सोने को इस समय स्मार्ट इन्वेस्टर खरीद रहा है। आम इन्वेस्टर नहीं खरीद रहा। तो अगर आप सोने चांदी को खरीद रहे हैं इस समय तो आप स्मार्ट इन्वेस्टर हैं। और सबसे बड़ा स्मार्ट इन्वेस्टर इस समय चाइना में है जिसने पिछले साल 1000 टन सोना। 504 टन सोना तो वहां लोगों ने लाइनें लगा के ज्वेलर्स की दुकान के बाहर खरीदा। फिलहाल जैसे ही स्टेट ऑफ ऑलमोस्ट खुलेगा और क्रूड के दाम $ से नीचे जाएंगे। आपको सोना 5000 की तरफ जाता हुआ दिखाई देगा। मुझे यह जरूर पता है कि सोना खत्म होने वाला है। 70-8000 टन धरती में बचा है। चमकती हुई धातु है। धरती की धातु है नहीं। देव धातु है। इकट्ठी करने वाली चीज है। भारतीयों को प्रेम है। रिसेशन आता है। और रिसेशन से मुझे एक बहुत जरूरी बात याद आई। मैं आपको बताना चाहूंगा इस बात को खत्म करने के बाद एक खतरनाक ट्रेंड दुनिया भर में बन रहा है वो मैं आपका जिक्र करना चाहूंगा वहां पर 65% आबादी तो आप उनको खुश करने का तरीका क्या है कि स्टॉक मार्केट को बल्लेबले कराइए तो एक लॉबी स्टॉक मार्केट में वहां पंप करे जा रही है जो नए-नए रिकॉर्ड बनाए जा रहे हैं एक और रिपोर्ट आई उसने कहा कि अगर फ्री मार्केट पे छोड़ दें पेट्रोल को तो पेट्रोल में ₹100 बढ़ जाएंगे। अगर आपके पास अभी ₹1 करोड़ इन्वेस्ट करने के लिए तुरंत हैं तो आप उस ₹1 करोड़ को किस तरीके से इन्वेस्ट करना चाहेंगे? तो चाइना का यह ट्रेंड बहुत खतरनाक है और चाइना में बहुत बड़ी मात्रा में प्रॉपर्टी मार्केट गिर रही है। और अगर ये उस साइकिल का ट्रेंड है तो मुझे लगता है भारत में भी सावधान हो जाना चाहिए। नमस्कार, मैं हूं आपके साथ विशाल काल। जब से ईरान और अमेरिका के बीच जंग शुरू हुई है तब से दुनिया भर के देशों की इकॉनमी को बहुत बड़ा झटका लगा है और हर देश यही सोच रहा है कि आने वाले दिनों में क्या होने वाला है? ऑयल एंड गैस का यह क्राइसिस और कितना बड़ा रूप लेगा। आम आदमी यह सोच रहा है कि उसके इन्वेस्टमेंट का क्या होगा? स्टॉक मार्केट कहीं क्रैश तो नहीं हो जाएगा। जो उसने इन्वेस्ट किया हुआ है, कहीं वो जीरो तो नहीं हो जाएगा। पैसा उसे कहां लगाना है और कैसे बढ़ाना है। इसी पर चर्चा के लिए एक बार फिर से आज हमारे साथ हैं एक बेहद खास मेहमान इकोनॉमिस्ट शरद कोहली साहब का मैं बहुत-बहुत स्वागत करता हूं। नमस्कार। शरद जी। आप इतने आसान तरीके से लोगों को समझाते हैं कि लोग जो पैसा लगाते हैं या जो पैसा लगाने की सोच रहे हैं वो आपके फैन हैं। आपको सुनते हैं और आपकी सलाह को बिल्कुल फॉलो भी करते हैं और बहुत सारे लोगों ने इससे फायदा उठाया है। खूब पैसा भी बनाया है। आज जब हम चर्चा कर रहे हैं। ऐसा लग रहा है कि एक बार फिर से पीस टॉक शुरू हो गई है और पता नहीं अचानक से कहीं फिर शांति हो जाए तो दुनिया में जो है वो हर देश अमेरिका और ईरान को दुआएं देगा कि साहब आपने हमारी इकॉनमी को बचा लिया। वरना हालात यह है कि पता नहीं आगे क्या होने वाला है क्योंकि हाल ही में हमारे देश में कमर्शियल सिलेंडर का दाम ₹1000 बढ़ गया है। ऐसा बताया जा रहा है कि पेट्रोल पर ₹14 लीटर डीजल पर ₹18 लीटर का तेल कंपनियों को घाटा हो रहा है। यानी कि पेट्रोल डीजल की कीमत भी बढ़ानी पड़ेगी सरकार को ऑप्शन नहीं बचेगा। तो जब तेल और गैस की ऐसी महंगाई आती है कहते हैं इसका कैस्केडिंग इफेक्ट होता है। हर चीज महंगी होती है। तो क्या हम तैयार हो जाए? महंगाई का बम फटने वाला है। कुछ हद तक तो विशाल महंगाई आ चुकी है। हम आपकी रसोई तक पहुंच चुकी है और बहुत ही साधारण एग्जांपल लूं तो आपको हैरानी होगी। भी मिनरल वाटर की बोतल जो आप खरीदते हैं उसका जो जिस प्लास्टिक में वो पैक होती है पॉलीमर वो महंगा हो चुका है। कांच की बोतल पे जो कांच लगता है वो महंगा हो चुका है क्योंकि जिस-जिस चीज को बनाने में पॉलीमर गैस एनर्जी का इस्तेमाल होता है और किसानों तक ये पहुंच चुकी है महंगाई क्योंकि फर्टिलाइजर आपको पता ही है कि फर्टिलाइजर की अवेलेबिलिटी और फर्टिलाइजर की कॉस्ट यूरिया की खासकर जो बढ़ चुकी है। तो देखिए सारा कुछ निर्भर करता है चाचा जी के दिमाग पर और क्योंकि क्योंकि इसलिए निर्भर करता है कि मुझसे सुबह मैं किसी बड़े टीवी चैनल पे था। बहुत ही जाना माना चैनल है। मैं ऐसे नाम नहीं लेता हूं। तो उन्होंने मेरे से सवाल पूछा कि मार्केट सुबह ग्रीन में थी। शेयर मार्केट की बात चल रही थी कि मार्केट ग्रीन में थी। सर वहां पर खबर आई है कि उन्होंने ऑपरेशन एपिक फ्यूरी को अब रोक दिया है। अब आगे नहीं करेंगे। और वो वो जो ऑपरेशन फ्रीडम है उस पे पॉज लगा दी है। तो चाचा जी ने ये बातें बोली अपने उस सोशल पे तो जब ये बातें बोली तो वो तो आपको पता है मीडिया तो ट्रुथ सोशल पे नजर रखता है। मैं अनट्रुथ सोशल कहता हूं उसको तो उस पे नजर रखता है और फॉर अ फटाफट कि मार्केट अब यहां से मैंने कहा देखिए ऐसा है अच्छी बात है अगर रुक जाए मैं भी चाहता हूं रुक जाए क्योंकि देश भर और दुनिया भर के लोग त्रस्त हैं और कौन नहीं चाहता कि रुक जाए और अब तो सोने चांदी वाले भी चाहते हैं कि रुक जाए वरना सोने चांदी वाले नॉर्मली उल्टा चाहते होते हैं पर इस बार कारण ऐसे बने हैं कि वो भी चाहते हैं तो देखिए मैंने कहा डिपेंड करेगा चाचा जी के दिमाग पर मैंने कहा व्यक्तिगत रूप से मुझे बिल्कुल भी इस शख्स पर भरोसा मैं अगर ट्रस्ट डेफिसिट कहीं मैक्सिमम है तो शायद उन व्यक्तियों में से मैं हूं। हालांकि अब तो उनके देश में ही कई आ गए हैं। ट्रस्ट डेफिसिट वाले दुनिया भर में तो है ही है। तो सबसे बड़ा अगर ट्रस्ट डेफिसिट का फैन कोई है तो वो मुझे लगता है वो मैं हूं इस समय। तो मैंने कहा अभी तो आप इंतजार करिए। अगर उनकी अपनी बात पर टिके रहते हैं तो बहुत अच्छी खबर है। फिर तो यहां से मेन बात है विशाल स्टेट ऑफ हॉर्मोस खुलने की। अब इस समय ना युद्ध की प्रॉब्लम है। इस समय ना मैं वैश्विक अर्थव्यवस्था की बात कर रहा हूं। ईरान में तो बहुत समस्याएं हैं। ना हमलों की प्रॉब्लम है। ठीक है। उन्होंने यूएई पे अटैक किया। एक दो दिन पहले फिर से हालांकि वो कह रहे हैं हमने नहीं किया। तो भाई हमने नहीं किया तो किसने किया? ये कोई एलियन अटैक कर गया। भारतीयों को भी नुकसान पहुंचा है। मैं भरसना करता हूं इस बात की। तो सारा खेल स्टेट ऑफ हॉर्मोस का है। स्टेट ऑफ हॉर्मोस पे वो जैसे अपना रात को जाए ना क्रिसमस वाली रात को या न्यू ईयर वाली रात को तो वो देखा है आपने पुलिस की बैरिकेडिंग होती है। वो आपके नाक में लगा लगा के देखते हैं कि भ आपने कहीं लगा तो नहीं रखी है। तो वो उस प्रकार की बैरिकेडिंग ये करके बैठे हैं। ट्रैफिक जाम हुआ हुआ है। रुका हुआ है ट्रैफिक वहां पर पूरी तरीके से। तो ऑल फोकस इज़ ऑन स्टेट ऑफ़ हार्मोनस। अगर स्टेट ऑफ हार्मोस खुल जाता है तो मिलिटरली चाहे आपस में लड़ना है लड़ते रह मैं नहीं चाहता हालांकि लड़े पर लड़ना है तो लड़ते रहे जब हमारी कौन से सुन लेनी है उन्होंने तो लड़ना है तो लड़ते रह पर कम से कम भैया ट्रैफिक तो आने दो वहां से यार वहां से जहाज निकलने दो 20% दुनिया का वहां से व्यापार किया जाता है भारत का करीब 50 60% गैस एनर्जी की वहां से सप्लाई है उसको भैया चलने दो उसको रोक के आपको क्या मिल रहा है पहले आप कहते थे कि ईरान ने उसको रोक रखा है फिर आप कहते थे हमें स्टेट ऑफ हार्मोन से लेना देना ही कुछ नहीं यह भी बोला जिसने खुलवाना है अपने आप खुलवा लो। आपको याद होगा। अब ईरान ने खोल दिया तो आप आप उसको रख के बैठ गए। अरे भाई आप चाहते और स्टेट ऑफ ट्रंप स्टेट ऑफ हॉर्मोस नहीं नया नाम तो अब मैंने लिया ही नहीं। स्टेट ऑफ ट्रंप नाम हो गया उसका। तो ये मतलब कहने का ये है कि स्टेट ऑफ हॉर्मोस जब तक खुलेगी नहीं तब तक आपको महंगाई से राहत मिलने की मुझे उम्मीद कम नजर आती है। जितने दिन ये बंद रहेगी। पर अब विशाल अगर आज हम बात करें मुझे ना पडकास्ट जब होती है तो आपकी इजाजत से एक गुस्ताखी करना चाहता हूं के मुझे लोग कहते हैं कि भाई आप जब ये बात करते हो गोल्ड सिल्वर की या कोई ऐसी परिस्थिति की बात करते हो तो उस पे ना टाइम और डेट की स्टैंप लगा दिया करो क्योंकि परिस्थिति चाचा जी का दिमाग दिन में तीन बार बदल जाता है। आपने कुछ सुबह कही बात तो दोपहर में चाचा जी कुछ और बोल जाएंगे। शाम को कुछ और बोल जाएंगे। अगले दिन कुछ और हो जाएंगे। तो आपकी बात कही या तो आउटडेट हो जाएगी या गलत हो जाएगी। दोनों में से एक बात होंगी। तो आज हम जब 6 मई इस समय हम दोपहर का दोपहर का समय है। हम ठीक है? मैं अंदाजा समय बता देता हूं। चलिए एक्सैक्ट 4:20 4:20 का समय है। इस समय ये बात कर रहे हैं। तो आज जब हम बात कर रहे हैं मुझे ऐसी उम्मीद नजर आ रही है कि अब और ये जो इन्होंने कहा ना कि ऑपरेशन एपिक फ्यूरी मैं अब रोकता हूं। उसके पीछे लोग कारण जानना चाहते हैं। क्या यह टिपिकल डोनल्ड ट्रंप थे जो पलटी मार गए फिर से टैको हो गया वगैरह वगैरह जिसकी हम पहले चर्चा करते रहते हैं। अमेरिकी संसद में जो 60 दिन का पीरियड था वो पूरा हो गया। इन्होंने कहा