What Killer Did Inside this House Will Haunt You! | Madhavi-Gurumurthy Case | Meerpet | Hindi

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18 जनवरी 2025 दोपहर के 3:00 बजे हैदराबाद के मीरपेट पुलिस स्टेशन में गुरुमूर्ति घबराई हालत में अपने इनलॉज के साथ आता है और वहां के पुलिस ऑफिसर से कहता है कि उसकी वाइफ माधवी घर से जाने के बाद से अभी तक लौटी नहीं है माधवी की मां पुलिस को बताती है कि जब 16 जनवरी को यानी 2 दिन पहले जब माधवी का कॉल नहीं उठा तो उन्हें लगा कि शायद संक्रांति फेस्टिवल की वजह से वह घर के काम में बिजी होगी लेकिन पूरा दिन बीत जा ने पर भी जब माधवी ने उन्हें कॉल बैक नहीं किया तो उन्होंने अगले दिन फिर से अपनी बेटी को कॉल किया लेकिन इस बार भी उनकी माधवी से बात नहीं हो पाई सिंस ऐसा कोई दिन नहीं होता था जब उनकी अपनी बेटी से बात ना होती हो इसलिए अब उन्हें माधवी की चिंता होने लगी थी और इसी वजह से अपनी बेटी का हाल जानने के लिए उन्होंने अपने दामाद गुरुमूर्ति को कॉल लगाई लेकिन गुरुमूर्ति ने तो उन्हें कुछ ऐसा बताया जिससे उनकी चिंता और बढ़ गई गुरुमूर्ति ने उन्हें बताया कि माधवी उसे लड़ झगड़ करर घर छोड़कर चली गई है और उसे लग रहा था कि वह घर से निकलकर अपने माइके गई होगी माधवी को घर से निकले दो दिन गुजर गए थे और ना ही वो अपने माइके पहुंची थी और ना ही फोन पर उसने किसी से कांटेक्ट किया था इसलिए ऐसे में माधवी के पेरेंट्स को डर सताने लगा कि कहीं उनकी बेटी के साथ कोई अनहोनी ना हो गई हो अगर किसी का कोई अपना अचानक गुम हो जाए तो बेचैनी और डर लाजमी है लेकिन जब गम से ज्यादा सवालों के जवाब अधूरे लगने लगे तो शक गहराने लगता है यही वजह थी थी कि अपनी बेटी की फिक्र में वह फौरन नदयाल से 300 किमी दूर अपनी बेटी के घर लेला गुड़ा को निकलते हैं और वहां पहुंच अपने दामाद गुरुमूर्ति के साथ पुलिस स्टेशन में अपनी बेटी माधवी की मिसिंग रिपोर्ट दर्ज करवाते हैं अब थी तो यह एक मिसिंग कंप्लेंट लेकिन हकीकत इससे कहीं ज्यादा पेचीदा थी सिंस माधवी को आखिरी बार गुरुमूर्ति नहीं देखा था इसलिए पुलिस गुरुमूर्ति से पूछताछ करती है गुरुमूर्ति पुलिस को बताता है कि माधवी दो दिन से अपने मायके जाने की जिद कर रही थी लेकिन व चाहता था कि संक्रांति का फेस्टिवल सब साथ में उसकी बहन के घर में मनाएं क्योंकि उसके बच्चे भी फेस्टिवल की वजह से अपनी बुआ के घर बदन पेट में रुके हुए थे और यह सोचकर गुरुमूर्ति ने उसे मायके जाने से मना कर दिया लेकिन यह बात माधवी को पसंद नहीं आई और गुस्से में वह लड़ झगड़ करर घर छोड़ चली गई सिंस तेलंगाना में संक्रांति को धूमधाम से चार दिनों तक मनाया जाता है सो ऐसे त्यौहार के माहौल में माधवी के यूं नाराज होकर घर से चले जाने से गुरुमूर्ति को और गुस्सा आ गया और उसने माधवी को जाने से भी नहीं रोका गुरुमूर्ति ने पुलिस को बताया कि माधवी जब घंटों बाद भी वापस नहीं लौटी तो वह देर रात अपने बच्चों को बहन के घर से अकेले लेने चला गया बच्चों ने घर आकर जब अपनी मां के बारे में सवाल किए तो उसने झूठ कह दिया कि मां अपने दोस्त के घर