Shahzadi, Shahzada Or Bolne Wala Tota Ka Anokha Qissa || Moral Stories in Hindi, Urdu

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Full Transcript

यह कहानी एक ऐसी घमंडी और मगरूर शहजादी की है जो मर्दों से बेहद नफरत करती थी। शहजादी ज़ैनब बहुत ही खूबसूरत थी और बादशाह की इकलौती बेटी थी। इसीलिए शहजादी ज़ैनब यह सोचती थी कि कोई भी मर्द उसे छू भी ना पाए। क्योंकि उसके जैसी हसीनो जमील इस पूरी दुनिया में और कोई नहीं है। शहजादी मर्दों से इतनी शदीद नफरत करती थी कि अगर कोई मर्द उसके महल के पास से भी गुजरता तो वह उसे फौरन मौत की सजा सुना देती थी। शहजादी ज़ैनब अपने वालिद सुल्तान हाशिम से भी बहुत कम मिलती थी। शहजादी घमंडी होने के साथ-साथ बहुत सख्त दिल और बेरहम बेरहम भी थी। जिसे चाहती उसे फौरन मौत की सजा सुना देती थी। मगर दोस्तों एक दिन ऐसा हुआ जो शहजादी के वहमो गुमान में भी नहीं था। हुआ यूं कि शहजादी के महल में रात के वक्त एक गरीब सौदागर का बेटा औरत का भेष बदलकर घुस गया। फिर वो शहजादी के कमरे तक पहुंच गया। फिर शहजादी के साथ उसने जो किया उसे सुनकर आप हैरान रह जाएंगे। फिर किस तरह एक बोलने वाले तोते ने शहजादी को उस सौदागर के बेटे के साथ शादी करने पर राजी कर लिया। दोस्तों कहानी बहुत ही मजेदार है। मुझे यकीन है कि आपको बहुत पसंद आएगी। मगर हां, कहानी को पूरी सुनने के लिए वीडियो को आखिर तक जरूर देखिएगा। तो चलिए अब इस दिलचस्प दास्तान को शुरू करते हैं। पुराने जमाने की बात है। सर जमीन यमन में एक बादशाह की हुकूमत थी। जिसका नाम सुल्तान हाशिम था। मुल्क में हर तरफ खुशहाली थी। बादशाह का एक बेटा था जिसका नाम शहजादा रयान था जो देखने में बेहद खूबसूरत था। शहजादा रयान काफी हमदर्द था और गरीबों का बहुत ख्याल रखता था। लोग उसे दिल से दुआएं देते थे। लेकिन इसके साथ-साथ वह बहुत जिद्दी भी था। बादशाह के वज़र का भी एक बेटा था जिसका नाम तारिक था। वज़र का बेटा तारिक और शहजादा रयान आपस में गहरे दोस्त थे। शहजादे के लिए बड़े-बड़े मुल्कों की शहजादियों के रिश्ते आते थे। लेकिन उसे कोई भी शहजादी पसंद नहीं आती थी और वह शादी से इंकार कर देता था। एक दिन बादशाह का दरबार लगा हुआ था। दूर-दूर से सौदागर अपना सामान लेकर वहां आए थे ताकि बादशाह उनसे कुछ नायाब सामान खरीद सके। जब बादशाह ने सब सौदागरों का सामान देख लिया और जो खरीदना था वह खरीद लिया तो आखिर में एक बूढ़ा सौदागर आगे बढ़ा। वो जो सामान लाया था उसने वह दिखाया। बूढ़े सौदागर के पास एक फ्रेम भी था। शहजादे ने सौदागर से कहा यह क्या है? सौदागर परेशान हो गया और फ्रेम को छुपाने लगा कि यह कोई खास चीज नहीं है। लेकिन शहजादा बोला नहीं वो दिखाओ। सौदागर ने कांपते हाथों के साथ उसे वो फ्रेम दे दिया। उसमें एक लड़की की तस्वीर बनी हुई थी जिसे देखकर शहजादा हैरान रह गया। क्योंकि वो लड़की बेहद खूबसूरत थी। शहजादे ने पूछा यह लड़की कौन है? तो सौदागर बोला, यह दमिश की शहजादी है। बड़े-बड़े मुल्कों के शहजादे इसे शादी के लिए पैगाम भेजते रहते हैं। लेकिन इसे कोई पसंद नहीं आता और शहजादी मर्दों से बहुत नफरत करती है। शहजादे ने वह तस्वीर बूढ़े सौदागर से खरीद ली और जाकर अपनी वालिदा मल्लिका साहिबा को दिखाई। तो मल्लिका को भी वह लड़की बहुत पसंद आ गई। शहजादा रयान बहुत सी शहजादियों का रिश्ता ठुकरा चुका था क्योंकि उसे कोई पसंद नहीं आता था। शहजादा रयान अपनी मां से कहने लगा अम्मी हुजूर अगर मैं शादी करूंगा तो इसी लड़की से करूंगा वरना मैं कभी शादी ही नहीं करूंगा। मलिका साहिबा ने सारी बात बादशाह को बताई कि शहजादा क्या चाहता है। चुनांचे बादशाह ने शहजादा रेयान के रिश्ते के लिए दमिश्क के बादशाह के पास खत भेजा। लेकिन वो खत कुछ दिन के बाद नाकाम वापस लौट आया। यह सुनकर शहजादा बोला क्यों ना मैं खुद उस शहजादी के मुल्क में जाऊं और उसे शादी के लिए मनाऊं। शहजादा रयान बहुत जिद करने लगा। आखिरकार बादशाह मान गया और शहजादा सौदागर का भेष बदलकर अपने दोस्त यानी वजीर के बेटे तारिक को साथ लेकर दमिश्क की तरफ चल दिया और आखिरकार उस मुल्क में पहुंच गया। वो लोग आहिस्ता-आहिस्ता चलते हुए बाजार से गुजर रहे थे कि अचानक शहजादे की नजरें एक परिंदा बेचने वाले पर पड़ी जिसके पास पिंजरे में हर किस्म के परिंदे और तोते मौजूद थे। शहजादा परिंदों से बेहद मोहब्बत करता था। वो परिंदे खरीदने के लिए रुक गया और उतर कर परिंदे वाले के पास गया। वहां जाकर उसने देखा तो उसे एक बोलने वाला तोता नजर आया। शहजादे ने भारी कीमत देकर वह तोता खरीद लिया। तोते ने अपना नाम याकूद बताया था। शहजादे ने तोते से पूछा, याकूद मियां क्या तुम्हें पिंजरे से निकाल दूं? याकूद तोता कहने लगा, हां, मुझे पिंजरे से निकाल दीजिए और बेफिक्र रहिए। मैं पूरी जिंदगी आपके साथ रहूंगा। शहजादे ने पिंजरे का दरवाजा खोला। और तोता पिंजरे से बाहर निकलकर शहजादे के कंधे पर बैठ गया और बोला शुक्रिया आपने मुझ पर एतमाद करके मुझे खरीद लिया। फिर जल्द ही वह दोनों सराय में पहुंच गए। लेकिन सराय पहुंचने से पहले उन्होंने एक मकान के सौदागर से बात करके शहजादी के महल के करीब ही एक महल खरीद लिया था। शहजादा और वजीर का बेटा तारिक दोनों काफी थके हुए थे। इसलिए वह दोनों जाते ही बिस्तर पर लेट गए। मगर शहजादा रयान अजीब बेचैनी में था। याकूब तोता भी उनके करीब ही खामोश बैठा था। तोते ने शहजादे को खामोश और उदास देखकर कहा, "अगर बुरा ना माने तो एक बात पूछूं।" मुझे आप बहुत बेचैन लग रहे हैं। क्या बात है? मुझे बताइए। जहां तक हो सकेगा, मैं मदद करने की कोशिश करूंगा। याकू तोते ने यह सब फिक्रमंद लहजे में कहा। शहजादा