How a Middle Class Boy Built Perplexity AI From Nothing

AdiVerse984 words

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साल 2015 आईआईटी मद्रास के हॉस्टल के एक छोटे से कमरे में एक लड़का जो रात-रात भर कोडिंग करता था और जिस Google का यूज़ करता था नॉर्मल लोगों की तरह उस वक्त किसी ने सोचा भी नहीं होगा कि आज वही लड़का Google जैसे बड़े जॉइंट [संगीत] से कम्पीट करे वो लड़का है वन एंड ओनली अरविंद श्रीनिवास [संगीत] सीओ अरविंद श्रीनिवास अरविंद श्रीनिवास जिसने 2022 में अपना स्टार्टअप परप्लेक्सिटी स्टार्ट किया जो आज Google जैसी कंपनी के लिए थ्रेट बनी हुई है और जिसकी वैल्यू्यूएशन आज $20 बिलियन तक रीच कर चुकी है। तो आखिर कैसे एक मिडिल क्लास बॉय ने यह पॉसिबल किया और क्या खास है जो परप्लेक्सिटी को बाकी एi टूल्स से डिफरेंट बनाता है कि सिर्फ कुछ ही इयर्स में यह बिलियन डॉलर कंपनी बन गई और इतने बड़े एआई टूल्स को टफ कंपटीशन दे रही है। अरविंद श्रीनिवास जो चेन्नई के एक सिंपल मिडिल क्लास फैमिली से बिलॉन्ग करते हैं। जो अपना स्कूल खत्म करने के बाद आईआईटी मद्रास गए। जहां उन्हें इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग अलॉट हुई। जहां एक तरफ अरविंद के दोस्त अपनी कॉलेज और सोशल लाइफ एंजॉय कर रहे थे। वहीं दूसरी तरफ अरविंद एक मशीनंस को इंटेलिजेंटली थिंक करवाना [संगीत] सीख रहे थे। उस वक्त जब उन्हें मशीन लर्निंग का मतलब भी नहीं पता था। फिर भी कॉलेज में एक मशीन लर्निंग कंपटीशन में पार्टिसिपेट किया और ऑलमोस्ट बिना प्रिपरेशन के उस कंपटीशन को विन कर लिया। यही वो टर्निंग पॉइंट था जिसने उनकी डायरेक्शन डिफाइन कर दी। जिसके [संगीत] बाद 2017 में हायर स्टडीज के लिए अरविंद यूसी बर्क गए। जहां उन्होंने कंप्यूटर साइंस में पीएचडी की। इसी दौरान 2018 और 2019 में ओपन एआई, Google ब्रेन और डीप माइंड में इंटर्नशिप की। यही अरविंद को क्लेरिटी मिल गई कि परफेक्ट सर्च का मतलब एडवांस एआई होता है। जिसके बाद नवंबर 2022 जब इंटरनेट का मतलब ज्यादातर लोगों के लिए सिर्फ Google ही था तभी लॉन्च होता है चैट जीपीटी और एक डिजिटल लैंडस्केप ट्रांसफॉर्म [संगीत] हो गया। जहां लोगों ने पहली बार एक्सपीरियंस किया कि कंप्यूटरटर्स सिर्फ आंसर्स नहीं देते बल्कि कॉन्टेक्स्ट, लैंग्वेज और यूजर के इमोशन को समझकर उनके अकॉर्डिंग आंसर प्रोवाइड कर सकते हैं। बट प्रॉब्लम यह थी कि चैट जीपीटी की भी कुछ लिमिटेशंस थी। जैसे रियल टाइम इंफॉर्मेशन अनअवेलेबल होना और वेरीिफाइड सोर्सेस विज़िबल नहीं होते थे। जिस वजह से यूज़र्स फुल्ली ट्रस्ट नहीं कर पाते थे। सो जहां एक साइड Google था जो सर्च करने पर मल्टीपल लिंक्स प्रोवाइड करता वहीं दूसरी साइड चैट GPT जो यूजर से ह्यूमन टोन में आंसर तो देता बट कोई लिंक्स या सोर्सेज शो नहीं करता। एग्जैक्टली यहीं पर एक मैसिव गैप एक्सिस्ट करता था। और इसी गैप को फिल करने के लिए अरविंद श्रीनिवास ने इनिशिएटिव लिया और यहीं से इवॉल्व हुआ परप्लेक्सिटी का कांसेप्ट। एक ऐसा एआई जो इंटरनेट से रियल टाइम डाटा फेच करे उसे कंसाइज समरीज में प्रेजेंट करें एंड हर इंसाइट के साथ क्रेडिबल सोर्सेज