्हें यह कहां से मिले? रहमान ने सच-सच बता दिया कि यह उसके घर के पौधों पर लगे हैं। जहरी हैरान होकर बोला, "मैंने अपनी जिंदगी में ऐसा कभी नहीं देखा। उसे रहमान के सारे हीरे खरीद लिए और बदले में इतनी दौलत दी कि रहमान की खुशी की कोई हद ना रही। घर वापस आते हुए रहमान के दिल में खुशी भी थी और हैरत भी। उसे यकीन हो गया कि यह सब उसके सब्र और नेकी का सिला है। लेकिन इसी के साथ उसके दिल में एक फिक्र भी पैदा हुई कि कहीं यह अचानक आने वाली दौलत उसे गलत रास्ते पर ना ले जाए। जब वह घर पहुंचा तो उसके हाथ में बहुत सारी दौलत थी। ज़ैनब और बच्चे यह देखकर हैरान रह गए। रहमान ने बताया कि वह फल दरअसल कीमती हीरे थे। फिर उसने कहा, लेकिन हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि यह सब अल्लाह की अता है। दौलत इंसान को गरूर में मुब्तला भी कर सकती है। इसलिए हमें मोहतात रहना होगा। अगले ही दिन पूरे गांव में खबर फैल गई कि रहमान लकड़हारा अचानक अमीर हो गया है। लोग उसके घर आने लगे और तरह-तरह की बातें करने लगे। कोई कहता इसे खजाना मिल गया है। कोई कहता जरूर इसने कोई गलत काम किया है। रहमान ने सच-सच बता दिया मगर बहुत से लोग यकीन नहीं कर रहे थे। गांव का जमींदार जबार खान भी वहां आया। उसने हसद भरी नजरों से रहमान को देखा और कहा रहमान तुमने इतनी दौलत कहां से हासिल की है? जरूर तुमने कोई गलत काम किया है। रहमान ने साफ दिल से जवाब दिया यह सब अल्लाह का दिया हुआ है। लेकिन जब बार खान को यकीन नहीं आया वो बोला अगर वाकई वो पौधे हीरे देते हैं तो मुझे भी कुछ बीज दे दो। रहमान ने कहा मेरे पास तो सिर्फ वही बीज थे जो हकीम ने दिए थे। यह सुनकर जब बार खान गुस्से में आ गया और बोला तुम झूठ बोल रहे हो। तुम सिर्फ खुद अमीर होना चाहते हो। यह सुनकर रहमान को बहुत दुख हुआ। इसी रात जब रहमान नमाज पढ़कर फारग हुआ तो उसे बाहर शोर सुनाई दिया। लोग चीख रहे थे। आग लग गई है। आग लग गई है। रहमान बाहर निकला तो देखा कि गांव के कई घरों में आग लगी हुई है और तेज हवा की वजह से आग तेजी से फैल रही है। लोग अपने-अपने घर और सामान बचाने में लगे हुए थे। यह देखकर रहमान ने फौरन फैसला किया कि वह सबकी मदद करेगा। उसने अपने पैसों से पानी के बड़े-बड़े बर्तन मंगवाए। जिन लोगों के घर जल चुके थे, उन्हें अपने घर में पनाह दी। जैनब ने उन सबके लिए खाना तैयार किया। जब आग बुझ गई तो मालूम हुआ कि बहुत से लोगों के घर मुकम्मल तौर पर जल चुके हैं और उन्हें नए घर बनाने के लिए पैसों की जरूरत थी। रहमान ने बगैर सोचे समझे अपने हीरों से मिली हुई सारी दौलत उन लोगों में बांट दी। यह देखकर जबार खान भी शर्मिंदा हो गया। वो आगे बढ़कर बोला रहमान मैंने तुम पर गलत इल्जाम लगाया था। मुझे माफ कर दो। रहमान ने मुस्कुरा कर कहा कोई बात नहीं अल्लाह हम सबको माफ करे। जबब्बार खान ने हैरत से पूछा तुमने अपनी सारी दौलत लोगों में क्यों बांट दी? रहमान ने जवाब दिया जब अल्लाह देता है तो बेहिसाब देता है। हमें भी दूसरों की मदद करनी चाहिए। अगले दिन