रियान पहले तो कुछ देर सोच में डूबा रहा। फिर बोल पड़ा। मैं एक बात सोच रहा हूं। मगर इसके साथ यह भी ख्याल आता है कि तुमसे कहूं या ना कहूं। मगर मैं कहने से मना करके तुम्हारा दिल भी नहीं तोड़ना चाहता। दरअसल मैं यमन का शहजादा रियान हूं। और यह मेरा दोस्त और साथी वजीर का बेटा तारिक है। मैंने एक सौदागर के पास यहां की शहजादी ज़ैनब की तस्वीर देखी तो उसको दिल दे बैठा। मेरे अब्बा हुजूर ने शहजादी ज़ैनब के लिए रिश्ता भेजा। मगर इंकार हुआ क्योंकि शहजादी को मर्दों से सख्त नफरत है। लेकिन मैं तारिक को साथ लेकर यहां आ गया। लेकिन कुछ समझ नहीं आ रहा। फिलहाल तो कसर-ए-गुल जहां शहजादी ज़ैनब रहती है। उसके सामने एक महल ले लिया है। कम से कम इस महल को तो देखता रहूंगा जिसमें शहजादी ज़ैनब रहती है। शहजादे ने टोटे को सारी बात तफसील से बताई। तोता बोला मैं आपका दर्द समझता हूं शहजादे आप अगर इजाजत दें तो मैं भी कोशिश करूं मैं आपको यकीन दिलाता हूं कि मैं जल्द ही शहजादी ज़ैनब को राजी कर लूंगा। शहजादा बोला अगर ऐसा हो जाए तो मैं तुम्हारा एहसान जिंदगी भर नहीं भूलूंगा। इसके बाद याकूबद तोता उड़कर बाहर निकल गया और शहजादा अनजाने में मुस्कुरा दिया। शहजादा रयान के दिल को ना जाने क्यों यकीन सा आ गया था कि याकूबद तोता जरूर शहजादी को राजी कर लेगा। उधर शहजादी ज़ैनब आज सुबह जब सैर के लिए कसरे गुल के करीब बाग में निकली तो वह बहुत खुश नजर आ रही थी। वो बाघ के खूबसूरत नजारे देख ही रही थी कि अचानक उसके कानों में एक आवाज पड़ी। सुबह का सलाम हो शहजादी साहिबा। आवाज मर्दाना लगती थी। मगर लहजा बहुत प्यारा और दिलकश था। शहजादी के कानों में जैसे ही अल्फाज पड़े वह बुरी तरह उछल पड़ी और फिर जैसे ही उसे एहसास हुआ कि लहजा मर्दाना था। गुस्से से उसका सफेद रंग बहुत ज्यादा सुर्ख हो गया। आंखों से जैसे शोले निकलने लगे। कौन हो तुम? और हमारे महल में आने की तुमने जुर्रत कैसे की? शहजादी ने बड़े गुस्से में डांट कर कहा। आवाज देने वाला नजर नहीं आ रहा था। लेकिन जिस तरफ से आवाज आ रही थी वहां दरख्त बेहद घने थे। इसलिए उसने सोचा कि वह शख्स जरूर इन दरख्तों के पीछे छुपा हुआ है। बगैर इजाजत के महल में आने की माफी चाहता हूं। मगर हमें आपके महल में आने से कौन रोक सकता है? वही दिलकश आवाज दोबारा सुनाई दी। और शहजादी उसकी हिम्मत और गुस्ताखी पर हैरान रह गई। तुम कौन हो? सामने आओ वरना मैं कनीजों को बुलाती हूं। तुम्हें इल्म नहीं कि हमारे महल के करीब आने वाले मर्द को कत्ल कर दिया जाता है। शहजादी के गुस्से की अब इंतहा हो रही थी। तोता बोला आपको देखने के बाद भला किसको अपनी जिंदगी अच्छी लगती है। शहजादी का गुस्से के मारे बुरा हाल हो गया। उसकी समझ में नहीं आ रहा था कि यह गुस्ताख कौन है और यह पहरेदारों की नजर से बचकर अंदर दाखिल होने में कैसे कामयाब हो गया। उसने कनीज को बुलवाने के लिए ताली बजाने के लिए हाथ उठाए ही थे कि अचानक दरख्तों में फड़फड़ाहट की आवाज सुनाई दी और दूसरे ही लम्हे एक खूबसूरत तोता उड़कर शहजादी के सामने दरख्त पर आकर बैठ गया। शहजादी बड़ी हैरान हुई। तोते ने कहा मैं हाजिर हो गया हूं शहजादी साहिबा और शहजादी हैरत के मारे उछल पड़ी। अब उसे मालूम हुआ कि अब तक उससे बातें करने वाला तोता ही था। इतने खूबसूरत तोते को इस तरह साफ आवाज में बातें करते देखकर वो खुश हुई। शहजादी ने बड़ी हैरानी से कहा, "यह तुम थे मियां मिट्ठू।" कमाल है। तुम बड़ी खूबसूरत बातें करते हो। तुम्हें यह बातें किसने सिखाई है? याकू तोते ने जवाब दिया मेरा नाम यहां मििट्ठू नहीं बल्कि याकूद है और इंसानों की तरह बातें करना मैंने बचपन ही से सीखा है। शहजादी ज़ैनब मुस्कुराने लगी और बोली तुम्हारा नाम भी तुम्हारी तरह बेहद खूबसूरत है। क्या तुम हमारे पास रहोगे? तोता बोला नहीं शहजादी मेरा हकदार एक सौदागर का बेटा है। शहजादी बोली सौदागर का बेटा कौन है? उसका क्या नाम है? हम बादशाह सलामत से कहकर तुम्हें उससे अपने लिए मांगेंगे। तोता बोला नहीं शहजादी साहिबा मैं अपने मालिक से बेहद मोहब्बत करता हूं। वो है ही बेहद खूबसूरत इतना खूबसूरत जितनी आप हैं। वैसे अगर आप इजाजत दें तो मैं आपके पास आता रहूंगा। शहजादी बोली अच्छा तोते मियां जैसे तुम्हारी खुशी बहरहाल तुम वादा करो कि मेरे पास जरूर आते रहोगे। तोता बोला मैं वादा तो नहीं कर सकता क्योंकि मेरे मालिक को पता लग गया तो मुझे जान से मार डालेगा। शहजादी बोली वो क्यों उसे क्या ऐतराज हो सकता है? तोता कहने लगा शहजादी साहिबा वो औरतों से बेहद नफरत करता है। इतनी नफरत कि उनका नाम भी सुनना गवारा नहीं करता। और फिर आप भी एक औरत हैं। चाहे शहजादी ही क्यों ना हो। अगर उसे मालूम हो गया कि मैंने एक औरत से बातें की हैं तो वह मुझे जान से मार डालेगा। शहजादी हैरान होकर बोली औरतों से नफरत करता है। क्यों? तोते ने उसे इधर-उधर की बातें बताकर समझा दिया कि वो औरतों से क्यों नफरत करता है। शहजादी बोली उसकी मजाल कि वो हमारे मुकाबले में अपने आप को ज्यादा खूबसूरत समझे और औरत जात को जिद्दी और बेवफा कहे। हम इस बात को बर्दाश्त नहीं कर सकते। तोते का काम हो चुका था। उसने कहा शहजादी साहिबा सौदागर मेरा इंतजार करता होगा। मैं चलता हूं। और फिर याकूब तोता फिर से उड़ गया। शहजादी के ज़हन में अभी तक तोते की बातें गूंज रही थी। वो सोच रही थी कि ऐसा कौन सा सौदागर का बेटा होगा जो अपने आप को सबसे ज्यादा खूबसूरत समझता है। क्या वाकई वो बेहद खूबसूरत होगा? वह औरतों से सख्त नफरत भी करता है। यही सोचती हुई वह अपने कमरे में आ गई। शहजादी अपने बिस्तर पर लेट गई और याकूद तोते और उसकी बातों के बारे में सोचने लगी। अचानक उसे