गई है ताकि बच्चे बेवजह परेशान ना हो उसे लगा कि माधवी कहीं भी गई हो लेकिन वो बच्चों का सोचकर घर लौट ही आएगी इसलिए उसने माधवी के बारे में पता नहीं लगाया लेकिन अगले दिन सुबह होते ही उसने माधवी को कॉल किया बट उसका फोन नहीं लगा इस पर पर उसे लगा कि माधवी ने गुस्से में अपना फोन स्विच्ड ऑफ कर लिया होगा इसके बाद व रोज की तरह कंचन बाग में लोकेटेड डीआरडीओ टाउनशिप में जहां वह सिक्योरिटी गार्ड की जॉब करता था वहां काम करने के लिए निकल गया और शाम को शिफ्ट खत्म होने के बाद जब वह घर लौटा तो उसे लगा था कि माधवी अब तक घर आ चुकी होगी लेकिन अब भी घर पर माधवी को ना पाकर उसका दिल भारी हो गया और उसने तुरंत एक बार फिर माधवी को कॉल किया बट अब भी उसका फोन नॉट रीचे बल आ रहा था मन में बेचैनी और बुरे ख्याल आने के चलते व माधवी के बारे में जैसे ही पता करने के लिए रिश्तेदारों को कॉल करने वाला था उतने में ही माधवी की मां का कॉल उसके पास आ गया गुरुमूर्ति और माधवी के पेरेंट्स के स्टेटमेंट से तो पुलिस को यह एक मिसिंग केस लग रहा था मिसिंग रिपोर्ट फाइल करने के बाद पुलिस मामले को इन्वेस्टिगेट कर ही रही थी कि तभी केस के बीच में एक आए नए किरदार ने पुलिस के सामने माधवी से जुड़े कुछ ऐसे खुलासे किए जिसे सुन पुलिस के पैरों तले जमीन खिसक गई क्योंकि इन खुलासों ने ऐसी परते खोली जिसने इसे एक मिसिंग पर्सन केस से कहीं ज्यादा संगीन बना दिया और अब एक ऐसा राज सबके सामने आने वाला था जिसने ना सिर्फ मीरपेट को बल्कि पूरे देश को हिलाकर रख दिया अ स्टोरी दैट हैज शॉक द नेशन दिस इज द बिल्डिंग वेयर समथिंग वेरी वेरी हॉरिफिक इज सेड टू हैव हैपन जस्ट इन मिड जनवरी वेलकम टू द शो माय नेम इज शाश्वत एंड यू आर वाचिंग द केस ऑफ माधवी एंड गुरुमूर्ति गुरुमूर्ति और वेंकटापुरम प्रकाशम डिस्ट्रिक्ट में सेटल हो गए थे उनके दो बच्चे थे एक बेटा और एक बेटी उस समय गुरुमूर्ति आर्मी में नायब सूबेदार की पोस्ट पर था और माधवी होममेकर आर्मी में 17 साल नौकरी करने के बाद गुरुमूर्ति रिटायरमेंट लेकर साल 2020 में अपने परिवार के साथ हैदराबाद में जिले ला गुड़ा की वेंकटेश्वरा कॉलोनी में शिफ्ट हो गया और यहां पर वो इस दो मंजिला घर में रेंट पर रहने लगा गुरुमूर्ति के अकॉर्डिंग 16 जनवरी 2025 को पति-पत्नी वाली आम सी नोक झोक के बाद माधवी गुस्से में घर से चली गई शुरू में तो यह एक मामूली सा घरेलू झगड़ा लग रहा था लेकिन पुलिस के सामने कुछ अहम सवाल थे जैसे कि क्या माधवी वाकई गुस्से में घर छोड़ चली गई थी या फिर यह कहानी जितनी दिख रही थी उससे कहीं ज्यादा गहरी थी पुलिस ने इन्वेस्टिगेशन में सबसे पहले गुरुमूर्ति के आस पड़ोस में रह रहे लोगों से पूछता शुरू की वहां से उन्हें पता चलता है कि उनमें से किसी ने भी माधवी को नहीं देखा था इनफैक्ट उन्हें तो यह भी नहीं पता था कि माधवी मिसिंग है क्योंकि संक्रांति की वजह से कुछ लोग अपने गांव गए हुए थे और जो लोग मोहल्ले में भी मौजूद थे उन्हें गुरुमूर्ति के परिवार के बारे में कुछ खास पता भी नहीं था क्योंकि 5 साल यहां रहने के बाद भी गुरुमूर्ति के परिवार ने किसी