Khaala or Bhaii | A Emotional Heart Touching Story | Moral Story in Urdu | hindi kahani | love Story

Saima stories3,494 words

Full Transcript

मेरा ससुर मुझे बहुत ज्यादा खूबसूरत लगता था। अब ससुर को देख देख कर मुझे अपना मेरा शौहर बिल्कुल अच्छा नहीं लगता था। मेरे शौहर के मुकाबले में मेरे ससुर का जिस्म बहुत ज्यादा खूबसूरत था। मेरे ससुर ने खुद को बहुत ज्यादा फुट रखा हुआ था। मेरे ससुर आर्मी से रिटायर्ड हो चुके थे। उनकी पर्सनालिटी बहुत ही ज्यादा अच्छी थी। अब सारा दिन घर में रहते थे। मेरा बहुत दिल चाहता है कि मैं अपने ससुर के साथ दोस्ती कर लूं। लेकिन मेरा ससुर सलाम दुआ से ज्यादा मुझे नहीं बुलाते थे। मैं हर तरह से कोशिश कर रही थी कि वह मेरी तरफ देखें। लेकिन उन्होंने कभी मुझे गंदी नजर से नहीं देखा था। मुझे हैरानगी होती थी कि एक मर्द होकर उनकी नजर कभी मुझ पर नहीं पड़ी। दिन-बा दिन अपने ससुर के लिए मेरी मोहब्बत बढ़ती जा रही थी। पता नहीं मेरे ससुर ने ऐसा किया था कि मैं उनकी तरफ खींची चली जा रही थी। मैं अपने ससुर से बहुत मोहब्बत करने लगी थी। लेकिन मैं उनसे कहने से डरती थी। वह ज्यादा गुस्से वाले लगते तो नहीं थे। लेकिन फिर भी मुझे उनसे बहुत डर लगता था। फिर एक दिन मुझे अपने ससुर से बात करने का मौका मिल गया। मेरे शौहर अपने काम पर जा चुके थे। मेरी सास भी बाजार को सामान लेने चली गई। थी अब मैं और मेरे ससुर घर में अकेले थे। मेरा ससुर अपने कमरे में अकेला लेटा हुआ था। मैं जल्दी से टाइम जाया किए बगैर अपने कमरे से निकली और अपने ससुर के कमरे की तरफ चल दी मेरा ससुर। कोई फिल्म देख रहा था। टीवी की आवाज कमरे से बाहर आ रही थी। जैसे ही मैं ससुर के कमरे में पहुंची, मैंने दरवाजे पर जोर-जोर से दस्तक दी, मुझे ऐसा लग रहा था जैसे दरवाजे के अंदर से कुंडी लगी हो कुछ देर के बाद मेरे ससुर ने दरवाजा खोल दिया और मुझे देखकर हैरान रह गए। मुझे देखकर मुस्कुराने लगे और कहने लगे बाहर क्यों खड़ी हो बेटा अंदर। आ जाओ। मैं भी उनकी तरफ देखकर मुस्कुराने लगी और पीछे-पीछे उनके कमरे में चली गई। पहले की तरह आज भी मेरा ससुर बहुत ज्यादा खूबसूरत लग रहा था। मैं बार-बार अपने ससुर को देखने की। कोशिश कर रही थी। मेरे ससुर ने कमरे का दरवाजा फिर से बंद कर दिया था और वह टीवी देखने में मशरूफ हो गए। मैं भी एक सोफे पर बैठ गई। काफी देर खामोश रहने के बाद ससुर मुझसे कहने लगा। बताओ क्या बात है? तुम मुझे कुछ परेशान लग रही हो। पहले तो मैं कुछ देर खामोश रही। फिर मैं अपने ससुर से कहने लगी। मुझे आपसे जरूरी बात करनी है। मेरे ससुर उठ कर बैठ गए और मेरी बात को गौर से सुनने लगे। उन्होंने रिमोट उठाया और टीवी को बंद कर दिया। अब मेरे ससुर की शायद तवज्जो मुझ पर थी। मेरा ससुर बहुत हैरान हो रहे थे। ऐसी कौन सी बात है जिसकी वजह से मैं उनके कमरे में आ गई। पहले तो मैं ऐसी बात करने से घबरा रही थी। लेकिन फिर मैंने अपने ससुर को सब कुछ सच-सच बताना शुरू कर दिया। वह मेरी बातों को बहुत दिलचस्पी के साथ सुन रहे थे। मैंने उन्हें बताया मेरा शौहर मुझे