दुनिया के 10 सबसे रहस्यमयी म्यूजियम्स | Top 10 Mysterious Museums in the World

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दुनिया भर में हजारों म्यूजियम्स हैं। पर कुछ ऐसे भी म्यूजियम्स [संगीत] हैं जिनके अंदर कदम रखते ही एक अजीब बेचैनी, एक ठंडी सी गूंज महसूस होती है। कहीं एक ऐसा म्यूजियम जिसके अंदर 60 लाख से ज्यादा इंसानी खोपड़ियां और कंकाल जमाए हुए हैं वो भी असली। और कहीं एक ऐसा म्यूजियम [संगीत] जिसमें अल्बर्ट आइंस्टाइन का ब्रेन रखा गया है। हां, अल्बर्ट आइंस्टाइन का असली ब्रेन। और एक ऐसा म्यूजियम जिसमें ऐसे टूल्स हैं जो हजारों साल पहले मुजरिमों को सजा देने या टॉर्चर करने के लिए इस्तेमाल किए जाते थे। तो चलो आज हम चलते हैं दुनिया के उन 10 सबसे रहस्यमय म्यूजियम्स के अंदर जहां हर ऑब्जेक्ट के पीछे एक मिस्ट्री छुपी है। दोस्तों वीडियो शुरू करने से पहले अगर आपने अभी तक हमारे इस चैनल को सब्सक्राइब नहीं किया है तो जरूर सब्सक्राइब कर लें क्योंकि आपके एक सब्सक्राइब से हमें बहुत मोटिवेशन मिलता है और हम आपके लिए ऐसी और वीडियोस बनाते रहेंगे। तो चलिए [संगीत] वीडियो शुरू करते हैं। नंबर वन द टॉर्चर म्यूजियम ऑफ एमस्टडम। यह म्यूजियम उन असली टॉर्चर डिवाइसेस को शोकेस करता है जो मिडिल एजेस के टाइम पर लोगों को दर्द देने, उनसे क्राइम्स मनवाने या उन्हें सजा देने के लिए इस्तेमाल [संगीत] होते थे। मतलब यह सिर्फ आयरन मशीनें नहीं यह इंसान की बर्बरता के मोन्यूमेंट्स हैं। जब आप इस म्यूजियम के अंदर एंटर करते हो तो लाइट डम होती जाती है। वॉल्स पतली सी मिडीवल एली जैसी लगती है और हर साइड ग्लास केसेस के अंदर एक-एक टॉर्चर डिवाइस रखा होता है। सात बोर्ड्स पर उन [संगीत] लोगों की कहानियां जिनके साथ वो डिवाइस यूज हुआ। इन डिवाइसेस को देखकर एक ही सवाल आता है। इंसान इतना दर्द कैसे दे सकता है किसी और को? चलो एक-एक करके उन डिवाइसेस को समझते हैं। इस डिवाइस का नाम है द स्ट्रेपडो। अगर किसी को इस डिवाइस से सजा देनी होती थी तो सबसे पहले विक्टिम के हाथ पीछे [संगीत] बांध दिए जाते थे। फिर एक रस्सी से उन्हें हवा में लटका दिया जाता था जिससे उस इंसान की हड्डियां ऐसे टूट जाती जैसे उसके [संगीत] ऊपर एक बड़ा सा पहाड़ रख दिया हो। यह सब इतनी जल्दी होता था कि आदमी चिल्ला भी नहीं पाता। बहुत बार। दर्द को और बढ़ाने के लिए उनके पैरों पर बड़े-बड़े पत्थर बांध दिए जाते थे। म्यूजियम में इसका ओरिजिनल वुडन फ्रेम अब भी रखा है और उसके नीचे एक पेंटिंग भी रखी हुई है जिसमें एक आदमी हवा में लटका हुआ है। [संगीत] पूरी बॉडी स्ट्रेच हो चुकी है और उसका मुंह खुला है बिल्कुल आवाज के बिना। अगला डिवाइस है द इनक्विजिशन चेयर। यह एक आयरन चेयर है जिस पर 150 से 200 नुकीले कांटे लगे होते थे। विक्टिम को इस पर