हेलो गाइस, आप सभी साथियों का स्वागत है आपके अपने YouTube चैनल परीक्षा पर। सभी मेरे प्यारे-प्यारे साथियों को गुड मॉर्निंग। जल्दी से आप सभी जुड़ जाइए क्योंकि मैं लेकर आ चुका हूं आप सभी के लिए हिंदी महामैराथन का पार्ट टू और अंतिम पार्ट। ठीक है? तो मुझे उम्मीद है कि आप सभी पढ़ रहे होंगे, प्रीवियस ईयर पेपर सॉल्व कर रहे होंगे क्योंकि एक-एक दिन जो है बीतता जा रहा है और हम लोग एग्जाम के करीब आते जा रहे हैं क्योंकि अब आपका अप्रैल खत्म होने वाला है। मई में आपका पेपर ही है। तो समय बिल्कुल भी नहीं बचा है। इसलिए जितने भी मेरे प्यारे साथी हैं, मैं आप सभी से कहना चाहूंगा कि जिन-जिन सब्जेक्ट्स की मैराथन हो चुकी है, उन सभी की लिंक डिस्क्रिप्शन बॉक्स में मैंने दे दिया है प्लेलिस्ट की। वहां से जाकर के एक-एक सब्जेक्ट की मैराथन और उनसे संबंधित जितने भी प्रीवियस ईयर पेपर हैं जो आपको ऐप पर दे दिए गए हैं। जिन बच्चों ने बैच लिया है वो सारे बच्चे उनको जरूर पढ़ लें क्योंकि प्रीवियस ईयर पेपर जब तक आप पूरा नहीं पढ़ोगे आपकी तैयारी कंप्लीट नहीं मानी जाएगी। इस बात को आपको याद रखना है। ठीक है बच्चा? चलिए फिलहाल आज हम लोग यहां पर हिंदी की महामैराथन खत्म मतलब आज हो जाएगी आपकी खत्म। इसके बाद आपकी एसएसटी बचेगी और मैथ बचेगी और मैथ की हम मैराथन नहीं करवाएंगे। मैं पहले ही आपको बता दूं मैथ का हम लोग चैप्टर वाइज रिवीजन करेंगे। कैसे करेंगे? चैप्टर वाइज रिवीजन। यानी एक दिन में दो-तीन चैप्टर हम लोग पढ़ेंगे और पांच से छह क्लासेस या जितनी भी क्लासेस चलेंगी खींचेंगे कुछ नहीं। सारे टाइप के सवाल हम लोग करवाएंगे और ये प्रक्रिया आपकी कल से शुरू हो जाएगी। यानी कल हम सभी के चैप्टर वाइज रिवीजन की पहली क्लास चलेगी। सुबह 8:30 बजे। समझ में आ गई बात? तो एक दिन हम लोग मैथ पढ़ते रहेंगे और दूसरे दिन हम लोग जो है प्रीवियस ईयर पेपर करेंगे। बाकी जब एग्जाम करीब आएगा तब हम लोग तबका तब देखेंगे। ठीक है? चलिए स्टार्ट करते हैं बेटा आज की क्लास को। बहुत जबरदस्त क्लास आज आपकी चलेगी। सबसे पहला हम जो यहां पर पढ़ने वाले हैं। अच्छा ये है जिन्होंने रुद्राक्ष बैच नहीं लिया है वो बच्चे रुद्राक्ष बैच डीएलएड फोर्थ सेमेस्टर के लिए ले सकते हैं। अगर उनको लगता है कि मैं 20 दिन में अच्छी तैयारी कर सकता हूं। मुझे मेन और ये तो बिल्कुल अच्छी बात है। अगर आपको तैयारी करनी है अभी आपके पास लगभग 20 दिन आपके पास बचा हुआ है। अगर आप चाहो तो आपको हर सब्जेक्ट्स की नोट्स, सारे प्रीवियस ईयर पेपर, मैराथन की पीडीएफ हर एक चीज आपको इस बैच में मिल जाएगी। तो अगर आपको ये लगता है कि सर 249 है कोई ज्यादा अमाउंट नहीं है। हम ले सकते हैं तो आप बैच को जरूर लीजिए। डिस्क्रिप्शन बॉक्स में लिंक है। ऐप डाउनलोड कर लीजिए और यह बैच आप लोग आराम से ले लीजिएगा। दूसरी बात अगर कोई बच्चा यूपीटेट का फॉर्म डाला है या डालने वाला है और उसे यूपीटेट की तैयारी करनी है तो आप भी परीक्षावीर ऐप पर जाकर के रक्षक बैच ले लीजिए जो कि मात्र ₹299 का बैच है। तो आपको अगर केवल लेवल वन लेना है तो ₹299 मिल जाएगा। अगर आपको लेवल वन और लेवल टू दोनों लेना है यानी प्राइमरी और जूनियर दोनों लेना है तो वो आपको ₹419 का मिल जाएगा। तो उसके लिए आपको कॉम्बो बैग लेना है। क्या लेना है? कॉम्बो। ठीक है? चलिए स्टार्ट करते हैं आज की क्लास को। सबसे पहले अब एक सवाल आपके एग्जाम में पूछा जाता है। आत्मकथा और जीवनी में अंतर बताइए। और ये बहुत इंपॉर्टेंट सवाल है बेटा। बहुत बार आपके एग्जाम में आया है कि आत्मकथा और जीवनी में अंतर। मैं सवाल लिख देता हूं यहां पे। सवाल पूछा गया था आत्मकथा और जीवनी में अंतर। आत्मकथा और जीवनी में अंतर। ये क्वेश्चन आपके एग्जाम में खूब पूछा गया है। ठीक है? कितने-कितने ईयर में आया? मैं आपको एक-एक करके मैं सारा बता दूं कि यह सवाल कितनी बार आपके एग्जाम में पूछा गया है। आत्मकथा और जीवनी में अंतर। देखो 2016 में यह सवाल आया है। समझना यह सवाल 2016 में आया है। उसके बाद में 2019 में आया है। फिर यह सवाल 2020 में आया है। फिर 2022 में आया है और फिर 2023 में आया है। यानी इतने ईयर में यह सवाल आपका पूछा गया है। और उसके साथ-साथ 2025 यानी कि पिछले साल भी यह सवाल आपके एग्जाम में पूछा गया है। यानी कि ये सबसे ज्यादा इंपॉर्टेंट सवाल है। ठीक है? चलिए अब हम स्टार्ट करते हैं। देखो आत्मकथा क्या होता है बेटा? देखो जैसे आत्मकथा का मतलब होता है कि खुद के द्वारा लिखी गई। जैसे मान लीजिए कि शिवम सर अपने जीवन के बारे में खुद ही लिख रहे हैं। तो अगर मैं अपने जीवन के बारे में खुद ही लिख रहा हूं तो इसे मैं आत्मकथा कहूंगा। लेकिन अगर कोई मेरे बारे में कोई और लिख रहा है तो उसे हम जीवनी कहेंगे। तो आत्मकथा क्या होता है? ऐसी कथा जो स्वयं के द्वारा लिखी जाती है, अपने आप से संबंधित होती है, उसे हम आत्मकथा कहते हैं। और जीवनी वो होता है जो किसी के जीवन पर ही आधारित होता है, लेकिन कोई अन्य लिखता है। ठीक है? चलिए आत्मकथा वह साहित्यिक विधा है जिसमें कोई व्यक्ति अपने जीवन की कहानी, अनुभवों, संघर्षों और महत्वपूर्ण घटनाओं को स्वयं ही ईमानदारी से मैं शैली में लिखता है। इसमें लेखक खुद ही अपने जीवन का वर्णन करता है। तो आत्मकथा क्या होता है? कि जब कोई लेखक अपने जीवन के बारे में स्वयं लिखता है और जब वो स्वयं लिखेगा तो हर एक लाइन पर लिखेगा जब मैं जा रहा था, मैं खाना खा रहा था, मैं ये कर रहा था। भाई अगर स्वयं के बारे में आप कुछ लिखोगे तो मैं मैं का वर्ड जो है बार-बार आएगा आपके सामने। तो अगर आत्मकथा की बात करें तो जब कोई लेखक अपने जीवन के बारे में स्वयं लिखता है तो उसे हम आत्मकथा कहते हैं। बच्चा समझना। तो आत्मकथा वह साहित्यिक विधा है जिसमें कोई व्यक्ति अपने जीवन की कहानी, अनुभवों, संघर्षों और महत्वपूर्ण घटनाओं को स्वयं ही ईमानदारी से मैं शैली में लिखता है। इसमें लेखक खुद ही अपने जीवन का वर्णन करता है। चलिए मैं आप सभी से एक बात पूछता हूं। एक आत्मकथा का नाम बताइए। चलिए, मैं आपसे पूछना चाहूंगा किसी एक आत्मकथा का नाम बताइए। सभी बच्चों से पूछूंगा क्योंकि पढ़ा चुका हूं ऐप पर तो मैं यह उम्मीद कर सकता हूं कि आप लोग इसका आंसर बिल्कुल सही देंगे। किसी एक आत्मकथा का नाम बताइए आप लोग। अबकि मैं पढ़ा चुका हूं। कल से बेटा सुबह 8:30 बजे मैथ की रिवीजन क्लास स्टार्ट हो रही है। तो अब कोई लापरवाही मत करना। नहीं तो अब दोबारा ना मैथ की कोई मैराथन होगी। मैं पहले ही बता रहा हूं। यह सब ड्रामा बाद में मत करना कि गुरु जी नहीं अब मैराथन भी कराइए। हम मैराथन ही करा रहे हैं लेकिन छह मैराथन कराएंगे ताकि सारा चैप्टर अच्छे से रिवीजन हो जाए। समझ रहे हो ना बात को? अब ये नहीं पहले रिवीजन कर लो फिर कहो नहीं गुरु जी अब मैराथन करवाओ। तुरंत