रहमान ने देखा कि वो पौधे जिन पर हीरे जैसे फल लगते थे अब मर चुके थे। वहां कुछ भी बाकी नहीं था। ज़ैनब ने पूछा क्या आपको अफसोस हो रहा है? रहमान मुस्कुरा कर बोला बिल्कुल नहीं अल्लाह ने यह दौलत मुझे इसीलिए दी थी ताकि मैं लोगों की मदद कर सकूं। जब मकसद पूरा हो गया तो वो पौधे भी खत्म हो गए। अब रहमान दोबारा वही सादा सा लकड़हारा बन गया था। मगर उसके दिल में अजीब सा सुकून था। पूरा गांव अब उसे इज्जत की नजर से देखता था। गांव के बच्चे अक्सर उसके पास आकर कहते चाचा रहमान आपने हमारी बहुत मदद की है। रहमान समझ चुका था कि असल दौलत सोना चांदी नहीं बल्कि लोगों के दिलों की मोहब्बत और अल्लाह की रजा है। कुछ महीने गुजर गए और रहमान अपनी पुरानी जिंदगी में वापस आ गया। वो रोज जंगल जाता, लकड़ियां काटता और बाजार में बेचकर वापस आ जाता। मगर अब गांव के लोग उसकी पहले से भी ज्यादा इज्जत करते थे। जब भी कोई मुश्किल में होता तो रहमान के पास आता और रहमान खुशी से उसकी मदद करता। एक दिन रहमान जंगल से लकड़ियां काटकर वापस आ रहा था कि उसे किसी की घबराई हुई आवाज सुनाई दी। वो आवाज की तरफ बढ़ा तो देखा कि एक गहरे कुएं में कोई शख्स गिर गया है। रहमान ने लकड़ियां एक तरफ रख दी और कुएं के पास जाकर झांका। अंदर एक नौजवान डूबने के करीब था। कुआं बहुत गहरा था और उसमें उतरना खतरनाक था। मगर रहमान ने जरा भी देर ना की। उसने अपनी रस्सी निकाली और फौरन कुएं में उतर गया ताकि उस नौजवान को बचा सके। कुएं का पानी बहुत ठंडा था। रहमान ने उस लड़के को सहारा दिया और पूरी ताकत लगाकर उसे बचाने की कोशिश करने लगा। लड़का बहुत कमजोर हो चुका था और उसकी सांसे तेज चल रही थी। रहमान ने दिल ही दिल में अल्लाह से दुआ मांगी और बड़ी मुश्किल से उसे ऊपर ले आया। बाहर आकर उसने उस लड़के को संभाला। थोड़ी देर बाद लड़के को होश आया। उसने खांसा और आंखें खोलकर रहमान की तरफ देखा। वो बोला आपने मेरी जान बचाई है। मैं आपका बहुत शुक्रगुजार हूं। मेरा नाम सलमान है। मैं दूसरे गांव से आया था। रास्ता भटक गया और इस कुएं में गिर गया। रहमान उसे अपने घर ले आया और ज़ैनब से कहा कि उसकी देखभाल करें। लड़के के कपड़े भीग चुके थे और उसे बुखार भी हो गया था। चंद दिन तक उसका इलाज रहमान के घर में होता रहा। रहमान अपने पैसों से उसके लिए दवाएं लाता और उसे अच्छा खाना खिलाता। जब सलमान बिल्कुल ठीक हो गया तो उसने रहमान का शुक्रिया अदा किया और बोला मैं आपका एहसान जिंदगी भर नहीं भूलूंगा मगर इससे पहले मैं आपको एक सच बताना चाहता हूं मैं आम लड़का नहीं हूं बल्कि बादशाह का बेटा हूं यह सुनकर रहमान हैरान रह गया सलमान ने कहा अगर आप मेरी जान ना बचाते तो मैं आज जिंदा ना होता अब मैं चाहता हूं कि आपको इसका इनाम मिले रहमान ने मुस्कुरा कर कहा मुझे किसी इनाम की जरूरत नहीं मैंने सिर्फ इंसानियत के नाते आपकी मदद की है लेकिन सलमान ने इसार किया और कहा मेरे वालिद बादशाह आपसे मिलना चाहते चाहते हैं। आप मेरे साथ दरबार चलें। रहमान ने हिचकिचाते हुए कहा, "मैं