था मैं नहीं मानता उस पीरियड को। मैं तो मेरे ऊपर ही अप्लाई नहीं करता। कुछ ये भी कंफ्यूजन था कि अभी जो सीज फायर का समय था वो इस 60 दिन के पीरियड वॉर पावर एक्ट है 1973 का मैं आपके फॉलोवर्स व्यू और सब्सक्राइब को बता दूं। उसके अंतर्गत किसी भी अमेरिकी राष्ट्रपति को 60 दिन अपनी मर्जी से युद्ध करने की इजाजत होती है। अगर इससे ऊपर करना हो तो उसको वापस कांग्रेस यानी कि वहां की संसद को कांग्रेस बोलते हैं। कांग्रेस वाली कांग्रेस नहीं है। ये कांग्रेस मंजूरी लेनी पड़ती है। हां मंजूरी लेनी पड़ती है। तब आगे अब वो पीरियड बीत गया था और इनके जो पीटर हेग्सेट है जो मिनिस्टर ऑफ़ वॉर है सेक्रेटरी ऑफ़ वॉर नाम दिया हुआ है। उसको पहले ही वॉर नाम रख दिया। सोचिए ना अब नाम ही वॉर रख दिया। मतलब पहले से तैयार थे अपॉइंट करते टाइम कि लड़ाई तो करनी ही करनी है और इसी से करते ही रहनी है और इसी से शक हो जाता है कि क्या यह लड़ाई क्या यह लड़ाई बगैर किसी कारण के है क्योंकि इनसे जो इनके जो कैंट थे एनसीटीसी के जो हेड थे जो नेशनल काउंटर टेररिज्म सेंटर के हेड थे उन्होंने ये बात कह के रिजाइन किया के इस वॉर की जरूरत नहीं थी दिस वास नॉट नीडेड पीटर हेक्सेट से डेमोक्रेट्स ने सवाल पूछा कि आपको इस वॉर की जरूरत थी क्या हासिल क्या हुआ आपको इस वॉर से क्या मिला आपको रिजीम चेंज करने गए थे आपको नहीं मिली यह यूरेनियम मुझे दे दे ठाकुर 450 किलो वो जो आपको यूरेनियम बार-बार मांग रहे हैं उनसे वो कह रहे हैं हम तो नहीं देंगे ना वो मिला ना रिजीम चेंज मिली ना उनका न्यूक्लियर प्रोग्राम पे वो बैक करने को तैयार है जितने भी ऑब्जेक्टिव लेके चले थे विशाल क्या उनमें से एक भी ऑब्जेक्टिव पूरा हुआ है सिवाय इसके कि 160 70 बच्चियों का कत्लेआम हुआ और ना जाने कितने निर्दोष लोग वहां मारे गए उनके 40-50 नेता मारे गए। खैर चलिए यह उनको मारना चाहते थे जो भी था वो मारे गए और मेरा कोई ईरान के साथ सहानुभूति नहीं है क्योंकि जिस तरीके से उसने भारतीय शिप्स को और भारतीयों को भी निशाना बनाया है तो मेरी कोई सहानुभूति नहीं है पर यहां विलेन और हीरो में कहीं रोल रिवर्सल युद्ध चलते-चलते हीरो कौन था शुरू में विलेन कौन था बाद में विलेन हीरो बन गया और हीरो विलेन बन गया कुछ ऐसा इस युद्ध में होता दिखाई दिया तो मैं समझता हूं जब कुछ हासिल नहीं हुआ तो यह शक होता है कि क्या यह वॉर खाली वॉर के लिए फॉर द सेक ऑफ वॉर था क्या या खाली हथियार बेचने थे। क्या एस्टीन फाइल्स को की तरफ से ध्यान बंटवाना था? क्या चाहते थे आप असल में? क्या इंटेंशन थी आपकी इस वॉर की? क्या वह जो इलेक्शन आ रहे हैं नवंबर में मिड टर्म उसमें डर था आपको कि लोग मुझे महंगाई की वजह से इस रिसेशनरी ट्रेंड जो अमेरिका में देखा जा रहा था इसकी वजह से वोट नहीं देंगे। मेरी नीतियों की वजह से वोट नहीं देंगे। मेरे टेरिफ के टेरिफ टेरिफ जो मैंने खेला उसकी वजह से वोट नहीं देंगे। मेरी सप्लाई चेन डिसरप्ट हुई मेरी देश में उसकी वजह से वोट नहीं। जो भी उसके कारण रहे क्या इस सबसे ध्यान बटाने के लिए युद्ध था? अब तो यह सवाल किया गया उनसे कि आपने क्या हासिल किया? तो कोई इसका पुख्ता जवाब नहीं था सिवाय बहस के। उसमें से कुछ नहीं निकला। तो वापस आते हैं जो आपने पूछा क्योंकि यह सब बातें बतानी इसलिए जरूरी थी कि इसका इसका परिदृश्य एक पर्सपेक्टिव इसका रखना पड़ता है कि आप किस परिदृश्य में बात कर रहे हैं और कुछ लोग क्या होता है कि आपकी पिछली पडकास्ट से अगली पॉडकास्ट में कुछ चीजें फिर गैप होता है तो भूल भी जाते हैं। तो स्टेट ऑफ हार्मोस मुझे अब ऐसा लग रहा है कि शायद खुलेगा। अब अगला कदम इनका खोलने का होगा। हालांकि इन्होंने शर्त ये रखी है कि 450 किलो यूरेनियम मुझे दे दे ठाकुर। अब वह अगर ठाकुर नहीं देता है तो फिर चाचा जी क्या करेंगे? क्या फिर भी खोल देंगे? मुझे लगता है खोल देंगे। क्यों खोलेंगे? अब आप पूछेंगे कारण क्या है? क्या वो टिपिकल पलटी मार होंगे या टैको होगा? कुछ होगा? अपने देश में आपकी पिछली जब मैंने पडकास्ट करी थी। इनके यहां लगभग $3 प्रति गैलन गैस की प्राइस थी। हम लोग पेट्रोल डीजल बोलते हैं। वो गैस बोलते हैं। हम लोग लीटर में नापते हैं। वो लोग उसको गैलन में नापते हैं। गैसोलिन बोलते हैं। उसके बाद बढ़ के $46 सेंट हुई। उसके बाद अब $5 हो गई है। बहुत सारी स्टेट्स में $5 तो आप सोचिए कहां $3 और कहां $5 ऐसा ही समझिए जैसे हमारे देश में अगर पेट्रोल ₹100 है तो ₹300 और ₹100 से बढ़ के अगर वो हो जाए 300 नहीं तो 250 हो जाए तो कितना हाहाकार मचेगा। ऐसा ही उनकी हाहाकार जरा बहुत दबी दबी सी होती है। हमारे यहां हाहाकार सड़कों पर हो जाती है। उनकी हाहाकार दबी हुई होती है। वो लोग उन लोगों का प्रोटेस्ट बहुत साइलेंट होता है। सड़क पे भी निकलते हैं। तो पोस्टर तो होते हैं नो किंग्स वाले परंतु पोस्टर में आवाज में बहुत शोर नहीं होता। यहां तो होता है ना हल्ला औरंगा हल्ला हंगामा तोड़फोड़ वहां ऐसा नहीं होता। तो अमेरिका अमेरिकी जनता त्रस्त है। बुरी तरह से कॉस्ट ऑफ लिविंग बढ़ चुकी है। वहां पर एनर्जी की वजह से ग्रोसरी का बिल बढ़ चुका है। और अमेरिका में तो वीकली सैलरी आती है। उनके वीकली बजट सारे अपसेट हो चुके हैं। अपसेट हो चुके हैं। वो प्रेशर इनके ऊपर है। इसीलिए बार-बार कहते हैं स्टेट ऑफ हार्मोनस जैसे ही खुलेगा एनर्जी के दाम कम हो जाएंगे। बार-बार ये स्टेटमेंट थोड़े-थोड़े दिन बाद आती है। स्टेट ऑफ हार्मोनस जैसे ही खुलेगा एनर्जी के दाम कम हो जाएंगे। फिर थोड़े दिन बाद बोलते हैं स्टेट ऑफ हार्मोस जैसे ही खुलेगा एनर्जी के तो भाई आपको बार-बार यह बात बोलने की क्या जरूरत है यह तो सबको पता इसलिए क्योंकि वहां की जनता को रीअर करना चाहते हैं कि भैया मेरे ऊपर 40 ट्रिलियन डॉलर का मेरी अर्थव्यवस्था पे कर्ज चढ़ गया है। मैं भले ही 3132 ट्रिलियन का हो गया हूं जीडीपी में पर कर्ज 40 ट्रिलियन डॉलर का हो गया है। और सबसे बड़ी बात मुझे जिस बात का अफसोस है एस एन इकोनॉमिस्ट एंड फाइनेंस एक्सपर्ट विशाल जबजब ट्वीट किया जबजब उस पर डाला उसके बाद जो एक लॉबी ने पैसा कमाया तीन मार्केट्स में गोल्ड सिल्वर में क्रूड ऑयल की मार्केट में और स्टॉक मार्केट्स में हम तीनों जगह कौन वो शख्स थे जिन्होंने पैसा बनाया भारत में सेबी है वहां एसईसी है सिक्योरिटीज एक्सचेंज कमीशन बोलते हैं क्या एसईसी को ये इन्वेस्टिगेशन नहीं करना चाहिए के कौन वो व्यक्ति थे जो इसको जिनको 15 मिनट पहले पता लग जाता था और वो पोजीशंस ले लेते थे। उसके बाद बेच के बिलियंस एंड बिलियंस ऑफ डॉलर बना के बाहर निकल जाते थे। एक बिलियन डॉलर चाचा जी की नेटवर्थ थी जब वो प्रेसिडेंट बने थे। आज से 7.4 बिलियन डॉलर क्या अमेरिका में कोई ऐसा कानून नहीं है जो इस बात की जांच करे। आपने वर्ल्ड लिबर्टी फाइनेंस बना ली। पाकिस्तान में जाके क्रिप्टो अपने दामाद जी को वहां बिठा दिया। अच्छा हम सोचते थे दामादों की खातिर यहीं होती है। इंडिया में ही दामाद को पूजा जाता है। कहते हैं नौ ग्रह होते हैं। दामाद आ जाए तो दसवां ग्रह घर में आ जाता है। ऐसा शास्त्रों में लिखा हुआ है। हम सोचे थे यहीं दामादों की खातिर होती है। आप जाते होंगे ससुराल। अरे कंपनी बना दी पाकिस्तान को आई लव पाकिस्तान बोल दिया। मुल्ला मुनीर को दोस्त बना लिया। बिरयानी खिलाई दामाद की खातिर। तो मुझे तो बड़ी हैरानी हुई मुझे क्योंकि मुझे लगता था कि वहां पर तो दामादमाद क्या होते हैं? वहां तो पता ही नहीं होता। पहले तो मां-बाप का ही नहीं पता होता। कई बार तो कौन किसका मां है, किसकी बाप है यही नहीं पता होता पर दामाद के लिए कंपनी बनाई और बिनेस चलाया क्रिप्टो तो क्या अमेरिका में इन्वेस्टिगेशन नहीं होनी चाहिए के जो राष्ट्र अध्यक्ष है उसकी नेटवर्थ बनने के बाद इतनी बढ़ी कैसे बढ़ी क्यों बढ़ी क्या उसके पीछे कुछ राजनीतिक निर्णय थे नेशनल डिसीजंस लिए गए जिसकी वजह से बढ़ी तो मुझे लगता है यह सब सवाल के घेर में और अमेरिकी जनता बहुत मैच्योर है इस मामले में इस बात को देखती है और अगली बार जब बैलेट बॉक्स पे वो जाएंगे तो अमेरिका में इस बात का इस बात की चर्चा होगी। बट द प्रॉब्लम इज ही इज़ अ वेरी बैड लूजर। हम जो ममता बनर्जी कर रही है ना बंगाल में इस समय हारने बाद भी नहीं छोडूंगी। मैं तो नहीं छोडूंगी। मैं तो हार ही नहीं सकती। ये तो ये तो लूटा गया। मैं हारी थोड़ी ना हूं। ये मैं मुझे जब ममता बनर्जी ने ये बयान दिया तो मुझे वो याद आ गया। ट्रंप हां वो जो 2020 का वो मंजर कैपिटल हिल का वो याद आ गया। मैं तो नहीं हारा हूं। मेरे से तो लूटा गया है। ठीक वही शब्द और वही मंजर छ साल बाद मुझे देखने को मिला। मैं तो नहीं। खैर शुक्र है 7 मई को टर्म ही पूरा हो रहा है। तो अब तो संवैधानिक तौर पर 7 मई के बाद तो आपको जाना ही पड़ेगा। 