ख्याल आया कि वो खुद भी तो मर्दों से नफरत करती है। इस तरह वो सौदागर का बेटा भी बेइंतहा खूबसूरत होगा। तभी तो वह औरतों से नफरत करता है। अब शहजादी के दिल में उस सौदागर के बेटे को देखने की ख्वाहिश पैदा हुई। मगर दूसरे लम्हे शहजादी ने इस ख्याल को झटक दिया। यह उसके नजरिए के खिलाफ था। वो उठकर बैठ गई। उसे अपने आप पर गुस्सा आ रहा था कि वह क्यों एक तोते की बातों में आकर अपने ख्यालात बदलने लगी। चुनांचे उसने तमाम ख्यालात झटक कर कनीज को गुस्ल के लिए बुलाया और फिर वो कनीज के साथ हम्माम की तरफ चल पड़ी। उधर शहजादे का दोस्त वजीर का बेटा तारिक घोड़े पर सवार होकर वजीर आजम के महल की तरफ चल पड़ा। वो रास्ते में वजीर की बेटी लैला से मिलने की तरकीब सोचता जा रहा था। मगर उसे कोई तरकीब समझ में नहीं आ रही थी। अचानक उसके ज़हन में एक तरकीब आ गई। उसने घोड़ा मोड़ा और वापस उस महल की तरफ चल पड़ा। जहां आज सुबह सराय से मुंतकिल हुए थे। उस महल का नाम कसर-ए गुलाब था क्योंकि उसके बाग में हर जगह रंगारंग और किस्म किस्म के गुलाब खिले हुए थे। रास्ते में वजीरजादे ने एक दुकान से एक खूबसूरत जनाना जोड़ा खरीदा और फिर वो कसर एक गुलाब में पहुंच गया। शहजादा कहीं गया हुआ था। वजीरजादे ने अंदर जाकर अपने मर्दाना कपड़ों के ऊपर जनाना कपड़े पहने। मूछें और दाढ़ी तो उसने पहले नहीं रखी थी। इसीलिए जनाना कपड़े पहनने के बाद वह एक खूबसूरत औरत मालूम होने लगा। उसने बड़े तरीके से दुपट्टा ओढ़ा और फिर तलवार कमर से लगाकर वो कसर गुलाब से बाहर निकला और फिर घोड़े पर सवार होकर एक सिपाही औरत की तरह वजीर आजम के महल की तरफ चल पड़ा। यह वजीर शहजादी ज़ैनब के बाप का वजीर था। जो वजीर के महल के पास पहुंचा तो दरबान ने उसे रोक लिया। तारिक ने कहा मुझे शहजादी ज़ैनब ने वजीरजादी लैला के पास भेजा है। एक जरूरी पैगम है। तारिक ने औरतों जैसी आवाज बनाते हुए कहा और दरबारियों ने उसे अंदर जाने की इजाजत दे दी। एक कनीज उसे लेकर वज़रजादी लैला की तरफ चल पड़ी। वो महल के अंदर से होता हुआ जल्द ही वज़रजादी तक पहुंच गया। वज़रजादी लैला उस वक्त अपने बाग में कनीजों के साथ मौजूद थी। कनीज़ उसे वहां ले गई। वजीरजादी अजनबी औरत को देखकर खड़ी हो गई और पूछा यह कौन है? कनीस ने बताया इसे शहजादी जैनब ने आपके पास भेजा है। कोई जरूरी पैगाम लेकर आई है। लैला बोली बताओ क्या बात है? तारिक जो इस वक्त औरत की तरह बना हुआ था। उसने कहा एक जरूरी पैगाम है वजीरजादी। और यह पैगाम मैं आपको अकेले में बताऊंगी। वजीरजादी ने कनीजों को इशारा किया और तमाम कनी खामोशी से उठकर दूसरी जानिब चली गई। अब बाग में वजीर की बेटी लैला और तारीख अकेले रह गए थे। तारीख वजीर लैला को देखते ही उसको दिल दे बैठा था। उसे वजीर की बेटी लैला बेहद पसंद आई थी। अब वो सोच रहा था कि काश वो उसे मर्दाना लिबास में मिला होता। उधर वज़र की बेटी लैला को भी यह औरत बहुत अच्छी लगी। फरीरजादी ने ताज्जुब से पूछा क्या बात है तुम्हारा नाम क्या है इससे पहले तो मैंने तुम्हें कभी शहजादी ज़ैनब के पास नहीं देखा क्या तुम नई आई हो हां मैं वाकई नई आई हूं वैसे वजीरजादी आप बेहद खूबसूरत हैं तारिक के मुंह से अनजाने में निकल गया वजीर की बेटी ने मुस्कुराते हुए सवाल किया क्या मैं शहजादी ज़ैनब से ज्यादा खूबसूरत हूं तारिक ने उसकी ओर तारीफ करते हुए कहा शहजा शहजादी ज़ैनब खूबसूरत है। मगर ऐसी खूबसूरती किस काम की जो कोई देख ना सके। मेरी नजर में आप उनसे ज्यादा खूबसूरत हैं। और वजीरजादी भी सोच रही थी यह नौजवान औरत उसे क्यों अच्छी लग रही है? वो सोच रही थी कि काश यह औरत ना होती। मर्द होती तो बहुत खूबसूरत नौजवान होता। क्या पैगाम है? अब बोली वजीर की बेटी को अचानक शहजादी ज़ैनब के पैगाम का ख्याल आ गया। तारिक ने इधर-उधर देखते हुए कहा, क्या हमें कोई नहीं देख रहा? लैला बोली, नहीं, यहां कोई नहीं है और बगैर इजाजत के कोई नहीं आएगा। तारिक अपनी असली आवाज में कहने लगा, शहजादी ज़ैनब का नाम तो मैंने सिर्फ आपसे मिलने के लिए इस्तेमाल किया था। वज़रजादी साहिबा, मैं इस गुस्ताखी की माफी चाहता हूं। मुझे तो आपकी कशिश यहां तक खींच लाई है। अब आपकी मर्जी। चाहे मुझे कत्ल करा दें या छोड़ दें। यह सुनकर वजीरजादी हैरत से उछल पड़ी क्योंकि आवाज मर्दाना थी और फिर तारिक ने बड़ी फुर्ती से अपने औरतों वाले कपड़े उतार दिए। अब वो मर्दाना लिबास में एक खूबसूरत नौजवान के रूप में था। वजीरजादी लैला हैरत से और एक टक उसे देख रही थी। पहली नजर में उसे यह नौजवान बेहद पसंद आया था और वह उसकी अक्लमंदी और बहादुरी पर दिल ही दिल में दांत दे रही थी। लैला बोली, जल्दी से औरतों वाले कपड़े पहन लो। अगर किसी ने देख लिया तो बहुत बुरा हो जाएगा। तारिक ने बड़ी फुर्ती से दोबारा औरतों वाले कपड़े पहन लिए। लैला उसे कमरे में ले आई और कहा, हां। अब बतलाओ कि तुम कौन हो? और तुमने इतनी हिम्मत क्यों की? क्या तुम्हें मालूम नहीं कि मेरे एक इशारे पर तुम्हें कत्ल किया जा सकता है? वह गुस्सा दिखा रही थी। मगर तारिक समझ गया था कि वजीरजादी भी उसे पसंद करने लगी है। वरना जाहिर है वो उसे खासतौर पर अपने कमरे में क्यों ले आती वहीं सजा दे देती। तारिक बोला वजीरजादी साहिबा इश्क में हिम्मत के बगैर काम नहीं चलता इसलिए मैंने हिम्मत कर ली। यानी तुम्हें देख लिया। अब आपकी मर्जी आप मुझे कत्ल करा दें या चाहे मेरा हाथ थाम लें। यह सुनकर लैला बोली हम तुम्हारे बारे में कुछ नहीं जानते कि तुम कौन हो और कहां के रहने वाले हो। किस खानदान से ताल्लुक रखते हो। तारिक बोला अच्छा तो सुनो। मेरा नाम तारिक है। मैं मुल्क यमन के वजीर आजम का इकलौता लड़का हूं। मैं और मेरा