से मेलजोल नहीं रखा था और ना ही उनके बच्चे मोहल्ले के बच्चों के साथ खेला कूदा करते थे गुरुमूर्ति एंड फैमिली का इस कदर रिजर्व्ड होना पुलिस के लिए अटपटा सा था लेकिन इससे भी ज्यादा हैरान कर देने वाले खुलासे से पुलिस को अब रूबरू होना था क्योंकि जिस किरदार का जिक्र हमने पहले किया था वह शख्स कोई और नहीं बल्कि माधवी के मामा थे जिन्होंने पुलिस स्टेशन आकर इस केस से जुड़े ऐसे खुलासे किए जिसने सबको हैरानी में डाल दिया उन्होंने बताया कि माधवी अब कभी नहीं लौटेगी क्योंकि गुरुमूर्ति ने उसे मार डाला है और यह सब गुरुमूर्ति ने उनसे खुद बोला है वैसे भी ऐसे केसेस में पहला शक विक्टिम के पार्टनर पर ही जाता है इसलिए उनकी बातों में कितनी सच्चाई है इसकी तह तक जाने के लिए पुलिस ने जलेला गड़ा में चल रही इन्वेस्टिगेशन को और तेज कर दिया पुलिस के नजर गुरुमूर्ति के घर के सामने वाले घर में लगे एक सीसीटीवी कैमरा पर पड़ती है सच की तलाश में पुलिस सीसीटीवी फुटेज खंगालना शुरू करती है और पाती है कि 15 जनवरी की रात 10:4 पर गुरुमूर्ति और माधवी साथ में घर आते दिख रहे हैं बट शॉकिंग बात यह थी कि आगे की डेट्स की किसी भी फुटेज में माधवी घर से बाहर निकलते नहीं दिखी यानी माधवी घर के अंदर तो गई थी पर कभी बाहर नहीं निकली थी पुलिस को लग गया कि हो ना हो उस घर में ही कुछ गड़बड़ हुआ है माधवी के मामा के दिए गए बयान के साथ पुलिस सामने कई सवाल थे कि अगर माधवी 16 जनवरी से गायब थी तो फिर गुरुमूर्ति ने मिसिंग कंप्लेंट फाइल करने में इतनी देर क्यों की और अगर माधवी बाहर नहीं गई तो फिर आखिर वह है कहां क्योंकि उस घर में जाने और निकलने का तो सिर्फ एक ही रास्ता है इन सभी सवालों के जवाब के लिए पुलिस गुरुमूर्ति को पुलिस स्टेशन बुलाती है और उसे इंट गट करना शुरू करती है शुरू में गुरुमूर्ति पुलिस को बार-बार मिस लीड करने की कोशिश करता है लेकिन पुलिस जब फुटेज दिखाकर उस पर दबाव डालती है तो वह टूटक कर सच उगलना शुरू करता है लेकिन उसका बोला एक-एक शब्द सिर्फ एक कबूलनामा नहीं बल्कि हैवानियत की एक ऐसी दास्तान है जो यह दिखाती है कि इंसान किस हद तक गिर सकता है गुरुमूर्ति पुलिस को बताता है कि 16 जनवरी की सुबह 8:00 बजे से ही माधवी फिर से अपने घर जाने की जिद करने लगी लेकिन उसने साफ-साफ कह दिया कि वह अपने घर नहीं जाएगी बल्कि उसकी बहन सुजाता के घर चले गी और इसी बात को लेकर दोनों के बीच बहस होने लगी यहां तक सब वैसे ही हुआ था जैसे गुरुमूर्ति ने पहले भी पुलिस को बताया था लेकिन इसके बाद चीजें पूरी तरह से बदलने वाली थी गुरुमूर्ति आगे बताता है कि दोनों के बीच बहस बढ़ती चली गई और गुस्से में माधवी ने अपना मंगलसूत्र उतार उसके मुंह पर मार दिया गुरुमूर्ति जो पहले से ही बहुत गुस्से में था उसकी अब तो ईगो भी हर्ट हो गई और वह अपना आप खो बैठा वो माधवी की गर्दन पकड़ उसका सर इतनी जोर से दीवार पर मारता है कि उसके इंपैक्ट से माधवी तुरंत ही बेहोश हो जाती है माधवी की उखड़ी सांसों में वो उसका गला पकड़ जोरों से दबाने लगता है और तब तक नहीं रुकता जब तक वह मेक श्यर नहीं कर लेता कि माधवी