7 मई के बाद भी आप बनी रहती है तो फिर तो फिर तो ये कुछ और ही हो जाएगा। खैर उस पे उस पे वो विषय नहीं है आज का। तो महंगाई से आम आदमी को जब तक जूझना पड़ेगा अगर मैं सीधा एक लाइन में उत्तर दूं। इतना घुमा फिरा के जो मैंने बात बोली जब तक स्टेट ऑफ ऑलमोस्ट बन अब हम दोनों सिनेरियो लेकर चलते हैं क्योंकि आपने कहा लोग आपसे कहते हैं कि जब भी आप कोई बात करें तो बता दिया करें कि यह कब कही गई थी जब शांति की वार्ता हो रही थी होने वाली थी हो चुकी थी क्या हो रहा था अब हम ये मानकर चलते हैं कि दो सिनेरियो है आज जब ये बातचीत खत्म होगी तब तक हो सकता है बिल्कुल शांति हो जाए स्टेट ऑफ फॉर्मूस खोलने के बारे में चर्चा हो जाए और ट्रंप साहब बोल रहे हैं जी हो गया पूरा और दूसरा सिनेरियो यह है जिसके चांसेस ज्यादा है कि हम तो ऐसे ही हैं हम तो लड़ते रहेंगे अब जो होना है हो दुनिया अपने आप देख ले साहब ऑइल एंड गैस कहां से लेना है सोने और चांदी पर हम आते हैं। 1.5 लाख पर करीब करीब सोना और ढाई लाख पर करीब करीब चांदी। पिछली बार जब हमारा पडकास्ट था, आपने कहा था जब तक युद्ध चलेगा, जब तक क्रूड ऑयल की कीमत बढ़ेगी, डॉलर की डिमांड बढ़ेगी, तब तक सोना चांदी ज्यादा नहीं खरीदा जा सकेगा क्योंकि आपको डॉलर चाहिए क्रूड ऑयल खरीदने के लिए। उस बातचीत के बाद से क्रूड ऑयल अपने 4 साल के ऑल टाइम हाई पर पहुंच गया। वहां से नीचे भी आ गया। $126 पर भी चला गया। अब मेरा प्रश्न यह है कि यहां से आगे अब कौन से फैक्टर्स ड्राइव करेंगे? जब क्रूड ऑयल भी हाई पर है, युद्ध थमता भी नजर नहीं आ रहा है। हम दोनों सिनेरियो लेकर चल रहे थे। अब यहां से गोल्ड के प्राइस को क्या चीज ड्राइव करने वाली है? देखिए फिलहाल तो सोना चांदी दबाव में है। इस समय जब हम बात कर रहे हैं 4:30 बजे के आसपास इस पर डेट डालनी बहुत जरूरी है। 6 मई 6 मई को इस समय 4700 के आसपास है। अभी जब मैं पॉडकास्ट में घुसने लगा था तो मैं देख के बैठा था। मुझे पता था आप ये सवाल पूछेंगे। $15152000 के आसपास ये इस समय खड़ा हुआ है। दबाव बना हुआ है। आपने बिल्कुल ठीक कहा। वो जो सिलसिलेवार तरीके से रिशेदारी है क्रूड ऑयल की क्रूड ऑयल का बढ़ना उसकी वजह से डॉलर की डिमांड बढ़ना डॉलर मजबूत नहीं होना डॉलर की डिमांड बढ़ना डॉलर इंडेक्स का बढ़ना बॉन्ड यील्ड जो कि कल 4.43 पर पहुंच गई थी और उसकी वजह से उसकी वजह से आपको एक इंटरेस्टिंग बात इसमें बताऊं ऐसा नहीं है कि सोने की खरीद नहीं हो रही सोने को इस समय स्मार्ट इन्वेस्टर खरीद रहा है। आम इन्वेस्टर नहीं खरीद रहा। तो अगर आप सोने चांदी को खरीद रहे हैं इस समय तो आप स्मार्ट इन्वेस्टर हैं। आप आम इन्वेस्टर नहीं है। यह आम और स्मार्ट में फर्क है। आम इन्वेस्टर तो दबाव में दबाव में आ जाता है। हाय क्या हो गया ये तो मैंने सो ये सोच के लिया था। वो सोच भी लिया था। स्मार्ट इन्वेस्टर ऐसे मौके ढूंढता है। तो स्मार्ट इन्वेस्टर दुनिया भर में विशाल इस समय सोने चांदी को खरीद रहे। इनमें बहुत सारे सेंट्रल बैंक्स भी जो थोड़ा-थोड़ा करके और सबसे बड़ा स्मार्ट इन्वेस्टर इस समय चाइना में है जिसने पिछले साल 1000 टन सोना खरीदा। एक 504 टन सोना तो वहां लोगों ने लाइनें लगा के ज्वेलर्स की दुकान के बाहर खरीदा है। 504 टन घरेलू लोगों ने यानी कि हाउसहोल्ड्स ने खरीदा है। तो जैसे मुझे लगता है विशाल अगर आपके सवाल का मैं सीधा जवाब दूं। मुझे लगता है कि ये जो रिशेदारी सोने चांदी ने बना ली नई-नई रिशेदारी है ये। ये जो क्रूड ऑयल डॉलर डॉलर इंडेक्स बॉन्ड ईल्ड ये हिस्सेदारी बहुत पुरानी नहीं है। मैं हिस्ट्री उठा के देखी तो करीब 15-20 साल पहले इन इन सब चीजों से रिशेदारी नहीं थी सोने चांदी की। हम ये नए-नए रिश्तेदार बने। जैसे शादी के बाद होते हैं ना पहले साला नहीं होते। साली नहीं जब शादी से पहले थोड़ी ना साला साली होते हैं। ऐसे नए-नए रिश्तेदार बने हैं। तो ये नई-नई रिशेदारी है। मुझे लगता है ये बहुत नाजुक रिशेदारी है। तो आपने जो बात पूछी ठीक उसी पे आ रहा हूं। मान लीजिए युद्ध चलता रहता है। मान लीजिए क्रूड ऑयल के दाम ऊपर बने भी रहते हैं। तो कालांतर में ओवर अ पीरियड ऑफ टाइम ये रिशेदारी को तोड़ेगा। ये रिशेदारी को तोड़ के अपनी चाल चलेगा। फिलहाल अब वो कब होगा ये कहना तो कठिन है। पर ये तोड़ेगा जरूर। फिलहाल जैसे ही स्टेट ऑफ ऑलमोस्ट खुलेगा और क्रूड के दाम $ से नीचे जाएंगे आपको सोना $5000 की तरफ जाता हुआ दिखाई देगा। पहला इसका रुपए में अगर कन्वर्ट करें तो रुपए में कन्वर्ट करें तो लगभग एक $1600 के आसपास ₹155600 5758000 अगर स्टेट ऑलमोस्ट खुला अगर स्टेट ऑफ ऑलमोस्ट खुला और क्रूड ऑयल $ से नीचे आया तो आके टिक जाता है क्योंकि होता क्या है आपको मैं बताऊं कि ये सारा खेल क्या है क्योंकि आपने एक बात कही जो मैं वही टोकना चाहता था और मैं चाह रहा था कि आप सवाल पूरा करें आपने कहा कि उसके बनने की वजह से सोना चांदी में इन्वेस्टमेंट कम आ रहा है। पर होता क्या है कि जैसे ही अब मैं आपको अंदर का खेल बता। जैसे ही बॉन्ड यील्ड ऊपर जाती है अमेरिका में ट्रेजरी बॉन्ड्स हैं जिसमें देशों ने निवेश किया हुआ है जिसमें निवेशक निवेश करते हैं। जैसे ही बॉन्ड यील्ड ऊपर जाती है तो कॉमिक्स में कमोडिटी एक्सचेंज जो अमेरिका का है वहां पर शॉर्ट पोजीशंस क्रिएट करने वाले उस बॉन्ड यील्ड के रेट को देख के आ जाते हैं। क्योंकि ऐसा माना जाता है कि जैसे ही बॉन्ड यील्ड बढ़ेगी तो फिक्स्ड रिटर्न इन्वेस्टमेंट में निवेश ज्यादा आएगा और सोने चांदी जैसे हैच बेस्ड निवेश के प्रोडक्ट्स में इन्वेस्टमेंट कम जाएगा। यह मानकर वह शॉर्ट पोजीशन क्रिएट कर देते हैं। ऐसा नहीं होता कि और शॉर्ट पोजीशन क्रिएट करने का मतलब है कि पेपर कॉन्ट्रैक्ट्स में बिकवाली आ जाती है। जिससे वरना आप देखिए आपको बड़ी इंटरेस्टिंग बात आप देखिए इसमें कि ऐसा ओवरनाइट क्या हो जाता है? आज बॉन्ड यील्ड बढ़ी हम और कल आप सोना जो था $4700 से गिर के 46 अभी $450 आ गया। तो भाई ऐसा क्या हो गया कि एक रात में आपका सोने का नजरिया चमक चली गई। यह सब स्पेकुलेशन है। जो ठोस निवेशक हैं वो उस समय बेचते नहीं है। पर लोगों को ऐसा लगता है कि ये गिर रही ये तो नॉर्मल है ना कि भाई गिर रही है तो मतलब लोग बेच रहे हैं। ये वो शॉर्ट कॉन्ट्रैक्ट्स बिल्ड हो जाते हैं। अच्छा फिर ऐसा क्या होता है? अब इस समय $4700 आ गया। ये 1 दिन डेढ़ दिन पहले तो ये $450 आ गया था। $4500 तक चला गया था। आपको हैरानी होगी। 2 दिन 3 दिन पहले की बात कर रहा हूं। $4500 तक आ गया था। ऐसा क्या हुआ कि एकदम से क्योंकि क्योंकि वहां ट्रंप ने स्टेटमेंट दी एकदम से गिर के तो यह बताता है कि यह जो शॉर्ट टर्म प्राइस मूवमेंट है बहुत ध्यान से सुनने वाली बात है। ये स्पेकुलेटिव मूवमेंट्स हैं और स्मार्ट इन्वेस्टर को इस स्पेकुलेटिव मूवमेंट्स की गिरावट का फायदा उठाना चाहिए अपने प्रॉफिट को मैक्सिमाइज करने के लिए। जो मैंने पहले आपके प्लेटफार्म पर बोला था आपकी पडकास्ट में मैं उसको दोहराता हूं। थोड़ा-थोड़ा करके लंबे वक्त के लिए अगर आप इसको ले रखते हैं। मैं होता तो यह करता। आपको तो अपने निवेश एडवाइजर से सलाह लेनी पड़ेगी। मैं होता तो यह करता कि मैं थोड़ा-थोड़ा लेके और दो से पांच साल के लिए तो दो साल तो पता ही नहीं लगते कहां चले गए। पलक झपकते निकल जाते हैं। दो से पांच साल के लिए आप इसको लेके रख लीजिए। और इन शॉर्ट टर्म मूवमेंट्स को चाचा जी के स्टेटमेंट्स को मत देखिए। हम आप इन स्टेटमेंट्स को देखेंगे तो वो तो कभी कुछ कभी कुछ कभी कुछ कभी कुछ कभी आज अब देखिए ना मैं एक एक क्रोनोलॉजी बना रहा था युद्ध से अब तक दो सवा दो महीने ही हुए हैं बहुत ये तो है नहीं 20 साल से युद्ध चल रहा है सवा दो महीने हुए होंगे कभी समझौता हो रहा है कभी समझौता नहीं हो रहा अब ये युद्ध हम जीत गए हैं। अब ये युद्ध हम जीत जाएंगे। अब यह युद्ध हम जीत रहे हैं। अब ईरान मानने वाला है। ईरान में कुछ लोग मान रहे हैं। ईरान में तो डिवाइस हो गया है। वहां पर वहां पर गुट बन गए हैं। कभी कुछ लोग मेरे से बात करते हैं। कुछ लोगों का मेरे पास फोन आ रहा है। वो समझौता करने के लिए तैयार हैं। जल्दी बहुत अच्छी खबर आने वाली है। अब मैं उनकी सभ्यता मिटा दूंगा। अब मैं उनको नक्शे से मिटा दूंगा। आप इन सब बयानों की एक लिस्ट बनाइए। हम्। मैं चाहूंगा कि आप तो बहुत सीज़न जर्नलिस्ट हैं और आप एक अलग से बिना पॉडकास्ट के 28 फरवरी से लेके आज तक की तो आपका दिमाग घूम जाएगा कि ये एक ही व्यक्ति ने सारी बातें कही ट्रंप मूड इंडेक्स। हां वो वो इंडेक्स का तो पूछिए मत क्या हालत हो रही है हमारे ऑफिस में। आप जिस स्टेटमेंट ये सारी लिखेंगे तो आपको लगेगा अगर 100 स्टेटमेंट थी तो आपको लगेगा ये 100 व्यक्ति थे या एक व्यक्ति एक व्यक्ति था। पहले तो आप यह दिमाग घूम जाएगा। पर मैं चाहूंगा आप यह जरूर करें काम को कि 28 मैं आप नहीं करेंगे तो मुझे करना पड़ेगा। 