पीटेंगे ध्यान रखना। जी भैया हम ठीक है। क्या भूलूं क्या याद करूं? बहुत सारे बच्चे कह रहे हैं। ठीक है। आइए तो हम यहां पर आत्मकथा की बात यहां पर बेटा हम लोग करते हैं। ठीक है? हां बिल्कुल। तो अगर हम इनके एग्जांपल की बात करें बेटा तो एक आपका आ जाता है। क्या भूलूं? क्या याद करूं? क्या भूलूं? क्या याद करूं? क्या याद करूं? यह किसकी आत्मकथा है बेटा? हरिवंश राय बच्चन जी की यह आत्मकथा है। हरिवंश राय बच्चन जी की यह कथा है। हरिवंश राय बच्चन। इसी के साथ-साथ मैं एक आत्मकथा आपको और लिखवा दूंगा भाई मेरे मेरी जीवन की यात्रा या मेरी जीवन यात्रा ऐसा भी लिख सकते हो। एक है मेरी जीवन यात्रा। यह भी एक आत्मकथा है। मेरी जीवन यात्रा। यह किसकी है? राहुल सांकृत्यान जी की। राहुल सांकृत्यायन तो अगर आपके एग्जाम में पूछा जाए कि आत्मकथा किसे कहते हैं और आत्मकथा क्या हुआ भाई बफरिंग हो रही है क्या आज भी हो रही है ऐसा ना करो भाई थोड़ा-थोड़ा है तो प्लीज मैनेज कर लो भाई मेरे ठीक है इस टाइम बहुत पीड़ित है आपके शिवम सर भैया इतना ना दिमाग खराब किए हैं टावर वाले कि का बताएं अभी हम जाके इनको उलटपुलट देंगे। फिर पता लगा हमको कहीं पकड़व ले जाएगा। पुलिस-वलिस हमको पकड़ ले जाएगी। तुम्हारी क्लास डिस्टर्ब हो जाएगी। तो हम पहुंचते कूटेंगे पहले। गुंडा आदमी हैं हम। समझ में आई बात? अरे नहीं नहीं बहुत सीधे हैं यार। पता है जी। चलिए आगे बढ़े। ठीक है। मैनेज कर लो। पढ़ाई हो रही है तो कोई दिक्कत नहीं है। देखते हैं आज संडे आज हम सही करवाते हैं। कुछ एक तो यार बताओ संडे वंडे मुझे कुछ पता ही नहीं चलता। कब संडे है? कब मंडे है? बताओ डेली तो हम लोग क्लास ही करते हैं। बताओ आज किसी तरीके से हम समय निकाल के आज नहा लिए हैं। यह समझो आप बात को। पहले 8:30 बजे था यार तो हम तो चलो आज नहाने के लिए समय ले लेते हैं। इसीलिए तो आज 10:00 बजे क्लास चली है। देखो इतना बिजी हैं हम। चलिए आगे बढ़े। ठीक है। सब तुरंत सुदर्शन चक्र भेजने लगते हैं। एकांकी कहां से आ गया? जीवनी नहीं आया। एकांकी पहलवान आ गया। वाह। वाह भाई वाह नहीं वाह भाई वाह वाह भाई वाह रुको भैया अच्छा जीवनी किसे कहते हैं चलो जीवनी नहीं है इसमें तो मैं लिख दे रहा हूं कोई बात नहीं जीवनी किसे कहते हैं बेटा बोलो जीवनी किसे कहते हैं जीवनी जी बताइए जीवनी किसे कहते हैं हां जी अच्छा इसलिए आज गोरे-गोरे दिख रहे हैं हां कुछ कुछ लोग सही भी मान लेगा। अच्छा गुरुजी आज नहाए बहुत दिन बाद नहाए आज गुरुजी कुछ तो एकदम सीरियस हो जाते हैं। चलो खुश रहो खुश रहो। चलो देखो इसमें लिख देना यदि किसी जीवन का उल्लेख यदि किसी के यदि किसी के जीवन का उल्लेख यदि किसी के जीवन का उल्लेख किसी अन्य व्यक्ति द्वारा किसी अन्य व्यक्ति के द्वारा के द्वारा लिखा जाता है। लिखा जाता है। लिखा जाता है तो उसे जीवनी कहते हैं। तो उसे जीवनी कहते हैं। अगर हमसे कोई पूछे कि कुछ जीवनी के नाम रखो तो सबसे पहला हो जाएगा बेटा आवारा मसीहा। क्या हो जाएगा? आवारा मसीहा। अगर आपसे कोई पूछे कि एक जीवनी का नाम लिखो तो आवारा मसीहा हो जाएगा। ठीक है? शरदचंद चट्टोपाध्याय शरदचंद चट्टोपाध्याय चटोपाध्याय की जीवनी है। और इसके लेखक कौन है बेटा? आवारा मसीहा के अगर लेखक पूछा जाए कौन है? तो इसके लेखक हैं विष्णु प्रभाकर। लेखक हैं इसके विष्णु प्रभाकर। तो लेखक हैं विष्णु प्रभाकर। और जीवनी किसकी है? शरदचंद चट्टोपाध्याय की जीवनी है। अब बताओ इतनी बात समझ में आ गया? तो आत्मकथा क्या होता है कि ये दूसरे के द्वारा लिखी जाती है लेकिन सॉरी आत्मकथा जो है खुद के द्वारा लिखी जाती है लेकिन जीवनी दूसरे के द्वारा लिखी जाती है। बच्चा आ गई बात आपको समझ में? बहुत अच्छी बात है। अब आएंगे एकांकी किसे कहते हैं? अब अगर आपसे कोई पूछ ले एकांकी क्या होता है? एकांकी एकांकी संक्षिप्त तथा एक अंक वाली नाट्य रचना होती है जिसमें जीवन की किसी एक पक्ष या घटना का चित्रण किया जाता है। जैसे एक बात बताओ शिवम सर जब से जन्म लिए आपको पढ़ाने तक का लगभग जितनी भी ऐज हमारी हो गई ठीक है। हमने बहुत सारा कांड किया होगा। नहीं बेटा कोई ना कोई काम किया होगा भाई पढ़ाई किए कॉलेज में थे पढ़ने के लिए बाहर गए आए चैनल पे आए पढ़ा रहे हैं ठीक है तो पढ़ा रहे हैं अब इतने पूरे जीवन के बारे में ना लिखकर किसी मेरी एक घटना का जिक्र किया जाए जैसे मान लो जब मैं पढ़ने कानपुर गया ठीक है जब मैं पढ़ने कानपुर गया तो जब कानपुर पढ़ने गया अब मैं उस कानपुर की किसी एक घटना के बारे में अगर जिक्र किया जाए तो उसे हम एकांकी कहते हैं। बताओ। चलिए। तो एकांकी क्या होता है? कि जब किसी के पूरे जीवन के बारे में ना बताकर किसी एक पक्ष या किसी एक घटना के बारे में जिक्र किया जाता है तो उसे हम एकांकी कहते हैं। एकांकी संक्षिप्त तथा एक अंक वाली नाट्य रचना होती है जिसमें जीवन की किसी एक पक्ष या घटना का चित्रण किया जाता है। एकांकी का प्रमुख लक्ष्य किसी जीवंत परिस्थिति को घटना एवं पात्रों के माध्यम से प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करना होता है। बताइए इतनी बात पहले हमको बताओ बच्चा इतनी बात बता दो भैया नहीं आया समझ में ओ मेरे भैया बताओ अच्छा देखो एक बच्चों की बहुत कंप्लेन रहती है मैं इस कंप्लेन के बारे में बताऊं जैसे होता क्या है ना कंप्लेन क्या होती है मैं बता रहा हूं आपको जैसे बहुत सारे बच्चे ये कहते हैं कि गुरुजी क्या कहते हैं बेटा बहुत सारे बच्चे कहते हैं गुरुजी ये हमको आप बताइए कि कहीं पर जैसे आपने नोट्स में जैसे होता क्या है थ्योरी के चीज में मान बात करूं जैसे मान लीजिए लीजिए। मैंने आत्मकथा लिखवाया। अब मेरी बात को समझिए। पहले मैं आप लोगों की समस्या का समाधान करूं। जैसे मैंने कहीं पर आत्म जैसे आपसे पूछा गया आत्मकथा किसे कहते हैं? मैंने एक जगह यह आंसर लिखवाया। हो सकता है प्रीवियस ईयर पेपर में मैंने आत्मकथा का आंसर दूसरा लिखवाया। हो सकता है नोट्स में कोई और मिल जाए आपको। तो परेशान मत हो जाया करो आप लोग। कुछ बच्चे कंप्लेन करने लगते हैं। गुरुजी हर जगह सेम काहे नहीं है। ए हमार भैया थ्योरी की चीजें इसे कभी सेम नहीं लिखा जा सकता है और ना लिखवाया जा सकता है। भाई देखो एक चीज याद रखना। लेकिन अगर कोई बच्चा कहे गुरु जी इन तीनों में से हम कौन सा याद करें? तो भैया हमार जो आपको उन तीनों में आसान लगे वो आप याद करो। और सबसे ज्यादा आसान परिभाषा आपको आपके नोट्स में मिलेगी। सबसे ज्यादा आसान परिभाषा कहीं पर है तो वह आपके नोट्स में है। क्योंकि उन परिभाषाओं को शिवम सर ने स्वयं बना के भेजा है आपके लिए शॉर्ट करके विधिवत तरीके से। तो ये कंप्लेन मत किया करो। अरे गुरु जी। अच्छा हां नोट्स वाली परिभाषा आपको मैराथन में भी मिलेगी। मैराथन और नोट्स की परिभाषा सेम रहेगी। डिफरेंस खाली होता है कहां पे? प्रीवियस ईयर