मर चुकी है अपनी पत्नी को मौत के घाट उतारने के बाद उसे डर लगने लगा कि कहीं उसके बच्चों को इस बारे में पता ना चल जाए जो उस वक्त अपनी बुआ के घर में थे इसलिए अब वो कैसे भी करके माधवी की बॉडी को ठिकाने लगाना चाहता था पर इस तरह से ताकि कभी किसी को माधवी की लाश ना मिले क्योंकि बिना डेड बॉडी के जुर्म साबित करना ऑलमोस्ट इंपॉसिबल हो जाएगा माधवी को मार के वो बचने की तरकीबें सोच ही रहा होता है कि उसे मलयालम मूवी सूक्ष्म दर्शनी का एक सीन याद आता है जिसमें एक भाई अपनी बहन को मारने के बाद केमिकल का यूज करके उसकी बॉडी को पूरी तरह से मेल्ट करता है और फिर उसे टॉयलेट में फ्लश कर देता है इस मूवी से गुरुमूर्ति को माधवी की लाश ठिकाने लगाने की तरकीब तो समझ आ गई थी लेकिन उसके पास वो केमिकल नहीं था जिससे लाश को गलाया जा सके इसलिए गुरुमूर्ति ने इंटरनेट पर ऐसे तरीकों को सर्च करना शुरू किया जिससे वह हाउसहोल्ड में मौजूद चीजों का इस्तेमाल करके बॉडी को डिस्पोज कर सके घंटो नेट पर खोल करने के बाद आखिरकार व माधवी की लाश बाथरूम में लेकर जाता है और उसके शरीर से कपड़े उतारने के बाद किचन नाइफ से माधवी की बॉडी को चार अलग-अलग हिस्सों में काट उनके छोटे-छोटे टुकड़े करना शुरू करता है कुछ टुकड़ों को व वाटर हीटर से बॉईल करता है तो कुछ को वो डायरेक्ट स्टोव में रोस्ट करता है गुरुमूर्ति के अंदर का इंसान तो कबका मर चुका था क्योंकि जिसके साथ आपने अपनी जिंदगी के इतने साल बिताए हो उसके साथ ऐसा सलूक तो सिर्फ कोई हैवान ही इतनी आसानी से कर सकता था वो यह सब कर ही रहा होता है की बॉडी को बॉयल करते-करते घर में बदबू फैलने लग जाती है बदबू इतनी तेज थी कि गुरुमूर्ति को मजबूर होकर किचन की खिड़की खोलनी पड़ती है लेकिन खिड़की खुलने से बदबू अगल-बगल के घरों तक पहुंचने लगती है जिससे परेशान होकर पड़ोसी अपने घर से बाहर निकल आते हैं और देखते हैं कि गुरुमूर्ति के घर से ही धुए के साथ यह स्मेल फैल रही है जब वह गुरुमूर्ति से इस बारे में सवाल करते हैं तो वो उन्हें कहता है कि वह तलकाया कुरा यानी मटन करी बना रहा है और यह स्मेल बकरे के सर को पकाने की है उनके पास शक करने की कोई वजह तो थी नहीं इसलिए वो सभी वापस अपने घर लौट जाते हैं गुरुमूर्ति बड़ी चालाकी से इस बहाने से बाल-बाल बच जाता है और अंदर आकर वापस किचन में बॉडी पार्ट्स को पकाने लगता है उबलने की वजह से मांस बड़ी आसानी से हड्डियों से अलग हो जाता है और फिर वो उन्हीं सॉफ्ट हड्डियों को मूसल से पीसकर पाउडर बना लेता है प्लश को वो जहां कई बार टॉयलेट में फ्लश करता है वहीं हड्डियों के चूरे को पेंट की एक खाली बकेट में डालकर घर से 4 किलोमीटर दूर लेला गुड़ा लेक में जाकर बहा देता है बॉडी को पूरी तरह से डिस्पोज कर वो घर वापस लौटता है और डिटर्जेंट एंड फिनाइल से तब तक घर की सफाई करता है जब तक खून के निशा पूरी तरह से मिट नहीं जाते इसके बाद वह घर में फैली बदबू को हटाने के लिए हर जगह रूम फ्रेशनेट से स्प्रे कर देता है इतना सब करके गुरुमूर्ति अब किसी भी तरह की कोई गलती नहीं करना चाहता था इसलिए वह घर का एक-एक कोना चेक करता