बैठने को मजबूर किया जाता था और फिर ऊपर से स्टैप्स टाइट किए जाते ताकि कांटे बॉडी में धीरे-धीरे घुसते जाएं। सबसे खौफनाक बात यह है कि विक्टिम को इस चेयर पर कुछ देर के लिए नहीं बल्कि कुछ घंटों या कुछ दिनों के लिए बैठाया जाता था। म्यूजियम में जो चेयर रखी है, उसके स्पाइक्स पर अब भी डार्क ब्राउन स्टेंस दिखते हैं। जिसे वहां के लोग खून के निशान कहते हैं। [संगीत] तीसरा डिवाइस है द ब्रांडिंग आयरन। यह डिवाइस क्रिमिनल्स, एडल्टर्स और हेरिट्स पर यूज होता था। [संगीत] एक आयरन रोड जिसके एंड पर एक सिंबल होता था, इसे आग में गर्म किया जाता और सीधा स्किन पर प्रेस कर दिया जाता। जरा सोचो क्या इस तरह का टॉर्चर हम सह सकते हैं? म्यूजियम में जो ब्रांडिंग आयरन्स रखे हैं, उनके एंड्स पर क्रॉस, क्राउन और लेटर सिंबल्स हैं। इसका मतलब जैसा गुनाह वो करते थे, उस हिसाब से उनको सजा दी जाती थी। इन सिंबल्स के जरिए। अगला डिवाइस है ए [संगीत] थंब स्क्रूज़। यह छोटा सा मेटल क्लैंप होता है जिसमें विक्टिम की उंगलियां या अंगूठा रखकर धीरे-धीरे टाइट किया जाता था। जब तक कि उसकी हड्डियां ना टूट जाए। अब एक ऐसे डिवाइस के बारे में बात करेंगे जिसे द स्कल क्रशर कहते हैं। आपने हाइड्रोलिक प्रेस मशीन तो देखी ही होगी जो कितनी भी मजबूत चीज हो उसे कई टुकड़ों में कुचल देती है। उस टाइम एक [संगीत] ऐसा ही डिवाइस होता था जिसके अंदर मुजरिम का सर फिट किया जाता था और ऊपर से एक स्क्रू टाइट करके उस इंसान के सर को कुचल दिया जाता था। थोड़ा इमेजिन करके देखो कितना [संगीत] दर्द झेलना पड़ता था उन लोगों को। अब चलते हैं आखिरी डिवाइस की तरफ जिसका नाम है द आयरन मेडन। यह एक लार्ज कॉफिन लाइक स्ट्रक्चर होता था। अंदर तेजधार कांटे होते थे। विक्टिम को इसके अंदर बंद किया [संगीत] जाता था और कांटे उस इंसान के शरीर में धंस जाते थे। मगर इससे मौत भी नहीं आती थी। बल्कि इतना दर्द होता था कि इंसान मौत के लिए तरस जाए। इस म्यूजियम से निकलते वक्त लोग हंसते [संगीत] हुए नहीं बल्कि चुप रहते हुए बाहर आते हैं। क्योंकि हर ग्लास केस एक ही बात कहता है। इंसान सबसे ज्यादा खतरा इंसान के लिए ही है। नंबर टू द मटर म्यूजियम यूएस। एक ऐसा म्यूजियम जहां दरवाजा खोलते ही तुम्हें एक अजीब साइलेंस मिलता है। ऐसा साइलेंस जो हॉस्पिटल का नहीं बल्कि हिस्ट्री के अंदर छिपी उन बॉडीज का होता है जिन्होंने अपनी जिंदगी डिजीज डिफिटी और पेन के साथ बिताई। यह है द मटर म्यूजियम। फिलडेलफिया यूएसए। वर्ल्ड का सबसे डिस्टर्बिंगली फैसिनेटिंग मेडिकल म्यूजियम। एक जगह जहां ह्यूमन बॉडी के वो सीक्रेट्स रखे हैं जो नॉर्मल दुनिया कभी देख नहीं पाती। इस म्यूजियम में एक बॉडी ऑर्गन है जिसका नाम है द मेगा कोलन। एक बड़ी सी इंसानी आंत [संगीत] जिसका साइज लगभग 8 फुट लंबा और वजन 40 किलो