ठीक से वक्त नहीं देता और ना ही मेरी ख्वाहिश को पूरा करता है। ऐसी ख्वाहिश जो हर औरत शादी के बाद चाहती है। और रात को भी मेरे साथ कुछ नहीं करता। जैसे ही काम से आता है याकर सो जाता है। मैं एन तरह से इसके साथ जिंदगी बिसर नहीं कर सकती। मेरे अंदर की आग को इसने कभी नहीं दबाया और वह मेरी। जरूरीरियात को भी ठीक तरह से पूरा नहीं करता। इसे मेरी बिल्कुल भी परवाह नहीं है। इसे मेरी खुशी से कोई मतलब नहीं। मुझे मेरा शौहर बिल्कुल ठीक नहीं लगता और ना ही वह मेरे साथ इस दवाजी। ताल्लुकात ठीक तरह से निभा रहा है। कभी कभार तो मुझे ऐसा लगता है जैसे वह शादी के काबिल ही नहीं था। मेरा ससुर मेरी बातों को बहुत गौर से सुन रहा था। मुझे पता ही नहीं चला। मैं बहुत ज्यादा बोल रही थी। मेरा ससुर मेरी तरफ बहुत प्यार भरे अंदाज से देख रहा था। वह मेरी ऐसी बातें सुन रहा था और बहुत ज्यादा हैरान हो रहा था इसे अपने बेटे की। उन हरकतों पर बहुत शर्म आ रही थी। मेरा ससुर मेरी तरफ प्यार से देखने लगा और फिर वह मुझसे कहने लगा मुझे तो इस बात के बारे में बिल्कुल अंदाजा नहीं था और ना ही मुझे कभी किसी ने। बताया था तुमने भी तो पहले कभी इस बारे में जिक्र नहीं किया था। तुम्हारी सास ने भी कभी मुझे इसके बारे में नहीं बताया था। आज पहली मर्तबा मैं यह बात तुमसे सुन। रहा हूं मैं भी उन हालात से थक गई थी। इसलिए मैंने अपने ससुर को सब कुछ बता दिया। मैंने यह भी बताया कि मेरे शौहर ने कभी मेरे साथ कुछ नहीं किया। मसला सिर्फ इस बात का नहीं था कि वो मेरी ख्वाहिश पूरी नहीं कर सकता। मसला तो यह था। जब मैं इससे अपनी ख्वाहिश को पूरा करने का कहती तो मुझे आगे से बहुत ज्यादा डांटता था। कभी कभार तो मेरे ऊपर हाथ भी उठा देता था। मेरी एस। बातें सुनते ही मेरे ससुर को मुझ पर तरस आने लगा। उन्होंने बहुत प्यार से मेरे सर पर हाथ फेरा और कहने लगे तुम परेशान मत हो फिर उन्होंने मुझे अपने गिले से लगा लिया आज पहली मर्तबा मुझे बहुत खुशी हो रही थी मेरा ससुर मुझसे इतना ज्यादा प्यार कर रहा था अपने ससुर को बहुत प्यार भरी नजरों से देख रही थी अभी मैं उनकी तरफ देख ही रही थी कि मेरा ससुर मुझसे कहने लगा मैं अभी इसी बात का कोई ना कोई हल निकाल देता हूं मैं अपने ससुर की बात सोचने लगी और फिर उनसे पूछने लगी आप इस बात का क्या हल निकालेंगे पता नहीं आप इस बात का हल कब निकालेंगे मैं और मजीद बर्दाश्त नहीं कर सकती। अगर वह मेरी ख्वाहिश को पूरा नहीं कर सकता तो इससे कहीं कि मुझे तलाक दे दे। मैं किसी और के साथ शादी कर लूंगी। मेरा ससुर मुझसे कहने लगा देखो बेटा ऐसी बातें नहीं करते। फिर वह कुछ देर सोचने लगे। काफी देर सोचने के बाद वह मुझसे कहने लगे देखो बेटा मेरे पास एक ही हल है। इस बात का जिससे तुम्हारी हर जरूरत पूरी हो सकती है और मैं तुम्हारी हर ख्वाहिश को पूरा कर सकता हूं। मैं बरसों से प्यासी थी और यही चाहती थी कि कोई मेरी जरूररियात को पूरा करें। मैंने अपने सुसर से कहा कि ठीक है अगर आप मेरी जरूररियात और ख्वाहिश को पूरा कर सकते हैं तो ठीक है आप कर दे मुझे इस बात से कोई