28 फरवरी से आज तक सारी स्टेटमेंट्स को आप रिकॉर्ड करिए। तो इसलिए मुझे ना इसलिए मैंने सुबह उस चैनल को बोला कि मुझे भरोसा नहीं है। पता नहीं क्यों यकीन नहीं आता अंदर से। जब ये कहते हैं ऑपरेशन एपिक फ्यूरी रुक गया और विश्वास ही नहीं होता। मतलब अब घर में कहा जाता है विशाल के घर का बच्चा भी अगर झूठ बोले तो माता-पिता भी यकीन करना बंद कर। हम हां आप तो पंजाबी हैं। मैं भी पंजाबी हूं। पंजाबी की एक कहावत बोल देता हूं। जो लोग पंजाबी हैं वो समझे। कहते हैं तत्ते तवे पे बैठ के बोले ता भी नहीं मरना। हम सुनी होगी आपने कि गरम तवे पे बैठ के कहे हम तब भी तो जब तक हो नहीं जाता ना तब तक बातों पे तो मैं नहीं आने वाला। जब तक ये अपने वॉरशिप और फाइटर जेट लेकर वापस वापस नहीं चले जाते। बकायदा इसको दुनिया के कुछ मान्य लोग एक्सेप्ट नहीं कर लेते और एकनॉलेज नहीं हो जाता ग्लोबल लेवल पे। मैं किसी बात पे यकीन नहीं करता। तो इसलिए हम आपने अच्छा सवाल पूछा दोनों तरफ का रुकता है नहीं रुकता है क्या होता है तो अगर स्टेट ऑफ हार्मोस खुलता है मुझे लगता है सोना अपना पहला मकाम $5000 होगा और उसके बाद उसके बाद आप देखें वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की रिपोर्ट देख लें आप एक बस्टीन की रिपोर्ट आई है बहुत सारी रिपोर्ट्स आई है जेपी मॉ्गन की देख लें कओसाकी साहब है उनकी देख लें आप देखें कोई $000 कोई $8000 कोई 8 लाख कोई 7 लाख कोई 5 लाख की बातें करता है मैं सर ये बातें नहीं करता मुझे यह जरूर पता है कि सोना खत्म होने वाला है 70800 000 टन धरती में बचा है। चमकती हुई धातु है। धरती की धातु है नहीं। देव धातु है। इकट्ठी करने वाली चीज है। भारतीयों को प्रेम है। चाइनीस को प्रेम है। भारत ने तो अब अपना अपना जो बीआईएस में और बैंक ऑफ इंग्लैंड में रखा था वो और मंगा लिया वहां से। आपको हैरानी होगी। अब भारत का 70 70-80% अब सोना भारत में आ गया है। जर्मनी ने 1200 टन इनके लॉकर में रखा हुआ था। न्यूयॉर्क के लॉकर में। विश्वास उठ गया। आप सोचिए कल को आप लॉकर में जाएं बैंक में जहां आपने अपने अपने शादी के कड़े रखे हुए थे। चैन रखी हुई थी वो जो रोके में नहीं चढ़ाई जाती चैन पंजाबियों में बहुत चलता है आप सोचिए कि आप वो चेन लेने जाए बैंक में बैंक वाला मैनेजर गए आप कौन सा हु आर यू आप कहे मेरा ये लॉकर नंबर है मैं तो आपको पहचानता भी नहीं ऐसा तो कोई लॉकर नंबर नहीं है जर्मनी को ये शक हो गया 1200 टन सोना उठा के ले आया वहां से भैया छोड़ो इनके पास रखना ठीक नहीं है यहां तो कुछ पता ही नहीं क्या हो जाए कल को तेलको ट्रंप का मूड क्या हो देने से मना कर हां देने से कहे आप कौन और जर्मनी से तो पैसे पहले रिश्ते पता है क्या चल रहे हैं आपस में बहुत तकरार चल रही जर्मनी 5000 ट्रूप्स जर्मनी में जो बैठे थे उनको इस साल ट्रंप वहां से निकाल लेंगे। बिल्कुल। मैं पहले ट्रंप साहब बोला करता था। मुझे लोगों ने कहा साहब क्यों कहते हैं? मैंने कहा मैं तंज में बोलता था। उन्होंने कहा तंज में भी मत बोलिए। हम मत बोलिए अब साहब। तो तो ये हाल तो आप लगाइए जो देश वहां से अपना सोना उठा के ला रहा है। उसको लग रहा होगा कि ये प्रेशस धातु है। हम ये आगे बहुत बढ़ने वाली है। किसी की नियत खराब हो सकती है। नियत खराब उसी चीज पे होती है ना जिसकी वैल्यू बहुत हो या आगे बहुत बढ़ने वाली हो। तो आई थिंक ऑल ऑल सिम्टम्स सिंबल्स हैपनिंग सिचुएशन दे आर इंडिकेटिंग कि ये धातु और लोग जो बड़े-बड़े बड़े-बड़े इन्वेस्टर्स हैं, बड़े-बड़े इंस्टीटशंस हैं, बड़े-बड़े एनालिस्ट हैं वो सब इस बात को एकनॉलेज करते हैं। और मैं भी यही बात कहता हूं कि ये और मैं तो शुरू से ही कह रहा हूं। आप जब आज से नहीं महीनों से इस बात को बोल रहा हूं कि ये ऊपर जाएगा। यह एक फेस आया। मुझे लगता है मैं इस गिरावट से बहुत खुश हूं। और जिन लोगों का नुकसान हुआ है वह मुझे गाली दे सकते हैं इस बात पर कि भाई मैं हर किसी का हमारा हमने 1 पे लिया था। आज डेढ़ लाख पर खड़ा हुआ है। कितने महीने हो गए हुए कह रहे मैं खुश हूं। खुश इसलिए हूं कि जो लोग आना चाहते थे उनको उस बस में चढ़ने का मौका मिला। जिनके हाथ से बस निकल गई थी। बस वापस आ गई चल के आपके द्वार पे। आइए चढ़िए मुझ पे उनको मौका मिल गया। और जिन लोगों ने लिया हुआ है बिल्कुल कोई चिंता करने की बात नहीं है। आराम से लेके बैठिए। दिक्कत आई कि वो लोग ट्रेडिंग के लिए आए थे। अभी खरीद लूं अभी बेच के पैसा कमा। 15 दिन में बेच दो महीने वो लोग फंस गए हैं। उन लोगों के साथ मेरी सहानुभूति है। पर उनको यह समझना चाहिए कि ट्रेडिंग में हमेशा ही ये रिस्क रहता है। हम ये हमेशा ही ट्रेड अगर बड़ी सीधी सी बात है विशाल। अगर ट्रेडिंग में इस तरीके से पैसा बनता हो तो छोड़िए ना पडकास्ट यही काम करते हैं बैठ के। आज खरीदेंगे कल बेच देंगे 15 दिन बाद बेच देंगे फिर खरीद लेंगे फिर बेच देंगे तो बल्लेबले हमेशा ही प्रॉफिट ऐसा थोड़ी ना होता है इतना आसान होता तो फिर हर कोई यही करता और फिर सेबी क्यों कहता है कि 90% लोग इस टाइप के पैसे गवाते हैं सट्टे ये सट्टेबाजी है ये इन्वेस्टमेंट नहीं है सट्टेबाजी है तो इन्वेस्टमेंट करिए साहब और इसको रख के बैठ जाइए अगर आपका घाटे में भी है कोई चिंता की बात नहीं हम और कुछ लोगों को यह भी ये भी इस बात से दुख है क्योंकि क्या था घर में किसी के मुझे कोई मिला उनके घर में 1 किलो पड़ा हुआ था तो 1 करोड़ 80 हुआ तो वो यह सच्ची बात है। मैं नाम नहीं बता सकता। वो पार्टी पे ले गए सबको वहां पार्टी में गए तो वहां बात करी और घर में सबको बताया मालूम है लिया कितने का था मैंने? कहते कितने का? कहते मैंने मात्र ₹ 50 लाख का लिया था। कहते मैंने सोचा मुझे 1 करोड़ 30 लाख का प्रॉफिट हो रहा है। तो क्यों ना सबको फाइव स्टार होटल में ले जा के मैं डिनर कराऊं। उन्होंने 8 10 125000 का डिनर कराया और ये बात है 28 जनवरी के आसपास की। अगले ही दिन वो तो नीचे नीचे नीचे जाना शुरू हो गया। अब उनको मैंने तो 15,000 और खर्च दिए। मेरा तो आ गया 12,25 भी पहुंच गया था एक टाइम पे। हालांकि लिया हुआ 50 लाख का है। लेकिन अब उनको 80 याद आता है। हां क्योंकि आपको नोशनल लॉस याद आ जाता है। तो ना नोशनल प्रॉफिट हुआ था। अभी तक ना प्रॉफिट भी नोशनल है लॉस भी नोशनल। तो उनको मैं अभी ₹1.5 लाख आ गया। अब उनको ये थोड़ी सी राहत मिली कि अब उतना लॉस नहीं है जितना एक 25 पे आ गया। तो मुझे लगता है इन नोशनल प्रॉफिट्स को नोशनल लॉस को मत देखिए। आप इसको सोना एक इन्वेस्टमेंट की चीज है, एक हैज की चीज है। एंड आई थिंक यू शुड कीप इट फॉर अ लॉन्ग टाइम। ये तो आपने बता दिया कि स्टेट ऑफ फॉरमस खुला तो आगे क्या होगा? अब मैं ये समझना चाहता हूं कि अगर स्थिति यही रही ये जंग लंबी खींची या यहां से ज्यादा आगे बढ़ी तो गिरने को अगर आया तो क्या बहुत गिर सकता है यहां से आगे? या आपने पिछले पडकास्ट में कहा था कि बहुत ज्यादा समय तक इन्वेस्टर अपने आप को रोक नहीं पाएंगे। इन्वेस्ट तो करेंगे ही। जी। देखिए हम लोग फाइनेंसियल मार्केट्स में विशाल हम लोग एक एक प्रिंसिपल यूज़ करते हैं। वो मैं यहां बता देता हूं जो आपके सवाल का सीधा जवाब होगा। हम लोग बोलते हैं उसको डाउन साइड रिस्क यानी कि नीचे की तरफ कितना रिस्क है? आपने मान लीजिए 1.5 लाख का अभी लिया है। तो नीचे से नीचे कितना चला जाएगा? 120 चला जाएगा। एक चला जाएगा। तो ये कितना रिस्क हुआ? ये हुआ लगभग 120 जाता है तो लगभग 20% के आसपास हम पर अप इसको दूसरा इसका हिस्सा होता है इस प्रिंसिपल का अपसाइड ओपोरर्चुनिटी डाउन साइड रिस्क अपसाइड ओपोरर्चुनिटी वो बहुत बढ़िया अपसाइड ओपोरर्चुनिटी बहुत बड़ी है तो जब अपसाइड ओपोरर्चुनिटी बड़ी होती है तो आपको डाउन साइड रिस्क लेना पड़ता है हम अब मैं कहूं कि आप 1 लाख आए तब लीजिए मान लीजिए ना आया फिर क्या करेंगे फिर क्या करेंगे फिर तो आप कहेंगे मैंने यार वो डेढ़ की अपोरर्चुनिटी भी मिस कर दी फोमो हो जाता है फिर फिर फोमो शुरू हो जाता है तो आई थिंक इसीलिए इसलिए इसी चीज की काट के लिए इस चीज को ओवरकम करने के लिए जो एसआईपी मेथड है वो बताया जाता है कि आप थोड़ा-थोड़ा करके अलग-अलग लेवल्स पे लीजिए और मैंने तो विशाल एसआईपी का नया नाम रखा है सब्र इन्वेस्टमेंट सिस्टमेटिक नहीं है। सिस्टेटिक तो लोग करते ही नहीं है। कहां सिस्टेटिक होता है? कभी आज लिया फिर 2 महीने बाद लिया फिर 3 महीने बाद सिस्टेटिक तो होता है। आप हर 15 दिन में हर महीने में लेते रहे। सब्र इन्वेस्टमेंट अगर आप एसआईपी को सब्र या स्मार्ट इन्वेस्टिंग पेशेंट तो पेशेंस की बस कमी है। सोने चांदी वालों में बस एक ही दिक्कत है। काम तो बहुत बढ़िया कर रहे हैं वो इकट्ठा करके। बस पेशेंस कहीं से और साथ में ले आए। अगर पेशेंस सोने के साथ लग जाएगी तो सोना आपको कमाई करके दे जाएगा। तो सब्र इन्वेस्टमेंट प्लान के माध्यम से आप थोड़ा-थोड़ा करके लें। तो यह जो डाउन साइड रिस्क है यह भी आपका कम हो गया। थोड़ा-थोड़ा ले रहे हैं तो मान लीजिए आपने डेढ़ पे लिया। कल कोई 45 आ गया। उस पे लिया फिर एक 40 आ गया। उस पे लिया फिर एक 35 आ गया उस पे लिया एक 25 आ गया एक लिया उस पे भी लिया आपने तो फिर आपको क्या चिंता है तो आई थिंक आई थिंक इस इस चीज का डाउन साइड रिस्क को कवर करने का