तो एक सादा आदमी हूं। मैं बादशाह से क्या मिलूंगा?" सलमान मुस्कुरा कर बोला, "आप जैसे नेक लोगों से मिलना भी बादशाहों के लिए अजाज होता है।" आखिरकार रहमान मान गया। अगले दिन महल से घोड़े आए। रहमान और सलमान उन पर सवार होकर महल की तरफ रवाना हो गए। जब वह महल पहुंचे तो रहमान ने देखा कि महल सोने चांदी से सजा हुआ है। मगर उसके दिल में जरा भी लालच नहीं आया। सलमान ने अपने वालिद बादशाह से रहमान का तारुफ करवाया। बादशाह ने कहा, "तुमने मेरे बेटे की जान बचाई है। यह हम पर बहुत बड़ा एहसान है। बताओ तुम्हें क्या चाहिए? सोना, जमीन या मेरे दरबार में कोई बड़ा ओहदा? रहमान ने सुकून से जवाब दिया। बादशाह सलामत, मैंने यह सब अल्लाह की रजा के लिए किया है। मुझे किसी इनाम की जरूरत नहीं। बादशाह उसकी बात सुनकर बहुत मुतासिर हुआ। वो बोला ऐसे नेक लोग दुनिया में बहुत कम होते हैं। मगर मैं तुम्हें खाली हाथ नहीं जाने दूंगा। रहमान ने कहा अगर आप वाकई कुछ करना चाहते हैं तो मेरे गांव में एक पानी का कुआं बनवा दें। वहां के लोग पानी के लिए बहुत परेशान होते हैं। यह सुनकर बादशाह ने फौरन हुक्म दिया कि एक नहीं बल्कि तीन कुएं खदवाए जाए और साथ ही एक मस्जिद और बच्चों के लिए मदरसा भी बनाया जाए। यह सुनकर रहमान की आंखों में खुशी के आंसू आ गए। बादशाह ने जाते हुए उसे एक छोटा सा संदूक भी दिया और कहा इसे घर जाकर खोलना। जब रहमान ने घर जाकर संदूक खोला तो उसमें कुछ दौलत और एक खत था। खत में लिखा था यह तुम्हारी जरूरत के लिए है। अगले दिन किसी ने दरवाजा खटखटाया। रहमान ने दरवाजा खोला तो सामने वही बूढ़ा हकीम खड़ा था जिसने उसे जादुई बीज दिए थे। हकीम मुस्कुरा कर बोला रहमान तुम हर आजमाइश में कामयाब रहे। पहले मैंने तुम्हें दौलत देकर आजमाया और फिर मुश्किल में डाल कर देखा। मगर तुमने ना लालच किया और ना खुदग्रजी दिखाई। अब अल्लाह तुम्हें हमेशा की बरकत अता करेगा। यह कहकर हकीम अचानक नजरों से गायब हो गया। उस दिन के बाद रहमान की हर मेहनत में बरकत होने लगी और गांव के लोग उससे पहले से भी ज्यादा मोहब्बत करने लगे। और जब भी कोई उससे कामयाबी का राज पूछता तो वह सिर्फ इतना कहता अल्लाह पर भरोसा रखो सब्र करो और हमेशा दूसरों की मदद करते रहो क्योंकि अल्लाह अपने बंदों को कभी तन्हा नहीं छोड़ता। तो दोस्तों इस कहानी से हमें यह सबक मिलता है कि असल कामयाबी दौलत या ताकत में नहीं बल्कि सब्र, ईमान और दूसरों की मदद करने में है। रहमान ने कभी लालच नहीं किया। हमेशा अल्लाह पर भरोसा रखा और हर हाल में लोगों की मदद की। इसी वजह से अल्लाह ने उसे इज्जत भी दी और बरकत भी। अब आप हमें कमेंट्स में जरूर बताएं अगर आप रहमान की जगह होते तो क्या आप भी अपनी सारी दौलत लोगों की मदद के लिए खर्च कर देते। वीडियो अच्छी लगी हो तो इसे लाइक करें। चैनल को सब्सक्राइब करें और बेल आइकॉन जरूर दबाएं ताकि ऐसी मजीद सबका आमूस कहानियां आप तक पहुंचती रहे। वीडियो देखने का बहुत-बहुत शुक्रिया। ओम
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