का है। इस इंसान को हर्षस्प्रुंग नाम की एक डिजीज थी। जिस कारण वो कई सालों तक बाथरूम नहीं जा पाया। उसके पेट का साइज इतना बड़ा हो गया था कि लोग उसे प्रेग्नेंट वूमन समझ लेते थे। और यह कोलन अब म्यूजियम में एक जॉइंट ग्लास केस में रखा हुआ है। [संगीत] देखते ही व्यूअर का ब्रेन फ्रीज हो जाता है। तो अब हम देखने जा रहे हैं अल्बर्ट आइंस्टाइन का ब्रेन। हां, सच में उनके मरने के बाद उनके ब्रेन को इस म्यूजियम में रखा गया। अल्बर्ट आइंस्टाइन के ब्रेन के माइक्रोस्कोपिक स्लाइड्स यहां [संगीत] प्रिजर्व किए गए हैं। साइंटिस्ट्स ने उनके ब्रेन का हर पार्ट स्टडी किया। क्या आइंस्टाइन का ब्रेन नॉर्मल इंसान से डिफरेंट था? और यह स्लाइड्स विजिटर्स को एक ही [संगीत] चीज का रिमाइंडर देती हैं। जीनियस भी एक बायोलॉजिकल मशीन ही है। और इस म्यूजियम में एक औरत की [संगीत] बॉडी है जिसे डेड शॉप लेडी कहा जाता है। एक वूमन जिनकी डेड बॉडी नेचुरल प्रोसेस से एडिपोजियर में कन्वर्ट हो गई। मतलब एक वैक्सी सोप लाइक सब्सटेंस। आज वो बॉडी बिल्कुल मम्मी की तरह प्रिजर्व है। [संगीत] फेस, हेयर, स्किन सब ऑलमोस्ट टाइम के अंदर फ्रीज हो चुका है। म्यूजियम के एक हिस्से में डजंस ऑफ इनफेंट स्केलेटन रखे हैं। कंजॉइंट ट्विंस, हाइड्रोसेफेलस बेबीज, रे यार, बोन डिफिटीज। यह सब उन दिनों के रिमेंस हैं जब मेडिकल साइंस डेवलप नहीं हुई थी। डॉक्टर्स डिजीज को समझने के लिए रियल बॉडीज प्रिजर्व किया करते थे। और म्यूजियम के दूसरी तरफ एक ऐसा रूम है जिसमें [संगीत] हर शेलफ पर कई खोपड़ियों को रखा गया है। एक पूरा रूम जिसमें टोटल 140 खोपड़ियों को लाइन से रखा गया है। हर खोपड़ी के साथ लिखा हुआ है उस इंसान का नाम, उसके मरने की वजह और उसका बैकग्राउंड। जब तुम इस म्यूजियम से बाहर निकलते हो तो दिमाग में एक ही थॉट आता है। ह्यूमन बॉडी इज ब्यूटीफुल बट टेरिफाइंग। नंबर थ्री द पैराडॉक्स म्यूजियम ऑफ मुंबई। यह कोई नॉर्मल म्यूजियम नहीं है। एक ऐसी जगह है जहां फिजिक्स की धज्जियां उड़ती हैं। लॉजिक का मर्डर होता है और आदमी अपनी ही आंखों पर ट्रस्ट करना बंद कर देता है। यहां एक रूम है जिसे द एंटी ग्रेविटी रूम कहते हैं। यह सबसे फेमस रूम है। [संगीत] यहां तुम सीधी लाइन में चल रहे होते हो। पर तुम्हारी बॉडी टिल्ट होती है 45° पर। ऐसा लगता है जैसे कोई इनविज़िबल फोर्स तुम्हें साइड से पुश कर रहा हो। वाटर अप हिल बह रहा होता है। बॉल नीचे के बजाय ऊपर रोल करती है और तुम खुद को देखकर बोलते हो भाई यह कैसे हो रहा है? और इसके अंदर एक और रूम है जिसे द इंफिनिटी मिरर रूम कहते हैं। जहां तुम एक नहीं बल्कि 1000 बन जाते हो। आप एक रूम में खड़े हो और आपकी रिफ्लेक्शन [संगीत] हर डायरेक्शन में इनफिनिट टाइम्स मल्टीप्लाई हो रही है। लगता है जैसे आप मल्टीपल डायमेंशंस में