पेपर में। तो बेटा जो आपको आसान लगा करे वो पढ़ा करो। बाकी एमसीक्यू का आंसर, बेरी सार्ट का आंसर वो सेम हो सकता है लेकिन दो नंबर वाले आंसर सेम नहीं लिखाए जा सकते हैं। समझ रहे हो ना बात को? जी। हां। बाकी सबसे बढ़िया जो परिभाषा और सबसे छोटी परिभाषा जो मिलेगी वो नोट्स में मिलेगी आपको। जी इतनी बात पहले बताओ आप सभी को समझ में आ गया भाई चलिए भैया स्टार्ट करें। ठीक है। औपचारिक पत्र क्या होता है बेटा? अच्छा पत्र दो प्रकार के होते हैं। अब अगर आपसे कोई पूछे कि पत्र के प्रकार क्या होते हैं? पत्र के प्रकार तो ओम भैया सुनो पत्र दो प्रकार के होते हैं। एक पत्र होता है बेटा औपचारिक पत्र। क्या होता है? एक पत्र होता है औपचारिक पत्र। इसी के साथ एक दूसरा होता है अनौपचारिक पत्र। क्या होता है बेटा? अनौपचारिक पत्र। अनौपचारिक पत्र दो प्रकार के पत्र होते हैं। अब बताइए औपचारिक पत्र किसे कहते हैं? बेटा समझिए। औपचारिक पत्र किसे कहते हैं? ऐसे पत्र जो किसी ऑफिस के काम के लिए भेजे जाते हैं। और अनौपचारिक पत्र वो होते हैं जो अपने रिश्तेदारों को भेजे जाते हैं। तो औपचारिक पत्र और अनौपचारिक पत्र। अच्छा औपचारिक पत्र क्या है? औपचारिक पत्रों का इस्तेमाल आधिकारिक मामलों के लिए किया जाता है। इन पत्रों में काम या समस्याओं से जुड़ी जानकारी दी जाती है। बस इतना लिखना ज्यादा ड्रामा लिखने की जरूरत नहीं है। एक नंबर में आएगा। इतना बहुत है। अगर आपसे कोई पूछे औपचारिक पत्र क्या है बच्चे? तो समझना मेरी बात को। औपचारिक पत्र क्या होता है? समझिए। ठीक है भाई आ गया समझ में ठीक बस बस इतना लिखना कि औपचारिक पत्रों का इस्तेमाल आधिकारिक मामलों के लिए किया जाता है और इन पत्रों में काम या समस्याओं से जुड़ी जो है जानकारी दी जाती है। औपचारिक पत्रों में औपचारिक भाषा और लहजा का इस्तेमाल किया जाता है। जैसे सादर नमस्ते आपका जो भी है इस टाइप का मतलब जहां पर आपको बहुत सारी औपचारिक भाषाओं का प्रयोग जैसे नमस्ते। ठीक है? आपका प्रार्थी, आपका शुभचिंतक इन सब टाइप के जो वर्ड होते हैं इन्हें हम औपचारिक भाषा कहते हैं। बेटा क्या कहते हैं? इन्हें हम औपचारिक भाषा कहते हैं। तो औपचारिक पत्रों में औपचारिक भाषा और लहजा का इस्तेमाल किया जाता है। औपचारिक पत्र किसी ऐसे व्यक्ति या संस्था को लिखा जाने वाला पत्र होता है जिससे कोई व्यक्तिगत संबंध नहीं होता है। बताइए हम आ गया भाई समझ में इतनी बात बोलो हां कि ना भाई आ गया समझ में दूसरा होता है अनौपचारिक पत्र अब ये अनौपचारिक पत्र क्या होता है अनौपचारिक पत्र उन लोगों को लिखे जाने वाले पत्र होते हैं जिनसे हमारा निजी संबंध होता है यानी रिश्तेदारों को दोस्तों को अपने घर परिवार के लोगों को जो पत्र लिखे जाते हैं उन्हें हम अनौपचारिक पत्र कहते हैं। इन पत्रों में आत्मीयता का भाव रहता है। जैसे इसमें हालचाल पूछा जाता है और आप कैसे हो? कुशलक्षेम आप जानोगे। ठीक है? अनौपचारिक पत्रों में रोजमर्रा की भाषा का इस्तेमाल होता है। जैसे रोजमर्रा की भाषा जैसे हम लोगों की भाषा होती है। जैसे हमारे गोंडा की भाषा है अवधी जैसे और बताओ का करत हो कहां जात हो? खाना खाए हो कि नहीं खाए हो? तो इन सब चीजों की जो भाषा अवधी भाषा होती है मतलब जो आप रोजमर्रा की भाषा का प्रयोग करते हैं यानी औपचारिकता का कोई स्थान अनौपचारिक पत्र में नहीं होता है। तो इन प्रकार की जो भाषाएं होती हैं इन्हें हम जो है इसमें यूज नहीं करते हैं। अनौपचारिक भाषा में हम लोग रोजमर्रा की भाषा का प्रयोग करते हैं। ठीक है बेटा? चलिए। आ गया भाई। ठीक है। उसके बाद अब आते हैं हम लोग सामान्य परिचय पर। देखो आपके एग्जाम में देखो ये ऐसा नहीं कि आप पहली बार पढ़ रहे हो। इसे आप सेकंड सेमेस्टर में भी पढ़े हो, थर्ड में भी पढ़े हो और फोर्थ में भी आप पढ़ रहे हो। कुछ लेखक और लेखिकाएं हैं जिनके बारे में आपको पढ़ना है। जिनका सामान्य परिचय और एक चीज बता दें चाहे आपसे सामान्य परिचय पूछा जाए, चाहे साहित्यिक परिचय पूछा जाए, चाहे जीवन परिचय पूछा जाए। जैसे आप समझिए बात को। मान लीजिए आपके एग्जाम में पूछ लिया गया आचार्य रामचंद्र शुक्ल का सामान्य परिचय लिखिए तो भी सेम आंसर लिखना। आचार्य रामचंद्र शुक्ल का जीवन परिचय लिखिए तब भी सेम आंसर। आचार्य रामचंद्र शुक्ल का साहित्यिक परिचय लिखिए तब भी सेम आंसर। आपको अलग-अलग आंसर नहीं याद करना है। बस हेडिंग चेंज हो जाएगी। जैसे उन्होंने साहित्यिक परिचय पूछा तो हम लिख देंगे आचार्य रामचंद्र शुक्ल का साहित्यिक परिचय। आचार्य रामचंद्र शुक्ल का जीवन परिचय यानी उनके सवाल के हिसाब से हमारी हेडिंग बदल जाया करेगी। बोलो हां कि ना? आ गई बात आपको समझ में? ठीक है। आचार्य रामचंद्र शुक्ल हिंदी के प्रकांड विद्वान, युग प्रवर्तक, आलोचक, निबंधकार और साहित्य इतिहासकार थे। बस्ती में जन्मे शुक्ल जी ने हिंदी शब्द सागर के संपादन और हिंदी साहित्य का इतिहास लिखकर हिंदी आलोचना को वैज्ञानिक व्यवस्थित आधार दिया। चिंतामणि और रस मीमांसा उनकी प्रमुख आलोचनात्मक कृतियां हैं। याद रखना इनको अच्छा कितने बच्चे हैं जो पहले से इसे याद कर लिए हैं क्योंकि देखो मैं आज रिवीजन करा रहा हूं। मैं पढ़ा नहीं रहा हूं। पढ़ा मैं चुका हूं पहले आपको। ठीक है? तो कितने बच्चे हैं जिन्होंने पहले इसको याद कर लिया था। आज आपका रिवीजन हो जाएगा। तो आचार्य रामचंद्र शुक्ल की बात करें तो आचार्य रामचंद्र शुक्ल हिंदी के प्रकांड विद्वान। देखो एक चीज बताएं कुछ चीजें तो सिमिलर हैं। जैसे सबका जन्म एक गरीब घर में हुआ है। सभी ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा देखो ये चीज बहुत अच्छी है। इसके बारे में एक तो शॉर्ट वीडियो भी मुझे मिली थी Instagram पे। तो एक चीज याद रखना किसी भी लेखक के बारे में पूछा जाए इनका घर इनका जन्म एक गरीब परिवार में हुआ। दो-तीन लाइन तो बिल्कुल याद रखना आज अपने दिमाग में चिपका लेना एग्जाम में बहुत मदद करेगा। सबसे पहली चीज इनका जन्म गरीब परिवार में हुआ था। इन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा अपने घर पे ही पूरी की थी। ठीक है? दुई लाइन हो गया। इन्होंने घर पर ही रहकर कई भाषाओं का ज्ञान प्राप्त कर लिया। जिनमें हिंदी, अरबी, संस्कृत, उर्दू के ये बहुत बड़े ज्ञाता थे। बस तीन चार लाइन हो गए। इसमें चार लाइन भर जाएगा आपका एग्जाम में। क्या लिखना है? जहां कुछ ना समझ में आए वहां ये लिखना कि इनका जन्म एक गरीब परिवार में हुआ था। चाहे जिसके बारे में मुंशी प्रेमचंद, आचार्य रामचंद्र, सुख रामधारी सिंह दिनकर किसी के बारे में सुमित्रानंदन पंत किसी के बारे में भी जब ना समझ में आए तब की बात कर रहा हूं। ये नहीं कि पहले आज ही दिमाग बना लो कि नहीं हम तो यही लिखेंगे। ना समझ में आए मैं तब की बात कर रहा हूं कि इनका जन्म गरीब परिवार में हुआ था। इन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा अपने घर पर ही ली और इन्होंने ऐसी प्रारंभिक शिक्षा ली कि इनको चार पांच भाषा ज्ञान खुद घर हो गया इनको जिनमें उर्दू, फारसी, अरबी इनकी प्रमुख भाषाएं थी। बस उनकी कृतियां चिपका दो। खत्म खेल हो गया रचना तैयार। ठीक है? आगे बढ़ते हैं तो आचार्य रामचंद्र शुक्ल हिंदी के प्रकांड विद्वान, युग प्रवर्तक, आलोचक, निबंधकार और साहित्य इतिहासकार थे। इनका जन्म बस्ती में हुआ था। शुक्ला जी ने हिंदी शब्द सागर के संपादन और हिंदी साहित्य का इतिहास लिखकर हिंदी आलोचना को वैज्ञानिक व व्यवस्थित आधार दिया। चिंतामणि और रस मीमांसा इनकी प्रमुख रचनाएं हैं। उसके बाद हजारी प्रसाद द्विवेदी जी। हजारी प्रसाद द्विवेदी जी की अगर हम बात करते हैं तो आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी 1907 से 1979 यानी 1907 में जन्म हुआ 1979 में मृत्यु हुई। हिंदी के शीर्षस्थ निबंधकार, आलोचक और उपन्यासकार थे। बलिया के आरत दुबे छपरा में जन्मे द्विवेदी जी ने सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर गंभीर साहित्य रचा। अशोक अच्छा रचनाएं सबकी याद रखना बेटा। अशोक के फूल और कुटज जैसे निबंधों तथा बाणभट्ट की आत्मकथा उपन्यास के लिए प्रसिद्ध इन्हें 1957 में पद्म भूषण से भी सम्मानित किया गया था। तो अगर आपसे हजारी प्रसाद द्विवेदी जी की सामान्य परिचय पूछे तो आपको याद रखना है। बस देखो एग्जैक्ट नहीं लिखना है बेटा। देखो आप इनको पढ़ लेना। दो चार छह लाइन आपको इनके बारे में याद रहेगी। अरे भाई एग्जाम में 15 20 दिन है तो बैठ के आलू थोड़ी छी। यही सब याद करोगे ना पीडीएफ आपके पास है। आपको अगर कोई साहित्य परिचय जीवन परिचय नहीं याद है तो हम ज्यादा तो पढ़ाएंगे नहीं। ज्यादा से ज्यादा सात आठ लोगों का पढ़ाएंगे। बैठ के इनको आज पूरा दिन में याद कर लेना। कुछ-कुछ चीजें आपको एग्जाम में याद रहेंगी और कुछ मैंने बता ही दिया है। गरीब परिवार में जन्म हुआ है। प्रारंभिक शिक्षा घर पर ली और वहीं से इनको चार पांच भाषा ज्ञान हो गया। बस चार पांच लाइन वो चिपका देना। हो गया आपका बढ़िया आंसर तैयार। बढ़िया मस्त नंबर मिलेगा। जी। चलिए आ गया भाई समझ में अगला रविंद्रनाथ ठाकुर का सामान्य परिचय आइए देखते हैं इनका जन्म 7 मई 1861 को अच्छा जन्म स्थान सबका याद रखना ये चीज थोड़ा याद करना आप लोग जन्म स्थान सबका याद रखना और अगर जन्म की तिथि भी अगर आपने याद कर लिया तो बहुत अच्छी बात दुई चीज याद रखना जन्म जन्म कहां पे हुआ और उनकी जन्मतिथि क्या थी और रचनाएं ये तीन चीज हर एक लेखक का याद रखना बेटा ये तीन अगर याद है ना तो फिर कोई दिक्कत नहीं कौन-कौन सी तीन चीज जन्म स्थान जन्मतिथि और मृत्यु तिथि नहीं भी याद रखोगे तो कोई इतना ज्यादा इशू नहीं है लेकिन जन्मतिथि जन्म स्थान और उनकी रचनाएं कम से कम चार-चार पांच-प रचना आपको हर एक लेखक की याद होनी चाहिए। ठीक है? समझिए। रविंद्रनाथ ठाकुर इनका जन्म 7 मई 1861 को कोलकाता के ठाकुरबाड़ी में हुआ था। इनके पिता का नाम देवेंद्र नाथ ठाकुर और माता का नाम शारदा देवी था। रविंद्र नाथ टैगोर साहित्य के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार जीतने वाले पहले एशियाई बने थे। उन्हें यह पुरस्कार उनके प्रसिद्ध काव्य संग्रह गीतांजलि के लिए दिया गया था। ठीक है? टैगोर दुनिया के एकमात्र कवि हैं जिन्होंने दो देशों के लिए राष्ट्रगान लिखा है। भारत का जनगण मन और बांग्लादेश का आमार सोनार बांग्ला बताओ इतनी बात पहले बताओ समझ में आया जी मेरे भैया एक बार पढ़ो एक मिनट के लिए हम बताइए इतनी बात समझ में आ गया तो रविंद्र नाथ टैगोर का सामान्य परिचय क्या है कि इनका जन्म 1861 को कोलकाता के ठाकुरबाड़ी में हुआ था उनके पिता का नाम देव देवेंद्र नाथ ठाकुर और माता का नाम शारदा देवी था। रविंद्रनाथ टैगोर को साहित्य के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार जीतने वाले पहले एशियाई बने थे। उन्हें यह पुरस्कार उनके प्रसिद्ध काव्य संग्रह गीतांजलि के लिए दिया गया था। अच्छा आपने देखा होगा आज के चारप साल पहले मोदी जी ऐसे बड़ी-बड़ी दाढ़ी रखा के टैगोर जी बने हुए थे। याद है कि नहीं याद है? क्यों बने थे वो? क्योंकि बंगाल में चुनाव था। तो याद रखना कि भैया मोदी जी अगर कोई वेशभूषा धारण करें तो समझ जाओ कि भाई कुछ ना कुछ बात है। तो याद रखना जब बंगाल में चुनाव था तो उन्होंने बड़ी-बड़ी दाढ़ी रखी थी टैगोर जी के जैसे ताकि हम बता पाए कि हमारा टैगोर जी से पुराना नाता है। ठीक है? चलिए आगे बढ़ते हैं। तो लिख ले जाओगे भाई टैगोर जी के बारे में। जी। हां जी। सर आप तो हर सब्जेक्ट में यही कहते कि इतना याद कर लो और हम लोगों को सब आठ सब्जेक्ट देखो क्या नाम है आपका राणा रानी जी देखो बेटा एक चीज बताएं 5 दिन में तो कुछ याद नहीं करना था आपको 6 महीने का समय मिला आपको ठीक है 6 महीने का समय तो 6 महीने में आपको याद करना था अब जो बच्चा 6 महीने से लगा था वो थोड़ा-थोड़ा करके उसने सब याद कर लिया अब जैसे कोई बच्चा आज इसे पहली पहली बार देख रहा है तो ये बेटा आपकी गलती है। शिवम सर की गलती नहीं है क्योंकि मैं इस चीज को पहले पढ़ा चुका हूं। मैराथन और प्रीवियस ईयर का मतलब होता है रिवीजन। ये सब मैं पहले पढ़ा चुका हूं। अब एक दो महीना पहले हम इसको पढ़ा चुके हैं। अब जो बच्चा मुझसे पढ़ा होगा वो इसको तीन बार खुद ही रिवीजन कर लिया होगा। तो उसको पता है। तो ये आपकी गलती है कि आपने स्टार्ट शुरू से नहीं किया। समझ में आ गई बात? और हमेशा एक बात अपने पास याद रखना कहीं लिख लेना बोर्डवर्ड पे कहीं पर या दीवार पे कि टॉपर कभी लेट स्टार्ट नहीं करते हैं। आप कितने भी तेज दौड़ने वाले होंगे लेकिन अगर आप अपने साथियों से 1 मिनट बाद या 30 सेकंड बाद दौड़ना शुरू करेंगे तो आप उनको कवर नहीं कर पाएंगे। तो याद रखना टॉपर कभी भी लेट स्टार्ट नहीं करते हैं। समझ में आ गई बात? आगे बढ़ेंगे। अगला मैथिलीशरण गुप्त मैथिलीशरण गुप्त जी का साहित्य परिचय क्या है बेटा समझना भारत के राष्ट्रकवि कहे जाते हैं ये भारत के राष्ट्रकवि श्री मैथिलीशरण गुप्त का जन्म सन 1886 को झांसी जिले के चिरगांव के गहोई वैश्य परिवार में हुआ था। आपके पिता श्री रामचरण लाल गुप्ता स्वयं अच्छे कवि और धार्मिक व्यक्ति थे। गुप्ता जी की शिक्षा दीक्षा घर पर ही सम संपन्न हुई देखो घर पर ही हुई थी ना अपने स्वाध्याय के सहारे साहित्य, हिंदी, अंग्रेजी और संस्कृत का अध्ययन किया। गुप्ता जी की काव्य प्रतिभा का विकास आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी की सरस्वती नामक मासिक पत्रिका के संपादन के माध्यम से हुआ था। ये चीज जरूर याद रखिएगा। ये आपके एग्जाम में कई बार आया है कि सरस्वती किसकी रचना है? तो महावीर प्रसाद द्विवेदी जी की रचना है। गुप्ता जी की रचनाओं