एतराज नहीं होगा मेरे सुसर इस बात पर बहुत ज्यादा खुश हो गए मेरे दोनों हाथों को अपने हाथों में थाम लिया और कहने लगे तुम्हें परेशान होने की बिल्कुल जरूरत नहीं मैं हूं ना तुम्हारी हर ख्वाहिश पूरी करने के लिए मैं बरसों से ही अपने ससुर से दोस्ती करना चाहती थी और मैं आज अपने मकसद में बिल्कुल कामयाब हो चुकी थी मेरे ससुर मुझसे कहने लगे देखो यह बात बहुत ज्यादा ज्यादा बुरी है इस बात के बारे में। तुम कभी किसी से जिक्र मत करना और बात तुम्हारे और मेरे दरमियान रहनी चाहिए। वरना तुम्हें और मुझे बहुत ज्यादा जिल्लत का सामना करना पड़ेगा। मैंने अपने ससुर से वादा किया कि मैं यह बात किसी से कभी नहीं कहूंगी और ना ही इस बात के बारे में मैं किसी को कुछ पता चलने दूंगी। मेरे ससुर को मुझ पर एतमाद हो चुका था। वह मुझ पर एकदम से टूट पड़े। ऐसा लग रहा था जैसे वह भी बरसों के प्यासे हैं। मुझे अपने ससुर पर बिल्कुल यकीन नहीं आ रहा था कि वह इस उम्र में भी इतना अच्छा काम कर सकेंगे मेरे। ससुर मेरी हर तरह से ख्वाहिश को पूरा कर रहे थे। वह मेरी मर्जी के मुताबिक सब कुछ कर रहे थे। जैसे मैं कहती वह वैसे ही करते जा रहे थे। मेरे ससुर ने आखिरी दम तक मेरा साथ दिया। यहां तक कि अब मेरी हर ख्वाहिश पूरी हो चुकी थी। मेरे ससुर ने मेरी सोच से बाढ़कर सब काम कर दिया था। मैं अपने ससुर से कह रही थी बस मुझे अब और नहीं चाहिए। मेरे ससुर ने भी बिल्कुल जिद नहीं की और कहा ठीक है। अगर तुम कहती हो तो मैं बस कर देता हूं। मुझे बहुत ज्यादा खुशी मिल चुकी थी। जिंदगी में पहली बार में आज बहुत ज्यादा खुश थी। मुझे बहुत ज्यादा सुकून मिल गया। था मैंने अपने ससुर का बहुत ज्यादा शुक्रिया अदा किया। आज मैं अपने ससुर की वजह से बहुत ज्यादा खुश थी। मेरे ससुर भी मेरे साथ बहुत ज्यादा फ्रैंक हो चुके थे। अब जब कभी भी मुझे किसी भी चीज की जरूरत होती मैं अपने ससुर के कमरे में चली जाती थी और वह मेरी हर ख्वाहिश और जरूरीत को पूरा कर दिया करते थे। मेरी सारी परेशानियां अब मुझसे बहुत ज्यादा दौड़ जा चुकी थी मेरा। शौहर मुझे इतना ज्यादा खुश देखकर बहुत ज्यादा हैरान होने लगा था। उसको शक होने लगा था और उसने मेरा बाहर निकलना बंद कर दिया था। लेकिन इसे क्या पता था मेरी ख्वाहिश तो और मेरी जरूरीरियात घर में ही पूरी हो जाती थी। अब मैं बहुत ज्यादा खुशी से जिंदगी गुजारने लगी थी। इस दिन रात के 12:00 बज रहे थे। मेरा शौहर कहीं बाहर गया हुआ था मुझे कमरे में। अकेली नींद नहीं आ रही थी क्योंकि एक तो मैं अकेली थी। ऊपर से मेरे दिमाग में मेरे ससुर और सास के अजीब गाना में घूम रहे थे। मैंने सोचा चुल्लू सुसर जी के कमरे की तरफ चल के देखती हूं कि आज भी वह वही सब कर रहे हैं या फिर सो गए हैं। मैं दबे पांव सुसर जी के कमरे की तरफ आ गई। तब मैंने जो सुना तो मुझे यकीन नहीं हुआ मेरे ससुर जी के कमरे से मेरी सास की मददोश करने वाली सिसकियां मुझे साफ-साफ सुनाई दे रही थी। मेरी सास मेरे ससुर से कह रही थी। अब बस भी करो। मैं यह सब और ज्यादा नहीं कर सकती हूं। तुम बूढ़े हो गए हो। लेकिन अभी