दोस्त शहजादा रयान यहां पर घूमने के लिए आए हुए हैं। इसके बाद काफी देर तक वह बातें करने लगे। जब बातें खत्म हुई तो तारिक कहने लगा अच्छा अब मुझे इजाजत दें और यह बतलाएं कि आइंदा मिलने की क्या सूरत होगी। मैं तो आपके बगैर दिन रात तड़पता रहूंगा। लैला बोली आप इसी लिबास में रोज आया करें। तारिक बोला मैं तो रोज आया करूंगा मगर एक बार तुम भी तो गरीब खाने पर आओ। लैला बोली मैं भला कैसे आ सकती हूं? तारिक बोला हमारा महल शहजादी ज़ैनब के महल के करीब है। उसका नाम कसर-ए-गुलाब है। आप जब शहजादी ज़ैनब के पास जाने लगे तो हमारी तरफ भी चंद लम्हों के लिए आ जाया करें। बहाना कर दिया करें कि एक सहेली से मिलना है। तारीख की बातें सुनकर लैला मुस्कुरा दी और बोली अच्छा ठीक है। मैं कल सुबह शहजादी ज़ैनब के पास जाऊंगी तो रास्ते में आपके पास भी होती जाऊंगी। बस अब तो आप खुश हैं। तारिक ने कहा शुक्रिया वज़रजादी। मैं जिंदगी भर आपका एहसानमंद रहूंगा। वजीरजादी ने उठकर उसका हाथ पकड़ते हुए कहा, "आप मुझे वजीरजादी ना कहा करें। सिर्फ लैला कहा करें।" फिर वजीरजादी उसे अपने साथ लेकर महल के बाहर तक छोड़ आई और तारिक घोड़े पर सवार होकर वापस कसरे गुलाब की तरफ चल पड़ा। शहजादा शहर की सैर करके वापस कसरे गुलाब पहुंच चुका था। वो शहजादी ज़ैनब की तस्वीर हाथ में लेकर महल के बाग में बैठा था और तस्वीर के साथ बातें कर रहा था। उसकी बातों से ऐसा महसूस हो रहा था जैसे वह असल शहजादी से बातें कर रहा हो। इससे पता चलता था कि वह शहजादी के इश्क में कितना डूब चुका है। याकूद तोता इसी बीच वापस आकर उसके करीब बैठ गया। मगर शहजादे को पता भी ना चला और वह इसी तरह तस्वीर से बातों में मशगूल रहा। याकू तोता शहजादे को इस हाल में देखकर हंस दिया और उसकी हंसी की आवाज सुनकर शहजादा चौंक गया। उसने जब तोते को करीब बैठे देखा तो मुस्कुराकर पूछने लगा तोते मियां कब आए? हमें तो तुम्हारे आने का पता ही नहीं चला। तोता बोला आप शहजादी ज़ैनब की तस्वीर से बातें करने में इतने मशरूफ थे कि आपको इल्म ही नहीं हुआ। शहजादा बोला तोते मियां अब तो यही एक तस्वीर हमारे पास है जिससे हम दिल बहला सकते हैं। असल शहजादी तो शायद हमें कभी सूरत भी ना दिखाए। शहजादा तोते से बोला तुम शहजादी से मिलने गए थे क्या उसे तुमने देखा? तोता बोला हां शहजादी को ना सिर्फ देखा बल्कि उससे बातें भी की। आप फिक्र ना करें शहजादे वो दिन भी जल्द आएगा जब शहजादी ज़ैनब से मिलेंगे और उनसे बातें भी करेंगे। याकूब तोते ने उसकी हिम्मत बंधाते हुए कहा। शहजादा खुशी से उछल पड़ा और तोते से बोला अच्छा यह बतलाओ शहजादी तुम्हें पसंद आई क्या? तोता बोला शहजादे आपका इंतखाब लाजवाब है। इतने में तारिक औरतों वाले कपड़े पहनकर महल में दाखिल हो गया। शहजादे ने उसे देखा तो बोला तारिक तुम और इस लिबास में मैं यह क्या देख रहा हूं। तारिक ने बताया कि मैंने अपने मंसूबे के मुताबिक काम किया है और फिर लैला से मिलने का सारा माजरा शहजादे को बता दिया। शहजादा यह सुनकर खुश हो गया। उधर शहजादी ज़ैनब सैर करने बाग में आ गई। आज उसने खासतौर पर अपनी कनीज को हुक्म दिया था कि वह बाग के नजदीक ना आए और वह अकेले ही सैर करेगी। उसको याकूद तोते का इंतजार था। उसे तोते की बातें बेहद पसंद आई थी। और एक बात तो उसके ज़हन में जम गई थी कि तोते का मालिक सौदागर का बेटा उससे कहीं ज्यादा खूबसूरत है और औरतों से सख्त नफरत करता है। शहजादी ज़ैनब के लिए यह एक नई बात थी। तोते ने यह बात करके एक नया मसला पैदा कर दिया था। यह उसके हुस्न की तौहीन थी और अपने हुस्न की तौहीन वो कैसे बर्दाश्त कर सकती थी? ऐसा करना उसके लिए नामुमकिन था। फिर उसके दिल में जज्बा भी पैदा हुआ कि वो सौदागर के बेटे को खुद देखे कि क्या वह वाकई इतना हसीन है? मगर मसला यह था कि वह उसे देखे कैसे? मर्दों को ना देखने का कानून उसने खुद बनाया था। वह इस कानून को कैसे तोड़े और कानून तोड़े भी तो यह क्या जरूरी है कि याकूद तोते ने जो कुछ कहा वह सच है और फिर वह सौदागर का बेटा औरतों से नफरत करता है वो क्यों अपने आप को देखने देगा जबकि वह खुद मर्द से सख्त नफरत करती है और यह नहीं चाहती कि किसी मर्द की उस पर नजर पड़े। अभी वह सैर करने के साथ-साथ इसी उधेड़बुन में मशरूफ थी कि याकूद तोते की आवाज उसके कानों में पड़ी। मैं याकूबद तोता शहजादी की खिदमत में सुबह का सलाम करता हूं। शहजादी आवाज सुनकर चौंक पड़ी। उसके चेहरे पर खुशी के आसार फैल गए। अरे तोते मियां तुम आ गए। पता है तोते मियां मैं तुम्हारा इंतजार कर रही थी। तुम और तुम्हारी आवाज मुझे बहुत पसंद आई। काश तुम मेरे पास ही रहते। शहजादी ने मुस्कुराते हुए याकूब तोते से यह सब कहा। याकूब तोते ने जवाब दिया। मुझे भी बड़ी खुशी हुई शहजादी। मगर मुझे खरीदने वाला शख्स औरतों से नफरत करता है। काश वो औरतों से नफरत ना करता तो अच्छा था। शहजादी ने तोते से सवाल किया। क्या वाकई वो सौदागर का बेटा बहुत खूबसूरत है? क्या वो मुझसे भी ज्यादा खूबसूरत है? याकूबद तोते ने कहा शहजादी साहिबा मैं क्या ही कहूं वह बहुत खूबसूरत है। अगर आपको मेरी बातों का यकीन नहीं हो रहा है तो आप खुद देख सकती हैं। आप कहो तो मैं उसे आपको दिखाने के लिए मना सकता हूं। शहजादी ज़ैनब कहने लगी नहीं ऐसा नहीं हो सकता कि मैं तुम्हारे सौदागर के बेटे को देख सकूं। फिर काफी देर सोचने के बाद शहजादी ज़ैनब बोल पड़ी। मैं देखना चाहती हूं कि जिसकी तुम इतनी तारीफ करते हो क्या वह वाकई इतना हसीन है या खुद तोता बोलने लगा शहजादी दिल तो मेरा भी चाहता है कि आप उन्हें देखें तब आपको मेरी बात पर यकीन आएगा मगर क्या करूं वो औरतों से सख्त नफरत करते हैं वो नहीं चाहते