में साकेत महाकाव्य सबसे ज्यादा प्रसिद्ध है। अब आपसे कहा जाएगा भाई मैथिलीशरण गुप्त जी की एक रचना बताओ जो बहुत महत्वपूर्ण हो। तो साकेत महाकाव्य साकेत महाकाव्य किसने लिखा था बेटा? मैथिलीशरण गुप्त ने लिखा था। और सरस्वती किसने लिखा था बेटा? महावीर प्रसाद द्विवेदी जी ने लिखा था। बताओ हां। अरे वांकित जी बहुत अच्छी बात है। आगे बढ़े तो मैथिलीशरण गुप्त जी का साहित्य परिचय क्या लिखोगे भाई? देखो इन सबको याद करना पड़ेगा। इसमें शिवम सर क्या समझाएंगे आपको? ये बताओ बेटा समझाने वाला हम ये थोड़ी समझाएंगे। मैथिलीशरण जी का गुप्त जो जी का जन्म चिरगांव में ही क्यों हुआ? अब हम ये थोड़ी बताएंगे उनका चिरगांव से पुराना नाता था इसलिए उनका जन्म वहां पे हुआ। अब ये हम थोड़ी बता सकते हैं बेटा ना। तो इन चीजों को याद करना होगा। ये याद करने वाले टॉपिक हैं। तो अभी जब मैं आपको पीडीएफ दे दूंगा ऐप पर तो आप इनको अच्छे से पढ़ लीजिएगा। आगे उसके बाद अगला है अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔध। समझना अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔध। इनके बारे में देखते हैं भाई मेरे। तो आधुनिक हिंदी काव्य में खड़ी बोली को इनका स्क्रीनशॉट आप लेते चलिए। जो बच्चे बैच नहीं लिए ना वो इनका स्क्रीनशॉट लेते चलेंगे ताकि आप आराम से बैठ के इनको पढ़ सकें। ठीक है? तो आधुनिक हिंदी काव्य में खड़ी बोली को प्रतिष्ठित करने वाले महाकाव्य सॉरी महाकवि श्री अयोध्या सिंह उपाध्याय जी का जन्म आजमगढ़ जिला के अंतर्गत निजामाबाद नामक स्थान पर 1865 संवत को सनाध्य ब्राह्मण परिवार में हुआ था। आपने स्वाध्याय देखो यऊ स्वाध्याय से हिंदी, अंग्रेजी, संस्कृत और फारसी आदि भाषाओं का गहन अध्ययन किया। अच्छा याद रखिएगा ये बहुत इंपॉर्टेंट है प्रिय प्रवास आपसे पूछा जाएगा प्रिय प्रवास किसकी रचना है तो प्रिय प्रवास महाकाव्य पर आपको मंगला प्रसाद पारितोषिक प्रदान किया गया था सन 1845 में हरिऔध जी का निधन हुआ और इन्हीं की कुछ इंपॉर्टेंट रचनाएं जैसे प्रिय प्रवास वैदेही वनवास पारिजात चोखे चोपदे अध किला फूल ठेठ हिंदी के ठाट आदि रचनाएं इनकी क्या है बच्चा प्रमुख हैं याद याद रखना आप लोग। ठीक है? ठीक। उसके बाद अगला है महादेवी वर्मा जी का साहित्य परिचय। चाहे साहित्य पूछे, सामान्य परिचय कुछ भी पूछे समझना। महादेवी वर्मा जी का जन्म 1907 ईस्वी में उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद जिले में हुआ था। हिंदी साहित्य में छायावाद के चार प्रमुख स्तंभों में से एक और आधुनिक मीरा के रूप में प्रसिद्ध कवियत्री व गद्य थी। इनको आधुनिक मीरा भी कहा जाता था। ये भी आपको याद होगा। उन्होंने प्रयाग महिला विद्यापीठ की प्रधानाचार्य के रूप में महिला शिक्षा में क्रांतिकारी योगदान दिया। यामा के लिए ज्ञानपीठ पुरस्कार मिला। याद रखना महादेवी वर्मा जी की एक बहुत ज्यादा इंपॉर्टेंट रचना है यामा और इसी यामा के लिए इनको ज्ञानपीठ पुरस्कार मिला था। याद रखना ज्ञानपीठ पुरस्कार इनको इसी यामा के लिए मिला था। ठीक है? आगे की तरफ बढ़े बेटा। बाकी इनकी निहार और नीरजा भी इनकी एक प्रमुख रचनाएं हैं। चलिए इतनी बात समझ में आपको आ गया बेटा कि नहीं आ गया बताओ। हां जी भैया। कुछ बच्चे कह रहे हैं गुरु जी 1865 में जन्म हुआ 45 में मृत बेटा ये संवत लिखा है और यहां पे सन लिखा है तो सन और संवत में अंतर होता है बेटा ठीक है चलिए आगे बढ़ेंगे उसके बाद अगला है रहीम दास जी रहीम दास जी का सामान्य परिचय क्या है समझना ध्यान थे अब्दुल रहीम खानखाना 1556 में इनका जन्म होता है। 1627 में मृत्यु होती है। मुगल बादशाह अकबर के नवरत्नों में से एक प्रसिद्ध कवि सेनापति और नीतिज्ञ थे। वे बैरम खान के पुत्र थे और अपनी हिंदी दोहों दानशीलता और संस्कृत ज्ञान के लिए अमर हैं। उनका पालन पोषण अकबर की देखरेख में हुआ और उन्होंने खानखाना की उपाधि भी प्राप्त की। रहीम दोहावली और बरवय इनकी प्रमुख रचनाएं हैं। हम अब बताइए इतना समझ में आ गया भाई मेरे ठीक। अब आएंगे आगे की तरफ। अच्छा आपसे कहा जाएगा समास किसे कहते हैं? अब देखिए ये सब मेनम चीजें बेटा ध्यान रखना। और बाकी जो ऐप वाले बच्चों जिनको नोट्स मिल चुकी है एग्जाम से पहले एक बार नोट्स जरूर पढ़ना। आप लोग मैराथन पढ़ रहे हो बहुत अच्छी बात है। ठीक है? मैराथन पढ़ रहे हो। ठीक है? आपको बहुत सारी चीजें यहां से हेल्प करेंगी। आप लोग जो है प्रीवियस ईयर करोगे बहुत हेल्प मिलेगी। लगभग 90% नंबर आ जाएंगे यहां से। कोई दिक्कत नहीं है। लेकिन जो बच्चे बैच लिए हो आप नोट्स आपके पास है तो नोट्स की चीजें आपको जल्दी याद होंगी क्योंकि वहां पे बहुत शॉर्ट में चीजें लिखी हुई हैं। ठीक है बेटा? तो उनको एक बार जरूर पढ़ लीजिएगा। राणा रानी सर पढ़ के तो आठ सब्जेक्ट पढ़ चुके हैं। याद नहीं हो रहा। बेटा देखो बेटा पढ़ाई का शॉर्टकट नहीं होता। सीधी बात है बेटा। ठीक है? मेहनत करना पड़ेगा। मेहनत करके पढ़िए। ठीक है? अच्छा समास किसे कहते हैं? बेटा इसकी परिभाषा पूछी गई थी। समास किसे कहते हैं? और ये क्वेश्चन 2020 में आया था। तो दो इंपॉर्टेंट है बेटा। समास किसे कहते हैं? तो दो या दो से अधिक शब्दों के मेल से बने नवीन और सार्थक शब्द को समास कहते हैं। समास का शाब्दिक अर्थ होता है संक्षेपीकरण यानी छोटा करना। जैसे राजा का पुत्र। अब यहां पर तीन शब्दों से मिलकर एक शब्द बना है तो इसे हम समास कहते हैं। यानी कि जब दो या दो से अधिक शब्दों को मिलाकर एक सार्थक और छोटा शब्द बनाया जाता है तो उसे हम क्या बोलते हैं? उसे हम समास बोलते हैं। यानी कि सामासिक पद कहते हैं। ठीक है? चलिए आगे बढ़ेंगे। हां। बाकी आपको पता है कि समास के भेद कितने होते हैं? भाई मेरे समास के प्रकार आपको पता ही है। अगर हम समास के प्रकार लिखें तो एक तो हो जाएगा आपका अव्ययीभाव समास। क्या हो जाएगा? एक आपका हो जाएगा अव्ययीभाव समास। उसी के साथ-साथ दूसरा हो जाएगा तत्पुरुष समास। क्या हो जाएगा बेटा? तत्पुरुष समास हो जाएगा। फिर आपका एक हो जाएगा कर्मधारय समास। अगर इसका प्रकार पूछे तो कर्मधारय समास। उसके बाद में फिर हो जाएगा द्वंद समास। क्या हो जाएगा? द्वंद समास। फिर हो जाएगा द्विगु समास। क्या हो जाएगा? द्विगु समास। और एक आपका हो जाएगा बहुव्रीहि समास। क्या हो जाएगा? बहुव्रीहि समास। तो ये छह समास आपके हो जाएंगे। याद रखना। उसके बाद अगला आएगा वाक्य किसे कहते हैं? समझना। अगला पूछा जाएगा वाक्य किसे कहते हैं? तो दो या दो से अधिक शब्दों के सार्थक और व्यवस्थित समूह को वाक्य कहते हैं। जिससे पूर्ण अर्थ स्पष्ट होता है। मतलब दो या दो से अधिक शब्दों के एक सार्थक समूह को हम लोग वाक्य कहते हैं। ठीक है? वाक्य के भेद कितने होते हैं? तो रचना के आधार पर वाक्य के तीन भेद होते हैं। सरल वाक्य, संयुक्त वाक्य और मिश्र वाक्य। यह