घुस गए हो। यहां एक टनल है जिसे डेथ पैराडॉक्स टनल कहते हैं। आप उसके अंदर एक स्टेबल ब्रिज पर चल रहे होते हो। पर आपका दिमाग सिग्नल देता है। जैसे आप घूम रहे हो, आप गिरने वाले हो। लोग सीधे-सीधे लड़खड़ा के गिर जाते हैं। लेकिन फ्लोर बिल्कुल फ्लैट होता है। यह इल्लुजन आपके ब्रेन के बैलेंस सेंटर को हैक कर देता है। और यहां एक मैजिकल रूम भी है द श्रिंकर ग्रोअ रूम जहां आप अपनी हाइट को छोटी से बड़ी कर सकते हो और बड़ी से छोटी कर सकते हो। जिसमें लेफ्ट साइड पर खड़े होकर आप बच्चे लगते हो और राइट साइड पर जाकर जॉइंट मॉन्सर जैसे लगते हो। [संगीत] आंखों को पूरा का पूरा धोखा। और यहां एक ऐसी चेयर है जिस पर बैठने के बाद आपको लगेगा आप हवा में बैठे हो। [संगीत] आप एक इनविज़िबल सीट पर बैठते हो और फोटो देखकर लोग जेनुइनली पूछते हैं भाई मैजिक था क्या? हम समझते [संगीत] हैं कि आंखें जो देख रही हैं वो सच है। लेकिन यह म्यूजियम हमारे मुंह पर थप्पड़ मार के बोलता है बिल्कुल गलत। नंबर फोर द म्यूजियम ऑफ द वियर्ड [संगीत] टेक्सास। यह दुनिया का सबसे अजीब, सबसे कपी और सबसे अनप्रिडिक्टेबल म्यूजियम है। आखिर इसके अंदर है क्या? चलिए देखते हैं। अंदर जाते ही आपको एक बड़ा सा फरीज बॉक्स दिखेगा जिसमें एक पूरा का पूरा ह्यूमनॉइड क्रिएचर बर्फ में जमाया हुआ रखा है। 1960 के दशक में जब यह दुनिया के सामने आया तो लोग लिटरली शॉक हो गए। कुछ साइंटिस्ट्स ने बोला यह एक रेयर अननोन स्पीशीज हो सकती है। कुछ ने बोला यह तो बिग फूड का बच्चा लग रहा है। अभी तक [संगीत] कोई कंफर्म प्रूफ नहीं। बस एक फ्रोजन मिस्ट्री जो देखते ही बॉडी ठंडी हो जाती है। और उसके बाद आता है फीजी मरमेड। यह कोई क्यूट एररियल जैसी मरमेड नहीं है। यह दिखने [संगीत] में आधा बंदर, आधी मछली और पूरा शरीर सिला और मुड़ा हुआ लगता है। और फिर आता है द टेक्सास बिग फुटबॉल। म्यूजियम के अंदर एक पूरी वॉल बिग फुट साइटिंग्स को डेडिकेट की गई है। फुटप्रिंट्स, फोटोस, प्लास्टर कास्ट्स और उन लोगों के रिटन स्टेटमेंट्स जिन्हें लगता है उन्होंने बिग फुट को फेस टू फेस [संगीत] देखा। कोई माउंटेन ट्रे्स पर क्राई सुनता है, कोई ह्यूज शैडो देखता है। कोई गहरे जंगल में फटस्टेप्स फॉलो करते हुए सुनता है। और कुछ लोग तो लिटरली बोलते हैं, उसकी आंखों में इंसान जैसी इंटेलिजेंस [संगीत] थी। बिलीव करना या ना करना आपकी मर्जी। मगर इस वॉल के सामने खड़े होकर एक अजीब सा डर और क्यूरियोसिटी महसूस होती है। अब देखते हैं एक [संगीत] ऐसा रेप्लिका जिसे आद लिज़र्ड मैन कहते हैं। एक क्रिएचर जो इंसान और रेप्टाइल [संगीत] का मिक्स लगता है। एक लाइफ साइज फिगर जिसे देखकर लगता है कि यह किसी सीक्रेट लैब का फेल्ड एक्सपेरिमेंट हो सकता है। शार्प क्लॉज़, स्केली स्किन, ह्यूमन लाइक पोज़ और एक स्टेयर जो