भी तुम यह सब करते हुए थकते नहीं हो। तब मेरा ससुर मुस्कुरा जाता है और कहता है मैं अभी कहां बूढ़ा हुआ हूं। अभी तो जवान हूं और सारी रात मैं तुम्हारे साथ यह सब कर सकता हूं। तुम भी बड़े जल्दी थक जाती हो। तभी मेरी सास अजीब अजीब सी सिसकियां लेते हुए कहती है, अब मैं बूढ़ी हो गई हूं। अब मेरी यह सब करने की उम्र नहीं रही है तुम। मुझे सारी रात इतना परेशान करते हो जिससे सारा दिन मेरा बदन टूटा रहता है। अब बस भी करो। मुझे बखश दो। मैं तुम्हारे सामने हाथ जोड़ती हूं। अब मुझे छोड़ दो। तभी मेरा ससुर कहता है थोड़ी देर और कर लो फिर बाद में दूसरी पोजीशन में यह सब करते हैं। मेरे सास ससससर की यह सब बातें सुनकर मेरे दिल में कुछ कुछ होने लगा था। लेकिन मैं बदनसीब थी क्योंकि मेरे शौहर की मर्दाना ताकत बहुत कमजोर थी कभी भी वो मुझे वह सिख नहीं दे पाया जो सिख मेरे ससुर बुढ़ापे में मेरी सास को दिया करते थे। जिस तरह बुढ़ापे में मेरे ससुर मेरी सास की चीख निकलवा देते थे। लेकिन जब मेरे शौहर मुझसे प्यार करते थे तब मेरी तो सिसकियां भी नहीं निकलती थी। वह जल्दी ही फ्री होकर सो जाते थे और मेरी प्यास ज्यों की तुम अधूरी की अधूरी ही रह जाती। थी मैं वहां से यही सब सोचते हुए अपने कमरे में आ गई। बार-बार मेरे दिमाग में एक ही ख्याल आ रहा था कि आखिर मेरे ससुर जी ऐसा किया खाते हैं जो बुढ़ापे में भी उनकी मर्दाना ताकत इतनी जबरदस्त है कि सास की चीखें निकल जाती है। मैं ससुर जी के इस राज को जाना चाहती थी। इसलिए मैंने सोच लिया था अब की बार किसी तरह मैं रात को उनके कमरे मैं चली जाऊंगी और छपकर सासर के यह कारनामे देखूंगी। लेकिन मुझे क्या पता था? मेरी ही शामत आने वाली थी। तभी अचानक से मेरे कमरे का दरवाजा खिलता है और एक शख्स मेरे कमरे में घुस जाता है और मुझे वह दबोच लेता है। इसने यह सब इतनी जल्दी से किया था कि मुझे संभलने का मौका ही नहीं मिला था। और फिर वह आदमी मेरे साथ जबरदस्ती करने लगा। काफी देर उसने मेरे साथ जबरदस्ती की और मेरे साथ जबरदस्ती करके मुझे बदहवास हालत में छोड़कर वह चला गया था। रात के अंधेरे में वह मुझे बर्बाद करके जा चुका था। मैं रोती रही और इसी हालत में बिस्तर पर पड़ी रही। कुछ पल बाद मुझे होश आया। मैंने खुद को संभाला और फौरन भागकर बाथ रो में चली आई और खुद को रगड़गड़ के साफ करने लगी। पता नहीं वह कौन। आदमी था जिसने मेरे अकेले पिन का फायदा उठाया था और जिसका चेहरा मैं देख भी नहीं पाई थी। वह लगातार मुझे इस्तेमाल कर रहा था और काफी देर तक इसने मुझे इस्तेमाल किया था। लेकिन इसके बारे में मैं किसी से भी कुछ कह भी नहीं सकती थी। काफी देर अपने बदन को साफ करने के बाद मैं बाथरूम से बाहर आ गई। दो-तीन दिन तो मेरे ऐसे ही गुजर गए। आज फिर से मेरे शौहर काम के सिलसिले में बाहर गए हुए थे और रात को मैं अकेली थी। आज मैंने सोच लिया था कि कुछ भी हो जाए मैं हर हाल में ससुर जी का राज जानकर ही रहूंगी और साससर के कमरे में आने से पहले मैं उनके कमरे में चली जाऊंगी। काफी देर इंतजार करने के बाद मेरे साससर कमरे में आए और फिर मेरे साससुर वह सब करने लग गए। काफी देर उनको मैं वह सब करते हुए देख रही थी। अब मुझसे रहा नहीं गया तो मैं ससुर जी के सामने आ गई। तब मेरे ससुर ने कहा बहु तुम यहां अगर तुम यहां आ ही गई हो तो तुम भी हमारे साथ मिल जाओ और जो हम कर रहे हैं वह तुम भी करो देखना तुम्हें बहुत मजा आएगा। तुम्हारी सास बहुत जल्दी तक जाती है तुम अभी जवान हो और खूबसूरत भी तुम्हारे साथ यह सब करने में मुझे भी मजा आएगा। मैं ससुर जी को मना नहीं कर सकी और फिर मेरे ससुर जी ने मेरे साथ मुझे ससुराल में आए हुए सात दिन हो गए थे और मुझे अपने शौहर के रूटीन का अच्छे से अंदाजा हो गया था कि वह क्या खाते पीते हैं। मेरे शौहर रोजाना रात को मुखशक पीना पसंद करते थे, पर मैं बहुत भोलक्कड़ थी। इसलिए अक्सर, छोटी-छूटी बातों को मैं भूल जाया करती थी। कुछ बातों को तो मैं सर पर सवार कर लिया करती थी और घंटों उनके बारे में सोचती रहती थी तीन-चार। दिन से मेरे शौहर मुझे इस बात को याद करवा रहे थे कि रोजाना रात को मुझे मुखशेक पीने की आदत है। इसलिए तुम ना कहे रोज रात को मेरे लिए मुखशेक का गिलास कमरे में ले आया करो। रोज-रोज़। तुम्हें मुझे याद दिलाना ना पड़े। आज फिर मैं उनकी इस बात को भूल गई थी और जब वह कमरे में आकर मेरे पास खड़े हुए तो उन्होंने मुझसे गुस्से से यही बात पूछी थी कि मुखशक का गिलास कहां है में। एकदम से हड़बड़ा गई और फौरन अपनी जगह से उठकर जब किचन में आई तो मेरी सास अपने कमरे में जा चुकी थी जब मैं मुखशेक करके वापस आ रही थी। तो यह देखकर सहाम गई क्योंकि मेरे ससुर के कमरे से मेरी सास की मददोश कर देने वाली सिसकियों की आवाजें आ रही थी। मेरी सास बार-बार एक ही बात कही जा रही थी कि अब बस भी करो मैं थक गई। हो अब मुझ में हिम्मत नहीं है। तुम तो बहुत ताकतवर हो। मगर मैं कमजोर हूं। तभी मेरे ससुर की गुस्से भरी आवाज सुनाई दी। मेरे ससुर बोल रहे थे कि इसमें थकने वाली कौन सी बात है? अभी से तुम। थक गई चिल्लू जल्दी से फिर से शुरू हो जाओ। उधर आ जाओ मेरे पास। अब की बार दूसरे तरीके से करते हैं। देखना इस बार बहुत मजा आएगा। यह सब सुनकर मैं हक्का। बका होकर अपने कमरे में आ गई। और जब मैं सोने के लिए लेटी तो मेरे जेहन ने यही बात गूंज रही थी कि मेरे ससुर तो देखने में हड्डी का ढांचा लगते हैं। मगर मैं नहीं जानती थी कि वह इस कदर ताकतवर थे कि इस उम्र में भी उन्होंने मेरी सास की चीखें निकाल दी थी। मैं भी ऐसा ही शौहर चाहती थी। मगर मेरा शौहर तो बहुत जल्दी थक जाता था। मैं इसी बारे में सोचते-सचते सो गई थी सुबह जब मेरी नींद खिली तो मेरी सास रोज की तरह घर के कामकाज कर रही थी और उनका मिजाज बिल्कुल सादा लग रहा था। उन्हें देखकर लगता ही नहीं था कि वह पूरी रात वह सब कर रही थी। आज दिन को जब मेरे ससुर घर में आए तो फौरन ही ससुर जी ने मेरी सास को कमरे में बुला लिया था। मैं अब खाना बना चुकी थी मैं अपनी सास को खाने के लिए। बुलाने के लिए उनके कमरे के पास गई तो जैसे ही मैं दरवाजे के पास पहुंची तो यह देखकर मैं हक्का बक्का रह गई थी कि रात वाला मंजर फिर से मेरी सास