सवाल कई बार आया है कि वाक्य किसे कहते हैं? और वाक्य के भेद बताइए। तो वाक्य के तीन भेद होते हैं। याद रखिएगा इस चीज को। जी सर लॉकडाउन लग जाए तो प्रम लॉकडाउन क्यों लगेगा? हम नहीं समझ पा रहे बेटा। लॉकडाउन कोरोना की वजह से लग रहा है। इस टाइम में कोरोना थोड़ी चल रहा है। हां पेट्रोल डीजल गैस नहीं मिल रहा है तो उसके लिए लॉकडाउन थोड़ी लग जाएगा। अरे भाई गैस नहीं मिल रहा है। लॉकडाउन लगा लेंगे। तुम घर पे बैठ के और खाओगे ज्यादा गैस खत्म हो जाएगी। लॉकडाउन कैसे लगेगा भाई बताओ हम चलिए आगे की तरफ बढ़े चलिए आगे बढ़े। ठीक। अब बढ़ेंगे आगे की तरफ। अच्छा, अब आपका आएगा विशेषण किसे कहते हैं? यह परिभाषा आती है आपके एग्जाम के लिए। बहुत इंपॉर्टेंट है कि विशेषण किसे कहते हैं? एडजेक्टिव। बताओ भाई, विशेषण किसे कहते हैं? अब आपको विशेषण के बारे में बताना होगा। ठीक है? आइए। संज्ञा या सर्वनाम शब्दों की विशेषता बताने वाले शब्दों को विशेषण कहते हैं। जैसे काला, घोड़ा, चारकेले, सुंदर लड़की आदि। तो आपसे अगर पूछा जाए कि विशेषण किसे कहते हैं भाई मेरे? तो संज्ञा या सर्वनाम शब्दों की विशेषता बताने वाले शब्दों को विशेषण कहते हैं। भाई मेरे क्या कहते हैं? विशेषण कहते हैं। चलिए बताइए विशेषण के भेद कितने? कोई बच्चा बताएगा विशेषण के भेद कितने हैं? ओ मार भैया लोग बता दो विशेषण के कितने भेद हैं? अरे कोई तो बता दो। है कोई यहां पर? चलो चार भेद होते हैं। विशेषण के भेद तो अगर आपसे कोई पूछे विशेषण के भेद कितने होते हैं बेटा? चार। कितने होते हैं बेटा? चार भेद होते हैं। कोई बताएगा कौन-कौन से चार भेद होते हैं? हां जी तेज हैं बच्चे। ऐसी बात नहीं है। एक तो हो जाएगा बच्चा गुणवाचक विशेषण। क्या हो जाएगा? गुणवाचक विशेषण एक हो जाएगा गुणवाचक विशेषण दूसरा हो जाएगा संख्यावाचक विशेषण दूसरा हो जाएगा संख्यावाचक विशेषण तीसरा हो जाएगा परिमाणवाचक विशेषण परिमाणवाचक विशेषण और चौथा हो जाएगा सार्वनामिक विशेषण क्या हो जाएगा बेटा सार्वनामिक विशेषण यह चार प्रकार के आपके विशेषण हो जाएंगे। तो अगर आपके एग्जाम में सवाल आता है कि विशेषण किसे कहते हैं? विशेषण के भेद कितने होते हैं? तो आपके चार होते हैं। ठीक है? याद रखना। उसके बाद विशेष्य किसे कहते हैं? डेलड का आया हुआ सवाल है ये। अगर आपसे कहा जाए विशेषण विशेष्य किसे कहते हैं? समझिए। जिस संज्ञा या सर्वनाम शब्द की विशेषता बताई जाती है उसे विशेष्य कहते हैं। जैसे सुंदर लड़की। अब समझना भाई सुंदर लड़की। अगर हमने कह दिया सुंदर लड़की तो भाई लड़की तो हो गई विशेष क्योंकि लड़की की विशेषता बताई जाती है। तो जिनकी विशेषता बताई जाती है उसे हम विशेष्य कहते हैं। ध्यान दीजिएगा। जिसकी विशेषता बताई जाएगी उसे हम विशेष्य कहेंगे। और सुंदर क्या हो जाएगा बेटा? विशेषण हो जाएगा। क्या हो जाएगा? विशेषण हो जाएगा। एडजेक्टिव जिन्हें आप कहते हो। ठीक है? तो जिस संज्ञा या सर्वनाम शब्द की विशेषता बताई जाती है, उसे विशेष्य कहते हैं। उदाहरण सुंदर लड़की में सुंदर विशेषण है और लड़की विशेष्य है। बताइए बेटा एमसीक्यू साइंस की करवा दूंगा। परेशान मत हो बेटा। ठीक है? कहो तो कल ही करवा दें। खत्म कर दें कल करवा के। ठीक है। चलो कल हम लोग साइंस की क्लास कर लेंगे। ठीक है? एमसीक्यू बचा है ना साइंस की। कल कर लेंगे। डोंट वरी। परेशान मत होइए। क्योंकि हमको पता है जो चीज नहीं हुआ उसके लिए आप लोग इतना परेशान हो जाते हो जबकि मुझे सब पता है कि क्या और कैसे करना और कब करना है। अभी देखो मैराथन मेरी खत्म हो गई बेटा। मैराथन बहुत बड़ी चिंता होती है मेरे लिए। मैराथन आपकी खत्म हो गई है। जी चलिए आगे बढ़े। ठीक है। आगे की तरफ बढ़े बेटा। ठीक है। अब आएंगे आगे की तरफ। विद्या पर चार पंक्तियां लिखिए। अब आपसे एक सवाल यह पूछा गया था कि विद्या पर कोई चार पंक्ति लिखिए। तो विद्या धन सभी धर्म में सर्वश्रेष्ठ है। विद्या धनम सर्व धनम प्रधानम। ठीक है? तो विद्या धन सभी धन में सर्वश्रेष्ठ है। जिनके पास विद्या नहीं है, ना तप है, ना ज्ञान है, ना शील है, ना धर्म है, वह पृथ्वी पर भार स्वरूप होते हैं। उन्हें मनुष्य के रूप में पशु ही समझना चाहिए। बताइए। बोलिए भैया। बताइए नहीं आज नहीं चलेगी एसएसटी क्लास जी हम आगे बढ़े ठीक है तो विद्या धन सभी धन में सर्वश्रेष्ठ है जिनके पास विद्या नहीं है ना तप है ना ज्ञान है ना शील है ना धर्म है वह पृथ्वी पर भार स्वरूप होते हैं और उन्हें मनुष्य के रूप में पशु ही समझना चाहिए बताइए इतनी बात समझ में आ गई बेटा? हां जी। चलिए अब आते हैं। अच्छा एक काम करना आप लोग। अब एक काम करना जो मैं बता रहा हूं। आपको एक श्लोक याद करना है। अब मैं दो तीन चार श्लोक मैं आपको बताऊंगा। आपको इन तीन चार श्लोकों में से एक श्लोक आपको याद कर लेना है संस्कृत में और उसका हिंदी में अर्थ भी आप जान लीजिए क्योंकि आपके एग्जाम में दो नंबर में संस्कृत का एक श्लोक लिखवाने को आता है। ठीक है? तो एक श्लोक आप संस्कृत में याद कर लीजिएगा। अभी कोई बच्चा ये कह रहा था कि कोई सब्जेक्ट कंप्लीट नहीं दे रहा। एक बार कोई बच्चा बताएगा कौन सा सब्जेक्ट इनकंप्लीट है अभी तक? कोई बच्चा मतलब भाई सारे सब्जेक्ट्स करवा दिए गए। सभी का एमसीक्यू करा दिया गया। केवल साइंस बचा है। कल मैं करवा दूंगा। छुट्टी मिलेगा। सारे सब्जेक्ट कंप्लीट हो गए। मैराथन में सारे मैराथन कंप्लीट हो गए। एसएसटी की मैराथन बची है। अजय सर करवाएंगे। रही बात मैथ के मैराथन की तो मैथ की मैं पांच क्लास कराऊंगा और उसी पांच क्लास में पूरी मैथ खत्म हो जाएगी। अब चाहे आप उसे मैराथन समझ लेना चाहे चैप्टर वाइज रिवीजन समझ लेना। इसके अलावा और क्या बचा है? कोई बच्चा बताएगा मुझे बेटा बताइए। बताइए कोई चीज और बचा है इसके अलावा? हां YouTube वाले बच्चे ये जरूर कह सकते हैं कि आपने सारे सब्जेक्ट्स का एमसीक्यू नहीं करवाया। तो बेटा YouTube की बात अलग होती है। अगर हम बात करते हैं यहां पर चलिए आगे की तरफ बढ़े। चलिए इतनी बात समझ में आ गया। देखो एक चीज मैं फिर बता दूं बेटा अगर कोई परीक्षा वीर की क्लास से संतुष्ट नहीं है ना बेटा आप इस दुनिया में अभी आगे भी बहुत पढ़ोगे ना बेटा कभी संतुष्ट ही नहीं हो सकते हो क्योंकि यहां पर कुछ बच्चे कह रहे हैं आप सर केवल थ्योरी पढ़ा रहे हो बेटा और क्या पढ़ाया जाए इसमें रिवीजन मैराथन में थ्योरी की ही होती है ना बेटा रही बात एमसीक्यू की तो एमसीक्यू तो हम लोग एग्जाम के पहले हमेशा करते ही करते हैं अबकी बार भी करेंगे भाई जब हम लोग सुपरफास्ट रिवीजन करते हैं एग्जाम वाली रात में तो कौन सी चीज करते हैं एमसीक्यू ही करते हैं ना बेटा वहां पे लेकिन ठीक है कोई बात नहीं आप लोग बस 10-15 दिन शिवम सर को और झेल लीजिए उसके बाद आप लोग सुकून से कहीं और पढ़ना होगा तो पढ़ लेना का दिक्कत है ठीक है आगे बढ़े