एसआईपी इज द बेस्ट वे चांदी की बात करते हैं इस साल 386000 के लेवल पर चली गई थी अब फिर से एक बार 2450 के आसपास है यानी कि अपने हाई से काफी ज्यादा चांदी गिरी है सोना इतना नहीं गिरा चांदी गिरी बहुत ज्यादा है। चढ़ी भी बहुत ज्यादा थी गिरी भी बहुत ज्यादा है आपने कहा था कि इंडस्ट्री में डिमांड बहुत ज्यादा है क्या वो इंडस्ट्रियल डिमांड अभी भी उस लेवल पर बरकरार है या फिर युद्ध की वजह से वो इंडस्ट्रियल डिमांड चांदी की अभी कम हो गई है? चांदी को लेकर यहां से आगे क्या फैक्टर्स आपको नजर आ रहे हैं? देखिए फिलहाल तो चांदी सोने की चाल ही चल रही है। अभी तो हम लोग वो जीएसआर नापते हैं। हालांकि मैं उसमें बहुत मानता नहीं। गोल्ड सिल्वर रेशियो बोला जाता है उसको। वो सिर्फ एक प्रोपोर्शन है कि भाई सोना इतना चढ़ा तो चांदी इतनी नहीं चढ़ी तो अब चांदी कैच अप करेगी। अब सोना थोड़ा पीछे खींचेगा। ये एक एक पैमाना है। मैं बहुत ज्यादा इस पे विश्वास नहीं रखता हूं। पर ठीक है। एक मैथमेटिकल फॉर्मुलेशन है तो उसको हम रिस्पेक्ट करते हैं। चांदी फिलहाल सोने के कदम से कदम मिला के चल रही है। विशाल आप देख रहे होंगे जैसे-जैसे सोना ऊपर जाता है चांदी देती है प्रपोर्शन फर्क हो सकता है। पर चाल उसकी सोने सोने के साथ चल रही है। आपने पूछा डिमांड का इंडस्ट्रियल डिमांड अभी भी क्योंकि जिन तीन मुख्य चीजों में इस्तेमाल हो रहा है ईवीस में बैटरीज में वो धड़ाधड़ बिक रही है। और अब तो पेट्रोल ऐसा माना जा रहा है पेट्रोल, डीजल और गैस की कीमतों की वजह से ईवीस की बिक्री और बढ़ेगी। की बिक्री बढ़ेगी तो चांदी की कंसमशन बढ़ेगी। एआई में तो कोई कोई कहना ही क्या है कि एआई बढ़ रहा है यह तो यह तो मुझे कहने की जरूरत ही नहीं है। एआई जिस रफ्तार से बढ़ रहा है और इलेक्ट्रॉनिक इक्विपमेंट्स में सोलर सेल्स में क्योंकि अल्टरनेट एनर्जी की बात की जा रही है। तो थोड़ा सा अगर मान लीजिए वैश्विक स्तर पर रिसेशन आता है और रिसेशन से मुझे एक बहुत जरूरी बात याद आई। मैं आपको बताना चाहूंगा इस बात को खत्म करने के बाद। एक खतरनाक ट्रेंड दुनिया भर में बन रहा है। वो मैं आपका जिक्र करना चाहूंगा। आपके चैनल बहुत लोग देखते हैं। तो अगर रिसेशन आता है तो चांदी की जो इंडस्ट्रियल डिमांड है उस पर थोड़ा सा प्रेशर आएगा। हम तो फिर हो सकता है चांदी उस रफ्तार से ना बढ़े। पर फिलहाल मुझे ऐसा कुछ नजर नहीं आ रहा है। मुझे लग रहा है कदम से कदम मिला के चलती रहेगी और जो आपने पहले देखा था यानी कि चांदी ज्यादा भाग जाती है। फिर गिरती भी ज्यादा है। वही कंटिन्यू रहेगा क्योंकि उसकी वजह ज्यादा भागने और ज्यादा गिरने का रीज़न यह है कि चांदी सस्ती है सोने के मुकाबले। उसमें जो स्पेकुलेशन किया जाता है और निवेश भी किया जाता। मान लीजिए आपको 1 किलो सोना लेना हो तो ₹1.5 करोड़ चाहिए। 1 किलो चांदी लेनी हो तो आपको कुल ₹24,000 चाहिए। बिल्कुल। तो यह फर्क होता है। बहुत बड़ा फर्क है। क्योंकि वॉल्यूम वॉल्यूम में जंप मिलता है इसलिए चांदी की चाल। अब जो मैं बात भूल ना जाऊं मैं बहुत जरूरी बात आपको बताना चाह रहा था रिसेशन की। मुझे ऐसा लग रहा है विशाल कि एक खतरनाक ट्रेंड दुनिया भर में शुरू हो गया और विकसित हिस्सा जो दुनिया का अपने आप को कहता है वहां शुरू हो गया है। आपको ये तो पता ही है कि दो कंजक्यूटिव क्वार्टर्स तक अगर कोई भी देश रिसेशन नेगेटिव जीडीपी दिखाता है तो उसको ऑफिशियली रिसेशन में मान लिया मान लिया जाता है। अब मान लिया जाता है उस पे एक स्टैंप लग जाती है। आप मंदी वाले देश हो। अब क्या होता है मंदी वाले देश में? निवेश आना बंद हो जाता है। आप हैरान होंगे। मैं किसी पहले इंटरनेशनल ऑर्गेनाइजेशन हमारी एक कंपनी उसकी मेंबर थी तो मेरे बहुत सारे इंटरनेशनल पार्टनर्स थे। वहां जब हम जाके मिलते थे। अरे आप तो बहुत 6% के रफ्तार से पढ़ते हो। वो मतलब आपको एक सोशल स्टिग्मा भी हो जाता है उन देश के लोगों को। मंदी वाले देश का कोई व्यक्ति किसी दूसरे देश में जाता है उसकी इज्जत कम हो जाती है। आपको हैरानी होगी इस बात सुनके। निवेश आना कम हो जाता है। वहां के बिजनेसेस बंद होने शुरू हो जाते हैं। उस देश से लोग व्यापार कम करना शुरू कर देते हैं। बटरल ट्रेड में फर्क पड़ जाता है। तो अब जो खतरनाक ट्रेंड आया है जो मुझे लग रहा है और मुझे पूरा यकीन है इस बात पे कि देशों ने क्या किया है कि अपने आप को अब रिसेशन में दिखाने की बजाय 0.2% 0.7% 0.8% अमेरिका 0.4% ये एक खतरनाक ट्रेंड शुरू हो गया है। यह दिखाना ना पड़े कि हम नेगेटिव है। मैं तो आपकी बैलेंस शीट में जाकर झांकने नहीं वाला। वहां जाके मैं आपके वित्त मंत्रालय में घुस जाऊं। आपके ट्रेजरी में घुस जाऊं। दिखाना भैया मुझे जरा के दिखाना कितनी कमाई हुई है आपके देश की। फिस्कल आपकी राजकोशीय घाटा कितना है और ये मैं जो किसी को किसी को अधिकार नहीं है। जब जो आप कहेंगे मानना पड़ेगा। मानना पड़ेगा। ये एक खतरनाक ट्रेंड नजर आ रहा है और इस खतरनाक मैं इसको इसलिए कह रहा हूं कि आप असल में रिसेशन में हैं पर आप दिखा रहे हैं कि मैं 0.2 अरे 0.2% कोई ग्रोथ होती है। आप सिर्फ मैथमेटिकली अपने आप को रिसेशन में ना लाने के लिए थ्यरेटिकली आप ये नंबर दिखा रहे हैं। मेरे अनुसार विशाल जो अपने आप को विकसित कहने वाला हिस्सा है दुनिया का जिसमें ज्यादातर यूरोप और अमेरिका आता है। वो इस समय रिसेशन में है। वो रिसेशन में है और वहां जितने भी इकोनमिक पैराटर्स दिखाई दे रहे हैं। वो रिसेशन वाले दिखाई दे रहे हैं। अब क्योंकि आपको ग्लोबल लेवल पे इसलिए नहीं दिख रहा है क्योंकि वो तो नंबर्स ही नहीं दिखा रहे रिसेशन वाले। उनके नंबर ना दिखाने से क्या होता है? आप अच्छा मुझे एक एक चीज का जवाब दे दीजिए। मैं इसको बहुत तरीके हैं मेरे को सिद्ध करने हैं। मैं नहीं चाहता आपकी बाकी की पडकास्ट खाली इसी चीज में निकल जाए क्योंकि आपके पास और भी बहुत सारे सवाल होंगे। मुझे ये बताइए अमेरिका ने युद्ध करा हम अभी भी युद्ध में है। उसका डॉलर स्ट्रांग हो रहा है क्योंकि डॉलर की डिमांड बढ़ रही है। डॉलर की डॉलर की वैल्यू नहीं बढ़ रही। डॉलर की डिमांड बढ़ रही है। स्टॉक मार्केट बल्लेबले हम रोज sएp डाउनग नए-नए रिकॉर्ड बना रहे हैं। पहली बार मैंने सुना कि एक देश जिसने दूसरे देश पे हमला किया 25 बिलियन डॉलर खर्च किया झूठ हम 50 बिलियन डॉलर से ज्यादा खर्च हुआ है। इससे भी ज्यादा हुआ है। उसके पास उधार 40 ट्रिलियन डॉलर का। नौकरियां वहां मिल नहीं रही। लोगों के छोटे बिजनेसेस बंद हो रहे हैं। निवेश वहां आ नहीं रहा है। महंगाई बढ़ रही है। और वहां पर स्टॉक मार्केट बल्लेबले। अरे भाई ये कौन से देश के ये क्या ये क्या मार्स या वीनस की स्टॉक मार्केट है क्या? या यह किसी और प्लनेट के यह पैराटर्स ले चल रही है। स्टॉक मार्केट का मतलब होता है मुझे स्टॉक मार्केट में और इकोनॉमिक के जगत में आज 36 साल हो चुके हैं। स्टॉक मार्केट विशाल हमेशा लंबे पीरियड में आपके इकोनमिक फंडामेंटल्स के साथ अलाइन रहती है। शॉर्ट टर्म में वो इधर-उधर जा सकती है। कोई पैमाना नहीं है शॉर्ट टर्म में किसी देश की अर्थव्यवस्था को नापने का। माना मैंने। हम पर लॉन्ग टर्म में तो वो वहीं जानी चाहिए और युद्ध में तो बिल्कुल ही नहीं जानी चाहिए। इधर युद्ध चल रहा है। उधर स्टॉक मार्केट एसएपी न्यू रिकॉर्ड nसक न्यू रिकॉर्ड यह जो आर्टिफिशियल मार्केट्स को क्योंकि 65% आबादी अमेरिका की स्टॉक मार्केट से जुड़ी हुई है। भारत की तरह नहीं जहां 2025 करोड़ डीमेट अकाउंट्स हैं। 145 करोड़ लोगों में से वहां पर 65% आबादी तो आप उनको खुश करने का तरीका क्या है कि स्टॉक मार्केट को बल्लेबले कराइए। तो एक लॉबी स्टॉक मार्केट में वहां पंप करे जा रही है जो नए-नए रिकॉर्ड बनाए जा रही है क्योंकि उनके पास बोलने के लिए लुक एट अस स्टॉक मार्केट्स वी डूइंग सो वेल तो आप ये बहुत खतरनाक लगता है क्योंकि आप तो जर्नलिज्म से हैं विशाल मेकअप करा जाता है ना जाने से पहले थोड़ा टच अप करा जाता है कितनी देर टिकता है वो एक घंटा 2 घंटा तीन घंटा उसके बाद 3 घंटे बाद बुलेटिन पढ़ना हो तो फिर जरा जाना पड़ता है वो आते हैं वहां से जरा थोड़ा ये करके जाएं तो आर्टिफिशियली जब आप मेकअप करेंगे कितनी देर तक टिकेगा वो तो मुझे लगता है कि सतह पर जब इनकी असलियत आएगी हम तो डॉलर अपनी असलियत दिखाएगा पहले तो और डॉलर ने अगर असलियत दिखाई तो सोने चांदी वालों की की पार्टी निश्चित है। डॉलर असलियत दिखाएगा और अर्थव्यवस्था असलियत दिखाएगी। आप बहुत ज्यादा दिन तक किसी भी चीज को आर्टिफिशियली ऊपर नहीं रख सकते हैं। ये एक सच्चाई है और इस सच्चाई को आप छुपा नहीं सकते हैं दुनिया से। तो यह जो भी देश मुझे लगता है अपने आप को जबरदस्ती दिखाने की कोशिश कर रहा है कि हम रिसेशन में नहीं है वो ज्यादा दिन तक वो नहीं दिखा पाएगा और ये खतरनाक ट्रेंड है और मुझे लगता है ये ट्रेंड किसी अंतरराष्ट्रीय एजेंसी को इसको रिवर्स करना चाहिए इस पे आवाज उठानी चाहिए और इस पे इस पे एतराज करना