Bricks, Beads, and Bones Class 12 One Shot | Class 12th History Chapter 1 Revision | Ayushi Ma'am

Next Toppers - 12th Humanities30,458 words

Full Transcript

ये जो चैप्टर है हमारा इसमें हम इन्हीं नॉन लिविंग थिंग्स के थ्रू इन्हीं निर्जीव चीजों के थ्रू हम एक ऐसे सिविलाइजेशन की हिस्ट्री के बारे में जानेंगे जो कि हमारे ही देश इंडिया में पनपी हुई थी। तो चलिए बात करते हैं आज की जो होने वाला है हमारा चैप्टर नंबर वन ब्रिक बीड्स एंड बोनस। इस वजह से द फर्स्ट डिस्कवर्ड साइड के अनुसार इस पूरे सिविलाइजेशन को नाम दिया गया द हड़प्पा सिविलाइजेशन। कि आप बोल लीजिए कि इनिशियल फेज में है। इस कारण से कोई भी बड़ी-बड़ी बिल्डिंग्स या सेटलमेंट्स हमें इस समय पर नहीं देखने को मिले हुए हैं। यह बता रहे हैं कि वहां पर इरीगेशन या एग्री एग्रीकल्चर टेक्नोलॉजी इतनी एडवांस थी कि राजस्थान जैसे रीजन में एक ही खेत में दो क्रॉप्स एक साथ उगाई जा रही है। तो इसको बोला जाता है मृतकों का टीला या फिर द माउंट ऑफ ब्यूरियल्स। ठीक है? मतलब कि क्या हुआ कि भैया एक ऐसी जगह जहां से कंकाल ही कंकाल मिल रहे हैं। डेड बॉडीज ही डेड बॉडीज मिल रही हैं। हेलो माय डियर स्टूडेंट्स कैसे हैं आप सभी? दिस इज आयुष चौर्य एंड वेलकम टू नेक्स्ट टॉपर ह्यूमैनिटीज जहां हम मनाते हैं देश का भविष्य और क्लास 11th के बाद आप सभी का स्वागत है नेक्स्ट टॉपर ह्यूमैनिटीज क्लास 12th के इस चैनल पर जहां आज से हम शुरू कर रहे हैं हमारी मोस्ट रिक्वेस्टेड वन शॉर्ट सीरीज। तो भाई आज हम जो चैप्टर पढ़ने वाले हैं वो है क्लास 12th हिस्ट्री का फर्स्ट चैप्टर ब्रिक बीट्स एंड बोनस। लेकिन क्या आप सभी भी यही सोच रहे हैं कि मैम ब्रिक बीट्स एंड बोनस ये कौन सी हिस्ट्री हुई भला? क्योंकि आज से पहले तो जब भी हम हिस्ट्री की किताब खोलते थे तो उसमें या तो हम रेवोलशंस के बारे में पढ़ रहे हैं या फिर किसी देश में हो रहे नेशनल मूवमेंट्स के बारे में पढ़ रहे हैं या फिर किसी पर्सनालिटी के को डिस्कस कर रहे थे। लेकिन आज भाई ये कौन सी हिस्ट्री हो गई जिसमें हम ऐसी नॉन लिविंग थिंग्स के बारे में पढ़ रहे हैं। तो बेटा ये जो चैप्टर है हमारा इसमें हम इन्हीं नॉन लिविंग थिंग्स के थ्रू इन्हीं निर्जीव चीजों के थ्रू हम एक ऐसे सिविलाइजेशन की हिस्ट्री के बारे में जानेंगे जो कि हमारे ही देश इंडिया में पनपी हुई थी। तो चलिए बात करते हैं आज की जो होने वाला है हमारा चैप्टर नंबर वन ब्रिक बीड्स एंड बोनस जिसमें हम पढ़ेंगे इंडस वैली सिविलाइजेशन के बारे में। तो जब हम हड़प्पा या इंडस वैली सिविलाइजेशन की बात कर रहे हैं तो इस चैप्टर की शुरुआत में हमें दी हुई है एक सील और ये सील जो है जो मिली हुई है कहां से? हड़प्पा सिविलाइजेशन से। तो भाई सील को अगर हम डिस्कस करें तो सील के बारे में हम सभी बहुत अच्छे से जानते हैं कि सील कुछ एक ऐसा डिस्टिंक्टिव आर्टिफेक्ट होता है जो ट्रेडर्स के थ्रू यूज किया जाता है अपने कारगोस को या एक तरीके से आप बोल लीजिए पैकेजेस को ट्रांसपोर्ट के समय आईडेंटिफाई करने के लिए। तो वैसे ही जो एक सील है वो मिली हुई थी हमें हड़प्पा से। अब अगर हम इसके मटेरियल की बात करें तो वो बना हुआ है स्टेट स्टोन से जो एक तरीके का सॉफ्ट स्टोन होता है। सॉफ्ट स्टोन होने के कारण इसके ऊपर अलग-अलग तरीके की जो कार्विंग्स होती थी वो आसानी से की जा सकती थी। देन अब ये सील हमें बता क्या रही है? तो भाई ये जो सील है इसके ऊपर अगर हम देखें तो एक बना हुआ है एनिमल। ठीक? उसके साथ-साथ यहां पर कई सारे साइंस भी बने हुए हैं। लेकिन ये साइंस हमें बता क्या रहे हैं? ये बात हिस्टोरियंस अभी तक पता नहीं लगा पाए थे। जिसकी वजह से जो ये सिविलाइजेशन जो है उसके बारे में अगर हम बात करें तो कोई भी लिटरेरी एविडेंसेस हमारे काम के नहीं हुए। इसी वजह से इस चैप्टर में हम जो भी सोर्सेस को पढ़ेंगे वो सारे के सारे आर्कलॉजिकल सोर्सेस को ही हमने डिस्कस करना है। सो दैट इज़ व्हाई द स्क्रिप्ट ऑफ दिस सील इज़ रिमेन अनडिसेसफर्ड। और जो आर्कलॉजिकल सोर्सेस हमें मिले हुए हैं जैसे कि अगर हम बात करें हाउसेस, पॉट्स, ऑर्नामेंट्स, टूल्स और जो सील्स हैं वो हमें इस सिविलाइजेशन के बारे में यहां पर बता रहे हैं। बट सिविलाइजेशन को डिस्कस करने से पहले एक बार कुछ छोटे जो बेसिक कांसेप्ट्स होते हैं उनको जान लेते हैं। तो भाई हम सभी ये बात बहुत अच्छे से जानते हैं कि जो ह्यूमन था वो एक तरीके से उसके इनिशियल फेस में नुमैेडिक हुआ करता था। ठीक है? नोमैडिक होने के साथ उसके बाद जब वो आगे जब उन्होंने सेटल्ड होना शुरू किया तो अब उन्होंने एग्रीकल्चर करना शुरू किया। बट इस समय का ये जो एग्रीकल्चर है अगर हम बात करें इसकी तो ये आप बोल सकते हैं एक तरीके से सब्सिस्टेंस लेवल पे हो रहा है। ठीक है? यहां पर ह्यूमन जो है वो उतना ही प्रोड्यूस कर रहा है जितना कि वो कंज्यूम कर सके। और क्योंकि यहां पर जो एग्रीकल्चरल टूल्स हैं वो प्रिमिटिव है। टेक्नोलॉजी प्रिमिटिव है। ठीक है? तो इस वजह से ज्यादा प्रोडक्शन इस समय पर नहीं देखा गया। बट धीरे-धीरे क्या देखा गया कि भाई धीरे-धीरे जब टेक्नोलॉजी एडवांस हुई, अलग-अलग मेटल्स यहां पर मिले हुए हैं। तो अब ह्यूमन जो है वो सब्सिस्टेंस की जगह पर सरप्लस एग्रीकल्चर प्रोडक्शन जो है वो यहां पर करना शुरू हुआ। और यही सरप्लस एग्रीकल्चर प्रोडक्शन जो है अगर हम इसकी बात करें तो यही एग्रीकल्चर सरप्लस प्रोडक्शन जो है वो ह्यूमन को रूरल फेस से कहां लेकर आ चुका है? रूरल फेस से उन्हें लेकर आ चुका है उनके अर्बन फेस पर। तो यही जो अर्बन लाइफ है जिसको हम आज डिस्कस करेंगे वो होने वाली है इंडस वैली सिविलाइजेशन की कई सारी मेजर सिटीज के बारे में। तो यहीं पर हम लोग बात कर रहे हैं। तो भाई ये जो सिविलाइजेशन है जिसका नाम है इंडस वैली सिविलाइजेशन या हड़प्पा सिविलाइजेशन सबसे पहले बात करते हैं कि इसका नाम ये कैसे पड़ा? हड़प्पा सिविलाइजेशन अगर हम इसे बोलें या इंडस वैली अगर हम इसे इंडस वैली सिविलाइजेशन कहते हैं तो वो नाम इसे मिला क्योंकि यहां पर जितनी भी साइट्स हैं वो सभी बनी हुई हैं इंडस रिवर और उसकी ट्रिब्यूटरीज के ऊपर। उसके साथ-साथ अगर इसके हम दूसरे नाम की बात करें व्हिच इज द हड़प्पा सिविलाइजेशन। तो जब इस रीजन को एक्सकवेट किया गया था तो सबसे पहला जो सिटी यहां पर मिली हुई थी वो थी हड़प्पा। और इस वजह से द फर्स्ट डिस्कवर्ड साइड के अनुसार इस पूरे सिविलाइजेशन को नाम दिया गया द हड़प्पा सिविलाइजेशन। अब इस समय की टाइम पीरियड की बात कर लेते हैं कि भाई ये जो पूरा सिविलाइजेशन जिसकी हम बात कर रहे हैं वो किस टाइम पीरियड पर एग्जिस्ट करता था। तो अगर हम इसको एंटायरली अगर हम इसकी बात करें तो भाई कलेक्टिवली इसका टाइम पीरियड होता है 6000 बीसी से लेकर 1300 बीसी तक। बट इस पूरे टाइम पीरियड में भी इस सिविलाइजेशन को तीन अलग-अलग फेसेस में डिवाइड किया गया है। तो वो बात कर लेते हैं। तो भाई अगर हम बात कर रहे हैं इंडस वैली सिविलाइजेशन की। ठीक? तो इंडस वैली सिविलाइजेशन को अगर आप बोलेंगे तो सबसे पहले बात करते हैं इसके अर्ली फेज की। ठीक? उसके अर्ली फेज कब से कब तक होगा बेटा? ये होगा आपका 6000 बीसी से लेके 2600 बीसी तक। ठीक? उसके बाद अगर हम बात करें इसके मैच्योर फेज की तो अगर आप इसके मैच्योर फेज की बात करेंगे जहां पर इसका जो सिविलाइजेशन था वो बिल्कुल जेनेट पर था वो टाइम था 2600 बीसी से लेकर 1900 बीसी तक। ठीक? उसके बाद अगर हम इसके डिक्लाइनिंग फेस या डिसेंडेंट फेस की बात करेंगे तो जो इसका डिक्लाइन फेस हुआ वो होगा 1900 बीसी से लेकर 1300 बीसी तक। ठीक? तो कलेक्टिवली अगर इसके पूरे फेस की बात करेंगे अगर हम इसके पूरे टाइम पीरियड को डिस्कस करेंगे तो 6000 बीसी से लेकर 1300 बीसी तक और फिर इसको ही अलग-अलग फेसेस में यहां पर डिवाइड किया गया है जैसे अर्ली फेज जिसको फॉर्मेटिव फेस भी कहा जा रहा है। उसके बाद इसका अर्बन फज़ या मैच्योर फज़। ठीक? और उसके बाद आता है इसका डिक्लाइनिंग या फिर डिसेंडेंट फज़। अब ये जो सिविलाइज़ेशन है इसके बारे में हमें कई सारी डिस्टिंक्टिव आर्टिफेक्ट्स जैसे कि क्या-क्या? जैसे कि इनकी पोटरी ब्रिक्स। ठीक है? अब ये जो ब्रिक्स थी ये एक तरीके की ना बल्कि अलग-अलग तरीके की हुआ करती थी। जैसे कि सनराइड बेग्स हो गई या फिर बेक्ड ब्रिक्स हो गई वो भी हमें यहां से मिली हुई हैं। देन सबसे प्रोमिनेंट यहां पे जिसको आप सोर्स बोल सकते हैं, आर्टिफेक्ट बोल सकते हैं वो है हड़प्पन सील्स। उसके साथ यहां पर हमें बी वेट्स मिले हुए हैं, बीड्स मिली हुई हैं। कॉपर एंड ब्रोंज़ के आर्टिकल्स, टूल्स मिले हुए हैं। और कई सारी चीजें जो हड़प्पा सिविलाइजेशन के बारे में हमें बता रहा है। अब अगर हम इसके एरिया की बात करें तो ये प्रेजेंट डे इंडिया पाकिस्तान और अफगानिस्तान का जो पूरा रीजन था उसमें एकिस्ट करता था। सो यहां पे रीजन के बारे में बताया हुआ है कि भाई अफगानिस्तान, बलूचिस्तान, सिंध, पंजाब प्रोविंसेस ऑफ पाकिस्तान एंड द इंडियन स्टेट्स इंक्लूडिंग द जम्मू कश्मीर, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, गुजरात एंड महाराष्ट्र। ठीक? तो अगर हम इस तरीके से मैप में देखेंगे तो कुछ इस तरीके से जो मैच्योर फेज है हड़प्पन सिविलाइजेशन का वो हमें दिखता है। बट बात करते हैं कि ये जो सिविलाइजेशन है ये कैसे उसके मैच्योर फेस में पहुंचता है। तो सबसे पहले अगर आप कुछ इस तरीके से देखेंगे तो अर्ली हड़प्पन साइट्स को हम डिस्कस करते हैं। भाई देखिए जब हम लोग रूरल इकॉनमी की बात करेंगे तो यहां पर जो लोग होते हैं यह एक दूसरे के ऊपर डिपेंडेंट होते हैं और इसी वजह से जब वो सेटलमेंट करेंगे तो वो कुछ इस तरीके से पासपास तरीके से आप बोल सकते हो क्लस्टर के फॉर्म में यहां पर एग्जिस्ट करते थे। क्यों? क्योंकि ये अपनी नीड के लिए एक दूसरे के ऊपर डिपेंडेंट हुए। लेकिन बाद में जब टेक्नोलॉजी में एडवांसमेंट आएगा, सरप्लस प्रोडक्शन होगा, क्राफ्ट एंड ट्रेड का डेवलपमेंट होगा। तो अब ये जो सिटीज हैं ये इंडिविजुअली दूर-दूर अपने-अपने तरीके से एग्जिस्ट होना शुरू हो जाएंगी। तो इसीलिए आप यहां पर देख सकते हैं कि जब हम बात करेंगे अर्ली सिविलाइजेशन की तो वो इस तरीके से क्लस्टर के फॉर्म में जैसे अमरीनाल हो गया, सिजवाल हो गया, कोट दीजी हो गया तो वो इस तरीके से एग्ज़िस्ट करती थी। लेकिन जब यहां पर मैच्योर फेस की अगर हम बात करें तो यहां पर इंडिविजुअल टाउंस जो हैं, सिटीज जो हैं उनका डेवलपमेंट हम देख रहे हैं। ठीक? तो अगर हम यहीं पर अगर बात करते चलें तो भाई देखिए बिगिनिंग की बात करते हैं। यहां पर एक हेडिंग है जिसमें हम अर्ली फज़ ऑफ़ हड़प्पन सिविलाइजेशन को डिस्कस कर रहे हैं। क्या बता रहा है ये फज़ हमें? द आर्कलॉजिकल कल्चर इन द रीजन प्रीरियर टू द मैच्योर हड़प्पन। ठीक है? तो ये कौन सा एरिया हो गया या कौन सा आप बोल लीजिए कि कौन सा फेज हो गया? ये हुआ हड़प्पन सिविलाइज़ेशन का अर्ली फेज़ जो मैच्योर फेज के पहले एग्ज़िस्ट करता था। अब इसके फीचर्स क्या हुए? तो भैया ये जो समय है इससे हमें कई सारी डिस्टिंक्टिव पॉटरी मिली हुई है। एविडेंसेस ऑफ एग्रीकल्चर मिला हुआ है। पास्टलिज्म के बारे में पता चलता है। साथ ही साथ क्राफ्ट के बारे में भी इस समय से हमें पता चल रहा है। ठीक? तो अगर मैं आपको इस मैप के थ्रू बताने की कोशिश करूं तो अगर आप देखेंगे ये जो ट्रायंगुलर साइट्स हैं। ठीक है? तो ये सारी जो साइट्स हैं ये कौन सी हुई? ये हुई हमारी अर्ली एग्रीकल्चरल साइट्स या फिर आप बोल लीजिए कि अर्ली हड़प्पन सिविलाइजेशन की साइट्स। ठीक है? जैसे कि अगर हम यहां पर देखें तो यहां पर अलादीनो हमें दिख रहा है। ठीक है? उसके बाद कुल्ली दिख रहा है। ठीक? उसके बाद जालीपुर। तो इस तरीके से ऐसी कई सारी साइट्स हैं जहां पर पहले हड़प्पन सिविलाइजेशन के मैच्योर फज़ शुरू होने से पहले भी एग्रीकल्चर हुआ करता था। ठीक? उसके बाद अगर हम बात करें तो भाई ये जो सिविलाइजेशन था या अगर आप बोले ये जो फज़ है ये काफी इसमें जो सेटलमेंट्स थे ये काफी स्मॉल होते थे। और इस वजह से क्योंकि ये इसके आप बोल लीजिए कि इनिशियल फेज में है। इस कारण से कोई भी बड़ी-बड़ी बिल्डिंग्स या सेटलमेंट्स हमें इस समय पर नहीं देखने को मिले हुए हैं। ठीक? लेकिन अगर हम आगे चलें कहां पर अगर हम आ जाएं हमारे मैच्योर फेज की तरफ, तो भाई यहां पर तो अगर हम देखें तो बड़े-बड़े सेटलमेंट्स जो इंडिविजुअली एक्सिस्ट कर रहे हैं उनको यहां पर हमें बताया गया है। तो चलिए अब हम इसका जो अर्ली फेज है उसको थोड़ा डिटेल में डिस्कस कर लेते हैं। तो भाई अर्ली फेज या जिसको यहां पर बिगिनिंग की हेडिंग से आपकी एनसीईआरटी में दिया हुआ है। की अगर हम बात करें तो आर्कियोलॉजिकल सोर्सेस के अकॉर्डिंग इसे मैच्योर फज़ के पहले के समय में अरेंज किया गया है। ठीक? अब ये जो कल्चर है, अब ये जो रीजन है ये हमें बता रहा है कि भाई इस समय पर भी इस रीजन में अगर हम बात करें तो डिस्टिंक्टिव पोट्री हमें यहां से मिली हुई है। उसके साथ-साथ यहां पर एविडेंसेस देखे गए हैं एग्रीकल्चर के और पास्टिज्म के। उसके साथ-साथ कुछ क्राफ्ट भी जो थे वो इस समय के लोग यहां पर करते थे। ठीक? तो अगर इस मैप के थ्रू अगर मैं आपको बताना चाहूं तो यहां पर अगर आप देखोगे तो कुछ अर्ली एग्रीकल्चरल साइट्स के थ्रू इस फेस के कुछ जो रीजंस हैं उन्हें यहां पर मार्क किया गया है। जैसे कि अगर हम बात करें तो यहां पर मिथाटल है। ठीक है? उसके साथ अगर हम बात करें तो यहां पर गुमला है, रहमान डेरी है। उसके साथ अगर हम और आ जाए यहां पर तो अलादीनो वाला पार्ट है। यहां पर कुली है। ठीक है? तो ये वो कुछ ऐसे सेटलमेंट्स थे जिन्हें अर्ली फेज की कैटेगरी में यहां पर रखा गया है। बट ये जो सेटलमेंट्स हुए ये काफी स्मॉल हुए क्योंकि ये एक दूसरे के ऊपर डिपेंडेंट थे। ये क्लस्टर के फॉर्म में एक्सिस्ट करते थे। और क्योंकि टेक्नोलॉजी में डेवलपमेंट नहीं है। आप एक तरीके से बोल लीजिए कि इंफ्रास्ट्रक्चर में डेवलपमेंट नहीं है। इसी वजह से इस समय में हमें कोई भी बड़ी-बड़ी बिल्डिंग्स जो हैं वो इस समय पर नहीं मिल रही हैं। लेकिन जब हमें मैच्योर फेज के साइट्स को मिलने की जब हम बात करेंगे तो भाई वहां पर हम इसे एक डेवलप्ड अर्बन फेज में अर्बन सेटलमेंट्स के फॉर्म में देखेंगे। ठीक? तो वहीं पर अगर हम एक डेवलप्ड हड़प्पन साइट्स की बात करें तो यहां पर आपको एक बॉक्स के थ्रू यहां पर बताया हुआ है हड़प्पन सेटलमेंट्स के बारे में। तो चलिए डिस्कस करते हैं। सो फार मतलब कि प्रेजेंट के टाइम पर हड़प्पन सेटलमेंट्स की अगर हम बात करें तो अराउंड 2000 साइट्स जो हैं वो इस सिविलाइजेशन के अराउंड हमें पता चल चुकी हैं। ठीक है? सो दीज़ साइट्स हैव बीन फाउंड इन द इंडियन सबक्टिनेंट और उसके साथ ही इसकी जितनी भी साइट्स हैं वो ज्यादातर अगर आप बात करेंगे तो वो इंडस और जो सरस्वती रिवर्स हैं उसके बेसिस पर जो है वो लोकेटेड हैं। ठीक? अब यहां पर नियरली टू थर्ड सेटलमेंट्स ऐसे होंगे जो यहां पर आप बात करेंगे तो सरस्वती बेसिंस जो हैं वो यहां पर उस समय पर या उस रीजन में यहां पर एग्जिस्ट करते थे। क्यों भाई? क्यों रिवर वैलीज के ऊपर ही सेटलमेंट्स मिले? क्योंकि अगर आप बात करेंगे तो कुछ इस तरीके से ये जो इंडस रिवर या सरस्वती रिवर की अगर आप बात करें तो भाई ये रिवर जो है वो एक तो उस रीजन को अच्छी खासी एग्रीकल्चर प्रोडक्टिविटी प्रोवाइड करती थी। साथ ही साथ ट्रांसपोर्टेशन के पास भी काम में आती थी और अगर आप देखेंगे तो ये जो है एक तरीके से आप बोल सकते हो कि उनकी जो वाटर नीड्स थी उनको भी फुलफिल करने में यहां पर काम आई हुई थी। तो यही इसी वजह से अगर आप बोलेंगे तो भाई जितने भी हड़प्पन सेटलमेंट्स देखें या वर्ल्ड के जितने भी सिविलाइजेशंस की अगर आप बात कर लें तो वो सारे के सारे रिवर वैलीज के ही बेसिस पर या बैंक्स पर आपको डेवलप्ड मिलेंगे। ठीक? अब अगर हम हड़प्पा सिविलाइजेशन की बात करें तो यहां पर कुछ फाइव मेजर सिटीज हैं जिनको इबोरेट तरीके से बताया जाता है। तो अगर हम बात करें तो भाई ये सिटीज हुई जैसे कि राखीगढ़ी, मोहनजोदड़ो, हड़प्पा, धौलावीरा और गनेरीवाला। उसके अलावा जितने भी सेटलमेंट्स हमें मिले हुए हैं उन्हें अलग-अलग कैटेगरीज में रखा गया। जैसे कि रीजनल सेंटर्स, एग्रीकल्चरल विलेजेस, पोर्ट्स एंड मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर्स। ठीक है? तो अगर कुछ इस तरीके से अगर आप इस पिक्चर में देखेंगे तो आप बहुत अच्छे से आइडेंटिफाई कर सकते हैं कि यहां पर लोथल नाम से कुछ ऐसे पोर्ट्स हुए जो एक तरीके से ट्रेड कर रहे हैं दूसरे सिविलाइजेशंस के साथ। वहीं पर अगर आप मोहनजोदड़ो को देखेंगे तो कुछ इस तरीके से यहां पर ग्रेट बात था जो उसकी सिटी लाइफ में काफी एडवांस फीचर्स को बता रहा है। ठीक? वहां पर अगर आप कालीबंगा की बात करेंगे तो भाई यहां पर तो फरोड फील्ड्स का हमें एविडेंसेस मिला हुआ है। अच्छा खासा एग्रीकल्चर के बारे में हमें पता चल रहा है। ठीक है? राखीगढ़ी जैसे बड़े-बड़े सेटलमेंट्स मिले हुए हैं। यहां पर चूंदड़ो जैसे जो पोर्ट टाउनंस हैं पोर्ट नहीं सॉरी जो क्राफ्ट टाउनंस हैं वो भी हमें यहां पर देखने को मिले हुए हैं। ठीक? तो इस तरीके से अगर हम हड़प्पा एंड सेटलमेंट्स की बात करें तो ये काफी एडवांस हुआ करते थे। ठीक? चलिए अब बात करते हैं इनके सब्सिस्टेंट स्ट्रेटजीस की कि भाई ये जो हड़प्पा में रहने वाले लोग थे ये खाते पीते क्या थे? अपना गुजर-बसरर किस तरीके से करते थे? तो इनके बारे में पता चला इनके डाइटरी प्रैक्टिस से। ठीक? तो यहां पर वी कैन रिकंस्ट्रक्ट द डाइटरी प्रैक्टिस फ्रॉम द फाइंड्स ऑफ द चार्ट ग्रेंस एंड द सीड्स। ठीक है? कि भाई यहां पर जो लोग हुए उन्होंने जब अनाज को जलाया होगा, पकाया होगा या जो हमें सीड्स मिले हुए हैं उनकी एग्रीकल्चरल साइट से उनसे हमने ये पता लगाया कि ये जो लोग थे ये कौन सा ग्रेन जो है वो कंज्यूम करते थे। तो यहां पर उनके ग्रेंस के बारे में पता चला कि भाई वीट है, बार्ले है, लेंटिल है, चिकप्पी है, सेसमे है। ठीक है? ये सारे वो आप बोल सकते हैं ग्रेंस जो यहां से यहां के लोग जो हैं वो कंज्यूम करते थे। अब इन्हें पता लगाने वाले जो लोग हैं मतलब इन ग्रेंस की स्टडी करने वाले जो लोग हैं उन्हें कहा जाता है आर्कियोबोटेनिस्ट। सो आर्कियोबोटेनिस्ट आर बेसिकली अ स्पेशलिस्ट इन एंशिएंट प्लांट रिमेंस। ठीक है? ये क्या करते हैं बेटा कि जो प्लांट रिमेंस हैं जो आप एक तरीके से बोल लीजिए कि जो अनाज के रिमेंस हैं उनसे पता लगाते हैं कि ये ग्रेंस किस तरीके से होते थे या कौन से हैं। उसके बाद अगर एनिमल लाइफ की यहां पर बात करी जाए तो भाई ये लोग जो हैं ये हंटिंग तो करते ही करते थे। साथ ही साथ आप एक तरीके से बोल लीजिए कि एनिमल हस्बेंडरी के भी यहां पर हमें एविडेंसेस मिले हुए हैं। तो यहां पर हमें मिला हुआ है बोनस ऑफ कैटल, शीप, गोट, बफेलो, पिग्स। ठीक है? और इनमें से कई सारे ऐसे जो हैं जिन्हें डोमेस्टिकेट किया जाता था। ठीक? लेकिन अब क्योंकि रिवर वैली के भी आसपास रह रहे हैं तो भाई फिशिंग वगैरह के भी हंटिंग के भी एविडेंसेस मिले हुए हैं हमें। अब इन एनिमल्स के बारे में जो पता लगाता है मतलब कि इन एनिमल्स के बोन से ये पता लगाना कि ये एनिमल कौन सा था। उस स्पेशलिस्ट को कहा जाता है आर्कियोजोलॉजिस्ट या जआलॉजिस्ट। सो दीज़ आर दी पीपल हु आर बेसिकली द स्पेशलिस्ट इन द रिमेंस ऑफ दी एनिमल बोनस। ठीक? अब बात करते हैं आगे। तो इनका मीन्स ऑफ लाइवलीहुड क्या हुआ? मतलब कि आप एक तरीके से बोल लीजिए कि भाई कौन-कौन से ऑक्यूपेशंस जो थे वो यहां के लोग फॉलो करते थे। तो यहां पर अगर हम बात करें तो दो मेन ऑक्यूपेशन जो हमें इंडस वैली सिविलाइजेशन के बारे में पता चल रहे हैं वो है पहला एग्रीकल्चर और दूसरा है पार्शियलिज्म। ठीक? तो पहले डिस्कस करते हैं एग्रीकल्चर और उससे जुड़ी हुई टेक्नोलॉजी की जिसके एविडेंसेस जो हैं वो हमें सिविलाइजेशन से पता चल रहे हैं। तो यहां पर अगर हम बात करें तो कुछ बुल जो है वो इस तरीके से अगर आप देखेंगे तो टेराकॉर्टा बुल जो है वो मिला हुआ है। अब टेराकोटा बुल जो है वो कहीं ना कहीं हमें ये बता रहा है कि भाई यहां के जो लोग हैं वो बुल को जानते होंगे। उन्होंने कभी ना कभी बुल को देखा हुआ होगा। इसीलिए तो क्या किया? उन्होंने टेराकोटा बुल जो है उसको बनाया। उसकी एक इमेज बनाई। यूज़ किया आप बोल सकते हो कि एक मूर्ति बनाई। ठीक है? लेकिन अगर आप एग्रीकल्चर की बात करें तो एग्रीकल्चर में जो ऑर्क्स होता था उसको प्लोइंग के पर्पस से यहां पर यूज़ किया जाता था। वैसे ही हिस्टोरियंस को एक तरीके से आप बोल लीजिए कि टेराकोटा प्लो भी मिला हुआ है। अब ये टेराकोटा प्लो जो है वो हमें चोलिस्तान और बनावली से मिला हुआ है। जो क्या बता रहा है कि भाई ये जो लोग हैं ये प्लोइंग के लिए इस तरीके से जो पुल प्लो हैं उनका यूज़ किया करते होंगे। ठीक है? उसके बाद और क्या ऐसे एविडेंसेस हैं जो हमें एग्रीकल्चर टेक्नोलॉजीस के बारे में यहां पर बता रहे हैं। तो हमें कालीबंगा से एक बड़ी सी फील्ड मिली हुई है और वो फील्ड जो थी वो इस तरीके से फरोड थी। ठीक है? और ना सिर्फ एक डायरेक्शन में बल्कि यहां