चलिए ये वही बच्चे होते हैं ना बेटा जो पूरे 6 महीना नहीं पढ़ते 5 दिन में आएंगे बस इनको घोल कर पिला दिया जाए सब कुछ बताइए चलिए चलिए आगे बढ़े बेटा हम चलिए आगे बढ़े। चलिए आगे बढ़ते हैं। अब देखो इसको मन हो तो याद कर लेना आप लोग क्योंकि एक श्लोक आपके एग्जाम में आएगा। पूछा जाएगा एक श्लोक आपके एग्जाम में। जी एक श्लोक आपके एग्जाम में पूछा जाएगा बड़ा ही अच्छा तरीके से यहां पर लिखा है क्या लिखा है बेटा बताना बड़ा अच्छा सवाल है बहुत मस्त बहुत मस्त एकदम जबरदस्त तरीके से आलस्य कुतो विद्या अविदस्य कुतो धनम अधनस कुतो मित्रम अमित्रस्य कुतो सुखम चलिए बताइए इसका आंसर बताइए क्या होगा बेटा आप सभी बताइए इसका हिंदी में अर्थ बताइए क्या होगा कोई बच्चा जानता है इसका हिंदी में अर्थ ऐप पर पढ़ा चुका हूं बेटा बताओ हां देखिए बताइए आलस्य कुतो विद्या यानी आलस को विद्या कहां है समझना ऐसे लिखना है आलसी को विद्या कहां है आलसी को विद्या कहां कहां आलसी को विद्या कहां कॉमा अविदस्य कुतो धनम यानी कि अनपढ़ को धन कहा या जिसके पास विद्या नहीं है अनपढ़ को धन कहां अनपढ़ को धन कहां इसी के साथ अनपढ़ को धन कहां अध नस कुतो मित्रम निर्धन को मित्र कहा निर्धन को मित्र कहां निर्धन को मित्र कहां और अमित्रस कुतो सुखम यानी और अमित्र को सुख कहां ठीक है और क्या है बेटा अमित्र को सुख कहां अमित्र को सुख कहां अमित्र को सुख कहां? अमित्र को सुख कहां? अब ये सवाल आपके एग्जाम में आ गए। कुछ बच्चे कह रहे हैं अति लघु उत्तरीय बेटा मैं सब नहीं पढ़ा सकता। बेटा मेरी हिम्मत अब हार चुकी है बेटा। अब हम इससे ज्यादा नहीं पढ़ा सकते बेटा। ठीक है? अति लघु उत्तरीय लघु उत्तरीय जब आपको प्रीवियस ईयर कराया जाता है तो उसमें एमसीक्यू भी होता है। अति लघु उत्तरीय भी होता है। तो उतना आप पढ़ लो बेटा। ठीक है? अब हर एक चीज मत मांगा करो बेटा। इतना आठ सब्जेक्ट्स पढ़ाना ये कोई मामूली बात नहीं होती बेटा। आठ सब्जेक्ट्स की पहले थ्योरी कराओ। फिर आठों का तुमको प्रीवियस ईयर चाहिए। फिर आठों का आपको वेरी आर्ट चाहिए। फिर आठों का एमसीक्यू चाहिए। नहीं पॉसिबल है बेटा। मेरे लिए तो नहीं पॉसिबल है भाई। अगर कोई करा रहा है तो आप वहां जाकर पढ़ लो। भाई मैं झूठ नहीं बोल रहा हूं। मतलब क्या ही बताऊं मैं आपको। बाकी ठीक है। आगे अगर समय मिलेगा जितना तक हो सकेगा हम उतना करवाने की कोशिश करेंगे। बाकी जितना हो पाएगा यार उतना ही करेंगे। हम झूठे वादे नहीं करेंगे भाई। ठीक है? ये वही बच्चे हैं जो बेटा पूरा साल नहीं पढ़ते हैं। ये खाली बस एग्जाम वाले टाइम पे आएंगे। ये करा दो वो करा दो। अगली बार से बेटा अब आप लोग तो जा रहे हो। मैं अगली बार से दो तीन ठो इंजेक्शन बनवाऊंगा। ठीक है? एक वेरी सार्ट का एक एमसीक्यू का, एक थ्योरी का और जैसे कोई कहेगा बस एक इंजेक्शन आपके यहां पर डिलीवर कर दिया जाएगा और उसको आप अपने नजदीकी डॉक्टर से लगवा लेना। ये वेरी शॉर्ट वाला है भैया। समय लगता है हर एक चीज में यार इतना जल्दी नहीं हो पाता है और एक तो दो-दो सेमेस्टर को पढ़ाना होता है। समझ रहे हो ना बेटा? और दोनों में आठ आठ 16 सब्जेक्ट हो जाते हैं। तो किसी भी एक टीचर के लिए ये मामूली नहीं होता है। और अगर आपके लिए मैं कोई एक टीचर ले भी आऊं तो आप लोग ऐसा विरोध करते हो जैसे लगता है कि आपको कोई एक राक्षस दे दिया गया टीचर की जगह पे। तो मजबूरी होती है ना भाई किसी भी टीचर के लिए। अब 16 सब्जेक्ट्स पढ़ाना होता है। आपको तो कह दिया कि अरे गुरु जी आपको तो पढ़ाना है। भाई 16 सब्जेक्ट्स का कंटेंट बनाना बहुत मुश्किल है। बेटा अब इससे ज्यादा नहीं पढ़ा पाऊंगा बेटा। किसी को पढ़ना होगा पढ़ना। नहीं पढ़ना होगा मत पढ़ना। भाई हम झूठ काहे बोले तुमसे। काहे हम झूठे? उम्मीदें दें कि तुम हमारी उम्मीद में रहो। अगर कोई आपको करा रहा है आप वहां पे जाके पढ़ लीजिए भाई मेरे। ठीक है? सब तरफ ज्ञान की गंगा बह रही है। जहां मन और दुई लोटा पानी उठा के नहा लो। चलिए हम चलिए आगे बढ़े बेटा ठीक अगला अच्छा यहां पे कुछ नीति परक वाक्य हैं इनका हिंदी में अर्थ पूछा जाता है। जैसे विद्या धर्मे शोभते इसका अर्थ क्या है? विद्या की शोभा धर्म से होती है। ऐसे आएगा विद्या ददाति विनयम का हिंदी में अर्थ क्या होता है? तो विद्या से विनय की प्राप्ति होती है। विद्या धनम सर्व धनम प्रधानम इसका अर्थ क्या होता है? विद्या रूपी धन सभी धनों में श्रेष्ठ है और असतो मा सद्गमय हे ईश्वर मुझे असत्य से सत्य की ओर ले चलो जी आ गया भैया समझ में चलिए आगे बढ़े। ठीक है। आ गया भैया। चलिए बहुत बढ़िया। अब आते हैं एक यह पूछा गया था काक चेष्टा वको ध्यानम स्ान निद्रा तथयोचा अल्पाहारी गृह त्यागी विद्यार्थी पंच लक्षणम इसका हिंदी में अर्थ लिखिए बेटा बोलो इसका हिंदी में अर्थ लिखिए काक चेष्टा वको ध्यानम स्ान निद्रा तथयोचा अल्पाहारी गृह त्यागी विद्यार्थी पंच लक्षणम 2022 में सवाल पूछा गया था बेटा 2022 में यह 2022 में आया था। इसका हिंदी में अर्थ लिखना था। ठीक है? हिंदी में इसका अर्थ लिखना था। बताओ कौवे की तरह चतुर बगुले की तरह ध्यान करने वाले स्वान यानी कुत्ते की तरह कम निद्रा तथा कम कान खाने वाले ग्रह का त्याग करने वाले ही विद्यार्थी के पांच लक्षण है देखो काक चेष्टा कौवे की तरह ध्यान कौवे की तरह ध्यान नहीं कौवे की तरह इच्छा चेष्टा कौवे की तरह इच्छा बगुले की तरह ध्यान बगुले की तरह ध्यान बगुले की तरह ध्यान कुत्ते की तरह निद्रा रखने वाले क्या हो जाएगा बेटा? कुत्ते की तरह निद्रा वाले निद्रा वाले अल्पाहारी गृह त्यागी कम खाने वाले कम खाने वाले और ग्रह त्यागने वाले और ग्रह त्यागने वाले ग्रह त्यागने वाले यह विद्यार्थी के पांच लक्षण होते हैं। यह विद्यार्थी के पांच लक्षण होते हैं। ये विद्यार्थी के पांच लक्षण होते हैं। ये विद्यार्थी के पांच लक्षण होते हैं। अब बताइए इतनी बात समझ में आ गई आप सबको? जी आ गया भैया समझ में? ठीक। अगला है ये क्वेश्चन 2021 में आया था। ये जितना पढ़ा रहा हूं बेटा सारे याद कर लेना आप लोग। और एक संस्कृत में श्लोक भी याद कर लेना जो आपको आसान लगेगा। एक याद कर लेना। 