कि कोई औरत उन्हें देखे तो शहजादी बोली मैं इस मुल्क की शहजादी हूं मैं चाहूं तो उन्हें गिरफ्तार करा कर अपने महल में ले जा सकती हूं शहजादी को शायद गुस्सा आ गया था। याकूबद तोते ने कहा, "यह तो ठीक है शहजादी, मगर इस तरह उनकी नफरत और ज्यादा हो जाएगी और वैसे भी यह अखलाकन के खिलाफ है। शहजादी बोली, हां, इसीलिए तो मैं खामोश हो जाती हूं। ऐसा नहीं हो सकता कि तुम उसे किसी तरह राजी कर लो कि वह हमारे महल के सामने से गुजरे और हम उसे देख लें।" तोते ने जवाब दिया, "मैं कोशिश शुरू करता हूं शहजादी। उम्मीद है एक दिन वह जरूर मान जाएंगे। और फिर याकूद तोते ने शहजादी को मुल्क यमन की बातें सुनाना शुरू कर दी। बातें करके तोता उड़ गया और शहजादी बाग में चलती हुई जब महल में पहुंची तो उसे खबर मिली कि वजीर की बेटी लैला उससे मिलने के लिए आई हुई है। वजीर की बेटी लैला का नाम सुनकर सब कुछ भूलकर शहजादी उस तरफ चल पड़ी। वजीर की बेटी लैला ने उठकर उसका इस्तकबाल किया और शहजादी के आगे बढ़कर उसके गले लग गई। वो लैला से मिलकर बेहद खुश होती थी क्योंकि वो उसकी बचपन की सहेली थी। दोनों सहेलियां मिली तो आपस में बातें भी शुरू हो गई। बातों ही बातों में लैला ने शहजादी से कहा हां आपको एक खुशखबरी सुना दूं। लैला ने मुस्कुराते हुए कहा, शहजादा रयान आजकल इस मुल्क में आया हुआ है। शहजादी ने बेहद गुस्से भरे लहजे में कहा, लैला तुम्हें मालूम है कि हमारे सामने मर्द का नाम लेना जुर्म है। फिर तुम ऐसी बातें क्यों करती हो? लैला बोली, माफी चाहती हूं शहजादी साहिबा। वजीर की बेटी ने बड़े रूठे हुए लहजे में कहा, "मुझे मालूम नहीं था कि आप सिर्फ शहजादी हैं। मेरी सहेली नहीं। अच्छा मुझे इजाजत दें और उठ खड़ी हुई। उसकी आंखों में आंसू तैर रहे थे। यह देखकर शहजादी बोली अरे तुम नाराज हो गई। हम तो वैसे ही बातें कर रहे थे। बैठो तो वजीर की बेटी ने कहा नहीं शहजादी आपने अच्छा किया। मुझे मेरी औकात बतला दी। आप शहजादी और मैं सिर्फ वजीर की बेटी। आपकी और मेरी दोस्ती कैसे हो सकती है? वजीर की बेटी अभी तक नाराज थी। अरे तुम तो वाकई संजीदा हो गई हो। अच्छा हमें माफ कर दो। हां हमें बताओ वो शहजादा रियान कौन है? अच्छा मान भी जाओ। शहजादी ने हंसते हुए वजीर की बेटी लैला को गले लगा लिया और वजीर की बेटी लैला अपनी जीत पर मुस्कुरा दी। छोड़ो शहजादा रयान को कोई और बात करें। आपका मूड फिर खराब हो जाएगा। लैला ने उसके आतिश शौक को हवा दी। नहीं लैला हमें बतलाओ कि तुम क्या कहना चाहती थी? कौन है शहजादा रेयान? शहजादी भी शायद जिद में आ गई थी। लैला बोली आपको मैंने पहले भी बतलाया था कि मुल्क यमन का शहजादा रेयान खूबसूरत तरीन मर्द है। उससे शादी के लिए बड़ी हसीन से हसीन शहजादियों के पैगाम आ गए। मगर उसे कोई पसंद नहीं आई। वह बहुत घमंडी हो गया है। आजकल वह छुपे तौर पर सैर करने यहां आया हुआ है। मुझे तो यकीन है अगर वह एक नजर आप पर डाल दे तो उसका तमाम घमंड निकल जाएगा। वजीर की बेटी ने यह बात शहजादी ज़ैनब से कही तो शहजादी ज़ैनब बोली लेकिन वज़र की बेटी यह क्या जरूरी है कि जिसे लोग खूबसूरत कहें वो हमारी भी नजर में खूबसूरत हो। हो सकता है कि वह हमें पसंद ना आए। शहजादी ने लैला की बातों का जवाब दिया। लैला बोली, मैं कब कह रही हूं कि आप उसे पसंद करें। मैं तो सिर्फ यह चाहती हूं कि उसका गुरूर टूट जाए ताकि वह यह दावा ना कर सके कि सिर्फ मुल्क यमन का शहजादा ही हसीन है। उसे यह भी पता चल जाए कि दमिश्क की शहजादी उससे कहीं ज्यादा हसीन है। शहजादी ने संजीदगी से जवाब दिया, तो तुम्हारा मतलब यह है कि ना सिर्फ हम उसे देखें बल्कि वह भी हमें देखे। यह कैसे हो सकता है? यह नामुमकिन है। लैला बोली, तो मैं कब कह रही हूं कि आप वाकई ऐसा करें? मैंने तो यह ख्याल पेश किया था। लैला अपनी शहजादी की कमजोरी को जानती थी। एक बार उसके दिल में शौक उभर आया तो फिर वह बगैर देखे ना रह सकेगी। और आज वह महल में आने से पहले अपने महबूब वजीर जादे तारिक से मिलने कसरे गुलाब में गई थी। वहां शहजादे से भी मुलाकात हुई। वो शहजादे को देखकर बेहद मुतासिर हुई थी। शहजादे ने उसे बहन बना लिया था और वजीर की बेटी को बेहद खुशी हुई थी क्योंकि उसका कोई भाई नहीं था। इसीलिए एक भाई पाकर उसे बेहद खुशी हुई थी। शहजादा रयान भी वजीर की बेटी को बहन बनाकर बहुत खुश था क्योंकि वह भी मां-बाप का इकलौता बेटा था। उसे बहन की बड़ी हसरत थी। अब वजीर की बेटी लैला अपने भाई के लिए शहजादी का रिश्ता लेना चाहती थी। इसमें उसकी अपनी शर्त भी शामिल थी क्योंकि वह भी वजीरजादे तारिक से मोहब्बत करने लगी थी। लैला अपनी सहेली ज़ैनब शहजादी से बातें करती रही। काफी देर बाद उसने वापस जाने की इजाजत मांगी और वापस आ गई। शहजादा आज बेचैन था। उसका दिल चाह रहा था कि आज वह शहजादी से जरूर मुलाकात करें। वैसे तो उसे भी यह मालूम था कि शहजादी से मुलाकात जुर्म है। मगर आज वह सोच रहा था कि चाहे कुछ भी हो जाए वो शहजादी से जरूर मिलेगा। हो सकता है शहजादी उसे देखकर उससे मिलकर उसे कत्ल करने के बजाय उससे शादी पर राजी हो जाए। जैसे-जैसे दिन बीतता गया, शहजादा रयान पर शहजादी ज़ैनब से मिलने का भूत सवार होता गया। चुनांचे उसने किसी को बताए बगैर चुपके से घोड़ा खोला और फिर कसरे गुलाब से निकलकर तेजी से कसरे गुल की तरफ घोड़ा दौड़ा दिया। मन से तलवार निकाली और फिर उसे लहराता हुआ कसरे गुल के फाटक की तरफ घोड़ा बढ़ाने लगा। पहरेदारों ने जब यह हाल देखा तो उन्होंने भी तलवारें निकाल ली और फिर पहरेदारों और शहजादे के दरमियान खौफनाक जंग छिड़ गई। शहजादा अकेला था। मगर वह लड़ाई के फन में माहिर था और बेहद बहादुर था। इसीलिए उसने कई