पर एक साथ दो क्रॉप उगाए जाते थे। ठीक? तो यहां पर इस तरीके से जो दोनों क्रॉप्स हैं वो राइट एंगल पे यहां पर आप देखो फील्ड हैड टू सेट्स ऑफ़ फरोज़ एट राइट एंगल टू ईच अदर सिचुएटेड इन द सेमी एरिडलैंड्स ऑफ़ कालीबंगन। ठीक है? तो मतलब यह बता रहे हैं कि वहां पर इरीगेशन या एग्री एग्रीकल्चर टेक्नोलॉजी इतनी एडवांस थी कि राजस्थान जैसे रीजन में एक ही खेत में दो क्रॉप्स एक साथ उगाई जा रही हैं। ठीक? वहीं पर अगर हम इनके इरीगेशन की बात करें तो भाई इरीगेशन की अगर आप बात करेंगे तो धौलावीरा जैसे साइड से हमें वाटर रिजवायर्स भी मिले हुए हैं जो हमें ये बताते हैं कि ये ना सिर्फ नदी की वजह से इरीगेशन कर पाए थे बल्कि इन्होंने ऐसे टैंक्स भी बनाए जो इनकी लॉन्ग टर्म वाटर नीड्स को यहां पर फुलफिल कर रहे थे। ठीक? अब बात करते हैं इनके टूल्स की कि भाई एग्रीकल्चर में किस तरीके के टूल्स को ये यूटिलाइज कर रहे थे। तो टूल्स की अगर हम बात करें तो इनके टूल्स बने हुए होते थे कॉपर से और साथ ही साथ स्टोन से। ठीक है? तो इस तरीके से जो कॉपर टूल्स हैं वो भी हमें मिले हुए हैं जो उन्होंने एग्रीकल्चर या आप एक तरीके से बोल लीजिए क्राफ्ट में अलग-अलग पर्पस के साथ यूज़ किए होंगे। ठीक है? उसके साथ अब ये जो एग्रीकल्चरल टूल्स हैं इनका बेसिक यूज़ होता था कि इन्हें यूज़ किया जाएगा हार्वेस्टिंग और फ्लोइंग के काम के लिए। लेकिन हमने ये देखा कि भाई हमारा जो हड़प्पन सिविलाइजेशन है वो सिर्फ नदी के किनारे नहीं बसा हुआ है। इसकी कुछ साइट्स ऐसी भी हैं जो सेमी हरिड लैंड्स में या फिर आप बोल लीजिए कि काफी फार रीजन को बिलोंग कर रही हैं। तो ऐसे रीजंस में भी एग्रीकल्चर का मिलना जो हमें ये इंडिकेट कर रहा है कि इंडस वैली सिविलाइजेशन में जरूर कुछ ना कुछ डिफरेंट मेथड्स ऑफ इरीगेशन का यूज किया हुआ। और उसके एविडेंसेस हमें इस बात को कहीं ना कहीं प्रूव कर रहे हैं। जैसे कि क्या कि भाई शर्तगाय जो कहां पर है अगर आप बात करेंगे शर्तगाय की तो वो है प्रेजेंट डे अफगानिस्तान में और इस अफगानिस्तान के रीजन से हमें कैनाल्स के एविडेंसेस मिले हुए हैं जो हमें ये बता रहा है कि इंडस वैली सिविलाइजेशन में कैनाल्स का यूज़ किया होता था एग्रीकल्चर में इरीगेशन पर्पस के लिए। उसके साथ हमें कई सारे वेल्स मिले हुए हैं। ठीक है? उसके साथ वाटर रिजवायर जो इस तरीके से अभी हमने धौलावीरा में देखा। ठीक है? तो ये सारी चीजें ये हमें ये बता रही हैं कि भाई इंडस वैली सिविलाइजेशन के लोग जो हैं वो एग्रीकल्चर टेक्नोलॉजी में काफी एडवांस हुआ करते थे। ठीक? अब यहां पर अगर हम बात करें तो एक सोर्स हमें दिया हुआ है जो हमें और बताता है कि ये जो ग्रेन इन्होंने प्रोड्यूस किया हुआ है उसको प्रोसेस कैसे कर रहे हैं। ठीक? तो भाई सीधी सी बात है कि जब सरप्लस में ग्रेन को प्रोड्यूस किया हुआ है तो जरूर उसका आप एक तरीके से बोल लीजिए कि उसके स्टोरेज के लिए उसके प्रोसेसिंग के लिए अलग-अलग इंप्लीमेंट्स या फिर आप बोल लीजिए कि टेक्नोलॉजीस का यूज़ किया हुआ था। तो वो चीजें हमें कैसे पता चली? ये उसकी बात यहां पर करी गई है। सो हाउ आर्टिफेक्ट्स आर आइडेंटिफाइड? प्रोसेसिंग ऑफ फूड रिक्वायर्ड ग्राइंडिंग ग्राइंडिंग इक्विपमेंट्स एज वेल एज बेसल्स फॉर मिक्सिंग, ब्लेंडिंग एंड कुकिंग। एंड दीज़ वर मेड अप ऑफ किस मटेरियल से बने हुए होते थे बेटा? ये बने हुए होते थे स्टोन से, मेटल से, टेराकोटा से। तो यहां पर हमें जो है ये एक एक्सट्रैक्ट दिया हुआ है और उस एक्सट्रैक्ट से हमें ये पता लगाना है कि कैसे मोहनजोदड़ो जैसी जो साइट्स हैं उन पर ग्राइंड प्रोसेसिंग के लिए या फिर आप बोल सकते हैं कि ग्रेन प्रोसेसिंग के लिए अलग-अलग इंप्लीमेंट्स का यहां पर यूज़ हो रहा है। ठीक है? तो यहां पर बात करते हैं यहां मिला हुआ है हमें सैडल कॉइन। सैडल कॉइन जिसको अगर हम हिंदी में बोल तो जो सिलबट्टा या खलबट्टा होता है कि एक बड़ा सा पत्थर होता है उसके ऊपर दूसरे पत्थर की मदद से आप ग्रेन को पीसते हैं। ठीक? तो उसकी यहां पर बात करी हुई है कि सेडल कॉइंस आर फाउंड इन कंसीडरेबल नंबर। मतलब कि एक नहीं दो नहीं बल्कि बहुत सारे नंबरों में ये जो है वो हमें यहां से मिला हुआ है। देन एंड देयर सीम्स टू हैव बीन द ओनली मीन्स इन यूज़ फॉर ग्राइंडिंग सीरल्स। ठीक है? कि ये कुछ ऐसे मीन्स हुए जिनसे सीरियल्स को ग्राइंड करने में मदद मिल रही थी। एज अ रूल दे दे वर रफली मेड ऑफ़ हार्ड ग्रिटी एंड इग्निशियस रॉक एंड सैंड स्टोन व्हिच मून शोज़ अ साइन ऑफ़ हार्ड यूजज़। ठीक है? अब क्योंकि जब आप पत्थरों के ऊपर ग्रेन को पीसने वाले हैं तो जरूरी है कि भाई ये जो ग्रेन होना चाहिए सॉरी ये जो आपका स्टोन होना चाहिए ये काफी हार्ड होना चाहिए, ग्रिटी होना चाहिए, ग्रन्यूल्स होने चाहिए उसमें जिसकी मदद से आप आसानी से वहां पे जो ग्राइंडिंग की प्रोसेस है उसको कर सकते हैं। ठीक? नाउ एज देयर बेससेस आर यूजुअली कॉन्वेक्स। ठीक है? कि उनका जो बेस होगा वो कुछ इस तरीके से कॉन्वेक्स हुआ करता था जिसके ऊपर आसानी से आप चटनी को पीस सकते हैं। ठीक है? एंड दे मस्ट हैव बीन सेट इन द अर्थ और इन मड टू प्रिवेंट देयर रॉकिंग। ठीक है? कि उसे बढ़िया तरीके से जो सोइल है जो मड है उसमें प्लेस कर दिया जाएगा ताकि आप कितना भी प्रेशर लगाएं वो अपनी पोजीशन से हिलेगा नहीं। ठीक है? टू मेन टाइप्स हैव बीन फाउंड। ठीक है? दो अलग-अलग तरीके के यहां पे सैडल कॉइंस मिले हुए हैं। अब कौन-कौन से टाइप्स हैं उनकी बात करते हैं? तो फर्स्ट वन जो है दोज़ ऑन व्हिच अनदर स्मॉलर स्टोन। पहला जो है वो क्या बता रहा है कि एक इस तरीके से होगा जिसमें एक बड़ा पत्थर होगा और उसके ऊपर एक छोटे पत्थर को टू एंड फ्रो मूवमेंट में चलाया जाएगा। ठीक है? और अगर हम अनदर वन की बात करें तो सेकंड टाइप क्या है? कि भाई एक पाउंडरिंग स्टोन होगा। मतलब इस तरीके से आप पढ़ते हैं ना ओ ओखली का। तो वो जो ओ ओखलिका है वो कुछ इस तरीके से होगा। मतलब जिसको हम खलबट्टा बोलते हैं। ठीक है? तो उसमें होगा और उसका एक तरीके से आप बोल लीजिए एक ऊपर पत्थर होगा जिसको बार-बार पीट कर उसके ऊपर जो भी हर्ब्स होंगी उसकी मदद से उसको आसानी से वहां पर चटनी आप एक तरीके से बोल लें वो बना सकते थे। सो द सेकंड स्टोन वाज़ यूज़्ड एज़ पोंडरी इवेंचुअली मेकिंग अ लार्ज कैपिटी इन द नीदर स्टोन। सो कॉर्न्स ऑफ़ द फॉर्मर टाउाउस वर प्रोबेब्ली यूज़्ड सोलली फॉर द ग्रेन। मतलब इस तरीके के जो हैं उनका यूज़ होता था ग्रेन की ग्राइंडिंग के लिए। और जो इस तरीके से आप जो पोंडरिंग स्टोन के साथ देख रहे हैं उनको यूज किया जाता था किस चीज के लिए? जहां पर वो एक तरीके से आप बोल सकते हैं कि स्पाइसेस के लिए या फिर आप बोल लीजिए कि हर्ब्स के लिए उनका यहां पर यूज़ हुआ होता था। ठीक है? सो दीज़ वर इनफैक्ट द स्टोंस ऑफ़ द लेटर टाइप्स आर डब्ड एज करी स्टोन। ठीक है? कि भाई ये जो है इस तरीके के जो खलबट्टे हैं उनको करी स्टोन भी बोला जाता था। क्योंकि उससे जो पेस्ट बनेगा उससे अलग-अलग तरीके की जो करीज़ हैं वो प्रिपेयर होती थी। सो फ्रॉम ये किसने दिया हुआ है हमें? सो फ्रॉम अर्नेस्ट मैके जो हैं जिन्होंने फर्दर एक्सकवेशन किया हुआ था यहां पर मोहनजोदड़ो में उन्होंने इस पूरे इंस्टेंस को इस पूरे एक्सेप्ट को हमारे सामने लेकर आए हुए हैं। अब आर्कियोलॉजिस्ट जो हैं वो कहीं ना कहीं अगर आप बात करें तो भाई ये लोग कनेक्ट कर रहे हैं हड़प्पा सिविलाइजेशन में मिली हुई चीजों से प्रेजेंट डे में यूज़ हो रही चीजों से। ठीक है? कि भाई प्रेजेंट डे में हम जो टेक्नोलॉजी यूज कर रहे हैं वो हड़प्पा के समय में किस तरीके से यूज किया जाती थी। तो कहीं ना कहीं एक रिेंबलेंस जो है वो दोनों में यहां पर बिल्ड किया जा रहा है। ठीक है? तो अगर आप भी फ्यूचर में आर्कलॉजिस्ट बने या फिर आप हिस्टोरियन बने तो चीजों को इस तरीके से बढ़िया तरीके से हमें क्या करना होता है? कोरिलेट करना होता है। ठीक है? चलिए तो चलिए अब डिस्कस करते हैं हमारे इंडस वैली सिविलाइजेशन के कुछ मेजर टाउनंस के बारे में। तो जब हमने इंडस वैली सिविलाइजेशन को हम पढ़ रहे थे तो हमने ये देखा कि हड़प्पा जो है वो यहां की पहली एक्सकावेटेड साइट थी। ठीक है? अब पहली एक्सकवेटेड साइट होने के कारण इसका नाम भी पड़ा हुआ था हड़प्पन सिविलाइजेशन। लेकिन हड़प्पा के साथ ऐसा क्या हुआ जिसकी वजह से वो जो साइट थी वो सबसे ज्यादा डैमेज हुई और इस वजह से वहां से हमें कोई भी मेजर फाइंडिंग जो थी वो उस समय की नहीं मिली हुई थी। और उसके बदले में अगर हम बात करें मोहनजोदड़ो की तो वहां से हमें कई सारी एविडेंसेस जो थे वो उस समय से मिले हुए थे। तो वही हमें बताया हुआ है द प्लाइट ऑफ हड़प्पा जो आपको एक बॉक्स दिया हुआ है उसके थ्रू। ठीक? तो चलिए उसको देखते हैं। सो ऑलदो हड़प्पा वाज़ दी फर्स्ट साइट टू बी डिस्कवर्ड। इट वाज़ डिस्ट्रयड बाय दी ब्रिक रॉबर्स। ठीक है? कि पहली साइट तो डिस्कवर हुई। लेकिन यहां की जो ईंटें थी वो कई सारे जो ब्रिक रॉबर्स थे चोर जो थे वो उठा के ले गए अपने साथ में। तो क्यों उठा के ले गए भैया? उठाकर इसलिए ले गए क्योंकि हड़प्पा को अगर मैं आपको बताऊं तो इसकी लोकेशन अगर आप देख रहे हैं तो ये देखो इसकी लोकेशन क्या हो रही है बेटा? कि यहां जो है अगर मिडिवल टाइम से ही कई सारे जो फॉरेन इन्व इनवेडर्स हमारी कंट्री में आए हुए थे वो सारे के सारे इस ही रूट को फॉलो करते हुए आए थे। है ना? और वहीं पर अगर हम कॉलोनियल पीरियड की बात करें तो ब्रिटिशर्स को भी जब अफगानिस्तान के ऊपर कंट्रोल एस्टैब्लिश करना था तो उन्होंने भी इसी ही रूट से क्या किया हुआ था? रेलवे लाइन को बनाया हुआ था और इस वजह से क्या हुआ कि हड़प्पा के ऊपर लंबे समय तक लोगों का जो आना-जाना था वो बना हुआ था और इस वजह से जब यहां पर अच्छी-अच्छी ईंटें दिखी तो लोग जो थे वो चुरा-चुरा कर इसको अपने घरों में ले गए। लेकिन वहीं पर अगर हम बात करें किसकी? मोहनजोदाड़ो की। तो भैया इसका तो नाम ही इतना डरावना है कि कोई भूल के भी वहां जाना पसंद नहीं करेगा। इसका नाम है मोहनजोदाड़ो। अगर हिंदी से इसका हिंदी में मैं ट्रांसलेशन करूं तो इसको बोला जाता है मृतकों का टीला या फिर द माउंट ऑफ ब्यूरियल्स। ठीक है? मतलब कि क्या हुआ कि भैया एक ऐसी जगह जहां से कंकाल ही कंकाल मिल रहे हैं। डेड बॉडीज ही डेड बॉडीज मिल रही हैं। और जिसकी वजह से जो लोग थे वो बहुत ही ज्यादा टेरिफाइड थे मोहनजोदड़ो को लेकर। अब इस चीज से क्या हुआ भाई? इस चीज से ये फायदा हुआ कि मोहनजोदड़ो में जितने भी कंस्ट्रक्शंस करे हुए थे इंडस वैली सिविलाइजेशन के टाइम वो सारे के सारे प्रिजर्व्ड रह गए। और हड़प्पा जहां पर लोगों का आना-जाना चल रहा था वहां के जितने भी स्ट्रक्चर्स थे वो सारे के सारे डिमोलिश्ड हो गए। ठीक? तो वही बात जो है वो यहां पर बताई जा रही है। सो एज अर्ली एज 1875 एलेक्जेंडर कनिंघम कौन है भैया ये महाशय? ये हैं द फर्स्ट डायरेक्टर जनरल ऑफ द आर्कलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया। कि इंडिया में जब आर्कलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया बनाया गया जिसकी मदद से इंडिया में कई सारे एक्सकवेशंस करे गए। उसके पहले डायरेक्टर जनरल जो थे वो ये महाशय थे। और इसी वजह से इन्हें क्या कहा जाता है? ही वाज़ ऑफन कॉल्ड एज दी फादर ऑफ इंडियन आर्कियोलॉजी। ठीक? अब इन्होंने क्या बताया हुआ है? अब ये बता रहे हैं कि हड़प्पा से इतनी ज्यादा ईंटें चुरा कर ले गए हैं लोग जिसकी वजह से यहां पर अगर मुल्तान से ले कराची तक एक रेलवे लाइन डाली जाए 100 माइल्स की तो उसमें उतनी ईंटों का यूज़ यहां पर किया जा सकता है। ठीक है? अब मतलब बताने या कहने की बात ये है कि भाई लोग जो है ना वो यहां से बहुत लार्ज अमाउंट में जो ईंट हैं ब्रिक्स जो हैं उसको चुरा कर ले गए हैं। और जिसकी वजह से क्या हो रहा है? जिसकी वजह से हम हड़प्पा के ऊपर कोई भी एक मेजर एक्सकवेशन यहां पर नहीं हुआ और कोई भी मेजर फाइंडिंग्स यहां पर नहीं मिली। ठीक है? तो आ रही है ब्रिक कीेंस समझ में? अभी बीड्स की भी आएगी और बोनस की भी आएगी। ठीक है? तो चलो आ जाओ। और जिसकी वजह से क्या फायदा हुआ कि मोहनजोदड़ो क्योंकि वहां पर लोगों का ज्यादा आना-जाना नहीं था। इसलिए दिस साइड वाज़ फार बेटर प्रिजर्व। ठीक है? अब मोहनजोदड़ो क्योंकि फार बेटर प्रिजर्व्ड है। तो जब यहां पर 1921 में एक्सकवेशंस हो रहे हैं सॉरी 1922 में जब यहां पर एक्सकवेशंस हो रहे हैं तो यहां पर ये देखा गया कि एक पूरा के पूरा शहर जो है वो मिल रहा है। सो यहां पे मोहनजोदड़ो को अगर हम देखें तो एक कंप्लीट एक प्लांट अर्बन सेंटर के जैसे मोहनजोदड़ो से हमें यहां पर चीजें मिली हुई हैं। तो बात करते हैं हम मोहनजोदड़ो की। ठीक है? तो मोहनजोदड़ो की अगर हम बात करें तो यहां की जो सिटी थी वो एक तरीके से दो पार्ट्स में डिवाइडेड होती थी। क्यों? क्योंकि ये कहीं ना कहीं हमें यह बता रहा है कि भाई समाज जो था उसमें कुछ लोग जो थे वो एक अपर पोजीशन पे थे और बाकी के जो लोग थे वो एक लोअर पोजीशन पे थे। और ये सिटी के कंस्ट्रक्शन से हमें काफी अच्छे तरीके से क्लियर हो रहा है। क्यों? क्योंकि भाई यहां पर मोहनजोदड़ो को अगर मैं आपको सिटी को बताऊं तो इस तरीके से आप देख सकते हैं कि एक पोर्शन ऑफ दिस जो सिटी है वो इस तरीके से एक प्लेटफार्म के ऊपर बना हुआ है और दूसरा जो है वो एक लोअर टाउन के तरीके से एक नीचे मतलब प्लेटफार्म तो है लेकिन आप बोल सकते हो कि कम हाइट के प्लेटफार्म पर ये जो चीज है वो बनी हुई है। ठीक है? तो चलो भैया अब बात कर लेते हैं इस चीज की। तो यहां पर सिटी जो है वो डिवाइडेड है दो पार्ट में। जो अपर पार्ट है उसको कहा जा रहा है सिटडल और जो लोअर पार्ट है उसको कहा जा रहा है लोअर टाउन। ठीक है? अब सिटैडल जो है वो स्मॉलर है लेकिन उसके बाद भी आप एक तरीके से बोल लीजिए कि एक हायर प्लेटफार्म पर बना है जो कहीं ना कहीं एक अथॉरिटी को सिंबलाइज कर रहा है वहां पर रहने वाले लोगों को। ठीक है? उसके बाद अगर हम बात करें लोअर टाउन की तो लोअर टाउन जो है वो एक लार्जर है बट लोअर एरिया पर है। ठीक है? जो क्या बता रहा है कि भाई समाज में क्योंकि कुछ ही लोग अपर पोजीशन को होल्ड कर सकते हैं इसलिए उनको ऊंची और कम जगह रहने की जरूरत है। लेकिन वहीं पर क्योंकि अगर आप बात करें कि जो कॉमन मास है उसको काफी सारे लोग रहेंगे तो उनको एक लोअर प्लेटफार्म के ऊपर एक बड़े एरिया में उनको वहां पर रहना या बसाया जाएगा। ठीक? अब जो सिटडल है ओज इट हाइड टू द फैक्ट दैट बिल्डिंग्स वर कंस्ट्रक्टेड ऑन अ मड ब्रिक प्लेटफार्म। ठीक है? कि भाई सिटडल ऊंचा क्यों है? ऊंचा इसलिए है क्योंकि यहां पर जितनी भी बिल्डिंग्स बनी हुई हैं वो एक मड प्लेटफार्म के ऊपर बनाई गई हैं। और वहीं पर अगर हम किसकी बात करें लोअर टाउन की तो लोअर टाउन भी सिटी में आप एक बोल लीजिए कि प्लेटफार्म तो है लेकिन छोटा प्लेटफार्म है। ठीक है? तो उसके साथ-साथ ये जो पूरा अगर आप पूरे टाउन की बात करें तो ये हर टाउन जो है उसकी अपनी-अपनी एक तरीके से आप बोल लीजिए कि बाउंड्री होगी। ठीक है? तो जो सिटाडल है उसके पास अपनी खुद की बाउंड्री होगी। जो लोअर टाउन है उसके पास अपनी खुद की बाउंड्री होगी और साथ ही साथ पूरा शहर जो होगा उसकी भी अपनी पूरी बाउंड्री होगी। इस इमेज में आपको बहुत अच्छे से क्लियर होगी ये बात। ठीक है? देखो यहां पर अगर मैं आपको बताऊं तो ये देखिए ये जो लोअर टाउन है इसकी अपनी खुद की इस तरीके से बाउंड्री है। ठीक है? उसके बाद यहां पे जो अपर टाउन है उसके पास अपनी खुद की बाउंड्री है और जो शहर है उसकी भी कंप्लीट तरीके से एक पूरी बाउंड्री है जो कहीं ना कहीं बता रहा है कि सिटी जो है उसको प्रोटेक्ट करने के लिए उसको चारों तरफ से फर्टिफाइड किया जाएगा। ठीक है? अब ये फर्टिफिकेशन आप एक तरीके से बोल सकते हो इनवेडर्स के तरीके से भी करे जा रहे हैं। या फिर आप बोल लीजिए कि कोई नेचुरल क्लैमिटी जैसे कि फ्लड वगैरह ना आ जाए। है ना? जो एक मेजर कॉज था हड़प्पन सिविलाइजेशन के डेलाइन का उससे भी अपने आप को कहीं ना कहीं प्रोटेक्ट करने के लिए इस तरीके से फर्टिफिकेशन जो है वो यहां पर किए जाते थे। ठीक है? चलो भैया अब बात करते हैं अब आगे इसमें। सो इट वाज़ वर्ल्ड। सिटडल की अगर हम बात करें। सो इट वाज़ वल्ड। अब वर्ल्ड क्यों किया जा रहा है? क्यों वहां पर फर्टिफिकेशन दिखाया जा रहा है? फर्टिफिकेशन इसलिए भी कहीं ना कहीं दिखाया जा रहा है ताकि एक सेग्रगेशन किया जा सके। एक सेपरेशन किया जा सके बिटवीन द अप्पर क्लास पीपल एंड द लोअर क्लास पीपल। ठीक है? सो इट वाज़ वॉल्वड फॉर फिजिकली सेपरेशन ऑफ दी लोअर क्लास एंड दी अपर क्लास। ठीक है? नाउ सेवरल बिल्डिंग्स वर बिल्ड ऑन द प्लेटफार्म व्हिच सर्व्स एट दी फाउंडेशंस। ठीक है? अगर हम लोअर टाउन की बात करें तो वहां पर भी कई सारी बिल्डिंग्स जो हैं वो लोअर टाउन के एक प्लेटफार्म पर बनी होंगी जो अलग-अलग पर्पस के लिए यहां पर यूज करी जाती हैं। ठीक है? चलो भैया अब ये जो पूरी कहानी है इसको हम ये तो एक बेसिक इंट्रोडक्शन था जहां पर उन्होंने सिटाडल और लोअर टाउन के बारे में हमें बताया। अब हम डिटेल में पढ़ेंगे। एक तरफ सिटडल को पढ़ेंगे और एक तरफ लोअर टाउन को पढ़ते हैं। ठीक है? चलो आ जाओ। तो ये जो हमारी इमेज है ये हमारे सिटाडल और लोअर टाउन के कांसेप्ट को और ज्यादा अच्छे तरीके से कहीं ना कहीं बता रही है। ठीक है? तो ये पिक्चर तो हमें एक तरीके से एक विजुअलाइजेशन दे रही है। वहीं पर अगर हम एनसीईआरटी की बात करें तो वहां पर भी एक सेपरेशन दिखाया जा रहा है बिटवीन द सिटैडल एंड द लोअर टाउन। सिटाडल की अगर हम बात करेंगे तो वहां पर कई सारे प्रोमिनेंट इंस्टीटशंस होंगे। ठीक है? जो एक एक तरीके से आप बोल सकते हो कि जो अलग-अलग पर्पस के लिए यूज करे जाएंगे और वहीं पर अगर हम लोअर टाउन की बात करें तो वो जनरली यूज किया जाता है कॉमन मास के लिए जहां पर मार्केट्स होंगे। कोई पब्लिक अफेयर के लिए कोई मीटिंग हो सकती है। उन सब मतलब मीटिंग हॉल्स हो गए। उन सब चीजों के लिए यहां पर लोअर टाउन का यूज किया जाएगा। ठीक है? चलिए अब बात करते हैं कि इतने बड़े शहर को बनाने के लिए लेबर की कितनी जरूरत थी? क्योंकि इतनी ज्यादा टेक्नोलॉजी वगैरह तो थी नहीं। है ना? कि भैया फटाफट से बिल्डिंग्स का कंस्ट्रक्शन हो रहा है। मशीन वगैरह लगा ली और इतने बड़े शहर को रातोंरात बना लिया। जब इन शहरों का कंस्ट्रक्शन हो रहा है तो उनको बनाने के लिए एक लार्ज क्वांटिटी में बहुत सारे नंबर्स में लेबर्स की जरूरत पड़ रही थी। तो उसी चीज की यहां पर बात हो रही है। द मोबिलाइजेशन ऑफ लेबर। सो इट हैज़ बीन कैलकुलेटेड दैट इफ वन लेबर मूव्ड रफली वन अ क्यूबिक मीटर अर्थ डेली। ठीक है? मतलब कि अगर एक लेबर जो है वो एक क्यूबिक मीटर अर्थ को अगर वहां पर काम कर रहा है तो उस पूरे काम को करने के लिए क्या हो रहा है भैया? 