2021 में सवाल आया था एशाम न विद्या ना तपो ना दानम। यानी जिसके पास ना विद्या है, ना तप है, ना दान है, ना शील है, ना ज्ञान है, ना गुण है, ना धर्म है, वह क्या हो जाएगा? बताओ भाई। उसके आगे बढ़ो। जिनके पास ना विद्या है, ना तप है, ना ज्ञान है, ना धर्म है, ना शील है, वे पृथ्वी पर भार स्वरूप होते हैं। उन्हें मनुष्य के रूप में पशु ही समझना चाहिए। ठीक है? जिनके पास देखो क्या लिखोगे बेटा यहां पर? जिनके पास जिनके पास ना विद्या है जिनके पास ना विद्या है ना तप है ना दान है ना ज्ञान है ना ज्ञान है ना गुण है और ना धर्म है और ना धर्म है और ना धर्म है वो पृथ्वी पर पर भार स्वरूप होते हैं। वे पृथ्वी पर भार स्वरूप होते हैं। वह पृथ्वी पर भार स्वरूप होते हैं। उन्हें मनुष्य के रूप में सॉरी उन्हें मनुष्य के रूप में पशु ही समझना चाहिए। उन्हें मनुष्य के रूप में उन्हें मनुष्य के रूप में पशु ही समझना चाहिए। पशु ही समझना चाहिए। पशु ही समझना चाहिए। आ गया भाई समझ में? ठीक। ठीक है। आगे बढ़े। अगला रूप यवन संपन्न विशाल कुल संभवा विद्या हीना न सोभंते निर्गंधा यु कििंचुका इसका बताइए हां ये भी सवाल आपके एग्जाम में है ठीक है इसका भी याद रख लीजिए रूप यौवन संपन्न इसका मतलब है व्यक्ति चाहे कितना रूपवान हो व्यक्ति चाहे कितना रूपवान हो व्यक्ति चाहे कितना रूपवान हो रूपवान हो किसी बड़े कुल में जन्म क्यों ना लिया हो किसी बड़े कुल में जन्म ही लिया हो जन्म ही लिया हो यदि उसके पास विद्या नहीं है। यदि उसके पास विद्या नहीं है। यदि उसके पास विद्या नहीं है। यदि उसके पास विद्या नहीं है तो उसकी वही स्थिति होती है। तो उसकी वही स्थिति होती है तो उसकी वही स्थिति होती है होती है जो बिना सुगंध के जो बिना सुगंध के टिशू के फूल की होती है। टिशू के फूल की होती है। होती है। अब बताइए समझ में आ गया बेटा। हां। चलिए। एक बार लाइक कर दो भैया वीडियो को अगर अच्छी लग रही है तो। जी जिनको अच्छी लग रही है वीडियो प्लीज आप लाइक कर दीजिए बेटा हम बताइए हम आगे बढ़े जी आगे अब आपसे पूछा जाएगा संस्कृत में पुरुष कितने होते हैं? सब एक-एक नंबर वाले सवाल हैं। संस्कृत में तीन पुरुष होते हैं। प्रथम पुरुष, मध्यम पुरुष, उत्तम पुरुष। ठीक है? उसके बाद सवाल आएगा संस्कृत में वचन कितने होते हैं? तो संस्कृत में तीन वचन होते हैं। एकवचन, द्विवचन, बहुवचन। उसके बाद आगे आएगा संस्कृत में लकार कितने होते हैं? तो संस्कृत में पांच लकार होते हैं। लट लकार, लंग लकार, लिट लकार, लोट लकार और विध लिंग लकार। कोई बात नहीं बेटा लाइक कर दो मनो नहीं तो कोई बात नहीं। इतना ही अरे इमरजेंसी नहीं होती है। लाइक करनी ही करनी है। पढ़ते रहो आप लोग। नंबर अच्छा ले आओ। 95% नंबर लाओ। चौथा सेमेस्टर है। बाकी लाइकवाइक करो ना करो। क्या करेंगे? लाइक शिवम सब लेकर कहीं बैंक में जमा करने जाएंगे। हां जी। बस थोड़ा लगता है कि हां भाई इतने बच्चे आए हैं तो इतने लोग लाइक किए हैं। बाकी और कोई इतना फर्क नहीं पड़ता इससे। जी चलिए आगे बढ़े बेटा। तो अगर आपसे पूछा जाएगा लकार कितने होते हैं? तो लट लकार, लंग लकार, लट लकार, लोट लकार और विध लिंग लकार। ठीक है? आगे ये तो समास हो गया ना। समास किसे कहते हैं? ये तो हमने बता ही दिया था आपको समास समास समास जी अच्छा एक बात बताओ आप हमें एक बात बताओ ज्यादा नहीं अगर आपसे मैं एक पूछूं कि एक संस्कृत में श्लोक लिखना है कितने बच्चे श्लोक लिख ले जाएंगे बताओ अगर आपसे पूछा जाए कि संस्कृत में एक श्लोक लिखिए कितने बच्चे श्लोक लिख ले जाएंगे हम हम ठीक है चलिए इतनी बात समझ में आ गई ठीक है बाकी देखो बेटा एमसीक्यू मैंने ऐप पे करा रखा है सभी बच्चों ने एमसीक्यू कर लिया है हमने ऐप पर करा रखा रखा है। कल हम आपको विज्ञान का एमसीक्यू करवा देंगे YouTube पर। ठीक है? तो कल 8:30 आप लोग आइए। कल विज्ञान का एमसीक्यू हम करवाएंगे। हमने तो सोचा था कल मैथ स्टार्ट करेंगे। लेकिन ठीक है। मुझे पता है कुछ बच्चे परेशान हैं। बहुत ज्यादा परेशान हैं। तो कल आपकी विज्ञान की एमसीक्यू हम करवा देंगे सुबह 8:30 बजे और परसों से हम लोग जो है मैथ रिवीजन करना स्टार्ट करें। देखो बेटा मेरे पास भी मजबूरी होती है। मजबूरी ये होती है कि सारे सब्जेक्ट्स कंप्लीट करवाना होता है। फिर आप लोग उसका सबका मैराथन नाम मानते हो। अब भाई अगर हम एक सब्जेक्ट्स की दो दिन भी मैराथन करें तो 8 2नी 16 दिन तो चला जाता है ऐसे ही। उसके बाद में अगर आप हर सब्जेक्ट्स की एमसीक्यू कहेंगे फिर आठ एमसीक्यू की क्लासेस चलेंगी। फिर आठ बेरी 60 की क्लासेस चलेंगी। प्रीवियस ईयर करोगे बेटा तो एक सब्जेक्ट की कम से कम पांच छह प्रीवियस ईयर कराना हो तो 8 * 6 = 48 बेटा 50 क्लास प्रीवियस ईयर पेपर की हो जाती है तो किसी भी टीचर के लिए हम ये नहीं कह रहे सी दुनिया में किसी के लिए भी इतना ज्यादा वो नहीं है कि सब है सब करवा पाएगा नहीं करवा पाएगा फिर उसके बाद में पहले अब हम मैथ खत्म करा दिए हैं अभी अगर आप लोग कहें कि नहीं सर मैथ का रिवीजन हमें नहीं चाहिए हम चलो कल से एमसीक्यू और वेरी हार्ड शुरू कर दें बताओ चाहते हो आप लोग ही मैं मैथ की रिवीजन ना कराऊं इस बार आप लोगों को तो आप लोग पहले मैथ पढ़ते हो फिर मैथ का रिवीजन करते हो फिर उसकी मैराथन मांगते हो तो शिवम सर कहां चले जाएं बेटा उनकी प्रीवियस ईयर भी आपको करनी होती है हर एक चीज मतलब एक-एक चीज आप लोगों को ऐसा अब बताओ इतनी क्लासेस कहां से लाई जाए और इतना समय कहां से लाया जाए ये पहले आप हमको बता दीजिए बेटा हां जी ठीक है चलिए आ गया ना भाई समझ तो वो चीजें हैं ना हर एक चीज। अब जो चीजें दो-दो बार पढ़ चुके हो ना बेटा उसमें तो मतलब ना ही वो करो। ठीक है? तो खत्म हो गई आपकी हिंदी की मैराथन। आप लोग कम से कम सात से आठ साल देखो बेटा ये जितने बच्चे हैं ना डिस्टर्ब करने वाले। ये वही बच्चे हैं जो पूरा टाइम नहीं पढ़े। अब ये इतना फ्रस्ट्रेट हो चुके हैं एग्जाम देखकर। पहले तो अभी तक ये पूछ ही रहे थे कब टलेगा? टलेगा। अब जब अचानक से एग्जाम डेट आ गया ना बेटा ये परेशान हैं। और ये खुद नहीं पढ़ रहे हैं। तुमको भी नहीं पढ़ने देंगे और ना मुझे पढ़ाने देंगे। ये वही बच्चे हैं। बाकी जो बच्चा लगातार मुझसे पढ़ा है, सीधा परीक्षा से तैयारी किया है, उसे सारे सब्जेक्ट्स की एमसीक्यू भी मिल चुकी है। मिल चुकी है कि नहीं मिल चुकी? एक बार बताना जरा कमेंट करके। एमसीक्यू मिल चुकी है ना ऐप वाले बच्चों को? सारी एमसीक्यू मैंने कराई है। कोई भी सब्जेक्ट्स का नहीं छोड़ा। एक विज्ञान की छुट्टी है। कल करवा देंगे आपको। तो जो बच्चा मेरे साथ रहेगा हम उन्हीं को तो पढ़ा पाएंगे। भाई अगर तुमको तेल खरीदने जाना है तो दुकान तक तो जाना पड़ेगा भाई मेरे। अब घर पे तो तुम्हारे कोई तेल लेकर आएगा नहीं तुमको देने के लिए। भाई सिंपल सी बात है ना? तो जो मेरे साथ पढ़ा है उसको एमसीक्यू भी हो चुका है। तो ये चीजें हैं। ठीक है? बाकी मैराथन खत्म हो जाएगी। समय बचेगा तो मैं छुट्टी तो करूंगा नहीं भाई। देखो मैं संडे को भी पढ़ा ही रहा हूं आपको। तो और तबीयत खराब है तब भी मैं आपको पढ़ा रहा हूं। तो छोड़ तो मैं कुछ नहीं रहा हूं। लेकिन सभी को मैं खुश नहीं कर पाऊंगा और जो बच्चे नहीं खुश हैं बेटा आप ऐसे ही रहो कोई दिक्कत नहीं बेटा। ठीक है? तो 10% लोग तो नाराज हमसे हमेशा रहेंगे। चलिए थैंक यू सो मच। जय हिंद। मिलते हैं आपको कल सुबह 8:30 बजे विज्ञान की एमसीक्यू की क्लास में। थैंक यू सो मच। जय हिंद।
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