सीधा सोल में घुस जाए। म्यूजियम अथॉरिटीज क्लेम करती हैं कि यह रिप्रेजेंटेशनल मॉडल है। मगर कई लोग कहते हैं कि यह कांसेप्ट किसी रियल आई विटनेस रिपोर्ट पर बेस्ड था। रियल दुनिया में भी कुछ चीजें इतनी स्ट्रेंज होती हैं कि वो फिक्शन से ज्यादा अनबिलीवेबल लगती हैं। इस जगह का पर्पज सिर्फ शॉक देना नहीं बल्कि यह दिखाना है कि दुनिया के हर कोने में ऐसा [संगीत] मटेरियल मिलता है जो साइंस को भी कंफ्यूज कर देता है। नंबर फाइव द पेरिस कैटाकम्स म्यूजियम। जमीन के नीचे बसा हुआ शहर जहां 6 मिलियन लोग आज भी सो रहे हैं। पेरिस को लोग रोमांस, आर्ट [संगीत] फैशन और आइफल टावर के नाम से जानते हैं। लेकिन इसी शहर के नीचे एक ऐसी दुनिया छुपी है जिसे देखकर लगता है जैसे किसी हॉरर फेंटसी मूवी का सेट हो। ऐसी जगह जहां नैरो टनल्स हैं, ठंडी हवा है, पूरा अंधेरा है और दीवारों पर लाखों नहीं बल्कि करोड़ों की तादाद में इंसानी हड्डियां और खोपड़ियां लाइन से लगी हुई हैं। लेकिन यह म्यूजियम बना क्यों? चलिए जानते हैं। 1700 के एंड में पेरिस बहुत सारी प्रॉब्लम्स फेस कर रहा था। जैसे ओवर क्राउडेड ग्रेवयार्ड्स, रोटिंग बॉडीज, डिजीज आउटब्रेक्स और स्मेल जो शहर में फैल जाती थी। ऑथॉरिटीज ने डिसाइड किया कि बॉडीज [संगीत] को जमीन के नीचे पुराने माइनिंग टनल्स में शिफ्ट किया जाए। एक के बाद एक सिमेट्री एम्प्टी होती गई और टनल के नैरो पैसेज में खोपड़िया और हड्डियां एकदम सिमेट्रिक [संगीत] डिजाइनों में स्टक कर दी गई। इस पूरे प्रोसेस को पूरा होने में 12 साल लगे। आज कैटाकॉम्स में [संगीत] करीबन 60 लाख लोगों के कंकाल मौजूद हैं। पब्लिक म्यूजियम एरिया छोटा सा है। पर कैटाकॉम्स का एक्चुअल नेटवर्क 320 [संगीत] कि.मी. से ज्यादा अंदर तक है और इसमें से 95% एरिया स्ट्रिक्टली रेस्ट्रिक्टेड है। नंबर छह द कुरुक्षेत्र पैनोरामा एंड साइंस सेंटर हरियाणा जहां महाभारत, विज्ञान [संगीत] और रहस्य एक ही छत के नीचे जिंदा हो जाते हैं। दुनिया में बहुत सारे म्यूजियम्स हैं। कोई अजीब चीजें दिखाता है, कोई हॉरर, कोई मिथ्स। लेकिन कुरुक्षेत्र पैनोरामा एंड साइंस सेंटर एक ऐसी जगह है, यह सब 3D स्टाइल में बनाया गया है। इस वजह से तुम्हें लगता है कि तुम एक म्यूजियम नहीं दो अलग-अलग डायमेंशंस में एंटर हो गए हो। एक [संगीत] तरफ प्राचीन भारत के सबसे महान युद्ध का दृश्य महाभारत और दूसरी तरफ मॉडर्न साइंस और कॉस्मोलॉजी के माइंड बेंडिंग एग्बिट्स। यह दोनों चीजें एक साथ मिलकर इस म्यूजियम को दुनिया का वन ऑफ अ काइंड एक्सपीरियंस बना देती हैं। द महाभारत पैनोरामा हॉल, एक जॉइंट [संगीत] सर्कुलर हॉल जिसमें आप 360 डिग्री में घूमो तो एक ही सीन रिपीट नहीं होता। हर एंगल पर महाभारत का एक नया पल, एक नई कहानी, एक नया कैरेक्टर तुम्हारी आंखों के सामने खड़ा हो जाता