4 मिलियन पीपल मतलब कि 40 लाख लोग जो हैं वो यहां पर यहां पर रिक्वायर्ड हैं पर पर्सन पर डे। ठीक है? कि एक दिन का काम मतलब एक दिन में इतना काम होता था वहां पर इतने ज्यादा कंस्ट्रक्शंस करे जा रहे थे कि उस पूरे काम को कंप्लीट करने के लिए 40 लाख जो है वो 40 लाख लेबर जो हैं वो हर दिन जो है वो यहां पर रिक्वायर्ड हैं और इस तरीके से पूरे शहर में जो लोग हैं वो दिन रात काम करते रहते थे। ठीक है? और कुछ लोग जो है वो खुशी-खुशी में क्योंकि लेबर है भैया बहुत सारा काम करना है और जब इस तरीके से मतलब कुछ अपने आप को मालिक को खुश करने के लिए या ठेकेदार की कहीं अगर बोल लो कि बेटी आ गई तो इंप्रेस करने के लिए एक साथ ज्यादा से ज्यादा काम भी कर लिया करते थे। ठीक है? तो यहां पर बताने की कोशिश करी गई है कि इतने बड़े शहर को कंस्ट्रक्ट कराने के लिए लार्ज नंबर में लेबरस की जरूरत थी और उनको कंट्रोल करने के लिए भी एक अपर क्लास एक अपर अथॉरिटी जो थी वो इन शहरों में रहा करती थी। ठीक है चलो। चलो अब आगे बात करते हैं इन शहरों के कंस्ट्रक्शन के बारे में कि यहां पर किस तरीके से कंस्ट्रक्शन हुआ करता था। ठीक? तो वंस द प्लेटफार्म वर इन प्लेस कि सबसे पहले क्या बनाया जाएगा कि जब इन शहरों पर कोई भी कंस्ट्रक्शन होता था तो सबसे पहले वहां पर इस तरीके से प्लेटफार्म बनाएंगे और उस प्लेटफार्म के ऊपर बाकी के जितने भी बिल्डिंग्स बनी है फॉर एग्जांपल एडमिनिस्ट्रेशन के लिए उन्हें एक एडमिनिस्ट्रेशन हॉल चाहिए। एक बड़ा सा ऑफिस चाहिए। एक लाइब्रेरी चाहिए। ठीक है? उसके साथ आप बोल लीजिए कि लेजिसलेटिव हाउस चाहिए। उसके साथ अगर आप और बोल लीजिए कि भाई टैक्सेशन के लिए एक अलग से बिल्डिंग चाहिए। तो इस तरीके से क्या बनेगा? सबसे पहले एक बड़ा सा प्लेटफार्म बनेगा और फिर उस प्लेटफार्म के ऊपर हर एक इंस्टीट्यूशन जिसकी भी वहां पर जरूरत है उसकी एक स्पेसिफिक प्लेस डिसाइड होगी और फिर वहां पर कंस्ट्रक्शन किया जाएगा। तो कहीं ना कहीं हमें ये चीज पता लग रही है कि जो इंडस वैली सिविलाइजेशन है वहां पर कोई भी चीज एकदम से नहीं करी जा रही है। पहले हर चीज को करने से पहले हर शहर को बनाने से पहले एक प्रॉपर प्लानिंग करी जा रही है और फिर उस प्लानिंग को यूज़ करा जा रहा है। इंप्लीमेंट करा जा रहा है और बड़े-बड़े शहरों का निर्माण या कंस्ट्रक्शन किया जा रहा है। सो वंस द प्लेटफार्म वर इन प्लेस ऑल बिल्डिंग एक्टिविटीज़ विद इन द सिटी वर रिस्ट्रिक्टेड टू द फिक्स्ड एरिया ऑन द प्लेटफार्म। है ना? जैसे हम लोगों के साथ भी होता है कि भाई जब अगर फॉर एग्जांपल हमें घर बनाना है तो घर बनाने के लिए जब हम प्लॉट खरीदेंगे तो उस प्लॉट का जो एरिया है वो हमारे पास डेफिनेट है और उसी डेफिनेट एरिया में अब हमें हमारा पूरा घर बनाना है। तो जो एक प्लांट स्ट्रक्चर बनाया जाएगा कि आप जो पहले उस जो आपका प्लॉट है उसको एरिया मेजर करोगे। फिर इंजीनियर के पास जाओगे। फिर उसका जो मैप है वो तैयार करोगे। तो सारी चीजें क्या हो रही है? एक प्रोसेस के साथ हो रही हैं। जो क्या बता रहा है अर्बनाइजेशन को? कि जिस तरीके से पहले एग्रीकल्चरल सेटलमेंट्स कहीं पर भी बना लिए जाते थे बिना किसी प्लानिंग कर। अब जो है अर्बनाइजेशन में जो प्लानिंग पहले हो रही है और फिर बाद में क्या हो रहा है? कंस्ट्रक्शन हो रहा है। अब दूसरी चीज कि भाई ये जो कंस्ट्रक्शन हो रहा है इसमें मटेरियल किस तरीके का यूज़ हो रहा है। मतलब कि ब्रिक के बारे में यहां पर बताया जा रहा है। तो यहां पर हड़प्पन सिविलाइजेशन में जो ब्रिक्स यूज़ हो रही हैं, दीज़ आर सनराइड और बेक्ड ब्रिक्स। ठीक है? सनराइड बेड कौन सी हो गई बेटा? कि उन मिटियों को एक तरीके से आप बोल लीजिए एक पर्टिकुलर मोल्ड में उन्होंने डाला और उसके बाद धूप में रख दिया उसको सुखाने के लिए और जो दूसरे तरीके की ईंटें थी वो एक तरीके से आप बोल लीजिए कि पहले उसको सुखाया जाएगा उसको एक मोल्ड में डाला जाएगा फिर उसको सुखाया जाएगा और उसके बाद जो भट्टे होंगे जो किल होंगी उनमें इनको क्या किया जाता था बेक किया जाएगा जिसकी वजह से अब जो ईंटें हैं वो और ज्यादा मजबूत हो जाएंगी। ठीक है? अब ये जो ईंटें हैं ऐसा नहीं कि कोई भी किसी भी रेश्यो का है। जितनी भी ईंटें यहां से मिली वो एक स्टैंडर्डाइज्ड रेश्यो को फॉलो कर रही हैं। जो कहीं ना कहीं क्या बता रहा है? एक यूनिफॉर्मिटी को। ठीक है? तो ये यूनिफॉर्मिटी क्या है कि भाई जितनी भी ईंटें यहां पर बनी जा रही हैं वो एक सेम रेश्यो को फॉलो कर रही हैं। व्हिच इज दी 4:2 1। ठीक है? तो ये भी बता रहा है कि हड़प्पन सिविलाइजेशन में है वो यूनिफॉर्मिटी सिर्फ शहर के कंस्ट्रक्शन में नहीं है बल्कि उसके कंस्ट्रक्शन मटेरियल में भी है। एंड यूज्ड एट ऑल हड़प्पन सेटलमेंट्स। ठीक है? अब ये चीज भी पता चल रही है कि भाई ऐसा नहीं कि सिर्फ एक शहर के लिए जो रेश्यो है वो अलग है और दूसरे शहर के लिए जो रेश्यो होगा वो अलग होगा। जितने भी शहर हैं उन सभी शहरों में जो ईंटें यूज़ हो रही हैं वो सारी की सारी एक ही रेश्यो की यूज़ हो रही है। ठीक है? तो भले आप मोहनजोदड़ो की ईंट को एक तरीके से आप मेजर कर लीजिए या हड़प्पा की ईंट को मेजर कर लीजिए या धौलावीरा की ईंट को मेजर कर लीजिए। सारी की सारी जो सेटलमेंट्स थी उनमें एक ही तरीके के जो रेश्यो है उसकी ईंट मिल रही है। अब ये हमें कहीं ना कहीं क्या इंडिकेट कर रहा है कि भाई कहीं ऐसा तो नहीं कि ये जो पूरा सिविलाइजेशन हमें मिला हुआ है। ये कोई एक सिंगल रूलर जो था वो रूल कर रहा था और उसी के जो लॉस थे उसी की जो चीजें थी वो सारे लोग यहां पर इंप्लीमेंट कर रहे हैं। ठीक है? तो इस तरीके से जब हम आगे इस चैप्टर को पढ़ेंगे तो वहां पर एक पॉलिटिकल अथॉरिटी का क्वेश्चन भी हमारे सामने आएगा। ठीक है? चलिए आगे बात करते हैं अब यहां से। तो चलिए अब जब प्लानिंग की बात हो ही रही है तो प्लानिंग का एक और एविडेंस हमें मिल रहा है हड़प्पा के लोअर टाउन से। लोअर टाउन से किस तरीके से? कि भाई जब इस तरीके से लोअर टाउन को शहर में बसाया गया था तो उसके भी पहले पूरी प्रॉपर प्लानिंग करी गई थी। ठीक? तो यहां पर हमें देखने को मिल रहा है कि देयर वाज अ प्लान ड्रेनेज सिस्टम। ठीक है? मतलब ऐसे नहीं जैसे आज के जमाने में हो रहा है कि पहले ठेकेदारों ने सड़क बनवा दी और फिर भूले भटके याद आ रहा है कि अरे इसमें पाइप लाइन तो बिछाई नहीं। तो फिर उसके बाद कि अरे मालिक गलती हो गई है तो फिर उसके बाद पूरी रोड जो है उसको खोदा और फिर उसके बाद पाइप लाइन डाल रहे हैं। ठीक है? तो ऐसा जो है वो हड़प्पा में मोहनजोदड़ो में नहीं हो रहा है। पहले जो है वो पूरी प्रॉपर तरीके से प्लानिंग हो रही है और फिर उस प्लानिंग के यूटिलाइजेशन के लिए इंप्लीमेंटेशन के लिए काम किया जा रहा है। सो इन लोअर टाउनंस जो रोड्स और जो स्ट्रीट्स हैं ये एक एप्रोक्सीमेट एक ग्रिड पैटर्न पे बनाई जा रही है। ग्रिड पैटर्न मतलब कि क्या बेटा? ग्रिड पैटर्न मतलब कि सबसे पहले एक मेन रोड होगी। और उस मेन रोड को जॉइ करने के लिए आप बोल सकते हो कि कई सारी स्ट्रीट्स जो हैं वो उनको इस तरीके से जॉइ करेंगी। ठीक है? अब ये जो स्ट्रीट्स जो एक मेन रोड को जॉइ कर रही हैं वो सारी की सारी एक राइट एंगल पर एक दूसरे को कट कर रही हैं। ठीक? तो जिसकी वजह से हमें क्या दिख रहा है कि भाई यहां पर जो हड़प्पा में या मोहनजोड़ा में जो सेटलमेंट्स हैं वो एक प्रॉपर प्लानिंग के थ्रू बनाए गए हैं। अब ये जो रोड हैं इन रोड के साइड में नालियां भी बनाई जा रही हैं। तो सबसे पहले जो यहां पर ड्रेनेज है या एक तरीके से आप बोल लीजिए कि जो सीवेज वाला सिस्टम है सबसे पहले वो बनाया जाएगा। उसके साइड में रोड बनाई जाएगी ताकि जब यहां पर लोग बसने शुरू हो जाए तो वहां पर किस तरीके से जो एक तरीके से सीवेज का प्रॉब्लम जो हम प्रेजेंट टाइम में देखते हैं वो उन्हें ना फेस करना पड़े। सो लोअर टाउन रोड्स एंड स्ट्रीट्स वर लेड आउट ऑन एप्रोक्समेट ग्रिड पैटर्न इंटरसेक्टिंग एट अ राइट एंगल। ठीक है? कि जितनी भी रोड होंगी वो सारी की सारी मेन रोड को राइट एंगल पर कहीं ना कहीं इंटरसेक्ट करेंगी। देन इट सीम्स दैट स्ट्रीट्स विद ड्रेंस वर लेड आउट फर्स्ट। ठीक है? सबसे पहले ये देखा गया कि जो ड्रेंस हैं उनको पहले बनाया गया बाद में वहां पे सड़कें बनाई गई एंड देन हाउसेस वर बिल्ट अलोंग देम। ठीक है? कि सबसे पहले जो नालियां और सड़कें बनाई गई और फिर जो जगह बच रही है फिर वहां पर क्या होंगे? फिर इन सेटलमेंट्स के आसपास यहां पर आप एक तरीके से बोल लीजिए यहां पर घर बनाए जाएंगे। जैसे कि प्रेजेंट डे पे आप लोगों ने देखा होगा ना कि जब कॉलोनी बनती है कहीं पर भी तो वो भी इसी तरीके से बनेगी कि सबसे पहले उस कॉलोनी के लिए जो जगह होगी उसमें वहां पर रोड और नालियां बनाई जाएंगी और फिर वहां से जो प्लॉट होते हैं वह लोगों को बिकने शुरू होंगे। तो वैसे ही जो पूरी टेक्निक है वह सारी की सारी हड़प्पा में ऑलरेडी उस समय पर यूज़ हो रही थी। देन, डोमेस्टिक वेस्ट वॉटर हैड टू फ्लो इंटू द स्ट्रीट ड्रेंस। दस एव्री हाउस नीड टु हैव एट लीस्ट वन वॉल अलोंग द स्ट्रीट। ठीक है? कि अब ये जो घर यहां पर बने हैं ये जो इस तरीके से आप घर देख रहे हैं हर घर जो है वो एक स्ट्रीट और एक नाली को कहीं ना कहीं अटैच करेगा। तो हर घर की जो एक वॉल होगी वो उन नालियों से अटैच रहेगी ताकि क्या होगा कि भाई इन घरों से निकलने वाला जो वेस्ट है वो इन नालियों को जॉइन कर सके और जब ये नालियां बनेंगी तो आगे जाके ये नालियां जो होंगी ये एक मेन ड्रेन को कहीं ना कहीं कनेक्ट करेंगी जिसकी मदद से जो पूरा जो सीवेज है वो एक तरीके से मेन चैनल पर चला जाएगा। ठीक है? तो कहीं ना कहीं हमें ये पता चल रहा है कि भाई सारी चीजें जो हैं वो एक प्रॉपर प्लानिंग के बाद हड़प्पा में एग्जीक्यूट हो रही हैं। ठीक है? चलिए अब यहां पर बात करते हैं एक सोर्स की जिसके थ्रू हमें बताया जा रहा है कि हड़प्पा की जो ड्रेंस थी वो कितनी ज्यादा एडवांस हैं। सो द मोस्ट एंशिएंट सिस्टम येट डिस्कवर अबाउट द ड्रेंस जो मैके हैं जो अर्नेस्ट मैके हैं वो हमें कोई चीज बता रहे हैं ड्रेंस के बारे में। तो चलिए जानते हैं कि क्या वो हमें बताने की कोशिश कर रहे हैं। सो मेक नोटेड इट इज सर्टेनली द मोस्ट कंप्लीट एंशिएंट सिस्टम एज डिस्कवर्ड। ठीक है? कि अब तक सबसे ज्यादा कंप्लीट एक पूरी की पूरी जो प्लांट सिटी थी वो हमें पहली बार मिली हुई है कहां से? मोहनजोदड़ो से। यहां पर एव्री हाउस जो है हर एक घर जो है दैट इज कनेक्टेड टू द स्ट्रीट ड्रेंस। ठीक है? कि हर घर जो होगा वहां से एक नाली जो होगी वो कनेक्टेड रहेगी। एंड द मेन चैनल्स वर मेड ऑफ ब्रिक सेट इन मोटर एंड वर कवर्ड विद लूज ब्रिक। ठीक है? कि जो नाली है उस नाली को भी ऐसा नहीं कि बना दिया और खुला छोड़ दिया। कच्ची नालियां नहीं पक्के तरीके से उन नालियों को बनाया जाएगा। वहां पर एक पूरे तरीके से ब्रिक से बनाया जाएगा ताकि अगर वो ओवरफ्लो होता है तो उसका जो पानी है वो बाहर ना निकले। तो उसके प्रॉपर कंस्ट्रक्शन के लिए उनको ईंटों से बनाया जाएगा। उसके बाद उसको सेट करने के लिए वहां पर मोटार का यूज किया जाएगा और फिर ये जो लोकल नालियां हैं या एक तरीके से बोल लो जो कि हाउस से कनेक्टेड जो नालियां हैं ये आगे जाकर कनेक्ट होंगी एक मेन चैनल से एक मेन सीवेज से। अब ये जो घरों के आसपास बनी हुई नालियां हैं इनके बारे में भी वो हमें आगे बता रहे हैं कि भाई इनको ना कवर किया जाता था। ऐसे नहीं कि नालियों को खुला छोड़ दिया। इन नालियों को भी कवर करने के लिए लूज ब्रिक का यहां पर मतलब कि ईंटों से इन्हें ढक दिया जाता था। ठीक है? और जब भी इन्हें साफ करना होगा तो उसके लिए इनको हटा दिया जाएगा। देन इन सम केसेस लाइम स्टोन वाज़ यूज्ड फॉर द कवर्स। कि बहुत सी जगहों पर तो ईंटों से ढक दिया जाता था और बहुत सी जगह ऐसे भी थी जहां पर लाइम स्टोन जो था उससे भी इनको कवर किया जाएगा। हाउस ड्रेंस वर फर्स्ट एंप्टीड इंटू सम और सेस्पिट इंटू व्हिच सॉलिड मेटल्स सेट। ठीक है? अब उसके बाद क्या बताया जा रहा है कि भाई ये जो लोकल ड्रेंस हैं इनको ऐसा नहीं कि सीधे-सीधे मेन चैनल से कनेक्ट कर रहे हैं। उसके पहले भी ये जो चीजें हैं उनको उसका जो पानी है उसको एक संप में गिराया जाएगा ताकि वहां पे जितना भी सॉलिड मटेरियल है वो वहां पर सेटल हो जाए और जो पानी पानी है जो लिक्विड है वो वहां पर आगे बढ़ जाए जैसे हमारे प्रेजेंट टाइम पे हमारे घरों में होता है। देन व्हाइल वेस्ट वाटर फ्लोड आउट इन द सीड ड्रेंस एव्री लॉन्ग ड्रेनेज चैनल। ठीक है? अब यहां पर एव्री जो लॉन्ग ड्रेनेज चैनल है वो हमें ये बता रहा है वर प्रोवाइडेड एट इंटरवल इंटू द संप फॉर क्लीनिंग। ठीक है? कि अब ये जो लंबी-लंबी नालियां यहां पर बनाई गई हैं इसमें भी ये जो संप है ना इनको भी समय-समय पर क्लीन किया जाता था। नाउ इट इज़ अ वंडर। लेकिन उसके बाद एक चौंकाने वाली बात है कि भाई जब ये इतना अच्छे तरीके से क्लीनिंग और सैनिटेशन के बारे में सोच रहे हैं तो यहां आर्कियोलॉजिस्ट को एक मेजर फाइंडिंग हुई। वो क्या कि भाई ये जो नालियां थी इनके साइड में दे दे फाउंड द लिटिल हीप ऑफ मटेरियल मोस्टली सैंड हैव फ्रीक्वेंटली बीन फाउंड लंग अलोंग द ड्रेनेज चैनल व्हिच शोज़ दैट द डेबरीज वर नॉट ऑलवेज कार्टेड व्हेन दे वर ड्रेंस वर क्लियर। ठीक है? जो हमें ये बताने की कोशिश कर रही है कि ये जो नालियां हैं इन नालियों के साइड में जब इन सम को क्लियर किया जाता था तो उससे जो सैंड या जो डेबरी थी उसको नालियों के साइड में ही रख दिया जाएगा। और उसको रेगुलरली आप एक तरीके से बोल लीजिए क्योंकि वहां से हटाया नहीं जा रहा है, क्लियर नहीं किया जा रहा है। इसकी वजह से वो ये बता रहा है कि नालियों को तो साफ किया जा रहा है लेकिन उससे निकली जो डेबरी है उसको काट के थ्रू एक मेन जगह पर जहां पर उसे डंप करना था वो यहां पर नहीं ले जाया जा रहा है। तो ये जो पूरा इंस्टांस है ये जो पूरी कहानी है ये हमें अर्नेस्ट मैके बता रहे हैं। इनकी बुक जिसका नाम है द अर्ली इंडस वैली सिविलाइजेशन ऑफ़ 1948। ठीक है? तो यहां पर आगे कई सारे आप क्वेश्चंस भी देखेंगे जहां पर आपको ये लगेगा कि भाई हम आर्कियोलॉजिस्ट की बात कर रहे हैं और उन्होंने उस समय पर ये जो मेजर फाइंडिंग्स अपनी बुक में लिखी हुई है उसके बारे में भी हमें याद रखना है। तो वो राइटर और उसकी जो बुक है उसको भी हमें आगे क्या करना है? याद रखना है। नाउ ड्रेनेज सिस्टम के बारे में एक और चीज बता रही है कि जो ड्रेनेज सिस्टम है दिस वाज़ नॉट यूनिक। कि ऐसा नहीं है कि जो ड्रेनेज सिस्टम है वो सिर्फ शहरों में मिल रहा है। दिस वाज़ आल्सो फाउंड इन द स्मॉलर सेटलमेंट्स एज वेल। ठीक है? कि शहरों के साथ-साथ कई सारे ऐसे स्मॉलर सेटलमेंट्स हुए जैसे कि क्राफ्ट सेंटर्स हुए, रीजनल सेंटर्स हुए वहां पर भी ड्रेनेज मिल रहा है। तो यहां पर बात हो रही है लोथल की जहां पर घर तो भले ही किससे बने हुए हैं? मड ब्रिक्स से मतलब कि कच्ची ईंटों से बने हुए हैं। लेकिन उसके बाद भी जो नालियां हैं वो एक तरीके से बर्न ब्रिक्स से बनी हुई है। अब ये भी कहीं ना कहीं आपको ये नहीं लग रहा कि एक तरीके से एक कॉमन पॉलिटिकल अथॉरिटी को इंडिकेट कर रहा है कि भाई जो ड्रेनेज का काम है वो किसी एक पर्टिकुलर पर्सन के पास जो एक कॉमन अथॉरिटी है यूनियन में सेंटर में उसने लेके रखी हुई है। लेकिन जो लोकल लेवल के कंस्ट्रक्शन है वो वहीं पर रह रहे सरपंच या पंचायतों में जैसा होता है उनके थ्रू किया जाता होगा। तो कहीं ना कहीं जो हमें इंडस वैली सिविलाइजेशन है वो इंडिकेट कर रहा है एक कॉमन पॉलिटिकल अथॉरिटी की तरफ। ठीक है? चलिए अब आगे देखते हैं। तो चलिए अब बात करते हैं हड़प्पा सिविलाइजेशन के जो लोअर टाउनंस थे उनमें घर किस तरीके से बने हुए थे? व्हाट वाज़ द डोमेस्टिक आर्किटेक्चर ऑफ दिस सिविलाइजेशन। तो यहां पर बात हो रही है मोहनजोदड़ो के लोअर टाउन के बारे में कि यहां पर जो रेजिडेंशियल बिल्डिंग्स हैं वो किस तरीके से हुआ करती थी। तो ये जो इमेज है ये हमें बहुत क्लियरली बता रही है कि यहां पर कुछ घर जो थे वो इतने बड़े-बड़े मिले हुए हैं लाइक दैट डबल स्टोरीड हाउसेस ऑफ द प्रेजेंट टाइम। और ये जितने भी घर हैं ये एक स्ट्रीट को कहीं ना कहीं कनेक्ट कर रहे हैं और नीचे यहां पर इस तरीके से देख सकते हैं कि उस स्ट्रीट के नीचे जो हैं वो ड्रेंस बनी हुई है नालियां बनी हुई है। तो अब अगर हम घर की बात करें तो घर इस तरीके से आप देख सकते है कि सबसे पहले घरों में बीच में एक सेंटर में क्या होता था? एक कोर्टार्ड होता था। एंड दिस कोर्टयार्ड वास दी सेंटर ऑफ ऑल काइंड ऑफ एक्टिविटीज। ठीक है? कि भाई सर्दियां चल रही हैं तो बढ़िया अगर मम्मी को घर में बढ़िया सुखानी है तो वो इस कोर्टयार्ड में करेंगी। बच्चे यहां पर खेलेंगे। ठीक है? कोई भी चीज अगर बिनना है, छानना है, प्रोसेस करनी है कोई भी चीज। तो वो इन आंगनों में बैठकर आराम से करी जाती थी। सो दिस कोर्टयार्ड इज़ बेसिकली द सेंटर ऑफ़ ऑल काइंड ऑफ़ एक्टिविटीज़। और इस कोर्टयार्ड के चारों तरफ अगर आप देखेंगे तो रूम्स जो होंगे वो इस तरीके से यहां पर कंस्ट्रक्शन होंगे। ठीक? नाउ द कोर्टयार्ड वाज़ प्रोबेबबली द सेंटर ऑफ़ एक्टिविटीज़ सच एस द कुकिंग, वीविंग एंड पर्टिकुलरली ड्यूरिंग दी हॉट एंड ड्राई वेदर्स। ठीक है? कि हॉट एंड ड्राई वेदर के समय जितनी भी एक्टिविटीज़ होंगी, वो इन कोटयार्ड्स में ही कराई जाती थी। अब अगर हम बात करें इनकी प्राइवेसी की तो यहां पे जो घर थे उनमें उनके कंस्ट्रक्शन के समय उनकी प्राइवेसी का बहुत अच्छे तरीके से ध्यान दिया जाता था। सबसे पहली बात तो ये कि भाई जो नीचे वाला फ्लोर होता था जो ग्राउंड फ्लोर होगा उस पर कोई भी विंडो नहीं होती थी। जो कहीं ना कहीं नीचे से आने जाने वाले लोगों से घर में रह रहे लोगों की जो लाइफ है उसको एक तरीके से सेपरेट कर रही है। ठीक है? सो देयर वाज़ नो विंडो एंड वॉल्स अलोंग द ग्राउंड लेवल। नो डायरेक्ट व्यूज टुवर्ड्स द इंटीरियर। जो क्या कर रहे हैं? किसी भी बाहर के व्यक्ति को घर में अंदर चल रही चीजों के बारे में कोई भी डायरेक्ट व्यू नहीं प्रोवाइड कर रहा है। साथ ही साथ अगर हम देखें तो जो मेन एंट्रेंस है हाउस का वो एक तरीके से अगर आप बोलेंगे कि अगर मैं इस घर को बताऊं आपको तो यहां पे इसका जो मेन एंट्रेंस है वो आप इस तरीके से इस पिक्चर में और अच्छे से आप देख सकते हैं। इस वाले उसमें देखिए कि यहां पे जो मेन एंट्रेंस है डोर का वो यहां पे एक ब्लॉक्ड व्यू दे रही है कहीं ना कहीं। मतलब कि जब व्यक्ति घर के अंदर घुसेगा तो उसको एकदम से ये नहीं कि पूरे घर में हो रही एक्टिविटीज के बारे में पता चल जाएगा। जैसे ही वो एंटर करेगा तो सामने एक वॉल हो जाएगी और फिर अगर जो घर में रह रहे लोग अगर वो चाहेंगे तो वो उसको अपने घर के साथ अपने अंदर ले जाएंगे और उसके बाद वहां पर हो रही एक्टिविटीज को वो जान सकता है। ठीक? सो बेसिकली यहां पर बताया ये गया है द मेन एंट्रेंस डस नॉट गिव अ डायरेक्ट व्यू ऑफ़ द इंटीरियर और द कोर्ट यारार्ड। ठीक है? मतलब समझ रहे हैं कि कितने सोच परख के सारी चीजें यहां पर बनाई गई हैं कि भाई कोई भी अगर बाहरी व्यक्ति है तो वो घर में हो रही चीजों के बारे में एकदम से ना जान सके। ठीक? अब आगे बात करते हैं। अब जितने भी हाउस थे जितने भी अगर हम घरों की बात करें तो ईच हाउस हैड द इंडिविजुअल बाथरूम। मतलब ऐसा नहीं कि घर तो बना लिए लेकिन घर में सैनिटेशन के लिए बाथरूम की कोई व्यवस्था नहीं है। तो कॉमन जा रहे हैं किसी सुलभ शौचालय को यूज़ करने के लिए। नहीं हर घर जो होगा उसके पास अपना खुद का बाथरूम होगा। इस तरीके से। ठीक है? यहां पे इस इमेज में आप देखिए हर जो घर है उसके पास अपने खुद के बाथरूम है। ठीक है? और ये बाथरूम जो है वो भी पक्की ईंटों से बनाए गए हैं। पक्के तरीके से बनाए गए हैं। ताकि एक तरीके से घर जो है उसमें किसी तरीके का गंदगी जो है वो ना क्रिएट हो। सो यहां पर एक चीज हम लोग देख रहे हैं। ईच इंडिविजुअल बाथरूम हैड पेड्ड विद द ब्रिक्स ड्रेंस कनेक्टेड टू द स्ट्रीट ड्रेंस। ठीक है? कि घरों में जो बाथरूम होंगी पहले तो उनके उनके ऊपर एक पेप्ड फ्लोर होगा और फिर वहां से निकलने वाला जो भी वेस्टेज है उसको एक कॉमन ड्रेन से कहीं ना कहीं कनेक्ट किया जाएगा। नाउ सम हाउसेस हैव रिमेंस ऑफ स्टेयरकेस टू रीच अ सेकंड स्टोरीज ऑफ द सेकंड स्टोरी और दी रूफ। ठीक है? तो यहां पर क्या चीज बताई जा रही है? यहां पर हमें ये बताया जा रहा है कि जितने भी घर हैं उनके पास इस तरीके से सेकंड स्टोरी मतलब कि एक अपर स्टेयरकेस भी है और वो जो अपर स्टेयरकेस है वो यह बता रहा है कि उन घरों में आप एक तरीके से बोल लीजिए कि सेकंड फ्लोर भी हुआ करता था। ठीक? तो अब ये जो सेकंड फ्लोर वाले घर हैं वो हमें ये इंडिकेट कर रहे हैं कि जो समाज है उसमें कई सारे लोग ऐसे भी थे जो काफी अमीर हैं जो सेकंड स्टोरेजड वाले घर बना रहे हैं। और इनकी जो स्टेयरकेस है वो वुडन हुआ करती थी। जिसकी वजह से बहुत अच्छे तरीके से जो रेमिनेंट्स हैं वो इन स्टेयरकेस के हमें फाइंड नहीं हुए हैं। देन मेनी हाउसेस हैड वेल्स। ठीक है? कि जितने भी घर हैं उनमें से कई सारे घरों में हमें इस तरीके से कुएं भी मिले हुए हैं। ठीक है? और ये कुएं क्या बता रहे हैं? ये कुएं ये बता रहे हैं कि जब घरों में आप एक तरीके से बोल लीजिए कि हर जो घर है उसके पास अपना खुद का वाटर सिस्टम होगा। एक तरीके से वाटर स्टोरेज सिस्टम होगा। अब कभी-कभी तो ये कुओं के साथ क्या होगा कि भाई जो बारिश का पानी है वो इन कुओं में इकट्ठा हो जाएगा और फिर ये जो घर वाले लोग हैं वो बढ़िया तरीके से इनको ड्राई सीज़ंस में यूज़ कर सकते हैं। क्यों? क्योंकि हमने क्या देखा कि भैया हमारा जो इंडस वैली सिविलाइजेशन है वो एक तरीके से सेमी एरिड लैंड में है पूरा की पूरा। ठीक है? तो यहां पर पानी की कहीं ना कहीं दिक्कत हुई होगी और उस पानी की प्रॉब्लम को सॉल्व करने के लिए इन्होंने स्टोरेज सिस्टम के ऊपर काफी अच्छे तरीके से एफसाइज किया हुआ था। ठीक? सो ऑफेन इन अ रूम दैट कुड बी रीच फ्रॉम द आउटसाइड एंड परहैप्स यूज्ड बाय द पासर वाइज। ठीक है? अब ऐसा भी नहीं कि भैया घर में कुआं बनाया है तो उस कुएं को घर के इतने अंदर यूज़ कर लिया कि सिर्फ घर वालों के बारे में ही सोच रहे हैं। नहीं उस कुएं को घर के ऐसे वाले रूम में बनाया ताकि यहां से आने जाने वाले जो लोग हैं वो भी इस कुएं को यूज़ कर सके और इसका जो पानी है वो यहां पर पी सकते हैं। ठीक है? तो खुद के यूज़ के लिए तो बनाया ही हुआ है लेकिन साथ-साथ जो आसपास के आने जाने वाले जो लोग हैं वो भी इस कुएं को यूज़ कर सकते हैं। नाउ एस्टिमेटेड वेल्स। ठीक है? अब यहां पर हमें पता चल रहा है कि सिर्फ मोहनजोदड़ो से ही अराउंड 700 वेल्स जो थे वो मिले हुए हैं। जो क्या बता रहा है कि भाई इतना बड़ा शहर है उसकी वाटर की नीड को फुलफिल करने के लिए इन वेल्स का कंस्ट्रक्शन किया गया है लार्ज लेवल पर और जितने भी वेल्स थे उनको भी सीधी सी बात है कि भाई ईंटों से बनाया जाएगा। तो ये कहीं ना कहीं क्या बता रहे हैं कि भाई ये जो पूरा के पूरा जो सिविलाइजेशन है वो ईंटों का लार्ज स्केल पर यूज कर रहा था। ठीक? चलिए आगे बात करते हैं। अब सिटाडल की अगर हम बात करें तो यह जितने भी शहर हुए उन सभी शहरों में सिटाडल जो है वो उसका एक प्रॉमिनेंट फीचर है। लेकिन सिटाडल ऐसा नहीं कि यूनिफॉर्म चल रहा है हर शहर के साथ। कुछ-कुछ शहर ऐसे हुए जहां पर सिटाडल के कंस्ट्रक्शन में हमें कुछ एक्सेप्शनंस