है यह मेक श्यर करने के लिए कि कहीं कुछ रह ना गया हो और सेटिस्फाई होने के बाद उस बेडरूम को लॉक कर देता है जहां उसने लाश को काटा था माधवी का नामो निशा मिटाने के बाद व देर रात अपनी बहन के घर जा अपने बच्चों को घर वापस ले आता है यह पूरा इंसीडेंट गुरुमूर्ति ने बिना किसी रिमोस और गिल्ट के पुलिस के सामने कन्फेस कर लिया था गुरुमूर्ति के इस कन्फेशन के बाद पुलिस की टीम फौरन उसके घर जाकर एविडेंस कलेक्ट करना शुरू करती है एफएसएल टीम ब्लूरे टेक्नोलॉजी का यूज करती है ताकि क्राइम सीन पर मौजूद उन ब्लड स्टेंस फिंगरप्रिंट्स या बॉडी फ्लूट्स को स्पॉट किया जा सके जो कोई पर्सन अपनी नेकेड आई से नहीं देख सकता 3 घंटे घर में जांच करने के बाद एफएसएल की टीम को बाथरूम से कुछ ब्लड सैंपल मिलते हैं जो फॉरेंसिक लैब में जा जांच के लिए भिजवा दिए जाते हैं इसके अलावा पुलिस गुरुमूर्ति के घर से नाइफ स्टोव बकेट जैसे 16 एविडेंसेस इकट्ठा कर उन्हें जांच के लिए भेज देती है यह केस मीरपेट कुकर केस के नाम से फेमस हो गया क्योंकि शुरुआत में हर जगह मीडिया में यह खबर आ रही थी कि गुरुमूर्ति ने कुकर में बॉडी पार्ट्स को उबाला था लेकिन बाद में पुलिस ने अपनी इन्वेस्टिगेशन में यह रिवील किया कि इसमें कुकर का कोई कनेक्शन नहीं है इनफैक्ट उनकी 16 एविडेंसेस की लिस्ट में इसे इंक्लूड तक नहीं किया गया है पुलिस की एक टीम ने जलेला गुड़ा लेक में भी कई दिनों तक माधवी की बॉडी के रिमस को एक्सटेंसिवली सर्च किया पुलिस ने बताया कि उन्हें कुछ स्ट्रांग एविडेंसेस तो मिल गए थे लेकिन गुरुमूर्ति पहले भी इन्वेस्टिगेशन के दौरान कई बार उन्हें मिसली कर चुका था इसलिए पुलिस गुरुमूर्ति को एक या दो बार नहीं बल्कि तीन बार क्राइम सीन रिकंस्ट्रक्ट कराने के लिए ले जाती है गुरुमूर्ति के इस ब्रूटल क्राइम की सजा वो छोटे बच्चे भुगत रहे थे जो अब अपनी मां को खो चुके थे पुलिस जब उन बच्चों से सवाल करती है तो वो उन्हें बताते हैं कि जब उनके पिता उने घर लेकर आए थे तो उन्हें घर में अजीब सी स्मेल आ रही थी और साथ ही उन्हें अपनी मां कहीं नजर नहीं आ रही थी उन बच्चों को नहीं पता था कि उनकी मां को मारने वाला उनका ही पिता था इसलिए जब वो गुरुमूर्ति से पूछते हैं कि उनकी मां कहां है तो वह झूठ बोल देता है कि उनकी मां अपने दोस्त के घर गई हुई है बच्चों से क्वेश्चनिंग के बाद पुलिस बच्चों और माधवी की मां के डीएनए सैंपल्स कलेट कर जांच के लिए भेज देती है ताकि क्राइम सीन पर मिले ब्लड सैंपल और डीएनए से उन्हें मैच किया जा सके इस केस को हर एंगल से इन्वेस्टिगेट करने के बाद पुलिस का मानना है कि यह क्राइम मोमेंट ऑफ एंगर में नहीं बल्कि प्री प्लान है उनका कहना है कि गुरुमूर्ति माधवी को मारने की फिराक में पहले से ही लगा हुआ था और सिर्फ एक सही मौके की तलाश में था और वह मौका उसे संक्रांति के त्यौहार पर मिला जब आस पड़ोस के लोग उसका मकान मालिक सब अपने गांव जा चुके थे गुरुमूर्ति सारी साजिशें तो रच चुका था बस दिक्कत यह थी कि वह अगर माधवी को घर पर मारता तो उसके बच्चे भी इस कत्ल के आई विटनेस बन जाते इसलिए गुरुमूर्ति