चाहिए कि आपके जो आंकड़े हैं या कोई ऑडिट सिस्टम होना चाहिए। मैंने कहीं यह बात बोली तो मुझसे किसी ने सवाल पूछा एक पडकास्टर थे उन्होंने थी। उन्होंने पूछा अच्छा भारत पे नहीं होना चाहिए हम हमारा हमारे वित्त मंत्रालय में भी तो ऐसा कोई काम मैंने कहा देखिए हम यहां पर बैठे हैं और हमारे पास भारत की ग्रोथ को नापने के बहुत सारे तरीके हैं। वो आंकड़े ना भी दिखाएं। हम तो मेरे पास बहुत सारे तरीके हैं। मैं टैक्स कलेक्शंस हैं। मेरे पास पीएमआई है और मेरे पास जो बेरोजगारी की दर है। एक आम टिए टू टिएर थ्री सिटी में जाके मैं देख सकता हूं। तो देश में रह के किसी अर्थशास्त्री से आप उसके आर्थिक आंकड़े मैनपुलेट नहीं कर सकते। हम् क्योंकि अगर कोई ट्रेंड इकोनॉमिस्ट है उसके पास कई तरीके हैं पता लगाने के कि आप सच बोल रहे हैं कि आप झूठ बोल रहे हैं। जो आपके पास देखिए आप ट्रेंड नहीं है। आप आपको इकोनॉमिक्स फाइनेंस की जानकारी नहीं है। फिर तो आप स्टेटमेंट दे देंगे। ये आंकड़े झूठ हैं। देश को गलत गुमराह किया जा रहा है। आईएमएफ को गलत फिगर्स बताई जा रही हैं। और वर्ल्ड बैंक में अपने सरदार जी बैठे हुए हैं जो वहां के वो हैं। वो तो अपने ही आदमी हैं। हां बंगा जी। हां। तो वो अब अपने ही आदमी हैं। वगैरह-वगैरह पर एक इकोनॉमिस्ट से आप यह चीज नहीं छुपा सकते। तो मैं तो यह प्रपोज करूंगा आज आपके पडकास्ट के माध्यम से कि एक अंतरराष्ट्रीय ऑडिट एजेंसी होनी चाहिए जो हर देश की जीडीपी के आंकड़े जब घोषित किए जाएं वो एजेंसी उसको सत्यापित करें। उसको वेरीफाई करें। उसको कंफर्म करें। देश के ऊपर आप ये नहीं छोड़ सकते कि वो जो घोषणा कर रहा है हम तो इतने पे ग्रो कर रहे हैं। जी तो आपने मान लिया। कठिन काम है जो मैं कह रहा हूं। वो यूएन को भी नहीं मानता। आजकल को यूनाइटेड नेशन नहीं मानते। आजकल तो अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों का सम्मान तो चाचा जी ने आपको पता ही है क्या? जीरो हो गया है। कोई कोई किसी की बात नहीं मानता। सब मनमानी करते हैं। कोई ऐसा किसी के ऊपर कोई डंडा नहीं है सिर पर। तो पर मैं यह प्रपोज करूंगा कि ऐसा होना चाहिए क्योंकि ये एक गलत संदेश भेजता है। इससे निवेशकों के विशाल आपको हैरानी होगी। लाखों डॉलर का बिलियंस एंड बिलियंस डॉलर का नुकसान हो सकता है। क्योंकि आप बहकावे में आके गलत आंकड़ों के आधार पे आपने निवेश कर दिया। वहां पर आपने फैक्ट्रियां लगा दी कुछ भी कर दिया आपने जो वहां के डिमांड के आधार पर आपने किया और वहां जाके तो असलियत पता लगी भैया यहां तो यहां तो अंदर से खोखला था खोखला था तो ये मैं मैं चाहूंगा कि कोई अंतरराष्ट्रीय एजेंसी इस पर आए एक चीज जो अधूरी रह गई आपने सोने के इन्वेस्टर के लिए बता दिया कि यहां से आगे उसे क्या करना है चांदी के इन्वेस्टर के लिए इस उतार-चढ़ाव के साथ उसे वैसे ही रहना है इन्वेस्टेड रहना है या जो यह सोच रहा है कि नहीं थोड़ा से वक्त में तो मैंने जब मैंने जवाब दिया मैंने जब मैंने यह कहा कि इस समय चांदी सोने की चाल ही चल रही है तो उसमें जवाब आ गया तो जो आप सोने में कर रहे हैं वही आप चांदी में करिए। सिर्फ दोनों का जो प्रोपोर्शन है वो आप मतलब चांदी की तरफ बहुत स्क्यूड मत रखें। मुझे लगता है 70 30 या 80 20 प्रपोशन में आप इसको निवेश की तरह से ले सकते हैं। बहुत ज्यादा चांदी को ओवरवेट मत करिए क्योंकि सोना ज्यादा ठोस है। सोना ज्यादा स्ट्रांग है। तो अभी फिलहाल सोना चांदी एक ही एक ही ट्रैक पर एक ही रेल पर चल रहे हैं। एक ही साथ चल रहे हैं। वो उठता है। ये उठती है। ये गिरता है। बहन भाई फिर से बन गए हैं। और बहन बहना पीछे भाई के पीछे पीछे चल रही हैं। वह आगे जाते हैं। वो आ गए वो पीछे जाती हैं। वो भी पीछे आ जाते हैं। पर हां क्योंकि 55% डिमांड इंडस्ट्रियल है चांदी की। तो कहीं ना कहीं दोनों की राह अलग हो सकती है आने वाले समय में। तो इसलिए चांदी पे अपना एक्सपोज़र थोड़ा सा सीमित रखना चाहिए। ऐसा मेरा मानना है। 242 करोड़ का जीएसटी कलेक्शन रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं सारे। ये क्या इंडिकेट कर रहा है हमारी इकॉनमी के बारे में? देखिए इस कलेक्शन के बारे में मैं को आलोचना नहीं करना चाहता क्योंकि कलेक्शन अच्छा है तो देश के लिए भी अच्छा है। देश के राजस्व के लिए फिसिकल पॉइंट ऑफ व्यू से बहुत अच्छा है। यह कलेक्शन आपको पहली मई को सुनने को मिला। तो शायद कम लोग जानते हैं यह कलेक्शन मार्च के महीने का है क्योंकि मार्च के महीने में जो आपने कमाई करी उसके रिटर्न आपने जीएसटीआर वन और जीएसटीआर थ्री बी बोलते हैं वो आप 10 और 20 तारीख को फाइल करते हैं। उसके आधार पर ये आंकड़े आते हैं। तो मार्च के महीने में पहली बात तो असाधारण परिस्थिति होती है क्योंकि हमारा वित्तीय वर्ष कंप्लीट होता है। बिल्कुल। तो उसमें आप लोग हम लोग उसको बोलते हैं स्क्वेयरिंग अप ऑफ एकाउंटिंग ट्रांजैक्शंस। तो आप जो बिलिंग पेंडिंग होती है, इनवॉइसिंग पेंडिंग होती है उसको पेंडिंग करते उसको करते हैं। दूसरा कारण इसमें आपको शायद पता नहीं सब लोग जानते हैं कि नहीं। मैं बता दूं कि इस जीएसटी कलेक्शन जब हमारी आती है तो अब तो इंपोर्ट ड्यूटी की जगह जीएसटी है। आपको पता ही होगा। तो जीएसटी उसमें जुड़ा होता है। जुड़ा होता है। तो जो आयात हम करते हैं तो इस मार्च के महीने में हमने आयात भी बहुत किया। बहुत किए। क्योंकि मैंने जैसे बताया जब वित्तीय वर्ष का अंत होता है ना विशाल तो वो आंकड़े आप पिछले वित्तीय वर्ष के मार्च के आंकड़ों से कंपेयर कर सकते हैं। उसको पिछले महीने से मत करिए। नहीं करते। अगर पिछले महीने से करेंगे तो वो आपको असाधारण रीडिंग दे देगा। पिछले मार्च से पिछले यानी कि पिछले पहली मई को जो आए थे क्योंकि वो मार्च की बिल्कुल उससे आप कंपेयर कर सकते हैं। पर यह सच है कि हम अपने आप में एक दुनिया है और इस वैश्विक संकट का हमारे ऊपर कम असर पड़ा है। हम लोगों ने 140 45 करोड़ की हमने अपने आप में एक दुनिया बसा रखी है। हम एक दूसरे को सर्विज देके गुड्स बेच के। वहीं से हमारा 850 बिलियन डॉलर का एक्सपोर्ट है। 950 बिलियन डॉलर का करीब-करीब इंपोर्ट है। करीब 9293 बिलियन डॉलर का हमारा शॉर्टफॉल हो जाता है जो डेफिसिट हो जाता है। थोड़ा ज्यादा है बल्कि मैं कम ही बता रहा हूं। थोड़ा ज्यादा ले एक ट्रिलियन डॉलर से थोड़ा फालतू कभी कम कभी ज्यादा। चाइना से हम कितना मंगाते हैं। तो बहुत ज्यादा हम ना बाकी दुनिया के साथ गुथे हुए नहीं है। भले ही यहां बहुत सारे विदेशी लोग राष्ट्रीय अध्यक्ष आए रहते हैं। प्रधानमंत्री मोदी भी कभी किसी देश कभी किसी देश जाते हैं। हमारे अंतरराष्ट्रीय संबंध बहुत अच्छे हैं। पर हम बहुत ज्यादा इंटरनेशनल इकॉनमी नहीं है। अगर मैं इसको बिल्कुल साधारण भाषा में बोलूं वी आर नॉट अ वेरी वेरीरी ग्लोबल इकॉनमी। तो यह हमारे लिए अब कोई कहेगा नुकसान की बात है। मैं कहूंगा फायदे की बात है। फायदे की बात यह है कि आपका जीएसटी कलेक्शन युद्ध के समय में अगर ढाई लाख करोड़ के आसपास आ जाता है तो यही बताता है कि हम अपने आप में एक दुनिया आप मेरे को बेचिए। मैं आपको बेचता हूं। हमारा काम चलता रहता है। मत खरीदना। अमेरिका नहीं खरीद नहीं खरीदता तो। दुनिया की उथल-पुथल से बचे हुए हैं। हम कुछ कुछ हद तक हमें इम्यूनिटी होती है। ये ये भारत की अर्थव्यवस्था की मुझे लगता है जहां एक तरफ एक तरफ डाउन साइड है मुझे लगता है एक तरफ अपसाइड भी है। बहुत सारे लोग सवाल पूछते हैं कि 2000 25 में जब फाइनेंसियल ईयर था उसमें नौ पहले जो महीने थे उसमें भारत की तेल कंपनियों ने सस्ता तेल खरीद करके 13,37,000 करोड़ बनाए प्रॉफिट में। वो बहुत सारे लोग ये प्रश्न पूछ रहे हैं कि अब जब तेल महंगा हो गया है तो क्या ये थोड़ा बहुत सहन नहीं कर सकते हैं क्या? कर रहे हैं सहन। क्या ये तेल कंपनियां और कितने दिन सहन कर पाएंगे? कर रहे हैं सहन। मुझे लगता है जो रिजर्व्स इन्होंने मुनाफा कमाया फिर कुछ ये रिजर्व्स में भी डालते हैं। ऐसा भी आंकड़ा आया कि $25,000 करोड़ के रिजर्व्स थे। प्रॉफिट तो था। तो अब काम आया वो जब उन पे उस समय ये इल्जाम था कि भाई आप क्रूड ऑयल $60 पे था और आप पेट्रोल $100 बेच रहे थे तो उस समय आपने कम क्यों नहीं किया? तो मुझे लग रहा है अब उन लोगों की शिकायत यह तेल कंपनियां कहती होंगी ऐसा कि भाई अब तो आपकी शिकायत दूर हो गई जहां अमेरिका से ले ऑस्ट्रेलिया तक जो अपने आप को दुनिया का सबसे बड़ा ऑयल प्रोड्यूसर कहता है अमेरिका वहां पर $3 से $5 हो गई हमारे यहां तो सिर्फ प्रीमियम पेट्रोल महंगी गाड़ी वालों का हमने बढ़ाया जो लोग महंगी गाड़ी में ये डलवाते हैं। हमने तो कमर्शियल सिलेंडर पे दाम बढ़ाए। हमने घरेलू आम आदमी की चीजों पे हमने आज तक नहीं बढ़ाए। अब तो ममता दीदी भी चली गई। तो लोग तो कह रहे थे 30 अप्रैल को बढ़ जाएगा। अभी तक नहीं बढ़ा। तो हालांकि मैं यह मानता हूं कि अगर क्रूड ऑयल के दाम बार-बार $10 और $120 को छूते रहे तो वह किसी भी दिन आपको सुनने