है। और यह कोई नॉर्मल पेंटिंग नहीं होती। यह सब इस तरह से सेट किया गया है। लगता है कि आप युद्ध के मैदान में खड़े हो। लोग बताते हैं कि यह सीन देखते वक्त उनकी स्पाइन में गूंज बम्स आते हैं। जब तुम भीष्म को एरोस के बेड पर देखते हो या अर्जुन को कृष्ण से गाइडेंस लेते हुए। इस म्यूजियम की स्पेशियलिटी यह है कि यह सिर्फ मिथ नहीं दिखाता। यह मिथ के पीछे का साइंस भी समझाता है। नंबर सेवन द अवानोस हेयर म्यूजियम। तुर्की। एक म्यूजियम जो औरतों के बाल से बना है। एक पुरानी सी केव स्टाइल वर्कशॉप जिसमें वॉल्स, सीलिंग्स, पिलर्स सब पर सिर्फ और सिर्फ औरतों के बाल लगे हुए हैं। हां, रियल ह्यूमन हेयर। उनके साथ छोटी-छोटी कहानियां, नाम [संगीत] और कभी-कभी उनकी तस्वीर तक चिपकी होती है। यह सब शुरू कैसे हुआ? 1979 में एक लोकल पॉटर चेस ग्लीव के स्टूडियो में एक टूरिस्ट आई। जाते वक्त उसने गिफ्ट में अपने बाल का एक छोटा सा लॉक छोड़ दिया। एज अ मेमोरी। [संगीत] गलीब को यह जेस्चर इतना यूनिक लगा कि जब भी कोई फीमेल विजिटर आती वो उनसे एक छोटा सा हेयर लॉक और उनका नाम लिखवा लेता। स्लोली स्लोली यह एक छोटी हॉबी से लेकर एक वर्ल्ड फेमस म्यूजियम बन गया। आज के टाइम पर यहां 16,000 से ज्यादा औरतों के बाल लगे हुए हैं। दुनिया के उन ऑलमोस्ट [संगीत] हर कंट्री से। हर हेयर लॉक के साथ एक छोटा पेपर होता है। किसी ने ब्रेकअप के बाद अपने बाल डोनेट किए। किसी ने ट्रैवल [संगीत] मेमोरी के लिए, किसी ने किसी लॉस्ट लव्ड वन के नाम पर। नंबर आठ, द मेग्रो पैरासाइटोलॉजिकल म्यूजियम, जापान। दुनिया का सबसे अजीब और कपी पैरासाइट म्यूजियम। यह दुनिया का पहला और ओनली म्यूजियम है जो सिर्फ और सिर्फ पैरासाइट्स को डेडिकेट किया गया है। म्यूजियम की शुरुआत कैसे हुई? 1953 में एक जापानी साइंटिस्ट डॉक्टर सतो गामेगाई ने इस म्यूजियम की फाउंडेशन रखी ताकि लोग पैरासाइट्स को समझें इनसे बचें और थोड़ा सा शॉक भी हो जाए। आज यहां 60 हजार से ज्यादा स्पेसिमेन स्टोर हैं और 300 से ज्यादा पैरासाइट्स एक्चुअल डिस्प्ले पर दिखाए जाते हैं। जब तुम म्यूजियम के अंदर जाते हो तो सबसे पहले नजर पड़ती है ग्लास जार्स में प्रिजर्व्ड पैरासाइट्स। कुछ इतने टाइनी [संगीत] कि माइक्रोस्कोप चाहिए और कुछ इतने लंबे कि देखकर खड़ा आदमी हिल जाए। वॉल्स पर पैरासाइट्स के लाइफ साइकिल्स, [संगीत] इनफेक्शंस, सिंपटम्स और रियल ह्यूमन केस स्टडीज लगे होते हैं। सबसे फेमस एक्सिबिट 8.8 मीटर लंबी टेप वॉर्म। एक रियल ह्यूमन पेशेंट के पेट के अंदर से निकाली गई 8.8 मीटर की टेप वॉर्म। हां, लगभग 30 फीट लंबी। म्यूजियम में इसे एक लॉन्ग ग्लास ट्यूब में रखकर डिस्प्ले किया गया है और उसके साइड में एक रोप लगाई गई है जिसे विजिटर्स खींच कर कंपेयर कर सकते हैं कि यह टेप वर्म असल में कितनी लंबी