पहरेदारों को जख्मी कर दिया और कसरे गुल के फाटक तक पहुंच गया। करीब था कि शहजादा फाटक के अंदर जबरदस्ती दाखिल हो जाता। मगर पहरेदार ने उसे कमान फेंक कर काबू में कर लिया और फिर वहां पहरेदारों के दस्ते के दस्ते पहुंच गए। इन सब ने शहजादे को बेबस करके बांध दिया। पहरेदार की सरदारनी राबिया ने उसे तहखाने में बंद करने का हुक्म दिया और खुद शहजादी को खबर देने अंदर चली गई कि यह लड़ाई की खबर शहजादी तक भी पहुंच गई थी। राबिया ने जाकर शहजादी को तफसील बताई और जब शहजादी को मालूम हुआ कि अजनबी ने उसके कई पहरेदारों को जख्मी कर दिया है तो गुस्से से उसका रंग पीला पड़ गया। शहजादी ने फैसला सुना दिया। उसे कल सुबह तक कत्ल कर दिया जाए और इस गुस्ताख का सर हमारी खिदमत में पेश किया जाए। शाम तक वजीर का बेटा तारिक शहजादा रयान का इंतजार करता रहा। मगर शहजादा रहयान गायब था। वज़र का बेटा तारिक उसे तमाम शहर में ढूंढता रहा। मगर वह कहीं भी नजर ना आया। अब तो वज़रजादे की परेशानी अपनी इंतहा पर पहुंच गई। आखिर यह सोचकर वह इस नतीजे पर पहुंचा कि शहजादा दिल के हाथों मजबूर होकर जरूर शहजादी को देखने कसरे गुल गया होगा और वहीं गिरफ्तार कर लिया गया होगा। उसकी नजरों में गोया यह हरकत कतई बेवकूफ ही थी। मगर वह समझता था कि शहजादा दिल के हाथों मजबूर है। शहजादी ज़ैनब के अब्बा बादशाह सलामत ने दो दफा पहले शहजादे को माफ कर दिया था। क्योंकि शहजादा पहले भी यह हरकत कर चुका था और शहजादी के लिए कसरे गुल के दरवाजे पर पहुंच गया था और पकड़ा गया था। वजीर के बेटे ने परेशान लहजे में जवाब दिया शहजादे का पूरा पता करके आओ। शहजादे की जिंदगी को सख्त खतरा है। अरे वाकई शहजादे ने ऐसा करके जुल्म किया है। याकूबदूत तोता यह बात सुनकर परेशान हो गया। हां तोते मियां अब देर ना करो जल्दी पता करके आओ। वजीर के बेटे ने कहा अगर शहजादा जिंदा है तो उसको छुड़ाने की कोई तरकीब की जाए। अभी जाता हूं। आप मेरा यहां इंतजार करें। याकूद तोते ने कहा और फिर से कसर-ए-गुलाब से निकल कर कसर-ए-गुल की तरफ उड़ता चला गया। चंद ही लम्हों बाद याकूद तोता कसर-ए-गुल के ऊपर पहुंच गया। इस बार वह सीधा महल के दरवाजे पर गया क्योंकि वहां पर मौजूद पहरेदार औरतों से ही उसे तमाम हालात मालूम हो सकते थे। फाटक के अंदर पहुंचकर वो एक सुराख ढूंढने में कामयाब हो गया। सुराख के अंदर दाखिल होकर वो छुप कर बैठ गया। काफी देर तक वह इसी इंतजार में रहा कि शायद पहरेदार आपस में इस सिलसिले में कोई बातचीत करें और उसे हालात का इल्म हो जाए। मगर जब पहरेदारों ने कोई बात ना की तो वह समझ गया कि पहरेदार औरतों को आपस में बात करने का हुक्म नहीं होगा। वरना यह तो नामुमकिन था कि जहां दो चार औरतें जमा हो जाए वहां खामोशी रहे। शायद शोर से बचने के लिए शहजादी ने उनको आपस में बिना जरूरत बात ना करने का हुक्म दिया होगा। चुनांचे उसने पहरेदारों से हालात मालूम करने के लिए एक और तरकीब सोची। वो जानता था यह औरतें जिनो भूतों से बहुत खौफ खाती हैं। चुनांचे अगर वह सुराख में से बोले तो यकीनन औरतें घबरा जाएंगी और उसे जिन्न समझते हुए सब कुछ सच बतला देंगी। तोता भारी आवाज निकाल कर बोलने लगा तुमने आज एक बेगुनाह को कैद किया है। मैं तुम सबको खा जाऊंगा। मैं जिन्हों का बादशाह हूं। मैं खा जाऊंगा। पहरे पर मौजूद औरतें उसकी आवाज सुनकर बौखला गई। उनके चेहरे पीले पड़ गए और जिस्म खौफ से कांपने लगे। उनमें से एक ने हिम्मत करके जवाब दिया, हमारा कोई कसूर नहीं है। हमने उसे कैद नहीं किया। उसे तो पहरेदारों ने शहजादी के हुक्म से कैद किया है और सुबह उसके कत्ल का हुक्म दिया है। तोते ने पहले से भी ज्यादा खौफनाक लहजे में कहा, हम तुम्हें खा जाएंगे। तुम उसे फौरन रिहा कर दो। वो हमारा दोस्त है। एक औरत ने जवाब दिया, जी जनाब। वो यहीं फाटक के नीचे वाले तहखाने में कैद है और उसकी चाबियां महल की सरदारनी के पास हैं। हम उसे कैद से रिहा नहीं कर सकते। तोता अब खामोश हो गया क्योंकि जो कुछ उसने मालूम करना था उसे मालूम हो गया था। काफी देर तक तोता खामोश बैठा। नीचे पहरेदारों का शोर सुनता रहा। जो एक दूसरे को जिन्न के बारे में बतला रही थी। अब फाटक में खासा अंधेरा हो चुका था। इसलिए वह खामोशी से सुरंग से बाहर निकला और फिर फाटक से बाहर निकल कर तेजी से चला गया। वो जल्द से जल्द वजीर के पास पहुंचना चाहता था। जल्द ही वह कसर-ए-गुला पहुंच गया। वजीर का बेटा अभी तक बाग में टहल रहा था। उसके चेहरे से बेहद परेशानी टपक रही थी। जैसे ही उसने तोते की फड़फड़ाहट की आवाज सुनी, वो चौंक कर उसे उम्मीद भरी नजरों से देखने लगा। तोता करीबी दरख्त पर बैठ गया। शहजादा अब भी जिंदा है। वजीर के बेटे को बताया और फाटक के नीचे वाले तहखाने में कैद है। उसे सुबह कत्ल कर दिया जाएगा। कैद खाने की चाबियां राबिया के पास हैं। तोते ने तमाम तफसील सुना दी। वजीर का बेटा शहजादे के जिंदा होने को सुनकर बेहद खुश हुआ। मगर अब वह यह सोच रहा था कि शहजादे को किस तरह रिहा कराया जाए। सबसे पहले राबिया से चाबियां हासिल करने का मसला था। उसके ख्याल में महल सरदारनी वही होगी जिसने पहले पहले शहजादे और उसको कसरे गुल के करीब से वापस भेजा था। तोते ने वजीर के बेटे को जब सोच में गुम देखा तो बोल पड़ा। क्या सोच रहे हो वजीर के बेटे? मैं सोच रहा हूं कि अब शहजादे की रिहाई की क्या तरकीब होनी चाहिए? वजीर के बेटे ने जवाब दिया तरकीब। तुम घोड़े पर बैठो और कसरे गुल की तरफ चल दो। राबिया जाहिर है तुम्हारा रास्ता रोकेगी। तुम यह जहरीला पानी उसके ऊपर फेंक कर उसे बेहोश करके चाबियां उससे छीन लेना। उसके बाद तुम बेशक वापस आ जाना। मैं चाबी अपने पंजों में दबाकर