इसी बात की तकरार किए जा रही थी कि मैं थक गई हूं। अब बस भी करो और मुझ पर थोड़ा रहम करो। तो अब इस उम्र में मुझ में हिम्मत नहीं है। अब मैं यह सब कुछ सह नहीं सकती हूं और मैं हैरान और परेशान से वापस आ गई थी और किचन में वापस आने के बाद मैं यही सोच रही थी कि आखिर मेरे ससुर ऐसा किया खाते थे जो इस कदर ताकतवर थे आधे घंटे के बाद मैं दोबारा से उनके कमरे में गई और दोबारा से वही सब आवाजें आ रही थी अब तो मेरे पसीने छूट गए थे और मैं यह सब सोचने पर मजबूर हो गई थी कि ना जाने ऐसी कौन सी चीज का वह इस्तेमाल करते हैं जिसकी वजह से वह इतनी देर तक एक ही काम किए जा रहे थे और उन्हें थकने का एहसास तक भी नहीं हो रहा था। अब मैं दिल ही दिल में यह जानना चाहती थी कि मेरी सास उन्हें ऐसा किया। देती है कि वह इतनी देर तक थकते नहीं थे। मैं यह सब सोच ही रही थी। 20 मिनट के बाद मेरी सास खुद ही कमरे से बाहर आ गई थी। कमरे से बाहर आने के बाद उनका चेहरा नॉर्मल था पर वह पूरी। पसीने में भीगी हुई थी। मगर मेरी सास ने अपने दोनों हाथ अपनी कमर पर रखे हुए थे और कह रही थी कि यह कमर का दर्द भी ना जाने कब मेरी जान छोड़ेगा। उनकी यह बात सुनकर मैंने बड़े। मुश्किल से अपनी मुस्कुराहट रोकी मैं उन्हें कुछ कहते कहते रुक गई थी। अब मैं यह जानना चाहती थी कि मेरी सास मेरे ससुर जी को ऐसा किया खिलाती थी जो उनकी ताकत इस हद तक बढ़ गई थी। उन पर नजर रखने के बावजूद भी मैं इस चीज तक नहीं पहुंच सकी थी क्योंकि मेरा सारा ध्यान हर वक्त उनकी तरफ ही होता था। मेरे शौहर अपने बाप से बहुत अलग थे। बहुत जल्दी थक जाते थे। सोने के लिए लेट जाते थे और अक्सर मैं आधी रात तक जागती रहती थी। हर बार मैं प्यासी ही रह जाती थी। इसलिए मैं अपने शौहर के प्यार के लिए तरसती रहती थी। तभी मेरा धयान अपने साससर के कमरे की तरफ चला जाता था कि एक वह भी तो थे जो इस बुढ़ापे में भी जिंदगी के भरपूर मजे ले रहे थे मेरे शौहर आज की रात भी मेरे हिसाब से जल्दी सो गए थे मगर मेरे जज्बात बुरी तरह से मचल रहे थे मेरी ख्वाहिशें अभी भी अधूरी थी मैं अपने शौहर की तरफ से उदास होकर सोच रही थी कि काश मेरे शौहर भी मेरे ससुर जितने ताकतवर मर्द होते तो आज मैं भी जिंदगी को भरपूर तरीके से जी रही होती तब मेरे ज़हन में मेरी सास की आवाजें आने लगती तो मेरा रोम रोम खिल दिल उठता जब वो सुसर जी को कहती थी कि अब बस भी कर दो अब छोड़ भी दो मेरी बस हो गई है और यह बात याद आते ही मेरे दिल के सागर में जोर-जोर से लहरें उठने लग जाती थी तभी मेरे दिमाग में यह ख्याल आया कि क्यों ना मैं उनके कमरे में झांक कर देखूं कि वह दोनों ऐसा किया करते हैं और मेरे ससुर ऐसा किया खाते हैं जो उनकी ताकत तूफान तक पहुंची हुई है अपनी सास की निगरानी करने पर मुझे कुछ भी नहीं मिला था तब मैं सोचती थी कि यकीनन वह चीज उन्होंने अपने कमरे में छुपा कर रखी होगी और मैं वह चीज देखना चाह चाहती थी। इस वक्त मेरा दिल उन दोनों को देखने के लिए मचलने लगा था कि वह दोनों किया कर रहे होंगे।

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