को मिल सकता है कि और मुझे किसी ने कहा जी आप जैसे आप कह रहे थे ₹15 ₹20 कोटक की एक रिपोर्ट आई उसने तो कहा था 28 ₹30 का घाटा है। एक और रिपोर्ट आई उसने कहा कि अगर फ्री मार्केट पे छोड़ दें पेट्रोल को तो पेट्रोल में ₹100 बढ़ जाएंगे। यहां तक बोला अलग-अलग रिपोर्ट्स लोगों ने अपने-अपने अलग-अलग आकलन किए। पर मुझे लगता है ₹230 बढ़ाना कोई सेंस नहीं बनता। बढ़ा भी तो तीन चार ₹5 के करीब अगर बढ़ाया भी जाएगा तो इतना बढ़ाया जाएगा। पर यह सब डिपेंड करेगा फिर वही स्टेट ऑफ हार्मोस पर कि अगर बार-बार क्रूड ऑयल 110 $120 शुरू होगा क्योंकि विशाल हमको क्रूड 110020 नहीं पड़ता है। हमको 150 पड़ता है। हम इस भाव पर भी हमारी जो क्रूड बास्केट है वो वेनेजुएला से अल्जीरिया से, ऑस्ट्रेलिया से, रशिया से आती है और उसमें रिफाइनिंग कॉस्ट जुड़ती है। उसमें इंश्योरेंस कॉस्ट जुड़ती है। उसमें शिपिंग लाइंस ने किराए बढ़ा दिए। उनको लगता है मिसाइल गिर जाएगी हमारे ऊपर यार बड़ा रिस्क ले रहे हैं हम इंश्योरेंस वाला यूके में इंडेमिनिटी एंड प्रोटेक्शन क्लब है वहां पर दुनिया की बड़ी इंश्योरेंस कंपनीज़ माना जाता है लंदन में है एबीवा है प्रोडेंशियल है भूपा है ये सब कंपनीज़ के हेड ऑफिस लंदन में है उन्होंने वहां पर एक सर्कुलर जारी किया कि सबने अपनी इंश्योरेंस कॉस्ट बढ़ा दी तो सारी शिपिंग की इंश्योरेंस कॉस्ट तो हमको इफेक्टिवली ये क्रूड ऑयल पड़ता है करीब $50 अभी इस भाव पर भी इंडियन बास्केट जैसे इंडियन बास्केट जिसको क्रूड बास्केट बोलते हैं हमें अभी भी बहुत महंगा तो मैं तो अह देखिए अगर इलेक्शन की वजह से है तो यह पंजाब के और यूपी के इलेक्शन अगले साल होने हैं। मैं तो कहूंगा इसी साल सितंबर में करा दीजिए क्योंकि फिर इलेक्शन मोड में चले जाएंगे। इलेक्शन मोड में मुझे क्या आपको लगता है कि कब तक खींच पाएगी तेल कंपनियां पड़ेगा? पाएंगे। हां क्योंकि वो लोग ब्लीड कर रहे हैं। इसमें तो कोई दो राय नहीं है। कितनी भी वो चुप्पी साध के बैठे हैं। मुझे एक बात और मैं कहना चाहूंगा विशाल बहुत जरूरी बात मैं कहना चाहूंगा। मैं अपनी तरफ से कहना चाहूंगा। ये बात तो जो हमने बातें कही ये तो सार्वजनिक तौर पर हम बात करते ही रहते हैं। मुझे लगता है कि ये जो ऑयल मार्केटिंग कंपनीज़ हैं हिंदुस्तान पेट्रोलियम इंडियन ऑयल भारत पेट्रोल 90% मार्केट शेयर इनके पास है। बाकी नारा और Jio कहीं-कहीं आपको प्राइवेट पेट्रोल तीन बड़ी स्टेशन मुझे लगता है इन कंपनीज़ को ना थोड़ा सा एक तरफ हो जाना चाहिए। भाई आप सरकारी हैं तो आप सरकारी हैं। आप देश सेवा के लिए हैं। तो इनको क्या करना चाहिए? यह बात मैं आपसे पहले भी कर चुका हूं। इनको क्या करना चाहिए? इनको अपने आप को मार्केट से डीलिस्ट कर देना चाहिए। हम और सरकार को इसमें डिस्वेस्टमेंट भी खत्म कर देनी चाहिए। सरकार को वो शेयर्स जो लोगों के पास है इन कंपनीज़ के आम इन्वेस्टर के उसको बाय बैक कर लेना चाहिए और देश सेवा के लिए देश सेवा का अर्थ है अगर पीछे से क्रूड ऑयल की कीमत बढ़ रही है तो हम इनके प्रॉफिट मतलब नो प्रॉफिट नो लॉस पे ये चले। हम्म। दिक्कत क्या है कि ये स्टॉक मार्केट में लिस्टेड है। निवेशकों का इनमें पैसा लगा हुआ है। तो इन्हें रिटर्न देना है। तो हर तीन महीने बाद आपको प्रॉफिट रिटर्न प्रॉफिट सबमिट करना होता है शेयर मार्केट स्टॉक एक्सचेंजेस को। ये मैंडेटरी होता है सब लिस्टेड कंपनीज़ के लिए। तो आप प्रॉफिट सबमिट करते हैं। दूसरी तरफ दूसरी तरफ इलेक्शन आ गए या अंतरराष्ट्रीय क्रूड की कीमत बढ़ गई। आपको तो ये कैसा बिजनेस है? आप उलझे हुए हैं कि आपको मुनाफे पे हाथ खींचना पड़ रहा है। मैंने तो नहीं देखा कि स्टॉक एक्सचेंज की कंपनी जो कि जानबूझकर हाथ खींचे। आप स्टॉक एक्सचेंज तो मतलब मैक्सिमम प्रॉफिट आपके अगर प्रॉफिट हो रहा है तो प्रॉफिट कमाइए प्रॉफिट कमाइए और प्रॉफिट दिखाइए और प्रॉफिट को बकायदा आपकी तो यह बड़ी असमंजस की सिचुएशन है। तो मेरा ये देखिए ये तो हम पहले बात कर चुके हैं और मुझे लगता है कुछ लोगों के दिमाग में शायद मुझे सुझाव मेरा ये है कि इन कंपनीज़ को डीलिस्ट कर देना चाहिए। गवर्नमेंट को बायबैक करना डिस्वेस्टमेंट का प्रोसेस रोक देना चाहिए। और ये कंपनीज़ देश सेवा में होनी चाहिए कि पीछे से कॉस्ट कम है तो कम में दीजिए। ज्यादा है तो ज्यादा में दीजिए। बस अब ब्रेक इवन आप रहिए क्योंकि आपको तनख्वाएं देनी है। आपको जो कंपनी चलाने के सारे खर्चे वो बाबा रामदेव जैसे पतंजलि जैसे जैसे वो कहते हैं। जी कहते तो ऐसे ही हैं भाई। हम तो देश सेवा करते हैं। हमने 1 लाख करोड़ से ज्यादा आज तक आज तक चैरिटी में खर्च किया है। हम जो कमाते हैं उनके जो आचार्य वो क्या नाम है? बालकृष्ण जी हैं और वो जो दोनों मिलके चलाते हैं उसको। तो भाई हम तो देश सेवा में लगाते हैं। हम उसको चैरिटी और लगाते भी होंगे। मैं इंकार नहीं करता। मैं नहीं मैं नहीं मानता कि बाबा रामदेव ने कोई फॉरेन में आइलैंड खरीद रखा होगा। ठीक है? उन्होंने उन्होंने Land Rover ली एक महंगी वाली ले ली तो ठीक है वही इस्तेमाल करते हैं। दिखा दी भैया ये ली हमने कम से कम इतना कमा के हम एक लैंडवर तो चला सकते हैं। पर मेरा कहने का मतलब है कि इनको पतंजलि मॉडल पे आ जाना चाहिए इन तीनों कंपनीज़ को क्योंकि ये मुनाफा कमाए और कमा के या तो लोगों को उसको सब्सिडी के रूप में पास ऑन कर दें या फिर ब्रेक इवन पे नहीं। यह तो बड़ा आसान है। एकाउंटिंग में बहुत आसान है। आप उतना ही खर्चा करिए जितना आपको कमाना है। जितना आप प्रॉफिट हुआ उसके बाद आप पास ऑन करते जाइए। ये तो बड़ी सिंपल मैथमेटिकल इक्वेशन है। करना आसान है। ये मेरा सुझाव है। आज आपके चैनल के माध्यम से मैं दे रहा हूं। क्योंकि ये जो कंफ्यूजन जिसका आपने बात करी ना ये कंफ्यूजन स्टॉक मार्केट पॉइंट ऑफ व्यू से, स्टॉक एक्सचेंज पॉइंट ऑफ व्यू से, निवेशकों के पॉइंट ऑफ व्यू से, पेट्रोल प्राइस के पॉइंट ऑफ व्यू से, डीजल के प्राइस के पॉइंट ऑफ व्यू से इधर जाएं कि उधर जाएं, उधर पुरी साहब और वो सारी सरकार का तंत्र भाई उनका उनका कहना ठीक है। वो गलत नहीं कहते भाई आप पास ऑन मत करिए क्योंकि आम आदमी पर बोझ पड़ेगा। महंगाई बढ़ेगी। महंगाई बढ़ी तो हमारा फिस्कल डेफिसिट, डेफिसिट फाइनेंसिंग, हमारा सारी फिस्कल बैलेंस शीट अपसेट होती है। मैं सरकार को दोष नहीं देता। सरकार ने अगर इनका हाथ रोक के रखा तो इसमें कोई बुरा नहीं। भाई हमारी तुम्हारी मेजॉरिटी होल्डिंग हमारे पास है। हम नहीं बढ़ाने देते तुमको। पर वो कंपनी क्या कर रही है? हम वो कंपनी तो निवेशकों के ज़ोन में बैठी हुई है। वो स्टॉक एक्सचेंज में पब्लिक डोमेन में बैठी हुई है। इसलिए मैंने ये सुझाव सोचा कि आपको आज आपके पडकास्ट में दूं। एक और ऐसा सवाल जो मैंने आपसे पहले भी किया था। पिछली बार भी स्टॉक मार्केट को लेकर के। विदेशी संस्थागत निवेशकों ने एफआईआई ने कुछ ही समय में 70,000 करोड़ निकाल लिया। वो बात ठीक है कि फिर हमारे देसी जिन्हें आप देसी बॉयज कहते हैं उन्होंने 500 करोड़ के शेयर ले भी लिए। मैं फिर वही पूछ रहा हूं कि ऐसा क्या है कि वो इतने बड़े पैमाने पर पैसा भारत के शेयर मार्केट से लगातार खींचते चले जा रहे हैं। मुझे विशाल इससे ऐतराज नहीं है। मैं एक स्टॉक मार्केट एनालिस्ट भी हूं और मैं दुनिया भर की मार्केट्स को ट्रैक करता हूं। 25% से ज्यादा इन विदेशी संस्थागत निवेशकों की हिस्सेदारी भारतीय मार्केट्स में हो गई थी। 25 से ज्यादा 25% से ज्यादा एक समय पर आज ये गिर के 15 16 पर आ गई है। हम मुझे लगता है और देखिए जब आज भी हम 24000 24000 के बीच में खड़े हैं। मैं निफ्टी की बात कर रहा हूं। हाईएस्ट हमारा 26000 था। हम तो मुझे तो बहुत अच्छी बात लगती है। क्यों अच्छी लगती है कि 26370 हमारा ऑल टाइम हाई था। आज हम 24,000 पर खड़े हैं और लाखों करोड़ रुपए यह निकाल चुके हैं। तो इस हिसाब से तो हमें गिर के 10,000 पर आ जाना चाहिए था बल्कि भारतीय मार्केट को नेगेटिव में चले जाना चाहिए था। मुझे लगता है हम आत्मनिर्भर बन रहे हैं स्टॉक मार्केट के लोकल निवेशकों का पैसा डोमेस्टिक निवेशकों का पैसा अब इसके बदले में आ रहा है। और दूसरी बात भाई अगर मैंने ₹10 लगाए हैं। विशाल बताइए मेरे 15 हो गए तो क्या मुझे ले जाने का अधिकार नहीं है? बिल्कुल। मुझे कमाने का मैं निवेश करने आया था। मैं आपको कोई दान देने थोड़ी ना आया था यहां। अगर मेरा प्रॉफिट हो गया तो मैं जा रहा हूं। अगर मैंने 2020 में लगाया था ₹100 आज मेरा ₹125 हो गया है तो मैं जा रहा हूं निकाल के मेरे को अधिकार है मेरे को ले जाने का। अब मैं अपने देश में टैक्स भी दूंगा और निकालूंगा। तो मुझे मुझे इसमें लॉन्ग टर्म में विशाल अच्छी बात दिखाई देती है। मुझे लगता है भारतीय स्टॉक मैंने अपना चैनल एक शरद कोहली ऑफिशियल नाम से बनाया। उसमें मैंने ये डाला ये बात के हम स्टॉक मार्केट में आत्मनिर्भर बनेंगे। हम और यह बहुत अच्छी बात है जो लॉन्ग टर्म जो स्टॉक मार्केट को समझते हैं वो इस बात को समझेंगे