तहखाने का ताला खोल दूंगा और इस तरह शहजादा आजाद हो जाएगा। क्या तोते ने सलाह पेश की तो वजीर का बेटा तारिक बोला नहीं तोते मियां यहां इस तरह बात नहीं बनेगी। महल में इस तरह घुसते ही तमाम काम खराब हो जाएंगे। मेरे मन में एक तरकीब है। तुम ऐसा करो कि राबिया को किसी तरह एक तरफ अंधेरे में ले आओ। उसका कद मेरे जैसा है। मैं उसे बेहोश करके उससे चाबियां भी ले लूंगा और फिर उसका लिबास बदलकर फौरन फाटक पर चला जाऊंगा। और इस तरह शहजादी का नाम लेकर मैं शहजादे को छुड़ा लूंगा। वजीर के बेटे ने याकूद तोते से कहा और याकूद तोता वजीर के बेटे की अकलमंदी का कायल हो गया। चुनांचे जब वजीर का बेटा घोड़े पर सवार होकर कसर गुल की तरफ चला तो याकूद तोता उसके ऊपर उड़ रहा था। कसर-ए-गुल के करीब पहुंचकर वजीर का बेटा एक अंधेरे कोने में खड़ा हो गया और तोते से कहा अब तुम जाओ और किस तरकीब से महल सरदारनी को यहां तक ले आओ। ख्याल रखना उसे शक ना पड़ जाए। अब यह तुम्हारी होशियारी और अक्लमंदी का इम्तिहान है। तोते ने कहा फिक्र ना करें। याकूद तोता अपना फर्ज पहचानता है। शहजादे के लिए तो मैं अपनी जान भी कुर्बान कर सकता हूं। यह तो मामूली बात है। याकूब तोते ने जवाब दिया और फिर से उड़ने लगा। वो कसर एक गुल के चारों ओर चक्कर काट रहा था। उसके उड़ने की रफ्तार बहुत धीमी थी। इसलिए उसके परों की आवाज भी नहीं हो रही थी। वो महल सरदारनी को तलाश करना चाहता था। आखिर उसे एक जगह एक औरत दूसरी औरत को महल सरदारनी के नाम से पुकारती सुनाई दी और उसने उस औरत को अच्छी तरह पहचान लिया जिसे सरदारनी के नाम से पुकारा गया था। तोते ने देखा कि इधर-उधर पहरेदार काफी फासले पर थी और फिर यह जगह वजीर वाली जगह से भी नजदीक थी। चुनांचे उसने अपनी तरकीब पर अमल शुरू कर दिया। दूसरे लम्हे एक हल्की सी फड़फड़ाहट से वह महल सरदारनी के आगे जा गिरा। उसके गिरने से महल सरदारनी का घोड़ा जरा सा बिगा। लेकिन महल सरदारनी ने घोड़े को काबू में कर लिया और फिर घोड़े से नीचे उतर कर तोते को उठाना चाहा। मगर तोते ने इसी वक्त हल्की सी छलांग लगाई और फिर एक टांग पर लंगड़ाता हुआ तेजी से आगे बढ़ने लगा। महल सरदारनी को यह सुनहरी परों वाला तोता बेहद पसंद आया था और उसे मालूम हो गया था कि किसी वजह से वह उड़ नहीं सकता और एक टांग से जख्मी भी है इसीलिए जल्द काबू में आ जाएगा। चुनांचे महल सरदारनी ने घोड़े की लगाम पकड़ी और उसे खींचते हुए तोते की तरफ भागने लगी। याकूब तोता काफी दूर जाकर गिर पड़ा और बेहिसो हरकत पड़ा रहा। जब महल सरदारनी उसके करीब पहुंची तो तोता एक बार फिर उठकर आगे बढ़ गया। महल सरदारनी सब कुछ भूलभाल कर उसके पीछे घोड़ा खींचती हुई आगे बढ़ गई। अब तोता वजीर के बेटे के करीब पहुंच चुका था। वजीर का बेटा घोड़े से उतर कर एक तरफ छुपा खड़ा था। जैसे ही महल सरदारनी उसके करीब पहुंची तो वजीर के बेटे ने एक झपट्टा मारा और दूसरे लम्हे वह महल सरदारनी को काबू में कर चुका था। उसने महल सरदारनी के मुंह पर बड़ी मजबूती से हाथ जमा दिया था ताकि उसकी आवाज ना निकले। फजीर का बेटा उसे बेहोश करने में कामयाब हो चुका था। उसने तेजी से उसकी पेटी के साथ बंधी हुई चाबियां और फिर उसकी वर्दी उतारना शुरू की। महल सरदारनी की एक खास वर्दी थी जो उसने सादे कपड़ों के ऊपर पहनी हुई थी। यानी नीचे उसके कपड़े थे और ऊपर वर्दी थी। उसने वर्दी पहनी और महल सरदारनी के घोड़े पर बैठ गया जिसे तोता काबू किए हुए था और आगे फाटक की तरफ बढ़ गया। उसका अपना घोड़ा वहीं बंधा खड़ा था। तेजी से वह घोड़ा दौड़ाता हुआ फाटक पर पहुंच गया। अपनी सरदारनी को अचानक वहां पाकर वहां खड़ी खातून पहरेदार चौकन्ना हो गई और एक पहरेदार ने जिन्न वाला वाकया सुना दिया और वजीर का बेटा समझ गया कि यह याकूद तोते का कारनामा है। वजीर का बेटा जो महल सरदारनी बना हुआ था। उसने लड़की की आवाज में कहा कोई बात नहीं। अब हमें जिन्न कुछ नहीं कहेगा। जिन्हने शायद शहजादी को कहा है और शहजादी ने मुझे इस अजनबी को रिहा करने का हुक्म दिया है। यह चाबियां पकड़ो और अजनबी को कैदखाने से निकाल कर लाओ। पहरेदार ने सरदारनी के हुक्म की तामील करते हुए उससे चाबियां ली और फिर कुछ देर बाद वो शहजादे को साथ लेकर वापस आ गई। वजीर के बेटे ने चाबी लेते हुए कहा, "ऐ अजनबी, मेरे साथ घोड़े पर बैठ जाओ। और शहजादा वजीर के बेटे के साथ घोड़े पर बैठ गया। और वजीर का बेटा उसी जगह आ पहुंचा जहां उसका अपना घोड़ा मौजूद था। और असली वाली महल सरदारनी अभी भी बेहोश पड़ी थी। वजीर का बेटा असल आवाज में बोला ओह शहजादे साहब। और शहजादा हैरत से उछल पड़ा। तो यह तुम हो तारिक। शहजादे ने हैरत से पूछा। हां शहजादे साहब। वजीर के बेटे ने कहा और फिर दोनों घोड़े से उतर आए। रिहाई मुबारक हो जनाब। इतने में याकूबद तोते की आवाज सुनाई दी जो वहां बैठा पहरा दे रहा था कि कहीं उसे कोई देख ना ले। अरे तोते मियां तुम भी यहीं मौजूद हो। शहजादे को और ज्यादा हैरत हुई। जी हां जनाब। यह याकूब तोते का कारनामा है कि आपको रिहाई मिल गई। वजीर के बेटे ने शहजादे को मुख्तसर अल्फाज में तमाम बातें बतलाते हुए कहा और शहजादा तोते का शुक्रिया अदा करने लगा। इतने में वजीर के बेटे ने वर्दी उतार कर बेहोश सरदारनी को पहना दी और फिर उसका घोड़ा वहीं बांधकर शहजादे को अपने पीछे बिठा लिया और कसर ए गुलाब की तरफ चल दिया। सुबह को शहजादी ज़ैनब रोज की तरह चहल कदमी को बाग की तरफ जाने लगी तो उसे महल सरदारनी के आने की खबर मिली और शहजादी को याद आ गया कि कल उसने अजनबी को कत्ल करने का हुक्म दिया था। शायद महल सरदारनी उसको कत्ल करने के बाद उसका सर लेकर आई होगी। शहजादी सोचने लगी कि ना जाने वह अजनबी