बच्चों को 14 तारीख को ही अपनी बहन के घर छोड़ माधवी के साथ अकेले घर लौट आता है जिसके बाद उसने मौका पाकर इस घिनौने अपराध को अंजाम दिया पुलिस के हिसाब से यह एक प्री पलान मर्डर है पर इस मर्डर के पीछे उन्होंने कोई क्लियर मोटिव नहीं दिया है जबकि कई न्यूज़ मीडिया में यह खबर आ रही है कि गुरुमूर्ति का माधवी के क्लोज रिलेटिव से एक्स्ट्रा मेरिटल अफेयर चल रहा था जिसके बारे में माधवी को पता चल गया था और इसी वजह से माधवी और गुरुमूर्ति के बीच आए दिन लड़ाई होती रहती थी यही वजह थी कि गुरुमूर्ति माधवी को मार रास्ते से हटाना चाहता था ताकि वह उस लड़की के साथ जिंदगी बिता सके लेकिन इस बात में कितनी सच्चाई है इसका अब शायद ही कोई खुलासा हो पाए पुलिस के सामने गुरुमूर्ति ने जुर्म तो कबूल कर लिया लेकिन उसकी बातों में कितनी सच्चाई है वह तो गुरुमूर्ति ही जानता है क्योंकि वह उम्मीद से कहीं ज्यादा शातिर है मर्डर केसेस में विक्टिम की बॉडी एक बड़ा पहलू होती है एक्यूज्ड को सजा दिलाने के लिए और इस केस में इन्वेस्टिगेटिंग टीम को माधवी की बॉडी को लेकर कोई कंक्लूजन एविडेंस हाथ नहीं लगा है उन्हें ब्लड सैंपल्स तो मिले हैं पर क्या वह माधवी के ही हैं यह तो वह डीएनए रिपोर्ट ही बता पाएगी अगर डीएनए सैंपल्स मैच नहीं होते हैं तो माधवी कानून की नजर में एक मिसिंग केस बनकर रह जाएगी और अगर मैच हो भी जाते हैं तो भी यह जरूरी नहीं कि गुरुमूर्ति को सजा मिल ही जाए फिलहाल पुलिस ने गुरुमूर्ति पर बीएनएस के सेक्शन 1031 सेक्शन 238 एंड सेक्शन 85 के तहत चार्जेस प्रेस किए हैं जिस आदमी के साथ माधवी ने सात जन्मों की कसमें खाई थी उसने एक नहीं दो कत्ल किए थे पहले उसने अपने अंदर के पति को खत्म किया और फिर हैवानियत की चादर ओढ उसने माधवी और उसके साथ खाई कसमों का दुनिया से ही नामो निशा मिटा दिया इंसान और हैवान में बस एक सोच का फर्क होता है और जब यह सोच मर जाती है तो फिर नफरत की कोई हद नहीं रहती गुरुमूर्ति एक हैवान पति के साथ-साथ एक निर्जीव पिता भी था जिसे अपने बच्चों की मां का कत्ल करने से पहले अपने बच्चों का भी ख्याल नहीं आया उल्टा वो उसी शाम बच्चों को उसी घर वापस लेकर आया जहां उसने उनकी मां का खून किया था बच्चे अपने पिता की दरिंदगी से अनजान उसी कमरे में खेल रहे थे जहां उनकी मां के टुकड़े किए गए थे उसी किचन में खाना खा रहे थे जहां उनकी मां की लाश के हिस्सों को उबाला गया था और वो उसी पिता का हाथ पकड़ चल रहे थे जिन हाथों से उसने उनकी मां की यूं बेरहमी से हत्या की थी गुरुमूर्ति ने अपना केस खुद लड़ने की मांग की है शायद उसे विश्वास है कि कानूनी दांव पेच से वो बच सकता है क्योंकि कानून तो सबूत और गवाह मांगता है जरा सोचिए अगर दीवारें गवाही दे सकती तो ना जाने कितने घरों में दबी पड़ी ऐसी हैवानियत दुनिया के सामने आ जाती वह कहते हैं ना घर के बाहर दुनिया के लिए सब खुश थे मगर अंदर की दीवारें हर रोज एक नई बेवफाई की गवाह बनती रही अगर आप क्राइम केसेस ऑडियो फॉर्म में सुनना पसंद करते हैं तो आप spotify.com

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