नहीं तो हम मुंह जैसे ही मार्केट बंद होती है सबसे अरे एफआईआई ने कितना बेचा एफआईआई का आंकड़ा निकालो शाम तक आता है बाय द वे फौरन 3:30 बजे नहीं आता है शाम तक हम यही खंगालते रहते हैं कितना बेचा इसने कितना बेचा सिंगापुर वाला था ये कौन सा दुबई वाला था नहीं नहीं नहीं ये न्यूयॉर्क वाला था ये जैपनीज था अरे ये क्या है हम इनका मुंह ताकते रहे अपने अपने पैसे को सोचिए प्रभाव कहां पड़ रहा है हमारे अपने पैसे पर जिस दिन ये बेच के जाते हैं उस दिन मार्केट गिर जाती है हम तो ये ठीक नहीं था और मुझे लगता है जो होता है अच्छे के लिए हो रहा है तो अगर ये निकालते हैं निकालने दीजिए ले जाने दीजिए इनको अरे जाओ यार सारा निकाल लो निकालना है तो हम अपना लगाएंगे ना हमारे यहां एसआईपी वाले म्यूचल फंड वाले लगाते हैं टक्कर का पैसा लगाते हैं कई बार तो जितना निकालते हैं उससे ज्यादा लगा देते हैं जाओ हमने तो मार्केट को टिका लिया कर लेंगे तुम्हारे बिना भी गुजारा और तुमसे उससे पहले से अच्छा करेंगे ठीक है हमने सोने पर बात की चांदी पर बात की हमने स्टॉक मार्केट पर बात की अब मैं थोड़ी सी बात रियलस्टेट पर करना चाहता हूं क्योंकि लोग कमेंट बॉक्स में पूछ पूछ लेते हैं जी कि भाई इन्वेस्टमेंट तो हम करते ही हैं। सोने में भी लगा दिया, चांदी में भी लगा दिया, स्टॉक मार्केट में लगा दिया। रियलस्टेट का भविष्य यहां से आगे आपको क्या नजर आता है? खासतौर से जब जब दुनिया में युद्ध चल रहे होते हैं जैसे दुबई जैसे मार्केट को हमने देखा अचानक से रियलस्टेट कहां से कहां पहुंच गया? मिसाइलें गिरी। हालात खराब हो गए। भारत का रियलस्टेट यहां से आ गया। देखिए रियल स्टेट जो है वो एक सक्लिकल एसेट है। कुछ लोग साइक्लिकल भी बोलते हैं। वो साइकिल से गुजरता है। मुझे लगता है इस समय हम थोड़े डाउनवर्ड ट्रेंड की साइकिल में आ चुके हैं। हम और ये मैं नहीं कह रहा। ये दुनिया भारत के जो बड़े डेवलपर्स हैं उनका माल अब बिक नहीं रहा है। या मैं यूं कहूं कि आसानी से नहीं बिक रहा है। ये बहुत सारे मुझे प्रॉपर्टी एजेंट्स जो ये इनके चेन के लोग होते हैं। प्रॉपर्टी चेन के लोग होते हैं। चैनल पार्टनर्स होते हैं। आजकल प्रॉपर्टी डीलर को नया नाम मिला है। चैनल पार्टनर। प्रॉपर्टी डीलर हो तो शादी नहीं होती। तो क्या करता है लड़का? प्रॉपर्टी डीलर है। अब बोलते हैं चैनल पार्टनर है। तो वो एक दातून बेचता था ना तो उसकी उसका अब रिश्ता नहीं होता था। क्या करता है वो लड़का? दातून बेचता है। तो किसी ने कहा वो कहता है क्या करता है? वो टिमबर मर्चेंट है। टिमबर मर्चेंट। तो जितने ये चैनल पार्टनर्स हैं इन सब ने मुझे बताया के कि इस समय मामला जो है वो सॉफ्ट हो रहा है और आपको शायद पता नहीं होगा और आपके फॉलोअर्स व्यूअर्स सब्सक्राइबर्स को मैं बता दूं कि चाइना में 2005 के रेट्स वापस आ गए हैं। हम इतनी जबरदस्त अनसोल्ड इन्वेंटरी शघाई में, बीजिंग में, ग्वांगजाऊ में, ग्वांगडोंग में इतनी जबरदस्त अपार्टमेंट्स के अपार्टमेंट बने हुए हैं। कोई खरीदने वाला नहीं है। और जिन लोगों ने ईएमआई दी थी उन्होंने छोड़ दी ईएमआई फोर फीट कर दी। ले जा भैया जो दी थी वो हमें आगे नहीं देंगे। खत्म। दैट्स इट। और जो इंस्टॉलमेंट्स पर लिया था जिसको सेल्फ फाइनेंसिंग प्लान कहते हैं उन्होंने देके आधा पौना देके छोड़ दिया। हम तो चाइना का ये ट्रेंड बहुत खतरनाक है और चाइना में बहुत बड़ी मात्रा में प्रॉपर्टी मार्केट गिर रही है। और अगर ये उस साइकिल का ट्रेंड है तो मुझे लगता है भारत में भी सावधान हो जाना चाहिए। रियलस्टेट में अगर कोई इन्वेस्ट करना चाहता है मैं केवल और केवल एक एसेट पर दो एसेट्स पर मैं बैंक कर रहा हूं। अगर कोई जिसमें मुझे बढ़ने की उम्मीद नजर आ रही है। दो एसेट्स एक तो अल्ट्रा रिच वाले हम गुड़गांव में एक गोलफ कोर्स रोड है। हम वहां पर आपने सुना होगा कमिलियास मैग्नोलियास अरालियास और एक उन्होंने अभी ल्च किया ढहालियास हम 100-100 करोड़ के 70 करोड़ 80 करोड़ 200 करोड़ आपको सुनने को उसको हम कहते हैं अल्ट्रा रिच सेगमेंट उस पर इस मंदी का कोई असर नहीं होता क्योंकि वहां पर वहां पर तो ये होता है कि इतना पैसा फेंक दो और क्या फैसिलिटीज ले लो एक तो उस पे कोई असर नहीं होगा एक और एसेट है जो आम आदमी के लिए बताना चाहूंगा वो तो खैर छोड़ दीजिए वो एक अलग कैटेगरी है पर लोग कहेंगे यार क्या मजाक उड़ा रहे हो हमारा यह 200 करोड़ का अपार्टमेंट बना जहां आप कर सकते हैं शहर चलते हैं। हम आप नोएडा रहते हैं। हम आपने कभी निकलते हुए आप अपनी जब वाइफ के साथ जाते होंगे। अरे तीन साल पहले तो यहां कुछ नहीं था। ये मॉल अरे ये कब बन गया? हम ये अपार्टमेंट्स कब बन गए? यहां तो जंगल होता था। यहां से तो लोग गुजरने में भी डरते थे रात के टाइम। क्या आपने ये बातें सुनी है लोगों के? तो शहर भी चलते हैं। हम जिस तरफ शहर चल रहा हो उस तरफ कोई लैंड ले लीजिए। हम तो वो आपका आने वाले दो तीन पांच साल में प्लानिंग में आ जाएगा। प्लानिंग का मतलब होता है जब वहां की कॉरपोरेशन डिसाइड करती है, वहां की अथॉरिटी डिसाइड करती है। अब यहां पर हम इसको तो वो लैंड आपको दे सकता है। उसके अलावा बाकी के रियलस्टेट एसेट्स पे मैं बहुत ज्यादा बुलिश नहीं हूं। मुझे लगता है साइकिल वाइज अब यह थोड़ा डाउन ट्रेंड पर है। तो इसलिए खासकर जो कंस्ट्रक्टेड प्रॉपर्टी है अपार्टमेंट्स, फ्लैट्स, कंडोमिनियम्स ये जो चीजें हैं ये अब उस रफ्तार से जो इन्होंने पहले रफ्तार दी मुझे लगता है वो रफ्तार शायद ना दे पाए। हालांकि प्रॉपर्टी निवेशकों के लिए मैं कहूंगा मैं गलत हो जाऊं तो अच्छा है क्योंकि उनका पैसा लगा हुआ है। पर आई विश आई एम रोंग। पर मुझे ऐसा संकेत मिल रहा है उन चैनल पार्टनर्स से, उन डेवलपर्स से, उन उन प्रॉपर्टी डीलर्स से, उन प्रॉपर्टी प्लेयर्स से मैं बहुत संपर्क में रहता हूं। बहुत सारे लोगों से और निवेशकों से भी संपर्क में रहता हूं। मुझे लगता है कि थोड़ा सा डिफिकल्ट टाइम रियलस्टेट के लिए आगे दिखाई देगा। एक आखिरी प्रश्न मेरा अगर आपके पास अभी ₹1 करोड़ इन्वेस्ट करने के लिए तुरंत हैं तो आप उस ₹1 करोड़ को किस तरीके से इन्वेस्ट करना चाहेंगे? उसमें आप जो मेथड बताते हैं कि 20 यहां 20 वहां उसे अगर हम छोड़ देते हैं आप जो आज मार्केट देख रहे हैं आपको लगता है कि यहां से मैं पैसा बना के निकल सकता हूं अगले एक डेढ़ दो साल के अंदर तो वो एक करोड़ आप कहां लगाएंगे? नहीं मैं मैं अपनी उसी स्ट्रेटजी पे बना रहूंगा। हम मैं स्ट्रेटजी चेंज नहीं करूंगा। आप मुझे पुटिंग वर्ड्स इन माय माउथ कि मैं स्ट्रेटजी बदल दूं। मेरी वो जो 20 20 20 20 पांच एसेट्स के नाम लिए थे। फिर ले देता हूं। रियलस्टेट गोल्ड एंड सिल्वर म्यूचल फंड स्टॉक मार्केट्स और एक वो आलसीसी एफडी सड़ी सी एफडी तो मैं अभी उन पांचों पर बना रहूंगा मैं मैं बिल्कुल अपनी स्ट्रेटजी नहीं बदललूंगा क्योंकि मैंने आपको अभी बीच में बताया था कि मंदी यहां पर आ चुकी है तो मंदी में तो वैसे ही स्ट्रेटजी बदलनी नहीं पड़ती है। भले ही मैं गोल्ड सिल्वर को लेके बुलिश हूं। आने वाले 2 से 5 साल में भले ही मैं मार्केट्स को लेके भी बुलिश हूं। मार्केट भी आपको आने वाले 5 से 10 साल में अच्छा रिटर्न दे सकती है। मार्केट ऊपर आपको बताया था मैंने मार्केट सिर्फ ऐसे चलती है या ऐसे जाती है तो मार्केट भी ऊपर जाएगी पर फिर भी मैं नहीं चाहूंगा कि आप रिस्क लें और विशाल सिर्फ इसलिए मैं मानता हूं कि आपके जितने फॉलोवर्स व्यूअ सब्सक्राइबर्स हैं उनकी खून पसीने की कमाई है। कि अगर तो हराम की कमाई होती ना क्षमा चाहता हूं शब्द इस्तेमाल करने के लिए तो फिर मैं आप जो कह रहे हैं यहां लगा दो लगा दो एक करोड़ अब देखो फिर क्या होता है दोती महीने में पर मैं मान के चल रहा हूं कि खून पसीने की कमाई है मैं नहीं चाहता किसी का नुकसान हो और मैं ये स्वीकार कर लूंगा कि कम रिटर्न आया पांच एसेट एलोकेशन की वजह से रिटर्न कम आएगा नेचुरली कोई कोई एसेट क्लास कम देगी एफडी तो सड़ी हुई बताई मैंने 6% देती है 6.5% कट के छ से भी नीचे आ जाता है फिर भी मैं ये एलोकेशन पे अपना बना रहूंगा एंड आई विल स्टिल स्टिक टू दिस 2020 इनू फाइव डिफरेंट एसेट क्लासेस। और यही वजह भी है कि जो लोग आपको देखते हैं वो आपकी सलाह को मानते हैं। क्योंकि जैसा आपने कहा खून पसीने की कमाई है। किसी की वेस्ट नहीं होनी चाहिए। प्रॉफिट थोड़ा सा कम हो जाएगा तो चलेगा लेकिन पैसा वो गाली मैं खा लूंगा। पैसा और वो दूसरी वाली गाली नहीं खाऊंगा। मेरा पैसा डुबो दिया। यही उम्मीद करते हैं कि इस पॉडकास्ट के माध्यम से जो लोग अपना पैसा लगाने जा रहे हैं उन्हें बहुत सारी अच्छी जानकारी मिली होगी और जैसा कि हम हर बार कहते हैं पैसा लगाने से पहले अपने फाइनेंसियल एडवाइजर से जरूर बात करें। यह जो बातचीत है ये सिर्फ आपकी जानकारी को बढ़ाने के लिए उसे ऐसे ही इस्तेमाल करें। बहुत-बहुत शुक्रिया। थैंक यू सर। साहब थैंक यू।
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