कौन था और किस लिए उसने इतनी जुर्रत की। कल गुस्से में वह फैसला तो कर गई थी मगर आज उसे अफसोस हो रहा था। जब से याकूबद तोते ने उसे शहजादे के बारे में बताया था। लिहाजा जब महल सरदारनी हाजिर हुई तो शहजादी यह देखकर हैरान रह गई कि वह ना सिर्फ खाली हाथ थी बल्कि उसका चेहरा पीला हो रहा था और जिस्म कांप रहा था। उसके साथ ही दो पहरेदार औरतें भी थी। क्या बात है महल सरदारनी? तुम किस बात से खौफदा हो और उस अजनबी का क्या हुआ जिसके कत्ल का हुक्म मैंने दिया था? शहजादी ज़ैनब ने ताज्जुब से सवाल किया। महल सरदारनी यानी राबिया बोली अगर आप जान की माफी दें तो अर्ज करूं। शहजादी ने कहा बोलो क्या है? महल सरदारनी बोली वो आदमी कैद खाने से गायब है कि तुम क्या कह रही हो कि वो गायब है? शहजादी को एकदम गुस्सा आ गया। शहजादी साहिबा इसमें हमारा कोई कसूर नहीं है। और फिर महल सरदारनी ने वो जिन्न वाला वाकया और फिर अपने बेहोश होने के तमाम वाक्यात तफसील से सुना दिए। इसका मतलब है कोई गहरी साजिश हुई है। वरना यह जिन्न वाला वाकया फजल है। शहजादी ने महल सरदारनी को जाने का हुक्म दिया और शहजादी दोबारा बाग की तरफ बढ़ी। मगर वह सोच रही थी कि यह सब किस्सा क्या है और वो अजनबी कौन था जो इस तरह उसके कैद खाने से फरार हो गया। वो इसी सोच में गुम थी कि अचानक याकूबद तोते की आवाज सुनाई दी। शहजादी साहिबा की खिदमत में आदाब हो और शहजादी ने चौंक कर उसे देखा। वो रोशन दान में बैठा था। शहजादी मुंह बनाकर कहने लगी हम तुमसे नहीं बोलते। एक तो आज सुबह नहीं आए। दूसरा तुमने हमारे साथ दो झूठ बोले कि शहजादा रयान को सौदागर बताया और साथ ही यह भी झूठ बोला कि वह औरतों से नफरत करता है। शहजादी ने बाकायदा रूठते हुए कहा और याकूद तोता हंस दिया। शहजादी साहिबा वाकई मैं अपनी इस गुस्ताखी की माफी चाहता हूं। मैंने आपको बतलाया था कि शहजादा औरतों से नफरत करता है। इस तरह मैंने आपके दिल में इश्क और रश्क का जज्बा पैदा किया और मैं अपनी तरकीब में कामयाब रहा। मैं माफी चाहता हूं शहजादी। तो शहजादी बोली नहीं याकूब तोते मैं तुम्हारी बेहद शुक्रगुजार हूं। तुमने मेरा नजरिया ही बदल दिया। शहजादी साहिबा एक खुशखबरी सुनाने हाजिर हुआ था। इसलिए सुबह हाजिर ना हो सका। वो यह है कि मैंने शहजादे साहब को कह दिया है कि आप उन्हें पसंद करती हैं और शादी के लिए तैयार हैं। शहजादे साहब मेरे यकीन दिलाने पर उसी वक्त आपके वालिद से मिलने चले गए। और आपके वालिद को जब मालूम हुआ कि आप शादी पर राजी हैं तो उन्होंने उसी वक्त मंजूरी दे दी। और आज रात को आपकी शहजादा रेयान से और वजीर की बेटी लैला की वजीर के बेटे तारिक से शादी होगी। सारे मुल्क में ऐलान कर दिया गया है। शहजादी ने हैरान होकर कहा क्या मतलब? हमसे पूछे बगैर तुमने कैसे कह दिया कि हम शहजादे से शादी करने पर राजी हैं। और अब्बा हुजूर ने कैसे यकीन कर लिया? तोता बोला शहजादी साहिबा वैसे तो मैं एक तोता हूं और इंसानों जैसी अकल नहीं रखता। मगर जिस वक्त आपने हमारे शहजादे को देखा, मैं उसी वक्त आपके चेहरे को देखकर समझ गया था कि हमारा शहजादा आपको पसंद आ गया है। बाकी गुस्ताखी मैंने खुद ही कर डाली। शहजादी अपनी हंसी रोकने के बावजूद अनजाने में हंस पड़ी। शहजादी ने शर्माते हुए कहा, तुम्हारी गुस्ताखी की सजा तुम्हें जरूर मिलेगी। तोते ने जवाब दिया आपकी दी हुई हर सजा मंजूर है। तुम्हारी सजा यह है कि हम शादी के बाद शहजादे से तुम्हें मांग लेंगे और फिर सज्जा के तौर पर तुम्हें अपने हाथों से लाल मिर्चें खिलाया करेंगे। शहजादी ने शर्माते हुए कहा और याकूबद तोता हंस पड़ा। मुझे मंजूर है शहजादी साहिबा कल आप मेरे लिए खाना तैयार रखें। अब मुझे इजाजत दें। मैं अब बारात के साथ आऊंगा। तोते ने हंसते हुए कहा और फिर से उड़ गया और शहजादी मुस्कुराती हुई बिस्तर पर लेट गई। वो बेहद खुश थी और उसी रात को शहजादी ज़ैनब और शहजादा रयान की शादी हो गई और वज़र की बेटी लैला और वज़र के बेटे तारिक की भी खूब धूमधाम से शादी हो गई। शहजादा शहजादी को लेकर अपने महल आ गया और वहां पर धूमधाम से उनका इस्तकबाल हुआ। अब शहजादी ज़ैनब और शहजादा रेयान बहुत खुश थे और शहजादी का नजरिया भी बदल गया था। मर्दों के लिए उसकी जो सोच थी वह भी बदल गई थी। शहजादा रेयान वाकई में उसके लिए एक नेक दिल अच्छा और सच्चा हमदर्द हमसफर साबित हुआ और वह सब हंसीखुशी जिंदगी बसर करने लगे। फिर इसी तरह वक़ गुजरता गया। एक साल के बाद शहजादी ज़ैनब की गोद में एक नन्हा सा बेटा पैदा हुआ। जिसे देखकर शहजादी ज़ैनब और शहजादा रयान अल्लाह का शुक्र अदा करने लगे। और मुल्क के लोगों पर पहले से ज्यादा रहम और हमदर्दी से पेश आने लगे। और याकूद तोते ने क्योंकि उनकी शादियां होने में मदद की थी। इसलिए वह सब उससे बेहद प्यार करते थे। याकूबद तोता ने शहजादी जैनब से पहले ही कहा था कि आपके बेटे का नाम मैं खुद रखूंगा। फिर जब वह दिन आ ही गया तो याकू तोते ने उस बच्चे का नाम शहजादा फरिस रखा और इसी तरह सब खुशी-खुशी जिंदगी बसर करने लगे। अगर आपको यह वीडियो मददगार लगी हो तो बराहे करम वीडियो को लाइक करें और अगर आप पहली बार हमारे चैनल पर आए हैं तो चैनल को सब्सक्राइब जरूर करें। आपका एक सब्सक्राइब और एक लाइक हमारे लिए बहुत बड़ी सपोर्ट होता है। और हमें मजीद ऐसी मालूमाती वीडियोस बनाने का हौसला देता है। अगर आपको किसी मसले में मदद चाहिए हो या कोई सवाल हो तो कमेंट्स में जरूर बताएं। हम पूरी कोशिश करेंगे आपकी रहनुमाई करने की। मिलते हैं अगली वीडियो में। अल्लाह हाफिज।

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Shahzadi, Shahzada Or Bolne Wala Tota Ka Anokha Qissa || ...