एक आदमी एक पेड़ के नीचे [संगीत] खड़ा जोर-जोर से रो रहा था और रस्सी से फंदा बना रहा था। पास ही एक डाल पर बैठे दो पक्षी उसे देख रहे थे। उनमें से एक ने पूछा, "ऐ इंसान, तुम क्यों रो रहे हो?" उस आदमी ने आं भरकर कहा, "मेरे बच्चे कई [संगीत] दिनों से भूखे हैं। मेरे पास उन्हें खिलाने के लिए कुछ भी नहीं है। इसीलिए मैं अपनी जान खत्म करने जा रहा हूं।" यह सुनकर दोनों [संगीत] पक्षी चुप हो गए। फिर उनमें से एक ने अपना एक पर तोड़ा, तो वह पर तुरंत सोने का बन गया। उसने वह पर उस आदमी [संगीत] को देते हुए कहा, यह ले जाओ। इसे बेचकर अपने बच्चों की भूख मिटाओ और जब भी तुम्हें जरूरत पड़े इसी जगह आ जाना। हम तुम्हारी मदद करेंगे। वह आदमी सोने का पर [संगीत] लेकर खुशी-खुशी घर लौट आया। उस पर की वजह से उसकी गरीबी धीरे-धीरे कम होने लगी। अब [संगीत] जब भी उसे जरूरत पड़ती, वह जंगल आता और पक्षी उसे एक सोने का पर दे देते। एक दिन उसकी बीवी ने कहा, हम कब तक एक-एक पर से गुजारा करते रहेंगे। अगर तुम उनमें से किसी एक पक्षी को मार दो, तो उसके सारे पर हमारे हो जाएंगे और हम हमेशा के लिए अमीर हो जाएंगे। यह सुनकर उस आदमी के दिल में लालच आ गया। अगले दिन वह तीर कमान उठाकर जंगल की तरफ रवाना [संगीत] हुआ। जब वह उस पेड़ के पास पहुंचा तो एक पक्षी हमेशा की तरह उसकी मदद के लिए अपना पर तोड़ने लगा। उसी दौरान उस आदमी ने कमान [संगीत] खींची और तीर उस पक्षी की तरफ छोड़ दिया। पक्षी तड़पता हुआ जमीन पर आ गिरा। वह आदमी दौड़कर उसके पास पहुंचा और जल्दी-जल्दी उसके पर तोड़ने लगा। मगर हैरानी से उसने देखा कि वे पर सोने में नहीं बदल [संगीत] रहे थे। वे आम बेकार और बेजान पर ही थे। उसी पल दूसरे पक्षी ने चिल्लाकर कहा, "ए जालिम इंसान, हमने तुम्हें मौत से बचाया। तुम्हारे बच्चों की भूख मिटाई। मगर तुमने एहसान का बदला लालच और जुल्म से दिया। जो इंसान ज्यादा की [संगीत] लालच में थोड़े पर शुक्र नहीं करता, वह आखिर में सब कुछ खो देता है। यह कहकर वह पक्षी उड़ गया और फिर कभी वापस नहीं आया।
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