होती। एक आदमी [संगीत] के अंदर 30 फीट का क्रिएचर। बस इस एग्जिबिट को देखकर आदमी पानी [संगीत] तक पीने से डरता है। यहां पर बोर्ड पर फोटोग्राफ्स और एक्सरेज लगे होते हैं। जिसमें दिखाया गया है कि पैरासाइट्स क्या-क्या [संगीत] कर सकते हैं। जैसे कि ब्रेन ईटिंग अमीबाज़, आई पैरासाइट्स [संगीत] जिससे आई साइड चली जाती है। रॉ फिश खाने से बॉडी में डेवलप होने वाले वर्म्स और कुछ इतने बेजार केसेस [संगीत] कि देखकर धड़कन बढ़ जाए। हर केस के नीचे प्रॉपर डिटेल लिखी होती है। कैसे अंदर घुसा, कैसे ग्रो किया और कैसे निकाला गया। नंबर नाइन द डॉग कॉलर म्यूजियम यूके। दुनिया में म्यूजियम्स तो बहुत हैं। [संगीत] कोई आर्ट का, कोई साइंस का, कोई टॉर्चर का। पर एक म्यूजियम ऐसा भी है जो डेडिकेट है सिर्फ डॉग्स के कॉलर्स को। हां, डॉग कॉलर्स। सुनने में फनी लगता है। पर जैसे ही अंदर जाओगे, तुम रियलाइज करोगे कि अरे यह तो पूरे मिडीवल हिस्ट्री का टाइम कैप्सूल है। यह म्यूजियम इंग्लैंड के लीड्स कैसल के अंदर बना हुआ है। और यहां मौजूद हैं 130 से अधिक डॉग [संगीत] कॉलर्स। जिनमें से कुछ इतने पुराने हैं कि 15वीं सेंचुरी यानी लगभग 500 साल पुराने। यह म्यूजियम बना क्यों? मिडीवल इंग्लैंड में डॉग सिर्फ पेट्स नहीं होते थे बल्कि प्रोटेक्टर्स होते थे। कैसल्स, फॉर्मलैंड्स और विलेजेस के। इसलिए इन डॉग्स के कॉलर्स किसी क्यूट एक्सेसरी जैसे नहीं बल्कि आर्मर जैसे डिजाइन किए जाते थे। [संगीत] यह कलेक्शन ऑनरली एक हिस्टोरियन कपल ने कलेक्ट किया था और बाद में लीड्स कैसल ने इसे प्रिजर्व करके पब्लिक म्यूजियम बना दिया। [संगीत] देखने में यह कॉलर्स लगते हैं जैसे किसी हॉरर मूवी में विलेन पहनता हो। मैसिव आयरन कॉलर्स जिन पर बड़े-बड़े स्पाइक्स लगे होते थे। परपज अगर कोई वुल्फ या टाइगर डॉग के गले को पकड़ने की कोशिश करे तो स्पाइक्स उसको रोक दें या चोट पहुंचाए। यह सिर्फ डॉग्स का प्रोटेक्शन गियर नहीं बल्कि पूरा बैटल ग्राउंड इक्विपमेंट था। सबसे यूनिक कॉलर है द आयरन प्रजन कॉलर। यह एक पुराना जर्मन कॉलर है जिसमें एक मेटल लॉकिंग मैकेनिज्म होता था। इस कॉलर का इस्तेमाल मिस बिहेविंग डॉग्स को कंट्रोल में रखने के लिए किया [संगीत] जाता था। जितना देखते जाओगे उतना रियलाइज करोगे कि डॉग कॉलर्स सिर्फ एक्सेसरीज नहीं थे बल्कि सिविलाइजेशन के इवोल्यूशन का साइलेंट पार्ट थे। आज हम डॉग्स को फैमिली समझते हैं। पर मिडीव में डॉग्स वॉरियर्स थे और यह म्यूजियम उनकी कहानियां जिंदा रखता है। नंबर 10 असम स्टेट म्यूजियम [संगीत] इंडिया। एक जगह है जहां हर रूम, हर गैलरी और हर आर्टिफेक्ट नॉर्थ ईस्ट के हजारों साल पुराने इतिहास का एक छुपा हुआ चैप्टर खोल देता है। म्यूजियम का सबसे पुराना हिस्सा है रॉयल असामीज गैलरी जहां अहोम डायनेस्टी के रेयर आर्टिफेक्ट्स रखे