देखने को मिलते हैं। तो उनकी ही हम लोग बात कर रहे हैं। व्हाइल मोस्ट हड़प्पन सेटलमेंट्स हैव अ स्मॉल हाई वेस्टर्न पार्ट एंड अ लार्जर लोअर इन द ईस्टर्न सेक्शन जो हम लोग देख कर आए हैं। है ना? कि भाई जो सिटाडल है वो वेस्टर्न तरफ होता था और जो लोअर टाउन है वो ईस्टर्न तरफ होता था। बट देयर आर वेरिएशंस। ठीक है? कि भाई एक्सेप्शनंस हर जगह हैं। तो यहां पर भी हम लोग देख लेते हैं एट साइट्स सच एज धौलावीरा एंड लोथल। ठीक है? कि धौलावीरा और लोथल जो हैं वो कुछ एक ऐसी साइट्स हैं जहां पर हमें सिटडल के कंस्ट्रक्शन में एक तरीके से अगर हम बोलें तो एक्सेप्शन देखने को मिल रहा है। ठीक? द एंटायर सेटलमेंट वाज़ फर्टिफाइड। ठीक है? तो अगर मैं यहां पर आपको बताने की कोशिश करूं तो अगर जो अगर हम बात करें धौलावीरा की तो धौलावीरा में अगर हम बात करें तो जो शहर है वो दो भाग में ना डिवाइड होकर इस तरीके से तीन भाग में डिवाइड होगा। ठीक है? अब जो पहला पार्ट है वो यूज किया जाता था एज अ सिटाडल। ठीक? और जो दूसरा और जो तीसरा पार्ट है ये होता था लोअर टाउन। ठीक? तो यहां पर कहीं ना कहीं ये बताया जा रहा है कि धौलावीरा में जो शहर का कंस्ट्रक्शन है वो एक तरीके से अलग है बाकी शहरों के मुकाबले में। अब अगर हम बात करें लोथल की तो लोथल में ये दिखाया जा रहा है कि पूरा की पूरा जो सेटलमेंट्स है उसको फर्टिफाइड किया जाएगा। एंड सेक्शंस विद इन द साउंड टाउंस वर आल्सो सेपरेटेड बाय वॉल्स। ठीक है? कि पूरा के पूरा जो शहर है उसको फर्टिफाइड किया गया और फिर उसके बीच में जो सेक्शंस हैं उनको वहां पर डिवाइड किया जा रहा है। देन द सिटाडल विद इन लोथल वाज़ नॉट वॉल्ड ऑफ बट वाज़ बिल्ट एट अ हाइट। ठीक है? कि जनरली शहरों में ये देखा गया था कि पूरे शहर का एक बार फर्टिफिकेशन हुआ और फिर उसको आपस में डिवाइड कर लिया। लेकिन अगर हम लोथल की बात करें इस मैप में आप देखिए प्लानिंग में लोथल का क्या दिख रहा है कि भाई पूरे शहर को तो मड ब्रिक से एक तरीके से आप बोल सकते हो कि फर्टिफाइड किया ही हुआ है लेकिन लोअर टाउन और सिटाडल के बीच में कोई सेपरेटेड वॉल नहीं है जो क्या बता रहा है कि भाई लोथल जो है वहां पर इस तरीके का जो सेपरेशन है वो हमें नहीं देखने को मिल रहा है। सिर्फ और सिर्फ जो भी आप बोल लीजिए कि जो भी सिटाडल के ऊपर जो कंस्ट्रक्शन हो रहा है वो इस तरीके से एक प्लेटफार्म के ऊपर हो रहा है और लोअर टाउन जो है वो यहां पर कोई भी सेपरेटेड वॉल से यहां पर हमें देखने को नहीं मिल रही है। तो ये जो एक एक्सेप्शन है जहां पर हम लोग क्या देख रहे हैं कि ढोलावीरा और जो लोथल है उसके सिटाडल्स जो थे वो बाकी टाउनंस के कंपैरिजन में एक तरीके से अलग जो है वो हमें देखने को मिल रहे हैं। ठीक है? चलिए चलिए अब बात करते हैं मोहनजोदड़ो के ऊपर बने हुए सिटाडल की। तो अगर हम इस सिटाडल को देखें तो यहां पर जितनी भी बिल्डिंग्स हैं क्योंकि वो एक सुपीरियर अथॉरिटी के बारे में हमें इंडिकेट कर रही हैं। तो सीधी सी बात है कि ये जो बिल्डिंग्स हैं उनका कॉमन मास या फिर वहां पर रह रहे लोग किसी स्पेशल पर्पस के लिए ही उन्हें यूज करते होंगे। कि फॉर एग्जांपल कि अगर कोई त्यौहार है तो वहां पर जो बड़ा बना हुआ मंदिर है या एक असेंबली हॉल है उसको यूज कर लिया। कोई अगर इंपॉर्टेंट मीटिंग करनी है तो सिटाडल के बने हुए ऊपर उस सुपीरियर अथॉरिटी के जो बिल्डिंग है उसमें जाके उन्होंने डिस्कशन कर लिया। ठीक? तो सिटाडल के ऊपर जितने भी कंस्ट्रक्शन करे जा रहे हैं वो किसी स्पेशल पब्लिक पर्पस के लिए ही यूज़ करे जाते थे। और उसी के अगर हम कंस्ट्रक्शंस की बात करें तो दो ऐसे मेजर कंस्ट्रक्शंस हमें मिल रहे हैं जो कहीं ना कहीं हमें सेटडल कीेंस के बारे में इंडिकेट कर रहे हैं। तो यहां पर जो दो मेजर कंस्ट्रक्शन है उनमें से एक है यहां का वेयर हाउस जिसको ग्रीनरी भी कहा जा रहा है और दूसरा है यहां का ग्रेट बाथ। तो अगर हम वेयर हाउस की बात करें तो वेयर हाउस जो है वो इस तरीके से आप देख सकते हैं। एक बड़ी सी जगह होगी जहां पर अनाज जो है उसका स्टोरेज जो है वो यहां पर किया जा रहा है। ठीक? तो यह जो स्टल सेटल हुए हैं यहां पर एक मासिव स्ट्रक्चर है व्हिच इज द वेयर हाउस ऑफ वि द लोअर ब्रिक प्लेटफॉर्म्स रिमेन व्हाइल द अपर पोर्शन प्रोबेब्ली अ वुड डिकेड लॉन्ग इयर्स एगो। ठीक है? कि भाई यहां पर वेयर हाउस तो बना हुआ था लेकिन उस वेयर हाउस का जो बेस था जो लोअर पोर्शन था क्योंकि वो ब्रिक से बना हुआ है तो वो लंबे समय तक टिका रह गया। लेकिन क्योंकि ऊपर का जो कंस्ट्रक्शन है जो उसकी छत वगैरह थी एक तरीके से आप बोल लीजिए क्योंकि वो वुड से बनी हुई थी इसलिए वो समय के साथ पेरिश हो गई थी। ठीक है? और वैसे ही मैं आपको ये भी चीज बता रही थी कि भाई यहां पर जो सिटडल बना हुआ है उसमें कई सारी इंपॉर्टेंट बिल्डिंग्स हैं। जैसे कि ग्रीनरी हो गई। ठीक? यहां पर हमें ग्रेट बाथ देखने को मिल रहा है। एक असेंबली हॉल देखने को मिल रहा है। फर्टिफिकेशंस देख रहे हैं। कॉलेज एक तरीके से आप बोल लीजिए जहां पर जितने भी वहां पर प्रॉमिनेंट पर्सनालिटीज थी वो बैठ का डिस्कशन किया करती थी। पिलर्ड हॉल हमें यहां पर देखने को मिल रहा है। ठीक है? तो क्या बताया जा रहा है कि भाई जो सिटाडल है वहां पर सबसे ज्यादा जो इंपॉर्टेंट बिल्डिंग्स थी, कंस्ट्रक्शंस थी वो इन्हीं सिटाडल के ऊपर बनाई जाती थी। अब बात करते हैं इस चैप्टर के सबसे इंपॉर्टेंट टॉपिक की व्हिच इज द ग्रेट बाथ। ठीक है? कि भाई ग्रेट बात वाला जो टॉपिक है वो बार-बार फ्रीक्वेंटली आस्क् किया जाता है यहां पर अगर हम देखें हमारे सीबीएसई के क्वेश्चन पेपर में। तो चलिए ग्रेट बात का जो टॉपिक है उसको डिटेल में डिस्कस कर लेते हैं। ग्रेट बात क्या था बेटा? अगर हम बात करें हमारे समाज की तो हम जो हैं वो हमारे यहां पर जो भी रिचुअल्स होते हैं उसमें नहाने को एक स्पेशल एफसाइज दिया जाता है कि भाई स्नान जो है वो बहुत जरूरी है। अब चाहे वो कुंभ का स्नान हो या फिर आप बोल लीजिए कि भाई पूर्णिमा अमावस्या पर जो हमारी पवित्र नदियां होती हैं उनमें स्नान किया जाता था। तो वैसे ही अगर हम बात करें मोहनजोदड़ो की तो वहां पर भी एक टैंक बनाया गया और उस टैंक का यूज किया जाता है स्पेशल पर्पससेस पर होने वाली बाथिंग के लिए। तो उस टैंक का जो कंस्ट्रक्शन है वो किस तरीके से हुआ उसकी हम बात करते हैं। सो दिस वाज़ अ रेक्टेंगुलर टैंक इन अ कोर्टयार्ड मेड बाय ब्रिक्स यूजिंग द मोटर ऑफ जस्टम। ठीक है? मतलब क्या बताया जा रहा है कि इस तरीके से मतलब आप देख रहे हैं कि इस तरीके से एक बड़ा सा कंस्ट्रक्शन होगा। उस कंस्ट्रक्शन में इस तरीके से एक बड़ा सा टैंक बनाया जा रहा है जो जब एक्सकवेशन किया गया तो कुछ इस तरीके से देखने को मिला। तो एक बड़ा सा टैंक है जो ईंटों से बनाया जाएगा और क्योंकि इसका जो बेस है वो कहीं सीपेज ना करे तो इसके लिए पक्की ईंटों के साथ-साथ उसको जॉइ करने के लिए जिप्सम का यूज किया जाता है व्हिच इज यूज्ड फॉर आप एक तरीके से बोलते हैं सीमेंट से रिलेटेड चीजों के लिए जैसे प्रेजेंट टाइम पे हम लोग सीमेंट यूज़ करते हैं तो वैसे ही जिप्सम होता है जिसको एक तरीके से आप बोल सकते हो कि मोटार के फॉर्म में यूज़ किया जाता है। चिपकाने के लिए एक तरीके से यूज़ किया जाता है। नाउ अब यह जो चीज़ है यह जो टैंक है इसमें आने जाने की क्या व्यवस्था है? तो भैया नॉर्थ और साउथ दोनों तरफ से आप बोल सकते हैं कि यहां पर सीढ़ियां बनी हुई हैं। जब आपने मोहनजोदड़ो मूवी देखी हुई होगी तो उसमें जो एक गाना है जहां पर जो एक्ट्रेस हैं वो नहाने के लिए जाती हैं। एक पूरा रिचुअल होता है उस सेरेमनी का। तो वो पूरा जो है वो कहीं ना कहीं इस ग्रेट बात के इंडिकेशन को हमें यहां पर बता रहा है। ठीक? तो स्टेप्स वर देयर ऑन दी नॉर्थ एंड साउथ लीडिंग टू द टैंक। ठीक है? यहां पर आप देख सकते हैं कि नॉर्थ और साउथ दोनों तरफ से जो स्टेयर्स हैं वो जा रही हैं कहां पर? उस टैंक की तरफ। एंड वाटर टाइट बाय इसका जो बेस है उसको कैसे सेट किया गया? दिस वाज़ वाटर टाइट बाय सेटिंग ब्रिक्स ऑन एज एंड यूजिंग अ मोटर ऑफ जिप्सम। ठीक है? कि भाई जो बेस है उसको ऐसा ना हो कि वहां पे सीपेज होने लगे। वो ओवरफ्लो हो जाए, बह जाए, टूट जाए। तो उसका प्रॉपर कंस्ट्रक्शन करने के लिए बर्न ब्रिक का यूज़ किया गया। और उन ब्रिक्स को जॉइ करने के लिए अटैच रखने के लिए जिप्सम का जो है वो यहां पर यूज किया गया। नाउ देयर वर रूम ऑन ऑल थ्री साइड्स। यहां पर आप देख सकते हैं कि ये जो सारे जो टैंक है उसको सराउंड किया गया है अलग-अलग रूम्स के थ्रू जो कहीं ना कहीं ये बता रहे हैं कि दीज़ आर सम काइंड ऑफ़ अ चेंजिंग रूम्स या फिर आप बोल सकते हो कि क्योंकि पब्लिक पर्पस के लिए है तो कुछ अलग-अलग एक्टिविटीज के लिए भी इसको बनाया जाएगा। और ये जितने भी रूम हैं उनमें से एक रूम ऐसा हुआ जिसमें कि एक वेल था। लार्ज वेल था और वो जो वेल था वो जब भी यहां पर पानी की रिक्वायरमेंट होगी या इसका पानी चेंज करना होगा समय-समय पर तो इस वेल से वो पानी निकालकर इस टैंक में डाला जाएगा और फिर जब ये टैंक का पानी गंदा हो जाएगा तो उसको बाहर निकाल लिया जाता था। ठीक? अब ये जितने भी रूम जो आसपास बने हुए हैं उन सभी रूम को भी एक मेन ड्रेनेज से कहीं ना कहीं कनेक्ट किया जाता था। सो वाटर फ्रॉम द टैंक फ्लोड इंटू अ ह्यूज ड्रेन। ठीक है? कि इन रूम्स के आसपास भी नालियां थी और जो टैंक है उससे भी निकलने वाला जो पानी था वो एक ह्यूज ड्रेन से एक मेन ड्रेन के साथ कनेक्ट किया जाता था और ये माना जाता था कि ये जो टैंक है इसका एक स्पेशलेंस है व्हिच इज यूज्ड फॉर द स्पेशल और वी कैन कॉल द रिचुअल बाथ्स। ठीक है? कि जब भी कोई स्पेशल पूजा होनी होगी या कोई स्पेशल फंक्शन होना होगा तो इस टैंक में नहाने के बाद ही उस पूजा को वहां पर संपन्न या कंप्लीट किया जाता था। ठीक है? चलिए आगे बात करते हैं। तो चलिए अब बात करते हैं कि हड़प्पन सिविलाइजेशन में रह रहे लोगों के बारे में हमें ये कैसे पता चला कि समाज में कुछ लोग जो हैं वो काफी अमीर हैं और कुछ लोग जो हैं वो काफी गरीब है। अब हमें कोई ऐसा कोई डॉक्यूमेंट तो मिला नहीं और मिल भी गया तो हम उसे पढ़ नहीं पाए जो ये बता रहा है कि भाई इस इंसान ने काफी अच्छी-अच्छी गाड़ियां खरीदी हुई थी। उसके घर में इतना आलीशान बंगला था उसका। ऐसा तो कुछ हमें मिला नहीं हुआ है। तो जो एविडेंसेस हमें मिले हुए हैं उनसे हमने कैसे इस सिविलाइजेशन के बारे में पता लगाया उसकी बात करते हैं। तो मैंने आपको क्या बताया था कि ये जो चैप्टर है इसका नाम है ब्रिक्स, बीट्स एंड बोनस। तो ब्रिक्स को अभी हम कंस्ट्रक्शन में यूज़ कर सके हैं। अब ये जो बोनस हैं ये जो बरियल्स हैं ये हमें बताएंगे कि कैसे समाज में सोशल डिफरेंस देखने को मिला। अगर हम मेसोपोटामिया या इस समय में हो रहे और भी जितने इसके कंटेंपररी सिविलाइजेशन है स्पेशली इजिप्टियन सिविलाइजेशन उनकी बात करें तो वहां पर हो रहे जो बरियल्स हैं वो भी हमें कहीं ना कहीं ये बता रहे हैं कि वहां पर लोगों की जो लाइफस्टाइल थी वो किस तरीके से हुआ करती थी। तो जब हम इजिपशियन सिविलाइजेशन में हो रहे बरियल्स को देखते हैं तो वहां पर रॉयल बरियल्स जहां पर किंग और क्वीन को एक तरीके से दफनाया जाता था उन्हें इस तरीके से पिरामिडिकल स्ट्रक्चर में वहां पर बरी किया जाता था। वैसे ही अगर हम बात करें इंडस वैली सिविलाइजेशन की तो वहां के जो बरियल्स हैं वो भी हमें समाज में जो सोशल डिफरेंस है उसको इंडिकेट कर रहे हैं। कैसे? कि भाई समाज में यहां पर ये देखा गया कि कुछ तो बरियर्स ऐसे थे जहां पर डेड बॉडीज को एक जनरल एक पिट में मतलब एक तरीके से गड्ढा खोदा और डेड बॉडी को वहां पर दफना दिया गया। लेकिन वहीं पर कुछ ऐसे भी बरियर्स मिले हैं जहां पर गड्ढा खोदने के बाद उस जगह को बढ़िया तरीके से ईंटों से चारों तरफ से कवर किया गया और फिर वहां पर उन्हें दफनाया गया था। ठीक? सो देयर वर टू काइंड्स ऑफ़ बरियल फर्स्ट वेयर डेड्स वर लेड इन अ पिट। और जो दूसरे थे दिस वाज़ अ काइंड ऑफ़ अ होलोड आउट स्पसेस और व्हिच वर लाइन विद ब्रिक्स। जो क्या बता रहे हैं कि भाई कुछ ऐसे लोग थे जिनका समाज में ओहदा अच्छा था। एक इंपॉर्टेंट पर्सनालिटी थी। इस वजह से उन्हें एक स्पेशल रिस्पेक्ट के लिए एक स्पेशल सम्मान के लिए उनकी जो एक आप बोल सकते हो कि जो ग्रेव बनाई गई वो बढ़िया तरीके से यहां पर बनाई गई है। अब ये जो लोग हैं ये अकेले नहीं जा रहे हैं दूसरी दुनिया में। इनके साथ-साथ इनके जो यूज करने वाले कई तरीके के आइटम्स हैं वो भी अपने साथ लेकर जाया करते थे। ठीक? उसके साथ अगर हम देखें तो सिर्फ एक ही तरीके के बरियल नहीं है। यहां पर अलग-अलग प्रैक्टिससेस जो थी वो इन बरियल के फॉर्म में हमें देखी गई। जैसे कि कहीं पर डेड बॉडीज हैं और उनके साथ में उनका यूज किया जाने वाला सामान है। वहीं पर कुछ बरियल्स ऐसे हैं जिन्हें कहा जाता था डबल बरियल्स। ठीक है? जहां पर जो मेल और फीमेल हैं उनको एक साथ दफना दिया या जो दो डेड बॉडीज हैं उनको एक साथ दफना दिया गया। या फिर आप बोल लीजिए हाफ ब्यूरियल। जहां पर जो बोनस हैं उनको तोड़कर मतलब एक कंप्लीट बॉडी को बरी ना करके उसमें जो बोनस हैं उनको अलग करके और फिर वहां पर उन्हें बरी किया जाता था। ठीक? जो ये बताता है कि जो इंडस वैली सिविलाइजेशन है उसमें बरियल की अलग-अलग तरीके की जो प्रैक्टिससेस थी वो यहां पर यूज करी जाती थी। ठीक? अब यहां पर हमने ये देखा कि इनके जो बरियल्स हैं इनसे हमें अलग-अलग तरीके की पोट्री और ऑर्नामेंट्स मिले हुए हैं। जो कहीं ना कहीं ये बताता है कि यहां के लोगों की कहीं ना कहीं बिलीफ है दैट दीज़ वर यूज्ड इन द आफ्टर लाइफ। ठीक है? जैसे कि अभी हम सोचते हैं ना कि अगर कल को मैं मर गई ना तो क्या करूंगी? मैं अपने साथ हमें तो भैया ये पोटरी और ज्वेलरीव्री नहीं चाहिए। हम तो जब जाएंगे तो हमारा बस फोन हमारे साथ दे देना ताकि इसमें जो छुपे हुए राज हैं ये किसी को पता ना चल जाए वरना लफड़ा हो जाएगा। ठीक है? तो वैसे ही यहां के भी जो लोग थे जब इनकी डेथ होती थी तो इनके जो रिलेटिव्स हैं ताकि आगे आने वाली जिंदगी में जो भी इंपॉर्टेंट या आप बोल लीजिए कि जो इनके क्लोज कुछ अटैच चीजें थी वो इनके साथ यहां पर वो दफना दिया करते थे। ठीक है? तो जैसे यहां पर कई सारी ज्वेलरी मिली हुई है व्हिच वर यूज्ड बाय बोथ मैन एंड वुमेन। और जब यहां पर एक एक्सकवेशन हुआ मिड 1980 में सिमेट्री में तो उसमें यह देखा गया कुछ अलग-अलग तरीके के ज्वेलरी की बात करी गई है। जैसे कि एक ऑर्नामेंट है व्हिच हैव द थ्री शेल रिंग्स। ठीक है? हो सकता है इस आदमी को वो जो ऑर्नामेंट है वो पहनना बहुत पसंद होगा। या फिर एक ऐसा भी मिला हुआ है जहां पर जेस्पर के बने हुए बीट्स और जो माइक्रो बीट्स हैं वो उस डेड बॉडी के स्कल के आसपास हमें देखने को मिल रहे हैं। ठीक है? और कुछ ऐसी भी यहां पर बरी मिली हुई है जहां पर कॉपर मिरर जो है हो सकता है कि महिला होंगी और उन्हें सजना सवरना बहुत पसंद होगा तो अंदर जाके भी तो भाई कांच होना चाहिए साथ में। तो कॉपर मिरर जो है वो अपने साथ में ये ले गई। अब ये कहीं ना कहीं हमें ये इंडिकेट कर रहा है कि जैसे इजिप्ट या दूसरे सिविलाइजेशन में लोग सोने चांदी की चीजें उन बरियर्स में उन डेड बॉडीज के साथ दफना दिया करते थे। वैसे ही हड़प्पन सिविलाइजेशन के जो लोग हैं वो किसी भी प्रिशियस आइटम को डेड बॉडीज के साथ दफनाने में बिलीव नहीं करते थे। उन्हें लग रहा है कि भाई अगले जन्म में भी यूज़ करोगे तो ये नॉर्मल चीजें ही यूज़ कर लेना। फिर तुम जब बड़े हो जाओगे तो खरीद लेना अपने हिसाब से। ठीक है? तो यहां पर ये बताया जा रहा है कि दीज़ पीपल आर सम हाउ बिलीविंग कि हमें कोई भी ऐसी प्रिशियस चीजें या लग्जरियस चीजें जो हैं वो डेड बॉडीज के साथ बरी नहीं करना है। ठीक? अब जब लग्जरियस चीजों की बात हो ही रही है तो यहां पर हम देखते हैं कि कैसे यहां पर जो लोग हैं वो अलग-अलग तरीके की चीजें जो हैं आइटम्स जो हैं वो यूज़ कर रहे हैं और उनके डेली यूज़ के जो आइटम्स हैं उससे हमें पता चल रहा है कि समाज में किस तरीके से जो ऑब्जेक्ट्स यूज़ करे जा रहे हैं वो भी एक सोशल डिफरेंस को यहां पर हमें इंडिकेट कर रहा है। तो पहली जो चीज थी वो हमने बरियल के फॉर्म में देखी कि एक उनकी बरियल मेथड और दूसरा जो उनके ऑर्नामेंट्स मिल रहे हैं वो। अब जो एक और चीज जो हमें समाज में सोशल डिफरेंस के बारे में बता रही है वो इनके यूज करे गए आइटम्स के थ्रू। ठीक है? सो द आर्टिफेक्ट्स वाइडली डिवाइडेड। यहां पर जितने भी आर्टिफेक्ट्स मिले हुए हैं उनको दो तरीके से डिवाइड किया गया। एक हुए यूटैिलिटेरियन और एक हुए लग्जरियस। ठीक है? तो चलिए उनको डिस्कस करते हैं डिटेल में। अगर हम बात करें यूटिलिटेरियन ऑब्जेक्ट्स की तो ये कौन से ऑब्जेक्ट्स हुए बेटा? ये वो ऑब्जेक्ट्स हुए जो डेली यूज़ में या ऑर्डिनरी पर्पस से यूज़ करे जाते थे। जैसे कि क्रॉकरी आप बोल लीजिए, पोटरी बोल लीजिए, है ना? जो भी कोई भी सामान जो ये लोग यूज़ करते थे, कपड़े वगैरह हो गए, जो भी चीजें हैं, तो वो ऑर्डिनरी सामान जो डेली यूज़ में किया जा रहा है, उन ऑब्जेक्ट्स को यहां पर क्लासिफाई किया गया है एज अ यूटिलिटेरियन ऑब्जेक्ट्स। ठीक है? ऑब्जेक्ट्स ऑफ डेली यूज़ मेड फेयरली इजी आउट ऑफ ऑर्डिनरी मटेरियल्स। ठीक है? कि जो काफी एक इजी प्रोसेस से बनाया जाएगा और उन्हीं आइटम से बनाया जाएगा जो लोकली अवेलेबल होंगे। ठीक है? लेकिन वहीं पर अगर हम बात करें कि कुछ ऐसे आइटम्स भी मिले हुए हैं जो काफी रेयर या फिर कॉस्टली रॉ मटेरियल से बनाए गए हैं। या फिर आप बोल लीजिए कि नॉन लोकल मटेरियल है तो कहीं बाहर से इन्हें इंपोर्ट किया जाता होगा। ठीक है? या फिर आप बोल लीजिए कि उनको बनाने में कुछ ऐसी टेक्निक लगी होंगी जो काफी ज्यादा कॉम्प्लिकेटेड है। ठीक? जो क्या बता रही है जो समाज में एक लग्जरी और यूटिलिटेरियन वर्क को यूज करने वाले जो लोग हैं उनके डिफरेंस को हमें यहां पर हाईलाइट कर रही है। अब वो लोग जो समाज में एक तरीके से आप बोल लीजिए लोअर क्लास के होंगे वो इन यूटिलिटेरियन ऑब्जेक्ट्स को यूज़ करते होंगे क्योंकि ये सस्ते मिल जाते होंगे ईजीली अवेलेबल मिल जाएंगे। लेकिन वहीं पे जो लोग आप बोल लीजिए कि अपर क्लास को बिलोंग कर रहे हैं। काफी अमीर हैं वो इस तरीके के इंपोर्टेड आइटम्स को यूज़ करते होंगे। काफी महंगे आइटम्स को यूज़ करते होंगे। जो भी हमें क्या बता रही है जो हमें ये बता रही है कि समाज में डिफरेंस जो था वो हुआ करता था। नाउ मटेरियल्स किस मटेरियल से बने हुए होते थे भैया? तो स्टोन और क्ले से बने हुए होंगे और यहां पर यूटैलिटेरियन ऑब्जेक्ट्स में अगर हम देखेंगे तो ये कुछ ऐसे आइटम जैसे कि गोल्ड जो हड़प्पा में नहीं मिलता था, मोहनजोदड़ो में नहीं मिलता था। बाहर के एरिया से यहां पर इंपोर्ट किया जाता था। साथ ही साथ द पोर्ट ऑफ फयांस अगर आप पोर्ट ऑफ फयांस अगर इस पोर्ट की अगर आप बात करेंगे तो यह काफी एक डिफिकल्ट टेक्निक से बनाया जाएगा। रेत को यहां पर गला के मतलब एक काफी लॉन्ग प्रोसेस होती है जो यहां पर ये इंडिकेट करता है कि समाज में जो है वो अलग-अलग तरीके के जो आइटम्स हैं वो यूज़ करते थे। वहीं पर अगर हम यूटिलिटेरियन ऑब्जेक्ट्स की बात करें तो क्वंस जिसे हम पढ़ रहे थे सैडल क्वंस वाला जो सिलबट्टा वाली जो चीज है वो पोटरी मिल जाएगी जो हमें लोकल मटेरियल की बनी होगी स्टोन या क्ले की या फिर नीडल्स होंगी। फ्लैश रबर्स होंगी। जैसे अभी हम लोग यूज़ करते हैं ना लोफा। वैसा ही लोफा उस टाइम पे यह लोग क्या यूज़ करते बॉडी स्क्रबर जिसको फ्लैश रबर्स बोल रहे हैं। देन एंड व यूजुअली फाउंड एंड डिस्ट्रीब्यूटेड थ्रूउ द सेटलमेंट। मतलब कि क्योंकि अब कॉमन मास यूज़ कर रहा है और उनकी पपुलेशन ज्यादा है तो ये लार्ज अमाउंट में हमें पूरे सेटलमेंट्स में जगह-जगह देखने को मिल रहे हैं। लेकिन वहीं पर अगर हम लग्जरियस आइटम की बात करें तो ये रेयरली कुछ ही जगहों पर स्पेशली अगर आप सिटडल की बात करें या वो एरियाज जहां पर समाज के अपर क्लास रह रहा है वहां पर ही ये चीजें जो हैं वो हमें देखने को मिलती हैं। अब यहां पर यह देखा गया कि हड़प्पा में ऐसे कई सारी गोल्ड ज्वेलरी थी वो हो के फॉर्म में देखने को मिल रही है। व्हाट आर होट्स? हॉर्ड्स जो हैं दीज़ आर एक तरीके से आप बोल लीजिए कि एक मटका या एक कलेक्शन जिसमें कोई भी प्रिशियस मेटल जो था वो स्टोर करके रखा जाता था। सो इन हॉर्स आर ऑब्जेक्ट केप्ट केयरफुली बाय पीपल ऑफन इनसाइड कंटेनर सच एज दी पॉट्स सेव्ड फॉर द यू रयूज्ड बाय द मेटल वर्कर्स। ठीक है? जैसे कि सोना जो है उस सोना को उन्होंने क्या कर दिया कि भाई एक मटके में रख लिया और उस मटके को नीचे जमीन में गाड़ दिया ताकि कोई भी उसको चुरा ना सके। है ना? और ताकि क्या होगा कि भाई अब क्योंकि वह सोना है कभी खराब तो होगा नहीं लंबे समय तक रहेगा। तो इस वजह से जब फ्यूचर में अगर किसी इंसान को यूज़ करना है या मेटल वर्कर्स जो हैं जो वापस में उसको यूज़ करना चाहते हैं तो वो इस तरीके से हो्स के फॉर्म में मिल रहा है। तो हड़प्पा से भी हमें इस तरीके से गोल्डन गोल्ड ज्वेलरी का हो मिला हुआ है जो ये बता