भी डिस्प्ले करें। बट यहीं पर [संगीत] अरविंद के लिए सबसे बड़ा चैलेंज क्रिएट होता है जो था कैपिटल का। क्योंकि कटिंग एज एi मॉडल बनाना मल्टी बिलियन डॉलर इन्वेस्टमेंट मांगता है जो अरविंद के लिए पॉसिबल नहीं था। तब अरविंद ने एक स्ट्रेटेजिक थिंकिंग अप्लाई की। बाकी एआई टूल्स की तरह खुद का मॉडल बनाने के बजाय उन्होंने दुनिया के बेस्ट मॉडल्स जो ऑलरेडी एग्जिस्ट करते थे उन्हें अपने एआई में इंटीग्रेट कर दिया। जिसकी वजह से परप्लेक्सिटी एक एआई एग्रीगेटर प्लेटफार्म बन गया। जो जीपीटी, जेमिनी और लामा जैसे मॉडल को एपीआईएस के थ्रू इंटीग्रेट करता है और यूज़र्स को क्लियर वेरीिफाइड सिंगल आंसर आउटपुट डिलीवर करता है। और इस अप्रोच से ना मैसिव इंफ्रास्ट्रक्चर कॉस्ट आई और ना किसी एक मॉडल पर डिपेंडेंसी रही। एंड [संगीत] सबसे बेस्ट चीज अगर फ्यूचर में किसी मॉडल पर कोई लीगल केस या क्लेम होता भी है तो परप्लेक्सिटी उसे रिप्लेस करके उसकी जगह न्यू मॉडल लगा सकता है। सो अरविंद ने अपना एआई रेडी कर लिया। बट अब बारी थी उसे लॉन्च करने की। यह उनकी लाइफ का पहला स्टार्टअप था और वह भी उस फील्ड में जहां पहले से ही Google और ओपेन एi जैसे बड़े जॉइंट्स मौजूद थे। जिसके बाद 7 दिसंबर 2022 अरविंद ने तीन कोफाउंडर्स के साथ मिलकर पर्पलेक्सिटी ल्च की। पर अरविंद ने जो एक्सपेक्ट नहीं किया था वो हुआ। लॉन्च के बाद ही परप्लेक्सिटी पर 3000 क्वेरीज पर डे आने लगी। जो कुछ ही मंथ्स में 1000 से मिलियंस में बदल गई। सिर्फ 1 साल के अंदर कंपनी ने 1000 एक्स ग्रोथ अचीव की और परप्लेक्सिटी की ग्रोथ बस यहीं नहीं रुकी। इस रैपिड ग्रोथ और सक्सेस को देखते हुए वर्ल्ड बिगेस्ट चिप मेकर कंपनी एनवीडिया [संगीत] एंड Amazon फाउंडर जेफ बेज़ोस और सॉफ्ट Bank जैसे टॉप टियर इन्वेस्टर्स भी जुड़ गए। जिसके बाद 2025 तक परप्लेक्सिटी की वैल्यू्यूएशन 20 बिलियन तक पहुंच गई। और आज परप्लेक्सिटी पर 30 मिलियन से ज्यादा सर्चेस डेली होते हैं। जो इसे दुनिया के फास्टेस्ट [संगीत] ग्रोइंग एआई स्टार्टअप्स में से एक बनाता है। एंड अब क्वेश्चन यह है कि Google या ओपन एi जो इतने बड़े जॉइंट्स हैं [संगीत] वे खुद ऐसा प्रोडक्ट डायरेक्टली क्यों नहीं बनाते? सो इसका आंसर उनके बिजनेस मॉडल में छुपा है। Google जिसका प्राइमरी रेवेन्यू एड्स से आता है। अगर वह परप्लेक्सिटी स्टाइल आंसर इंजन बना देता तो यूज़र्स लिंक्स पर क्लिक ही नहीं करेंगे जिससे ऐड इंपेशंस गिर जाएंगे। और दूसरी तरफ ओपन AI और Microsoft अपनी एलएलएम एपीआई सेल करके बिलियंस जनरेट करते हैं। और अगर वे एक न्यूट्रल एi इंटरफ़ेस लॉन्च करते तो वे अपने ही कस्टमर्स के साथ कमपीट करते दिखेंगे। आज अरविंद श्रीनिवास का विज़न बिल्कुल क्लियर है। फ्यूचर सर्च का नहीं बल्कि एआई आंसर इंजंस का है। जहां यूज़र्स सिर्फ सर्च नहीं बल्कि समझने, कंपेयर करने और सीखने के लिए आएंगे। और यह स्टोरी हमें प्रूफ करती है कि क्लेरिटी ऑफ विज़न और सही [संगीत] डायरेक्शन के साथ एक मिडिल क्लास बैकग्राउंड से आने वाला लड़का भी Google जैसे ट्रिलियन डॉलर जॉइंट को चैलेंज कर [संगीत] सकता है।

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