गए हैं। उनमें से एक सबसे फेमस ऑब्जेक्ट है रुद्रसिंघा का सेरेमोनियल [संगीत] स्वॉर्ड। कहा जाता है कि इस तलवार पर बने पैटर्न्स सिर्फ डेकोरेशन नहीं एक हिडन अहोम स्क्रिप्ट है जिसका एग्जैक्ट [संगीत] मीनिंग आज तक डिकोड नहीं हो पाया। जब लाइट्स उस तलवार पर पड़ती हैं, उसके पैटर्न्स एक [संगीत] स्ट्रेंज सिमेट्रिकल शेप बनाते दिखते हैं। जैसे किसी एंशिएंट कोड का हिस्सा हो। और यहां तुम्हें मिलते हैं बोडो, [संगीत] कारबी, मिसिंग और राभा ट्राइब्स के ट्रेडिशनल ऑब्जेक्ट्स। पर सबसे स्ट्रेंज [संगीत] है उनका शेमिनिस्टिक हीलिंग मास्क। एक वुडन मास्क जिसे ट्राइबल हीलर्स डिजीज स्पिरिट ट्रैप्स बोलते [संगीत] हैं। लोग मानते हैं कि जब भी कोई ट्राइब मेंबर बीमार पड़ता था, यह मास्क उनकी आसपास की बुरी एनर्जीस को कैप्चर कर लेता था। म्यूजियम स्टाफ के अकॉर्डिंग इस मास्क के रूम में ह्यूमिडिटी और टेंपरेचर हमेशा अनप्रिडिक्टेबल रहता है और कोई साइंटिफिक रीजन नहीं मिल पाया। अब चलते हैं आर्कियोलॉजी सेक्शन में जिसमें 2000 साल पुराने ऑब्जेक्ट्स हैं। इस सेक्शन में मिले थे कुछ टेराकोटा फिगंस जो कृष्णा देवी इमेजरी जैसी दिखते हैं। लेकिन उनका स्टाइल नॉर्थ इंडियन नहीं कंप्लीटली यूनिक है। [संगीत] आर्कियोलॉजिस्ट्स कंफ्यूज्ड हैं। यह फिगरंस असम के लोकल आर्टिस्ट्स ने बनाए या कोई एंशिएंट लॉस ट्राइब का [संगीत] इन्फ्लुएंस था। कुछ एक्सपर्ट्स के हिसाब से यह फिगरंस 2000 साल पुराने मायंग रीजन के मैजिक कल्चर से इंस्पायर्ड हो सकते हैं। और अब देखते हैं द रेयर मैनुस्क्रिप्ट्स जिन्हें द सीक्रेट लाइब्रेरी भी कहते हैं। म्यूजियम का सबसे रेस्ट्रिक्टेड हॉल है सांची पूथ मैनुस्क्रिप्ट्स रूम जहां सेंचुरीज ओल्ड हैंड रिटन बुक्स रखी गई हैं। पेपर हैंडमेड है। इंक नेचुरल हर्ब्स से बनी है और राइटिंग एक रेयर असमी स्क्रिप्ट में लिखी गई है जो आज के जमाने में बिल्कुल एक्सटिंक्ट हो चुकी है। कुछ मैनुस्क्रिप्ट्स में [संगीत] स्ट्रेंज डायग्राम्स बने हुए हैं जैसे स्टार शेप्ड सिंबल्स, स्पायरल पैटर्न्स और ह्यूमन एनिमल हाइब्रिड ड्राइंग्स। रिस्चरर्स आज तक यह डिसाइड नहीं कर पाए कि यह एस्ट्रोनॉमी है या ऑनकल्ट नॉलेज। असम स्टेट म्यूजियम सिर्फ एक म्यूजियम नहीं। यह एक गेटवे है उन सिविलाइजेशंस का जो इंडियन [संगीत] सबक्टिनेंट के एक्सट्रीम ईस्ट में थाउजेंड्स ऑफ इयर्स पहले फ्लोरिश करती थी। यहां का हर आर्टिफेक्ट एक क्लू है, एक हिंट [संगीत] है, एक राज है जो हमें बताता है कि इंडिया की हिस्ट्री जितनी हम सोचते हैं उससे कहीं ज्यादा मिस्टीरियस है। और शायद असम के इस म्यूजियम में वो आंसर छुपे हैं जो हमने कभी सर्च ही नहीं किए।

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दुनिया के 10 सबसे रहस्यमयी म्यूजियम्स | Top 10 Mysterious...