रहे हैं कि क्योंकि ये मेटल काफी प्रिशियस है और लोग इसको रीयूज करना चाह रहे हैं। इस तरीके से इस कारण से उन्हें इस तरीके से होड में रखा जाता था। ठीक है? चलिए अब आगे बात करते हैं। अब यहां पर कुछ चीजें ऐसी भी हैं जो हमारे दिमाग में कंफ्यूजन को पैदा कर रही हैं कि भाई यहां तो हम बात कर रहे हैं कि जो चीजें डेली यूज़ में होती थी उनको एक तरीके से लोकली अवेलेबल मटेरियल से बनाया जाता था और जो चीजें रेयरली यूज़ होती थी उनको लग्जरियस रॉ मटेरियल से आप बोल लीजिए रेयर आइटम से बनाया जाता था। बट यहां पर तो हमें ऐसी चीजें भी मिली हैं जहां पर जो स्पिंडल वूल्स हैं मतलब कि जिसको धागा लपेटने के लिए यूज किया जाता है उनका एक तरीके से आप बोल लीजिए उनको बनाया जा रहा है फियांस के मटेरियल से जो कि एक काफी कॉम्प्लिकेटेड टेक्निक से बनाया जाता है। सो दिस इज़ सम हाउ क्रिएटिंग अ कन्फ्यूजन इन आवर माइंड दैट आर्टिकल्स ऑफ़ डेली यूज़ सच ऐज़ स्पिंडल वूल्स आर मेड अप ऑफ़ रेयर आइटम्स या मटेरियल सच एज द फैंस। ठीक है? तो भाई ऐसा कैसे हो गया कि भाई अभी तक तो ये चीज बता रहे थे। तो हो सकता है कि भाई कुछ लोग ऐसे होंगे अमीर वर्ग के लोग होंगे जो स्पिंडल वूल्स का यूज करते होंगे या महंगा चीजें उन्हें करना पसंद होगा। तो वो चीजें जो हैं वो हमें यहां पर बताया जा रहा है। नाउ इससे समझने वाली क्या बात है कि रेयर ऑब्जेक्ट्स वर मेड अप ऑफ़ वैल्यूुएबल मटेरियल आर जनरली कंसंट्रेटेड इन द लार्ज सेटलमेंट्स लाइक मोहनजोदड़ो एंड हड़प्पा। ठीक है? अब यहां पर ये चीज भी देखी गई कि जो कॉस्टली मटेरियल्स थे, जो लग्जरियस मटेरियल्स थे, वो ऐसे नहीं कि गांव-गांव मिल रहे हैं। है ना? अब जैसे कि अगर आप किसी गांव में जाओगे तो वहां पे आपको फरारी खड़ी हुई देखने को नहीं मिलेगी। लेकिन वहीं पर अगर आप मुंबई या दिल्ली चले जाओगे तो वहां पर आपको मतलब बहुत सारे लोग जो है वो इस तरीके के लग्जरियस आइटम्स जो है वो यूज़ कर रहे हैं। तो वो क्या बता रहा है वो उनके इकोनॉमिक बैकग्राउंड को बता रहा है। तो यहां पर भी हड़प्पा और मोहनजोदड़ो जैसी सिटीज थी वहां पर ही जो लग्जरियस आइटम्स थे वो मिला करते थे और बाकी के जो स्मॉल सेटलमेंट्स थे जैसे रीजनल सेंटर्स क्राफ्ट सेंटर्स वहां से इस तरीके का कोई भी लग्जरी आइटम्स हमें नहीं देखने को मिला है। सो फॉर एग्जांपल मिनिएचर पॉट्स ऑफ़ फैंस परहप्स यूज़्ड एज़ द परफ्यूम बॉटल। ठीक है? तो फयांस के जो छोटे-छोटे पॉट्स थे जिनको आगे परफ्यूम बॉटल्स की तरह यूज़ किया जाता था। ये जनरली हमें मोहनजोदड़ो और हड़प्पा जैसे सिटीज से ही मिले हुए हैं ना कि स्मॉल सेटलमेंट्स लाइक कालीबंगन। ठीक है? तो ये ये भी बताने की कोशिश कर रहा है कि जो अमीर शहर हैं जो बड़े-बड़े शहर हैं वहां पर ही आप बोल लीजिए कि एक अपर क्लास जो है वो कंसंट्रेटेड है और वहां पर ही हमें लग्जरियस आइटम मिल रहे हैं। बाकी जो स्मॉलर सेटलमेंट्स हैं वहां पर इस तरीके के लग्जरियस आइटम्स नहीं मिल रहे हैं क्योंकि वहां पर उनका कंसमशन नहीं है। ठीक है? चलिए अब आगे बात करते हैं। नाउ फाइंडिंग अबाउट द क्राफ्ट प्रोडक्शन कि भाई इस तरीके से यह जो क्राफ्ट हो रहा है इसके बारे में हमें कैसे पता चला कि क्या-क्या जो हैं वो उनके अलग-अलग क्राफ्ट सेंटर्स थे। अभी हमने ब्रिक्स के बारे में देखा। अभी बोनस के बारे में देखा और अब देखेंगे बीड्स के बारे में। तो चलिए यहां पर एक क्राफ्ट सेंटर के बारे में डिस्कस किया गया है। व्हिच इज़ दी चहूंदड़ो। चहूंदड़ो के अगर हम एरिया की बात करें तो दिस इज़ अ स्मॉल सेटलमेंट ऑफ़ लेस देन से हेक्टेयर लैंड। मतलब एक छोटा सेटलमेंट जो था ये हुआ करता था। एंड दिस वाज़ एक्सक्लूसिवली डिवोटेड फॉर दी क्राफ्ट प्रोडक्शन। ठीक है? अलग-अलग तरीके के जो क्राफ्ट थे वो चूदंदड़ों में हुआ करते थे। जैसे कि लाइक बीड मेकिंग, शेल मेकिंग, मेटल वर्किंग एंड वेट मेकिंग। ठीक है? वेट को भी अभी हम आगे देखेंगे कि ये स्टैंडर्डाइज वेट है कि पूरा जो सिविलाइजेशन है उसमें एक ही तरीके का वेट जो है वो यूज किया जा रहा है। तो इन सब चीजों का जो आप बोल सकते हो जो क्रिएशन है जो कंस्ट्रक्शन है वो इन्हीं क्राफ्ट सेंटर में देखने को हमें मिल रहा है। नाउ अगर हम बीड मेकिंग की बात करें तो भाई चहूंदड़ो जो हैं उसमें अलग-अलग मटेरियल से बीड्स बनाए जाते हैं। जैसे कि अगर हम बात करें स्टोन की तो स्टोन में यहां पर अलग-अलग तरीके के स्टोंस यूज़ हो रहे हैं। जैसे कि कार्लेनियन, जस्पर, क्रिस्टल, क्वार्ड्स एंड स्टेयर टाइप। और वहीं पर अगर हम मेटल की बात करें तो कॉपर, ब्रोंज़ और गोल्ड जैसे मेटल से यहां पर बीड्स जो हैं वो बनाए जा रहे हैं। उसके साथ-साथ कई सारे अदर मटेरियल्स भी हैं। जैसे कि शेल हो गया, फैंस हो गया, टेराकोटा हो गया, बर्न क्ले हो गया। और इसका जो है इन अलग-अलग मटेरियल से मतलब समझने की बात ये है कि चूंदड़ों में एक एक्सक्लूसिवली डिवोटेड सेंटर है। जहां पर बीड मेकिंग का काम जो है वो बहुत बढ़िया तरीके से होता है। हर तरीके के जो बीड्स हैं वो यहां पर बनाए जाएंगे। अलग-अलग मटेरियल्स के और साथ ही साथ अलग-अलग शेप्स के जैसे कि लाइक डिस्क शेप्ड, सिलड्रिकल, स्फेरिकल, बैरल शेप्ड, सेगमेंटेड। ठीक है? इस तरीके से अलग-अलग जो बीड्स हैं वो यहां पर बनाए जा रहे हैं। और इसी वजह से जो चूंदड़ो हैं वहां पर हमें यहां से अलग-अलग तरीके से जो बीड मेकिंग टूल्स हैं वो भी यहां पे देखने को मिल रहे हैं। जिसको आप जिस तरीके का जो टूल्स है फॉर एग्जांपल उसको पियरसिंग के लिए यूज़ किया जाता होगा। या फिर इस तरीके से जो मोती हैं उनके बारे में भी हमें पता चल रहा है कि शेल का जो एक माला है वो यहां पर हमें दिखाई गई है। नाउ दिस बीड्स वर आल्सो सिर्फ उन्हें शेप नहीं दिया जा रहा है बट दे वर आल्सो डेकोरेटेड। सो डेकोरेटेड बाय इनसाइजिंग और पेंटिंग एंड सम हैड डिज़ाइंस इज्ड ऑन देम। मतलब कि जो बीड्स हैं उनके ऊपर अलग-अलग डिज़ाइंस भी बनी हुई हैं। ठीक है? जैसे कि अगर मैं आपको यह वाली इमेज दिखाऊं तो देखो यहां पर ये बीड है और इस बीड को बढ़िया तरीके से डेकोरेट करके अलग-अलग डिज़ जो हैं वो भी इनके ऊपर यहां पर बनाई जाती हैं। नाउ टेक्निक्स फॉर बीड मेकिंग क्या-क्या टेक्निक्स यूज़ होती थी बीड मेकिंग के लिए। सो दिस डिपेंड ऑन दी मटेरियल। ठीक है? कि भाई जो भी मटेरियल है उसके ऊपर डिपेंड करेगा कि उस से किस तरीके से बीड बनाना है। तो अगर हम बात करें स्टेटाइट जैसे सॉफ्ट स्टोन की तो ये जो स्टोन है इसको इजीली कार्व करना, शेप देना अलग काफी आसान था। इसीलिए स्टेटाइट के जो बीड्स थे उनको अलग-अलग शेप्स में बनाया जाता है। अनलाइक द ज्योमेट्रिकल फॉर्म्स मेड आउट ऑफ दी हार्ड स्टोंस। तो अगर वहीं पर अगर हम हार्ड स्टोन की बात करें, टेराकोटा वगैरह की बात करें तो उनसे अलग-अलग शेप देना काफी मुश्किल है। बट वहीं पर अगर आप स्टेटाइट की बात करें क्योंकि काफी सॉफ्ट स्टोन है तो उसको कोई भी शेप जो है वो आसानी से दिया जा सकता है। उसके साथ-साथ अगर हम बात करें तो बात हो रही है यहां पे रेड कलर कार्निलियन की। अब ये जो कार्लिनियन है इसका रॉ मटेरियल तो येलो है। बट जब इसको बर्न किया जाता है तो वो इस तरीके से रेड कलर जो है वो ऑक्यूुपाई कर लेता है। जैसे आपने लोहा देखा होगा। जब लोहे को आप गर्म करेंगे तो वो लाल हो जाता है। ठीक है? वैसे ही यहां पे जो कार्लिनियन भी है वो येलो कलर का होगा। बट जब उसको गर्म किया जाएगा तो वो रेड कलर जो है वो ले लेगा। नाउ फाइलिंग द येलोइश रॉ मटेरियल एंड बीट्स एट वेरियस स्टेज ऑफ दी एंड बीट्स एट द वेरियस स्टेज ऑफ दी प्रोडक्शन। अब उसके बाद ये जो नोड्यूल्स हैं इनको चिप किया जाता था इंटू रफ शेप्स एंड देन फाइनली फ्लेट इंटू द फाइनल फॉर्म्स कि पहले उन्हें एक रफ शेप दिया जाएगा और फिर उसके बाद उनको अलग-अलग तरीके से काटकर उनको एक फाइनल फॉर्म जो होगा वो दिया जाएगा। उसके बाद उसके ऊपर बाकी की एक्टिविटीज होंगी लाइक ग्राइंडिंग, पॉलिशिंग, ड्रिलिंग एंड कंप्लीटेड द प्रोसेस। और उसके बाद यह जो बीड्स हैं इनको अलग-अलग जगहों पर यूज़ किया जाता है। सो स्पेशलाइज़ ड्रिल्स हैव बीन फाउंड एट चहू धड़ो लोथल एंड मोर रिसेंटली एट धौलावीरा जो क्या बता रहे हैं कि भाई यहां पर क्योंकि अलग-अलग तरीके के टूल्स हमें मिले हुए हैं जो ये बता रहा है कि ऑल दीज़ आर दी सेंटर्स ऑफ क्राफ्ट एक्टिविटीज। ठीक? चलिए आगे बात करते हैं। चलिए अब चूंदड़ों के बाद बात करते हैं शेलक्राफ्ट के सेंटर्स की। तो यहां पर हमारे पास दो सेंटर्स के एविडेंसेस हैं व्हिच आर दी नागेश्वर और बालाकोट एंड हु आर एक्सक्लूसिवली डिवोटेड फॉर दी शेलक्राफ्ट। और इसमें शेलक्राफ्ट में अगर आप बोल सकते हो उसका जो काम होने का जो मेन रीज़न है वो ये बिकॉज़ बोथ आर लोकेटेड नियर दी कोस्ट। ठीक है? तो यहां पर हमारा जो इंडस वैली सिविलाइज़ेशन है उसका जो अरेबियन कोस्ट था अरेबियन सी का वहां पर ये जो नागेश्वर और बालाकोट थे वो बने हुए थे। और इस कारण से क्योंकि यहां पे शेल अच्छे खासे अमाउंट में मिल जाता था। इस कारण से यहां पर शेल क्राफ्ट जो होता था होता था। ठीक है? अब ये जो शेल ऑब्जेक्ट्स हैं इसमें अलग-अलग तरीके की चीजें बनाई जाती थी। जैसे कि आप बोल सकते हो बैंगल्स हो गई, लेडल्स हो गई, इनलेस हो गई। तो इस तरीके की बैंगल्स बनाई जाएगी, लैडल्स बनाई जाएगी और इनलेस जो एक तरीके का आप बोल सकते हो कटोरा टाइप्स जो हो गया उसको भी यहां पर बनाया जाता था। अब यह जो चीजें जो अलग-अलग क्राफ्ट सेंटर्स पर प्रोड्यूस हो रही हैं जैसे चूंदड़ों में बीड मेकिंग हो रही है या फिर शेलक्राफ्ट हो रहा है नागेश्वर बालाकोट को उनको इन स्मॉल सेटलमेंट से लार्जर सिटीज तक ट्रांसपोर्ट किया जाता था। सो द फिनिश प्रोडक्ट सच एज बीड्स फ्रॉम द चूंदड़ो एंड लोथल्स वर ट्रांसपोर्टेड इन द अर्बन सेंटर सच एज द मोहनजोदड़ो एंड हड़प्पा। ठीक है? अब इसके साथ अभी हम आगे भी देखेंगे कि सिर्फ ऐसा नहीं है कि जो क्राफ्ट मेकिंग का काम है या क्राफ्ट का जो काम है वो सिर्फ इन स्मॉलर सेंटर्स पर ही हो रहा है बल्कि आगे जाके जो अर्बन सेंटर्स हैं वो भी अपने यहां पर लोअर लेवल पे इन क्राफ्ट को करते थे। बट दीज़ आर दी सेंटर्स जहां पर ये काम जो होता था वो काफी ज्यादा वेल स्किल्ड प्रोफेशनल्स जो होते थे वो इन काम को करा करते थे। ठीक है? चलिए अब बात करते हैं कि भाई ये जो क्राफ्ट सेंटर्स हैं इनको पहचाना कैसे गया कि भाई कैसे पता चला कि ये जो जगह है यहां पर एक्सक्लूसिवली क्राफ्ट का काम किया जाता था या यहां पर पहले के जमाने में कोई क्राफ्ट हुआ था। तो इसके बारे में पता लगाने के लिए आर्कियोलॉजिस्ट ने अलग-अलग चीजों के थ्रू इसे पता लगाया। जैसे कि क्या जैसे कि रॉ मटेरियल कि भाई ये जो सेंटर्स थे यहां पर हमें रॉ मटेरियल जो है वो काफी ज्यादा मिला। या फिर आप बोल सकते हो कि इन सेंटर्स के आसपास वो जो रॉ मटेरियल्स के रिजर्व थे वो मिल जाया करते थे। जैसे कि स्टोन नोड्यूल्स, होल शेल हो गया, कॉपर ओर हो गया। जो कहीं ना कहीं क्या बता रहा है कि क्योंकि यहां पे रॉ मटेरियल जो था वो ईजीली अवेलेबल है। इस कारण से यहां पर कोई ना कोई क्राफ्ट हुआ होता होगा। या फिर यहां से हमें टूल्स मिले हुए हैं। या फिर अनफिनिश्ड ऑब्जेक्ट्स। ठीक है? कि भाई कोई क्राफ्ट बना रहे हैं लेकिन बनाते बनाते बिगड़ गया। तो भाई बीड जो है उसमें छेद नहीं हुआ या आप बोल लीजिए कि उसको शेप नहीं दे दिया गया या कोई और चीज है तो जिस वजह से वो अनफिनिश्ड प्रोडक्ट जो है वो भी वहां से हमें मिल गए या फिर जो वेस्ट है जो रिजेक्ट है वो भी यहां पे लार्जर अमाउंट में मिला हुआ है जो एक बेस्ट इंडिकेटर है ये बात बताने का कि क्योंकि यहां पर उस आइटम को बनाने के लिए बहुत सारा वेस्ट मिल रहा है जो कहीं ना कहीं ये इंडिकेट कर रहा है कि यहां पर क्राफ्ट मेकिंग का जो काम होता होगा वो जरूर हो रहा है। नाउ अपार्ट फ्रॉम स्मॉल सेटलमेंट्स स्पेशलाइज सेंटर्स लाइक क्राफ्ट सेंट क्राफ्ट प्रोडक्शन वर आल्सो अंडरटेकन द लार्ज सेंटर्स सच एज दी मोहनजोदड़ो एंड हड़प्पा। ठीक है? कि ऐसा नहीं था कि क्राफ्ट जो है वो एक्सक्लूसिवली इन्हीं सेंटर्स तक ही लिमिटेड था बल्कि जो अर्बन सेंटर्स हैं वहां पर भी स्मॉल लेवल पर इस तरीके की जो क्राफ्ट एक्टिविटीज थी वो हुआ करती थी। ठीक है? चलिए अब आगे बात करते हैं कि भाई क्या स्ट्रेटजीस यूज करी गई इन क्राफ्ट प्रोडक्शन को करने के लिए जो रॉ मटेरियल का रिक्वायरमेंट है उसके लिए। ठीक है? सो व्हाट आर दी स्ट्रेटजीस यूज्ड फॉर दी प्रोक्योरमेंट ऑफ दी रॉ मटेरियल। तो अब देखिए बहुत से जो क्राफ्ट था वो तो लोकली अवेलेबल मटेरियल जैसे क्ले हो गया, स्टोन हो गया उससे बना लिया गया। लेकिन कुछ क्राफ्ट ऐसे भी थे जिनके लिए जो रॉ मटेरियल था वो सेटलमेंट के आसपास रिक्वायर्ड या अवेलेबल नहीं था। इस वजह से उन रॉ मटेरियल्स को लाने के लिए अलग-अलग मेथड्स जो थी वो यहां पर यूज करी गई हैं जिनको अभी हम डिस्कस करेंगे। तो यहां पर बात करते हैं दैट क्ले वाज़ अवेलेबल एट द लोकल साइड्स लाइक स्टोन, टिंबर्स एंड मेटल वर ब्रॉट फ्रॉम आउटसाइड कि बहुत सी चीजें लोकली अवेलेबल थी जैसे कि क्ले लेकिन उसके साथ-साथ कुछ दूसरी चीजें जैसे कि स्टोन है, टिमबर है, मेटल है। इसको दूसरी जगह से यहां पर लेकर आना पड़ता था और लेकर आने के लिए जो ट्रांसपोर्टेशन है वो इस तरीके से अलग-अलग तरीके से यूज किया जाता था। जैसे कि लैंड रूट तो उसके लिए हमें टेराकोटा मॉडल मिला हुआ है जो ये बताता था कि इन टेराकोटास जो आप एक बोल लीजिए कि जो टेराकोटा मॉडल ऑफ कार्ट है जो ये बता रहा है कि इन कार्ट के थ्रू लैंड रूट से सामान जो था वो ट्रांसपोर्ट हो रहा है। उसके साथ-साथ रिवराइन रूट्स और कोस्टल रूट्स को इंडिकेट करने के लिए हमारे पास इस तरीके की सील मिली हुई हैं जो बोट के बारे में हमें बता रही हैं कि जो हड़प्पा सिविलाइजेशन है उसमें बोट का भी यूज होता होगा। और इन बोर्ड की मदद से ही यहां पर ट्रांसपोर्टेशन जो था वो इजीली करवाया जाता था। अब बात करते हैं कि इन मटेरियल्स को प्रोक्योर करने के लिए कौन सी अलग-अलग स्ट्रेटजीस जो हैं वो यहां पर यूज करी गई। सबसे पहले जो स्ट्रेटजीस थी दिस इज द एस्टैब्लिशमेंट ऑफ सेटलमेंट्स। कि वहां पर जो हड़प्पन सिविलाइजेशन है वो अपने ही सेटलमेंट बना ले और उन सेटलमेंट्स के थ्रू वहां पर रॉ मटेरियल लाना काफी इजी हो जाएगा। जैसे कि शेल फ्रॉम नागेश्वर एंड बालाकोट शरतघई से क्या लाया जाता था बेटा? लैपिस लजुली। लैपिस लजुली एक ब्लू कलर का मेटल है। ब्लू कलर का स्टोन है जिससे अलग-अलग तरीके के जो ऑब्जेक्ट्स हैं वो बनाए जाते हैं। जैसे कि आपने जब महाभारत देखी होगी तो उसमें जो शकुनी है वो ब्लू कलर के बीड्स पहनते थे। तो दैट वाज़ नथिंग बट द लैपिस लजुली के जो बीड्स हैं वो। ठीक है? और ये जो बीड्स हैं ये एक्सक्लूसिवली सिर्फ और सिर्फ अफगानिस्तान में जो एक साइट है शौतघाई वहीं पर अवेलेबल होता था। उसके साथ-साथ कार्निलियन जो भरू से लाया जाता था। स्टेटाइट जो साउथ या फिर राजस्थान से लाया जाता था। ठीक? तो इस मैप में भी आप और बढ़िया तरीके से जितने भी आइटम्स या कमोडिटीज हैं, रॉ मटेरियल्स हैं जो अलग-अलग जगहों से लाए जा रहे हैं उसको आसानी से देख सकते हैं। जैसे कि यहां पे आपको शेलक्राफ्ट देखने को मिल रहा है नागेश्वर बालाकोट से। उसके साथ-साथ यहां पर इस तरीके से कॉपर माइन मिल रही है। राजस्थान में हमें कॉपर माइन देखने को मिलेगी। लैपिस लजुली जो यहां पर अमूदरिया अफगानिस्तान से है और यहां पर इसको लाया जा रहा है। ना सिर्फ हम इंडस वैली सिविलाइजेशन के लोग यूज़ कर रहे हैं बल्कि इस तरीके से ईरान की तरफ जा रहा है जहां पर मेसोपोटामिया के जो लोग हैं वो भी इसको यूज़ करेंगे। देन कॉपर जो है वो यहां पर आप देख सकते हैं कि जो ओमान वाला पार्ट है वहां से भी जो कॉपर है वो हड़प्पन सिविलाइजेशन के जो लोग हैं वो यूज़ कर रहे हैं। जस्पर कार्निलियन वो भी यहां पर अलग-अलग जगहों से देखने को मिल रहा है। ठीक है? तो कहने और समझाने की बात ये है कि भाई जो रॉ मटेरियल है क्योंकि वो लोकली अवेलेबल नहीं था इसलिए उसको अलग-अलग जगहों से लेकर या ट्रांसपोर्ट करवाया जाता था। नाउ एक तो चीज हो गई कि भाई वहां पे सेटलमेंट बना लिया और दूसरी चीज हो गई कि वहां पर एक्सपिडिशन भेज दिया या फिर आप बोल सकते हो कि एक पूरा काफिला गया और वहां से वो रॉ मटेरियल लेकर आ गया। तो जैसे कि राजस्थान की जो खेत्री माइन है वहां से कॉपर बुलवाया जाता था। साउथ में क्योंकि ये काफी दूर हैं ये एरियाज। ठीक है? उसके साथ-साथ अगर हम साउथ की बात करें कोलार गोल्ड फील्ड्स जो हैं वहां से गोल्ड लेकर आया जाता था जो कि मेसोपोटामिया में सॉरी मेसोपोटामिया में तो यूज़ हो ही रहा है लेकिन साथ-साथ इंडस वैली सिविलाइजेशन में भी इसका यूज़ देखने को मिल रहा है। नाउ लोकल कम्युनिटीज़ जो हैं जब इस तरीके के एक्सपिडिशन भेजे जाएंगे तो वो इन एक्सपिडिशन में जाने वाले लोगों से काफी अच्छे तरीके से कनेक्ट कर सकते हैं। सो लोकल कम्युनिटीज़ वर कम्युनिकेटेड थ्रू एक्सपिडिशन। इन्हें एक्सपिडिशन के थ्रू उनसे कम्युनिकेट किया जाता था। और हड़प्पा की कई सारी जो चीजें हैं वो इन जगहों पर मिल रही हैं। सो ओकेशनल फाइंड्स ऑफ हड़प्पन आर्टिफेक्ट्स आर इंडिकेशन ऑफ दिस कॉन्टैक्ट कि ये जो जगह है वहां पर जैसे कि अगर हम बात करें कि कोलार गोल्ड फील्ड्स हो गई या फिर खेतरी माइन हो गई तो वहां पर उन जगहों पर भी हड़प्पा की पोटरी मिलना वहां पे चीजों का एक कहीं ना कहीं हमें इंडिकेशन दे रहा है कि दोनों रीजंस के बीच में कुछ ना कुछ कांटेक्ट हुआ करता था। खेतरी माइन की अगर हम बात करें तो वो मिलता है हमें हड़प्पन सिविलाइजेशन के समय पर ही एक कल्चर जिसको जोधपुरा गणेश्वर जोधपुरा कल्चर कहा जाता था वहां से भी हमें नॉन हड़प्पन पोट्री और कॉपर ऑब्जेक्ट्स मिलते हैं। जो कहीं ना कहीं हमें ये इंडिकेट कर रहा है कि जो गणेश्वर जोधपुरा कल्चर है और जो हमारा इंडस वैली सिविलाइजेशन है दोनों के बीच में कुछ ना कुछ ट्रेड कॉन्टैक्ट जो थे वो इस समय पर एग्ज़िस्ट होते थे। ठीक है? चलिए अब आगे बात करते हैं। चलिए भाई तो अब इंटरनल ट्रेड के बाद बात करते हैं एक्सटर्नल ट्रेड की कि जो इंडस वैली सिविलाइजेशन है उसमें एक्सटर्नल ट्रेड किस तरीके से और कहां से किया जाता था? तो अगर हम बात कर रहे थे कॉपर की तो कॉपर एक जगह तो कहां से बुलाया जा रहा है? राजस्थान के खेत्री माइन से। और वहीं पर कॉपर का एक और सोर्स है व्हिच इज द ओमान। तो ओमान से कॉपर का ट्रेड किस तरीके से हो रहा है और इसका क्या एविडेंसेस हमारे पास हैं उसको अब हम यहां पर डिस्कस करते हैं। सो कॉपर वाज़ ब्रॉट फ्रॉम ओमान और इसलिए हमें हड़प्पा से एक जार मिला हुआ है। अब वो जार इस कहानी को कैसे सही बता रहा है? उसकी हम बात करते हैं। सो अ लार्ज हड़प्पन जार कोटेड विद ब्लैक क्ले वाज़ फाउंड फ्रॉम ओमान। ठीक है? कि ये जो जार है ये हमें कहां से मिला हुआ है? ओमान से। और ओमान के साथ यहां यह बताया जा रहा है कि इस जार को कोट किया जाता था इस तरीके से एक काली मिट्टी के थ्रू ताकि इस जार में जो लिक्विड भरा जाए वो लिक्विड परकुलेट ना हो और ये भी माना जाता है कि दैट दिस लिक्विड वाज़ एक्सचेंज्ड इन द फॉर्म ऑफ द वाटर सिस्टम विद द ओमान। ठीक है? मतलब कि क्या हो रहा है कि भाई ओमान से कॉपर खरीदा जाएगा और बदले में हड़प्पा के जो लोग हैं, इंडस वैली सिविलाइजेशन के जो लोग हैं, वो बदले में उन्हें ये जो लिक्विड है, वो उनसे एक्सचेंज करते थे। नाउ अब कैसे हमें पता चला कि भाई कौन सा जो कॉपर है वो ओमान का है और कौन सा जो कॉपर है वो खेत्री का है उसको हम डिस्कस करते हैं। सो अकॉर्डिंग टू द केमिकल एनालिसिस से हमें ये चीज पता चला है दैट ओमानी कॉपर एंड द हड़प्पन आर्टिफेक्ट्स हैव द ट्रेसेस ऑफ निक। ठीक है? कि भाई ओमान का से आया हुआ जो कॉपर है उसमें कॉपर के साथ-साथ जो निकल है वो मिला हुआ है और जो कहीं ना कहीं इस बात को प्रूफ कर रही है कि ये जो कॉपर है क्योंकि ये एक्सक्लूसिवली ओमान में ही मिलता था। इसीलिए ये जो कॉपर है ये ओमान से आया हुआ था। नाउ हड़प्पन एक्सचेंज द कंटेंट ऑफ दीज़ वेसल्स विद द ओमानी कॉपर। ठीक है? चलिए अब बात करते हैं उस मेसोपोटामियन टेक्स्ट की जो इस बात को और ज्यादा इबोरेट करके हमें बता रही है। सो द मेसोपोटामियन टेक्स्ट जो मिला हुआ है थर्ड मिलेनियम बीसी के आसपास बना हुआ ये टेक्स्ट अब हमें क्या बता रहा है उसकी हम बात करते हैं। सो यहां पे ये चीज बताई जा रही है कि भाई मेसोपोटामिया के लोग भी ना कॉपर को यहां पर एक्सपोर्ट इंपोर्ट कर रहे हैं। अब जब वो इसे इंपोर्ट कर रहे हैं तो इसे मंगाया जा रहा है एक जगह से जिसका नाम है मगान। एंड मगन की अगर हम बात करें तो दिस इज दी प्रेजेंट डे नथिंग बट दी ओमान। ठीक है? तो ओमान जो है उसको थर्ड मिलेनियम बीसी में मगान कहा जा रहा है। और उस मगान से ही क्या कर रहे हैं? मेसोपोटामिया के लोग भी कॉपर को मंगा रहे हैं। सो एंड इंटरेस्टिंगली इनफ कॉपर फाउंड एट मेसोपोटामियन साइट्स आल्सो कंटेन द ट्रेसेस ऑफ़ निक। मतलब समझ रहे हैं आप बात कि भाई ये बात और ज्यादा पुख्ता प्रूफ हो गई कि भाई ओमान ही है एक ऐसी जगह जहां से जो कॉपर आ रहा है उसमें निकल है। अब मेसोपोटामिया के पास जो कॉपर जा रहा है उसमें भी कॉपर के साथ निकल है और हमारा जो इंडस वैली सिविलाइजेशन में आ रहा है उसमें भी कॉपर के साथ निकल है। तो कहीं ना कहीं ये बात जो है वो हिस्टोरियन आर्कलॉजिस्ट के अकॉर्डिंग बिल्कुल प्रूफ हो गई कि इन दोनों सिविलाइजेशन का जो सोर्स है कॉपर का वो ओमान है या फिर आप बोल लीजिए कि मगान है। नाउ दिस मेसोपोटामियन टेक्स्ट हैज़ आल्सो एफसाइज़्ड कि उनका किस-किस जगह से यहां पर अगर आप देखें तो ट्रेड कॉन्टैक्ट्स होते थे। तो इनके ट्रेड कॉन्टैक्ट्स हैं दिलमुन जिसे प्रेजेंट डे बहरीन आप बोल रहे हैं। उसके बाद मगन व्हिच इज़ नथिंग बट दी ओमान एंड द ग्रेट मेलूहा। मेलुहा कौन है भाई? मैलुहा है हमारा इंडस वैली सिविलाइजेशन। ठीक है? इसमें आप बहुत अच्छे से देख सकते हो। ये मैप जो है ये ट्रेड को बहुत अच्छे से बता रहा है कि भाई ये रहा मगन का पार्ट। यह रहा हमारा दिलमुन और यह रहा मेलुहा। इन तीनों के साथ ट्रेड होता था किसका? मेसोपोटामियन सिविलाइजेशन का। और यहां पर जो कॉपर का ट्रेड है वो इसी अरेबियन सी का जो रूट है उससे इस तरीके से यहां पर ट्रांसफर हुआ करता था। नाउ मेसोपोटामिया के जो लोग हैं वो भी मेलुहा के साथ ट्रेड कर रहे हैं। तो किस-किस प्रोडक्ट की ट्रेड कर रहे हैं उसकी हम लोग बात करते हैं। सो द प्रोडक्ट फ्रॉम मेलुहा लाइक कार्निलियन, लैपिस लजुली जो अफगानिस्तान के रीजन से आ रहा था। कॉपर खेतरी माइन से भी कॉपर लेकर जा रहे हैं। गोल्ड हमारा कर्नाटक या कोलार गोल्ड फील्ड से जा रहा है। एंड वैरायटी ऑफ़ वुड है ना भाई? वुड की तो वहां पे कमी थी। हम लोग बहुत अच्छे से पढ़ चुके हैं। तो ये सारी चीजें जो है वो मेसोपोटामिया की कहां जा रही हैं? सॉरी हमारी जो इंडस वैली सिविलाइजेशन की है मेलवाहा की है। वो जा रही है कहां पे? मेसोपोटामिया में। नाउ मेलोहा इज आल्सो नोन ऐज़। ये मेसोपोटामियन टेक्स्ट जो है वो हमें ये बता रहा है कि यहां के जो लोग हैं वो मेलहा को बोलते थे द लैंड ऑफ सीफियरर्स। ठीक है? कि मतलब कि यहां ऐसे लोग हैं जो लंबे-लंबे वयाज को करने के लिए तैयार हैं। और ये एक डिपिक्शन भी बताया गया है एक सील के ऊपर जिसके ऊपर बोट्स बनी हुई हैं। ठीक? तो ये जो चीज है ये इस बात को और अच्छे तरीके से कहीं ना कहीं प्रूव कर रही है। नाउ अब यहां पर एक टेक्स्ट है और ये जो टेक्स्ट है ये एक और बात हमें बता रहा है दैट मे योर बर्ड बी द हाजा बर्ड। ठीक है? कि यहां पर जो मेलवा के लोग हैं वो यह बोल रहे हैं कि भले ही आपके बर्ड का नाम क्या है? हाजा बर्ड है। मे इट कॉल बी हर्ड इन द रॉयल पैलेस। ठीक है? लेकिन उसकी जो आवाज है वो आप रॉयल पैलेस में भी सुन सकते हैं। तो यहां पे कहने की बात ये है कि भाई इंडिया से जो सामान आ रहा है वो मेसोपोटामिया के लोगों के जो रॉयल पैलेसेस हैं वहां पर भी इन चीजों को यूज़ किया जा रहा है। एंड दिस हाज़ा बर्ड इज़ नथिंग बट व्हाट? पिकॉक। ठीक है? तो भाई पीकॉक जो है उसका आप बोल लीजिए कि भाई ये दिखाया जा रहा है कि यहां से जो पिकॉक आ रहा है या आप बोल लीजिए कि बेसिकली अगर बोल तो सिग्निफाई कर रहे हैं वो इंडिया से आए हुए सामान का तो उसका जो प्रेजेंस है वो मेसोपोटामिया के रॉयल पैलेसेस में भी देखने को मिल रहा है। ठीक है? चलो आगे बढ़ते हैं। नाउ अब हम बात करेंगे सील स्क्रिप्ट एंड राइटिंग की कि भाई यहां पर सील है, स्क्रिप्ट है, राइटिंग है, वेट है। इन सब चीजों की यहां पर क्या बात हो रही है? तो सबसे पहले बात करते हैं सील एंड सीलंग। देखो बेटा सील का क्या यूज़ है कि भाई जब भी कोई ट्रेड करने के लिए कोई पैकेज प्रिपेयर होगा तो अब वो सही सलामत उसके आप बोल लीजिए कि रिसीवर तक पहुंच जाए। इसके लिए क्या जरूरी है कि उसकी पैकेजिंग जो है वो बढ़िया तरीके से की जाए और उसके ऊपर सील जो है वो भी अच्छे से लगाई जाए। है ना? जैसे कि अगर हम बात करें कि आप Amazon से, Flipkart से कोई भी प्रोडक्ट जो है वो आपने ऑर्डर किया। अब अगर उसकी पैकेजिंग खराब मिलती है तो हम क्या कर देते हैं? उसको रिटर्न कर देते हैं। तो इसलिए बोला भी जाता है कि भाई अगर आपका जो पैकेज है वो डैमेज है तो आप उसको मत लीजिए। तो वैसे ही जो हमारे इंडस वैली सिविलाइजेशन के जो लोग हैं वो अपना जो प्रोडक्ट है वो ठीक-ठाक तरीके से उसके रिसीवर तक पहुंच जाए। इसीलिए उसकी पैकिंग को इंटैक्ट करने के लिए सील्स का यूज करेंगे कि एक बड़ा सा बैग होगा। उसके माउथ को एक तरीके से टाई किया जाएगा और उसके ऊपर सील लगा दी जाएगी और जब वह उसके रिसीवर तक पहुंचेगी तो हमें पता चल जाएगा कि भाई वो जो प्रोडक्ट है वो किसी ने भी अनट्ड है। किसी ने उसको यूज़ नहीं किया और वो फ्रेश जो है वो हम तक पहुंचा हुआ है। सो नाउ द सील एंड सीलिंग्स यूज्ड टू कंफर्म द कम्युनिकेशन फॉर अ लॉन्ग डिस्टेंस। है ना? ये जो सील एंड सीलिंग्स हैं ये हमें ये भी बताती हैं कि भाई ये प्रोडक्ट जो है वो जा रहा है। वो आया कहां से है? कौन इसका ट्रेडर है? उसका आइडेंटिफिकेशन मार्क्स जो हैं वो सारे के सारे उन सील्स के ऊपर बने हुए होते थे। सो द सीलिंग इंडिकेट द आइडेंटिटी ऑफ़ द सेंडर एंड कंटेनिंग द नेम एंड टाइटल ऑफ द ओनर। ठीक है? कि भाई जिसने भेजा हुआ है उसका नाम और उसका टाइटल जो है वो इस तरीके से इन सीलिंग्स के ऊपर बना हुआ होता था। जैसे कि आप देख सकते हो इस सील में कि यहां पर कुछ लिखा हुआ है कि भाई मछलियां बनी हुई हैं। कोई हो सकता है ओनर का नाम हो। यहां पे एक साइन बना हुआ है एनिमल का और ये एनिमल कहां से मिल रहा है कि भाई इंडस वैली सिविलाइजेशन से मिल रहा है। तो कहीं ना कहीं ये सारी चीजें हमें ये बता रही हैं कि भाई ये सारी चीजें कहां से आ रही है? इंडस वैली सिविलाइजेशन से। तो जो ओनर है जो ट्रेडर है उसका मार्क्स से हम आइडेंटिफाई कर रहे हैं कि भाई ये सामान कहां से आया हुआ था। देन अब ये तो बात हो गई भाई इन सील के ऊपर क्योंकि कुछ ना कुछ लिखा हुआ था। लेकिन जो लिखा हुआ था वो तो कोई पढ़ ही नहीं पाया। सो दैट इज व्हाई द स्क्रिप्ट ऑफ द इंडस वैली सिविलाइजेशन इज़ आल्सो कॉल्ड दी एनेगमैटिक स्क्रिप्ट। क्यों एनगमैटिक स्क्रिप्ट बोल रहे हैं? क्योंकि भाई जो लिखा वो पढ़ ही नहीं पा रहे हैं। वो अनडिसाइफर्ड है। मतलब कुछ समझ नहीं आ रहा है जेठालाल टाइप्स। है ना? कि भाई आप क्या बोल रहे हो? क्या लिख दिया? आटा कांटा पत्ता क्या लिख दिया? दिया अब्बा डब्बा चब्बा कुछ समझ ही नहीं आ रहा है। ठीक है? तो अब उसी की बात करते हैं कि क्यों हड़प्पा की जो स्क्रिप्ट है उसको एक एनेगमैटिक स्क्रिप्ट जो है वो बताया जा रहा है। नाउ यहां पे बात हो रही है कि हड़प्पा सिविलाइजेशन से कई सारे हमें ऐसे इं्रिप्शंस मिले हैं जिनके ऊपर कुछ ना कुछ चीजें लिखी हुई हैं। अब बहुत सारे शॉर्ट हैं लेकिन कई सारे जो हैं जिनमें से एक जो हमें कालीबंगन से जो हमें धौलावीरा से मिला हुआ है वो अगर आप उसकी बात करें तो वो एक बड़ा सा साइन बोर्ड है जिसमें 26 लेटर्स जो हैं वो उसके ऊपर लगे हुए हैं। लेकिन जो लिखा हुआ है दैट इज अनडिसाइफर्ड। ठीक है? और ना ही यह किसी भी एक प्रॉपर अल्फाबेटिकल ऑर्डर में लिखा है। कोई भी चीज कहीं भी लिख दी है। मतलब कुछ समझ में नहीं आ रहा है कि भैया क्या हो रहा है। ठीक नाउ अब अगर आप इसकी बात करें तो टोटल अगर हम पूरे हड़प्पन सिविलाइजेशन से मिले हुए स्क्रिप्ट की अगर हम बात करें इं्रिप्शंस की बात करें तो उनसे हमें 375 से लेके 400 साइंस तक लिखे हुए हैं। एंड रिटन फ्रॉम राइट टू लेफ्ट। मतलब कि जो लिखा हुआ है वो जनरली इस तरीके से राइट हैंड सॉरी इधर राइट हैंड डायरेक्शन से आपका लेफ्ट हैंड से लिखा जाएगा। ठीक है? अब ये बात कैसे पता चली कि भाई राइट टू लेफ्ट लिखा कि लेफ्ट टू राइट लिखा। तो भाई ये चीज इस तरीके से पता चली हुई है कि जब वो लिख रहे थे तो उन्होंने राइट से लिखना शुरू किया और जब लेफ्ट में पहुंचे तो वहां पर इस तरीके से क्रैंपिंग दिख रही है। तो वो क्रैंपिंग क्या इंडिकेट कर रहा है कि भाई क्योंकि वहां पे स्पेस का शॉर्ट हो गया था, शॉर्टेज हो गया था और इस वजह से अब वो जो है कैंपिंग जो है वो हमें वहां पर देखने को मिल रही है। नाउ द एविडेंसेस ऑफ लिटरेसी ऑल अराउंड। ठीक है? कि भाई ये जो चीजें हैं ये हमें ये बता रही है कि क्योंकि इंडस वैली सिविलाइजेशन में सभी लोग पढ़े हुए थे इसलिए जो राइटिंग्स है वो हमें किसी भी चीजों के ऊपर मिल जा रही है। जैसे कि अगर हम बात करें तो भाई इनकी सील हो गई, कॉपर टूल्स हो गए, रिम्स ऑफ जार्स हो गए, कॉपर एंड टेराकोटा टैबलेट्स हो गई, ज्वेलरी, बोन रोड्स हर तरीके की जो चीजें हैं उनके ऊपर कुछ ना कुछ लिखा हुआ है। तो जो क्या इंडिकेट कर रहा है कि भाई जरूरी है कि वहां पे हर कोई पढ़ा लिखा होगा। इसीलिए उन चीजों के ऊपर कुछ ना कुछ मेंशन है। ठीक? तो ये सारी चीजें जो हैं वो हमें हड़प्पा की जो स्क्रिप्ट है उसके बारे में पता चल रहा है। और दिस शोज़ दैट द हड़प्पन स्क्रिप्ट इज कॉल्ड द एनगमैटिक स्क्रिप्ट। ठीक है? चलिए अब अगर हम आगे बात करें तो वेट्स की बात करते हैं कि भाई जब ट्रेड हो रहा है तो जरूरी है कि मेजरमेंट होता होगा किसी ना किसी चीजों का वेट किया जाता होगा। तो वो वेट के लिए जो पैरामीटर है जो स्टैंडर्ड है वो किस तरीके से सेट किया गया उसकी हम यहां पर बात करेंगे। सो द वेट वेट वर यूज्ड टू एक्सचेंज रेगुलेटेड बाय अ प्रिसाइज सिस्टम ऑफ वेट। कि जिस भी तरीके का ट्रेड हो रहा है, जिस भी तरीके का एक्सचेंज हो रहा है, वो किया जाता है एक प्रिसाइज सिस्टम ऑफ वेट के थ्रू। ठीक है? अब ये वेट कैसे बनाए गए हैं? तो क्यूबिकल स्टोन इस तरीके से आप देखिए कि छोटे-छोटे जो क्यूबिकल स्टोंस हैं उनके फॉर्म में वेट्स बनाए जाएंगे जो चर्ट नाम का एक स्टोन है उसके थ्रू एंड वर यूज्ड विदाउट मार्किंग। ठीक है? कि उनके ऊपर सिर्फ स्टोन है। छोटा-छोटा स्टोन है और उसके ऊपर कुछ लिखा नहीं हुआ है कि ये 10 ग्राम का है, 5 ग्राम का है, 100 ग्राम का है। बस वेट बने हुए हैं छोटे-छोटे। और अब जो एक्सचेंज करने वाला होगा वो अपने हिसाब से कोई भी वेट को वहां पे रख सकता है। मतलब समझ रहे हो कि भाई फिश दिमाग है। है ना? कि कभी भी कुछ भी रख दिया। बोल दिया सामने वाले को तो पता नहीं है तो 50 ग्राम तोलने की जगह 10 ग्राम का वेट रख दिया और 10 ग्राम तोल के दे दिया। ठीक है? तो यही तो मतलब बिज़नेस। दिस इज़ बिज़नेस। समझ रहे हो? नाउ अब अगर हम बात करें तो यहां पे जो डिनोमिनेशंस है मतलब जो वेट है उसको दो तरीके से डिवाइड किया गया। जो लोअर डिनोमिनेशंस थे मतलब जहां पर छोटे-छोटे वेट्स को कैलकुलेट करना है तो वहां पर वो लोग बाइनरी सिस्टम्स का यूज़ करते थे। जैसे कि वन टू फिर उसके बाद डबल फिर फोर फिर एट फिर 16 है ना? इस तरीके से उन्होंने क्या किया? उस जो बाइनरी सिस्टम का जो वेट होता है उसके फॉर्म में लोअर डिनॉमिनेशंस को कैलकुलेट करते थे। और जब बात होगी हायर डिनोमिनेशंस की तो उनके लिए डेसिमल सिस्टम का यूज किया जाएगा। मतलब कि 10 20 60 इस तरीके से उसको यूज करेंगे वो। ठीक है? तो यहां बताने की बात ये है कि भैया जो अगर आप छोटा सामान ले रहे हैं तो वहां पे जो छोटे व्यापारी होंगे उनके लिए जो वेटिंग स्केल्स होंगे वो अलग होंगे और जब आप कोई भारी सामान लेंगे बड़ा सामान लेंगे तो वहां पे जो वेटिंग स्केल्स होंगे वो अलग होंगे। अब इसके साथ-साथ ये भी देखा कि भैया ये लोग मेटल स्केल पेन मतलब कि तराजू यूज करते थे। ठीक? सामान को तोलने के लिए, नापने के लिए और जो जनरली छोटे-छोटे वेट्स हैं उनका यूज किया जाता था ज्वेलरी और बीड्स। मतलब सीधी सी बात है ना कि अगर आप किसी सब्जी वाले के पास जाओगे तो उसका जो नापने का जो तरीका होगा, तोलने का जो तरीका होगा वो अलग होगा। एज कंपेयर टू जब आप किसी जूलर के पास जाओगे तो उनके पास एक छोटी सी मशीन होती है। उसमें वो उस तरीके से 2 ग्राम 10 ग्राम तोल के देते हैं आपको। है ना? तो सीधी सी बात है कि भाई स्मॉलर स्केल्स जो होंगे वो एक तरीके से प्रिशियस आइटम जैसे ज्वेलरी और बीड्स के लिए यूज करे जाएंगे और जो दूसरी चीजें हैं जो भारी चीजें हैं उनके लिए मेटल स्केल पेंस जैसी चीजों का यूज किया जाता था। ठीक है चलिए अब आगे बढ़ते हैं। अब बात करते हैं पैलेसेस एंड किंग्स की कि भाई ये जो हमारा इंडस वैली सिविलाइजेशन है इसमें अथॉरिटी थी या भी नहीं मतलब पॉलीटिकल सिस्टम किस तरीके से हुआ करता था यहां पे। अब यहां पर कई सारे डाउट्स हैं कि भाई पॉलिटिकल सिस्टम था या नहीं था। बट अभी तक हम जो भी चीजें पढ़कर आ रहे हैं उसमें तो कहीं ना कहीं हमें इंडिकेशन मिल ही रहा है कि भैया कोई ना कोई तो था जो इस पूरे सिस्टम को चला रहा है। अब कौन है वो इंसान उसकी बात करते हैं या पहले ये तो देखें कि भाई ऐसे कौन-कौन से एविडेंसेस हैं जो इस बात को प्रूफ कर रहे हैं कि वहां पर आप एक तरीके से बोल लीजिए कि कोई पॉलिटिकल अथॉरिटी थी। सो द इंडिकेशन ऑफ कॉम्प्लेक्स डिसीजन बीइंग टेकन एंड इंप्लीमेंटेड इन द हड़प्पन सोसाइटीज। ठीक है? जैसे कि क्या हुआ कि भाई हमने ये देखा कि जो हमारा हड़प्पन सिविलाइजेशन था उसमें जो आर्टिफेक्ट्स हैं वो यूनिफॉर्म थे। मतलब एक ही तरीके की टेक्निक से बनाए जा रहे हैं और कुछ सिमिलर तरीके के ही शेप्स जो हैं उनमें वो यहां पर देखा गया। शेप बोल लीजिए, आप कलर बोल लीजिए, टेक्निक बोल लीजिए। पूरे के पूरे सिविलाइजेशन में जहां पर भी आर्टिफेक्ट बनाए जाएंगे वो उसी तरीके से देखने को मिले। अब ये चीज कहीं ना कहीं ये नहीं इंडिकेट कर रही कि भाई ये यूनिफॉर्मिटी लाया कौन? है ना? हमने क्या देखा था कि भाई जब कंस्ट्रक्शन हो रहा है तो हर शहर एक ही तरीके से बन रहा है सिटाइडल और लोअर टाउन के फॉर्म में। तो ये जो यूनिफॉर्मिटी है ये भी तो लाने वाला कोई एक कॉमन इंसान ही होगा। ठीक है? उसके साथ भले ही कंस्ट्रक्शन अलग-अलग जगहों पर हो रहे हैं। लेकिन उसके लिए जो ईंट बनेगी जो ब्रिक बनेगी उसका भले वो ईंट जम्मू में बन रही हो या फिर आपके गुजरात में बन रही हो। सब जगह पर उस जो ब्रिक का साइज होगा जो रेश्यो होगा वो सेम होगा 4:2 1 अब ये रेश्यो डिसाइड करने वाला इंसान कौन है उसकी भाई ये तो बात हो रही है कि भाई रेशो डिसाइड किसने किया कि पूरे सिविलाइजेशन में सेम ब्रिक बनेगी और सब लोग उसको फॉलो भी कर रहे हैं। ठीक? देन स्ट्रेटेजिक लोकेशन ऑफ दी सेटलमेंट्स। ठीक है? कि भाई ऐसा कैसे हो गया कि कोई भी सेटलमेंट जो है वो किसी और जगह मतलब लोनली प्लेसेस पे ना बनकर सब के सब किसी ना किसी स्ट्रेटेजिक लोकेशनेशंस पर बने हुए हैं। तो जरूर कोई ना कोई होगा जो इन सेटलमेंट्स को बना रहा होगा। इनको बसा रहा होगा। देन द मोबिलाइजेशन ऑफ लेबर। जब हम लोग ये बात कर रहे हैं कि मैसिव लेवल पे कंस्ट्रक्शन हो रहा है तो उस कंस्ट्रक्शन को करवाने वाला भी तो कोई इंसान होगा जो उन लेबरर्स को गाइड कर रहा होगा कि अब तुम्हें इस फील्ड में काम करना है फिर अब ये बनाना है फिर सिटाडल बनाना है फिर ये बनाना है वो बनाना तो ये जो पूरा मोबिलाइजेशन का काम है उन लेबर्स को गाइड करने का काम है ये जरूर किसी ना किसी पॉलिटिकल अथॉरिटी के थ्रू ही किया जा रहा होगा बट हु ऑर्गेनाइज दिस एक्टिविटी कौन है वो पॉलिटिकल अथॉरिटी ये अभी हमारे दिमाग में बहुत बड़ा क्वेश्चन है जिसको अब अब हम सॉल्व करेंगे। चलिए। सो आर्कियोलॉजिकल रिकॉर्ड्स प्रोवाइड नो इमीडिएट आंसर। मतलब ऐसा हमें कोई भी रिकॉर्ड नहीं मिला है आर्कियोलॉजिकल सोर्सेस में जो बिल्कुल सही तरीके से इस बात को प्रूव कर दे कि हां जो इंडस वैली सिविलाइजेशन था उसमें एक पॉलिटिकल अथॉरिटी थी। बट यहां पर भी हमें कई सारे इंडिकेशंस मिले हैं जो इस तरह कि कोई ना कोई पॉलिटिकल अथॉरिटी थी उसको हमें इंक्लाइन कर रही है। तो यहां पर अगर हम बात करें तो मोहनजोदड़ो जैसी जो टाउनंस हैं यहां पर उसमें बड़ी-बड़ी बिल्डिंग्स मिली हुई हैं। लार्ज बिल्डिंग्स व्हिच आर क्लासिफाइड एज पैलेसेस। ठीक है? कि भाई क्योंकि बाकी जितने भी शहर थे उनमें कहीं पर भी इतनी बड़ी बिल्डिंग नहीं मिली है जितनी कि मोहनजोदड़ो में मिली थी। तो शायद ऐसा हुआ होगा कि भाई राजा जो है वो इसी ही बिल्डिंग में रहता होगा और यही उसका घर होगा। दैट इज व्हाई इट इज कैटेगराइज्ड एज पैलेस। ठीक है? वैसे ही अगर आप बात करें हड़प्पा की तो हड़प्पा में भी इस तरीके से बड़ी-बड़ी बिल्डिंग मिली हुई हैं। तो कहीं ना कहीं हिस्टोरियंस के दिमाग में ये चीज थी कि ऐसा हो सकता है कि यहां पर एक कैपिटल ना होकर दो कैपिटल भी हुआ होंगी। ठीक है? तो एक जो चीज हमें इस पॉइंट को प्रूव कर रहा है वह यह की भाई लार्ज बिल्डिंग मिल रही है मोहनजोदड़ो में व्हिच इज कॉल्ड एज़ पैलेस। देन स्टोन स्टैचू ऑफ द प्रीस्ट किंग। ठीक है? कि भाई यहां पर एक स्टोन स्टैच्यू मिला हुआ है इस तरीके से एक आदमी का जिसको बोला जा रहा है प्रीस्ट किंग। ठीक है? मतलब कि अगर आप बात करें तो ये एक ऐसी पर्सनालिटी है जो ना सिर्फ रिलीजियस पर्पसेस के लिए बल्कि पॉलिटिकल पर्पससेस के लिए भी उस पूरे सिविलाइजेशन के हेड माने जाते हैं। और ऐसी ही एक पर्सनालिटीज का जो रिेंबलेंस है वो हमें कहां मिल रहा है कि भाई मेसोपोटामिया में भी एक ऐसा इंसान होता था जो इस तरीके की आप बोल सकते हो पोस्ट या टाइटल को हेल्ड करता था। तो जरूर क्योंकि ये दोनों सिविलाइजेशन कंट कंटेंपरेरी है। तो भाई जरूर ऐसा होता हो क्योंकि वहां पर हैं तो यहां पर भी होते होंगे। ठीक है? तो वो चीज क्या है कि भाई जो प्रीस्ट किंग एक ऐसा बड़ा सा स्टैचू मिला हुआ है इस तरीके के एक आदमी का जिसको ट्रिफोइल पैटर्न में एक शॉल उड़ाई हुई है। बढ़िया अथॉरिटेटिव फिगर लग रहा है ये। ठीक है? जो इस बात को कहीं ना कहीं प्रूव कर रहा है कि दिस वाज़ दी प्रीस्ट गेट। और ये जो है वो वहां की जरूर कुछ ना कुछ पॉलिटिकल अथॉरिटी हुए होंगे। नाउ द रिचुअल प्रैक्टिससेस वर नॉट अंडरस्टुड येट नर नोन वेदर दोज़ हु परफॉर्म देम आल्सो हैड दी प्रैक्टिकल पावर्स। पॉलिटिकल पावर्स। ठीक है? मतलब की बात यह है कि भाई यहां पे जितने भी रिचुअल्स थे उनको समझा नहीं जा सका है और ना ही यह समझा जा सका है कि भाई ये जो काम कर रहा है जो इन रिचुअल्स को पूरा कर रहा है क्या वो सच में कोई पॉलिटिकल अथॉरिटी थे या नहीं थे। ठीक है मतलब कि कहने की बात ये है कि भाई एविडेंसेस तो मिले हुए हैं लेकिन उसका कोई पुख्ता सबूत जो है वो हमें यहां से नहीं मिला हुआ है। ठीक है? चलिए अब बात करते हैं डिफरेंट व्यूज की कि ये जो पूरी चीजें हमने पढ़ी उसके बारे में जो हिस्टोरियंस हैं वो अलग-अलग क्या व्यूज रख रहे हैं? तो कुछ हिस्टोरियंस जो हैं वो ये बोल रहे हैं दैट हड़प्पन सोसाइटी वाज़ विदाउट रूलर एंड एवरीबडी हैव दी सेम स्टेटस। मतलब कि यहां पर आप एक तरीके से बोल लीजिए कि जो हमारा पूरा हड़प्पन सिविलाइजेशन है वो एग्टेरियन स्टेट है। एग्िटेरियन सोसाइटी है वेयर एवरीवन इज़ इक्वल। क्योंकि हर चीज में अगर आप यूनिफॉर्मिटी देख रहे हैं। सेम चीजें देख रहे हैं। मतलब कि ये कि कोई ऊंचनीच का भेद नहीं है। सभी लोग इक्वल हुआ करते थे। बट ये चीज तो गलत है भाई। हमने तो देखा ऊंचनीच का भेद कि भाई कुछ लोग तो भाई सिटडल में रह रहे हैं। कुछ लोग जो हैं वो लोअर टाउन में रह रहे हैं। कुछ लोग जो उनके बरियल्स हैं उनके साथ प्रिशियस आइटम्स दफनाए जा रहे हैं। उनकी बरियल्स अलग हैं और कुछ लोग जो हैं वो कॉमन तरीके से नॉर्मल गड्ढों में दफनाए जा रहे हैं। ठीक है? तो ये सारी जो चीजें हैं ये कहीं ना कहीं इस बात को प्रूफ कर रही हैं कि नहीं ऐसी सोसाइटी नहीं थी कि वहां पर सारे लोग जो हैं वो इक्वल स्टेटस को लेकर आए होंगे। नाउ अब देयर वाज़ नो सिंगल रूलर बट सेवरल। कुछ लोग यह बोल रहे हैं, कुछ हिस्टोरियंस यह बोल रहे हैं कि नहीं नहीं ऐसा कुछ नहीं है कि एक ही रूलर है और वो पूरे सिविलाइजेशन को रन कर रहा है। नहीं यह बात हो सकती है कि हर जो सिटी है वो अपने आप में इंडिपेंडेंट है और एक जो सिटी स्टेट जैसा जो कांसेप्ट होता है वो यहां पर हुआ होगा कि हर सिटी के पास अपना एक एडमिनिस्ट्रेटर होगा और वही एडमिनिस्ट्रेटर उस पूरी सिटी को रन करता होगा। ठीक है? तो एक सिंगल रूलर की जगह पर ऐसा हो सकता है कि पूरा जो सिविलाइजेशन है उसमें अलग-अलग रूलर्स जो होंगे वो हुआ करते होंगे। नाउ अब कुछ लोग कुछ और रीजन भी दे रहे हैं दैट देयर वाज़ अ सिंगल स्टेट। ये बोल रहे हैं कि भाई एक यूनिफॉर्म एक यूनियन तरीके का जो एक ऑर्गेनाइजेशन होगा वो यहां पर एकिस्ट करता होगा। एक सिंगल रूलर होगा जो कि मोहनजोदड़ो में बैठता होगा और वहां से पूरे सिविलाइजेशन के जितने भी अलग-अलग टाउनंस है सिटीज हैं उनको वहां से रन करता होगा। और ये जो है ये सबसे ज्यादा प्लॉज़िबल या आप बोल सकते हो कि सबसे ज्यादा एक्सेप्टेबल यहां पर व्यू माना जाता है। क्योंकि ये चीज देखी गई कि भाई जो सारी चीजें अगर यूनिफॉर्म हो रही है चाहे फिर आप वो कंस्ट्रक्शन की बात कर दे, स्टैंडर्डाइजेशन की बात कर दे, प्लानिंग की बात कर दें। हर जगह अगर एक ही तरीके की चीजें फॉलो करी जा रही हैं। दैट मींस कि एक ही इंसान है जो इस पूरे सिविलाइजेशन को रन कर रहा है या रूल कर रहा है। ठीक है? चलिए तो चलिए भाई अब बात करते हैं कि ये जो हमारा इंडस वैली सिविलाइजेशन है वो कैसे उसके डिक्लाइनिंग फेस की तरफ आगे बढ़ रहा है या ऐसे क्या डेवलपमेंट्स हो रहे हैं जो उसको खत्म करने में या उसके नष्ट करने के कहीं ना कहीं उसके पास ले जा रहे हैं। तो ये चीज देख रहे हैं आर्कियोलॉजिस्ट कि अराउंड 1800 सीई के आसपास की अगर हम बात करें तो कई सारी मैच्योर हड़प्पन साइट जैसे कि चोलस्तान जो है अब वो अचानक से अबंडन हो चुकी है। खत्म हो चुकी हैं। उसके साथ-साथ ये देखा जा रहा है कि अब जो पपुलेशन है वो एक्सपेंड कर रही है ईस्टर्न तरफ। मतलब कि अगर हम बात करें तो भाई गुजरात की बात कर लें हरियाणा, राजस्थान, वेस्टर्न उत्तर प्रदेश है ना कि भाई पहले जो सेटलमेंट्स थे वो इंडस के किनारे या आप बोल लीजिए कि पाकिस्तान अफगानिस्तान का जो रीजन था वहां पर थे। बट अब जो हैं वो एक नई जगह पर शिफ्ट हो रहे हैं। व्हिच इज द इंडिया जिसको आप बोल लीजिए कि गुजरात हो गया, हरियाणा हो गया, वेस्टर्न यूपी हो गया। वहां पर अब जो सेटलमेंट्स हैं वो धीरे-धीरे बन रहे हैं। उसके बाद अगर हम बात करें तो भाई देयर वाज़ अ ट्रांसफॉर्मेशन इन द मटेरियल कल्चर। कि पहले जिन चीजों से आर्टिफेक्ट्स बनाए जा रहे हैं अब उस चीज का अगर आप बोल सकते हो कि एक तरीके से जो मटेरियल था रॉ मटेरियल था वो चेंज हो रहा है। सो द डिसअपीयरेंस ऑफ द डिस्टिंक्टिव आर्टिफेक्ट्स लाइक द वेट सील से स्पेशल बीड्स। इन सभी जो हड़प्पन सभ्यता की कहीं ना कहीं खासियत थी। अब वो कहीं ना कहीं यहां पर आप बोल सकते हो कि एक तरीके से डिसअपीयर हो रहे हैं, देखने को नहीं मिल रहे हैं। नाउ इसके कुछ स्पेशल फीचर्स जैसे कि राइटिंग, लॉन्ग डिस्टेंस ट्रेड, क्राफ्ट स्पेशलाइजेशन हैज़ आल्सो डिसअपीयर्ड। जो प्रोमिनेंट फीचर्स थे अब वो भी कहीं ना कहीं नहीं दिख रहे हैं। नाउ जो हाउसेस कंस्ट्रक्शन टेक्निक्स हैं आल्सो डेटोरिएटेड। लार्ज इन पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर वाज़ आल्सो नॉट फाउंड। और ये कहीं ना कहीं इंडिकेट कर रहा है कि भाई अब जो हमारा हड़प्पा सिविलाइजेशन है वो उसके मैच्योर फेज को छोड़कर कहीं ना कहीं अब वापस से एक जो रूरल वे ऑफ लाइफ थी उसमें एंटर कर रहा है। तो इसी वजह से हम लोग क्या बोल रहे थे कि भाई हमारा जो सिविलाइजेशन है वो शुरुआत में रूरल फेस पे था। फिर उसके जेनेथ पर पहुंचकर मैच्योर या अर्बन फेस की तरफ पहुंचा और फिर उसका जो डिक्लाइनिंग फज़ है अब वो उसमें वापस से जो उसकी रूरल लाइफ है उसमें वो एंटर कर रहा था। ठीक है? चलिए अब बात करते हैं कि जो हिस्टोरियंस हैं वो इस चीज का अलग-अलग एक्सप्लेनेशन दे रहे हैं। कोई नेचुरल रीज़ंस को यहां पर गलत ठहरा रहा है। कोई बोल रहा है कि इन्वैशन हो रहे हैं। तो ये जो अलग-अलग रीज़ंस हैं, एक्सप्लेनेशंस हैं उनकी हम बात करते हैं। सो देयर वाज़ अ क्लाइमेटिक चेंज। कुछ लोग बोल रहे हैं कि भाई सडनली यहां पर अगर हम बात करें इस रीजन की तो कुछ ना कुछ क्लाइमेटिक चेंज हुआ। जिसकी वजह से इस रीजन में डिफॉरेस्टेशन या फिर शिफ्टिंग और ड्राइंग ऑफ द रिवर हो गया या फिर एक्सेसिव लैंड यूज हुआ। है ना? ऐसा बोला जाता है कि अचानक से ऐसा हुआ शायद कि यहां से गुजरने वाली जो सरस्वती रिवर थी उसने अपने कोर्स को चेंज किया और जब उसने कोर्स को चेंज किया तो उसके बैंक पर बने हुए जितने भी यहां पर हमने क्या देखा था कि भाई इंडस तो थी ही लेकिन मेजर जो सेटलमेंट्स थे वो सरस्वती रिवर पर थे। तो जब उसने अपना कहीं ना कहीं कोर्स चेंज किया या जब वो खत्म हो गई एक तरीके से ड्राई हो गई तो उस वजह से वो जितने भी सेटलमेंट्स थे वो अपने आप अबंडेंट होने लगे। उसके साथ-साथ डिफॉरेस्टेशन भी एक कॉज बोला। अब ये भी देखा गया कि भाई क्योंकि उसके अर्बन फज़ में इन्होंने ओवर यूटिलाइजेशन ऑफ रिसोर्सेज किया होगा। तो शायद इस वजह से भी यहां पर हो सकता है कि अब जो नेचुरल रिसोर्सेज हैं वो रीप्लनिश नहीं हो पा रहे हैं। देन होल्ड फॉर सर्टेन सेटलमेंट्स बट नॉट दी कोलैप्स ऑफ द एंटायर सिविलाइज़ेशन। कि भाई ये जो रीजन है ये कहीं ना कहीं कुछ छोटे-मोटे सेटलमेंट्स के लिए तो ठीक है कि भाई जो सरस्वती के रिवर पर बैंक पर बने हुए होंगे वो शायद खत्म हो गए हो। लेकिन पूरा सिविलाइजेशन जिनमें से कुछ जो सेटलमेंट्स थे वो पोर्ट टाउन थे या कुछ जो हैं वो अफगानिस्तान में हैं वो सब के सब एकदम से कैसे खत्म हो गए ये कहीं ना कहीं एक जानने और समझने की बात है। नाउ दूसरा जो यहां पर एक चीज बता रहे हैं वो ये द स्ट्रांग यूनिफाइंग एलिमेंट व्हिच इज द हड़प्पन स्टेट केम टू एन एंड। ठीक है? कि भाई वो फोर्स जिसको हम सिंगल रूलर या सिंगल पॉलिटिकल फोर्स बोल रहे हैं। शायद ऐसा हुआ होगा कि जब वो सिंगल फोर्स यहां पर खत्म हुआ जब वो यहां से चला गया तो शायद इस वजह से पूरा जो सिविलाइजेशन था वो कहीं ना कहीं उसके डिक्लाइन की तरफ आने लगा। क्यों? ये हमने चीज कब नोटिस करी? जब हमें डिसअपीयरेंस दिखा क्राफ्ट और सिटीज का कि भाई वो इंसान जो यहां पर यूनिफॉर्म वे में क्राफ्ट या सिटीज को मैनेज कर रहा था। अब वो चीज हमें नहीं दिख रही है। तो शायद यही बात हुई होगी कि जो इनका कॉमन इंसान था जो एक सिंगल पर्सन था वो यहां से डिसअपीयर हो रहा है। नाउ इसके साथ-साथ कई सारे मिक्स्ड कॉसेस भी हैं। जैसे कि आर्यन इन्वैशन, पॉलिटिकल प्रेशर, सक्सेसिव कल्चर। यह सारी चीजें भी जो हैं कहीं ना कहीं इंडस वैली सिविलाइजेशन के डेकलाइन का एक कॉज मानी और समझी जाती हैं। अब यहां पर अगर हम बात करें तो हमें एक सोर्स दिया हुआ है जहां पर हिस्टोरियंस जो हैं वो अपने अलग-अलग व्यूज रख रहे हैं इंडस वैली सिविलाइजेशन के डिक्लाइन के लिए। तो चलिए बात करते हैं। एविडेंसेस ऑफ एन इन्वेजन। जहां पर क्या बताया जा रहा है कि यहां पर कई सारे हिस्टोरियंस जो हैं वो ये बोल रहे हैं कि जरूर इंडस वैली सिविलाइजेशन पर अटैक हुआ होगा आर्यंस का। और आर्यंस ने जब इस सिविलाइजेशन को खत्म किया तो उसके बाद ये सिविलाइजेशन खत्म हुआ और इंडिया में वापस से आर्यन ऐज या फिर आप जिसको वैदिक कल्चर बोल रहे हैं उसकी शुरुआत यहां पर देखी गई थी। सो सबसे पहले हम बात करते हैं जॉन मार्शल की। जॉन मार्शल बात करते हैं कि यहां पर हमें एक सिटी है जिसमें एक लाइन है या जिसको आप बोल सकते हो कि एक गली है जिसको यहां पर उन्होंने कैटेगराइज किया है एज अ डेडमैन लेन। क्यों इसे डेडमैन लेन बोला जा रहा है? बिकॉज़ दिस इज अ नैरो एली। एक पतली सी गली है। और वहां पर अगर आप देखेंगे वेयरिंग फ्रॉम थ्री टू 6 फीट विड्थ। है ना? कि भाई पतली सी गली है और तीन से 6 फीट की इसकी कुछ विड्थ हुई होगी। एंड एट द पॉइंट वेयर द लैंड टर्न्स वेस्ट। जब ये अपने वेस्ट में टर्न लेती है तो यहां पर कई सारे इन्हें स्केलेटन दिखते हैं। लाइक इट इंक्लूड द स्कल, द बोन ऑफ़ द थोरेक्स, द अप्पर आर्म्स ऑफ़ द एडल्ट्स वर डिस्कवर्ड। ऑल इन अ फ्रीबल कंडीशन ऑफ़ द डेप्थ ऑफ़ 4 फीट इन 2 इंचेस। ठीक है? कि भाई यहां पर एक इंसान के जो आप बोल सकते हो स्केलेटन के अलग-अलग टुकड़े मिल रहे हैं जो यह बता रहे हैं कि जरूर यहां पर क्योंकि आप मोड़ पे जा रहे हैं किसी सड़क के और वहां पर अगर आपको इस तरीके से स्केलेटन मिलेगा तो शायद ऐसा ही हुआ होगा कि भाई अटैक हुआ था। इस वजह से वो जो लाश है वो वहां पर अपने आप ही पड़ी हुई और बाद में उसका डीकंपोज़िशन हो गया। नाउ द बॉडी लेयज़ ऑन इट्स बैक डायगोनली अक्रॉस द लेन 15 इंचेस टू द वेस्ट वेयर अ फ्यू फ्रेगमेंट्स ऑफ़ अ टेनी स्किल एंड दिस रिमेन द लेन लैंड लैंड ओन इट्स नेम कि शायद इसीलिए क्योंकि बार-बार वहां पर अलग-अलग स्केलेटन्स मिल रहे हैं। शायद इसी वजह से जो हिस्टोरियंस उन्होंने उसको नाम दे दिया अ डेडमैन लेन। ठीक। उसके बाद यहां पर एक और इंस्टेंस है जिसकी यहां पर बात करी जा रही है जो दिया हुआ है आर एम वेलर ने उनकी बुक हड़प्पा 1946 एंशिएंट इंडिया 1947 ठीक। अब ये जो किताब है ये हमें क्या बता रही है कि 16 स्केलेटन ऑफ द पीपल विद द ऑर्नामेंट दैट वर वेयरिंग व्हेन दे डाइड ऑन फ्रॉम द फाउंडेशन वाज़ द पार्ट ऑफ मोहनजोदड़ो इन 1925 कि यहां पर 16 स्केलेटन मिले हैं जो बढ़िया तरीके से ज्वेलरी वुलरी पहनकर वहां पर मिल रहे हैं। अब ये चीज कैसे कि भाई अगर किसी को दफना दिया तो ज्वेलरी कैसे पहना हुआ है वो उसकी बात करते हैं। सो मच लेटर इन 1947 आरएम बेलर जो हैं हु वर द डायरेक्टर जनरल ऑफ़ एएसआई ही को-रिलेटेड दिस आर्कलॉजिकल एविडेंसेस विद द ऋग्वेदा। ऋग्वेद में यह बताया हुआ है कि भाई आर्यन सिविल या आप बोल लीजिए कि इंडस वैली सिविलाइजेशन के बाद आर्यंस का इंडिया में अटैक हुआ। और उन्होंने कहीं ना कहीं एक गॉड की वो बात कर रहे हैं जिसे कहा जा रहा है पुरंदर। या फिर आप बोल लीजिए कि इंद्र। और यह जो इंद्र है इन्हें कहा जाता है कि ही इज़ द डिस्ट्रयर ऑफ़ फोर्ट। तो इंडस वैली सिविलाइजेशन में जितने भी फोर्ट थे उनको किसने डिस्ट्रॉय किया? इंद्र ने। और इस थ्योरी से कहीं ना कहीं इस चीज को रिलेट किया जाता है। सो द ऋग्वदा मेंशंस पुर मीनिंग रैंपेड फोर्ट्स और स्ट्रांग होल्ड्स। इंद्र द आर्यन वारगॉड इज़ कॉल्ड पुरेंद्र मींस द फोर्ट डिस्ट्रयर। वेयर आर और वेयर दी सिटैडल्स। कहां पर हैं ये सिटडल्स? ओके। सो इट हैज़ द पास्ट बीन सपोज़ इट इज़ मिथिकल। लेकिन बाद में यह बताया कि भाई नॉन आर्यन टाइप्स के यह थे जो फॉर्मली वहां पर सेटल्ड सिविलाइजेशन था और बाद में यहां पर जब यहां पर आप बोल सकते हो कि इंद्र आए तो उन्होंने इन सारे फोर्ट्स को कहीं ना कहीं यहां पर क्या कर दिया? खत्म कर दिया। ठीक? उसके बाद एक और यहां पर एक एक सब दिया हुआ है जो जीएफ डेल्स का है जो इस चीज को प्रूफ कर रहे हैं उनकी बुक में। द मिथैकल मसाकर एट द मोहनजोदड़ो। अब यहां पर ये चीज़ बताई जा रही है कि इन द 1960 एविडेंसेस मिले हुए हैं। एंड दिस वाज़ क्वेश्चन बाय द आर्कलॉजिस्ट नेम जॉर्ज टेल्स। ही डेमोंस्ट्रेटेड दैट स्केलेटन्स वर फाउंड एट द साइड डिड नॉट बिलोंग टू द सेम पीरियड। है ना? कि भाई जितने भी स्केलेटन मिल रहे हैं वो जरूरी अगर वहां पे वॉर हुई होती तो सारे के सारे स्केलेटन एक ही समय के मिलते। बट ऐसा तो है नहीं। जितने भी स्केलेटन है वो अलग-अलग पीरियड के हैं। तो ये कहीं ना कहीं जो वॉर की थ्योरी जो इन्वजन की थ्योरी आप बता रहे हैं उसको निगेट करती है। उसको गलत साबित करती है। वेयर एज अ कपल ऑफ़ देम डेफिनेटली सीम टू इंडिकेट अ स्लॉटर बट बोनस ऑफ़ देम कंटेक्स्ट ब्यूरल ऑफ़ द स्लोपिएस्ट। मतलब इररेिलेवेंट तरीके से वहां पर बॉडीज को दफनाया गया है। देयर इज़ नो डिस्ट्रक्शन लेवल कवरिंग द लेटेस्ट पीरियड ऑफ़ द सिटीज़ एक्सटेंसिव। और ना ही हमें कोई ऐसी बॉडीज मिली हैं वॉरियर की जो एक तरीके से क्लैड है आर्मर से। अगर वॉरफेयर हुआ होता तो जरूर कुछ सिपाही होते। कुछ ऐसे आर्मी मैन होते जब इनकी डेथ होती तो वो कोई स्वर्ड मिलती हमें या एक तरीके से बोल लीजिए कोई वेपन मिलता। वैसा कोई भी एविडेंस हमें इंडस वैली सिविलाइजेशन से नहीं मिल रहा है जो इस वॉर की थ्योरी को इन्वेशन की थ्योरी को वापस से नेगेट कर रहा है। नाउ अब एक और थ्योरी की बात करते हैं। सो एज यू कैन सी अ केयरफुल एग्जामिनेशन ऑफ़ द डेटा कैन समटाइम लीड्स टू द रिवर्सिबल ऑफ दी अर्लियर इंटरप्रिटेशन। ठीक है? कि भाई ऐसा होगा कि जब हमें कोई नया एविडेंस मिलेगा तो उसकी वजह से जो पुराना इंटरप्रिटेशन है वो अपने आप ही गलत साबित हो जाएगा। इन दिस रिस्पेक्ट यहां पर एक और चीज चीज की बात हो रही है व्हिच इज़ कैरिड आउट एट दी साइट ऑफ राखीगढ़ी। राखीगढ़ी की अगर हम बात करें। सो दिस इज़ द लार्जेस्ट डिस्कवर्ड साइट जिसका एरिया जो था ये काफी बड़ा है और दिस इज़ लोकेटेड इन द प्रेजेंट डे हिसार डिस्ट्रिक्ट ऑफ़ हरियाणा। अब यहां पर ये चीज़ बताई जा रही है कि इन ऑर्डर टू स्टडी द जेनेटिक हिस्ट्री ऑफ द हड़प्पस। ये देखा गया द डीएनए वाज़ एक्साजरेट एक्सट्रैक्टेड फ्रॉम द स्केलेटन रिवेंस एक्सकवेटेड इन राखीगड़ी कि भई जितने भी स्केलेटन्स थे उनमें से डीएनए निकाला गया एंड द रिसर्च वाज़ कैरिड आउट बट द डेक्कन कॉलेज डीम्ड यूनिवर्सिटी पुणे। पुणे में इस चीज़ की जो डेक्कन कॉलेज है वहां पर इस चीज़ की रिसर्च करी गई। अब यहां पर ये देखा गया कि द एनालिसिस इंडिकेट द हड़प्पन आर द इंडीजीनियस पीपल ऑफ़ द रीजन। अब क्या बताया गया कि भाई जो राखीग घड़ी से जो स्केलेटन मिले उनमें जब जींस देखा गया डीएनए देखा गया तो ये पता चला कि भाई ये तो वही लोग हैं जो ओरिजिनल इनहबिटेंट है इस प्लेस के। ठीक है? तो अगर कोई ये बोल रहा है कि ये बाहर से आए हुए लोग हैं या किसी ने अटैक किया तो ऐसी कोई भी चीज है वो नहीं हो सकती है। आगे ये चीज़ ये बताई जा रही है द जेनेटिक रूट्स ऑफ़ द हड़प्पन गो बैक टू 10,000 बीसीई। एंड द डीएनए ऑफ द हड़प्पस हैज़ कंटिन्यूड टिल टुडे द मेजॉरिटी ऑफ़ द साउथ एशियन पापुलेशन अपीयर्स टू बी देयर डिसेंडेंट। ठीक है? मतलब बताने की बात ये है कि भाई वहां से राखीगढ़ी से जो भी जींस मिल रहे हैं वो इंडिया में रहने वाले लोगों के ओरिजिनल इनहबिटेंट्स के जीन जो है वो ये मिल रहे हैं। और अब हमारी जो भी सक्सेसिव जनरेशंस आ रही हैं उनमें भी ये जो जींस है ये देखने को मिल रहा है। नाउ ड्यू टू ट्रेड एंड कल्चरल कॉन्टैक्ट्स ऑफ़ द हड़प्पन विथ अ डिस्टेंट ट्रेन देयर इज़ अ मिक्स ऑफ़ सर्टेन क्वांटिटी ऑफ़ जींस। ठीक है? लेकिन ये कंटिन्यूटी देखी गई कि ये जेनेटिक ऑर्डर जो है वो लंबे समय तक यहां पर देखा जा रहा है। नाउ द रिसर्च आल्सो इंडिकेट दैट अ पीपल कमिंग फ्रॉम बॉर्डरिंग एरियाज डिस्टेंट रीजंस अब्सॉर्ब्ड इन द इंडियन सोसाइटी एट नो स्टेट जेनेटिक हिस्ट्री ऑफ़ द इंडियंस वाज़ इदर डिस्कंटिन्यूड ऑोकन। ठीक है? सो एज़ द हड़प्पन स्टार्टेड मूविंग टुवर्ड्स द सेंट्रल एशिया देयर जींस आल्सो ग्रेजुअली स्प्रेड इन दीज़ रीजंस। ठीक है? कि बाद में जब जो हड़प्पंस हैं वो ईस्ट ईस्टर्न एरिया में या आप बोल सकते हो सेंट्रल एशिया के रीजन में जब वो स्प्रेड हुए तो बाद में भी ये जो जींस है ये उधर की पपुलेशन में भी आप बोल सकते हो कि ये चीजें देखने को मिली। नाउ द सेम टीम ऑफ रिस्चरर्स कंस्ट्रक्टेड 3D फीचर्स ऑफ द हड़प्पन पीपल दे रिकंस्ट्रक्टेड फेशियल फीचर्स ऑफ द हड़प्पन। इस तरीके से एक फेशियल फीचर का जो रिकंस्ट्रक्शन है वो क्रिएट किया गया जो कहीं ना कहीं सिमिलर है प्रेजेंट डे ह्यूमन से। सो अ मेल फीमेल शोज़ रिमारकेबल सिमिलरिटी विद द मॉडर्न पॉपुलेशन ऑफ द हरियाणा एंड दस दिस सोसाइटी इंडिकेटेड अ ब्रोकन कंटिन्यूटी फॉर 5000 इयर्स। ठीक है? मतलब ये बताया जा रहा है कि भाई जो हड़प्पा के लोग हैं उन्हीं के जीन से बने हुए हम लोग भी हैं। हरियाणा में रहने वाले लोग भी हैं जो कहीं ना कहीं एक कल्चरल हिस्ट्री को हमारे यहां पर एम्फसाइज कर रहा है। हमें बता रहा है। ठीक है? चलिए। अब यहां पे एक आर्कियोजेनेटिक की भी बात करी गई है। दिस इज़ व्हाट दिस इज़ दी स्टडी। जब आप क्या करते हैं कि भाई जो स्केलेटन्स हैं उनका यूज करके उनके डीएनए का यूज़ करके हिस्ट्री को ट्रेस करने की कोशिश करते हैं। सो दैट ब्रांच ऑफ़ स्टडी इज़ कॉल्ड आर्कियोजेनेटिक्स। सो इट इज़ दी स्टडी ऑफ़ डीएनए ऑफ़ दी एंशिएंट पापुलेशन। इट इन्वॉल्व्स वेरियस मेथड्स ऑफ़ मॉलिक्यूलर जेनेटिक्स टू अंडरस्टैंड दी पपुलेशन ऑफ दी हिस्ट्री। ठीक है? ये चीज जो है वो यहां पर देखी जा रही है। चलिए चलिए भाई तो बात करते हैं अब कि भाई जो हिस्टोरियंस हैं उन्होंने किस तरीके से इंडस वैली सिविलाइजेशन में जो अलग-अलग चीजें मिल रही हैं उनको एक साथ अरेंज किया हुआ है और उसके बाद जो फाइनल आप एक तरीके से बोल लीजिए जो पिक्चर है वो हमारे सामने लाई गई। सो दिस इज़ अबाउट द डिस्कवरिंग द हड़प्पा एंड सिविलाइजेशन। अब सबसे पहले अगर हम शुरुआत में बात करें तो यहां पर एक्सपीरियंस हमें बताया जा रहा है एलेक्जेंडर कनिंघम का कि उनके साथ किस तरीके से चीजें जो हैं वो यहां पर हुई हैं और क्या उनका रोल एंड कंट्रीब्यूशन है। सो वी विल स्टार्ट विद द अलेग्जेंडरर्स या फिर कनिंघम्स कन्फ्यूजन। सो अलेग्जेंडर कनिंघम हु वाज़ दी फर्स्ट डायरेक्टर जनरल ऑफ द आर्कलॉजिकल सर्वे ऑफ़ इंडिया। इन्होंने जब यहां पर आर्कलॉजिकल एक्सकवेशन शुरू किया इन द मिड 19 सेंचुरी तो उन्होंने सबसे पहले प्रेफरेंस दिया हुआ था लिटरेरी सोर्सेस के ऊपर। ठीक? क्योंकि यहां से उनका जो मेन इंटेंशन था या जो मेन आप बोल सकते हो फोकस है वो जनरली अर्ली हिस्टोरिक डेज मतलब कि सिक्स्थ सेंचुरी बीसी से लेकर फोर्थ सेंचुरी सीई तक का जो टाइम पीरियड है उसकी वो यहां पर बात करते हैं कि वहां पर किस तरीके से आप बोल लीजिए कि इंडिया में क्या-क्या हिस्टोरिकल डेवलपमेंट्स हुए हुए थे। लेकिन अगर हम बात करें हमारे इंडस वैली सिविलाइजेशन की तो वो पूरा की पूरा टाइम पीरियड इस पूरे ज़ोन से अलग है और आगे है। तो इस कारण से कहीं ना कहीं अगर हम बोलें तो एलेक्जेंडर जो हैं वो इस चीज कीेंस जो है वो कहीं ना कहीं समझ नहीं पा रहे हैं। क्यों? क्योंकि ही बेसिकली गवेंस टू द रिटन वर्ड्स। ठीक है? है जो इं्रिप्शंस और लिटरेरी सोर्सेस में मिला हुआ है। और इसीलिए वो यूज करते थे इन सारे अकाउंट्स के लिए फॉर द अकाउंट्स लेफ्ट बाय द चाइनीस बुद्धिस्ट पिल्गिम्स। कि चाइनीस बुद्धिस्ट पिल्गिम्स जो इंडिया में आए हुए थे और उन्होंने अपना जो भी एक्सपीरियंस चाइनीस टेक्स्ट में लिखा हुआ था उसको यूज करके ही वो कहीं ना कहीं इंडिया की हिस्ट्री के बारे में पता कर रहे थे। लेकिन अगर हम बात करें हड़प्पा का तो वो तो उनकी आइडिनरी में कहीं से कहीं तक फॉल कर नहीं रहा है। तो इसी वजह से हड़प्पा की जोेंस थी हिस्टोरिकलेंस जो है हड़प्पा की उसको एलेक्जेंडर जो हैं वो समझ नहीं पाए हैं। सो फर्स्ट ही स्टार्टेड एक्सकवेटिंग द साइट एंडेड टू रिकवर कई सारे आर्टिफेक्ट्स एंड आर्ट कल्चरल वैल्यूज़ बट ही मिस्ड दीेंस ऑफ़ दी हड़प्पाज़ एट इट वाज़ नॉट दी पार्ट ऑफ द आइटनरी ऑफ़ दी चाइनीज़ पिल्गिम्स नोन एज दी अर्ली हिस्टोरिक सिटीज। ठीक है? देन अगर हम बात करें सो ऑलदो हड़प्पा आर्टिफेक्ट्स वर फाउंड ऑफन फेयरली ऑफन ड्यूरिंग द 19 सेंचुरी के इनके टाइम पर कई सारे हड़प्पा में जो आर्टिफेक्ट्स हैं वो मिल रहे हैं। बट उनके बारे में जो रिसर्च है वो अलेक्जेंडर कनिंघम के समय पर नहीं हो पा रही है। और इसी वजह से जब उन्हें एक सील मिली तो ही फेल टू अंडरस्टैंड दी इंपॉर्टेंस कि भाई इस सील के ऊपर क्या लिखा हुआ है? क्या उसके साइन है? ठीक है? उन सभी चीजों के ऊपर अलेग्जेंडर के टेन्योर पर ध्यान नहीं दिया गया। अब अगर हम आगे बात करें तो एक आगे जाकर जब जॉन मार्शल आर्कलॉजिकल सर्वे के डायरेक्टर जनरल बनेंगे तो उनके समय पर यहां पर कई सारे डेवलपमेंट जो हैं वो हम यहां पर देख रहे हैं। सो इन 1921 जब सील मिल रही है किसे? दयाराम साहनी को हड़प्पा जैसी सिटी से तो वहां पर अब लार्ज स्केल पर एक्सकवेशन होना शुरू होगा और रैपिडली वन बाय वन कई सारे जो सेटलमेंट्स हैं वो यहां पर मिलेंगे। सो 1921 में दयाराम साहनी जो है वो हड़प्पा को एक्सकवेट करना शुरू करते हैं। 1922 में राखलदास बनर्जी जो हैं वो यहां पर आप बोल लीजिए कि मोहनजोदड़ो पर यहां पर एक्सकवेशन करना शुरू करेंगे। एंड इट लेड टू द सिमिलरिटी ऑफ़ दीज़ साइड्स कि भाई ये सारे के सारे जो हैं और जब इस तरीके से एक्सकवेशन हुआ तो ये भी पता चल रहा है कि जितने भी सिटीज और जितने भी सेटलमेंट्स मिल रहे हैं वो सेम ही आर्कलॉजिकल कल्चर को बिलोंग कर रहे हैं। ठीक? उसके बाद क्या देखा जा रहा है कि भाई फाइनली जॉन मार्शल हु वास द डायरेक्टर जनरल ऑफ द एएसआई 1924 में एक नया सिविलाइजेशन जो इंडिया में है उसको अनाउंस कर रहे हैं जिसका नाम है द इंडस वैली सिविलाइजेशन तो इंडस वैली सिविलाइजेशन जो नाम दिया गया वो जॉन मार्शल के थ्रू और अब वो वर्ल्ड को ये बता रहे हैं कि भाई इंडिया में जो है वो एक ऐसी प्राचीन सभ्यता जो थी व्हिच वाज़ कंटेंपररी ऑफ द मेसोपोटामियन सिविलाइजेशन इजिप्टियन सिविलाइजेशन वो जो है वो भारत में लंबे लंबे समय तक एकिस्ट करती रही। अब इस वजह से जो हिस्टोरियन है एसए रॉय वो अपनी बुक द हिस्टोरी ऑफ़ द इंडियन आर्कियोलॉजी में जॉन मार्शल के बारे में लिख रहे हैं दैट द मार्शल लेफ्ट द इंडिया 3000 इयर्स ओल्डर देन ही फाउंड हर। ठीक है? मतलब कि वो ये बता रहे हैं कि भाई जॉन मार्शल को जैसे इंडिया मिला हुआ था उन्होंने उस इंडिया को 3000 साल पीछे लेकर चले गए थे। ठीक है? तो ये जो बात है ये अलग-अलग हिस्टोरियंस जो हैं वो यहां पर बता रहे हैं। चलिए तो अब बात करते हैं जॉन मार्शल की कि ही वाज़ दी फर्स्ट आर्कियोलॉजिस्ट हु वाज़ प्रोफेशनल। ठीक है? कि अगर हम एलेक्जेंडर कनिंघम की बात करें तो भाई वो उनका जो बैकग्राउंड था वो मिलिट्री का था। बट जॉन मार्शल एक ऐसे इंसान थे हु वाज़ दी प्रोफेशनल आर्कियोलॉजिस्ट टू वर्क इन इंडिया। और यहां पर इन्होंने यूटिलाइज़ किया हुआ है अपने एक्सपीरियंस को जो वो लेकर आए थे ग्रीस और क्रीट में काम करने के बाद। नाउ लाइक कनिंघम ही वाज़ आल्सो इंटरेस्टेड इन द स्पेक्टकुलर फाइंड्स एंड कीन टू लुक द एवरीडे लाइफ। अब जब इन्होंने एक्सकवेशन करना शुरू किया हुआ है तो इनके एक्सकवेशन में जो एक गलती हुई जिसकी वजह से कई सारे जो आप बोल सकते हो कि इंपॉर्टेंट चीजें हमसे मिस हो गई उसकी हम बात करते हैं। सो व्हेन ही एक्सकवेटेड ही एक्सकवेटेड अलोंग द रेगुलर हॉरिजॉन्टल यूनिट्स। मतलब कि जब एक्सकवेशन हो रहा है तो इंस्टेड ऑफ स्ट्रेटिफाइंग मतलब कि इस तरीके से लेयर बाय लेयर एक्सकवेशन करने की जगह पर इन्होंने इस तरीके से हॉरिजॉन्टली एक्सकवेशन किया और जब इस तरीके से हॉरिजॉन्टल वे में एक्सकवेशन होगा तो उसकी वजह से ये देखा जाएगा कि भई डिफरेंट लेयर्स में जो चीजें मिलनी है वो उस पीरियड के अकॉर्डिंग अरेंज ना होकर एक ही साथ मिल रही कई सारी जो चीजें हैं उसमें अरेंज कर दी गई हैं। सो अ ही एक्सकमिटेड अलोंग द रेगुलर हॉरिजॉन्टल लाइन मेजर्ड यूनिफॉर्मली थ्रूउ द माइ माउंट्स इग्नोरिंग द स्टैटोग्राफी स्टैटोग्राफी ऑफ़ दी साइट्स नाउ एंड आर्टिफेक्ट्स रिकवर्ड फ्रॉम द सेम यूनिट्स वर ग्रुप टुगेदर। सो दे वर फाउंड एट द डिफरेंट स्टैटगिफ लेयर्स। ठीक है? तो ये सारी जो चीजें हैं वो यहां पर देखी गई हैं। और जिसकी वजह से कई सारी इंफॉर्मेशन जो वैल्यूुएबल इनेशन थी हमारी दैट वाज़ लॉस्ट। ठीक? तो ये जो गलती हुई जॉन मार्शल की वजह से उसको हम यहां पर देखें। अब अगर हम बात करें तो भाई आर्कियोलॉजिस्ट के अकॉर्डिंग साइंटिफिक वे में जो एक्सकवेशन होता है वो किस तरीके से होता है? सो साइट माउंट्स एंड लेयर्स की हम लोग बात करेंगे। सो आर्कियोलॉजिस्ट साइट्स आर फाउंड थ्रू द प्रोडक्शन यूज़ एंड डिस्कार्डिंग एंड द मटेरियल्स ऑफ दी स्ट्रक्चर। ठीक है? कि सबसे पहले क्या होगा कि भाई वहां पर यूज किया जाता है। फिर उसके बाद मटेरियल्स को डिस्कार्ड किया जाता है और फिर उस लेयर को छोड़ दिया जाएगा। नाउ व्हेन पीपल कंटिन्यू टू लिव इन द सेम प्लेस देयर कॉन्सेंट यूज़ रयूज ऑफ द लैंडस्केप रिजल्ट इन द बिंडिंग ऑफ द ऑक्युपेशनल डेबरीज कॉल्ड दी माउंट। ठीक है? कि जब लोग कंटीन्यूअसली किसी एरिया को यूज़ करेंगे तो वहां पर एक माउंट क्रिएट होने लगेगा। नाउ ब्रीफ और परमानेंट अबंडमेंट रिजल्ट इन द अल्टरेशन ऑफ लैंडस्केप बाय विंड और वाटर एक्टिवली इरोजन। ठीक है? कि भाई जब लोग उस चीज को अबंडन कर देंगे तो अब वहां पर जो नेचर है वो भी अपने कई सारे एलिमेंट्स के थ्रू उस जगह पर अपना इफेक्ट जो होगा वो दिखाने की कोशिश करेगा। एंड ऑक्युपेशन आर डिटेक्टेड बाय द ट्रेसेस ऑफ़ द एंशिएंट मटेरियल फाउंड इन एयर विद डिफरेंट फ्रॉम वन अदर इन कलर, टेक्सचर एंड द आर्टिफेक्ट्स दैट आर फाउंड इन देम। ठीक है? कि भाई जब हम एक लेयर से दूसरी लेयर में एक्सकवेशन करना पहुंचेंगे तो वहां पर वो जो पहली लेयर होगी वो दूसरी लेयर से उसके कलर टेक्सचर और जो आर्टिफेक्ट्स मिल रहे हैं उसमें अलग देखी जाएगी। नाउ द अबेंडनमेंट और द डिजशन व्हाट आर कॉल्ड स्टेराइल लेयर्स। ठीक है? जिसको छोड़ दिया गया पहले उसको स्टेराइल लेयर्स कहा जाएगा। एंड कैन बी आइडेंटिफाइड विद द एब्सेंस ऑफ़ सच ट्रेसेस। कि वो लेयर्स जिसके ऊपर कुछ भी नहीं मिल रहा है जिसको छोड़ दिया गया दैट वाज़ स्टेराइल लेयर्स। नाउ जनरली द लोएस्ट लेयर्स आर द ओल्डेस्ट एंड हाईएस्ट आर दी मोर रीसेंट कि भाई जो सबसे नीचे मिल रहा है वो सबसे पुराना होगा और जो सबसे ऊपर के लेयर में सामान मिल रहा है वो सबसे नया होगा। नाउ द स्टडी ऑफ़ दीज़ लेयर इज़ कॉल्ड स्ट्रेटोग्राफी। ठीक? उसके बाद आर्टिफेक्ट्स फाउंड इन दिस लेयर्स कैन बी असाइन टू अ स्पेसिफिक कल्चर पीरियड एंड डस प्रोवाइड द कल्चरल सीक्वेंस फॉर अ साइट। ठीक है? कि भाई ये जो लेयर्स हैं इनको पढ़कर इनको अंडरस्टैंड कर कर हम बहुत अच्छे से किसी भी जगह की जो हिस्ट्री है उसको बढ़िया तरीके से समझ सकते हैं। सो द स्टैटोग्राफी ऑफ़ अ स्मॉल माउंट नोटिस द लेयर दैट आर नॉट हॉरिजॉन्टल। यहां पर आप देखिए कि जितनी भी लेयर्स हैं वो पूरी की पूरी वन बाय वन लेयर बाय लेयर उनको अरेंज किया गया है। इंस्टेड ऑफ़ अरेंजिंग देम इन द हॉरिजॉन्टल पैटर्न। ठीक है? चलिए अब बात करते हैं न्यू टेक्निक्स और क्वेश्चंस की जो स्टेटोग्राफी की टेक्निक लेकर आए हैं कौन? आरएम वेलर। ठीक है? तो आरएम वेलर वाज़ द डायरेक्टर जनरल ऑफ़ एएसआई इन द 1944 हु ब्रॉट मेनी चेंजेस विद हिम। वेलर रिकॉग्नाइज़ दैट इट वाज़ नेसेसिटी टू फॉलो द स्ट्रेटग्राफी ऑफ़ द माउंट रेदर दैन डिगिंग मैकेनिकली अलोंग द हॉरिजॉन्टल लाइंस। ठीक है? कि भाई जो गलती जॉन मार्शल कर चुके थे उसको हाईलाइट किया हुआ है आरएम वेलर ने और वो ये बता रहे हैं कि हमें जब एक्सकवेशन करना है तो वो लेयर बाय लेयर मींस स्टेटोग्राफी के फॉर्म में होने चाहिए। सो एज एन आर्मी ब्रिगेडियर ही ब्रॉट विद हिम मिलिट्री प्रसिशन टू द प्रैक्टिस ऑफ़ आर्कियोलॉजी। ठीक है? चलिए अब बात करते हैं व्हीलर के एक्सपीरियंस की जो उन्होंने यहां पर शेयर किया हुआ है कि जब उन्होंने यहां पर एक्सकवेशन करना शुरू किया तो वो हड़प्पा विजिट करें और उन्हें कहीं ना कहीं आप एक तरीके से बोल लीजिए कि भाई डाकुओं का जो खतरा है वो भी यहां पर दिखाई दे रहा है। चलिए अब न्यू टेक्निक्स की अगर हम बात करें तो वन बाय वन हिस्टोरियंस ने यहां पर काम किया और मॉडर्न टाइम में 1980 में कई सारी मॉडर्न साइंटिफिक टेक्निक्स जो हैं वो यहां पर एक्सकवेशन में यूज़ करी गई जिससे टू रिकवर द ट्रेसेस ऑफ द क्ले स्टोन मेटल्स प्लांट एंड एनिमल रिमेंस। आफ्टर पार्टीशन ये देखा गया कि भाई पार्टीशन के पहले क्योंकि जितनी भी हड़प्पन साइट्स थी वो मेजरली डिस्कवर्ड साइट्स जो थी वो पाकिस्तान की तरफ जा चुकी थी। तो अब इंडिया में नई साइट डिस्कवर करने के लिए वापस से रैपिड लेवल पर एक्सकवेशन यहां पर शुरू किया गया। एंड आफ्टर इंडिपेंडेंस एक्सटेंसिव लेवल पर एक्सकवेशन किया गया कच्छ में, पंजाब में, हरियाणा में एंड दीज़ एडेड टू द नंबर ऑफ साइट्स इन द हड़प्पन लिस्ट। ठीक है? तो बाद में इंडिया से हमें लोथल, कालीबंगन, राखीगढ़ी, धौलावीरा जैसी साइट्स जो हैं वो मिली हुई हैं जो इंडिया में भी इंडस वैली सिविलाइजेशन के जो एविडेंसेस हैं उसको प्रूफ कर रहा है। ठीक है? चलिए अब बात करते हैं न्यू इशूज़ की कि भाई अब जो है वो कंटेंपरेरी लेवल पर हमारे पास क्या ऐसी चीजें हैं जो अभी भी डिस्कस की जानी है। सो सम आर्कयोलॉजिस्ट आर ऑफन कीन टू ऑब्टेन अ कल्चरल सीक्वेंस। कोई ये चाहता है कि भाई जब एक्सकवेशन हो तो उसमें हमें कल्चरल सीक्वेंसेस के बारे में पता चले। सम वांट टू ट्राई द लॉजिकल अंडरलाइन ऑफ़ द लोकेशन ऑफ़ स्पेसिफिक साइट्स कि भाई ऐसा क्या लॉजिक था जिसकी वजह से उन साइट्स को एक पर्टिकुलर प्लेस पर ही लोकेट किया गया। एंड ट्राइंग टू फिगर आउट सम ट्राइंग टू फिगर आउट दी फंक्शनंस ऑफ दी आर्टिफेक्ट्स कि कुछ ऐसे-ऐसे आर्टिफेक्ट्स भी मिले हुए हैं जिनके फंक्शनंस क्या हैं वो हमें समझ में नहीं आ रहे हैं। सिंस द 1980 ग्रोइंग इंटरनेशनल इंटरेस्ट इन द हड़प्पन आर्कियोलॉजी। अब स्पेशलिस्ट ना सिर्फ इंडिया और पाकिस्तान से बल्कि इंटरनेशनल लेवल पर भी जो आर्कियोलॉजिस्ट हैं वो एक साथ आकर अपनी नई टेक्निक्स के साथ यहां पर एक्सकवेशन जो है वो कर रहे हैं। एंड टू हील द इंटरेस्टिंग रिजल्ट इन द फ्यूचर। चलिए अब बात करते हैं कि ये जो आर्टिफेक्ट्स हमें मिल रहे हैं इन्हें किस तरीके से हिस्टोरियंस ने एक साथ पीस करके एक पूरी हिस्ट्री जो है वो हमारे सामने लेकर आए हुए हैं। और ऐसी कौन सी प्रॉब्लम्स हैं जो बीइंग अ आर्कियोलॉजिस्ट ये लोग फेस करते हैं। क्योंकि फ्यूचर में आप और मैं हम सभी चाहते हैं कि भाई हम हिस्ट्री के रीजन में कुछ बहुत अच्छा काम करें। आप में से बहुत से लोग आर्कियोलॉजिस्ट भी बनना चाहते हैं। सो आर्कियोलॉजिस्ट बनने के समय आपको कौन-कौन सी परेशानियां झेलनी होती हैं उनकी अब हम यहां पर बात करेंगे। सो रेदर देन अ स्क्रिप्ट अगर हम बात करें हमारे इंडस वैली सिविलाइजेशन की तो स्क्रिप्ट के अलावा भी हमें ऐसे कई सारे मटेरियल एविडेंसेस मिले हुए हैं व्हिच अलाउस अस टू बेटर कंस्ट्रक्ट द हड़प्पन लाइफ। ठीक? अब अगर हम बात करें तो कई सारे मटेरियल जैसे कि अगर हम स्टोन, पोटरी इन सब चीजों की बात करें तो इनके अलावा जितने भी ऑर्गेनिक मटेरियल्स होते हैं जैसे कि क्लोथ, वुड आर यूजुअली डीकंपोज्ड मेनली इन द ट्रॉपिकल रीजन। कि भाई अच्छी खासी धूप पड़ रही है, अच्छी खासी गर्मी पड़ रही है और इसकी वजह से जो डीकंपोज़शन का प्रोसेस होगा वो काफी फास्ट रेट पर इस रीजन में देखा गया। नाउ वैलएबल आर्टिफेक्ट्स दैट आर फाउंड इन इंटैक्ट बट इदर इन द पास्ट और होडेड एंड नेवर रिट्रीव। ठीक है? कि भाई जो बहुत सारे एविडेंसेस थे क्योंकि वो डिक्लाई एक तरीके से आप बोल लीजिए कि डिके हो गए खराब हो गए और इस वजह से बहुत से इंपॉर्टेंट चीजें जो हमें मिलनी थी बट वो क्या हुई? हमारे हाथों से चली गई। ठीक है? सो मोस्ट ऑफ़ दी आर्टिफेक्ट्स इदर डिकेड या फिर लॉस्ट हो गए। और अगर मिल भी रहे हैं तो वो इतनी अच्छी कंडीशन में हमें नहीं मिल रहे कि उनसे कुछ अच्छा हम पता लगाया जा सकता है। नाउ अब ये जो एविडेंसेस हमें मिलते हैं इन्हें क्लासिफाई किस तरीके से करना है कि भाई कुछ अरेंजमेंट तो होनी चाहिए कि अगर कोई आर्टिफेक्ट मिला हुआ है तो हम कैसे उसके बारे में पता लगाया जाए। तो इसके लिए जो आर्कलॉजिस्ट हैं वो दो तरीके के प्रिंसिपल्स का यूज करते हैं। पहला जो प्रिंसिपल है दैट इज़ डिवीज़न इन रिस्पेक्ट ऑफ़ मटेरियल। कि भाई वो जो आर्टिफेक्ट है वो किस रॉ मटेरियल से बना हुआ है? जैसे कि अगर वो स्टोन से बने हुए हैं सारे आर्टिफेक्ट को एक कैटेगरी में फिर क्ले, मेटल, बोन, आइवरी। इस तरीके से जो आर्टिफेक्ट्स हैं उनको कैटेगराइज किया जाएगा। और जो दूसरा प्रिंसिपल होगा दैट इज़ ऑन द बेसिस ऑफ देयर फंक्शन। कि भाई किस लिए वो यूज़ किया गया? फॉर एग्जांपल वो जो आर्टिफेक्ट हमें मिला हुआ है, क्या वो एक ऑर्नामेंट है? या फिर वो एक टूल है या फिर दोनों है या फिर आप बोल लीजिए कि उसका कोई रिचुअल पर्पस के लिए यूज किया जाता था। सो ऑन द बेसिस ऑफ इट्स फंक्शनंस आर्टिफेक्ट्स को एक तरीके से अरेंज किया जाता है। अब अगर हम फंक्शन की बात करें तो हम उनके फंक्शनंस को कैसे समझेंगे? तो भाई पहली जो चीज होगी जो यहां पर काम में लाई जाती है दैट इज़ रिेंबलेंस विद द प्रेजेंट डे थिंग्स। ठीक है? कि भाई अगर हम बात करें कि कोई चीज जैसे कि जब हमने सैडल क्वेन के बारे में पढ़ा था तो जब उस तरीके के पत्थर आर्कियोलॉजिस्ट को मिले तो उन्हें लगा कि भाई जैसे प्रेजेंट डे पर इस चीज का काम एक तरीके से ग्राइंडिंग के लिए किया जाता है वैसे ही हड़प्पन सिविलाइजेशन में भी इन पत्थरों का यूज़ ग्राइंडिंग के लिए या प्रोसेसिंग ऑफ द ग्रेन के लिए यूज़ किया जाता होगा। सो बीड्स, क्वर्न्स, स्टोन, ब्लेड्स, पॉट्स इन सभी का जो फंक्शन है वो रिेंबल किया जाता है प्रेजेंट डे में कि भाई प्रेजेंट डे में उस तरीके के मटेरियल का क्या यूज़ होता है और वैसा ही उस समय पर भी इंडस वैली सिविलाइजेशन पे भी उन आर्टिफेक्ट्स का यूज़ हुआ होता होगा। देन कॉन्टेक्स्ट एंड इट वाज़ फाउंड। ठीक है? उसके बाद जिस जगह से वो मिले हुए हैं कि अगर वो हाउस से मिले हैं तो भाई उसका कुछ डोमेस्टिक यूज़ होगा। अगर वह एक तरीके से किल या फिर आप बोल किसी इंडस्ट्रियल एरिया से मिले हैं, तो उसका कुछ क्राफ्ट में यूज़ होगा। ठीक है? तो जिस भी जगह से वो मिला हुआ है वो बताता है कि वो जो आर्टिफेक्ट है उसका क्या फंक्शन रहा होगा और क्या उसका यूज़ रहा होगा। ठीक? चलिए अब अगर हम बात करें तो आर्कियोलॉजिस्ट और क्या करते हैं? सो आर्कियोलॉजिस्ट हैव टू टेक रिककोर्स टू द इनडायरेक्ट एविडेंस। कि भले ही हमें चीजें दिख रही हैं सामने बट उसको प्रूफ करने के लिए हमारे पास कुछ और अच्छे सबूत होने चाहिए। तो जब हिस्टोरियंस को कॉटन मिलता है तो इस कॉटन को प्रूफ करने के लिए उन्होंने इसको कनेक्ट किया मेसोपोटामिया से कि भाई यहां पर अगर आप एक तरीके से बोलें कि भाई जो लोग हैं वो सिंडन का यूज कर रहे हैं व्हिच इज दी कॉटन। तो उससे उन्होंने रिेंबल किया कि इसलिए इसका यूज़ होता होगा कपड़ा बनाने के लिए। और ये जो टेक्सटाइल है इस टेक्सटाइल इंडस्ट्री को प्रूफ करने के लिए अलग-अलग इनडायरेक्ट एविडेंसेस जो हैं उनकी भी यहां पर जरूरत होगी। इंक्लूडिंग द डिपेक्शन इन द स्कल्प्चर कि भाई जो हमने प्रीस्ट किंग देखा उन्होंने जो शॉल ओढ़ा हुआ था उससे भी हमें पता चला कि कॉटन तो है लेकिन क्योंकि वो शॉल ओढ़े हुए हैं दैट मींस कि इंडिया में टेक्सटाइल या वीविंग इंडस्ट्री भी रही हुई होगी। नाउ अगर हम बात करें ऑन द डेवलप टाइम फ्रेम्स ऑफ द रेफरेंस कि भाई वो जो सील है अगर कोई भी आर्टिफेक्ट हमें मिलता है तो उसे किस टाइम फ्रेम में रखना है ये भी काफी जरूरी है। तो जैसे जब हमें सील मिली तो उस सील से ही जब रिलेटिव सील्स हमें मेसोपोटामिया से मिली तब हमने ये चीज समझी कि अच्छा ये दोनों चीजें जो हैं मेसोपोटामियन सिविलाइजेशन और इंडस वैली सिविलाइजेशन दोनों एक ही कंटेंपररी समय पर देखी जा रही हैं। चलिए भाई अब बात करते हैं उन चीजों की जिनके बारे में समझने के लिए हिस्टोरियंस के पास ना तो कोई फ्यूचर में कोई रेलेवेंस है। ठीक है कि भाई ना तो प्रेजेंट टाइम में ऐसी चीजों का हम यूज़ देख रहे हैं ना ही उस समय के जो कंटेंपरेरी सिविलाइजेशंस हैं वहां पर ऐसी चीजों का यूज़ देखा गया। तो कुछ ऐसे आर्टिफेक्ट्स भी मिले हैं जिन्हें इंटरप्रेट करना हिस्टोरियंस के लिए काफी मुश्किल था। सो व्हाट वर दी प्रॉब्लम्स ऑफ इंटरप्रिटेशन? उनको अब हम डिस्कस करते हैं। तो कुछ आर्टिफेक्ट जिन्हें एक तरीके से माना जाता है कि भाई हड़प्पन सिविलाइजेशन में उनका कुछ रिचुअल या फिर आप बोल लीजिए रिलीजियस सिग्निफिकेंस होगा। उनकी यहां पर बात करी गई है। तो फर्स्ट वी हैव द फिगराइन ऑफ़ अ वुमेन। इस तरीके से एक फीमेल का फिगर है। हु वाज़ वेल ऑर्नामेंटेड। सर पर उन्होंने एक हेड गियर पहना है और कहीं ना कहीं हिस्टोरियंस यह मान रहे हैं कि शायद इन्हें एक तरीके से आप बोल लीजिए मदर गॉडेस के तरीके से हड़प्पन सिविलाइजेशन में पूजा जाता होगा। उसके साथ अगर हम देखें तो भाई हमारा जो ग्रेट बाथ मिला हुआ है मोहनजोदड़ो से एक फायर अल्टार्स जो कालीबंगन से मिले हैं वो भी कहीं ना कहीं जो रिलीजियस और रिचुअल सिग्निफिकेंस है उनको यहां पर एफसाइज कर रहे हैं। देन अगर हम बात करें तो भाई ऐसे कई सारी सील्स हैं, कई सारी जगह हैं जहां पर प्लांट मोटिव हमें देखने को मिल रहा है। नाउ दिस प्लांट मोटिव इज़ सिग्निफाइंग द नेचुरल वरशिप ऑफ द हड़प्पन सिविलाइजेशन कि जरूर यहां पर नेचर की पूजा की जाती होगी। उसके बाद अगर हम बात करें तो भाई एक पशुपति सील है जिसमें एक मेल जो हैं वो यौगिक पोश्चर में बैठे हुए हैं और उनके चारों तरफ अगर आप देखें तो अलग-अलग एनिमल्स जो हैं वो बने हुए हैं। अब कहीं ना कहीं ये बात कही जा रही है कि भाई ये जो सील है दिस वाज़ टाइटल्ड एज द पशुपति सील कि भाई वो जो एक ऐसे इंसान है जो पशुओं की सेवा के लिए उनके प्रोटेक्टर के लिए यहां पर देखे जा रहे हैं। ठीक? अब कहीं ना कहीं इन्हें यह बोला जाता है कि भाई शी और ही वास द अर्ली फॉर्म ऑफ शिवा। ठीक। देन अगर हम बात करें कि भाई यहां पर कई सारे ऐसे कोनिकल स्टोन भी मिले हुए हैं जो यह बता रहे हैं कि शायद यहां पर शिव की पूजा होती होगी लिंग के फॉर्म में। लिंग इज नथिंग बट द आप एक तरीके से बोल सकते हैं फॉलिश स्टोन व्हिच इज़ वरशिप एज अ सिंबल ऑफ शिवा। ठीक है? तो यहां पर शिवलिंग को इन कोनिकल स्टोन से कहीं ना कहीं रिेंबल किया जा रहा है। उसके साथ अगर हम देखें तो भाई हमें स्टोन स्टैचू भी मिले हुए हैं प्रीस्ट किंग के जो ये बता रहा है कि जरूर यहां पर कोई ना कोई एक रिलीजियस अथॉरिटी भी रही हुई होगी। बट उसके बाद भी कुछ चीजें ऐसी हैं जिनके बारे में कोई आप बोल सकते हो कि कोई पुख्ता सबूत नहीं है हमारे पास। जैसे कि अगर हम बात करें कि भाई जो योगिक पोश्चर में हमें एक इंसान दिख रहे हैं जो एक वहां पर बोल सकते हो कि जो चीजें बनी हुई है, एक इमेज बनी हुई है वो उसे शिव के साथ कहीं ना कहीं कांटेक्ट किया जा रहा है। बट शिव को तो ऋग्वेद में ना ही रूद्र के फॉर्म में ना ही पशुपति के नाम से टाइटल किया गया। तो भाई ये कौन इंसान है जो इस तरीके से यौगिक पोश्चर में बैठे हुए हैं? क्या वो एक ऐसे इंसान हैं जो किसी अदर वर्ल्ड के साथ कनेक्ट किए जा रहे हैं? तो दोज़ पीपल हु वर सम हाउ कम्युनिकेटिंग विद दी अदर वर्ल्ड उन्हें कहा जाता है शाम्स। ठीक है? तो क्या इनके पास कोई ऐसे सुपर नेचुरल पावर्स हैं जिनको यहां पर वो इस्टैब्लिश करने की कोशिश कर रहे हैं। ये सारे क्वेश्चंस अभी भी अनअर्थड हैं या फिर अनसॉल्व्ड हैं? अब अगर हम कंक्लूजन की बात करें तो डेकेड्स ऑफ आर्कलॉजिकल वर्क ने इंडस वैली सिविलाइजेशन में हमारे सामने कई चीजों के बारे में हमारे हमें पता लगाया है। जैसे कि अगर हम बात करें कि भाई हम हड़प्पन इकोनमी के बारे में जान चुके हैं। उनके सोशल डिफरेंसेस को जान चुके हैं। साथ ही साथ ये भी जान चुके हैं कि सिविलाइजेशन किस तरीके से फंक्शन करता था। बट अगर हम बात करें कुछ ऐसी परतें हैं जो अभी भी खुलना बाकी हैं। जैसे कि वाज़ द ग्रेट बाथ वाज़ अ रिचुअल स्ट्रक्चर? क्या वो सच में एक रिचुअल स्ट्रक्चर था? या फिर अगर हम बात करें कि जो लिटरेसी जिसको वाइड स्प्रेड देखा गया उसे फैलाई किस तरीके से गई? क्या वहां पे कोई एक ऐसा एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन है जिसकी मदद से वहां पर लिटरेसी को स्प्रेड किया गया? या फिर अगर हम बात करें कि व्हाई डू हड़प्पन सिमिट्री शोज़ लिटिल सोशल डिफरेंशिएशन कि क्यों वहां पर छोटे लेवल पर ही सोशल डिफरेंशिएशन बताया जा रहा है या फिर जैसे कि हम इजिप्ट में देख रहे हैं बड़े-बड़े जो रॉयल ब्यूरल्स हैं उस तरीके की चीजें क्यों नहीं बताई जा रही हैं? और सबसेेंट क्वेश्चन ये कि व्हाट वाज़ अबाउट दी जेंडर? कि मेल और फीमेल का सोसाइटी में क्या रोल था? उनका क्या सोशल स्टेटस था? ये जो कुछ ऐसे क्वेश्चंस हैं जिनमें फ्यूचर वर्क की सबसे ज्यादा नीड है। तो भाई बहुत सी कहानी हम देख चुके हैं लेकिन पिक्चर अभी बाकी है मेरे दोस्त जहां पर आप जैसे हिस्टोरियंस को काम करना है और इन क्वेश्चंस को सॉल्व करना है। अब अगर हम बात करें तो एक छोटा सा बॉक्स हमें दिया हुआ है अर्नेस्ट मैके के थ्रू जो हमें यह बता रहे हैं कि इस तरीके से जो स्टोन है क्या इनका कुछ रिलीजियस सिग्निफिकेंस था या फिर आप एक तरीके से बोल लीजिए इन्हें बोर्ड गेम में जो हम प्रेजेंट डे बाय चेस या फिर लूडो खेलते हैं क्या उस वजह से इन्हें यूज़ किया जाता था। तो दिस इज़ ऑल अबाउट दिस चैप्टर। एक बार हम जल्दी से इसकी जो टाइमलाइन है उसको और डिस्कस कर लेते हैं और जितने भी इंपॉर्टेंट यहां पर चीजें हुई हैं उनको एक बार जान लेंगे। तो सबसे पहले अगर हम बात करें मेजर पीरियड इन इंडियन आर्कियोलॉजी की तो सबसे पहले आता है लोअर पैलोलिथिक। सो 2 मिलियन बिफोर प्रेजेंट से लोअर पैोलिथिक आया। उसके बाद 80000 में मिडिल पैलोलिथिक, 35,000 में अपर पैोलिथिक, 12,000 में मिज़ोलिथिक और 10,000 में निज़ नियोलिथिक। नियोलिथिक वो एज थी जहां पर सबसे पहले अर्ली एग्रीकल्चर सेटलमेंट्स जो थे वो देखे गए। उसके बाद देखा गया चालकोलिथिक एज जिसमें फर्स्ट यूज़ कॉपर का देखा गया। जहां पर कॉपर और स्टोन दोनों को एक साथ यूज़ किया जाता था। देन अगर हम बात करें तो 2600 बीसी में हम लोग मैच्योर फेस देखते हैं। किसका? हमारा इंडस वैली सिविलाइजेशन का या फिर हड़प्पन सिविलाइजेशन का। 1000 बीसी में आयरन ऐज जिसे कहा जा रहा है उसको देखा गया। मेघालिथिक ऐज को देखा गया। और 600 बीसी से लेकर 600 सी का जो टाइम है वहां पर अब हम देखेंगे अर्ली हिस्टोरिक ऐज को जिसे हम कह रहे हैं द सेकंड अर्बनाइजेशन ऑफ इंडिया। ठीक? तो ये जो सेकंड अर्बनाइजेशन है इसे हम डिटेल में पढ़ेंगे हमारे अगले चैप्टर में व्हिच इज द किंग्स, फार्मर्स एंड टाउनंस। तो मिलेंगे वहां पर भी। अब उसके साथ अगर हम देखें तो मेजर डेवलपमेंट्स इन दी हड़प्पन आर्कियोलॉजी। तो 19th सेंचुरी में 1875 में एलेक्जेंडर कनिंघम जो है वो रिपोर्ट लेकर आते हैं हड़प्पन सील के लिए। देन 20थ सेंचुरी में भी कई सारे डेवलपमेंट हो रहे हैं। जैसे कि 1921 में दयाराम साहनी ने एक्सकावेशन किया हड़प्पा में। 1922 में एक्सकवेशन मोहनजोदड़ो में किया गया। 46 में आरएम वेलर जो हैं वो अपनी मिलिट्री प्रिसेसिशन को यहां पर लेकर आएंगे। 1955 में वि इज आफ्टर इंडिपेंडेंस अगर हम बोले तो एसआर राव जो हैं उन्होंने लोथल में एक्सकवेशन किया हुआ है। 1960 में बीबी लाल और बी के ठाकर ने कालीबंगन में एक्सकवेशन किया। 1975 में आईएमआर मुगल भावलपुर में एक्सकवेशन किया है। 1980 में जर्मन और इटालियन आर्कियोलॉजिस्ट जो हैं उनका कहीं ना कहीं ध्यान आ रहा है इंडियन आर्कियोलॉजी के ऊपर। और देन अगर हम 1986 की बात करें तो अमेरिकन टीम भी विजिट कर रही है हड़प्पा के एक्सकवेटेड साइट्स की तरफ। देन 1990 में आर एस बिष्ट ने धौलावीरा में एक्सकवेशन किया। 1979 में सॉरी 1997 में अमरेंद्र नाथ जो है उन्होंने राखीगढ़ के ऊपर एक्सकवेशन किया है। और 2013 में वसंत शिंद जो हैं उन्होंने बिगेन आर्कलॉजिकल रिसर्च किया है राखीगढ़ पर। और राखीगढ़ी को डिस्कवर किया गया एट द लार्जेस्ट हड़प्पा साइट। अब सो दिस इज ऑल अबाउट दिस चैप्टर। आई होप यू लाइक दिस लेक्चर।

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